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  • बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने सुरक्षा बलों के खिलाफ अपने अभियान को लेकर बड़ा दावा किया है। संगठन ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने पिछले आठ दिनों के दौरान प्रांत के अलग-अलग हिस्सों में 22 हमले किए। इन कार्रवाइयों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया गया है।

    बीएलए के अनुसार, उसके निशाने पर पाकिस्तानी सेना, पुलिस चौकियां, सुरक्षा बलों के काफिले और सरकार समर्थित कथित हथियारबंद समूह रहे। संगठन ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों के अलावा पुलों और कुछ व्यावसायिक वाहनों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही है। हालांकि, संगठन द्वारा बताए गए हताहतों और हमलों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    बीएलए ने दावा किया कि कलात और सूरब क्षेत्रों में किए गए आईईडी हमलों में 20 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। इसके अलावा चगाई, खारन और पंजगुर में पुलिस तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। संगठन के अनुसार, अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान सुरक्षा बलों से जुड़े वाहनों और अन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए।

    संगठन ने एक कथित सदस्य को जिंदा पकड़े जाने का भी दावा किया है। इसके अलावा बीएलए की ओर से सुरक्षा बलों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नौ वाहनों को नष्ट किए जाने की बात कही गई है। इन दावों को संगठन ने अपने व्यापक सशस्त्र अभियान का हिस्सा बताया है।

    बलूचिस्तान में बीएलए लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है। संगठन अलग बलूच राष्ट्र की मांग को लेकर सक्रिय है और समय-समय पर सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों, परिवहन मार्गों तथा आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाने का दावा करता रहा है। क्षेत्र में लंबे समय से जारी राजनीतिक असंतोष, संसाधनों पर अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दे भी इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में रहे हैं।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अगस्त की शुरुआत में भी प्रांत के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा अभियानों और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थीं। 12 अगस्त को सूरब जिले में एक कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 10 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया था, जबकि उसी दिन एक कार बम समय से पहले फटने की घटना में नागरिकों और विस्फोटक तैयार कर रहे लोगों की मौत हुई थी।

    बीएलए के ताजा दावों में कलात, सूरब, चगाई, खारन और पंजगुर जैसे इलाकों का उल्लेख किया गया है। इन क्षेत्रों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों और आवागमन से जुड़े ढांचे पर हमलों की खबरें बलूचिस्तान में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों की व्यापकता को रेखांकित करती हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय से चल रहे अलगाववादी संघर्ष के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीएलए की ओर से लगातार हमलों के दावे के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रांत में निगरानी और अभियान बढ़ाने का दबाव भी बढ़ रहा है।

    हालांकि, किसी भी संघर्ष क्षेत्र में किसी संगठन द्वारा जारी किए गए हताहतों के आंकड़ों को स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए 22 हमलों और 26 सुरक्षाकर्मियों की मौत से जुड़े बीएलए के दावों की पुष्टि होने तक इन्हें संगठन के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

  • दक्षिण एशियाई देशों में भारत की वैश्विक छवि पर प्यू रिसर्च सर्वे, श्रीलंका में भारत के प्रति सर्वाधिक सकारात्मक दृष्टिकोण

    दक्षिण एशियाई देशों में भारत की वैश्विक छवि पर प्यू रिसर्च सर्वे, श्रीलंका में भारत के प्रति सर्वाधिक सकारात्मक दृष्टिकोण

    नई दिल्ली ।अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा दक्षिण एशिया के चार प्रमुख देशों भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में किए गए एक ताजा सर्वेक्षण के आंकड़े सामने आए हैं। इस सर्वेक्षण में अंतरराष्ट्रीय संबंधों, पड़ोसी देशों की धारणाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर वयस्कों की राय ली गई। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका दक्षिण एशिया का एकमात्र ऐसा मुल्क उभरकर सामने आया है, जहां के नागरिक भारत के प्रति अत्यधिक सकारात्मक रुख रखते हैं।

    सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका में 79 प्रतिशत लोगों ने भारत के पक्ष में अपनी राय दी है, जबकि 63 प्रतिशत श्रीलंकाई नागरिकों ने भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश माना है। इसके विपरीत, पाकिस्तान में केवल सात प्रतिशत लोगों ने ही भारत के प्रति सकारात्मक भावना व्यक्त की। बांग्लादेश में 42 प्रतिशत लोगों का रुख भारत के प्रति सकारात्मक पाया गया, हालांकि वहां भारत को खतरा मानने वालों की संख्या भी उल्लेखनीय रही।

    रिपोर्ट में बांग्लादेश और भारत के बीच द्विपक्षीय धारणाओं में आई गिरावट को भी रेखांकित किया गया है। वर्तमान में केवल 25 प्रतिशत भारतीय बांग्लादेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान दोनों देशों के बीच जनता के स्तर पर धारणा में कमी दर्ज की गई है। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, वर्ष 2024 में जहां 57 प्रतिशत बांग्लादेशी भारत के पक्ष में थे, वहीं भारत में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

    भारत और पाकिस्तान के बीच पारस्परिक संबंधों पर सर्वे से स्पष्ट हुआ है कि दोनों देशों की बहुसंख्यक आबादी एक-दूसरे को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानती है। वहीं वैश्विक सहयोगियों के प्रश्न पर 36 प्रतिशत भारतीयों ने रूस को अपना सबसे प्रमुख और भरोसेमंद सहयोगी बताया, जबकि 16 प्रतिशत ने अमेरिका का नाम लिया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के विदेश नीति विशेषज्ञों की नजरें इस रणनीतिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

    वैश्विक स्तर पर भारत के प्रभाव को लेकर अमेरिका में किए गए अध्ययन में 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव स्थिर बना हुआ है। वहीं 30 प्रतिशत अमेरिकियों ने माना कि भारत का प्रभाव वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ा है। राजनीतिक आधार पर अमेरिकी डेमोक्रेट्स के बीच भारत के प्रति समर्थन अधिक देखने को मिला। यह सर्वेक्षण दक्षिण एशिया में बदलते कूटनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों की एक स्पष्ट झलक पेश करता है।

  • पाकिस्तान के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जानें नई कीमतों से आम लोगों पर कितना बढ़ा बोझ

    पाकिस्तान के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जानें नई कीमतों से आम लोगों पर कितना बढ़ा बोझ


    नई दिल्ली । 
    पाकिस्तान अपने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर महंगाई की एक और चुनौती का सामना कर रहा है। देश में 14 अगस्त से पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। ईंधन के दाम बढ़ने का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन और कारोबार की लागत पर पड़ने की संभावना है।

    नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल की कीमत में 0.45 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके बाद पेट्रोल का दाम 324.98 रुपये से बढ़कर 325.43 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद देश में पेट्रोल की कीमत 325 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गई है।

    हाई-स्पीड डीजल के दाम में इससे अधिक वृद्धि की गई है। इसकी कीमत 1.16 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 382.79 रुपये से 383.95 रुपये प्रति लीटर हो गई है। नई दरें 14 अगस्त से प्रभावी मानी जा रही हैं। डीजल की कीमत में यह वृद्धि विशेष रूप से परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन में डीजल की बड़ी भूमिका होती है।

    ईंधन की नई कीमतें पाकिस्तान के बदले हुए पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण तंत्र के तहत तय की गई हैं। इस व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव घरेलू ईंधन दरों पर तेजी से पड़ सकता है।

    पाकिस्तान में ईंधन कीमतों से जुड़ी व्यवस्था में हाल के महीनों में बदलाव किया गया है। जुलाई से लागू नई प्रणाली का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों के अनुरूप घरेलू कीमतों को समायोजित करना बताया गया है। पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच ईंधन कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव का असर उन देशों पर ज्यादा पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। पाकिस्तान भी अपनी ईंधन जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों और विनिमय दर में बदलाव घरेलू बाजार में ईंधन की लागत को प्रभावित कर सकते हैं।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने पर माल की ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका प्रभाव खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। पहले से महंगाई का सामना कर रही आबादी के लिए ईंधन की कीमत में मामूली वृद्धि भी घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

    पाकिस्तान में इस वर्ष पहले भी ईंधन कीमतों में बदलाव देखने को मिले हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, क्षेत्रीय तनाव और आयात लागत में बदलाव के कारण वहां ईंधन मूल्य निर्धारण लगातार चर्चा में रहा है।

    14 अगस्त को लागू हुई नई दरें ऐसे समय में आई हैं जब पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। राष्ट्रीय उत्सव के बीच पेट्रोल और डीजल महंगा होने से महंगाई का मुद्दा एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की दिशा और क्षेत्रीय परिस्थितियां यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी कि पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों पर आगे कितना दबाव बना रहता है।

  • अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर दिया बड़ा बयान, कहा भारत की सहनशीलता को कमजोरी समझना गंभीर भूल होगी

    अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर दिया बड़ा बयान, कहा भारत की सहनशीलता को कमजोरी समझना गंभीर भूल होगी


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत की रणनीतिक क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत की उदारता और सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझना गंभीर भूल होगी। जरूरत पड़ने पर देश जोखिम उठाने और अपने हितों की रक्षा के लिए कड़े फैसले लेने की क्षमता रखता है।

    डोभाल की यह टिप्पणी ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित आगामी दो हिस्सों वाली डॉक्यूसीरीज में सामने आई है। यह बातचीत अभियान के बाद उनके प्रमुख सार्वजनिक बयानों में से एक मानी जा रही है। इसमें उन्होंने सैन्य कार्रवाई के पीछे की सोच, सुरक्षा चुनौतियों और फैसले लेने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर बात की है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बारे में डोभाल ने बताया कि करीब 88 घंटे चले सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। कार्रवाई का संबंध पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़े ठिकानों से बताया गया। भारत ने इस अभियान के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति और प्रतिक्रिया की क्षमता को स्पष्ट करने का प्रयास किया।

    उन्होंने कहा कि भारत शांति और सहनशीलता में विश्वास करता है, लेकिन इन दोनों मूल्यों को कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक देश जरूरत पड़ने पर ऐसे फैसले लेने में सक्षम है जिनमें जोखिम शामिल हो सकता है और जिनके संभावित परिणामों की परवाह किए बिना राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।

    ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ी है। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान को भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।

    डॉक्यूसीरीज में अभियान के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य स्तर पर लिए गए फैसलों से जुड़े कई पहलुओं को सामने लाने की तैयारी है। इसमें वरिष्ठ सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों के अनुभवों के माध्यम से अभियान की परिस्थितियों और निर्णय प्रक्रिया को समझाने की कोशिश की जाएगी।

    डोभाल इस कार्यक्रम में सैन्य कार्रवाई के पीछे मौजूद रणनीतिक सोच और विभिन्न स्तरों पर लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते नजर आएंगे। इससे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने का अवसर मिल सकता है।

    अजीत डोभाल लंबे समय से भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त डोभाल को 30 मई 2014 को पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया था। इसके बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, खुफिया मामलों और रणनीतिक चुनौतियों से जुड़े विषयों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

    डोभाल का करियर खुफिया और सुरक्षा क्षेत्र में लंबे अनुभव से जुड़ा रहा है। इसी पृष्ठभूमि के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनकी रणनीतिक समझ को विशेष महत्व दिया जाता है। ऑपरेशन सिंदूर पर उनकी टिप्पणी भी भारत की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ उसके दृष्टिकोण को रेखांकित करती है।

    डॉक्यूसीरीज का प्रसारण शनिवार रात नौ बजे से निर्धारित है। कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम, सैन्य कार्रवाई और उससे संबंधित रणनीतिक फैसलों के बारे में विस्तार से जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • भारत की वैश्विक छवि पर प्यू सर्वे का बड़ा खुलासा, श्रीलंका में 79 प्रतिशत सकारात्मक राय, पाकिस्तान में सिर्फ 7 प्रतिशत समर्थन

    भारत की वैश्विक छवि पर प्यू सर्वे का बड़ा खुलासा, श्रीलंका में 79 प्रतिशत सकारात्मक राय, पाकिस्तान में सिर्फ 7 प्रतिशत समर्थन

    नई दिल्ली । भारत की वैश्विक छवि को लेकर किए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में अलग-अलग देशों के लोगों की राय में बड़ा अंतर सामने आया है। 36 देशों में किए गए अध्ययन के मुताबिक भारत के प्रति दुनिया की औसत सकारात्मक धारणा 45 प्रतिशत रही, जबकि 41 प्रतिशत लोगों ने नकारात्मक राय व्यक्त की। आंकड़े बताते हैं कि भारत की लोकप्रियता कई देशों में मजबूत है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में उसकी छवि को लेकर मतभेद भी स्पष्ट हैं।

    सर्वे में भारत के पड़ोसी देशों की राय सबसे ज्यादा चर्चा में रही। श्रीलंका में भारत के प्रति सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों का अनुपात 79 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा भारत के लिए सर्वे में शामिल देशों के बीच सबसे मजबूत सकारात्मक प्रतिक्रियाओं में शामिल है। इसके विपरीत पाकिस्तान में केवल 7 प्रतिशत लोगों ने भारत के बारे में सकारात्मक राय व्यक्त की।

    भारत की बेहतर छवि केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रही। केन्या और ब्रिटेन में भी लगभग दस में सात लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक रुख जताया। जर्मनी, इजरायल, इटली, स्वीडन, जापान और थाईलैंड में भी भारत को लेकर सकारात्मक सोच रखने वालों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।

    यूरोपीय देशों में भारत की छवि में पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले सुधार भी दर्ज किया गया है। ब्रिटेन में एक वर्ष के दौरान भारत के प्रति सकारात्मक राय में 11 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। जर्मनी में सकारात्मक धारणा छह प्रतिशत अंक बढ़ी। फ्रांस में भी भारत के प्रति सकारात्मक राय 2023 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई।

    श्रीलंका में भारत की छवि में विशेष सुधार दिखाई दिया। वहां 2024 के मुकाबले भारत के प्रति सकारात्मक राय में 14 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे दोनों देशों के बीच सामाजिक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत की स्वीकार्यता की एक मजबूत तस्वीर सामने आती है।

    हालांकि अमेरिका में भारत को लेकर तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर रही। वहां 45 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की, जबकि 50 प्रतिशत लोगों की राय नकारात्मक रही। यह भारत के लिए 2008 के बाद अमेरिका में दर्ज सबसे कम सकारात्मक रेटिंग बताई गई है। वर्ष 2023 में अमेरिका में भारत को लेकर 51 प्रतिशत सकारात्मक राय सामने आई थी।

    अमेरिका में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भी भारत को लेकर अंतर दिखाई दिया। डेमोक्रेट समर्थकों में 50 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि रिपब्लिकन समर्थकों में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत रहा। इससे अमेरिकी समाज में भारत की छवि को लेकर राजनीतिक विभाजन का संकेत मिलता है।

    सर्वे में भारत के वैश्विक प्रभाव को लेकर भी अमेरिकी नागरिकों से सवाल किया गया। 54 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने माना कि दुनिया में भारत का प्रभाव लगभग पहले जैसा ही है। वहीं 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत का प्रभाव बढ़ा है, जबकि 13 प्रतिशत ने इसके कम होने की बात कही।

    तुर्किये में भारत के प्रति सकारात्मक राय केवल 15 प्रतिशत रही। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में यह आंकड़ा 18 प्रतिशत था। इजरायल में भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर राय में अंतर सामने आया, जहां दक्षिणपंथी विचार रखने वालों में सकारात्मक धारणा 68 प्रतिशत और वामपंथी विचार रखने वालों में 46 प्रतिशत रही।

    कुल मिलाकर सर्वे भारत की वैश्विक छवि की मिश्रित तस्वीर पेश करता है। जहां श्रीलंका, ब्रिटेन, जर्मनी और कई अन्य देशों में भारत के प्रति सकारात्मक धारणा मजबूत हुई है, वहीं पाकिस्तान, तुर्किये और अमेरिका जैसे देशों में अलग रुझान दिखाई देता है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता एक समान नहीं है और अलग-अलग देशों में उसकी छवि क्षेत्रीय संबंधों, राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक धारणा के अनुसार बदल रही है।

  • पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, 36 घंटे चले सैन्य ऑपरेशन में 62 आतंकवादी ढेर।

    पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, 36 घंटे चले सैन्य ऑपरेशन में 62 आतंकवादी ढेर।

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी वजीरिस्तान और बन्नू जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा संचालित खुफिया आधारित अभियानों में व्यापक सफलता प्राप्त हुई है। 36 घंटे से अधिक समय तक चले इन सैन्य ऑपरेशनों के दौरान सुरक्षा बलों ने 62 आतंकवादियों को मार गिराया है। इस दौरान चार प्रमुख कमांडरों समेत अनेक आतंकी ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।

    सैन्य कार्रवाई की शुरुआत मंगलवार सुबह उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र से हुई, जहां संदिग्ध गतिविधियों की निरंतर निगरानी के बाद सटीक हमले किए गए। क्षेत्र में घने वृक्षों के नीचे छिपे आतंकियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए आधुनिक क्वाडकॉप्टर तकनीक का सहारा लिया गया। इसके माध्यम से जमीनी बलों को आतंकवादियों की सटीक स्थिति की जानकारी मिली, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    सुरक्षा बलों के अनुसार, उत्तरी वजीरिस्तान में हुए प्राथमिक ऑपरेशन में 52 आतंकवादी मारे गए, जिनमें चार मुख्य कमांडर शामिल थे। इस दौरान भागने का प्रयास कर रहे घायल आतंकियों को भी सुरक्षा बलों ने निशाना बनाया। ठिकाने से बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल क्षेत्र में हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए किया जाना था।

    उत्तरी वजीरिस्तान के बाद बुधवार को बन्नू जिले में भी कई अलग-अलग स्थानों पर अभियानों की श्रृंखला शुरू की गई। बन्नू में चलाए गए ऑपरेशनों में ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 10 अन्य आतंकवादी मारे गए तथा 16 घायल हुए। इससे पूर्व जानी खेल क्षेत्र में एक खेल स्टेडियम के समीप चलाए गए एक अलग अभियान में भी दो आतंकी ढेर किए गए थे।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बन्नू में आतंकवादियों द्वारा एक धार्मिक शैक्षणिक संस्थान अर्थात मदरसे को अपने ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई प्रारंभ करने से पूर्व आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रूप से खाली कराया। क्षेत्र को खाली कराने के उपरांत आतंकियों के ठिकानों पर लक्षित हमले किए गए।

    अभियान के अंतिम चरण में बन्नू तथा आसपास के क्षेत्रों में सर्च और क्लीयरेंस ऑपरेशन चलाए गए ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। मध्य प्रदेश तथा अन्य क्षेत्रों के रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर भी पड़ोसी देश में बढ़ते आतंकवाद और सैन्य अभियानों पर टिकी हुई है। सुरक्षा अधिकारियों ने प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि प्रांत से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होने तक खुफिया आधारित अभियानों का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बढ़ी सतर्कता, लश्कर जैश और हिज्बुल की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बढ़ी सतर्कता, लश्कर जैश और हिज्बुल की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    नई दिल्ली । भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। खुफिया इनपुट के हवाले से सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि नियंत्रण रेखा के पार 500 से अधिक आतंकियों के भारत में घुसपैठ के मौके का इंतजार करने की आशंका है। इस बीच पाकिस्तान की रणनीति में भी बदलाव की बात सामने आई है, जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया है।

    रिपोर्टों के अनुसार, इन संगठनों की गतिविधियों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की निगरानी और नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक बढ़ा है। पहले अलग-अलग आतंकी संगठनों के अपने कमांड ढांचे और नेतृत्व के माध्यम से गतिविधियां संचालित होने की बात कही जाती थी। अब इनके बीच तालमेल को एक केंद्रीय व्यवस्था के तहत मजबूत किए जाने का दावा किया जा रहा है।

    खुफिया अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान की ओर से आतंकी नेटवर्क को लेकर पुनर्गठन किया गया है। इसका कथित उद्देश्य अलग-अलग संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और उनकी गतिविधियों पर केंद्रीय स्तर से निगरानी बढ़ाना है। हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है।

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता नियंत्रण रेखा के पार मौजूद संभावित आतंकियों की संख्या को लेकर है। रिपोर्ट में 500 से अधिक आतंकियों के घुसपैठ के अवसर की प्रतीक्षा करने की आशंका जताई गई है। ऐसे इनपुट के बाद सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ना स्वाभाविक है।

    बताया गया है कि हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जबकि जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन की गतिविधियों में अपेक्षाकृत कमी का आकलन किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे पाकिस्तान की बदली हुई रणनीति के संदर्भ में देख रही हैं।

    रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब जम्मू-कश्मीर में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार करने पर अधिक जोर दे रहा है। स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने और आतंकी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिशों की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली गतिविधियों के साथ स्थानीय नेटवर्क को जोड़ना बताया जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अलग-अलग आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ता है तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती का स्वरूप बदल सकता है। इसी वजह से सीमा सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और आतंकवाद के लिए होने वाली भर्ती को रोकना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सतर्क रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बीच इस तरह के इनपुट को और गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि किसी भी खुफिया आकलन को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी होती है।

    फिलहाल 500 से अधिक आतंकियों की संभावित मौजूदगी और आतंकी संगठनों पर आईएसआई के बढ़ते नियंत्रण से जुड़े दावे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। आने वाले दिनों में सीमा पर गतिविधियों, घुसपैठ के प्रयासों और जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क से जुड़े घटनाक्रम पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।

  • पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की अटकलों पर विवाद बढ़ा, सैन्य प्रवक्ता के खंडन के बाद PTI का अलग दावा

    पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की अटकलों पर विवाद बढ़ा, सैन्य प्रवक्ता के खंडन के बाद PTI का अलग दावा

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान की जेल में मौत की खबर सामने आने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका में रह रहे पत्रकार वजाहत एस. खान ने सैन्य सूत्रों के हवाले से इमरान खान की मौत को लेकर आशंका जताने का दावा किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके सूत्रों ने इमरान खान को मृत अवस्था में नहीं देखा है।

    इमरान खान की मौत से जुड़े इस दावे के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी ISPR ने इन खबरों को मनगढ़ंत और झूठा करार दिया है। इसलिए फिलहाल इमरान खान की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद से उनकी पार्टी PTI और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में जेल में उनकी स्थिति को लेकर सामने आई किसी भी खबर का राजनीतिक असर काफी व्यापक माना जा रहा है।

    इस बीच PTI ने इमरान खान की स्थिति को लेकर अलग दावा किया है। पार्टी के अनुसार, उनके परिवार के सदस्यों ने जेल की CCTV लाइव फीड में इमरान खान को देखा है। पार्टी का यह दावा सेना की ओर से मौत की खबरों को झूठा बताए जाने के बाद सामने आया है।

    PTI लंबे समय से इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति और जेल में उनके परिवार, वकीलों तथा चिकित्सकों से मुलाकात को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि इमरान खान से मिलने पर प्रतिबंधों के कारण उनके स्वास्थ्य की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

    इमरान खान की बहन डॉ. उजमा और पार्टी नेताओं ने भी उनकी सुरक्षा तथा स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। PTI की ओर से उनकी आंखों की रोशनी और इलाज से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि परिवार और चिकित्सकों को उनसे नियमित मुलाकात की अनुमति मिलनी चाहिए।

    इमरान खान की जेल में स्थिति को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान में PTI समर्थक उनकी रिहाई की मांग लगातार उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में उनकी रिहाई और राजनीतिक अधिकारों को लेकर समर्थकों की गतिविधियां भी चर्चा में रही हैं।

    इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की राजनीति में PTI और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच टकराव लगातार बना हुआ है। ऐसे माहौल में उनकी मौत की अपुष्ट खबर ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि, किसी भी दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय प्रत्यक्ष प्रमाण जरूरी हैं।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ने मौत से जुड़ी खबरों को झूठा बताया है, जबकि PTI ने CCTV के आधार पर उनके जीवित होने का दावा किया है। इन विरोधाभासी दावों के बीच इमरान खान की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी का इंतजार बना हुआ है।

    ऐसे में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आ रही अपुष्ट खबरों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। इमरान खान की स्थिति से जुड़ी कोई निर्णायक जानकारी सामने आने पर ही उनकी मौत या स्वास्थ्य को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

  • भारत से तनाव के बीच बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके की चुनौतियां पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति पर भारी

    भारत से तनाव के बीच बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके की चुनौतियां पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति पर भारी

    नई दिल्ली । पाकिस्तान इस समय कई स्तरों पर सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत के साथ जारी तनाव के अलावा बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दे उसकी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इसी बीच ईरान और उसके समर्थक समूहों से जुड़ी संभावित परिस्थितियां भी पाकिस्तान के सामने अतिरिक्त दबाव पैदा कर रही हैं।

    हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का रक्षा समझौते ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। इस समझौते को व्यापक इस्लामी सुरक्षा ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान के लिए इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने मौजूदा सुरक्षा संकटों से किस तरह निपटता है।

    पाकिस्तान के सामने सबसे प्रमुख चुनौती भारत से जुड़ा सुरक्षा तनाव है। पिछले वर्ष मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के रक्षा ढांचे और एयरबेस की क्षमता को लेकर भी सवाल उठे।

    पाकिस्तान के भीतर बलूचिस्तान लंबे समय से सुरक्षा संकट का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अलगाववादी गतिविधियों और हिंसक घटनाओं ने इस क्षेत्र में सरकार के नियंत्रण को चुनौती दी है। खैबर पख्तूनख्वा में भी आतंकवादी गतिविधियां पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई हैं।

    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी राजनीतिक और सामाजिक असंतोष से जूझ रहा है। दूसरी ओर अफगानिस्तान के साथ सीमा और सुरक्षा संबंधी तनाव पाकिस्तान के लिए अलग चुनौती पेश करता है। इन परिस्थितियों के बीच ईरान के साथ क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण हो गए हैं, खासकर तब जब मध्य पूर्व में तनाव का प्रभाव आसपास के देशों पर पड़ रहा है।

    तुर्की और सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग पाकिस्तान को राजनीतिक और रणनीतिक समर्थन दे सकता है, लेकिन इससे उसकी सभी आंतरिक समस्याओं का समाधान अपने आप नहीं हो जाता। तुर्की नाटो का सदस्य है और उसकी अपनी मजबूत सैन्य क्षमता है। सऊदी अरब के लिए भी ईरान और हूती गतिविधियों से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से महत्वपूर्ण रही हैं।

    भारत ने भी क्षेत्रीय स्तर पर अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया है। ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ भारत के संबंधों में रक्षा सहयोग का महत्व बढ़ा है। इजरायल के साथ भारत की सैन्य और तकनीकी साझेदारी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    ऐसे में मक्का रक्षा समझौता पाकिस्तान को एक व्यापक सुरक्षा ढांचे से जोड़ने की कोशिश जरूर है, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके अपने घरेलू हालात हैं। यदि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके जैसे क्षेत्रों में अस्थिरता बनी रहती है, तो बाहरी रक्षा सहयोग के बावजूद पाकिस्तान पर सुरक्षा और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

    पाकिस्तान के लिए आने वाला समय इस लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा कि वह इन अलग-अलग मोर्चों पर एक साथ बढ़ते दबाव को किस तरह नियंत्रित करता है। सऊदी अरब और तुर्की का समर्थन उसके लिए रणनीतिक सहारा हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आंतरिक सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक क्षमता को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी होगा।

  • रूस ने भारत तक रेल कनेक्शन की संभावना जताई, पाकिस्तान और ईरान के रास्ते व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की तैयारी पर चर्चा

    रूस ने भारत तक रेल कनेक्शन की संभावना जताई, पाकिस्तान और ईरान के रास्ते व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की तैयारी पर चर्चा

    नई दिल्ली । रूस और भारत के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने के लिए एक नए जमीनी परिवहन मार्ग की संभावना पर चर्चा शुरू हुई है। रूस ने भारत तक पहुंचने वाले संभावित वैकल्पिक रास्तों पर विचार करने की बात कही है। प्रस्तावित मार्ग रूस से शुरू होकर तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते हिंद महासागर तक पहुंच सकता है। हालांकि, अभी यह केवल प्रारंभिक प्रस्ताव है और किसी औपचारिक रेल परियोजना को मंजूरी नहीं मिली है।

    यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के कारण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। भारत और रूस के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार वर्तमान में समुद्री मार्गों पर निर्भर है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यवधान आने पर वैकल्पिक जमीनी नेटवर्क दोनों देशों के बीच माल ढुलाई के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकता है।

    रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने भारत तक पहुंचने वाले हर संभावित मार्ग पर विचार करने की जरूरत बताई है। उन्होंने बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के मद्देनजर वैकल्पिक संपर्क मार्ग विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रस्ताव का उद्देश्य केवल रेल संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और भारत के बीच व्यापार को अधिक सुरक्षित और विविध परिवहन नेटवर्क उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है।

    भारत के लिए ऐसा मार्ग ऊर्जा और व्यापार दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। समुद्री मार्गों में किसी तरह की बाधा या शिपिंग लागत में वृद्धि की स्थिति में जमीनी परिवहन अतिरिक्त विकल्प दे सकता है। रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल, उर्वरक और अन्य महत्वपूर्ण सामानों की आपूर्ति के लिए भी वैकल्पिक परिवहन नेटवर्क उपयोगी हो सकता है।

    दूसरी ओर, भारत से रूस को भेजे जाने वाले कृषि उत्पाद, दवाएं और मशीनरी जैसे सामानों के लिए भी जमीनी संपर्क समय और परिवहन लागत को प्रभावित कर सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध बढ़ने के साथ परिवहन के नए विकल्पों की जरूरत भी बढ़ी है। ऐसे में प्रस्तावित मार्ग को व्यापक यूरेशियाई व्यापार नेटवर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    भारत पहले से ही अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे के जरिए रूस और मध्य एशिया तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने की भारत की नीति भी इस प्रस्ताव से जुड़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित नए मार्ग में कई जटिल चुनौतियां मौजूद हैं।

    सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान से जुड़ी है। प्रस्तावित मार्ग पाकिस्तान से होकर गुजरता है, जबकि भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी व्यापार लंबे समय से गंभीर प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। भारत के माल को पाकिस्तान से होकर गुजरने की अनुमति और ट्रांजिट अधिकार देना इस योजना के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रश्न होगा।

    अफगानिस्तान की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति भी इस मार्ग के संचालन में बड़ी चुनौती बन सकती है। इसके अलावा अलग-अलग देशों में रेल गेज, सीमा शुल्क व्यवस्था, सीमा पार प्रक्रियाएं और नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

    फिलहाल रूस का यह प्रस्ताव शुरुआती विचार के स्तर पर है। इसे वास्तविक रेल परियोजना में बदलने के लिए भारत समेत संबंधित देशों के बीच राजनीतिक सहमति, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी समन्वय और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन जरूरी होगा। यदि भविष्य में इन बाधाओं का समाधान होता है, तो यह मार्ग भारत और रूस के बीच व्यापार के लिए समुद्री परिवहन के अलावा एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।