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  • MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त

    MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश टेक्स्ट बुक कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Text Book Corporation) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह (Saubhagya Singh) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सादगी बरतने की अपील के बावजूद 200 गाड़ियों की एक जश्न वाली रैली निकालने के लिए दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि नोटिस का जवाब मिलने तक सौभाग्य सिंह पर अपने ऑफिस में प्रवेश, सरकारी वाहनों और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि जांच पूरी होने तक उन्हें सौंपी गई सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं।

    उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री कार्यालय ने मितव्ययिता उपायों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लिया है। सरकार ने वाहन रैली को अनावश्यक और सरकार की सादगी की नीति के खिलाफ माना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दिखावा और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”


    भाजपा नेता ने सैकड़ों गाड़ियों संग रैली निकाली, पार्टी ने पद से हटाया

    ऐसे ही एक मामले में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालने के आरोप में भाजपा ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष को पद से हटा दिया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हाल ही में इस पद पर नियुक्त किए गए सज्जन सिंह यादव को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर पद से हटाया गया है। बताया गया कि सज्जन सिंह यादव के किसान मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अवसर पर बुधवार को भिंड शहर में एक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों वाहन शामिल हुए थे। भिंड शहर भोपाल से लगभग 500 किलोमीटर दूर है।

    भाजपा ने यादव को जारी पत्र में कहा कि उनका यह आचरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ अपील के विपरीत है और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।


    नियुक्ति निरस्त की गई

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “यादव की नियुक्ति अनुशासनहीनता और ईंधन बचत एवं मितव्ययिता के उपायों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की गई अपील का पालन नहीं करने के कारण निरस्त कर दी गई है।”

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने, शहरों में अधिक से अधिक मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पार्सल आवाजाही के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी।

  • कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज… PM मोदी तैयार करा रहे हैं मंत्रियों के कामकाज का ब्योरा!

    कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज… PM मोदी तैयार करा रहे हैं मंत्रियों के कामकाज का ब्योरा!


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल अगले महीने पूरे होने जा रहे हैं। इसके बाद संभावित मंत्रिपरिषद विस्तार (Council of Ministers expansion) को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी एक वजह भाजपा (BJP) के नए संगठन की टीम का गठन होना भी शामिल है। कुछ नेताओं की संगठन और सरकार में अदला-बदली भी हो सकती है। इस बीच, मंत्रियों के कामकाज को लेकर भी ब्योरा तैयार किया जा रहा है और उनके संसदीय क्षेत्र एवं राज्य से उनके बारे में जानकारी ली जा रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अभी तक कोई विस्तार नहीं हुआ है। पिछले कार्यकाल में भी सरकार बनने के लगभग दो साल बाद ही पहला विस्तार हुआ था। ऐसे में, अब विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा संगठन केंद्र सरकार में शामिल अपने मंत्रियों के कामकाज को लेकर विभिन्न स्तरों से फीडबैक ले रहा है। प्रदेश संगठन एवं संसदीय क्षेत्र से भी आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।

    मंत्रियों के क्षेत्र में दौरे, केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, संसदीय क्षेत्र में प्रवास, संगठन की बैठकों में हिस्सेदारी, कार्यकर्ताओं से संपर्क आदि की जानकारी ली जा रही है। सूत्रों का कहना है, इस कवायद के पीछे संभावित विस्तार है। माना जा रहा है कि संभावित विस्तार में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। पार्टी इस समय नया,युवा संगठन को तरजीह दे रही है।


    अनुभवी नेताओं को संगठन में लाने की संभावना

    संगठन की टीम और मंत्रिमंडल विस्तार दोनों के कई पहलू एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। नए व युवा अध्यक्ष के सहयोग के लिए कुछ अनुभवी नेताओं को संगठन में लाए जाने की भी संभावना है। पश्चिम बंगाल में जीत के बाद सरकार में अब इस राज्य का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा और आने वाले चुनावों के मद्देनजर संबंधित राज्यों को भी जगह मिल सकती है। सबसे ज्यादा संभावना चेहरों को बदलने की है। मोदी सरकार में अभी 72 मंत्री हैं और यह संख्या 81 तक बढ़ाई जा सकती है।

  • भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील

    भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15-20 मई 2026 तक पांच देशों के दौरे पर जा रहे हैं जिसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.-UAE) की यात्रा से हो रही है. पीएम मोदी यूएई में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan) से मुलाकात करेंगे. ईरान जंग के बीच जहां दुनिया तेल-गैस की किल्लत से जूझ रही है, माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों नेता ऊर्जा सुरक्षा पर प्रमुखता से बात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

    यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में UAE ने तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ढांचे से बाहर निकलने का फैसला किया है. ऐसे में दोनों देशों के लिए प्रत्यक्ष द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी और भी अहम हो गई है, खासकर लंबे समय के लिए एनर्जी सप्लाई और उसके भंडारण में सहयोग के क्षेत्र में।

    भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेता द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें खास तौर पर ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल होगा।


    फ्यूल क्राइसिस के बीच भारत की उम्मीद बन सकते हैं ये पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स

    मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे. यह साझेदारी मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित है. बयान में कहा गया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेगी।

    भारत और UAE ने पिछले कुछ सालों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ाया है. इसमें कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश और पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के डाउनस्ट्रीम सेक्टर में सहयोग शामिल है। UAE फिलहाल भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले 25 सालों में भारत में सबसे ज्यादा निवेश करने वाले देशों में सातवें स्थान पर है।

    इस यात्रा के दौरान UAE में रहने वाले 45 लाख से अधिक भारतीय समुदाय के कल्याण पर भी खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है. खाड़ी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय सबसे बड़े विदेशी समुदायों में से एक माना जाता है।


    यूएई के अलावा और किन देशों के दौरे पर जा रहे हैं पीएम

    पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे का मुख्य फोकस ऊर्जा सहयोग है जिसमें वो नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर भी बात होगी. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में शामिल पांच देश हैं- यूएई और यूरोप के चार देश नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली. यूरोपीय देशों के दौरे का मकसद ग्रीन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करना और भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों को मजबूती देना है।

  • पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi की ऊर्जा बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील का असर अब राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपने सरकारी काफिले की गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है।

    मुख्यमंत्री ने इस पहल को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा संकल्प बताया है। उनका कहना है कि ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों का सही उपयोग आज की आवश्यकता है, और हर स्तर पर इसके लिए जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जागरूक भारत के निर्माण की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सोच है जो देश को अधिक जिम्मेदार और सतत विकास की ओर ले जाती है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपने मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचें और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं।

    राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए सरकारी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।

    इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर ऊर्जा बचत और ईंधन के कम उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल और अनावश्यक खपत को कम करने की सलाह दी थी, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया जा सके।

    इसी दिशा में यह कदम एक प्रतीकात्मक संदेश देता है कि यदि नेतृत्व स्तर पर बदलाव आता है, तो उसका असर समाज के अन्य वर्गों तक भी तेजी से पहुंचता है।

  • . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल

    . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल


    नई दिल्ली। भोपाल प्रधानमंत्री Narendra Modi की पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग की अपील का असर अब मध्यप्रदेश सरकार में साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अपने वीवीआईपी काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या घटाकर बड़ा संदेश दिया है। अब मुख्यमंत्री के काफिले में पहले की तरह 13 गाड़ियां नहीं, बल्कि सिर्फ 7 वाहन ही नजर आए।
    बुधवार को जब मुख्यमंत्री भोपाल से नरसिंहपुर के लिए रवाना हुए, तब वीआईपी रोड और एयरपोर्ट रोड पर उनका छोटा काफिला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सरकार ने इसे ईंधन संरक्षण और सादगी की दिशा में अहम कदम बताया है।
    सीएम के इस फैसले के बाद प्रदेश सरकार के अन्य मंत्री और अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। डिप्टी सीएम Rajendra Shukla ने भी अपने काफिले में न्यूनतम वाहनों के उपयोग का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रहित में ईंधन बचत हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और विभागीय गतिविधियों में अनावश्यक वाहन उपयोग से बचा जाएगा।
    डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और साझा वाहन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि ईंधन संरक्षण के साथ पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना भी जरूरी है, क्योंकि इससे आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और स्वास्थ्य के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
    इधर, खेल एवं सहकारिता मंत्री Vishvas Sarang ने भी अपने सुरक्षा काफिले में बदलाव किया। वे केवल एक कार में स्टाफ के साथ मंत्रालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह आह्वान केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
    मंत्री सारंग ने कहा कि हर नागरिक का दायित्व है कि वह पेट्रोल-डीजल की खपत कम करे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी अपील की कि अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें और ईंधन बचत को जनआंदोलन बनाएं।
    प्रदेश सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सादगी और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इसे पीएम मोदी की अपील पर तेज और प्रतीकात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

  • पीएम मोदी की अपील का असर, लग्जरी कार छोड़ साइकिल से दफ्तर पहुंचने लगे जीएसटी अधिकारी

    पीएम मोदी की अपील का असर, लग्जरी कार छोड़ साइकिल से दफ्तर पहुंचने लगे जीएसटी अधिकारी

    नई दिल्ली । देशभर में ईंधन बचत को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिशों के बीच अब इसका असर सरकारी अधिकारियों के व्यवहार में भी दिखाई देने लगा है। राजधानी में तैनात एक वरिष्ठ जीएसटी अधिकारी ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से अपनी लग्जरी कार का इस्तेमाल बंद कर दिया है और अब वह रोजाना साइकिल से दफ्तर पहुंच रहे हैं। उनकी यह पहल चर्चा का विषय बन गई है और लोग इसे एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।

    जीएसटी विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत
    Narendra Yadav का मानना है कि मौजूदा समय में दुनिया कई आर्थिक और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने स्तर पर ऐसे कदम उठाए जिससे देश को लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए भी बेहद जरूरी है।

    उनके अनुसार, अगर लोग धीरे-धीरे छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाना शुरू करें तो इसका असर बड़े स्तर पर दिखाई दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि साइकिल का इस्तेमाल केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है। नियमित रूप से साइकिल चलाने से शरीर सक्रिय रहता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है।

    उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटी दूरी तय करने के लिए निजी वाहनों की बजाय साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग किया जाए। बाजार जाने, आसपास के काम निपटाने या छोटी यात्राओं के लिए साइकिल एक बेहतर विकल्प हो सकती है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या भी कम हो सकती है।

    फिटनेस अभियानों से जुड़े होने के कारण वह लंबे समय से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। उनका कहना है कि आज का युवा देश का भविष्य है और वही विकसित भारत के सपने को साकार करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। यदि युवा पीढ़ी फिटनेस और पर्यावरण दोनों के प्रति जागरूक बनेगी, तो इसका असर पूरे समाज पर दिखाई देगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई देशों में ऊर्जा संकट जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में हर व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि वह अपने स्तर पर क्या योगदान दे सकता है। उनके अनुसार बड़े बदलाव हमेशा छोटी शुरुआत से ही आते हैं और व्यक्तिगत प्रयास मिलकर एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं।

    उनकी यह पहल अब लोगों के बीच प्रेरणा का विषय बन रही है। सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चा तक, लोग इसे एक जिम्मेदार नागरिक के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। यह संदेश भी सामने आ रहा है कि यदि आम लोग और सरकारी अधिकारी मिलकर छोटे-छोटे बदलाव अपनाएं, तो ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा असर पैदा किया जा सकता है।

  • ‘दुनिया का दबाव भी भारत को झुका नहीं सका’, पीएम मोदी ने पोखरण परमाणु परीक्षण की याद दिलाकर दिया बड़ा संदेश

    ‘दुनिया का दबाव भी भारत को झुका नहीं सका’, पीएम मोदी ने पोखरण परमाणु परीक्षण की याद दिलाकर दिया बड़ा संदेश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में पोखरण परमाणु परीक्षण का जिक्र करते हुए भारत की ताकत और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 1998 में जब भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे, तब पूरी दुनिया की नजरें देश पर थीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी दबाव बनाया गया था, लेकिन इसके बावजूद भारत अपने फैसले पर अडिग रहा। प्रधानमंत्री ने यह संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उस ऐतिहासिक पल को याद किया जब राजस्थान के पोखरण में भारत ने सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी वैज्ञानिक और रणनीतिक क्षमता का एहसास कराया था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षण नहीं था, बल्कि भारत की मजबूत इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक था। उस समय वैश्विक दबाव और आलोचनाओं के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी और दुनिया को यह दिखा दिया कि देश अपने फैसले खुद लेने की क्षमता रखता है।

    उन्होंने अपने संदेश में शक्ति और सामर्थ्य को लेकर एक संस्कृत श्लोक का भी उल्लेख किया और बताया कि केवल क्षमता होना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे सही दिशा और ऊर्जा के साथ उपयोग करना भी जरूरी है। उनके अनुसार शक्ति और सामर्थ्य का संतुलन ही किसी राष्ट्र को मजबूत बनाता है और यही भारत की सबसे बड़ी पहचान है।

    13 मई की तारीख भारत के इतिहास में विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसी दिन पोखरण में परमाणु परीक्षणों की श्रृंखला को आगे बढ़ाया गया था। इससे पहले 11 मई 1998 को भारत ने पहली बार सफल परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। इसके बाद दो और परीक्षण किए गए, जिन्हें देश की वैज्ञानिक उपलब्धि और सुरक्षा नीति के लिहाज से बेहद अहम माना गया।

    इन परीक्षणों का उद्देश्य भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करना और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए जरूरी आंकड़े जुटाना था। परीक्षण पूरी तरह नियंत्रित और भूमिगत तरीके से किए गए थे, जिससे किसी प्रकार का बाहरी खतरा पैदा नहीं हुआ। इस सफलता के बाद भारत को वैश्विक स्तर पर एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में नई पहचान मिली।

    उस दौर में देश के नेतृत्व और वैज्ञानिकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही थी। राजनीतिक इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक कौशल के मेल ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया, जिनके पास परमाणु क्षमता मौजूद है। यही वजह है कि आज भी पोखरण परीक्षण को भारत के आत्मसम्मान और रणनीतिक मजबूती के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

    प्रधानमंत्री के इस बयान को केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे वर्तमान समय में भारत की वैश्विक स्थिति और आत्मविश्वास के संदेश के तौर पर भी समझा जा रहा है।

  • BJP शासित राज्यों ने अपनायी PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील, कई बड़े फैसले लागू

    BJP शासित राज्यों ने अपनायी PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील, कई बड़े फैसले लागू

    नई दिल्ली । देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें सक्रिय हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील के बाद बीजेपी शासित कई राज्यों ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

    दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में सरकारें अलग-अलग स्तर पर नए निर्देश जारी कर रही हैं। कहीं सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाई जा रही है, तो कहीं अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।


    दिल्ली में वाहनों के इस्तेमाल पर नियंत्रण

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभागीय कामकाज में वाहनों के सीमित उपयोग के निर्देश दिए हैं। अब मंत्री, विधायक और अधिकारी जरूरत के अनुसार कम से कम वाहनों का इस्तेमाल करेंगे। साथ ही कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।


    राजस्थान में फिजूलखर्ची पर रोक

    राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का आदेश दिया है। उन्होंने अनावश्यक वाहनों के उपयोग पर रोक लगाने और सरकारी कामकाज में सादगी अपनाने की बात कही है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी जरूरत के हिसाब से ही वाहन उपयोग करने की सलाह दी गई है।


    उत्तर प्रदेश में 50% तक कटौती

    उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में 50 प्रतिशत तक वाहन कम करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मेट्रो, बस, सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, कारपूलिंग और साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकारी बैठकों को ऑनलाइन करने और कुछ संस्थानों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की भी सलाह दी गई है, ताकि यात्रा और ईंधन खर्च कम किया जा सके।

    मध्य प्रदेश में CM ने घटाए वाहन

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में ईंधन बचाना जरूरी है। साथ ही मंत्रियों और निगम-मंडल पदाधिकारियों से सादगी अपनाने की अपील की गई है। प्रदेशवासियों को भी सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    गुजरात में विदेश दौरा रद्द

    गुजरात में डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया। इसे ईंधन बचत अभियान के प्रति सरकार की गंभीरता के तौर पर देखा जा रहा है।

    ‘नो व्हीकल डे’ जैसे सुझाव भी चर्चा में

    कई राज्यों में अब ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, स्कूल बसों के बेहतर उपयोग और बिजली बचत जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है। दफ्तरों के समय में बदलाव और अलग-अलग शिफ्ट में काम शुरू करने जैसे सुझाव भी सामने आए हैं, ताकि पीक आवर्स में ट्रैफिक और ईंधन खपत कम की जा सके।

  • 2026 को लेकर भविष्यमालिका की भविष्यवाणी पर मचा बवाल: सोशल मीडिया दावों और वैश्विक हालातों के बीच बढ़ी चर्चा

    2026 को लेकर भविष्यमालिका की भविष्यवाणी पर मचा बवाल: सोशल मीडिया दावों और वैश्विक हालातों के बीच बढ़ी चर्चा



    नई दिल्ली। सोशल मीडिया और कुछ अनौपचारिक रिपोर्ट्स में भविष्यमालिका की कथित भविष्यवाणियों को लेकर 2026-27 के दौरान बड़े वैश्विक बदलाव, आर्थिक संकट और युद्ध जैसी स्थितियों के दावे किए जा रहे हैं। इन दावों को हाल के अंतरराष्ट्रीय हालात और महंगाई जैसी आर्थिक चुनौतियों से जोड़कर वायरल किया जा रहा है, लेकिन इनकी कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि मौजूद नहीं है।

    वहीं भारत सरकार या प्रधानमंत्री की ओर से 2026 को लेकर सोने की खरीद, पेट्रोल-डीजल खर्च या घरेलू बचत जैसी किसी विशेष अपील का कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है। ऐसे दावे अक्सर सोशल मीडिया पर संदर्भ से हटकर फैलाए जाते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।

    वर्तमान समय में दुनिया भर में महंगाई, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जरूर देखा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें किसी “भविष्यवाणी” से जोड़कर देखना सही नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति पर असर ठोस नीतियों, युद्धों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर निर्भर करता है, न कि धार्मिक या पारंपरिक भविष्यवाणियों पर।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसी भविष्यवाणियां अक्सर प्रतीकात्मक या आस्था पर आधारित होती हैं, जिनका उद्देश्य भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी करना नहीं होता। इसलिए इन्हें वास्तविक घटनाओं के रूप में प्रस्तुत करना गलत सूचना को बढ़ावा दे सकता है।

    फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया दावों, धार्मिक मान्यताओं और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों की चर्चाओं के बीच उलझा हुआ है, जिसकी सत्यता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

  • फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल

    फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया “सोना न खरीदने” जैसी अपील के बाद सोशल मीडिया पर एक पुराना राजनीतिक दावा फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक कथित 1967 की अखबार कटिंग शेयर की जा रही है। इस दावे के जरिए कहा जा रहा है कि इंदिरा गांधी ने भी आर्थिक संकट के दौरान लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी, लेकिन जांच में यह दावा फर्जी पाया गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कथित “द हिंदू” अखबार की कटिंग 6 जून 1967 की बताई जा रही है, जिसमें इंदिरा गांधी के नाम से “सोना न खरीदने” की अपील का दावा किया गया है। लेकिन खुद अखबार “द हिंदू” ने इस कटिंग को पूरी तरह फर्जी और डिजिटल रूप से एडिटेड बताया है और स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई पेज उनके आर्काइव में मौजूद नहीं है।

    अखबार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। तथ्य यह है कि 1960 के दशक में भारत विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक दबाव से गुजर रहा था, लेकिन उस समय सोना खरीदने पर ऐसी कोई राष्ट्रीय स्तर की औपचारिक रोक या सार्वजनिक अपील नहीं की गई थी।

    इस विवाद के बीच बीजेपी नेताओं द्वारा भी इस कथित कटिंग को शेयर किए जाने पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस दावे का हवाला देते हुए पीएम मोदी की अपील का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है।

    कांग्रेस का कहना है कि आज की आर्थिक अपील को ऐतिहासिक रूप से गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि बीजेपी का तर्क है कि अतीत में भी आर्थिक अनुशासन की बातें होती रही हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैक्ट-चेक और राजनीतिक दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।