लेबनान हमलों पर बयान से बढ़ा तनाव
इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री ने बताया अनुचित बयान
शांति वार्ता के बीच बढ़ा सैन्य तनाव
ईरान की चेतावनी, बातचीत पर असर

इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री ने बताया अनुचित बयान

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में कहा कि सीजफायर समझौते में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि संभवतः ईरान ने इसे अलग तरह से समझा। वेंस के मुताबिक यह युद्धविराम अमेरिका ईरान और उनके सहयोगियों जैसे इजरायल और अरब देशों पर केंद्रित है न कि लेबनान पर।
ट्रंप ने भी किया इनकार
शहबाज शरीफ के बयान से बढ़ा विवाद
इजरायल पहले ही कर चुका था साफ इनकार

इस्लामाबाद। आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा है। आरोप है कि सैन्य टकराव के बजाय अब “इन्फॉर्मेशन वॉर” के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को चुनौती देने की कोशिश हो रही है।
‘नैरेटिव वॉर’ का मास्टर प्लान
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने 2025 में “रणनीतिक संचार मास्टर प्लान” नाम से पहल शुरू की है। इसका लक्ष्य अंग्रेजी भाषा के ऐसे प्लेटफॉर्म बनाना है जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों में विश्वसनीय दिखें और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान-समर्थक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएं। पहले उर्दू-केंद्रित मैसेजिंग वैश्विक स्तर पर प्रभावी नहीं रही, इसलिए यह बदलाव किया गया।
थिंक टैंक नेटवर्क पर फोकस
बताया गया है कि मिन्हाज यूनिवर्सिटी लाहौर में “हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज” जैसे संस्थान स्थापित किए गए हैं। ये भू-राजनीति, सुरक्षा और जलवायु जैसे विषयों पर काम करने का दावा करते हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इनमें रणनीतिक तंत्र से जुड़े लोगों की भागीदारी बताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए सक्रिय किया गया है, जिनमें AsiaOne News, DM News English, FP92TV और Afrik1 TV शामिल बताए गए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को कथित तौर पर “निष्पक्ष पत्रकारिता” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि इनके जरिए नैरेटिव सेट करने की कोशिश हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी समर्थन वाले मीडिया पर भरोसे की कमी को देखते हुए पाकिस्तान ने थिंक टैंक, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल चैनलों के जरिए “सॉफ्ट पावर” आधारित रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य बिना प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के कूटनीतिक और सूचना स्तर पर प्रभाव बनाना है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब पारंपरिक सैन्य टकराव के बजाय सूचना और प्रचार के जरिए वैश्विक मंच पर भारत को चुनौती देने की रणनीति अपना रहा है।

इस घटना की जानकारी पाकिस्तान दरवार इत्तेहाद के अध्यक्ष शिव कच्छी ने दी। उन्होंने बताया कि कराची स्थित ऐतिहासिक सगन मेसन भवन में रखी धार्मिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसे उन्होंने बेहद निंदनीय बताया।
उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय इस घटना से आहत है और जिम्मेदार लोगों की जल्द गिरफ्तारी जरूरी है।
बताया जा रहा है कि यह भवन स्वतंत्रता-पूर्व काल में 1937 में निर्मित हुआ था और यहां हिंदू समुदाय की कई धार्मिक मूर्तियां व प्रतीक सुरक्षित रखे गए थे। इससे पहले भी पाकिस्तान में मंदिरों और हिंदू स्थलों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन पर भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र भी शामिल है, पर चिंता जता चुका है।

पाकिस्तान में 458 रुपये प्रति लीटर बिक रहा पेट्रोल
पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ाने की घोषणा की। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में क्रमश: 43 प्रतिशत और 55 प्रतिशत की भारी बढोतरी की है। इस फैसले के तहत, पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये से 137.23 रुपये प्रति लीटर (करीब 42.7 प्रतिशत) बढ़ाकर 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। वहीं, हाई स्पीड डीजल की कीमत 335.86 रुपये से 184.49 रुपये प्रति लीटर (करीब 55 प्रतिशत) बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इसके साथ, केरोसिन तेल की कीमत भी 34.08 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 457.80 रुपये कर दी गई है।
देश के अलग-अलग शहरों में किस रेट पर बिक रहा पेट्रोल (Petrol Rate)
दिल्ली – 94.77 रुपये
मुंबई – 104.21 रुपये
कोलकाता – 103.94 रुपये
चेन्नई – 100.75 रुपये
अहमदाबाद – 94.49 रुपये
बेंगलुरू – 102.92 रुपये
हैदराबाद – 107.46 रुपये
जयपुर – 104.72 रुपये
लखनऊ – 94.69 रुपये
पुणे – 104.04 रुपये
चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
इंदौर – 106.48 रुपये
डीजल का क्या है अलग-अलग शहरों में रेट (Diesel Rate)
मुंबई – 92.15 रुपये
कोलकाता – 90.76 रुपये
चेन्नई – 92.34 रुपये
अहमदाबाद – 90.17 रुपये
बेंगलुरू – 89.02 रुपये
हैदराबाद – 95.70 रुपये
जयपुर – 90.21 रुपये
लखनऊ – 87.80 रुपये
पुणे – 90.57 रुपये
चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
इंदौर – 91.88 रुपये
पटना – 93.80 रुपये
पिछले दिनों प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इंडियन ऑयल ने इजाफा किया था। जिसके बाद दिल्ली में XP100 पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल का रेट 91.49 रुपये से 92.99 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

राजनाथ सिंह केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित सैनिक सम्मान सम्मेलन में पहुंचे थे। उन्होंने कहा, ‘मौजूदा हालात में हमारा पड़ोसी कोई भी दुस्साहस कर सकता है। अगर वह ऐसा करता है, तो भारत की कार्रवाई अभूतपूर्व और निर्णायक होगी।’ हालांकि, इस दौरान उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया है। रक्षा मंत्री ने आगे यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र
सिंह ने कहा, ‘हमने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मुद्दे पर सरकार के एटीट्यूड और ऐक्शन के तरीके, दोनों को बदला है। ये बदलाव पूरी दुनिया को हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखने को भी मिला है। पहलगाम में हुए आतंकी हमलों में आतंकियों ने जिस तरह धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया, उसने पूरे देश को ही झकझोर डाला था। वह हमला भारत की सोशल यूनिटी और सोशल फैब्रिक पर किया गया बड़ा हमला था।’
उन्होंने आगे कहा, ‘इसके खिलाफ भारत ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकी अड्डों और उससे जुडे़ इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दिया था…।’
सरहद पार भी कार्रवाई के लिए तैयार भारतीय सेना
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रखता है। वह इसके खिलाफ सरहद के इस पास और जरूरत पड़ी तो सरहद के उस पार भी कार्रवाई करने में पीछे नहीं रहेगा।’
उन्होंने कहा, ‘पहलगाम में हुई आतंकी घटना के बाद भारतीय सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को महज 22 मिनटों में ही घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया था। और भारतीय सैन्य इतिहास में आतंकवाद के खिलाफ किया गया अब तक का यह सबसे बड़ा आपरेशन था। मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह आपरेशन अभी बंद नहीं हुआ है। यदि किसी प्रकार की नापाक हरकत पाकिस्तान की तरफ से हुई, तो हमारे सैनिक ऐसा जवाब देंगे कि वो भूल नहीं पाएंगे।’
दे दी चेतावनी
सिंह ने पाकिस्तान को बड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दे दी है। उन्होंने कहा, ‘इस बार जो होगा वह अभूतपूर्व होगा हमारी सेना की तरफ से। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि हमारा पड़ोसी आजकल जो हालात हैं, उसमें कोई भी दुस्साहस कर सकता है। अगर उसने ऐसा किया, तो भारत का ऐक्शन निर्णायक और अभूतपूर्व होगा।’

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना विदेश मंत्रालय के दफ्तर में हुई। इशाक डार तब इस्लामाबाद में मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलअती से मिल रहे थे। चलते-चलते अचानक वह लड़खड़ा गए। हालांकि वहां मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उन्हें सहारा दिया और उठाने की कोशिश की।
सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक
अधिकारियों ने बाद में बताया कि डार को कोई चोट नहीं आई है और बैठक बिना किसी रुकावट के तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रही। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल रहा है और लोग इस वीडियो को लेकर मजेदार रिएक्शन दे रहे हैं।
बैठक में क्या हुई चर्चा?
इससे पहले पाकिस्तान में रविवार को एक अहम चार-पक्षीय बैठक का आयोजन किया गया जिसमें मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा हुई है ताकि तनाव कम करने का रास्ता खोजा जा सके। एक अधिकारी ने बताया कि विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और सुरक्षा मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हुए क्षेत्र में व्यापक शांति के विकल्पों पर मंथन किया। यह शिखर सम्मेलन अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता में देरी के बीच हुई है। हालांकि बैठक के बाद कोई बयान जारी नहीं किया गया।
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के अनुसार, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्री शनिवार को इस्लामाबाद पहुंच चुके थे, जबकि सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद रविवार को पहुंचे। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि दौरे पर आए विदेश मंत्री ‘क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों सहित कई मुद्दों पर गहन चर्चा’ करेंगे।

सुबह-सुबह कांपी धरती
एनसीएस के अनुसार, भूकंप 26 मार्च 2026 को सुबह 5:56 बजे (भारतीय समय) आया. भूकंप का केंद्र 30.394° उत्तरी अक्षांश और 69.534° पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया, जबकि इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी. भूकंप के झटके आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए, जिससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत फैल गई।
जान-माल का नुकसान नहीं
फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है. प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है. विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान एक भूकंप संभावित क्षेत्र में स्थित है, क्योंकि यह भारतीय, यूरेशियाई और अरब टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के पास आता है, जिस कारण इस क्षेत्र में अक्सर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती रहती हैं.
क्यों आता है भूकंप?
भूकंप पृथ्वी की सतह के अचानक कंपन को कहते हैं, जो जमीन के अंदर टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने, घर्षण या ऊर्जा मुक्त होने के कारण आता है. यह ऊर्जा शॉक वेव्स के रूप में फैलती है, जिससे जमीन हिलती है और इमारतें गिर सकती हैं. भूकंप को रिक्टर पैमाने पर मापा जाता है और इसके कारण भूस्खलन, सुनामी या आग जैसी आपदाएं आ सकती हैं.
केंद्र (Epicenter): जमीन के अंदर वह स्थान जहां से भूकंप शुरू होता है, उसे ‘फोकस’ कहते हैं, और ठीक ऊपर सतह पर स्थित स्थान को ‘एपिसेंटर’ कहते हैं.
भूकंप के दौरान क्या करें?
मेज के नीचे छिपें और उसे पकड़ें. अगर संभव हो तो इमारतों से दूर, खुले मैदान में चले जाएं. लिफ्ट का प्रयोग न करें. भूकंप के दौरान हमेशा सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.

शिया धर्मगुरुओं ने इसे अपमानजनक और भड़काऊ बताते हुए आरोप लगाया कि सैन्य नेतृत्व देश के भीतर सांप्रदायिक तनाव बढ़ा रहा है। कुछ नेताओं ने यहां तक कहा कि सेना प्रमुख बाहरी शक्तियों के प्रभाव में काम कर रहे हैं, जो पाकिस्तान के हितों के खिलाफ है।
सरकारों को गिराने तक के आरोप
शिया उलेमा काउंसिल पाकिस्तान के केंद्रीय उपाध्यक्ष आलम सैयद सिब्तैन हाइडर सब्ज़वारी ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि सेना प्रमुख को अमेरिका और इजरायल से इतना लगाव है तो उन्हें खुद पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार सरकारों को गिराकर देश को नुकसान पहुंचाया गया है।
विरोध प्रदर्शनों के बाद बढ़ा तनाव
इससे पहले, कराची, स्कार्डू और इस्लामाबादसमेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये प्रदर्शन शिया अयातुल्लाह खामेनेई से जुड़े घटनाक्रमों के विरोध में बताए गए। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।
मुनीर की चेतावनी
विरोध प्रदर्शनों के बाद मुनीर ने कहा था कि किसी दूसरे देश की घटनाओं को लेकर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बाद में “ईरान चले जाएं” वाली टिप्पणी सामने आने के बाद शिया समुदाय के एक हिस्से में नाराजगी और बढ़ गई।
Inter-Services Public Relations ने अपने बयान में कहा कि सेना प्रमुख ने उलेमाओं से मुलाकात कर राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में उनकी भूमिका पर चर्चा की। हालांकि विवादित टिप्पणी पर आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

रियाद। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान के खिलाफ 12 मुस्लिम देशों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है। साउदी अरब की राजधानी में हुई अहम बैठक में पाकिस्तान समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से तुरंत हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की मांग की।
बैठक में । अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल रहे। सभी ने नागरिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की।
ईरान को सख्त संदेश
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तेल संयंत्रों, हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों और राजनयिक मिशनों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया। देशों ने United Nations चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का भी जिक्र किया और United Nations Security Council के प्रस्तावों के पालन की मांग की।
साथ ही ईरान से हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में हस्तक्षेप न करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की अपील की गई।
सऊदी विदेश मंत्री की कड़ी चेतावनी
सऊदी विदेश मंत्री Faisal bin Farhan Al Saud ने साफ कहा कि ईरान पर भरोसा “पूरी तरह खत्म” हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान दबाव और आक्रामक रणनीति के जरिए क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो सऊदी अरब “उचित कदम” उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनका यह बयान सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई की संभावना की ओर इशारा माना जा रहा है।
क्या पाकिस्तान भी जंग में खिंच सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि Saudi Arabia सीधे संघर्ष में उतरता है, तो उसका रक्षा सहयोग समझौता Pakistan के साथ सक्रिय हो सकता है। ऐसे में इस्लामाबाद भी इस टकराव का हिस्सा बन सकता है, जिससे संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
खाड़ी देशों पर हमलों से बढ़ा तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी छह देशों को निशाना बनाया है। Abu Dhabi और Dubai में हुए हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई, जबकि Kuwait, Oman और Bahrain में भी नुकसान की खबरें हैं।
Qatar के अल-उदीद एयरबेस और Saudi Arabia के तेल ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थिति बेहद संवेदनशील
मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अगर सऊदी अरब और उसके सहयोगी सीधे मैदान में उतरते हैं, तो यह टकराव पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है—जिसके वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक असर भी गंभीर हो सकते हैं।