नई दिल्ली । शस्त्र और शास्त्र के महान ज्ञाता भगवान परशुराम की जयंती 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन अक्षय तृतीया का भी विशेष संयोग बन रहा है। भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले परशुराम जी की पूजा शक्ति धर्म और न्याय की स्थापना के लिए की जाती है।
जानें शुभ मुहूर्त का समय
वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे से होगी जो 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 7:29 से दोपहर 12:20 तक रहेगा जबकि सुबह 6:49 से 10:57 बजे तक का समय भी पूजन के लिए अनुकूल माना गया है।
पूजा करने की विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर पूजा शुरू करें और अक्षत फूल विशेषकर पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें। इसके बाद फल मिठाई या गुड़-चना का भोग लगाएं और “ॐ जमदग्नये विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम प्रचोदयात्” मंत्र का 11 या 21 बार जप करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें।
परशुराम जी की पौराणिक कथा
मान्यता के अनुसार परशुराम जी के पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं। कठोर तपस्या के बाद उन्हें यह दिव्य पुत्र प्राप्त हुआ। जन्म के समय उनका नाम ‘राम’ रखा गया था। भगवान शिव की कृपा से उन्हें परशु (फरसा) प्राप्त हुआ और तभी से वे परशुराम कहलाए। उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान भी प्राप्त है। परशुराम जी एक ऐसे ब्राह्मण योद्धा थे जिन्होंने शास्त्र और शस्त्र दोनों में महारत हासिल की। उनका जीवन यह संदेश देता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म और न्याय के लिए होना चाहिए।
रामायण और महाभारत में भूमिका
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार परशुराम जी ने भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों के युग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रामायण काल में उनका सामना भगवान राम से हुआ जबकि महाभारत काल में वे भीष्म द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं के गुरु रहे। मान्यता है कि परशुराम जी ने अधर्म और अत्याचार को समाप्त करने के लिए 21 बार क्षत्रियों का संहार किया। उनका जीवन धर्म की रक्षा और न्याय की स्थापना का प्रतीक माना जाता है।
