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  • ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप

    ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप



    नई दिल्ली। चीन की ओर से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मदद देने के दावे ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। चीनी सरकारी मीडिया के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा जा रहा है कि इंजीनियरों ने पाकिस्तान को तकनीकी सपोर्ट और रियल-टाइम इनपुट दिए थे। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर पूरी तरह स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और चीनी टीवी इंटरव्यू में दावा किया गया है कि चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक इंजीनियर ने पाकिस्तान में तकनीकी सहायता की बात स्वीकार की है। कहा गया कि टीम का काम J-10CE जैसे लड़ाकू विमानों और उनके सिस्टम को ऑपरेशनल रूप से तैयार रखना था। यह भी दावा है कि पाकिस्तान ने चीन में बने J-10CE फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया, जिन्हें AVIC की सहयोगी कंपनियां बनाती हैं। इसी दौरान रियल-टाइम डेटा सपोर्ट और सैटेलाइट इनपुट देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

    भारत की ओर से पहले ही यह कहा जा चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर मदद दी थी। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात का जिक्र किया था कि संघर्ष के दौरान चीन ने अपने नेटवर्क और सिस्टम के जरिए क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखी और पाकिस्तान को जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं चीन ने पहले इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन अब आए इंटरव्यू और रिपोर्ट्स ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही काफी गहरा है और J-10CE जैसे एडवांस फाइटर जेट्स इसकी बड़ी मिसाल हैं। पाकिस्तान पहले से ही चीन से बड़े पैमाने पर हथियार आयात करता रहा है और हाल के वर्षों में यह निर्भरता और बढ़ी है। इसी बीच चीन द्वारा नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 को पाकिस्तान को देने की चर्चा ने भी क्षेत्रीय सैन्य समीकरणों पर बहस तेज कर दी है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के दौरान चीन ने अपने तकनीकी और सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कर स्थिति पर नजर रखी, जिसे कुछ विशेषज्ञ “लाइव लैब” रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि इन सभी दावों पर अभी तक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है।

  • बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    इस्लामाबाद। बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में पांच और नागरिकों का अपहरण कर लिया है। इन घटनाओं ने प्रांत में पहले से जारी अस्थिरता और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

    मानवाधिकार संगठन ‘पांक’, जो बलूच नेशनल मूवमेंट ह्यूमन राइट्स डिपार्टमेंट (PANK) से जुड़ा है, ने बताया कि दो शिक्षकों 45 वर्षीय अब्दुल हमीद और 36 वर्षीय नासिर अली को 5 मई को पंजगुर जिले के पारूम क्षेत्र से फ्रंटियर कोर के कर्मियों द्वारा उठाया गया। संगठन ने कहा कि शिक्षकों को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र में मनमानी हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघनों के बढ़ते पैटर्न को दर्शाता है।

    इसके अलावा 27 वर्षीय अल्ताफ हुसैन बलूच को 2 मई को हब चौकी से आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) के कर्मियों द्वारा कथित रूप से उठाया गया। उसी दिन एक और घटना में 40 वर्षीय जान खान और उनके 20 वर्षीय बेटे अब्दुल सत्तार को क्वेटा में उनके घर से कथित रूप से अगवा किया गया।

    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।
    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।

    क्वेटा में विरोध प्रदर्शन जारी
    इधर, प्रांतीय राजधानी क्वेटा में बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेतृत्व में प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्र बोलन मेडिकल कॉलेज के बाहर धरना दे रहे हैं, जो अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी खदीजा बलूच की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें 21 अप्रैल को बीएमसी महिला छात्रावास से सुरक्षा बलों द्वारा उठाए जाने का आरोप है।

    बीवाईसी के अनुसार, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों और परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और कथित गैर-न्यायिक हत्याओं के मामलों को लेकर तनाव बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र में सामाजिक ताने-बाने को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

  • पाकिस्तान में फिर मंडराया पोलियो का खतरा, पांच नए मामलों से मचा हड़कंप; WHO समेत दुनिया अलर्ट

    पाकिस्तान में फिर मंडराया पोलियो का खतरा, पांच नए मामलों से मचा हड़कंप; WHO समेत दुनिया अलर्ट



    नई दिल्ली। पाकिस्तान में पोलियो वायरस एक बार फिर गंभीर चिंता का कारण बनता जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कराची समेत कई इलाकों से लिए गए पांच नए नमूनों में पोलियो वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सिंध में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कम संक्रमण वाले मौसम में भी वायरस का सक्रिय रहना बेहद चिंताजनक संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण के लगातार फैलने का संकेत देता है और इसे रोकने के लिए तुरंत सख्त कदम उठाने होंगे।

    WHO और यूनिसेफ भी अलर्ट
    बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ़, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधियों ने कहा कि अफ्रीका में सफल रही रणनीतियों को अब पाकिस्तान में भी लागू किया जा रहा है ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके।

    इस साल सामने आए कई मामले
    रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू और उत्तरी वजीरिस्तान से पोलियो के नए मामले सामने आए थे। इस साल अब तक पाकिस्तान में पोलियो के कई मामलों की पुष्टि हो चुकी है।विशेषज्ञों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान दुनिया के ऐसे देश हैं जहां अब भी पोलियो वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।

    टीकाकरण अभियान के सामने बड़ी चुनौती
    पोलियो उन्मूलन अभियान को सुरक्षा और जागरूकता दोनों स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में टीकाकरण टीमों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इसके अलावा टीकों को लेकर फैली गलत जानकारी और अभिभावकों द्वारा पोलियो ड्रॉप्स से इनकार भी बड़ी समस्या बन चुका है। केवल कराची में ही हजारों परिवारों ने बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने से मना कर दिया है, जिससे वायरस के खतरे को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

  • भारतीय नाविकों को बचाने में भी पाकिस्तान ने खेला ‘कश्मीर कार्ड’, समंदर में राहत मिशन के पीछे दिखी नई रणनीति

    भारतीय नाविकों को बचाने में भी पाकिस्तान ने खेला ‘कश्मीर कार्ड’, समंदर में राहत मिशन के पीछे दिखी नई रणनीति



    नई दिल्ली। पाकिस्तान एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछालने की कोशिशों को लेकर चर्चा में है। अरब सागर में फंसे एक भारतीय जहाज के बचाव अभियान के दौरान पाकिस्तान ने जिस जहाज को भेजा, उसका नाम ‘PMSS Kashmir’ था। इसे लेकर अब पाकिस्तान की रणनीति और प्रोपेगेंडा मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय मालवाहक जहाज ‘MV गौतम’ ओमान से भारत लौटते समय तकनीकी खराबी के कारण अरब सागर में फंस गया था। इसके बाद मुंबई स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र ने पाकिस्तान से सहायता मांगी। जवाब में पाकिस्तानी नौसेना ने ‘PMSS कश्मीर’ नाम के जहाज को राहत मिशन के लिए रवाना किया।

    बचाव अभियान या कूटनीतिक संदेश?
    पाकिस्तान ने जहाज के चालक दल को भोजन, मेडिकल सहायता और जरूरी मदद पहुंचाई। जहाज में छह भारतीय और एक इंडोनेशियाई नागरिक सवार थे। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस जहाज के नाम को लेकर हुई, जिसे पाकिस्तान ने जानबूझकर कश्मीर नाम दिया है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान मानवीय मदद के साथ-साथ कश्मीर शब्द को अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक चर्चा में बनाए रखने की रणनीति पर काम करता है। पाकिस्तान पहले भी अपने कई अभियानों और मंचों पर कश्मीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है।

    पहले भी सामने आ चुका है मामला
    रिपोर्ट्स के अनुसार फरवरी 2024 में भी इसी ‘PMSS Kashmir’ जहाज ने अरब सागर में फंसे भारतीय नागरिकों को बचाया था। पाकिस्तान ने उस समय भी इसे मानवीय मिशन के साथ अपने राजनीतिक संदेश से जोड़कर पेश किया था।



    सोशल मीडिया और नैरेटिव वॉर
    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय मंचों और प्रचार अभियानों के जरिए कश्मीर मुद्दे को वैश्विक स्तर पर जिंदा रखने की कोशिश करता रहा है। यही वजह है कि समुद्री बचाव जैसे मानवीय अभियानों में भी प्रतीकात्मक संदेश देने की रणनीति अपनाई जाती है।

    हालांकि भारत की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन रणनीतिक हलकों में इसे पाकिस्तान की “नैरेटिव राजनीति” के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

  • भारत से दोस्ती, पाकिस्तान से नजदीकी! जानिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान की नई ‘बैलेंस’ रणनीति

    भारत से दोस्ती, पाकिस्तान से नजदीकी! जानिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान की नई ‘बैलेंस’ रणनीति



    नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की विदेश नीति इन दिनों चर्चा में है। बांग्लादेश की नई सरकार एक तरफ India के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ भी नजदीकियां बनाए रखना चाहती है। अमेरिकी भू-राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने इसे “बैलेंसिंग स्ट्रेटेजी” बताया है।

    विश्लेषकों के मुताबिक बांग्लादेश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध बेहद जरूरी हैं। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत के साथ मजबूत व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते ढाका के लिए आर्थिक फायदे ला सकते हैं। साथ ही सीमा सुरक्षा, बिजली साझेदारी और साझा नदियों जैसे मुद्दों पर सहयोग भी बांग्लादेश के हित में माना जा रहा है।

    पाकिस्तान से दूरी भी नहीं चाहता ढाका
    रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ भी रिश्तों में गर्मजोशी बनाए रखना चाहता है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच वीजा नियमों में ढील और यात्रा संपर्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई संघ यानी सार्क को मजबूत करने, “ग्लोबल साउथ” के साथ जुड़ाव बढ़ाने और तुर्की जैसी मध्यम ताकतों के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर ढाका और इस्लामाबाद की सोच काफी हद तक मिलती है।

    भारत विरोधी भावना का भी असर
    विश्लेषक माइकल कुलेगमैन का कहना है कि बांग्लादेश की राजनीति में भारत विरोधी भावना रखने वाला एक बड़ा वर्ग मौजूद है। ऐसे में पाकिस्तान के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाए रखना घरेलू राजनीति में भी तारिक रहमान सरकार को फायदा पहुंचा सकता है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर ढाका वास्तव में भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है तो पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना जोखिम भरा कदम हो सकता है।

    ‘दोनों से फायदा’ चाहती है बांग्लादेश सरकार
    रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश ऐसी विदेश नीति अपनाना चाहता है जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध बने रहें और किसी भी पक्ष को नाराज न किया जाए। ढाका का फोकस आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक फायदे हासिल करने पर है।विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में बांग्लादेश की यही संतुलन नीति दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा

    चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा



    नई दिल्ली। चीन एक बार फिर पाकिस्तान के जरिए भारत के खिलाफ अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन पाकिस्तान को अपना अत्याधुनिक जे-35एई स्टील्थ फाइटर जेट देने की तैयारी कर रहा है, जिसे अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II का मुकाबला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह फाइटर जेट भारत के एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर S-400 Triumf के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी हलचल
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें Noor Khan Airbase का नाम भी शामिल रहा। भारतीय लड़ाकू विमानों और ब्रह्मोस मिसाइलों की क्षमता ने पाकिस्तान और चीन दोनों को सतर्क कर दिया।

    क्या है चीन का जे-35एई?
    शेनयांग जे-35 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बच निकलने में सक्षम माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान 40 जे-35 खरीद सकता है। चीन इसे वैश्विक बाजार में अमेरिकी एफ-35 के विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील्थ तकनीक की वजह से यह विमान दुश्मन के वायु रक्षा सिस्टम के बेहद करीब पहुंचकर हमला कर सकता है। यही कारण है कि इसे भारत के एस-400 सिस्टम के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

    परमाणु सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान को जे-35 मिलता है तो वह लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में ज्यादा सक्षम हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीन पाकिस्तान को सैटेलाइट और निगरानी सहायता भी दे रहा है, जिससे भारतीय वायु रक्षा की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।

    हालांकि भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है। भारतीय सेना पहले से दसाल्ट राफेल, एस-400 और ब्रह्मोस जैसी आधुनिक प्रणालियों से लैस है और नए वायु रक्षा सिस्टम पर भी तेजी से काम चल रहा है।

    एशिया में बढ़ सकती है सैन्य प्रतिस्पर्धा
    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा पाकिस्तान को अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान देने से दक्षिण एशिया में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज

    पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और Afghanistan के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Pakistan ने साफ कर दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई सीजफायर लागू नहीं है, जिससे क्षेत्र में नई सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज हो गई है।

    इससे पहले मार्च में ईद से ठीक पहले दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वह सिर्फ सीमित अवधि के लिए था और अब खत्म हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीमा पर हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    दरअसल, हालिया टकराव की शुरुआत तब हुई जब Taliban से जुड़ी ताकतों ने सीमा पार हमले किए, जिन्हें पाकिस्तान ने अपने हवाई हमलों का जवाब बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक भारी सैन्य झड़पें हुईं, जिन्हें दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर के बावजूद अफगानिस्तान की तरफ से हमले जारी रहे, जिनमें दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप भी दोहरा रहा है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है, हालांकि काबुल और नई दिल्ली दोनों ही इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। पाकिस्तान के सख्त रुख के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में सीमा पर फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिलेगी।

  • Hangor Submarine Deal: चीन ने पाकिस्तान को सौंपी पहली हैंगोर पनडुब्बी, भारत का P75-I प्रोजेक्ट अभी भी अटका, समंदर में बढ़ी नौसेना की रेस

    Hangor Submarine Deal: चीन ने पाकिस्तान को सौंपी पहली हैंगोर पनडुब्बी, भारत का P75-I प्रोजेक्ट अभी भी अटका, समंदर में बढ़ी नौसेना की रेस



    नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान के बीच पनडुब्बी साझेदारी ने दक्षिण एशिया में समुद्री सुरक्षा संतुलन को फिर चर्चा में ला दिया है। चीन ने पाकिस्तान नौसेना को पहली हैंगोर-क्लास पनडुब्बी सौंप दी है। यह वही डील है जिसके तहत कुल 8 आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक AIP (Air Independent Propulsion) पनडुब्बियां पाकिस्तान को मिलनी हैं।यह पनडुब्बियां चीन की Type 039 (Yuan-class) तकनीक पर आधारित हैं, जिन्हें बेहतर स्टील्थ, लंबी अवधि तक पानी के भीतर रहने की क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों के लिए जाना जाता है।

    कैसे हो रहा है पूरा प्रोजेक्ट?
    इस पूरे प्रोजेक्ट की कीमत करीब 5 अरब डॉलर बताई जा रही है।
    4 पनडुब्बियां चीन के वुचांग शिपयार्ड में बन रही हैं
    4 पनडुब्बियां पाकिस्तान के कराची शिपयार्ड (KS&EW) में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत बनाई जाएंगी
    पहली पनडुब्बी की डिलीवरी चीन के सान्या नौसैनिक बेस पर की गई, जो PLA Navy का अहम अड्डा माना जाता है।

    पाकिस्तान को क्या फायदा मिलेगा?
    इस डील को पाकिस्तान के लिए “नौसेना में JF-17 मॉडल” की तरह देखा जा रहा है।
    यानी सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि निर्माण क्षमता भी मिल रही है
    पनडुब्बियों का आंशिक निर्माण
    मेंटेनेंस और रिपेयर क्षमता
    भविष्य में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
    हालांकि रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि असली तकनीकी नियंत्रण और हाई-एंड सिस्टम अभी भी चीन के पास ही रहेंगे।

    हैंगोर पनडुब्बी क्यों खास है?
    हैंगोर-क्लास पनडुब्बियां आधुनिक AIP तकनीक से लैस हैं, जिससे येलंबे समय तक पानी के नीचे रह सकती हैंआसानी से डिटेक्ट नहीं होतींटॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों से हमला कर सकती हैं

    कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इनमें रणनीतिक हथियारों की क्षमता हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
    इसी बीच भारत का महत्वाकांक्षी P75-I पनडुब्बी प्रोजेक्ट अभी तक फाइनल कॉन्ट्रैक्ट स्टेज में ही अटका हुआ है।इस प्रोजेक्ट के तहत भारत को 6 एडवांस AIP पनडुब्बियां बनानी हैं, जिन्हें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) और जर्मनी की कंपनी TKMS मिलकर बनाएंगे।

    लेकिन समस्या ये हैप्रोजेक्ट 20 साल से ज्यादा समय से चर्चा में हैटेक्नोलॉजी ट्रांसफर और शर्तों पर बातचीत लंबी खिंच रही हैफाइनल डील अभी तक पूरी नहीं हुईअगर सब कुछ तय भी हो जाए, तो पहली पनडुब्बी को सेवा में आने में 2032 या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है।

    भारत का मौजूदा सबमरीन बेड़ा
    भारतीय नौसेना के पास अभी लगभग 16–17 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें शामिल हैं
    किलो-क्लास (रूस)
    टाइप-209 (जर्मनी)
    स्कॉर्पीन/कलवरी क्लास (फ्रांस)
    लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि इनमें से कई पुरानी हो चुकी हैं और AIP तकनीक सीमित है, जिससे उनकी अंडरवॉटर स्टे क्षमता नई पीढ़ी की पनडुब्बियों से कम है।

    दक्षिण एशिया में अब नौसेना की दौड़ तेज हो गई है।एक तरफ पाकिस्तान चीन के सहयोग से तेजी से नई पनडुब्बियां शामिल कर रहा है, वहीं भारत अभी अपनी अगली पीढ़ी की पनडुब्बियों के लिए प्रक्रिया पूरी करने में जुटा है।विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दशक में समुद्री शक्ति ही रणनीतिक संतुलन तय करने में सबसे बड़ा रोल निभाएगी।

  • पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर

    पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर


    नई दिल्ली ।
    आतंकवाद को लेकर लंबे समय से आलोचना झेल रहे पाकिस्तान के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया के कुख्यात आतंकी संगठन अल कायदा ने पाकिस्तान की नेतृत्व व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए खुली चेतावनी दी है। संगठन ने खास तौर पर अफगानिस्तान के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के रुख की कड़ी आलोचना की है और तालिबान के समर्थन का ऐलान किया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल कायदा की केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जारी यह संदेश शाहदा न्यूज एजेंसी के माध्यम से उसके मीडिया विंग ‘अस-सहब’ द्वारा गुप्त प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस्लामाबाद और काबुल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

    अपने बयान में संगठन ने पाकिस्तान की सिविल-मिलिट्री व्यवस्था को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि वह अफगानिस्तान के हितों के खिलाफ काम कर रही है और पश्चिमी देशों के साथ गठजोड़ कर रही है। साथ ही, अल कायदा ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह अफगानिस्तान से दूरी बनाए रखे, वरना परिणाम गंभीर होंगे।

    आतंकी संगठन ने पाकिस्तानी जनता और सेना को भी भड़काने की कोशिश की। उसने लोगों से सरकार के आदेशों का पालन न करने और अपने एजेंडे के समर्थन की अपील की। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संदेशों के जरिए संगठन पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करना चाहता है और जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर लगातार अफगान तालिबान को चेतावनी देते रहे हैं। वहीं, तालिबान और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है।

    दरअसल, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर कई बार हवाई हमले किए हैं, जबकि तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया है। अफगानिस्तान डूरंड लाइन को मान्यता नहीं देता, जबकि पाकिस्तान वहां बाड़बंदी कर घुसपैठ रोकने की कोशिश कर रहा है।

  • पाकिस्तान में लश्कर कमांडर की हत्या, अज्ञात हमलावरों ने बरसाईं गोलियां

    पाकिस्तान में लश्कर कमांडर की हत्या, अज्ञात हमलावरों ने बरसाईं गोलियां


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक बार फिर ‘अननोन गनमैन’ की कार्रवाई सामने आई है। इस बार निशाना आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े वरिष्ठ कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी बने, जिन्हें अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया।
    पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अफरीदी पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी, हालांकि अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

    हाफिज सईद का करीबी बताया जाता था
    शेख यूसुफ अफरीदी को हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता था।

    बताया जाता है कि वह लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहा था और खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में नेटवर्क संभालता था। आरोप है कि वह युवाओं को तैयार कर उन्हें कश्मीर समेत अन्य क्षेत्रों में भेजने में सक्रिय भूमिका निभाता था। अफरीदी कई मौकों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी सईद के साथ नजर आ चुका था।

    टारगेट किलिंग का शक, जांच जारी
    स्थानीय पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह मामला टारगेट किलिंग का प्रतीत होता है।

    हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

    ‘अननोन गनमैन’ की घटनाएं बढ़ीं
    गौरतलब है कि पाकिस्तान में हाल के महीनों में अज्ञात हमलावरों द्वारा इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें कई विवादित और भारत-विरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया है। हालांकि इन घटनाओं के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है।

    भारत का स्पष्ट रुख
    इन घटनाओं को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं, लेकिन भारत सरकार ने हमेशा साफ किया है कि वह किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करती है और ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं है।

    कुल मिलाकर, अफरीदी की हत्या ने पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क से जुड़े समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।