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  • पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर RJD विधायक का तंज, “बाल न बच्चा, नींद पड़े अच्छा” बयान से सियासत गरमाई

    पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर RJD विधायक का तंज, “बाल न बच्चा, नींद पड़े अच्छा” बयान से सियासत गरमाई


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और उनके उद्देश्यों पर टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है।

    भाई वीरेंद्र ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री जब विदेश जाते हैं तो देश के लिए क्या लेकर आते हैं और किस तरह के समझौते या परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कथनी और करनी में संतुलन होना चाहिए और जो बातें देश के भीतर कही जाती हैं, उनका पालन व्यवहार में भी दिखना चाहिए। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में सरकार पर सीधा हमला माना जा रहा है।

    विधायक ने अपने बयान में एक लोक कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “बाल न बच्चा, नींद पड़े अच्छा”, जिससे उनका संकेत सरकार की नीतियों और विदेश यात्राओं की उपयोगिता पर सवाल उठाने की ओर था। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश दौरों के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा होती है, उनका लाभ आम जनता तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुंचता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में महंगाई और अन्य आर्थिक मुद्दे चिंता का विषय हैं, जिन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

    भाई वीरेंद्र ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर कई घटनाएं और तनावपूर्ण स्थितियां बनी हुई हैं, और ऐसे समय में देश के भीतर की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह देशहित को प्राथमिकता दे और विदेश यात्राओं का उद्देश्य स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे।

    दूसरी ओर, सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा गया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं केवल औपचारिक नहीं होतीं, बल्कि इनसे देश के लिए महत्वपूर्ण समझौते और आर्थिक अवसर सामने आते हैं। उनका कहना है कि हर दौरे का उद्देश्य भारत के हितों को मजबूत करना होता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर बनाना होता है।

    इस पूरे बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और अधिक तीव्र बना सकते हैं।

  • वैश्विक निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ा, पीएम मोदी की यात्रा से 40 अरब डॉलर की संभावनाएं

    वैश्विक निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ा, पीएम मोदी की यात्रा से 40 अरब डॉलर की संभावनाएं


    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी मजबूती उस समय मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच दिवसीय विदेश यात्रा के दौरान देश में लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश की संभावनाएं सामने आईं। यह निवेश विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार योजनाओं, नई साझेदारियों और वैश्विक कंपनियों की बढ़ती रुचि का परिणाम बताया जा रहा है। इस यात्रा ने भारत की आर्थिक स्थिति और निवेश माहौल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में काम कर रही 50 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। इन कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर से 3 ट्रिलियन डॉलर के बीच बताया गया, जो इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है।

    अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई कंपनियां पहले से ही भारत में सक्रिय हैं और यहां उनका कुल निवेश और कारोबार लगभग 180 अरब डॉलर के आसपास है। अब ये कंपनियां भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, स्थिर नीतिगत वातावरण और बढ़ती घरेलू मांग को देखते हुए अपने संचालन को और विस्तार देने की योजना बना रही हैं। इससे रोजगार, तकनीकी विकास और औद्योगिक उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण निवेश घोषणाएं भी सामने आईं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात की ओर से भारत में लगभग 5 अरब डॉलर के नए निवेश का ऐलान प्रमुख रहा। इसके अलावा अन्य देशों और कंपनियों के साथ हुई चर्चाओं में भी निवेश विस्तार और सहयोग की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, जिन्हें मिलाकर कुल अनुमानित निवेश लगभग 40 अरब डॉलर तक पहुंचता है।

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल निवेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे भारत के कई देशों के साथ रणनीतिक संबंध भी और मजबूत हुए हैं। नीदरलैंड के साथ व्यापार, रक्षा, सेमीकंडक्टर, एआई और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप पर सहमति बनी। वहीं स्वीडन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर भी सहमति बनी, जो भविष्य में तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देगी।

    नॉर्वे में आयोजित एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की भागीदारी के दौरान नॉर्डिक देशों के साथ भारत के संबंधों को और गहरा करने पर चर्चा हुई। इसी क्रम में इटली के साथ भी विशेष रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई, जिससे रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

    इन सभी घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि भारत वैश्विक निवेश और रणनीतिक साझेदारियों के केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। यह यात्रा न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इससे भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति भी और मजबूत हुई है, जिसका असर आने वाले वर्षों में देश की विकास गति पर साफ दिखाई दे सकता है।

  • रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा

    रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा


    रोम (इटली)।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने पांच देशों के आधिकारिक दौरे को पूरा करते हुए बुधवार को इटली (Italy) के रोम (Rome) से भारत के लिए प्रस्थान किया। यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    इटली यात्रा में रिश्तों को मिली नई मजबूती

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इटली यात्रा को बेहद सफल बताते हुए कहा कि उनकी चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत और इटली ने अपने संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाने का निर्णय लिया है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग को नई गति मिलेगी। पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर व्यापार, निवेश, संस्कृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।


    आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ भारत इटली की पहल वैश्विक नजीर: मोदी

    पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है और भारत-इटली दोनों इस बात पर एकमत हैं। आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ हमारी पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। पीएम मोदी ने कहा, भारत और इटली ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं। पीएम ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट के बारे में कहा कि हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य तनावों के संबंध में लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। इटली की पीएम जियोर्जिया मेलनी के साथ वार्ता के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं में भी सहयोग बढ़ रहा है।


    इटली दौरे की बड़ी उपलब्धियां

    – दोनों देशों के संबंध को विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदलने से द्विपक्षीय संबंध तेजी से आगे बढ़ेगा।
    – भारत-इटली रक्षा औद्योगिक रोडमैप: रक्षा सहयोग और रक्षा उत्पादन तंत्र मजबूत होगा।
    – दुर्लभ खजिनों के क्षेत्र में सहयोग का एमओयू से खोज-खनन-उत्पादन में तेजी। आधुनिक तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ेगा।
    – ईडी-इटली के वित्तीय निगरानी विभाग में सहयोग से टैक्स संबंधी अपराधों, धनशोधन और आतंकवाद के खिलाफ फंडिंग पर मिलकर काम होगा।
    – भारत-इटली में 2027 को संस्कृति और पर्यटन वर्ष के रूप में मनाने का समझौता: दोनों देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
    – भारतीय नर्सों को काम के लिए इटली भेजने का समझौता: इससे भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा। दुनिया में भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को मान्यता।
    – गुजरात के लोथल में नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स निर्माण के एमओयू से भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा।
    – उच्च शिक्षा और शोध में सहयोग का रोडमैप: शोध की गुणवत्ता, औद्योगिक संपर्क और आधुनिक शिक्षण का तंत्र विकसित होगा। क्षमता निर्माण होगा।
    – समुद्री परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू से समुद्री बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।


    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया आयाम

    दोनों देशों ने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, कनेक्टिविटी, शिक्षा और जन-से-जन संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इटली सरकार ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत और इटली के संबंध अब अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं।


    MEA ने बताया यात्रा को सफल

    विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस दौरे को बेहद सफल बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली में कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। पीएम मोदी ने 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इस दौरान भारत ने कई देशों के साथ अपने आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत किया।


    भारत और इटली के बीच का द्विपक्षीय व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले जून 2024 में ग्रुप ऑफ सेवन (G7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली गए थे। अब उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। इस व्यापक रोडमैप के तहत व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

    मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली से भारत में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया। दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।


    यात्रा के दौरान मिले कई सम्मान

    इसी यात्रा क्रम में नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया, जो उनका 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। नॉर्वे में उन्होंने भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। इसके अलावा स्वीडन में उन्हें ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया और दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति जताई।

  • PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले

    PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले


    नई दिल्ली।
    पांच देशों के दौरे से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके नतीजों तथा भविष्य की योजनाओं सहित अन्य विषयों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच, यह इस वर्ष कैबिनेट की पहली पूर्ण बैठक होगी।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, हाल के दिनों में लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों, तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के अलग-अलग पहलुओं, उन्हें अधिकतम सफलता के लिए कैसे लागू किया जाए और अन्य विषयों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।


    क्या होगा बैठक का एजेंडा?

    पीएम मोदी के पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों का जिक्र करने की संभावना है और वह मंत्रालयों तथा विभागों को निर्देश दे सकते हैं कि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए किस तरह से आगे बढ़ा जाए। सूत्रों ने बताया कि बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

    पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद, मोदी ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया था कि वे नागरिकों और इससे प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाएं।


    आमजन को फायदा पहुंचाने पर होगी चर्चा

    बैठक में आम लोगों के फायदे के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार लाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले अगले 10 वर्षों के लिए सुधार की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश करते हुए कहा था कि उनकी सरकार की रिफॉर्म एक्सप्रेस ने व्यवस्थागत बदलाव लाए हैं और आम नागरिकों को काफी हद तक लाभ पहुंचाया है। यह बैठक प.बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद हो रही है।

  • रोम में मोदी–मेलोनी की दोस्ती चर्चा में, भारत की ‘मेलोडी टॉफी’ गिफ्ट से मुस्कुराईं इटली PM, वीडियो वायरल

    रोम में मोदी–मेलोनी की दोस्ती चर्चा में, भारत की ‘मेलोडी टॉफी’ गिफ्ट से मुस्कुराईं इटली PM, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली । इटली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की मुलाकात एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। रोम में हुई इस मुलाकात के दौरान एक हल्के-फुल्के पल ने सोशल मीडिया पर खास ध्यान खींचा, जब प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की।

    यह अनौपचारिक लेकिन भावनात्मक पल दोनों नेताओं के बीच बढ़ती व्यक्तिगत और कूटनीतिक नजदीकी को दर्शाता है। गिफ्ट मिलने के बाद मेलोनी की प्रतिक्रिया को लेकर वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी खुशी और सहजता साफ देखी जा सकती है। इस घटना ने भारत और इटली के संबंधों को एक नए मानवीय और मित्रतापूर्ण रंग में प्रस्तुत किया है।

    रोम में इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने डिनर भी किया और बाद में ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं की बातचीत और सहजता ने कूटनीतिक रिश्तों से आगे बढ़कर एक मजबूत व्यक्तिगत तालमेल को भी उजागर किया। यह तस्वीरें और वीडियो दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की प्रतीक बनकर सामने आए हैं।

    भारत और इटली के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी क्रम में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, उन्नत तकनीक और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। यह मुलाकात केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे भविष्य की साझेदारी की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

    इस दौरान भारत की ओर से वैश्विक कनेक्टिविटी परियोजनाओं, खासकर India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC) पर भी चर्चा की संभावना जताई गई। यह परियोजना भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ने की एक बड़ी पहल के रूप में देखी जा रही है, जिससे वैश्विक व्यापार नेटवर्क में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

    सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की यह मुलाकात पहले से ही चर्चा में थी, और ‘#Melodi’ जैसे हैशटैग ने इसे और लोकप्रिय बना दिया है। समर्थक इसे भारत–इटली रिश्तों में बढ़ती गर्मजोशी के रूप में देख रहे हैं, जबकि विश्लेषक इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत मानते हैं।

    रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत इटली के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया था, जिसके बाद उनकी मुलाकातें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर पर तय हुईं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना, साथ ही वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाना बताया जा रहा है।

    कुल मिलाकर, ‘मेलोडी’ टॉफी का यह छोटा-सा गिफ्ट एक बड़े कूटनीतिक संदेश में बदल गया है, जो यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं होते, बल्कि व्यक्तिगत तालमेल भी उनकी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर

    इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर



    नई दिल्ली। इटली दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात इस बार खास अंदाज में चर्चा का विषय बन गई। रोम में दोनों नेताओं के बीच न सिर्फ औपचारिक बातचीत हुई, बल्कि उनका दोस्ताना अंदाज भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

    पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को एक खास “मेलोडी” नाम की टॉफी गिफ्ट की, जिसे लेकर मेलोनी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए खुशी जताई और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए हैं, इसके लिए उन्होंने धन्यवाद भी दिया।

    इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता रोम की सड़कों पर एक ही कार में साथ नजर आए और करीब 2000 साल पुराने ऐतिहासिक कोलोजियम का दौरा किया। वहां दोनों ने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।

    इससे पहले दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी की। मेलोनी ने मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए लिखा “वेलकम माय फ्रेंड”, जिसने दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को और भी उजागर किया।

    सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी, रक्षा, ऊर्जा और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।

    भारत और इटली के बीच वर्तमान में 14 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है और दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मा और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस दौरे में स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात की, जिसमें भारत में निवेश और नई औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

    इसके अलावा दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों जैसे मिडिल-ईस्ट तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विचार साझा किए।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी 2024 में इटली का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का अंतिम पड़ाव रहा, जिसमें यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे शामिल रहे।

  • ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना

    ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना



    नई दिल्ली। ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

    नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे की संयुक्त प्रेस इंटरैक्शन के दौरान पत्रकार हेले लिंग ने पीएम मोदी से सवाल पूछते हुए प्रेस से दूरी बनाने पर तीखी टिप्पणी की। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनका सवाल नहीं लिया और उन्होंने प्रेस स्वतंत्रता के संदर्भ में नॉर्वे और भारत की रैंकिंग का भी जिक्र किया।

    विवाद बढ़ने पर हेले लिंग ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया और कहा कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं। उनका कहना था कि पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना है और पहले से तैयार जवाबों को मान लेना नहीं।

    इसी बीच भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भी इसी मुद्दे पर सवाल उठे। भारतीय राजनयिक सिबी जॉर्ज ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया परिदृश्य का बचाव करते हुए कहा कि भारत दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा है, लेकिन उसके बारे में बाहरी समझ अक्सर सीमित होती है; उन्होंने यह भी कहा कि अकेले दिल्ली में ही करीब 200 टीवी चैनल चल रहे हैं।

    अब इस पूरे मामले में राजनीति भी जुड़ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा और लिखा कि “nothing to hide, nothing to fear” यानी छिपाने को कुछ नहीं हो तो डरने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया एक “compromised PM” को कुछ सवालों से घबराकर पीछे हटते देखती है, तो भारत की छवि पर असर पड़ता है।

    यह पूरा विवाद अब प्रेस स्वतंत्रता, विदेश नीति और भारत की सार्वजनिक छवि को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ नॉर्वेजियन पत्रकार अपने सवाल को पत्रकारिता का हिस्सा बता रही हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय पक्ष इसे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के गलत आकलन से जोड़ रहा है।

  • पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं

    पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं



    नई दिल्ली। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे गए एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग सोशल मीडिया पर आलोचना और आरोपों के घेरे में आ गईं, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सफाई दी है।

    हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं और उनका काम केवल पत्रकारिता करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व सत्ता में बैठे लोगों से सीधे सवाल पूछना होता है, चाहे वह सवाल टकराव पैदा करने वाले ही क्यों न हों। उनके अनुसार, पत्रकारों को पहले से तैयार जवाबों को बिना सवाल किए स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए कठिन सवाल पूछना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ओस्लो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेले लिंग ने पीएम मोदी से कुछ सवाल पूछे। सवालों की प्रकृति और पूछने के तरीके को लेकर वहां मौजूद कुछ लोगों और बाद में सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट की गई और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, मीडिया की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया गया।

    विवाद बढ़ने के बाद हेले लिंग ने एक पोस्ट में लिखा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि वह किसी विदेशी सरकार की एजेंट या जासूस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से नॉर्वे में पत्रकारिता करती हैं और उनका उद्देश्य केवल मानवाधिकार, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना है।

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जुड़े वीडियो पर कुछ समय बाद कमेंट्स बंद कर दिए गए, लेकिन इससे पहले ही उनके सवालों को लेकर ऑनलाइन बहस तेज हो चुकी थी। पत्रकार का कहना है कि अगर सार्वजनिक मंच पर नेताओं से सवाल पूछने का अवसर मिलता है तो पत्रकारों को अपनी भूमिका निभाने से रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस पूरे मामले पर भारतीय पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मजबूत व्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विविध भाषाओं और क्षेत्रों में सैकड़ों मीडिया संस्थान सक्रिय हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाते हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और राजनयिक संवाद की मर्यादाओं पर बहस छेड़ दी है।

  • भारत-नॉर्डिक समिट 2026: ओस्लो में PM मोदी की मौजूदगी से रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 5 देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग

    भारत-नॉर्डिक समिट 2026: ओस्लो में PM मोदी की मौजूदगी से रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 5 देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग


    नई दिल्ली। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का तीसरा संस्करण मंगलवार 19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग ले रहे हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत के साथ पांच नॉर्डिक देश नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा हुआ है। इससे पहले 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नॉर्वे का दौरा किया था। यह समिट पहले 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हो चुकी बैठकों की अगली कड़ी है, जिसमें लगातार भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

    यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार में बदलावों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति पर भी असर डाला है। ऐसे हालात में नॉर्डिक देशों के साथ भारत की साझेदारी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक में मुख्य रूप से ग्रीन एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक्नोलॉजी और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही व्यापार बढ़ाने, निवेश को आसान बनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वर्तमान में लगभग 19 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जो भविष्य में और बढ़ने की संभावना है।

    नॉर्डिक क्षेत्र की कंपनियों की भारत में मजबूत उपस्थिति है, जिनमें नोकिया, वॉल्वो और IKEA जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं। वहीं भारत की ओर से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सेवाएं और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नॉर्डिक देश अपने तकनीकी नवाचार, ग्रीन ट्रांजिशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल के लिए दुनिया में अग्रणी हैं, जो भारत की विकास नीतियों के साथ मेल खाता है।

    कुल मिलाकर यह समिट भारत और नॉर्डिक देशों के बीच न केवल आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के बीच एक स्थिर और टिकाऊ सहयोग मॉडल को भी मजबूत करेगा।

  • ओस्लो से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत में आएगा 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

    ओस्लो से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत में आएगा 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नॉर्वे की राजधानी Oslo से भारत के लिए बड़ा आर्थिक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) देशों के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आएगा और करीब 10 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। पीएम मोदी ने इसे भारत और यूरोप के रिश्तों का “गोल्डन एरा” बताते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत वैश्विक निवेश और भरोसे का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है।

    नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच आर्थिक साझेदारी अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास का बड़ा इंजन बनने जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि EFTA समझौते से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप सेक्टर को जबरदस्त फायदा मिलेगा। इससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे। मोदी ने साफ कहा कि भारत केवल बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भरोसेमंद विकास साझेदार बन चुका है।

    पीएम मोदी ने अपनी नॉर्वे यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उनका यह दौरा पिछले साल तय था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के कारण इसे टालना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का खुलकर समर्थन किया, जो दोनों देशों की गहरी मित्रता को दर्शाता है।

    भारत-नॉर्डिक समिट पर दुनिया की नजर
    ओस्लो में 19 मई को होने वाली तीसरी भारत-नॉर्डिक समिट को लेकर भी काफी उत्साह है। इस सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे। बैठक में ग्रीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर मंथन होगा।

    यह समिट पहली बार 2018 में स्टॉकहोम और दूसरी बार 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हुई थी। इस बार माना जा रहा है कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    नॉर्वे ने कहा- भारत भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार
    नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत जैसे लोकतांत्रिक और भरोसेमंद देशों के साथ साझेदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्वे कई नए समझौतों की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग और मजबूत होगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इस दौरान व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग, हरित ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मोदी की यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का चौथा चरण है। इससे पहले वे UAE, नीदरलैंड और स्वीडन का दौरा कर चुके हैं, जबकि इसके बाद वे इटली जाएंगे।