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  • अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..

    अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..


    नई दिल्ली। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed के सरगना Masood Azhar को लेकर इस समय कई तरह की अटकलें और चर्चाएं सामने आ रही हैं। लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नजर न आने के कारण उसके स्वास्थ्य और वर्तमान स्थिति को लेकर संगठन के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे असमंजस का माहौल बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार, संगठन के भीतर यह चर्चा तेज है कि मसूद अजहर की तबीयत ठीक नहीं है और वह लंबे समय से सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, कुछ आकलन यह भी बताते हैं कि उसकी स्थिति को लेकर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है, ताकि संगठन के भीतर मनोबल पर असर न पड़े बताया जा रहा है कि पहले जहां वह नियमित रूप से अपने कैडरों को संबोधित करता था और गतिविधियों में सक्रिय रहता था, वहीं अब उसकी सार्वजनिक उपस्थिति लगभग समाप्त हो चुकी है। इससे संगठन के अंदर भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है।

    खुफिया आकलनों में यह भी संकेत मिलता है कि हाल की घटनाओं और आंतरिक दबावों के कारण उसका प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    इसी बीच यह भी कहा जा रहा है कि संगठन अब संभावित रूप से नए नेतृत्व की तैयारी कर रहा है, क्योंकि मौजूदा हालात में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे पुराने और नए सदस्यों के बीच अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

    अब तक मसूद अजहर की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है, और पूरा मामला रहस्य बना हुआ है। इसी वजह से उसके भविष्य और संगठन में उसकी भूमिका को लेकर लगातार अटकलें जारी हैं।

  • मध्यस्थता नाकाम, फिर भी ‘नोबेल’ की मांग-पाकिस्तान में उठा नया सियासी प्रस्ताव

    मध्यस्थता नाकाम, फिर भी ‘नोबेल’ की मांग-पाकिस्तान में उठा नया सियासी प्रस्ताव

    इस्लामाबाद। ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव और हालिया 40 दिन के संघर्ष के बीच जहां मध्यस्थता की कोशिशें ठोस नतीजे नहीं दे सकीं, वहीं पाकिस्तान में एक अलग ही सियासी पहल चर्चा में है। देश के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग उठी है।
    यह मांग मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभा में पेश एक प्रस्ताव के जरिए सामने आई। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन (PML-N) की विधायक फ़राह खान द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव में दोनों नेताओं की “कूटनीतिक कोशिशों” को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम बताया गया है। “शांति प्रयासों” की सराहना प्रस्ताव में दावा किया गया है कि शहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान ने वैश्विक स्तर पर खुद को एक जिम्मेदार और शांति-समर्थक देश के रूप में पेश किया है। इसमें उनके “दूरदर्शी नेतृत्व, रणनीतिक समझ और लगातार कूटनीतिक प्रयासों” की खुलकर तारीफ की गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन प्रयासों ने संभावित बड़े वैश्विक संकट को टालने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव को कम करने में भूमिका निभाई। लेकिन पास होना मुश्किल हालांकि राजनीतिक जानकार इस प्रस्ताव के भविष्य को लेकर संशय में हैं।
    पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बहुमत के चलते इसके सदन में पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव पर चर्चा भी शायद ही हो पाए। पहले भी आ चुका है ऐसा प्रस्ताव गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब प्रांत की विधानसभा 16 अप्रैल को इसी तरह का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर चुकी है। उसमें भी दोनों नेताओं को मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की सिफारिश की गई थी। सवाल भी उठ रहे दिलचस्प बात यह है कि जिस मध्यस्थता को आधार बनाकर यह मांग उठ रही है, वही कोशिशें अब तक ठोस परिणाम नहीं दे पाई हैं। ऐसे में इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल भी उठ रहे हैं—क्या यह वास्तविक कूटनीतिक उपलब्धि है या सिर्फ सियासी संदेश देने की कोशिश? ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर जहां बहस जारी है, वहीं शहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग ने इस मुद्दे को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है।
  • UAE का भारी-भरकम कर्ज चुकाने की तैयारी में पाकिस्तान…. US-ईरान की डील से हुआ मालामाल

    UAE का भारी-भरकम कर्ज चुकाने की तैयारी में पाकिस्तान…. US-ईरान की डील से हुआ मालामाल


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) 23 अप्रैल तक संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) का 1.5 अरब डॉलर का बकाया कर्ज चुकाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (Central Bank) स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (State Bank of Pakistan.-SBP) ने शनिवार को कहा कि वह 3.5 अरब डॉलर के कर्ज में से बाकी बची राशि को तय समयसीमा तक लौटा देगा। इससे पहले पाकिस्तान ने यूएई को 2 अरब डॉलर का भुगतान कर दिया है। यह भुगतान उस समय किया गया जब सऊदी अरब ने अपनी सहायता के तहत 3 अरब डॉलर में से 2 अरब डॉलर की राशि SBP में जमा कराई। बताया गया कि मध्यस्थता की भूमिका के चलते पाकिस्तान को सऊदी अरब से यह मोटी धनराशि मिली।

    SBP के प्रवक्ता के अनुसार, यूएई की ओर से जमा की गई 3.5 अरब डॉलर की राशि में से 2 अरब डॉलर की अवधि पूरी होने पर वापस कर दी गई है और शेष 1.5 अरब डॉलर 23 अप्रैल तक चुकाने हैं। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने वाशिंगटन में कहा कि देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लगभग 1.2 अरब डॉलर की अगली किश्त मिलने की उम्मीद है। IMF की कार्यकारी बोर्ड की बैठक मई के मध्य में प्रस्तावित है, जिसमें इस समझौते की समीक्षा होगी और अगली राशि जारी हो सकती है। यूएई ने पाकिस्तान को भुगतान संतुलन को संभालने के लिए 3.5 अरब डॉलर की सहायता दी थी। हाल ही में पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते UAE ने यह राशि जल्द वापस करने की मांग की थी।


    सऊदी अरब ने कैसे की पाकिस्तान की मदद

    वहीं, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ 3 अरब डॉलर की जमा राशि की अवधि बढ़ाने का समझौता किया है, जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, जो लगभग तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। हालांकि, यूएई को भुगतान के कारण देश के बाहरी वित्तीय संसाधनों पर दबाव बना हुआ है।

    पाकिस्तान की ओर से UAE का कर्ज ऐसे समय चुकाया जा रहा है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होनी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। होर्मुज स्ट्रेट वार्ता के पहले दौर के दौरान प्रमुख विवादों में से एक था। शनिवार को इसे लेकर जारी गतिरोध तब और बढ़ गया, जब ईरान ने संकरे जलमार्ग को पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों पर गोलीबारी की, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखी।

  • Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल

    Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल


    इस्लामाबाद ।
    पाकिस्तान (Pakistan) के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में सेना व बलोच विद्रोहियों (Army and Baloch rebels) में भीषण गोलीबारी चल रही है। स्थिति यह है कि सैन्य अभियानों के बीच खारान, खुजदार और मस्तुंग सहित कई जिलों में हिंसा से विद्रोह और व्यापक हो गया है। सेना-विद्रोहियों में सशस्त्र झड़पों के बीच बड़ी संख्या में सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं। हालांकि, सीमित पहुंच के कारण इन खबरों पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल खामोशी बनाए हैं। जबकि खारान में नया सैन्य अभियान शुरू होने का दावा निवासियों ने किया। सेना ने अलमार्क और किसान जैसे इलाकों में तड़के एक अभियान शुरू कर दिया।

    इस अभियान के दौरान, कुछ अज्ञात हथियारबंद लोगों ने सेना के दस वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और दोनों पक्षों में गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने अपने ऊपर ड्रोन उड़ने की भी जानकारी दी, लेकिन हताहतों या अभियान के नतीजों के बारे में कोई भी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारी इन घटनाक्रमों पर चुप्पी साधे हैं। इसके बाद सोहिंदा में काफी देर तक गोलीबारी होती रही। यह झड़प कई घंटों तक चली। इस दौरान क्षेत्र में ड्रोन उड़ते भी देखे गए।

    बलूचिस्तान के बरखान जिल में अंधाधुंध सैन्य गोलीबारी में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। यहां बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल ही में हुई बमबारी और गोलाबारी की निंदा कर इसे सामूहिक सजा का कृत्य बताया है। इस अभियान में कई गैर-लड़ाकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं। बीवाईसी ने घटना को बेहद दुखद और निंदनीय त्रासदी बताया।

  • शहबाज शरीफ की इज्जत बच गई! कंगाल पाकिस्तान को सऊदी प्रिंस ने दिए 2 अरब डॉलर

    शहबाज शरीफ की इज्जत बच गई! कंगाल पाकिस्तान को सऊदी प्रिंस ने दिए 2 अरब डॉलर

    इस्‍लमाबाद। किस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हो गए हैं। यह राशि वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब द्वारा एक दिन पहले घोषित की गई 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता का हिस्सा है।

    तो पाकिस्तान की इज्जत बच गई? सऊदी अरब से पाकिस्तान को 2 अरब अमेरिकी डॉलर की माली मदद मिली है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हो गए हैं। यह राशि वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब द्वारा एक दिन पहले घोषित की गई 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता का हिस्सा है। एसबीपी ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में बताया कि यह धनराशि 15 अप्रैल ( बुधवार ) को प्राप्त हुई है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    सऊदी अरब ने मंगलवार को पाकिस्तान के लिए अपनी मौजूदा 5 अरब डॉलर की सुविधा को तीन वर्ष और बढ़ा दिया है तथा अतिरिक्त 3 अरब डॉलर की जमा राशि देने का वादा भी किया है।

    वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने अमेरिका से कहा कि मौजूदा 5 अरब डॉलर की जमा राशि अब सालाना रोलओवर व्यवस्था के अधीन नहीं रहेगी और इसे लंबी अवधि तक बढ़ा दिया गया है। वहीं, एसबीपी के प्रवक्ता ने बताया कि 2 अरब डॉलर पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जबकि शेष 1 अरब डॉलर जल्द ही आने वाला है। इस नई जमा राशि के साथ सऊदी अरब पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में कुल 8 अरब डॉलर की नकद जमा रखने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है।

    पाकिस्तान को यह मदद सऊदी ने ऐसे समय में किया है जब पाकिस्तान इस महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर चुकाने की तैयारी कर रहा है, जो उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। आईएमएफ ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं ( सऊदी अरब, चीन और यूएई) को चल रहे तीन वर्षीय कार्यक्रम के पूरा होने तक अपनी नकद जमा राशि बनाए रखनी होगी।
    तीन देशों की यात्रा पर हैं शहबाज शरीफ

    बता दें कि यह वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पश्चिम एशिया यात्रा के दौरान प्राप्त हुई है। बुधवार को तीन देशों की यात्रा पर निकले शरीफ ने कहा कि सऊदी अरब का यह समर्थन पाकिस्तान की बाहरी वित्तीय जरूरतों के लिए ‘नाजुक समय’ पर आया है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और देश के बाहरी खाते को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा कि सरकार आईएमएफ समर्थित कार्यक्रम के तहत अपने बाजार दायित्वों और लक्ष्यों के अनुरूप भंडार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

    वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग 18 अरब डॉलर का भंडार बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो करीब 3.3 महीने के आयात कवर के बराबर है।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, जो लगभग तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त था। हालांकि, यूएई को ऋण चुकाने की मांग ने भंडार पर नया दबाव डाला था। मार्च में पाकिस्तान यूएई के साथ 3.5 अरब डॉलर की सुविधा बढ़ाने के समझौते में विफल रहा था, जो सात वर्षों में ऐसी पहली विफलता मानी जा रही है।

  • पाकिस्तान में तय समय पर ‘ब्लैकआउट’: रोज 2–2.5 घंटे कटेगी बिजली, जानें वजह और असर

    पाकिस्तान में तय समय पर ‘ब्लैकआउट’: रोज 2–2.5 घंटे कटेगी बिजली, जानें वजह और असर

    इस्लामाबाद। गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब देशभर
    में रोजाना 2 से 2.5 घंटे के “निर्धारित ब्लैकआउट” का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम पारंपरिक लोडशेडिंग नहीं, बल्कि बढ़ती बिजली लागत और पीक डिमांड को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

    कब होगी बिजली कटौती?
    सरकार के मुताबिक, शाम 5 बजे से रात 1 बजे के बीच—यानी पीक आवर्स में—बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। इसी दौरान अलग-अलग इलाकों में तय समय के हिसाब से 2–2.5 घंटे की कटौती की जाएगी। वितरण कंपनियों को पहले से सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपभोक्ताओं को अचानक परेशानी न हो।

    क्यों आया यह फैसला?
    ऊर्जा संकट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं:

    जलविद्युत उत्पादन में कमी
    महंगे जीवाश्म ईंधन का दबाव
    ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी वैश्विक ऊर्जा कीमतें
    गैस आपूर्ति में भारी कमी

    गैस संकट इतना गहरा है कि बिजली संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा। कतर से LNG आयात पर अस्थायी रोक ने स्थिति और बिगाड़ दी है।

    सबसे ज्यादा असर पंजाब में
    पंजाब प्रांत में हालात सबसे खराब बताए जा रहे हैं।

    मुल्तान इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (MEPCO) के इलाकों में 16 घंटे तक कटौती की शिकायत
    मुजफ्फरगढ़, खानेवाल जैसे जिलों में लंबी और अनियमित बिजली गुल
    लाहौर और फैसलाबाद जैसे शहरों में भी 3–4 घंटे कटौती

    ग्रामीण इलाकों में स्थिति और ज्यादा खराब बनी हुई है।

    उद्योग और कृषि पर असर
    रिपोर्ट्स के अनुसार, उर्वरक उद्योग को गैस आपूर्ति बंद कर दी गई है, जिससे कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। सरकार का कहना है कि मई में गैस आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है।

    आर्थिक संकट से जुड़ा मामला
    पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक दबाव में है, और बढ़ती ईंधन कीमतों ने बिजली उत्पादन को और महंगा बना दिया है। ऐसे में यह “टारगेटेड ब्लैकआउट” सरकार के लिए लागत नियंत्रित करने का एक अस्थायी उपाय माना जा रहा है।

    बिजली संकट से निपटने के लिए उठाया गया यह कदम आम लोगों और उद्योगों दोनों के लिए चुनौती लेकर आया है। अब नजर इस बात पर है कि गैस आपूर्ति सुधरने और अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने के बाद हालात कितनी जल्दी बेहतर होते हैं।

  • UAE ने मांगा अरबों का कर्ज, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव; सऊदी अरब से बढ़ी उम्मीदें

    UAE ने मांगा अरबों का कर्ज, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव; सऊदी अरब से बढ़ी उम्मीदें

    इस्लामाबाद। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए नया संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात द्वारा अरबों डॉलर का कर्ज वापस मांगे जाने के बीच अब सऊदी अरब एक बार फिर उसके लिए ‘संकटमोचक’ के रूप में उभरता नजर आ रहा है।

    इसी कड़ी में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान का इस्लामाबाद दौरा काफी अहम माना जा रहा है। इसे पाकिस्तान को संभावित आर्थिक राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सऊदी सहयोग ने देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    UAE का कर्ज लौटाने से बढ़ेगी मुश्किलें
    जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान 2018 में लिए गए 3 अरब डॉलर से अधिक के कर्ज को UAE को लौटाने की प्रक्रिया में है। यह राशि उसके विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 18 प्रतिशत है। ऐसे में भुगतान से देश की आर्थिक स्थिति पर सीधा दबाव पड़ना तय माना जा रहा है।

    स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, मार्च के अंत तक देश के पास करीब 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो लगभग तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त माना जाता है।

    खाड़ी देशों के बदलते समीकरण
    विशेषज्ञों का मानना है कि UAE द्वारा कर्ज रोलओवर से इनकार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत हो सकता है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच यह कदम अहम माना जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया है।

    सऊदी-पाकिस्तान रक्षा सहयोग भी मजबूत
    इस बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी भी गहरी होती दिख रही है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना का एक दल पूर्वी क्षेत्र स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किया गया है। इसमें लड़ाकू और सहायक विमान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सैन्य समन्वय और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करना है।

    IMF और कर्ज भुगतान की दोहरी चुनौती
    पाकिस्तान पर इस महीने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को 1.3 अरब डॉलर के बॉन्ड का भुगतान भी करना है। साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त का इंतजार कर रहा है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि UAE के अचानक रुख ने पाकिस्तान की वित्तीय योजना को झटका दिया है। अब देश को विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट से बचने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए सऊदी अरब सहित अन्य सहयोगी देशों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में पाकिस्तान के लिए आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं, और उसकी नजरें एक बार फिर सऊदी समर्थन पर टिकी हैं।

  • भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

    भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

    इस्‍लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले पर कंटेंट चलाने को लेकर पाकिस्तान में एक चैनल को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में नियामक की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि भारतीय कंटेंट का प्रसारण करना मना है। साथ ही चैनल से इस संबंध में जवाब भी तलब किया गया है। भोसले का रविवार को मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया था। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।

    पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियोन्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने भोसले की मौत की खबर के साथ भारतीय सामग्री क्यों प्रसारित की। पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर प्रतिबंध 2018 से लागू है।
    PEMRA ने कहा कि भोसले की मौत की खबर प्रसारित करते समय जियोन्यूज ने भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना, पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है। जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है।
    जियोन्यूज के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने एक पोस्ट में कहा, ‘प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनकी सराहना करना हमेशा से एक परंपरा रही है। वास्तव में, आशा भोसले जैसी कलाकार के लिए, हमें उनके कालजयी और यादगार गीतों को और भी अधिक साझा करना चाहिए था। फिर भी, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, PEMRA ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।’
    भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ बज रहा था।

    लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए।

    दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे।

  • MP के वन विभाग की बड़ी उपलब्धि… वन विहार से उड़ा गिद्ध को पाकिस्तान में मिली नई जिंदगी

    MP के वन विभाग की बड़ी उपलब्धि… वन विहार से उड़ा गिद्ध को पाकिस्तान में मिली नई जिंदगी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के वन विभाग (Forest Department) ने वन्यजीव संरक्षण में टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल कॉर्डिनेशन (Technology and International Coordination in Conservation) का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है. 2 साल की एक मादा सिनेरेयस गिद्ध जिसे भोपाल वन विहार में इलाज के बाद रिहा किया गया था, अब पाकिस्तानी सहयोग के चलते सुरक्षित है।

    इस गिद्ध को इसी साल 22 जनवरी को शाजापुर के सुसनेर से घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था. वन विहार नेशनल पार्क के वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (VCBC) में इसका इलाज हुआ.

    इसे ‘फिट फॉर रिलीज’ घोषित करने के बाद माइक्रोचिप और GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस से लैस किया गया. 25 मार्च को इसे रायसेन के हलाली डैम क्षेत्र में छोड़ा गया, जिससे इसकी रीयल-टाइम निगरानी संभव हो सकी. यह काम WWF-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) के सहयोग से किया गया।


    पाकिस्तान में रेस्क्यू

    रिहाई के बाद निगरानी में पाया गया कि यह मादा गिद्ध राजस्थान होते हुए इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर 6 अप्रैल तक पाकिस्तान पहुंच गई. 7 अप्रैल को सिग्नल नहीं मिले तो WWF-इंडिया ने तत्परता दिखाते हुए WWF-पाकिस्तान से संपर्क किया. पाकिस्तान वन विभाग और WWF-पाकिस्तान के सहयोग से इस गिद्ध को खानेवाल जिले में स्थानीय निवासियों से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

    मादा गिद्ध 7 अप्रैल को खानेवाल और मुल्तान क्षेत्रों में आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण उड़ान भरने में असमर्थ हो गई और जमीन पर पाई गई। वन्यजीव अधिकारियों ने इसे रेस्क्यू कर प्राथमिक इलाज दिया. WWF-पाकिस्तान की देखरेख में इसे स्थानीय वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में शिफ्ट किया गया. गिद्ध को हल्की चोटें आई थीं और अब वह स्वस्थ हो रहा है।

    वन विहार, WWF-इंडिया के माध्यम से WWF-पाकिस्तान के साथ लगातार संपर्क में है और गिद्ध के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद इसे दोबारा प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।


    भोपाल की मादा गिद्ध को पाकिस्तान के खानेवाल जिले में मिली नई जिंदगी.

    इससे पहले, साल 2025 में एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किमी की यात्रा कर वापस भारत लौटा था. 23 फरवरी 2026 को भी 5 गिद्धों का सफल पुनर्वास और टैगिंग की गई।

  • पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, ईरान ने इस्लामाबाद भेजे कई नकली विमान?

    पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, ईरान ने इस्लामाबाद भेजे कई नकली विमान?


    इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान आतंकवाद का प्रयाय बन चुका है। यही कारण है कि ईरान जैसे मुस्लिम देश को भी भरोसा नहीं है। पाकिस्तान भले ही अमेरिका के साथ ईरान की शांति वार्ता का केंद्र होने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को पाकिस्तान में हवाई हमले का डर सता रहा था। इसलिए ईरान ने अपने वार्ताकारों की सुरक्षा के लिए इस्लामाबाद के लिए कई नकली विमान भेजे, जिनमें से केवल एक में ही प्रतिनिधिमंडल सवार था।
    आपको बता दें कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ कर रहे हैं जो हाल ही में ईरानी सरकार में एक प्रमुख व्यक्ति बनकर उभरे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं।

    इस्लामाबाद जाते समय गालिबफ ने अपने विमान की अगली कतारों को खाली रखा। इन खाली सीटों पर मीनाब स्कूल स्ट्राइक (Minab school strike) में मारे गए बच्चों और पीड़ितों की तस्वीरें और उनका सामान (स्कूल बैग, जूते, कपड़े) रखे गए थे।

    यह हमला हाल ही में ईरान के मीनाब क्षेत्र में हुआ था, जिसे तेहरान अमेरिकी-इजरायली हमला बताता है। इसमें कई स्कूली बच्चों की जान गई थी। इस विजुअल स्टेटमेंट के जरिए ईरान यह संदेश देना चाहता है कि वह बातचीत की मेज पर केवल एक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपने उन निर्दोष नागरिकों के दर्द के साथ जा रहा है जिन्होंने इस युद्ध की कीमत चुकाई है।

    वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा रहा है, जिसमें ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। अमेरिकी वार्ताकारों के साथ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, विदेश विभाग और पेंटागन के विशेषज्ञ भी हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ अप्रैल की रात को घोषणा की थी कि ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर समझौता हो गया है। बाद में खबर आई कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए वार्ता शनिवार को पाकिस्तान में होगी।
    लेबनान पर जारी है तकरार

    यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

    कुछ खबरों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल तभी वार्ता में हिस्सा लेगा, जब युद्धविराम समझौते में तय शर्तें पूरी होंगी।

    ईरान की अर्ध-सरकारी ‘तसनीम’ समाचार एजेंसी ने खबर दी थी कि ”पहले रखी गई शर्तें” पूरी होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी। यह बात इस्लामाबाद रवाना होने से पहले गालिबफ द्वारा ‘एक्स’ पर दिए गए संदेश से भी मेल खाती है।

    गालिबफ ने ‘एक्स’ पर कहा था, ”दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो कदम अभी लागू नहीं हुए हैं- लेबनान में युद्धविराम और वार्ता शुरू होने से पहले ईरान की संपत्तियों पर लगी रोक हटाना।”