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  • CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार

    CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर पहली बार पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से CJP आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह भारत का घरेलू विषय है और पाकिस्तान ऐसे मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करता।

    पांचवें सप्ताह में पहुंचा आंदोलन
    CJP का प्रदर्शन अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

    ‘संसद चलो’ मार्च के बाद बढ़ा तनाव
    20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया।

    पेपर लीक मामलों पर सरकार का सख्त रुख
    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    सरकार ने फिर दिया बातचीत का प्रस्ताव
    केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी दोहराई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार सरकार चार बार CJP को बातचीत का प्रस्ताव दे चुकी है और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, CJP ने नड्डा के आवास या कार्यालय में बैठक करने से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग रखी है।

    सोनम वांगचुक ने समाप्त किया अनशन
    इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 25 दिन से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

  • CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    नई दिल्ली । भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान के मीडिया में लगातार कवरेज देखने को मिल रही है। इस बीच पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने अपने देश के मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की घटनाओं को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रही गतिविधियों और वहां के हालात को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान के मीडिया कवरेज को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि समाचार माध्यमों का दायित्व केवल पड़ोसी देशों की घटनाओं को दिखाना नहीं, बल्कि अपने देश और उससे जुड़े क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी समान प्राथमिकता देना है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई महीनों से सामने आ रहे घटनाक्रमों और स्थानीय लोगों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मीडिया में अपेक्षित स्थान क्यों नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार संतुलित पत्रकारिता के लिए सभी महत्वपूर्ण विषयों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, पाकिस्तान के कई प्रमुख समाचार माध्यमों ने भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों को विस्तार से प्रकाशित और प्रसारित किया है। विभिन्न रिपोर्टों में प्रदर्शन, विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल का उल्लेख किया गया है। कई विश्लेषणों में यह भी कहा गया कि छात्र आंदोलन ने देश की राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है और विभिन्न दलों की सक्रियता बढ़ी है।

    कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी भारत में जारी विरोध प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इन रिपोर्टों में प्रदर्शन, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और प्रशासनिक कदमों का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर देशभर में बहस तेज हुई है। हालांकि अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने घटनाक्रम को अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

    इधर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न दावे और रिपोर्ट सामने आती रही हैं। स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जनभावनाओं को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी राय रखते रहे हैं। इसी संदर्भ में कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि यदि मीडिया अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को विस्तार से दिखा सकता है तो उसे अपने क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी समान गंभीरता के साथ सामने लाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका निष्पक्ष और संतुलित सूचना उपलब्ध कराने की होती है। जब किसी एक विषय को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और दूसरे महत्वपूर्ण विषय अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं, तो मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि पाकिस्तान में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है।

    भारत में जारी छात्र प्रदर्शनों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निगरानी की जा रही है और विभिन्न विदेशी मीडिया संस्थान अपने-अपने दृष्टिकोण से घटनाक्रम का विश्लेषण कर रहे हैं। वहीं पाकिस्तान के भीतर मीडिया कवरेज को लेकर उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि समाचार प्रस्तुति और संपादकीय प्राथमिकताओं पर बहस केवल एक देश तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इन विषयों को किस प्रकार प्रस्तुत करते हैं तथा दोनों देशों से जुड़े घटनाक्रमों को किस संतुलन के साथ स्थान दिया जाता है।

  • दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..

    दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों पाकिस्तान के कराची शहर से जुड़ा एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में बुनियादी मेडिकल किट से लैस साइकिल एंबुलेंस व्यवस्था को दिखाया गया है, जिसे लेकर इंटरनेट पर विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आधुनिक दौर में जहां विश्व स्तर पर एयर एंबुलेंस और ड्रोन आधारित आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है, वहीं इस तरह की पहल को लेकर कई यूजर्स पाकिस्तान की वर्तमान स्वास्थ्य प्रणाली और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो के पीछे का वास्तविक संदर्भ और उद्देश्य काफी अलग है।

    यह वायरल सामग्री कोई नई नीति या हालिया लॉन्च नहीं है, बल्कि मई 2025 में पाकिस्तान की आपातकालीन सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ द्वारा शुरू की गई एक पुरानी प्रायोगिक परियोजना का हिस्सा है। कराची जैसे घने और अत्यधिक आबादी वाले महानगर में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अत्यंत संकरी गलियां हैं और अक्सर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे इलाकों में आपात स्थिति के दौरान पारंपरिक बड़े एंबुलेंस वाहनों का समय पर पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी भौगोलिक और यातायात संबंधी बाधा को दूर करने के लिए इस वैकल्पिक त्वरित प्रतिक्रिया मॉडल को तैयार किया गया था।

    तकनीकी रूप से यह साइकिल केवल एक सामान्य सवारी साधन नहीं है, बल्कि इसे आपातकालीन प्राथमिक उपचार के अनुकूल विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइजर, ब्लड शुगर जांचने के उपकरण, प्राथमिक चिकित्सा किट और अन्य जरूरी जीवनरक्षक दवाएं रखी जाती हैं। प्रशिक्षित स्वयंसेवक, जिनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित महिला कार्यकर्ता भी शामिल हैं, भीड़भाड़ वाले मार्गों से आसानी से निकलकर मरीज तक त्वरित पहुंच बनाते हैं। इनका मुख्य कार्य मुख्य एंबुलेंस के आगमन तक मरीज को शुरुआती महत्वपूर्ण मिनटों में प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर स्थिति को स्थिर बनाए रखना है।

    वैश्विक स्तर पर भी देखें तो कई विकसित और विकासशील देशों के पुराने शहरों तथा सघन शहरी क्षेत्रों में साइकिल या मोटरसाइकिल आधारित प्रथम प्रतिक्रिया टीमों का उपयोग एक स्थापित मानक प्रक्रिया के रूप में किया जाता है। कराची की यह व्यवस्था सामान्य एंबुलेंस सेवा का विकल्प न होकर, केवल एक सहायक आपातकालीन प्रणाली है। सोशल मीडिया पर बिना पूरे संदर्भ के शुरू हुई इस बहस के बाद अब कई विश्लेषकों का मानना है कि शहरी यातायात की जटिलताओं को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जान बचाने के लिए उठाए गए व्यावहारिक कदमों को केवल व्यंग्य के दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है।

  • भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान का नया NOTAM जारी, भारतीय विमान और सैन्य उड़ानों पर 23 अगस्त तक एयरस्पेस बंद

    भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान का नया NOTAM जारी, भारतीय विमान और सैन्य उड़ानों पर 23 अगस्त तक एयरस्पेस बंद

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक और सुरक्षा तनाव के बीच पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर लागू प्रतिबंध की अवधि एक बार फिर बढ़ा दी है। नए आदेश के अनुसार भारतीय पंजीकरण वाले सभी विमान, भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित या लीज पर लिए गए विमान तथा सैन्य उड़ानें अब 23 अगस्त 2026 की रात 11:59 बजे तक पाकिस्तान के एयरस्पेस का उपयोग नहीं कर सकेंगी। पहले यह प्रतिबंध 24 जुलाई को समाप्त होने वाला था, लेकिन अवधि खत्म होने से पहले ही इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

    यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच विमानन संबंध सामान्य नहीं हो सके हैं। सुरक्षा कारणों से लागू यह प्रतिबंध लगातार बढ़ाया जा रहा है और पिछले कई महीनों से इसकी अवधि समय-समय पर आगे बढ़ाई जाती रही है। नए नोटिस के जारी होने के बाद भारतीय विमानन कंपनियों को अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में पहले की तरह वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना होगा।

    भारत और पाकिस्तान के बीच विमानन प्रतिबंधों की शुरुआत अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तीखा तनाव देखने को मिला। इसके बाद सुरक्षा और कूटनीतिक कदमों के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की एयरलाइंस और सैन्य विमानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब से यह व्यवस्था लगातार प्रभावी बनी हुई है।

    पाकिस्तान की ओर से जारी नवीनतम NOTAM में स्पष्ट किया गया है कि भारत में पंजीकृत किसी भी विमान को उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसमें वे विमान भी शामिल हैं जो भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित या लीज पर लिए गए हैं। साथ ही सैन्य उड़ानों पर भी यह प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सीधी हवाई आवाजाही पूरी तरह प्रभावित बनी हुई है।

    इस प्रतिबंध का सबसे अधिक असर उन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ता है जिन्हें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता था। अब इन उड़ानों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है, जिससे उड़ान अवधि बढ़ने के साथ ईंधन की खपत और परिचालन लागत भी बढ़ जाती है। कई मामलों में यात्रियों को अधिक यात्रा समय और उड़ानों के संचालन में अतिरिक्त बदलाव का सामना करना पड़ता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बीच सुरक्षा और कूटनीतिक परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव नहीं आता, तब तक इस प्रकार के प्रतिबंध जारी रह सकते हैं। विमानन क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होने के लिए दोनों देशों के बीच विश्वास और संवाद की प्रक्रिया का आगे बढ़ना आवश्यक माना जा रहा है। फिलहाल 23 अगस्त तक भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद रहेगा और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन मौजूदा वैकल्पिक मार्गों के अनुसार ही जारी रहने की संभावना है।

  • Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग

    Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की केंद्रीय खुफिया एजेंसियों (Intelligence agencies) के ताजा आकलन में पाकिस्तान (Pakistan) स्थित आतंकी संगठनों (Terrorist organizations) की रणनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। खुफिया इनपुट के अनुसार, आतंकी संगठन अब महिलाओं की सुनियोजित तरीके से भर्ती के लिए गुप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं। इन प्रशिक्षण मॉड्यूल का उद्देश्य महिलाओं को आतंकवादी नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए तैयार करना है।

    ये प्रशिक्षण कार्यक्रम 2 से 4 सप्ताह तक चलते हैं और इन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा जीवन कौशल सिखाने के नाम पर आयोजित किया जाता है। हालांकि, वास्तविक मकसद महिलाओं को आतंकी संगठनों के लिए तैयार करना है। एजेंसियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के लिए बैच बनाए जाते हैं। कुछ चुनिंदा मदरसों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाता है।

    इन स्थानों पर आने वाली महिला परिजनों के जरिए भर्ती और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रचार ऐसे किया जाता है कि यह मजबूत आस्था और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए है। इसके जरिए धार्मिक प्रतिबद्धता व व्यक्तिगत विकास को प्रमुख उद्देश्य बताकर महिलाओं को आकर्षित किया जाता है।


    ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग

    प्रशिक्षण में महिलाओं को विभिन्न भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं बैक-एंड लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल सपोर्ट, तकनीकी सहायता, ड्रोन संचालन, खुफिया जानकारी जुटाना, हनी-ट्रैप के जरिए लक्ष्यों को फंसाना और समझौता कराने जैसी गतिविधियां। यह व्यवस्था आतंकियों को जमीनी स्तर पर मजबूत बैक-एंड सपोर्ट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।


    कई ठिकाने चिन्हित

    खुफिया एजेंसियों ने बहावलपुर, फैसलाबाद सहित आधा दर्जन से अधिक ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये इलाके पिछले दो दशकों से विभिन्न आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक केंद्र माने जाते रहे हैं।


    ऑपरेशन सिंदूर के बाद रणनीति में बदलाव

    खुफिया अधिकारियों का कहना है ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों की भर्ती रणनीति में यह बड़ा बदलाव देखा गया है। महिलाओं की पहचान उनकी क्षमता और भूमिका के आधार पर की जा रही है और उन्हें विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

  • PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी

    PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी


    इस्लामाबाद।
    बलूचिस्तान (Balochistan) की प्राकृतिक गैस, कोयला, खनिज और रेयर अर्थ पर निर्भर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) इस वक्त अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जिस इलाके को पाकिस्तान लंबे समय से अपना आर्थिक इंजन मानता रहा, उसी बलूचिस्तान ने अब न सिर्फ आजादी का ऐलान (Declaration of Independence) कर दिया है, बल्कि अपनी संसाधनों की आपूर्ति भी पूरी तरह रोक दी है। दरअसल, बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को स्वतंत्रता की घोषणा के साथ ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कट गई है। क्षेत्र में लगे पूर्ण शटडाउन और ट्रांसपोर्ट ब्लॉकेड ने पंजाब की औद्योगिक इकाइयों को घुटनों पर ला दिया है। अगर यही हालात रहे तो संभव है कि पाकिस्तान कटोरा लेकर घूमने के लायक भी नहीं बचेगा।

    पंजाब के प्रमुख बिजनेस लीडर्स ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबा खिंचा तो इसका असर किसी सक्रिय युद्ध से भी कहीं ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है। पंजाब चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और अन्य प्रमुख बिजनेस संगठनों के प्रतिनिधियों ने लाहौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने बलूचिस्तान पर निर्भरता को लेकर गंभीर चिंता जताई। बिजनेस लीडर्स के अनुसार, पाकिस्तान की अधिकांश भारी उद्योगों की ऊर्जा आपूर्ति, कच्चा माल और खनिज बलूचिस्तान के रास्ते ही आते हैं। शटडाउन के कारण यह पूरी सप्लाई चेन थम गई है।


    LNG और कोयला आपूर्ति पूरी तरह बंद

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्योगपतियों ने विस्तार से बताया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कोयला मुख्य रूप से बलूचिस्तान के बंदरगाहों और खदानों से पंजाब भेजा जाता है। अब दोनों क्षेत्रों के बीच सभी तरह के एक्सपोर्ट और ट्रांसपोर्ट रुक गए हैं। एक प्रमुख इंडस्ट्री लीडर ने कहा कि हमारी फैक्टरियां अब ईंधन के बिना चल नहीं सकतीं। कई प्लांट्स पहले ही बंद हो चुके हैं या उत्पादन आधा कर दिया गया है। अगर यह स्थिति 10-15 दिन और चली तो पूरे पंजाब में बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि लंबे समय तक रुकावट बनी रही तो न सिर्फ औद्योगिक उत्पादन ठप होगा, बल्कि बेरोजगारी बढ़ने से सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।


    खनिज और कच्चे माल की कमी

    बिजनेस प्रतिनिधियों ने बताया कि डुकी, चागई और अन्य खनिज क्षेत्रों से कोयला, क्रोमाइट, कॉपर और अन्य जरूरी इंडस्ट्रियल इनपुट्स की आपूर्ति रोक दी गई है। ट्रांसपोटर्स हड़ताल पर हैं क्योंकि राज्य उच्च मार्गों पर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं दी जा रही। नतीजतन, फैक्टरियों तक कच्चा माल नहीं पहुंच पा रहा। टेक्सटाइल, सीमेंट, फर्टिलाइजर, स्टील और पावर सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि कई यूनिट्स में उत्पादन 40-60 प्रतिशत तक कम हो गया है।


    बलूचिस्तान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़

    बलूच नेता मीर यार बलूच द्वारा शेयर किए गए वीडियो और उनके बयानों में कहा गया है कि बलूचिस्तान सोना, प्राकृतिक गैस, तांबा, क्रोमाइट और रेयर अर्थ का विशाल भंडार है। अगर बलूचिस्तान इन संसाधनों पर अपना पूर्ण नियंत्रण वापस ले लेता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा। मीर यार बलूच ने कहा कि हम जिसे ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ कह रहे हैं, वहां स्थिति धीरे-धीरे बलूच मुक्ति सेनाओं के नियंत्रण में आ रही है। हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का फायदा अपने लोगों को देना चाहते हैं, न कि पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार को।

    दूसरी ओर एक आर्थिक विशेषज्ञ ने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान की जीडीपी में सीधे-सीधे योगदान नहीं देता दिखता, लेकिन उसकी सप्लाई चेन पूरे देश की रीढ़ है। इन संसाधनों के बिना पाकिस्तानी सरकार दिवालिया होकर टूट जाएगी। यही कारण है कि पंजाब के बिजनेसमैनों ने सरकार से तुरंत बातचीत शुरू करने और बलूचिस्तान में शांति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह अब सिर्फ सुरक्षा मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का संकट बन चुका है।

  • भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश

    भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें मांग की गई है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता या कानूनी संरक्षक की अनुमति के बिना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और चलाने की इजाजत नहीं दी जाए।

    सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक सारा अहमद ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण और बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को देखते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की मांग उठाई।

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
    सारा अहमद पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो की अध्यक्ष भी हैं। उनके द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव पाकिस्तान की किसी प्रांतीय या संघीय विधायिका में अपनी तरह का पहला प्रस्ताव बताया जा रहा है।

    प्रस्ताव में संघीय सरकार से बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

    प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास की सुरक्षा करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल से बच्चे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, अनुचित सामग्री, मानसिक तनाव और डिजिटल लत जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐज वेरिफिकेशन की मांग
    प्रस्ताव में पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) से देश में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रभावी उम्र सत्यापन प्रणाली (Age Verification System) लागू करने की मांग भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित नियमों का सही तरीके से पालन हो सके।

    दुनिया के कई देश भी बना रहे हैं सख्त नियम
    यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ऑनलाइन गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, साइबर उत्पीड़न और हानिकारक कंटेंट के संपर्क के बीच संबंधों को देखते हुए सरकारें नियमन बढ़ा रही हैं।

    कई देशों में लागू हो चुके हैं आयु आधारित नियम
    ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों समेत दुनिया के कई देशों ने बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध लागू किए हैं। वहीं कुछ देश अधिक सख्त आयु सत्यापन व्यवस्था और ऑनलाइन बाल सुरक्षा कानूनों पर काम कर रहे हैं।

  • बलूचिस्तान ने खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने का किया दावा, ‘85% क्षेत्र पर नियंत्रण’ का बयान वायरल, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

    बलूचिस्तान ने खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने का किया दावा, ‘85% क्षेत्र पर नियंत्रण’ का बयान वायरल, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित घोषणा पत्र में ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के नाम से क्षेत्र को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किए जाने की बात कही गई है। इस दस्तावेज में यह भी दावा किया गया है कि बलूचिस्तान की सेना ने क्षेत्र के लगभग 85 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। हालांकि, इस दावे की अब तक किसी आधिकारिक सरकारी स्रोत, अंतरराष्ट्रीय संस्था या स्वतंत्र एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन दावों को सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    वायरल हो रहे कथित घोषणा पत्र में कहा गया है कि नए राष्ट्र के लिए अलग झंडा, राष्ट्रगान, मुद्रा और प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर दी गई है। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि गैस क्षेत्र, खनिज संसाधन और कोयला खदानों पर नए प्रशासन का नियंत्रण स्थापित हो चुका है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से इस्तीफा देकर बलूचिस्तान का समर्थन किया है। हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान का सबसे संवेदनशील और अशांत क्षेत्र रहा है। यहां वर्षों से अलगाववादी गतिविधियां, सुरक्षा बलों और विद्रोही संगठनों के बीच संघर्ष तथा राजनीतिक असंतोष देखने को मिलता रहा है। कई अवसरों पर स्थानीय संगठनों और नागरिक समूहों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों का विरोध किया है और अधिक अधिकारों अथवा स्वतंत्रता की मांग उठाई है। हाल के वर्षों में क्षेत्र में हिंसा और सुरक्षा संबंधी घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

    पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और सशस्त्र समूहों के बीच कई मुठभेड़ों की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार विभिन्न अभियानों के जरिए उग्रवादी गतिविधियों पर नियंत्रण पाने का दावा करती रही हैं। दूसरी ओर, अलगाववादी संगठन भी समय-समय पर अपने प्रभाव और कार्रवाई को लेकर दावे करते रहे हैं। मौजूदा वायरल घोषणा भी ऐसे ही संवेदनशील माहौल के बीच सामने आई है।

    अब तक पाकिस्तान सरकार की ओर से इस कथित स्वतंत्रता घोषणा पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी तरह संयुक्त राष्ट्र, प्रमुख वैश्विक शक्तियों या किसी मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय संगठन ने भी बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्वीकार करने की घोषणा नहीं की है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी नए राष्ट्र की स्थिति और वैधता के लिए व्यापक राजनयिक मान्यता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसे दावों की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से किए बिना उन्हें तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के आधार पर केवल इतना स्पष्ट है कि स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किए जाने और 85 प्रतिशत क्षेत्र पर नियंत्रण के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तान सरकार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विश्वसनीय एजेंसियों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इस दावे की वास्तविकता का निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

  • अरब सागर में लापता पाकिस्तानी कार्गो विमान का मिला मलबा, पांचों क्रू मेंबर की तलाश के लिए बचाव अभियान तेज

    अरब सागर में लापता पाकिस्तानी कार्गो विमान का मिला मलबा, पांचों क्रू मेंबर की तलाश के लिए बचाव अभियान तेज

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में शारजाह से कराची जा रहा एक कार्गो विमान अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान के रडार से संपर्क टूटने के कई घंटे बाद उसका मलबा समुद्र में बरामद कर लिया गया है। राहत एवं बचाव एजेंसियां अब विमान में सवार पांचों क्रू मेंबर की तलाश में व्यापक अभियान चला रही हैं। इस घटना ने पाकिस्तान के विमानन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्गो विमान संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह से पाकिस्तान के कराची के लिए उड़ान भरकर रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान अरब सागर के ऊपर अचानक उसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। इसके बाद विमान रडार से भी गायब हो गया, जिससे तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया। कई घंटों तक लगातार तलाश के बाद विमान का मलबा बलूचिस्तान तट के निकट ओरमारा बंदरगाह से लगभग 53 नॉटिकल मील दक्षिण में समुद्र से बरामद किया गया।

    पाकिस्तान के विमानन अधिकारियों ने मलबा मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि राहत दलों ने समुद्री क्षेत्र में लंबे समय तक खोज अभियान चलाया। मलबे की पहचान संबंधित कार्गो विमान के रूप में कर ली गई है। हालांकि विमान में सवार पांचों क्रू मेंबर का अब तक कोई पता नहीं चल सका है और उनकी तलाश लगातार जारी है। बचाव अभियान में समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित विभागों को भी शामिल किया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त विमान एक बोइंग 737 कार्गो विमान था, जिसकी आयु लगभग 27 वर्ष बताई जा रही है। विमान पूरी तरह माल परिवहन के लिए संचालित किया जा रहा था और उसमें केवल चालक दल के सदस्य ही मौजूद थे। सभी पांचों क्रू मेंबर पाकिस्तानी नागरिक बताए गए हैं। फिलहाल उनकी स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विमान के रडार से गायब होने के पीछे तकनीकी या नेविगेशन संबंधी समस्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। विमानन विशेषज्ञों की टीम अब उपलब्ध तकनीकी सूचनाओं, उड़ान रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। दुर्घटना की वजह स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, मौसम या किसी अन्य कारण से हुआ।

    विमान दुर्घटना के बाद संबंधित एजेंसियों ने समुद्री क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और खोज अभियान को तेज किया गया है। राहत दल आधुनिक उपकरणों और नौसैनिक संसाधनों की मदद से लापता चालक दल का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं। समुद्र की परिस्थितियों और मौसम को ध्यान में रखते हुए अभियान लगातार जारी रखा गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं की निष्पक्ष और विस्तृत जांच विमानन सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। जांच रिपोर्ट से न केवल दुर्घटना के कारणों का पता चलेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा सुधारों और संचालन संबंधी उपायों की दिशा भी तय की जा सकेगी। फिलहाल सभी की निगाहें खोज अभियान और जांच एजेंसियों की अगली आधिकारिक जानकारी पर टिकी हुई हैं।

  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, सीजफायर टूटने के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई, पाकिस्तान ने संयम और बातचीत की अपील की

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, सीजफायर टूटने के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई, पाकिस्तान ने संयम और बातचीत की अपील की


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम युद्धविराम प्रभावी नहीं रह गया है। इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। ताजा घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की अपील की है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच लागू अंतरिम युद्धविराम अब प्रभावी नहीं है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और संवाद की संभावना अभी भी बनी हुई है।

    संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, किसी भी प्रकार की उकसाने वाली कार्रवाई से बचने और विवाद का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से निकालने का आग्रह किया है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है और यदि आवश्यकता हुई तो वह मध्यस्थता के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।

    क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य टकराव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है और किसी भी बड़े संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक और विभिन्न देश इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    तनाव बढ़ने के साथ ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिली है। निवेशकों के बीच यह आशंका बनी हुई है कि यदि संघर्ष और व्यापक हुआ तो समुद्री व्यापार मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    ईरान की ओर से भी हालिया घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया गया है। वहां के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने भी अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई है। दोनों पक्षों के सख्त बयानों ने तनाव कम होने की उम्मीदों को फिलहाल कमजोर किया है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश और संगठन लगातार संयम बरतने तथा संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र को व्यापक अस्थिरता की ओर ले जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता और दोनों देशों की अगली रणनीति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।