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  • ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ रही फतह-3! चीन की मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान, खाड़ी देशों को साधने की कोशिश

    ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ रही फतह-3! चीन की मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान, खाड़ी देशों को साधने की कोशिश




    नई दिल्ली। भारत के खिलाफ सैन्य संतुलन बनाने की कोशिश में पाकिस्तान अब चीन निर्मित हथियारों को खाड़ी देशों तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पाकिस्तानी सेना अपनी ‘फतह-3’ मिसाइल को भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का जवाब बताकर सऊदी अरब और कतर जैसे देशों को आकर्षित करने में जुटी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह मिसाइल भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम के सामने प्रभावी साबित नहीं हो सकी थी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान खुद को खाड़ी देशों का सुरक्षा साझेदार दिखाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बाद इस्लामाबाद ने रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए चीन के हथियारों को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। पहले जेएफ-17 फाइटर जेट और अब फतह-3 मिसाइल को लेकर पाकिस्तान बड़े दावे कर रहा है।

    पाकिस्तानी मीडिया फतह-3 को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बताते हुए इसे ब्रह्मोस की टक्कर का हथियार बता रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह जमीन और समुद्री दोनों लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है और कम ऊंचाई पर तेज रफ्तार से उड़ान भरने के कारण इसे रोकना मुश्किल है। लेकिन रक्षा जानकारों का कहना है कि इसकी तकनीक काफी हद तक चीन की HD-1 मिसाइल पर आधारित है, जिसे Guangdong Hongda कंपनी ने विकसित किया था।

    बताया जा रहा है कि फतह-3 की रेंज करीब 290 से 450 किलोमीटर तक है और यह 240 से 450 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है। इसकी गति 2.5 से 4 मैक तक बताई जाती है। वहीं दूसरी ओर भारत की ब्रह्मोस मिसाइल लंबी रेंज, अधिक सटीकता और भारी मारक क्षमता के लिए जानी जाती है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों के जरिए पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार नूर खान एयरबेस के पास हुए हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को झटका दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल क्षमता को बढ़ाने और नए खरीदार तलाशने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पाकिस्तान के जरिए खाड़ी देशों के हथियार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहां अब तक अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान खुद को रक्षा साझेदार के रूप में पेश कर रहा है और चीनी तकनीक वाले हथियारों को “कम लागत वाला विकल्प” बताकर प्रचारित कर रहा है।

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि सऊदी अरब भविष्य में फतह-3 मिसाइल या जेएफ-17 फाइटर जेट में रुचि दिखा सकता है, क्योंकि वह क्षेत्रीय खतरों को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है। हालांकि रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणाली की बराबरी करना पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए अभी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • बांग्लादेश–पाकिस्तान डील से बढ़ा साउथ एशिया में सस्पेंस, खुफिया सहयोग और सुरक्षा गठजोड़ पर उठे सवाल

    बांग्लादेश–पाकिस्तान डील से बढ़ा साउथ एशिया में सस्पेंस, खुफिया सहयोग और सुरक्षा गठजोड़ पर उठे सवाल




    नई दिल्ली। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हाल के समय में बढ़ते सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दोनों देशों के बीच नशे की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और सीमा पार अपराधों से निपटने को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसे 10 वर्षों के लिए मान्य बताया गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते के तहत दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त अभियान चलाने और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को खत्म करने पर काम करेंगे। इसमें उभरते तस्करी रास्तों और नई छिपाने की तकनीकों की जानकारी साझा करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ इस समझौते को लेकर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच कोई सीधी जमीनी सीमा नहीं है, जिससे इस तरह के सहयोग के वास्तविक उद्देश्यों पर चर्चा तेज हो गई है। इसी वजह से इसे केवल अपराध नियंत्रण नहीं बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है।

    रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बांग्लादेश के कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पाकिस्तान में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच संस्थागत स्तर पर संपर्क बढ़ रहा है। कुछ विश्लेषक इसे बांग्लादेश की बदलती विदेश नीति और क्षेत्रीय समीकरणों में संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम में बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका और उसकी क्षेत्रीय रणनीति पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह बदलाव दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

    कुल मिलाकर, बांग्लादेश-पाकिस्तान सहयोग का यह नया दौर केवल सुरक्षा समझौते तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय कूटनीति और रणनीतिक हितों की एक बड़ी परत जुड़ी हुई मानी जा रही है।

  • ऑपरेशन सिंदूर 2.0: भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत, कराची को लेकर कड़ा संदेश, पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत, कराची को लेकर कड़ा संदेश, पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी



    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सामने आए दावों और रणनीतिक चर्चाओं के बीच भारतीय नौसेना की तैयारियों पर एक बार फिर जोरदार बहस छिड़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय नौसेना ने पिछले एक साल में अपनी समुद्री क्षमता, तैनाती और युद्ध अभ्यासों को और अधिक मजबूत और आक्रामक बनाया है।

    सूत्रों और सैन्य विश्लेषणों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने अरब सागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए आधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों और एयरक्राफ्ट कैरियर के जरिए रणनीतिक बढ़त हासिल की है। इनमें INS Vikrant और INS Vikramaditya जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर प्रमुख भूमिका में बताए जा रहे हैं, जो किसी भी समुद्री स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भविष्य में कोई बड़ा सैन्य टकराव होता है, तो भारत की समुद्री रणनीति बेहद निर्णायक हो सकती है। नौसेना की इस बढ़ी हुई क्षमता ने अरब सागर क्षेत्र में पाकिस्तान की समुद्री गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ाया है, हालांकि किसी भी आधिकारिक स्तर पर सीधे हमले या कार्रवाई की पुष्टि नहीं है।

    1971 के युद्ध और बाद की समुद्री रणनीतियों का हवाला देते हुए यह भी कहा जा रहा है कि भारत की नौसेना अब पहले से कहीं ज्यादा तकनीकी रूप से उन्नत और तैयार स्थिति में है। वहीं Operation Trident जैसी ऐतिहासिक कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए समुद्री ताकत के महत्व को फिर से रेखांकित किया जा रहा है।

    रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति में समुद्री शक्ति एक बड़ा रणनीतिक फैक्टर बन चुकी है, लेकिन किसी भी संभावित कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप

    ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप



    नई दिल्ली। चीन की ओर से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मदद देने के दावे ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। चीनी सरकारी मीडिया के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा जा रहा है कि इंजीनियरों ने पाकिस्तान को तकनीकी सपोर्ट और रियल-टाइम इनपुट दिए थे। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर पूरी तरह स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और चीनी टीवी इंटरव्यू में दावा किया गया है कि चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक इंजीनियर ने पाकिस्तान में तकनीकी सहायता की बात स्वीकार की है। कहा गया कि टीम का काम J-10CE जैसे लड़ाकू विमानों और उनके सिस्टम को ऑपरेशनल रूप से तैयार रखना था। यह भी दावा है कि पाकिस्तान ने चीन में बने J-10CE फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया, जिन्हें AVIC की सहयोगी कंपनियां बनाती हैं। इसी दौरान रियल-टाइम डेटा सपोर्ट और सैटेलाइट इनपुट देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

    भारत की ओर से पहले ही यह कहा जा चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर मदद दी थी। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात का जिक्र किया था कि संघर्ष के दौरान चीन ने अपने नेटवर्क और सिस्टम के जरिए क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखी और पाकिस्तान को जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं चीन ने पहले इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन अब आए इंटरव्यू और रिपोर्ट्स ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही काफी गहरा है और J-10CE जैसे एडवांस फाइटर जेट्स इसकी बड़ी मिसाल हैं। पाकिस्तान पहले से ही चीन से बड़े पैमाने पर हथियार आयात करता रहा है और हाल के वर्षों में यह निर्भरता और बढ़ी है। इसी बीच चीन द्वारा नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 को पाकिस्तान को देने की चर्चा ने भी क्षेत्रीय सैन्य समीकरणों पर बहस तेज कर दी है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के दौरान चीन ने अपने तकनीकी और सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कर स्थिति पर नजर रखी, जिसे कुछ विशेषज्ञ “लाइव लैब” रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि इन सभी दावों पर अभी तक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है।

  • बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    इस्लामाबाद। बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में पांच और नागरिकों का अपहरण कर लिया है। इन घटनाओं ने प्रांत में पहले से जारी अस्थिरता और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

    मानवाधिकार संगठन ‘पांक’, जो बलूच नेशनल मूवमेंट ह्यूमन राइट्स डिपार्टमेंट (PANK) से जुड़ा है, ने बताया कि दो शिक्षकों 45 वर्षीय अब्दुल हमीद और 36 वर्षीय नासिर अली को 5 मई को पंजगुर जिले के पारूम क्षेत्र से फ्रंटियर कोर के कर्मियों द्वारा उठाया गया। संगठन ने कहा कि शिक्षकों को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र में मनमानी हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघनों के बढ़ते पैटर्न को दर्शाता है।

    इसके अलावा 27 वर्षीय अल्ताफ हुसैन बलूच को 2 मई को हब चौकी से आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) के कर्मियों द्वारा कथित रूप से उठाया गया। उसी दिन एक और घटना में 40 वर्षीय जान खान और उनके 20 वर्षीय बेटे अब्दुल सत्तार को क्वेटा में उनके घर से कथित रूप से अगवा किया गया।

    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।
    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।

    क्वेटा में विरोध प्रदर्शन जारी
    इधर, प्रांतीय राजधानी क्वेटा में बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेतृत्व में प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्र बोलन मेडिकल कॉलेज के बाहर धरना दे रहे हैं, जो अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी खदीजा बलूच की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें 21 अप्रैल को बीएमसी महिला छात्रावास से सुरक्षा बलों द्वारा उठाए जाने का आरोप है।

    बीवाईसी के अनुसार, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों और परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और कथित गैर-न्यायिक हत्याओं के मामलों को लेकर तनाव बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र में सामाजिक ताने-बाने को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

  • पाकिस्तान में फिर मंडराया पोलियो का खतरा, पांच नए मामलों से मचा हड़कंप; WHO समेत दुनिया अलर्ट

    पाकिस्तान में फिर मंडराया पोलियो का खतरा, पांच नए मामलों से मचा हड़कंप; WHO समेत दुनिया अलर्ट



    नई दिल्ली। पाकिस्तान में पोलियो वायरस एक बार फिर गंभीर चिंता का कारण बनता जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कराची समेत कई इलाकों से लिए गए पांच नए नमूनों में पोलियो वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सिंध में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कम संक्रमण वाले मौसम में भी वायरस का सक्रिय रहना बेहद चिंताजनक संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण के लगातार फैलने का संकेत देता है और इसे रोकने के लिए तुरंत सख्त कदम उठाने होंगे।

    WHO और यूनिसेफ भी अलर्ट
    बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ़, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधियों ने कहा कि अफ्रीका में सफल रही रणनीतियों को अब पाकिस्तान में भी लागू किया जा रहा है ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके।

    इस साल सामने आए कई मामले
    रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू और उत्तरी वजीरिस्तान से पोलियो के नए मामले सामने आए थे। इस साल अब तक पाकिस्तान में पोलियो के कई मामलों की पुष्टि हो चुकी है।विशेषज्ञों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान दुनिया के ऐसे देश हैं जहां अब भी पोलियो वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।

    टीकाकरण अभियान के सामने बड़ी चुनौती
    पोलियो उन्मूलन अभियान को सुरक्षा और जागरूकता दोनों स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में टीकाकरण टीमों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इसके अलावा टीकों को लेकर फैली गलत जानकारी और अभिभावकों द्वारा पोलियो ड्रॉप्स से इनकार भी बड़ी समस्या बन चुका है। केवल कराची में ही हजारों परिवारों ने बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने से मना कर दिया है, जिससे वायरस के खतरे को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

  • भारतीय नाविकों को बचाने में भी पाकिस्तान ने खेला ‘कश्मीर कार्ड’, समंदर में राहत मिशन के पीछे दिखी नई रणनीति

    भारतीय नाविकों को बचाने में भी पाकिस्तान ने खेला ‘कश्मीर कार्ड’, समंदर में राहत मिशन के पीछे दिखी नई रणनीति



    नई दिल्ली। पाकिस्तान एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछालने की कोशिशों को लेकर चर्चा में है। अरब सागर में फंसे एक भारतीय जहाज के बचाव अभियान के दौरान पाकिस्तान ने जिस जहाज को भेजा, उसका नाम ‘PMSS Kashmir’ था। इसे लेकर अब पाकिस्तान की रणनीति और प्रोपेगेंडा मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय मालवाहक जहाज ‘MV गौतम’ ओमान से भारत लौटते समय तकनीकी खराबी के कारण अरब सागर में फंस गया था। इसके बाद मुंबई स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र ने पाकिस्तान से सहायता मांगी। जवाब में पाकिस्तानी नौसेना ने ‘PMSS कश्मीर’ नाम के जहाज को राहत मिशन के लिए रवाना किया।

    बचाव अभियान या कूटनीतिक संदेश?
    पाकिस्तान ने जहाज के चालक दल को भोजन, मेडिकल सहायता और जरूरी मदद पहुंचाई। जहाज में छह भारतीय और एक इंडोनेशियाई नागरिक सवार थे। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस जहाज के नाम को लेकर हुई, जिसे पाकिस्तान ने जानबूझकर कश्मीर नाम दिया है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान मानवीय मदद के साथ-साथ कश्मीर शब्द को अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक चर्चा में बनाए रखने की रणनीति पर काम करता है। पाकिस्तान पहले भी अपने कई अभियानों और मंचों पर कश्मीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है।

    पहले भी सामने आ चुका है मामला
    रिपोर्ट्स के अनुसार फरवरी 2024 में भी इसी ‘PMSS Kashmir’ जहाज ने अरब सागर में फंसे भारतीय नागरिकों को बचाया था। पाकिस्तान ने उस समय भी इसे मानवीय मिशन के साथ अपने राजनीतिक संदेश से जोड़कर पेश किया था।



    सोशल मीडिया और नैरेटिव वॉर
    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय मंचों और प्रचार अभियानों के जरिए कश्मीर मुद्दे को वैश्विक स्तर पर जिंदा रखने की कोशिश करता रहा है। यही वजह है कि समुद्री बचाव जैसे मानवीय अभियानों में भी प्रतीकात्मक संदेश देने की रणनीति अपनाई जाती है।

    हालांकि भारत की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन रणनीतिक हलकों में इसे पाकिस्तान की “नैरेटिव राजनीति” के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

  • भारत से दोस्ती, पाकिस्तान से नजदीकी! जानिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान की नई ‘बैलेंस’ रणनीति

    भारत से दोस्ती, पाकिस्तान से नजदीकी! जानिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान की नई ‘बैलेंस’ रणनीति



    नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की विदेश नीति इन दिनों चर्चा में है। बांग्लादेश की नई सरकार एक तरफ India के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ भी नजदीकियां बनाए रखना चाहती है। अमेरिकी भू-राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने इसे “बैलेंसिंग स्ट्रेटेजी” बताया है।

    विश्लेषकों के मुताबिक बांग्लादेश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध बेहद जरूरी हैं। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत के साथ मजबूत व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते ढाका के लिए आर्थिक फायदे ला सकते हैं। साथ ही सीमा सुरक्षा, बिजली साझेदारी और साझा नदियों जैसे मुद्दों पर सहयोग भी बांग्लादेश के हित में माना जा रहा है।

    पाकिस्तान से दूरी भी नहीं चाहता ढाका
    रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ भी रिश्तों में गर्मजोशी बनाए रखना चाहता है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच वीजा नियमों में ढील और यात्रा संपर्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई संघ यानी सार्क को मजबूत करने, “ग्लोबल साउथ” के साथ जुड़ाव बढ़ाने और तुर्की जैसी मध्यम ताकतों के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर ढाका और इस्लामाबाद की सोच काफी हद तक मिलती है।

    भारत विरोधी भावना का भी असर
    विश्लेषक माइकल कुलेगमैन का कहना है कि बांग्लादेश की राजनीति में भारत विरोधी भावना रखने वाला एक बड़ा वर्ग मौजूद है। ऐसे में पाकिस्तान के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाए रखना घरेलू राजनीति में भी तारिक रहमान सरकार को फायदा पहुंचा सकता है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर ढाका वास्तव में भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है तो पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना जोखिम भरा कदम हो सकता है।

    ‘दोनों से फायदा’ चाहती है बांग्लादेश सरकार
    रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश ऐसी विदेश नीति अपनाना चाहता है जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध बने रहें और किसी भी पक्ष को नाराज न किया जाए। ढाका का फोकस आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक फायदे हासिल करने पर है।विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में बांग्लादेश की यही संतुलन नीति दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा

    चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा



    नई दिल्ली। चीन एक बार फिर पाकिस्तान के जरिए भारत के खिलाफ अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन पाकिस्तान को अपना अत्याधुनिक जे-35एई स्टील्थ फाइटर जेट देने की तैयारी कर रहा है, जिसे अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II का मुकाबला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह फाइटर जेट भारत के एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर S-400 Triumf के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी हलचल
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें Noor Khan Airbase का नाम भी शामिल रहा। भारतीय लड़ाकू विमानों और ब्रह्मोस मिसाइलों की क्षमता ने पाकिस्तान और चीन दोनों को सतर्क कर दिया।

    क्या है चीन का जे-35एई?
    शेनयांग जे-35 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बच निकलने में सक्षम माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान 40 जे-35 खरीद सकता है। चीन इसे वैश्विक बाजार में अमेरिकी एफ-35 के विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील्थ तकनीक की वजह से यह विमान दुश्मन के वायु रक्षा सिस्टम के बेहद करीब पहुंचकर हमला कर सकता है। यही कारण है कि इसे भारत के एस-400 सिस्टम के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

    परमाणु सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान को जे-35 मिलता है तो वह लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में ज्यादा सक्षम हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीन पाकिस्तान को सैटेलाइट और निगरानी सहायता भी दे रहा है, जिससे भारतीय वायु रक्षा की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।

    हालांकि भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है। भारतीय सेना पहले से दसाल्ट राफेल, एस-400 और ब्रह्मोस जैसी आधुनिक प्रणालियों से लैस है और नए वायु रक्षा सिस्टम पर भी तेजी से काम चल रहा है।

    एशिया में बढ़ सकती है सैन्य प्रतिस्पर्धा
    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा पाकिस्तान को अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान देने से दक्षिण एशिया में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज

    पाकिस्तान का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान संग खत्म हुआ सीजफायर, सीमा पर फिर जंग के आसार तेज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और Afghanistan के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Pakistan ने साफ कर दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई सीजफायर लागू नहीं है, जिससे क्षेत्र में नई सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज हो गई है।

    इससे पहले मार्च में ईद से ठीक पहले दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वह सिर्फ सीमित अवधि के लिए था और अब खत्म हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीमा पर हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    दरअसल, हालिया टकराव की शुरुआत तब हुई जब Taliban से जुड़ी ताकतों ने सीमा पार हमले किए, जिन्हें पाकिस्तान ने अपने हवाई हमलों का जवाब बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक भारी सैन्य झड़पें हुईं, जिन्हें दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर के बावजूद अफगानिस्तान की तरफ से हमले जारी रहे, जिनमें दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप भी दोहरा रहा है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है, हालांकि काबुल और नई दिल्ली दोनों ही इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। पाकिस्तान के सख्त रुख के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में सीमा पर फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिलेगी।