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  • रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी से बढ़ा तनाव, PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

    रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी से बढ़ा तनाव, PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट क्षेत्र में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई कथित झड़प के बाद स्थिति अत्यधिक तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय संगठनों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा की गई गोलीबारी में कई लोगों की जान गई, जबकि बड़ी संख्या में नागरिक अब भी प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं। घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में असंतोष और विरोध का माहौल गहरा गया है।

    स्थानीय दावों के अनुसार, मंगलवार तड़के बड़ी संख्या में नागरिक अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। हालांकि, इस संबंध में स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन को दबाने के लिए सुरक्षा बल लगातार बल प्रयोग कर रहे हैं। संगठन का दावा है कि 5 जून से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक लगभग 70 लोगों की मौत हो चुकी है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन संगठन का कहना है कि हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और नागरिकों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।

    गोलीबारी की खबरों के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। बड़ी संख्या में लोग चिनार चौक और आसपास के क्षेत्रों में एकत्र रहे तथा आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक विरोध जारी रहेगा। क्षेत्र में लगातार लोगों की आवाजाही और जुटान के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

    इस घटनाक्रम पर पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता डॉ. शहबाज गिल ने सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बल प्रयोग से हालात सामान्य होने के बजाय और जटिल हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने मृतकों की संख्या और घटनाओं की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    शहबाज गिल ने यह भी दावा किया कि गोलीबारी में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग युवा थे। उन्होंने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके अनुसार, ऐसे घटनाक्रमों से स्थानीय लोगों में असुरक्षा और असंतोष की भावना बढ़ रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और आधिकारिक पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    इस बीच, कश्मीर एक्शन कमेटी के नेताओं ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि वह आने वाले दिनों में अपनी अगली रणनीति सार्वजनिक करेगा। प्रदर्शन से जुड़े प्रतिनिधियों ने यह भी संकेत दिया है कि विभिन्न स्थानों पर विरोध कार्यक्रम जारी रखे जाएंगे। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रावलकोट की मौजूदा स्थिति पर स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। घटनाओं के संबंध में अलग-अलग पक्षों की ओर से विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर आधिकारिक जानकारी और आगे आने वाली जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। फिलहाल, क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

  • ईरान-सऊदी गुप्त समझौते में पाकिस्तान की भूमिका का दावा, असीम मुनीर पर तेल कारोबार से लाभ लेने के आरोप

    ईरान-सऊदी गुप्त समझौते में पाकिस्तान की भूमिका का दावा, असीम मुनीर पर तेल कारोबार से लाभ लेने के आरोप


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट ने नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने ईरान और सऊदी अरब के बीच एक कथित गुप्त समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के समानांतर ईरान से पाकिस्तान तक तेल पहुंचाने वाली एक संयुक्त व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों को आर्थिक लाभ हुआ। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा ईरान में से किसी भी देश ने इस संबंध में आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित समझौता उस समय हुआ जब ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच सैन्य तनाव अपने शुरुआती चरण में था। दावा किया गया है कि पाकिस्तान की पहल पर सऊदी अरब और ईरान के बीच ऐसा समझौता तैयार हुआ, जिसके बाद सऊदी अरब पर ईरान की ओर से होने वाले हमलों में कमी आई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस प्रक्रिया के दौरान ईरान से पाकिस्तान तक तेल पहुंचाने वाले एक संयुक्त तेल परिवहन नेटवर्क को जारी रखने पर सहमति बनी, जिससे जुड़े पक्षों को आर्थिक लाभ मिला।

    रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया कि इस कथित तेल परिवहन व्यवस्था का संचालन ऐसे समय में जारी रहा, जब ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और दबाव बढ़ा हुआ था। दावा किया गया कि यह नेटवर्क ईरान के तेल निर्यात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने में सहायक बना। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में किसी आधिकारिक जांच या सार्वजनिक दस्तावेज का उल्लेख सामने नहीं आया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि समझौते के बाद सऊदी अरब पर हमलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। बाद में एक मिसाइल हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर ईरानी पक्ष को चेतावनी दिए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि इन घटनाओं की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और संबंधित देशों ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा सहयोग मौजूद है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में ईरान के साथ भी संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश की है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की मध्यस्थता हुई भी हो, तो उसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना बताया जा सकता है। हालांकि रिपोर्ट में लगाए गए आर्थिक लाभ और तेल कारोबार से जुड़े आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    कुछ कूटनीतिक विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि इस तरह के अनौपचारिक समझौते वास्तव में हुए हों, तो वे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं आलोचकों का कहना है कि ऐसे समझौते भविष्य में अन्य देशों के लिए भी जटिल कूटनीतिक परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं।

    फिलहाल यह मामला मीडिया रिपोर्टों और कूटनीतिक चर्चाओं तक सीमित है। पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही इन दावों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना आवश्यक माना जा रहा है।

  • सऊदी टैंकरों पर हमले के बाद पाकिस्तान की सिर्फ बयानबाजी, रक्षा समझौते के बावजूद किया किनारा

    सऊदी टैंकरों पर हमले के बाद पाकिस्तान की सिर्फ बयानबाजी, रक्षा समझौते के बावजूद किया किनारा


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (PM Shehbaz Sharif) के सामने जब सऊदी अरब (Saudi Arabia) को दिया वादा निभाने की जिम्मेदारी आई तो उन्होंने अपना असली रंग दिखा दिया. लाल सागर में जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकर पर हमला किया तो पाकिस्तान ने जी भरकर इसकी आलोचना की. शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस (Crown Prince) को फोन लगाकर उनके साथ सॉलिडरिटी जताई, सऊदी को बिरादर मुल्क बताया, हूतियों की निंदा की. लेकिन असल एक्शन के नाम पर पाकिस्तान के पास जुबानी जमा खर्च करने के अलावा कुछ नहीं था.

    सवाल है कि शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के साथ कौन सा कमिटमेंट किया है. बताना चाहेंगे कि सऊदी अरब और पाकिस्तान ने डिफेंस डील किया है. इसके तहत दोनों देशों ने कहा है कि एक के ऊपर हमला दूसरे पर भी अटैक माना जाएगा और दोनों देश मिलकर इस हमले का जवाब देंगे.

    यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार तड़के लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया. सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के मुताबिक पाकिस्तान को ऐसे किसी सिचुएशन में सऊदी अरब की तरफ से हूती विद्रोहियों को जवाब देकर अपना सिक्योरिटी कमिटमेंट पूरा करना चाहिए था.

    कहां गया सऊदी-पाकिस्तान का डिफेंस डील
    लेकिन इस दौरान पाकिस्तान खामोश रहा. यहां अहम यह है कि पाकिस्तान ईरान का भी हितैषी होने का गेम खेल रहा है. ईरान के गृह मंत्री ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा खत्म किया है. इस दौरान ईरान-पाकिस्तान ने दोस्ती को नई ऊंचाई पर ले जाने का वादा किया.

    पाकिस्तान के सामने समस्या यह है कि हूती विद्रोही ईरान के इशारे पर ही चलते हैं. अगर पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ कुछ करता है तो वह ईरान की दुश्मनी मोल लेगा. जिसके साथ उसकी लंबी सीमा है. लेकिन अगर पाकिस्तान लाल सागर में सऊदी अरब के टैंकरों पर हमला कर रहे हूती विद्रोहियों पर कोई एक्शन नहीं लेता है तो इससे सऊदी अरब को उसकी असलियत समझ आ जाएगी.

    ऐसी हरकतें मंज़ूर नहीं
    फिलहाल इस बार जब हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो टैंकरों को ब्लास्ट कर आग के हवाले कर दिया तो पाकिस्तान ने क्राउन प्रिंस सलमान को फोन कर एक बार फिर से बड़े बड़े वादे किए.

    पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी टैंकरों पर हूतियों के हमले की निंदा की है और उन्हें चेतावनी दी है. शहबाज ने एक्स पर लिखा, “आज सुबह मैंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री, महामहिम प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद से टेलीफ़ोन पर बातचीत की. मैंने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हूतियों के हमलों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की. ऐसी हरकतें मंज़ूर नहीं हैं; ये अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करती हैं, समुद्री आवाजाही की आज़ादी के लिए खतरा हैं और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा को कमज़ोर करती हैं.”

    पाक विदेश मंत्रालय की चेतावनी
    बाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हूती विद्रोहियों को चेतावनी देकर जरूर भड़ास निकाली. हालांकि पाकिस्तान की ये चेतावनी उसके जहाजों पर हमलों की आशंका को लेकर थी. पाकिस्तान ने कहा कि लाल सागर में उसके झंडे वाले जहाजों या समुद्री हितों के खिलाफ किसी भी हमले का तुरंत जवाब दिया जाएगा. उसने चेतावनी दी कि ऐसी हरकतों को उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “गंभीर खतरा” माना जाएगा.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों या उसके कमर्शियल जहाजों पर किसी भी हमले को “पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा और उसका तुरंत जवाब दिया जाएगा.”

    हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है. उन्होंने कहा था कि वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी जहाजों को रोकेंगे. यह कदम उन्होंने यमन में बंदरगाहों और हवाई अड्डों की रियाद द्वारा की गई नाकेबंदी के जवाब में उठाया है.

  • CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार

    CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर पहली बार पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से CJP आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह भारत का घरेलू विषय है और पाकिस्तान ऐसे मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करता।

    पांचवें सप्ताह में पहुंचा आंदोलन
    CJP का प्रदर्शन अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

    ‘संसद चलो’ मार्च के बाद बढ़ा तनाव
    20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया।

    पेपर लीक मामलों पर सरकार का सख्त रुख
    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    सरकार ने फिर दिया बातचीत का प्रस्ताव
    केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी दोहराई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार सरकार चार बार CJP को बातचीत का प्रस्ताव दे चुकी है और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, CJP ने नड्डा के आवास या कार्यालय में बैठक करने से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग रखी है।

    सोनम वांगचुक ने समाप्त किया अनशन
    इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 25 दिन से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

  • CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    नई दिल्ली । भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान के मीडिया में लगातार कवरेज देखने को मिल रही है। इस बीच पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने अपने देश के मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की घटनाओं को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रही गतिविधियों और वहां के हालात को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान के मीडिया कवरेज को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि समाचार माध्यमों का दायित्व केवल पड़ोसी देशों की घटनाओं को दिखाना नहीं, बल्कि अपने देश और उससे जुड़े क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी समान प्राथमिकता देना है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई महीनों से सामने आ रहे घटनाक्रमों और स्थानीय लोगों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मीडिया में अपेक्षित स्थान क्यों नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार संतुलित पत्रकारिता के लिए सभी महत्वपूर्ण विषयों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, पाकिस्तान के कई प्रमुख समाचार माध्यमों ने भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों को विस्तार से प्रकाशित और प्रसारित किया है। विभिन्न रिपोर्टों में प्रदर्शन, विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल का उल्लेख किया गया है। कई विश्लेषणों में यह भी कहा गया कि छात्र आंदोलन ने देश की राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है और विभिन्न दलों की सक्रियता बढ़ी है।

    कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी भारत में जारी विरोध प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इन रिपोर्टों में प्रदर्शन, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और प्रशासनिक कदमों का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर देशभर में बहस तेज हुई है। हालांकि अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने घटनाक्रम को अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

    इधर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न दावे और रिपोर्ट सामने आती रही हैं। स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जनभावनाओं को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी राय रखते रहे हैं। इसी संदर्भ में कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि यदि मीडिया अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को विस्तार से दिखा सकता है तो उसे अपने क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी समान गंभीरता के साथ सामने लाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका निष्पक्ष और संतुलित सूचना उपलब्ध कराने की होती है। जब किसी एक विषय को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और दूसरे महत्वपूर्ण विषय अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं, तो मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि पाकिस्तान में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है।

    भारत में जारी छात्र प्रदर्शनों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निगरानी की जा रही है और विभिन्न विदेशी मीडिया संस्थान अपने-अपने दृष्टिकोण से घटनाक्रम का विश्लेषण कर रहे हैं। वहीं पाकिस्तान के भीतर मीडिया कवरेज को लेकर उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि समाचार प्रस्तुति और संपादकीय प्राथमिकताओं पर बहस केवल एक देश तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इन विषयों को किस प्रकार प्रस्तुत करते हैं तथा दोनों देशों से जुड़े घटनाक्रमों को किस संतुलन के साथ स्थान दिया जाता है।

  • दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..

    दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों पाकिस्तान के कराची शहर से जुड़ा एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में बुनियादी मेडिकल किट से लैस साइकिल एंबुलेंस व्यवस्था को दिखाया गया है, जिसे लेकर इंटरनेट पर विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आधुनिक दौर में जहां विश्व स्तर पर एयर एंबुलेंस और ड्रोन आधारित आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है, वहीं इस तरह की पहल को लेकर कई यूजर्स पाकिस्तान की वर्तमान स्वास्थ्य प्रणाली और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो के पीछे का वास्तविक संदर्भ और उद्देश्य काफी अलग है।

    यह वायरल सामग्री कोई नई नीति या हालिया लॉन्च नहीं है, बल्कि मई 2025 में पाकिस्तान की आपातकालीन सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ द्वारा शुरू की गई एक पुरानी प्रायोगिक परियोजना का हिस्सा है। कराची जैसे घने और अत्यधिक आबादी वाले महानगर में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अत्यंत संकरी गलियां हैं और अक्सर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे इलाकों में आपात स्थिति के दौरान पारंपरिक बड़े एंबुलेंस वाहनों का समय पर पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी भौगोलिक और यातायात संबंधी बाधा को दूर करने के लिए इस वैकल्पिक त्वरित प्रतिक्रिया मॉडल को तैयार किया गया था।

    तकनीकी रूप से यह साइकिल केवल एक सामान्य सवारी साधन नहीं है, बल्कि इसे आपातकालीन प्राथमिक उपचार के अनुकूल विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइजर, ब्लड शुगर जांचने के उपकरण, प्राथमिक चिकित्सा किट और अन्य जरूरी जीवनरक्षक दवाएं रखी जाती हैं। प्रशिक्षित स्वयंसेवक, जिनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित महिला कार्यकर्ता भी शामिल हैं, भीड़भाड़ वाले मार्गों से आसानी से निकलकर मरीज तक त्वरित पहुंच बनाते हैं। इनका मुख्य कार्य मुख्य एंबुलेंस के आगमन तक मरीज को शुरुआती महत्वपूर्ण मिनटों में प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर स्थिति को स्थिर बनाए रखना है।

    वैश्विक स्तर पर भी देखें तो कई विकसित और विकासशील देशों के पुराने शहरों तथा सघन शहरी क्षेत्रों में साइकिल या मोटरसाइकिल आधारित प्रथम प्रतिक्रिया टीमों का उपयोग एक स्थापित मानक प्रक्रिया के रूप में किया जाता है। कराची की यह व्यवस्था सामान्य एंबुलेंस सेवा का विकल्प न होकर, केवल एक सहायक आपातकालीन प्रणाली है। सोशल मीडिया पर बिना पूरे संदर्भ के शुरू हुई इस बहस के बाद अब कई विश्लेषकों का मानना है कि शहरी यातायात की जटिलताओं को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जान बचाने के लिए उठाए गए व्यावहारिक कदमों को केवल व्यंग्य के दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है।

  • भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान का नया NOTAM जारी, भारतीय विमान और सैन्य उड़ानों पर 23 अगस्त तक एयरस्पेस बंद

    भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान का नया NOTAM जारी, भारतीय विमान और सैन्य उड़ानों पर 23 अगस्त तक एयरस्पेस बंद

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक और सुरक्षा तनाव के बीच पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर लागू प्रतिबंध की अवधि एक बार फिर बढ़ा दी है। नए आदेश के अनुसार भारतीय पंजीकरण वाले सभी विमान, भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित या लीज पर लिए गए विमान तथा सैन्य उड़ानें अब 23 अगस्त 2026 की रात 11:59 बजे तक पाकिस्तान के एयरस्पेस का उपयोग नहीं कर सकेंगी। पहले यह प्रतिबंध 24 जुलाई को समाप्त होने वाला था, लेकिन अवधि खत्म होने से पहले ही इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

    यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच विमानन संबंध सामान्य नहीं हो सके हैं। सुरक्षा कारणों से लागू यह प्रतिबंध लगातार बढ़ाया जा रहा है और पिछले कई महीनों से इसकी अवधि समय-समय पर आगे बढ़ाई जाती रही है। नए नोटिस के जारी होने के बाद भारतीय विमानन कंपनियों को अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में पहले की तरह वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना होगा।

    भारत और पाकिस्तान के बीच विमानन प्रतिबंधों की शुरुआत अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तीखा तनाव देखने को मिला। इसके बाद सुरक्षा और कूटनीतिक कदमों के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की एयरलाइंस और सैन्य विमानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब से यह व्यवस्था लगातार प्रभावी बनी हुई है।

    पाकिस्तान की ओर से जारी नवीनतम NOTAM में स्पष्ट किया गया है कि भारत में पंजीकृत किसी भी विमान को उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसमें वे विमान भी शामिल हैं जो भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित या लीज पर लिए गए हैं। साथ ही सैन्य उड़ानों पर भी यह प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सीधी हवाई आवाजाही पूरी तरह प्रभावित बनी हुई है।

    इस प्रतिबंध का सबसे अधिक असर उन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ता है जिन्हें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता था। अब इन उड़ानों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है, जिससे उड़ान अवधि बढ़ने के साथ ईंधन की खपत और परिचालन लागत भी बढ़ जाती है। कई मामलों में यात्रियों को अधिक यात्रा समय और उड़ानों के संचालन में अतिरिक्त बदलाव का सामना करना पड़ता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बीच सुरक्षा और कूटनीतिक परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव नहीं आता, तब तक इस प्रकार के प्रतिबंध जारी रह सकते हैं। विमानन क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होने के लिए दोनों देशों के बीच विश्वास और संवाद की प्रक्रिया का आगे बढ़ना आवश्यक माना जा रहा है। फिलहाल 23 अगस्त तक भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद रहेगा और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन मौजूदा वैकल्पिक मार्गों के अनुसार ही जारी रहने की संभावना है।

  • Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग

    Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की केंद्रीय खुफिया एजेंसियों (Intelligence agencies) के ताजा आकलन में पाकिस्तान (Pakistan) स्थित आतंकी संगठनों (Terrorist organizations) की रणनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। खुफिया इनपुट के अनुसार, आतंकी संगठन अब महिलाओं की सुनियोजित तरीके से भर्ती के लिए गुप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं। इन प्रशिक्षण मॉड्यूल का उद्देश्य महिलाओं को आतंकवादी नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए तैयार करना है।

    ये प्रशिक्षण कार्यक्रम 2 से 4 सप्ताह तक चलते हैं और इन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा जीवन कौशल सिखाने के नाम पर आयोजित किया जाता है। हालांकि, वास्तविक मकसद महिलाओं को आतंकी संगठनों के लिए तैयार करना है। एजेंसियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के लिए बैच बनाए जाते हैं। कुछ चुनिंदा मदरसों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाता है।

    इन स्थानों पर आने वाली महिला परिजनों के जरिए भर्ती और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रचार ऐसे किया जाता है कि यह मजबूत आस्था और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए है। इसके जरिए धार्मिक प्रतिबद्धता व व्यक्तिगत विकास को प्रमुख उद्देश्य बताकर महिलाओं को आकर्षित किया जाता है।


    ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग

    प्रशिक्षण में महिलाओं को विभिन्न भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं बैक-एंड लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल सपोर्ट, तकनीकी सहायता, ड्रोन संचालन, खुफिया जानकारी जुटाना, हनी-ट्रैप के जरिए लक्ष्यों को फंसाना और समझौता कराने जैसी गतिविधियां। यह व्यवस्था आतंकियों को जमीनी स्तर पर मजबूत बैक-एंड सपोर्ट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।


    कई ठिकाने चिन्हित

    खुफिया एजेंसियों ने बहावलपुर, फैसलाबाद सहित आधा दर्जन से अधिक ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये इलाके पिछले दो दशकों से विभिन्न आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक केंद्र माने जाते रहे हैं।


    ऑपरेशन सिंदूर के बाद रणनीति में बदलाव

    खुफिया अधिकारियों का कहना है ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों की भर्ती रणनीति में यह बड़ा बदलाव देखा गया है। महिलाओं की पहचान उनकी क्षमता और भूमिका के आधार पर की जा रही है और उन्हें विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

  • PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी

    PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी


    इस्लामाबाद।
    बलूचिस्तान (Balochistan) की प्राकृतिक गैस, कोयला, खनिज और रेयर अर्थ पर निर्भर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) इस वक्त अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जिस इलाके को पाकिस्तान लंबे समय से अपना आर्थिक इंजन मानता रहा, उसी बलूचिस्तान ने अब न सिर्फ आजादी का ऐलान (Declaration of Independence) कर दिया है, बल्कि अपनी संसाधनों की आपूर्ति भी पूरी तरह रोक दी है। दरअसल, बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को स्वतंत्रता की घोषणा के साथ ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कट गई है। क्षेत्र में लगे पूर्ण शटडाउन और ट्रांसपोर्ट ब्लॉकेड ने पंजाब की औद्योगिक इकाइयों को घुटनों पर ला दिया है। अगर यही हालात रहे तो संभव है कि पाकिस्तान कटोरा लेकर घूमने के लायक भी नहीं बचेगा।

    पंजाब के प्रमुख बिजनेस लीडर्स ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबा खिंचा तो इसका असर किसी सक्रिय युद्ध से भी कहीं ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है। पंजाब चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और अन्य प्रमुख बिजनेस संगठनों के प्रतिनिधियों ने लाहौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने बलूचिस्तान पर निर्भरता को लेकर गंभीर चिंता जताई। बिजनेस लीडर्स के अनुसार, पाकिस्तान की अधिकांश भारी उद्योगों की ऊर्जा आपूर्ति, कच्चा माल और खनिज बलूचिस्तान के रास्ते ही आते हैं। शटडाउन के कारण यह पूरी सप्लाई चेन थम गई है।


    LNG और कोयला आपूर्ति पूरी तरह बंद

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्योगपतियों ने विस्तार से बताया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कोयला मुख्य रूप से बलूचिस्तान के बंदरगाहों और खदानों से पंजाब भेजा जाता है। अब दोनों क्षेत्रों के बीच सभी तरह के एक्सपोर्ट और ट्रांसपोर्ट रुक गए हैं। एक प्रमुख इंडस्ट्री लीडर ने कहा कि हमारी फैक्टरियां अब ईंधन के बिना चल नहीं सकतीं। कई प्लांट्स पहले ही बंद हो चुके हैं या उत्पादन आधा कर दिया गया है। अगर यह स्थिति 10-15 दिन और चली तो पूरे पंजाब में बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि लंबे समय तक रुकावट बनी रही तो न सिर्फ औद्योगिक उत्पादन ठप होगा, बल्कि बेरोजगारी बढ़ने से सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।


    खनिज और कच्चे माल की कमी

    बिजनेस प्रतिनिधियों ने बताया कि डुकी, चागई और अन्य खनिज क्षेत्रों से कोयला, क्रोमाइट, कॉपर और अन्य जरूरी इंडस्ट्रियल इनपुट्स की आपूर्ति रोक दी गई है। ट्रांसपोटर्स हड़ताल पर हैं क्योंकि राज्य उच्च मार्गों पर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं दी जा रही। नतीजतन, फैक्टरियों तक कच्चा माल नहीं पहुंच पा रहा। टेक्सटाइल, सीमेंट, फर्टिलाइजर, स्टील और पावर सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि कई यूनिट्स में उत्पादन 40-60 प्रतिशत तक कम हो गया है।


    बलूचिस्तान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़

    बलूच नेता मीर यार बलूच द्वारा शेयर किए गए वीडियो और उनके बयानों में कहा गया है कि बलूचिस्तान सोना, प्राकृतिक गैस, तांबा, क्रोमाइट और रेयर अर्थ का विशाल भंडार है। अगर बलूचिस्तान इन संसाधनों पर अपना पूर्ण नियंत्रण वापस ले लेता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा। मीर यार बलूच ने कहा कि हम जिसे ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ कह रहे हैं, वहां स्थिति धीरे-धीरे बलूच मुक्ति सेनाओं के नियंत्रण में आ रही है। हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का फायदा अपने लोगों को देना चाहते हैं, न कि पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार को।

    दूसरी ओर एक आर्थिक विशेषज्ञ ने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान की जीडीपी में सीधे-सीधे योगदान नहीं देता दिखता, लेकिन उसकी सप्लाई चेन पूरे देश की रीढ़ है। इन संसाधनों के बिना पाकिस्तानी सरकार दिवालिया होकर टूट जाएगी। यही कारण है कि पंजाब के बिजनेसमैनों ने सरकार से तुरंत बातचीत शुरू करने और बलूचिस्तान में शांति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह अब सिर्फ सुरक्षा मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का संकट बन चुका है।

  • भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश

    भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें मांग की गई है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता या कानूनी संरक्षक की अनुमति के बिना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और चलाने की इजाजत नहीं दी जाए।

    सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक सारा अहमद ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण और बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को देखते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की मांग उठाई।

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
    सारा अहमद पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो की अध्यक्ष भी हैं। उनके द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव पाकिस्तान की किसी प्रांतीय या संघीय विधायिका में अपनी तरह का पहला प्रस्ताव बताया जा रहा है।

    प्रस्ताव में संघीय सरकार से बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

    प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास की सुरक्षा करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल से बच्चे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, अनुचित सामग्री, मानसिक तनाव और डिजिटल लत जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐज वेरिफिकेशन की मांग
    प्रस्ताव में पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) से देश में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रभावी उम्र सत्यापन प्रणाली (Age Verification System) लागू करने की मांग भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित नियमों का सही तरीके से पालन हो सके।

    दुनिया के कई देश भी बना रहे हैं सख्त नियम
    यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ऑनलाइन गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, साइबर उत्पीड़न और हानिकारक कंटेंट के संपर्क के बीच संबंधों को देखते हुए सरकारें नियमन बढ़ा रही हैं।

    कई देशों में लागू हो चुके हैं आयु आधारित नियम
    ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों समेत दुनिया के कई देशों ने बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध लागू किए हैं। वहीं कुछ देश अधिक सख्त आयु सत्यापन व्यवस्था और ऑनलाइन बाल सुरक्षा कानूनों पर काम कर रहे हैं।