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  • सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को दी चेतावनी, तेहरान ने कहा- हूतियों पर हमारा नियंत्रण नहीं

    सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को दी चेतावनी, तेहरान ने कहा- हूतियों पर हमारा नियंत्रण नहीं

    नई दिल्ली । सऊदी अरब पर हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को बड़ी चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने पिछले 24 घंटे के दौरान तेहरान तक यह संदेश पहुंचाया है कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके हूतियों को सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए कहे। ईरान को यह मैसेज तब दिया गया है जब हूतियों ने बीते दिनों सऊदी के तेल ठिकानों पर हमले किए थे।

    पाकिस्तान की इस दखल को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से सऊदी अरब और ईरान, दोनों के साथ अपने रिश्तों को संभालता रहा है। अब इस्लामाबाद को डर है कि हूती हमले अगर और बढ़े तो प्रॉक्सी जंग एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट में बदल सकती है।

    ईरान बोला- हूतियों पर हमारा कंट्रोल नहीं

    एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने मंगलवार को तेहरान तक अपना संदेश पहुंचाया था। ईरान की तरफ से जवाब दिया गया कि ईरान हूतियों को कंट्रोल नहीं करता। हालांकि, दो ईरानी सूत्रों ने अलग दावा किया है। उनके मुताबिक, तेहरान ने पिछले हफ्ते हूतियों से सऊदी अरब पर हमले करने को कहा था।

    दावा है कि ईरान ने इसके लिए अतिरिक्त पैसा और हथियार देने का वादा भी किया था। साथ ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कई कमांडर हमलों के तालमेल में मदद के लिए यमन पहुंचे थे।

    सऊदी की रक्षा में पाकिस्तान-तुर्की की तैयारी

    पाकिस्तान की चेतावनी का एक बड़ा कारण सऊदी अरब के साथ उसका डिफेंस पैक्ट भी है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले ही कहा है कि अगर हमले सऊदी की जमीन तक फैलते हैं तो रियाद, अंकारा और इस्लामाबाद के बीच ज्वाइंट सिक्योरिटी अरेंजमेंट सामने आ सकता है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि सऊदी अधिकारियों ने रियाद में पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की है। तीनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि उनकी सेनाएं यमन में दाखिल नहीं होंगी और किसी भी जवाबी कार्रवाई को सऊदी की जमीन से अंजाम दिया जाएगा।

  • हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ 14 पारियों में पूरे किए 1000 टेस्ट रन, लेकिन सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा बरकरार

    हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ 14 पारियों में पूरे किए 1000 टेस्ट रन, लेकिन सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा बरकरार

    नई दिल्ली । हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे टेस्ट में अर्धशतक लगाकर खास उपलब्धि हासिल की। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ 14 पारियों में 1000 रन पूरे कर लिए। हालांकि, इस मामले में वह पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए।

    इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जा रहा है। पाकिस्तान की पहली पारी 133 रनों पर सिमटने के बाद इंग्लैंड की शुरुआत भी मुश्किल रही। मेजबान टीम ने 39 रन के स्कोर पर अपने तीन विकेट गंवा दिए थे।

    ऐसे समय में हैरी ब्रूक ने पारी को संभाला और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एमिलियो गे के साथ शतकीय साझेदारी की, जिससे इंग्लैंड को पाकिस्तान के खिलाफ पहली पारी में बढ़त हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद ब्रूक ने अपना अर्धशतक पूरा किया और इसी के साथ पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में 1000 रन भी पूरे कर लिए।

    हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ यह आंकड़ा नौ टेस्ट की 14 पारियों में हासिल किया है। पाकिस्तान के खिलाफ उनका बल्लेबाजी औसत 79.46 का है। इस उपलब्धि के बावजूद वह सबसे कम पारियों में पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम नहीं कर सके।

    वीरेंद्र सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन सिर्फ 11 पारियों में पूरे किए थे। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज डेविड वॉर्नर ने भी पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन बनाने के लिए 11 पारियां ही ली थीं। इस तरह सहवाग और वॉर्नर इस सूची में संयुक्त रूप से शीर्ष पर बने हुए हैं।

    ब्रूक ने हालांकि कुछ दिग्गज बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग से कम पारियों में पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन पूरे किए। दोनों बल्लेबाजों ने यह उपलब्धि 15-15 पारियों में हासिल की थी।

    इस सूची में उस्मान ख्वाजा भी 14 पारियों के साथ ब्रूक के बराबर हैं। वहीं सहवाग और वॉर्नर 11 पारियों के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद ख्वाजा और ब्रूक का नंबर आता है, जबकि संगकारा और पोंटिंग ने 15 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था।

    तीसरे टेस्ट के पहले दिन पाकिस्तान की टीम 133 रन पर ऑलआउट हो गई। इसके जवाब में इंग्लैंड ने दिन का खेल समाप्त होने तक चार विकेट खोकर 156 रन बना लिए थे। इस तरह मेजबान टीम को पहली पारी में 23 रन की बढ़त हासिल हो गई।

    हैरी ब्रूक अभी भी क्रीज पर मौजूद हैं, जिससे इंग्लैंड को अपनी बढ़त को और मजबूत करने की उम्मीद है। टीम की कोशिश दूसरे दिन अपने स्कोर को 300 रन के पार पहुंचाने की होगी। इससे पाकिस्तान पर दबाव और बढ़ सकता है।

    तीन मैचों की सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबले इंग्लैंड ने जीते हैं। ऐसे में टीम पहले ही सीरीज में अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है। अब उसकी नजर तीसरा टेस्ट जीतकर सीरीज में पाकिस्तान का क्लीन स्वीप करने पर है। ब्रूक की पारी इस मुकाबले में इंग्लैंड के लिए अहम साबित हो रही है।

  • सिंध के बंटवारे के प्रस्ताव पर भड़के बिलावल भुट्टो, मोहसिन नकवी को संसद में मुद्दा उठाने की दी चुनौती

    सिंध के बंटवारे के प्रस्ताव पर भड़के बिलावल भुट्टो, मोहसिन नकवी को संसद में मुद्दा उठाने की दी चुनौती


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में मौजूदा प्रांतों के विभाजन को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया सिंध से सामने आई है, जहां पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है। पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने प्रांतों के बंटवारे की पैरवी कर रहे पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी पर निशाना साधते हुए उन्हें संसद में आकर इस मुद्दे पर बात रखने की चुनौती दी है।

    बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि मोहसिन नकवी को प्रांतों के विभाजन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी बिजनेस फोरम में चर्चा करने के बजाय देश की संसद में अपनी बात रखनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। बिलावल ने नकवी को सलाह देते हुए स्पष्ट किया कि यदि सरकार प्रांतों के पुनर्गठन का प्रस्ताव आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसे संसद के सामने रखना चाहिए।

    बिलावल अपने पिता और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ लंदन पहुंचे हैं। इसी दौरान उन्होंने प्रांतों के विभाजन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। मोहसिन नकवी अलग-अलग मंचों पर प्रांतों के बंटवारे के विचार के समर्थन में सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में अलग-अलग दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।

    पाकिस्तान में मौजूदा चार प्रांतों को विभाजित करके 12 से 15 नए छोटे प्रांत बनाए जाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इस योजना के तहत पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे चार बड़े प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने का विचार है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक बड़े प्रांत को तीन छोटे हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है, जिससे देश में कुल 12 से 15 नए प्रांत बनाए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

    इसी प्रस्ताव को लेकर शहबाज शरीफ सरकार के कई मंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार और पाकिस्तानी सेना की ओर से इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा प्रांत बहुत बड़े और केंद्रीयकृत हो गए हैं। उनका कहना है कि बड़े प्रांतों के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का वितरण प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रहा है।

    प्रस्ताव के समर्थकों के अनुसार छोटे प्रांत बनने से प्रशासन को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस विचार का राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम जैसी पार्टियां प्रांतों के विभाजन के प्रस्ताव के खिलाफ हैं।

    पीपीपी के विरोध के पीछे सिंध में उसके राजनीतिक आधार को लेकर चिंता भी बताई जा रही है। पार्टी को आशंका है कि सिंध के विभाजन से वहां उसका राजनीतिक आधार कमजोर हो सकता है। इसी वजह से बिलावल भुट्टो जरदारी ने इस प्रस्ताव पर खुलकर आपत्ति जताई है और इसे संसद में चर्चा के लिए लाने की बात कही है। सिंध के विभाजन को लेकर उनका रुख पाकिस्तान में चल रही प्रांतों के पुनर्गठन की बहस में महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया है।

  • मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने के पाकिस्तानी दावे को तालिबान ने खारिज किया, काबुल ने जवाब में रखी स्थिति स्पष्ट

    मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने के पाकिस्तानी दावे को तालिबान ने खारिज किया, काबुल ने जवाब में रखी स्थिति स्पष्ट


    नई दिल्ली ।मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के दावे पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान के उस दावे से इनकार किया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर अफगानिस्तान में छिपकर रह रहा है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में मौजूद नहीं है।

    अफगान पक्ष ने यह भी कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान के साथ तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर दोनों देशों के दावों में लंबे समय से अंतर रहा है।

    अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि मसूद अजहर उनके देश में मौजूद नहीं है। तालिबान की ओर से पहले भी इस तरह का इनकार किया जा चुका है। सितंबर 2022 में तालिबान के एक प्रवक्ता ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने से जुड़ी खबरों को गलत बताया था।

    अफगान पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान ने भी मसूद अजहर के अफगानिस्तान में मौजूद होने की कोई पुख्ता आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।

    पाकिस्तान के मुताबिक मसूद अजहर मई 2019 में डूरंड रेखा पार करके अफगानिस्तान चला गया था। इसके बाद से वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, अफगान सरकार इस दावे को स्वीकार नहीं करती है और अब विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने भी उसकी मौजूदगी से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।

    तालिबान ने अपने बयान में एक बार फिर यह रुख दोहराया कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान को पाकिस्तान के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि मसूद अजहर का नाम लंबे समय से दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों में सामने आता रहा है।

    मसूद अजहर को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव की चर्चा होती रही है। पाकिस्तान पहले वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की निगरानी सूची में भी रह चुका है। उसे 2018 से 2022 के बीच इस सूची में रखा गया था।

    उस अवधि में आतंकवाद के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को रोकने और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की व्यवस्था पर चिंता जताई गई थी। निगरानी सूची से बाहर आने के लिए पाकिस्तान को कई कदम उठाने पड़े थे। इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल थी।

    अब मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर पाकिस्तान के दावे और तालिबान के इनकार ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अफगानिस्तान ने जहां अजहर के अपने देश में होने से इनकार किया है, वहीं पाकिस्तान अपने पुराने दावे पर कायम रहा है।

  • भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट सीरीज से पहले नक्शे को लेकर विवाद, वीडियो में गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का हिस्सा दिखाया गया

    भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट सीरीज से पहले नक्शे को लेकर विवाद, वीडियो में गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का हिस्सा दिखाया गया


    नई दिल्ली ।
    भारत और अफगानिस्तान के बीच आगामी क्रिकेट सीरीज से पहले जारी एक प्रमोशनल वीडियो को लेकर पाकिस्तान में नाराजगी सामने आई है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के इस वीडियो में भारत का नक्शा दिखाया गया, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा दर्शाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई है।

    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह प्रमोशनल वीडियो साझा किया था। इसमें भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली आगामी सीरीज को लेकर उत्साह दिखाने की कोशिश की गई। हालांकि वीडियो में इस्तेमाल किए गए नक्शे को लेकर पाकिस्तान में विवाद खड़ा हो गया।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार झड़प और गोलीबारी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान पर यह आरोप भी लगाया जाता रहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमलों के लिए किया जाता है। अफगानिस्तान इन आरोपों को लेकर अलग रुख रखता है।

    ऐसे माहौल में अफगान क्रिकेट बोर्ड के वीडियो में भारत का नक्शा दिखाया जाना पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस वीडियो पर आपत्ति जताई है। हालांकि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने को लेकर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    भारत और अफगानिस्तान के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच क्रिकेट के साथ आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में भी संपर्क बना हुआ है। भारत और तालिबान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थिति अलग होने के बावजूद दोनों देशों के बीच संपर्क और सहयोग के रास्ते खुले हुए हैं। भारत अफगानिस्तान में आर्थिक विकास से जुड़े प्रयासों में भी सहयोग करता रहा है।

    जानकारों के अनुसार, अफगानिस्तान के इस कदम को उसकी स्वतंत्र विदेश नीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है। भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश के बीच अफगानिस्तान पाकिस्तान की आपत्तियों से अलग अपनी प्राथमिकताएं दिखाना चाहता है।

    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने वीडियो के साथ जारी संदेश में भारत और अफगानिस्तान की आगामी सीरीज को दोनों देशों के बीच संबंधों से जोड़ते हुए उत्साह व्यक्त किया। बोर्ड के अनुसार, यह सीरीज दोनों देशों को करीब लाने वाली है और दोनों देशों के साझा इतिहास तथा संस्कृति से भी जुड़ी है।

    भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की यह सीरीज 13, 15 और 17 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जानी है। सीरीज को लेकर दोनों देशों के क्रिकेट प्रशंसकों में भी उत्सुकता है।

    इसी बीच भारत और अफगानिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है। दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है। इसमें सीमा शुल्क और डेटा साझा करने से जुड़े सहयोग को बढ़ाना, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि क्षेत्र में नियामक सहयोग, व्यापार संपर्क बेहतर करना तथा निवेश और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना शामिल है।

    इस पूरे घटनाक्रम में क्रिकेट सीरीज के प्रचार के लिए जारी एक वीडियो ने भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल विवाद का केंद्र वीडियो में दिखाया गया नक्शा और उस पर पाकिस्तान की आपत्ति है।

  • पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज का बड़ा दावा, विश्व कप जीत के बाद खिलाड़ियों में बढ़ी कप्तानी की होड़ और जिम्मेदारी हुई कमजोर

    पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज का बड़ा दावा, विश्व कप जीत के बाद खिलाड़ियों में बढ़ी कप्तानी की होड़ और जिम्मेदारी हुई कमजोर

    नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मौजूदा प्रदर्शन और लगातार बदलते हालात को लेकर पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने टीम की मौजूदा स्थिति के पीछे कई कारणों का जिक्र करते हुए 2021 टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मिली ऐतिहासिक जीत को एक अहम मोड़ बताया। यूसुफ के मुताबिक उस मुकाबले के बाद टीम के कुछ खिलाड़ियों में आत्मसंतुष्टि बढ़ी और आगे बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी निरंतरता कमजोर पड़ गई।

    2021 के टी20 विश्व कप में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हराया था। यह विश्व कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की पहली जीत थी। मुकाबले में पाकिस्तान ने 152 रन का लक्ष्य बिना कोई विकेट गंवाए हासिल किया था। बाबर आजम ने नाबाद 68 रन और मोहम्मद रिजवान ने 79 रन की पारी खेलकर टीम को शानदार जीत दिलाई थी। उस समय इस सफलता को पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था।

    हालांकि, मोहम्मद यूसुफ का मानना है कि इसी जीत के बाद टीम के भीतर अपेक्षाओं और रवैये में बदलाव आने लगा। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को लगा कि उन्होंने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है, जबकि किसी भी टीम के लिए एक बड़ी जीत के बाद भी लगातार सुधार और मेहनत जरूरी होती है। उनके मुताबिक सफलता के बाद जमीन से जुड़े रहना और अपनी कमियों पर काम करते रहना बेहद महत्वपूर्ण है।

    यूसुफ ने खिलाड़ियों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी अच्छे प्रदर्शन के बाद खुद को बहुत बड़ा समझने लगे और विरोधी टीम का सम्मान करना कम कर दे, तो इससे समस्याएं पैदा होती हैं। उनके मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसी कई परेशानियां सामने आई हैं, जिनका असर टीम के प्रदर्शन पर दिखाई दिया।

    पूर्व क्रिकेटर ने टीम के भीतर कप्तानी को लेकर पैदा हुई प्रतिस्पर्धा को भी नुकसानदायक बताया। उनका दावा है कि 2021 की जीत के बाद टीम में कई लोग कप्तान बनने की कोशिश में लगे रहे। इससे खिलाड़ियों का ध्यान अपने प्रदर्शन और टीम की जरूरतों से हटकर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की तरफ गया।

    पाकिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में वनडे विश्व कप, टी20 विश्व कप, एशिया कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंटों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया। लगातार अस्थिरता, कप्तानी में बदलाव और टीम संयोजन से जुड़े फैसलों ने भी पाकिस्तान क्रिकेट की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

    यूसुफ ने क्रिकेट बोर्ड की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार बोर्ड ने टीम को संभालने के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए और अलग-अलग कोचों को जिम्मेदारी दी। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि आखिरकार बोर्ड को कुछ कड़े फैसले लेने पड़े और वह मौजूदा फैसलों का समर्थन करते हैं।

    उनकी टिप्पणियों से साफ है कि पाकिस्तान क्रिकेट की समस्या को वह केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं मानते। उनके मुताबिक टीम के भीतर अनुशासन, जिम्मेदारी, नेतृत्व और निरंतरता जैसे पहलुओं को मजबूत करना जरूरी है। पाकिस्तान क्रिकेट के लिए आगे की राह आसान नहीं है और टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए प्रदर्शन के साथ-साथ सोच और कार्यशैली में भी सुधार करना होगा।

  • महिला एशिया कप में भारत के बाद श्रीलंका अंतिम चार में पहुंचा, पाकिस्तान के पास आज सेमीफाइनल बचाने का आखिरी मौका

    महिला एशिया कप में भारत के बाद श्रीलंका अंतिम चार में पहुंचा, पाकिस्तान के पास आज सेमीफाइनल बचाने का आखिरी मौका

    नई दिल्ली । महिला एशिया कप 2026 के सेमीफाइनल की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है। श्रीलंका ने बांग्लादेश को चार विकेट से हराकर अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के बाद श्रीलंका टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है। अब बाकी दो स्थानों के लिए मुकाबला रोमांचक हो गया है और पाकिस्तान की नजर आज हांगकांग के खिलाफ होने वाले मैच पर टिकी है।

    श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच मुकाबला बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा। बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के सामने 115 रन का लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान चमारी अटापट्टू महज एक रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद लगातार विकेट गिरने से टीम मुश्किल स्थिति में पहुंच गई।

    पावरप्ले के दौरान श्रीलंका ने कई महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए। इसके बाद विशमी गुणरत्ने और कविशा दिलहारी के आउट होने से परेशानी और बढ़ गई। एक समय श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर सिर्फ 44 रन था। ऐसा लग रहा था कि बांग्लादेश मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना चुका है और श्रीलंका के लिए लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल होगा।

    इसी संकट के समय हर्षिता समरविक्रमा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने नीलक्षिका सिल्वा के साथ मिलकर छठे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी की। दोनों ने 38 रन जोड़कर श्रीलंका की उम्मीदों को जिंदा रखा। इसके बाद हर्षिता ने आखिरी ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।

    श्रीलंका को आखिरी तीन ओवर में जीत के लिए 29 रन चाहिए थे। दबाव के बावजूद हर्षिता ने बड़े शॉट लगाने जारी रखे। 18वें ओवर में उन्होंने 16 रन जुटाए और अगले ओवर में 11 रन बनाकर टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया। इसके बाद श्रीलंका ने 19वें ओवर की दूसरी गेंद पर लक्ष्य हासिल कर लिया और चार विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ श्रीलंका ने ग्रुप बी में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। टीम ने ग्रुप चरण में लगातार तीन मुकाबले जीतकर अंतिम चार में जगह बनाई है। इससे पहले भारत भी ग्रुप चरण में लगातार जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में पहुंच चुका है।

    भारत ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका है और उसका सेमीफाइनल मुकाबला 10 सितंबर को खेला जाएगा। ग्रुप बी की दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम भारत से भिड़ेगी। वहीं श्रीलंका 11 सितंबर को सेमीफाइनल में ग्रुप ए की दूसरे स्थान वाली टीम के खिलाफ उतरेगा। दोनों सेमीफाइनल मुकाबले दुबई में खेले जाएंगे।

    अब पाकिस्तान के लिए आज का मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। पाकिस्तान को हांगकांग के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी ताकि वह सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर सके। भारत के खिलाफ पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा था, इसलिए टीम के लिए अब किसी भी तरह की चूक भारी पड़ सकती है।

    ग्रुप बी में बांग्लादेश के पास अभी भी एक मुकाबला बाकी है, जबकि ग्रुप ए में पाकिस्तान और हांगकांग के बीच मुकाबला स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में महिला एशिया कप के अंतिम दो सेमीफाइनल स्थानों के लिए आने वाले मुकाबले बेहद निर्णायक रहने वाले हैं।

  • ND vs PAK: भारत-पाकिस्तान के महामुकाबले की बढ़ सकती है संख्या, ICC ट्राई-सीरीज या चार टीमों वाले टूर्नामेंट पर कर रहा विचार

    ND vs PAK: भारत-पाकिस्तान के महामुकाबले की बढ़ सकती है संख्या, ICC ट्राई-सीरीज या चार टीमों वाले टूर्नामेंट पर कर रहा विचार

    नई दिल्ली । क्रिकेट फैन्स के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबलों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा से दर्शकों के लिए बेहद खास रहे हैं और अब आने वाले समय में इनके बीच ज्यादा मैच देखने का रास्ता खुल सकता है।

    भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं खेली जा रही है। दोनों टीमें मुख्य रूप से बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में आमने-सामने आती हैं। ऐसे में दोनों देशों के क्रिकेट फैन्स को भारत-पाकिस्तान मुकाबले के लिए बड़े टूर्नामेंट का इंतजार करना पड़ता है।

    अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कार्यक्रम को लेकर एक नए प्रारूप पर विचार किया जा रहा है। इसमें भारत और पाकिस्तान को एक साथ शामिल करते हुए ट्राई-सीरीज या चार टीमों वाली बहुराष्ट्रीय सीरीज आयोजित करने का विकल्प सामने आया है। इस तरह के आयोजन का उद्देश्य रोमांचक मुकाबलों के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यावसायिक आकर्षण को बढ़ाना भी हो सकता है।

    अगर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाता है तो भारत और पाकिस्तान के बीच एक ही टूर्नामेंट में मुकाबले होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि अभी इसे अंतिम कार्यक्रम या आधिकारिक तौर पर तय सीरीज नहीं माना जा सकता है। प्रस्तावित प्रारूप पर चर्चा और संभावनाओं के स्तर पर ही जानकारी सामने आई है।

    भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबलों की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। दोनों टीमों के बीच होने वाला मैच दुनियाभर में बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करता है। यही वजह है कि किसी भी बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में दोनों टीमों के आमने-सामने आने पर मुकाबले को लेकर उत्साह काफी बढ़ जाता है।

    हाल के वर्षों में दोनों टीमों के बीच मुकाबले मुख्य रूप से आईसीसी और अन्य बहुराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक सीमित रहे हैं। ऐसे में अगर नया बहुराष्ट्रीय प्रारूप तैयार होता है और उसमें भारत तथा पाकिस्तान को जगह मिलती है, तो क्रिकेट प्रशंसकों को दोनों टीमों के बीच ज्यादा मुकाबले देखने का अवसर मिल सकता है।

    ट्राई-सीरीज के प्रारूप में तीन टीमें हिस्सा लेती हैं और टूर्नामेंट के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबले खेले जाते हैं। इसी तरह चार टीमों के प्रारूप में मुकाबलों की संख्या और संभावित कार्यक्रम को अलग तरीके से तैयार किया जा सकता है। भारत और पाकिस्तान की मौजूदगी ऐसे किसी आयोजन को दर्शकों के लिहाज से बेहद आकर्षक बना सकती है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तरह की किसी सीरीज को लेकर अंतिम घोषणा नहीं हुई है। प्रस्ताव पर आगे क्या फैसला लिया जाता है और भारत तथा पाकिस्तान को इसमें किस तरह शामिल किया जाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

    अगर यह योजना आकार लेती है तो क्रिकेट फैन्स के लिए यह बड़ी खुशखबरी साबित हो सकती है। भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर हमेशा रहने वाला रोमांच नए बहुराष्ट्रीय प्रारूप के जरिए और बढ़ सकता है। इससे दोनों टीमों के बीच मुकाबलों की संख्या बढ़ने की संभावना भी मजबूत हो सकती है।

  • आसिम मुनीर को मिली तीनों सेनाओं की कमान, नए कानून से पाकिस्तान में सेना प्रमुख की ताकत और सैन्य ढांचे में बड़ा बदलाव

    आसिम मुनीर को मिली तीनों सेनाओं की कमान, नए कानून से पाकिस्तान में सेना प्रमुख की ताकत और सैन्य ढांचे में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की संसद ने देश के इतिहास में पहली बार एक ही सैन्य अधिकारी को सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की कमान सौंपी है। इससे उन्हें अभूतपूर्व कानूनी ताकत मिली है। अगस्त के अंत में नेशनल असेंबली ने डिफेंस फोर्सेस ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 पारित कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) का नया पद बनाया। नए कानून के तहत फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को देश का पहला सीडीएफ नियुक्त किया गया। वह अपने मौजूदा सेना प्रमुख के पद के साथ नई जिम्मेदारी को भी संभालेंगे।

    1976 के बाद पाकिस्तानी सैन्य कमान में सबसे बड़ा बदलाव

    सीडीएफ के पद के साथ मुनीर पाकिस्तान में और ताकतवर बनकर उभरे हैं। 1976 के बाद से यह पाकिस्तानी सैन्य कमान में सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले 1976 में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद बनाया गया था, लेकिन उसके पास नौसेना या वायुसेना को संचालित करने की कोई औपचारिक कानूनी ताकत नहीं थी। पुराने पद का काम सिर्फ तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बिठाना था और उसका नौसेना या वायुसेना पर कोई अधिकार नहीं था। इसके उलट सीडीएफ के पास तीनों सेनाओं पर कानूनी ऑपरेशनल कमांड है। यह सीधे सरकार को रिपोर्ट करेगा और इसके पास ऐसे फैसले लागू करने की शक्ति है जो पुराने पद के पास कभी नहीं थी।

    परमाणु कमान पर सिर्फ सेना के पास

    नए नियमों के अनुसार, परमाणु बलों की कमान का पद अब कानूनी रूप से केवल सेना के पास होगा। विश्लेषक मजीद निजामी का कहना है कि इस बदलाव से नौसेना और वायुसेना के लिए वह भूमिका औपचारिक रूप से खत्म हो गई है।

    संशोधन पर तीखी बहस

    इस संशोधन पर पाकिस्तान के अंदर तीखी बहस छिड़ गई है। समर्थकों का तर्क है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्धक तैयारियों में मजबूती आएगी। रावलपिंडी के सेवानिवृत्त जनरल नईम खालिद लोधी और सुप्रीम कोर्ट के वकील हाफिज अहसान अहमद खोखर जैसे समर्थकों का मानना है कि यह ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसी पश्चिमी प्रणालियों की तर्ज पर प्रधानमंत्री से लेकर जमीनी इकाइयों तक बेहतर समन्वय, साइबर-ड्रोन अभियानों में तेजी और संकट के समय त्वरित निर्णय लेने के लिए एक वैध कदम है। वहीं आलोचकों की चिंता है कि यह कदम देश के संविधान और नागरिक नियंत्रण के संतुलन को कमजोर करेगा तथा सेना के प्रभाव को और अधिक स्थायी बनाता है। अब्दुल मोइज जाफेरी और कर्नल इनाम रहीम जैसे आलोचकों का तर्क है कि इससे एक सेवा प्रमुख दूसरे के अधीन हो गया है और सीडीएफ को अब कैबिनेट की मंजूरी के बिना केवल एक पत्र के जरिये अधिकारियों को बर्खास्त करने की शक्ति मिल गई है।

  • मोहम्मद मुइज्जू की यात्रा से पहले मालदीव की सैन्य विमान देने की तैयारी में पाकिस्तान?

    मोहम्मद मुइज्जू की यात्रा से पहले मालदीव की सैन्य विमान देने की तैयारी में पाकिस्तान?


    नई दिल्ली।
    मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्टूबर में प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर पाकिस्तान की तैयारियों का एक कथित गोपनीय दस्तावेज सामने आया है। दस्तावेज के मुताबिक, पाकिस्तान मालदीव को अपने इस्तेमाल किए हुए सैन्य विमान देने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इसके अलावा मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण, तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की योजना भी प्रस्तावित है।

    दस्तावेज में इस पूरे प्रयास को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध मजबूत करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम के तौर पर बताया गया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों ने इसके रणनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

    13 अगस्त की चिट्ठी में क्या है?

    दावे के मुताबिक, 13 अगस्त 2026 को पाकिस्तान स्थित मालदीव के उच्चायोग ने रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान रक्षा मंत्रालय को एक गोपनीय पत्र भेजा। इस पत्र की जानकारी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई।

    दस्तावेज के अनुसार, 20 से 22 अक्टूबर के बीच मालदीव के साथ एक बड़ी सैन्य डील को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर समेत संबंधित विभाग इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में बताए गए हैं।

    पत्र में यह सुझाव भी दिया गया है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर की घोषणा की जा सकती है।

    सैन्य विमान के साथ ट्रेनिंग और तकनीकी मदद का प्रस्ताव

    गोपनीय दस्तावेज में केवल सैन्य विमान उपलब्ध कराने की बात ही नहीं है। प्रस्ताव में मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने, प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और तकनीकी सहायता देने का भी उल्लेख है।

    इसके साथ वित्तीय सहयोग की संभावना भी बताई गई है। यानी पाकिस्तान का प्रस्ताव केवल सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मालदीव के रक्षा ढांचे में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में भी देखा जा रहा है।

    रक्षा विशेषज्ञ ने भारत की सुरक्षा से जोड़ा मामला

    रक्षा मामलों के जानकार कर्नल सीबी भगत का कहना है कि भारत और मालदीव के बीच पहले से अच्छे संबंध हैं। उनके मुताबिक, ऐसे में पाकिस्तान की ओर से मालदीव के साथ सैन्य उपकरणों की डील की कोशिश को केवल सामान्य रक्षा सहयोग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    उनका मानना है कि हिंद महासागर में भारत के बेहद करीब स्थित मालदीव की वायुसेना में पाकिस्तानी सैन्य विमानों की मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकती है। भगत के अनुसार, इसके पीछे भारत के लिए रणनीतिक चुनौती पैदा करने की कोशिश हो सकती है।

    पाकिस्तान खुद चीन पर कितना निर्भर?

    पाकिस्तान के रक्षा क्षेत्र की अपनी सीमाएं भी इस प्रस्ताव के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। रक्षा उत्पादन के मामले में पाकिस्तान का सैन्य औद्योगिक ढांचा सीमित है और वह अपने प्रमुख हथियारों की जरूरत के लिए चीन पर काफी निर्भर है।

    दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के प्रमुख हथियारों के आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत रही।

    ऐसे में मालदीव को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने की पाकिस्तान की कोशिश को क्षेत्रीय रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव का वास्तविक स्वरूप और दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता होने की स्थिति आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी।

    मुइज्जू की अक्टूबर यात्रा पर नजर

    मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्टूबर में प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा इस पूरे घटनाक्रम के लिहाज से अहम मानी जा रही है। यदि रक्षा सहयोग को लेकर सहमति बनती है, तो यात्रा के दौरान किसी समझौते या MoU की घोषणा की संभावना जताई गई है।

    फिलहाल सामने आए दस्तावेज में प्रस्तावित रक्षा सहयोग की जानकारी है। इसे अंतिम सैन्य समझौता मानने से पहले दोनों देशों की आधिकारिक पुष्टि और आगे की कार्रवाई का इंतजार करना होगा।