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  • मोहम्मद मुइज्जू की यात्रा से पहले मालदीव की सैन्य विमान देने की तैयारी में पाकिस्तान?

    मोहम्मद मुइज्जू की यात्रा से पहले मालदीव की सैन्य विमान देने की तैयारी में पाकिस्तान?


    नई दिल्ली।
    मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्टूबर में प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर पाकिस्तान की तैयारियों का एक कथित गोपनीय दस्तावेज सामने आया है। दस्तावेज के मुताबिक, पाकिस्तान मालदीव को अपने इस्तेमाल किए हुए सैन्य विमान देने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इसके अलावा मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण, तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की योजना भी प्रस्तावित है।

    दस्तावेज में इस पूरे प्रयास को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध मजबूत करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम के तौर पर बताया गया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों ने इसके रणनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

    13 अगस्त की चिट्ठी में क्या है?

    दावे के मुताबिक, 13 अगस्त 2026 को पाकिस्तान स्थित मालदीव के उच्चायोग ने रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान रक्षा मंत्रालय को एक गोपनीय पत्र भेजा। इस पत्र की जानकारी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई।

    दस्तावेज के अनुसार, 20 से 22 अक्टूबर के बीच मालदीव के साथ एक बड़ी सैन्य डील को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर समेत संबंधित विभाग इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में बताए गए हैं।

    पत्र में यह सुझाव भी दिया गया है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर की घोषणा की जा सकती है।

    सैन्य विमान के साथ ट्रेनिंग और तकनीकी मदद का प्रस्ताव

    गोपनीय दस्तावेज में केवल सैन्य विमान उपलब्ध कराने की बात ही नहीं है। प्रस्ताव में मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने, प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और तकनीकी सहायता देने का भी उल्लेख है।

    इसके साथ वित्तीय सहयोग की संभावना भी बताई गई है। यानी पाकिस्तान का प्रस्ताव केवल सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मालदीव के रक्षा ढांचे में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में भी देखा जा रहा है।

    रक्षा विशेषज्ञ ने भारत की सुरक्षा से जोड़ा मामला

    रक्षा मामलों के जानकार कर्नल सीबी भगत का कहना है कि भारत और मालदीव के बीच पहले से अच्छे संबंध हैं। उनके मुताबिक, ऐसे में पाकिस्तान की ओर से मालदीव के साथ सैन्य उपकरणों की डील की कोशिश को केवल सामान्य रक्षा सहयोग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    उनका मानना है कि हिंद महासागर में भारत के बेहद करीब स्थित मालदीव की वायुसेना में पाकिस्तानी सैन्य विमानों की मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकती है। भगत के अनुसार, इसके पीछे भारत के लिए रणनीतिक चुनौती पैदा करने की कोशिश हो सकती है।

    पाकिस्तान खुद चीन पर कितना निर्भर?

    पाकिस्तान के रक्षा क्षेत्र की अपनी सीमाएं भी इस प्रस्ताव के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। रक्षा उत्पादन के मामले में पाकिस्तान का सैन्य औद्योगिक ढांचा सीमित है और वह अपने प्रमुख हथियारों की जरूरत के लिए चीन पर काफी निर्भर है।

    दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के प्रमुख हथियारों के आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत रही।

    ऐसे में मालदीव को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने की पाकिस्तान की कोशिश को क्षेत्रीय रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव का वास्तविक स्वरूप और दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता होने की स्थिति आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी।

    मुइज्जू की अक्टूबर यात्रा पर नजर

    मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्टूबर में प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा इस पूरे घटनाक्रम के लिहाज से अहम मानी जा रही है। यदि रक्षा सहयोग को लेकर सहमति बनती है, तो यात्रा के दौरान किसी समझौते या MoU की घोषणा की संभावना जताई गई है।

    फिलहाल सामने आए दस्तावेज में प्रस्तावित रक्षा सहयोग की जानकारी है। इसे अंतिम सैन्य समझौता मानने से पहले दोनों देशों की आधिकारिक पुष्टि और आगे की कार्रवाई का इंतजार करना होगा।

  • पाकिस्तान के साथ नो डील…. बेल्जियम के PM ने मानी भारत की बात, हुए 10 बड़े समझौते

    पाकिस्तान के साथ नो डील…. बेल्जियम के PM ने मानी भारत की बात, हुए 10 बड़े समझौते


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत (India) लगातार आक्रामक तरीके से पाकिस्तान (Pakistan) को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने बेल्जियम (Belgium) को कहा कि वह पाकिस्तान के साथ किसी प्रकार का रक्षा समझौता (Defence Agreement) नहीं करे और न ही किसी प्रकार की रक्षा तकनीक का हस्तांतरण करे। बेल्जियम ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुए भारत को आश्वस्त किया है।


    बेल्जियम ने मानी भारत की बात

    सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकन के साथ बातचीत के दौरान यह बात रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को रक्षा तकनीक देने का मतलब है कि उसका दुरुपयोग होना। यह तकनीकें आतंकियों तक पहुंच सकती हैं। इसलिए बेल्जियम उसे कोई तकनीक नहीं दे। बेल्जियम ने इस पर सहमति प्रकट की है। उन्होंने भारत को आश्वस्त किया कि पाकिस्तान के साथ ऐसा कोई करार बेल्जियम नहीं करेगा।


    जापान को भी किया था आगाह

    मौजूदा समय में बेल्जियम के साथ पाकिस्तान का कोई रक्षा समझौता नहीं है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वह इसके लिए प्रयासरत है। बता दें कि पिछले दिनों जब जापान के रक्षा मंत्री भारत आए थे तो भारत ने उन्हें भी आगाह किया था कि वे पाक को कोई रक्षा तकनीक हस्तांतरित नहीं करें। वहीं, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने बेल्जियम की रक्षा कंपनियों से आग्रह किया कि वे साझा सुरक्षा व समृद्धि के लिए विशिष्ट रक्षा उत्पादों के संयुक्त विकास और उत्पादन में भारत की विनिर्माण क्षमता और अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का भी लाभ उठाएं। फ्रैंकन ने संयुक्त प्रयासों के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत यात्रा पर आए बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकन संग द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा व औद्योगिक सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की तथा सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग वार्ता, यात्राओं, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने पर सहमति जताई है।


    चीन के प्रभुत्व को संतुलित करने में भारत सहायक

    बेल्जियम के रक्षा और व्यापार मंत्री थियो फ्रेंकेन ने भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के रणनीतिक महत्व पर बल देते हुए कहा है कि भारत के रक्षा-औद्योगिक आधार के विस्तार में उनके देश का प्रत्यक्ष सुरक्षा हित जुड़ा हुआ है। मजबूत भारतीय रक्षा क्षेत्र दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता लाएगा। यह भारत को एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के सामने एक म उपयोगी संतुलनकर्ता बनाता है।


    भारत-बेल्जियम के हुए 10 समझौते

    1. रक्षा क्षेत्र में सहयोग की इच्छा
    2. बेल्जियम एवं भारत के रक्षा निर्माताओं के बीच एमओयू
    3. रिन्यूबल ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग
    4. सीबीआई और बेल्जियम संघीय पुलिस में समझौता
    5. कूटनीतिक प्रशिक्षण को करार
    6. ब्रुसेल्स में डिफेंस अटैची की नियुक्त
    7. फास्ट ट्रैक निवेश मैकेनिज्म की स्थापना
    8. व्यापार दोगुना करने की घोषणा
    9. इंडिया-बेल्जियम बिजनेस फोरम का गठन
    10. भारत और बेल्जियम के बीच कौंसुलर डायलाग की स्थापना

  • पाकिस्‍तान में खाद्य सुरक्षा का संकट, रोटी-चावल तक के लिए मोहताज हो रहे पाकिस्तानी, देखें आकड़े

    पाकिस्‍तान में खाद्य सुरक्षा का संकट, रोटी-चावल तक के लिए मोहताज हो रहे पाकिस्तानी, देखें आकड़े


    नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में अब खाद्य असुरक्षा भी गंभीर होती जा रही है। पाकिस्तान सरकार के आंकड़े ही देश के बिगड़ते हालात की तस्वीर सामने रख रहे हैं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में पाकिस्तानी परिवारों ने गेहूं, चावल, मीट, दूध और चाय समेत लगभग सभी प्रमुख खाद्य श्रेणियों का सेवन कम किया है। ग्रामीण ही नहीं, शहरी परिवार भी इसकी चपेट में हैं।

    2019 में 15.92% परिवार खाद्य असुरक्षित थे, 2025 में आंकड़ा 24.35%
    ‘पाकिस्तान टुडे’ की रिपोर्ट में PBS के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पाकिस्तान में मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा वाले परिवारों की हिस्सेदारी 2019 में 15.92% थी, जो 2025 में बढ़कर 24.35% हो गई।

    वहीं, गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझने वाले परिवारों की हिस्सेदारी भी दोगुने से ज्यादा बढ़ी है। यह 2.37% से बढ़कर 5.04% हो गई। यानी अब करीब एक चौथाई पाकिस्तानी परिवार किसी न किसी स्तर पर भूख और कुपोषण का सामना कर रहे हैं।

    छोटी रोटियां, कम चावल और बच्चों के दूध में भी कटौती
    महंगाई बढ़ने के साथ पाकिस्तानी परिवारों की खाने की थाली भी सिकुड़ रही है। परिवार अब पहले की तुलना में कम मात्रा में चावल पका रहे हैं और छोटी रोटियां बना रहे हैं। मीट की खपत घट गई है, जबकि बच्चों को दिए जाने वाले दूध की मात्रा में भी कटौती की जा रही है।

    चाय जैसी रोजमर्रा की चीजों का सेवन भी कम हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से परिवारों को अपनी खरीदारी की मात्रा और भोजन की विविधता दोनों में कटौती करनी पड़ रही है।

    ग्रामीण इलाकों में हालात ज्यादा खराब
    PBS के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की खपत में गिरावट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दर्ज की गई है। हालांकि ग्रामीण परिवारों पर इसका दबाव ज्यादा है। महंगे भोजन के कारण पौष्टिक आहार तक आम लोगों की पहुंच लगातार कम होती जा रही है।

    कृषि प्रधान देश, फिर भी खाद्य पदार्थों का शुद्ध आयातक
    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कृषि प्रधान माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद देश में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कम से कम 2021 से खाद्य पदार्थों का शुद्ध आयातक बना हुआ है।

    यह स्थिति पाकिस्तान के लिए बड़ी चेतावनी मानी जा रही है। भोजन की मात्रा और गुणवत्ता में लगातार गिरावट का असर आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और पोषण पर पड़ सकता है। आर्थिक संकट के साथ बढ़ती खाद्य असुरक्षा अब पाकिस्तान के सामने एक और बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    नई दिल्ली ।भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने किसका साथ दिया था, इसे लेकर अब नया दावा सामने आया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि भारत के साथ मई 2025 में हुए टकराव के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। हालांकि, इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समर्थन किस रूप में दिया गया था।

    ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।

    भारत ने इस अभियान को आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के तौर पर पेश किया था। अभियान के शुरुआती चरण में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बाद में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। कुछ दिनों तक दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला चला।

    इसी घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का नया बयान सामने आया है। उन्होंने पाकिस्तान और ईरान के संबंधों पर दिए गए लिखित जवाब में कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में पिछले दो वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। इसी संदर्भ में उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ईरान के समर्थन का उल्लेख किया।

    पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, ईरान ने उस समय पाकिस्तान को मजबूत राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दिया था। हालांकि, डार के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस समर्थन में सैन्य सहायता, खुफिया सहयोग, हथियार या किसी अन्य प्रकार की प्रत्यक्ष मदद शामिल थी या नहीं। इसलिए केवल इस बयान के आधार पर ईरान की सैन्य भूमिका को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    ईरान की भूमिका को समझने के लिए उस समय उसके सार्वजनिक रुख को भी ध्यान में रखना जरूरी है। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ईरान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने पर जोर दिया था। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से क्षेत्र में शांति और तनाव कम करने की कोशिशों का उल्लेख भी सामने आया था।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मई 2025 में ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ईरान के प्रयासों का आभार जताया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी उस दौरान क्षेत्रीय स्तर पर संपर्क और कूटनीतिक प्रयास किए थे।

    यही वजह है कि पाकिस्तान का ताजा दावा और उस समय ईरान की सार्वजनिक कूटनीतिक भूमिका अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। पाकिस्तान इसे अपने पक्ष में मिले मजबूत समर्थन के रूप में देख रहा है, जबकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह साफ नहीं होता कि यह समर्थन सैन्य स्तर पर था या मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने भी स्पष्ट किया था कि अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। भारत का कहना रहा कि कार्रवाई पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ की गई और सैन्य कार्रवाई को लक्षित तथा नियंत्रित रखा गया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 का संघर्ष बाद में युद्धविराम के साथ थमा। इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए थे। अब ईरान की भूमिका को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री का बयान सामने आने के बाद उस समय के क्षेत्रीय समीकरणों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान ने ईरान के समर्थन का दावा जरूर किया है, लेकिन समर्थन की प्रकृति और सीमा को लेकर स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को किसी प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में सहायता दी थी।

  • पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में ईरान को शामिल होने का आधिकारिक प्रस्ताव मिला है।

    पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में ईरान को शामिल होने का आधिकारिक प्रस्ताव मिला है।

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया में मुस्लिम देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मक्का एग्रीमेंट में ईरान को शामिल करने की संभावना ने क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। तेहरान को इस समझौते में शामिल होने के लिए आधिकारिक न्योता दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि ईरान ने अभी इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और बताया जा रहा है कि इस पर विचार किया जा रहा है।

    मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं। समझौते का प्रमुख प्रावधान यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में इसे सभी संबंधित देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा और सामूहिक रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान के संभावित जुड़ाव से इस व्यवस्था का दायरा और राजनीतिक महत्व दोनों बढ़ सकते हैं।

    ईरानी मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, ईरान को मक्का एग्रीमेंट में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है। ईरानी संसद से जुड़ी समाचार एजेंसी के प्रमुख मेहदी रहीमी के हवाले से बताया गया कि तेहरान के सामने रखे गए प्रस्ताव पर फिलहाल विचार-विमर्श चल रहा है। अभी तक ईरानी पक्ष की ओर से समझौते में शामिल होने को लेकर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के तेहरान दौरे को लेकर भी क्षेत्रीय स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनका ईरान दौरा क्षेत्र में शांति स्थापित करने और मौजूदा तनाव को कम करने की कोशिशों से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे समय में यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

    मक्का समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के समझौते में शामिल होने का स्वागत करते हुए इसे साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताया। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर उनके दावों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।

    ईरान के संभावित जुड़ाव का असर केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। यदि तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो पश्चिम एशिया में सुरक्षा समीकरणों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के साथ ईरान का एक साझा रक्षा ढांचे में आना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है।

    वहीं बांग्लादेश ने भी इस घटनाक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश के नवनियुक्त विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने समझौते को लेकर बयान दिया है। साथ ही बांग्लादेशी पक्ष ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बातचीत के माध्यम से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में मक्का एग्रीमेंट अब केवल तीन देशों के बीच रक्षा सहयोग का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिम एशिया और मुस्लिम देशों की व्यापक रणनीतिक राजनीति से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।

  • सऊदी-पाक-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ में ईरान की एंट्री? न्योता मिलने की खबर से पश्चिम एशिया में हलचल

    सऊदी-पाक-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ में ईरान की एंट्री? न्योता मिलने की खबर से पश्चिम एशिया में हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आने की खबर है। ईरान को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने का न्योता मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। हालांकि, अभी तक ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान या तुर्की में से किसी भी देश ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    यह दावा शनिवार को अल मयादीन ने ईरानी संसद की समाचार एजेंसी ‘खानेह मेल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी के हवाले से किया। रहीमी के मुताबिक ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है और इस पर फिलहाल विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा के लिए साझा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    अगर यह खबर सही साबित होती है तो इसे पश्चिम एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा, क्योंकि सऊदी अरब और ईरान लंबे समय तक एक-दूसरे के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

    क्या है ‘मक्का पैक्ट’?

    सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी तीन देशों पर हमला माना जाएगा।

    समझौते का उद्देश्य आपसी रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत सैन्य तालमेल, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने समझौते के आपसी रक्षा प्रावधान की तुलना NATO के अनुच्छेद 5 से की थी। हालांकि, तीनों देशों ने स्पष्ट किया था कि यह समझौता किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है।

    ईरान ने पहले नहीं जताई थी आपत्ति

    मक्का पैक्ट के गठन के बाद ईरान ने इस पर खुलकर विरोध नहीं जताया था। 10 अगस्त को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि तेहरान को समझौते से चिंता की कोई वजह नजर नहीं आती। उन्होंने माना था कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है।

    ऐसे में अब ईरान को इसी सुरक्षा समझौते में शामिल होने का न्योता मिलने की खबर सामने आना चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, ईरान का इसमें शामिल होना पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति में बड़ा बदलाव होगा।

    सऊदी और ईरान की रही है पुरानी प्रतिद्वंद्विता

    सऊदी अरब और ईरान के बीच लंबे समय से क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर खींचतान रही है। इसका असर यमन और खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में भी दिखाई देता रहा है। यमन में सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता रहा है, जबकि ईरान के हूती विद्रोहियों से संबंध बताए जाते हैं।

    हालांकि, 2023 में चीन की मध्यस्थता से दोनों देशों ने राजनयिक रिश्ते बहाल किए थे। इसके बाद संबंधों में कुछ नरमी आई, लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव के बीच दोनों देशों के रिश्तों में चुनौतियां बनी हुई हैं।

    ऐसे में यदि ईरान के ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने की खबर की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह पश्चिम एशिया के शक्ति समीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल मामला न्योते की रिपोर्ट तक सीमित है और सभी संबंधित देशों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील

    PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील


    लंदन।
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir-PoK) में बिगड़ते हालात को लेकर 70 से ज्यादा ब्रिटिश सांसदों (British MPs) ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (United Nations Secretary-General António Guterres) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही पाकिस्तानी बलों द्वारा किए जा रहे नरसंहार को खत्म करने और नागरिकों की जान की सुरक्षा के उपाय करने की अपील भी की गई है।

    ब्रिटिश सांसदों की अपील क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और दुर्व्यवहार के बीच आई है, जहां पाकिस्तानी बलों की क्रूर कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए हैं। क्षेत्र में अभी भी सख्त नाकाबंदी, कर्फ्यू और पूरी तरह से कम्युनिकेशन्स ब्लैकआउट लागू है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव को संबोधित पत्र में ब्रिटिश सांसदों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, मौतों, संचार पर प्रतिबंधों, मनमानी गिरफ्तारियों, आवश्यक आपूर्ति में व्यवधान और शांतिपूर्ण नागरिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर लगाम की रिपोर्टों ने काफी चिंता पैदा की है। हमने ब्रिटिश कश्मीरियों से भी लगातार सुना है, जो संबंधित क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।


    संयुक्त राष्ट्र की तरफ से उठाया गया था मुद्दा

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने पीओके में पाकिस्तान की बर्बरता को लेकर आवाज उठाई थी और कहा था कि शांतिपूर्ण प्रद्र्शन के दौरान इस तरह का अत्याचार करने को लेकर पाकिस्तानी सरकार को जवाब देना चाहिए।


    खत्म कर दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पीओके के हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराए जाने तथा पाकिस्तान द्वारा ‘संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति’ पर प्रतिबंध लगाने एवं उसके नेताओं को गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा उठाया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

    हक ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से जुड़े सवाल पर कहा, ”यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।” पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की।

    मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच तत्काल कराए जाने का आह्वान किया था। संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की। इनमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता एव अन्य लोग शामिल हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  • ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट

    ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट


    हेडिंग्ले। पाकिस्तान की बल्लेबाजी एक बार फिर इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बेनकाब हो गई। हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को दूसरी पारी में महज 135 रन पर समेटते हुए पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी। इसके साथ ही तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड ने 1-0 की बढ़त बना ली। ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी, जबकि जोफ्रा आर्चर ने भी अहम मौकों पर विकेट चटकाए।

    171 पर ढेर हुआ पाकिस्तान, इंग्लैंड ने खड़ा किया 409 का पहाड़
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम पहली पारी में सिर्फ 171 रन बना सकी। अब्दुल्ला शफीक ने 61 और इमाम-उल-हक ने 42 रन बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के पेस अटैक के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सके। रॉबिन्सन और टंग ने पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तानी पारी को समेट दिया।

    जवाब में इंग्लैंड ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 409 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 238 रन की विशाल बढ़त हासिल कर ली। हैरी ब्रूक ने 93 गेंदों में 91 रन बनाए। जॉर्डन कॉक्स ने 73, जो रूट ने 66 और डेन लॉरेंस ने 51 रन की पारियां खेलीं।

    दूसरी पारी में भी नहीं संभला पाकिस्तान
    238 रन से पिछड़ने के बाद पाकिस्तान को मैच बचाने के लिए लंबी बल्लेबाजी करनी थी, लेकिन उसकी शुरुआत ही खराब रही। जोफ्रा आर्चर ने इमाम-उल-हक को आउट किया, जबकि अजान अवैस 9 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद रॉबिन्सन ने अब्दुल्ला शफीक को 15 रन पर चलता कर दिया।

    शान मसूद ने 29 रन बनाकर संघर्ष की कोशिश की, लेकिन जोश टंग ने आते ही पाकिस्तान के मध्यक्रम को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने सऊद शकील को 14 रन पर आउट करने के बाद एक ही ओवर में शान मसूद और सलमान आगा के विकेट निकाल दिए। टंग ने महज 11 गेंदों में तीन विकेट लेकर पाकिस्तान को 76 रन पर छह विकेट के संकट में पहुंचा दिया।

    रिजवान ने दिखाया संघर्ष, फिर भी 135 पर सिमटी टीम
    विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने 39 गेंदों पर 41 रन बनाकर कुछ प्रतिरोध जरूर किया। वह दूसरी पारी में पाकिस्तान के सबसे सफल बल्लेबाज रहे, लेकिन उनकी पारी भी टीम को हार से नहीं बचा सकी। गस एटकिंसन ने रिजवान को आउट किया और इसके बाद आर्चर ने आखिरी बल्लेबाज को पवेलियन भेज दिया। पाकिस्तान की पूरी टीम 37.3 ओवर में 135 रन पर ऑलआउट हो गई और इंग्लैंड ने तीन दिन में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    रॉबिन्सन-टंग ने मिलकर बरपाया कहर
    इंग्लैंड की जीत में ओली रॉबिन्सन सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में 5/51 और दूसरी पारी में तीन विकेट लिए। मैच में कुल 8/80 के शानदार आंकड़े के साथ उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    जोश टंग ने भी मैच में आठ विकेट लिए। उन्होंने पहली पारी में 5/46 और दूसरी पारी में तीन विकेट चटकाए। जोफ्रा आर्चर ने दूसरी पारी में तीन विकेट हासिल किए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने लगातार फुल लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    जो रूट की कप्तानी में शानदार वापसी
    बेन स्टोक्स के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास और ब्रेंडन मैकुलम के कोच पद से हटने के बाद इंग्लैंड नए दौर में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान के तौर पर जो रूट की वापसी जीत के साथ हुई। इंग्लैंड ने गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में पाकिस्तान को पछाड़ दिया। पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा ने भी मैच के बाद माना कि इंग्लैंड ने उनकी टीम को हर विभाग में मात दी।

    लॉर्ड्स में होगी अगली भिड़ंत
    इस जीत से इंग्लैंड को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में भी अहम अंक मिले हैं। वहीं पाकिस्तान का अंक प्रतिशत गिरकर 19.05 हो गया है। दोनों टीमों के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट 27 अगस्त से लॉर्ड्स में खेला जाएगा।

    पाकिस्तान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी बल्लेबाजी को संभालने की है। हेडिंग्ले में जिस तरह उसका शीर्ष और मध्यक्रम इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बिखरा, अगर यही कहानी लॉर्ड्स में भी दोहराई गई तो सीरीज में वापसी मुश्किल हो सकती है।

  • पाकिस्तान में Google का पहला ऑफिस खुला, PM शहबाज शरीफ ने किया उद्घाटन

    पाकिस्तान में Google का पहला ऑफिस खुला, PM शहबाज शरीफ ने किया उद्घाटन


    इस्लामाबाद। गूगल ने पाकिस्तान में अपना पहला ऑफिस खोल दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गूगल के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात के दौरान इस ऑफिस का उद्घाटन किया। सरकार के मुताबिक, गूगल की स्थानीय मौजूदगी से पाकिस्तान में टेक्नोलॉजी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ युवाओं के डिजिटल और AI स्किल विकसित करने में मदद मिलेगी।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से X पर साझा जानकारी के मुताबिक, गूगल का प्रतिनिधिमंडल सरकार और सार्वजनिक नीति मामलों के उपाध्यक्ष विल्सन व्हाइट के नेतृत्व में शहबाज शरीफ से मिला। प्रतिनिधिमंडल में इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास की चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर भी मौजूद थीं।

    डिजिटल बदलाव पर पाकिस्तान का फोकस
    शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान बड़े स्तर पर डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसमें अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण भी शामिल है। उन्होंने सरकार के ‘डिजिटल नेशन पाकिस्तान’ विजन की जानकारी देते हुए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रधानमंत्री ने युवाओं को आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग देने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने में गूगल अहम भूमिका निभा सकता है।

    स्थानीय मौजूदगी से साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद
    शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान में ऑफिस खोलने के गूगल के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों के बीच साझेदारी मजबूत होगी और पाकिस्तान की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में गूगल की भूमिका बढ़ेगी।

    प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि गूगल पाकिस्तान के युवाओं के स्किल डेवलपमेंट से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार करेगा। उनके मुताबिक, स्थानीय मौजूदगी स्थापित होने के बाद पाकिस्तान में बड़े स्तर पर प्रभावी कार्यक्रम चलाना आसान होगा।

    Chromebook असेंबली लाइन पर भी चर्चा
    गूगल के उपाध्यक्ष विल्सन व्हाइट ने प्रधानमंत्री को पाकिस्तान में कंपनी की भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय साझेदारों के साथ स्थापित की गई Chromebook असेंबली लाइन पर भी खुशी जताई।

    व्हाइट ने कहा कि पाकिस्तान में असेंबल किए जा रहे Chromebook को क्षेत्र के दूसरे देशों में एक्सपोर्ट करने की काफी संभावनाएं हैं।

  • सऊदी अरब जाने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी, वीजा नियम तोड़ने और अवैध फंड जुटाने पर कार्रवाई

    सऊदी अरब जाने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी, वीजा नियम तोड़ने और अवैध फंड जुटाने पर कार्रवाई

    नई दिल्ली । पाकिस्तान ने सऊदी अरब जाने वाले अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें भीख मांगने, बिना अनुमति धन जुटाने और वीजा नियमों का उल्लंघन करने से बचने की चेतावनी दी है। यह सलाह खास तौर पर उमराह यात्रियों और कामगारों के लिए जारी की गई है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सऊदी अरब में स्थानीय कानूनों और वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

    पाकिस्तान की ओर से जारी संदेश में नागरिकों से सऊदी अरब के कानूनों का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है। उन्हें यह भी हिदायत दी गई है कि किसी भी तरह की आर्थिक मदद या धन संग्रह का काम बिना अनुमति के नहीं किया जाए। धार्मिक यात्रा के दौरान भी स्थानीय नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है।

    एडवाइजरी में वीजा की अवधि को लेकर भी यात्रियों को सावधान किया गया है। नागरिकों से कहा गया है कि वीजा की वैधता समाप्त होने से पहले सऊदी अरब से निर्धारित प्रक्रिया के तहत बाहर निकलें। वीजा अवधि खत्म होने के बाद वहां रुकना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और इसके कारण कानूनी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।

    पाकिस्तानी नागरिकों को सऊदी अरब में किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहने की सलाह दी गई है, जिसे वहां के कानूनों के तहत अपराध माना जाता है। विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने और बिना अनुमति के लोगों से धन एकत्र करने को लेकर चेतावनी दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को हिरासत में लिए जाने या देश से बाहर भेजे जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

    इस चेतावनी के साथ एक वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया है, जिसमें सऊदी पुलिस द्वारा एक व्यक्ति को हिरासत में ले जाने का दृश्य दिखाया गया है। संदेश के जरिए पाकिस्तान से आने वाले उमराह यात्रियों और कामगारों को समझाने की कोशिश की गई है कि वे धार्मिक यात्रा या रोजगार के लिए सऊदी अरब पहुंचने के बाद वहां के कानूनों को प्राथमिकता दें।

    पाकिस्तान में यात्रियों के सऊदी अरब जाने से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी चिंता सामने आती रही है। वर्ष 2025 में पाकिस्तान के अलग अलग हवाई अड्डों पर बड़ी संख्या में यात्रियों को विदेश जाने से रोके जाने की खबर सामने आई थी। अधिकारियों को आशंका थी कि कुछ लोग सऊदी अरब में भीख मांगने के उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं। इसके बाद यात्रियों की जांच और निगरानी को लेकर सख्ती बढ़ाई गई थी।

    सऊदी अरब में धार्मिक यात्राओं के दौरान नियमों का पालन कराने पर लगातार जोर दिया जाता है। उमराह या अन्य धार्मिक यात्रा के लिए पहुंचने वाले लोगों को अपने वीजा की शर्तों, स्थानीय कानूनों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना होता है। किसी अन्य उद्देश्य के लिए जारी वीजा का इस्तेमाल अलग गतिविधियों के लिए करना भी परेशानी का कारण बन सकता है।

    पाकिस्तान की ताजा एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य अपने नागरिकों को सऊदी अरब के कानूनों के संभावित उल्लंघन से बचाना है। इसमें यात्रियों को जिम्मेदारी से व्यवहार करने और किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तारी, हिरासत या निर्वासन जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।