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  • पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं

    पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं



    नई दिल्ली। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे गए एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग सोशल मीडिया पर आलोचना और आरोपों के घेरे में आ गईं, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सफाई दी है।

    हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं और उनका काम केवल पत्रकारिता करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व सत्ता में बैठे लोगों से सीधे सवाल पूछना होता है, चाहे वह सवाल टकराव पैदा करने वाले ही क्यों न हों। उनके अनुसार, पत्रकारों को पहले से तैयार जवाबों को बिना सवाल किए स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए कठिन सवाल पूछना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ओस्लो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेले लिंग ने पीएम मोदी से कुछ सवाल पूछे। सवालों की प्रकृति और पूछने के तरीके को लेकर वहां मौजूद कुछ लोगों और बाद में सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट की गई और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, मीडिया की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया गया।

    विवाद बढ़ने के बाद हेले लिंग ने एक पोस्ट में लिखा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि वह किसी विदेशी सरकार की एजेंट या जासूस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से नॉर्वे में पत्रकारिता करती हैं और उनका उद्देश्य केवल मानवाधिकार, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना है।

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जुड़े वीडियो पर कुछ समय बाद कमेंट्स बंद कर दिए गए, लेकिन इससे पहले ही उनके सवालों को लेकर ऑनलाइन बहस तेज हो चुकी थी। पत्रकार का कहना है कि अगर सार्वजनिक मंच पर नेताओं से सवाल पूछने का अवसर मिलता है तो पत्रकारों को अपनी भूमिका निभाने से रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस पूरे मामले पर भारतीय पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मजबूत व्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विविध भाषाओं और क्षेत्रों में सैकड़ों मीडिया संस्थान सक्रिय हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाते हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और राजनयिक संवाद की मर्यादाओं पर बहस छेड़ दी है।

  • भारत-नॉर्डिक समिट 2026: ओस्लो में PM मोदी की मौजूदगी से रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 5 देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग

    भारत-नॉर्डिक समिट 2026: ओस्लो में PM मोदी की मौजूदगी से रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 5 देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग


    नई दिल्ली। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का तीसरा संस्करण मंगलवार 19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग ले रहे हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत के साथ पांच नॉर्डिक देश नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा हुआ है। इससे पहले 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नॉर्वे का दौरा किया था। यह समिट पहले 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हो चुकी बैठकों की अगली कड़ी है, जिसमें लगातार भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

    यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार में बदलावों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति पर भी असर डाला है। ऐसे हालात में नॉर्डिक देशों के साथ भारत की साझेदारी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक में मुख्य रूप से ग्रीन एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक्नोलॉजी और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही व्यापार बढ़ाने, निवेश को आसान बनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वर्तमान में लगभग 19 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जो भविष्य में और बढ़ने की संभावना है।

    नॉर्डिक क्षेत्र की कंपनियों की भारत में मजबूत उपस्थिति है, जिनमें नोकिया, वॉल्वो और IKEA जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं। वहीं भारत की ओर से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सेवाएं और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नॉर्डिक देश अपने तकनीकी नवाचार, ग्रीन ट्रांजिशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल के लिए दुनिया में अग्रणी हैं, जो भारत की विकास नीतियों के साथ मेल खाता है।

    कुल मिलाकर यह समिट भारत और नॉर्डिक देशों के बीच न केवल आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के बीच एक स्थिर और टिकाऊ सहयोग मॉडल को भी मजबूत करेगा।

  • ओस्लो से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत में आएगा 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

    ओस्लो से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत में आएगा 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नॉर्वे की राजधानी Oslo से भारत के लिए बड़ा आर्थिक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) देशों के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आएगा और करीब 10 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। पीएम मोदी ने इसे भारत और यूरोप के रिश्तों का “गोल्डन एरा” बताते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत वैश्विक निवेश और भरोसे का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है।

    नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच आर्थिक साझेदारी अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास का बड़ा इंजन बनने जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि EFTA समझौते से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप सेक्टर को जबरदस्त फायदा मिलेगा। इससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे। मोदी ने साफ कहा कि भारत केवल बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भरोसेमंद विकास साझेदार बन चुका है।

    पीएम मोदी ने अपनी नॉर्वे यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उनका यह दौरा पिछले साल तय था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के कारण इसे टालना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का खुलकर समर्थन किया, जो दोनों देशों की गहरी मित्रता को दर्शाता है।

    भारत-नॉर्डिक समिट पर दुनिया की नजर
    ओस्लो में 19 मई को होने वाली तीसरी भारत-नॉर्डिक समिट को लेकर भी काफी उत्साह है। इस सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे। बैठक में ग्रीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर मंथन होगा।

    यह समिट पहली बार 2018 में स्टॉकहोम और दूसरी बार 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हुई थी। इस बार माना जा रहा है कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    नॉर्वे ने कहा- भारत भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार
    नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत जैसे लोकतांत्रिक और भरोसेमंद देशों के साथ साझेदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्वे कई नए समझौतों की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग और मजबूत होगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इस दौरान व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग, हरित ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मोदी की यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का चौथा चरण है। इससे पहले वे UAE, नीदरलैंड और स्वीडन का दौरा कर चुके हैं, जबकि इसके बाद वे इटली जाएंगे।

  • विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भी साझा किया गया, जिसमें देश को दीर्घकालिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने की रूपरेखा शामिल है।

    बैठक में दोनों नेताओं ने माना कि भारत और नीदरलैंड साझा मूल्यों, विश्वास और पारस्परिक हितों के आधार पर पहले से ही मजबूत संबंध साझा करते हैं। अब इस साझेदारी को और व्यापक बनाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें जल प्रबंधन, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

    जल प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत सहयोग मौजूद है, जिसे अब और आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की विशाल आवश्यकताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में नई परियोजनाओं और तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी तरह रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों पर भी चर्चा की गई।

    आर्थिक सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाओं पर विचार किया गया। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य की दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

    इस दौरान एक महत्वपूर्ण समझौते का भी उल्लेख किया गया, जिसमें टाटा समूह और एएसएमएल के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में साझेदारी शामिल है। इस समझौते को भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारत में उन्नत तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने पोर्ट कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन सुधार, कृषि क्षेत्र और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। भारत के बंदरगाहों को नीदरलैंड के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जिससे वैश्विक व्यापार को नई गति मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड के संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ज्ञान आधारित भी हैं, जिन्हें और गहराई देने की आवश्यकता है।

    इस दौरे के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत भारत को ऐतिहासिक कलाकृतियों की वापसी भी हुई, जिसे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।

  • कोविड और युद्ध ने किए-धरे पर फेरा पानी… गरीबी लौटी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट: PM मोदी

    कोविड और युद्ध ने किए-धरे पर फेरा पानी… गरीबी लौटी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट: PM मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र (Prime Minister Narendra) ने इस समय को तबाही का दशक घोषित करते हुए बड़ी बात कह दी है। शनिवार को नीदरलैंड्स (Netherlands) में भारतीयों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड (Covid) और मध्य एशिया (Central Asia) में छिड़े युद्ध ने सारे किए धरे पर पानी फेर दिया और दुनिया एक बार फिर गरीबी के गड्ढे में जा गिरी। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े संकट से जूझ रही है। पीएम मोदी इस समय पांच देशों के दौरे पर हैं। यूएई के बाद वह नीदरलैंड्स पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि, विश्व के सामने अब नई चुनौतियां हैं और इनसे निपटना आसान नहीं है।


    पहले कोरोना फिर युद्ध ने मचाई तबाही

    पीएम मोदीने कहा कि यह दशक प्रलयंकारी साबित हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर हालात जल्द नहीं संभले तो बीते कई दशकों के काम पर पानी फिर जाएगा और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा गरीब हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के लोगों को पहले ही सावधान कर चुके हैं। उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल के कम इस्तेमाल की सलाह दी है। पीएम मोदी ने सरकारी खर्च पर भी नियंत्रण करने के निर्देश दे दिए हैं।


    पीएम मोदी की लोगों को सलाह

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों हैदराबाद में कहा था कि लोगों को जितना हो सके वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए और आना जाना कम कर देना चाहिए। इसके अलावा कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचना चाहिए ताकि विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके। पीएम मोदी ने कहा कि विदेशी मुद्रा को बचाना भी एक तरह की देशभक्ति है। इसके अलावा आने-जाने के लिए कार पूल करें और खेतों में उर्वरकों का इस्तेमाल भी कम करें। प्रधानमंत्री ने कहा था कि लोगों को एसी का भी इस्तेमाल कर देना चाहिए जिससे ऊर्जा संकट से निपटा जा सके।


    पेट्रोल डीजल में लगी आग

    देश में पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजापा नहीं हुआ था। हालांकि ईरान संकट की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी गई है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये का और डीजल 90.67 रुपये का हो गया है। जानकारों का कहना है कि इस वृद्धि का असर सीधा-सीधा आपकी रसोईऔर रोजमर्रा की जिंदगी पर होने वाला है। अमूल कंपनी ने अपने दूध की कीमत में भी वृद्धि की है।


    ऊर्जा संकट से निपटने का प्रयास

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि व्यापार और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ चर्चा की तथा उनसे भारत में निवेश करने का आह्वान किया।

  • PM मोदी का नीदरलैंड दौरा… यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी ASML से टाटा की डील, खुलेंगे रोजगार के अवसर

    PM मोदी का नीदरलैंड दौरा… यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी ASML से टाटा की डील, खुलेंगे रोजगार के अवसर


    दिल्ली।
    एएसएमएल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (ASML and Tata Electronics) के बीच हुए समझौते से भारत (India) में सेमीकंडक्टर उत्पादन (Semiconductor production) को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) की नीदरलैंड्स यात्रा (Netherlands trip) के दौरान हुए इस करार से तकनीक, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है.नीदरलैंड्स की प्रमुख तकनीकी कंपनी एएसएमएल ने शनिवार को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत भारत में सेमीकंडक्टर संयंत्र के निर्माण और विस्तार में सहयोग किया जाएगा.

    यह समझौता प्रधान/मंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान हुआ और इसे उनकी मौजूदगी में अंतिम रूप दिया गया.एएसएमएल सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अत्याधुनिक मशीनें बनाती है. कंपनी ने कहा कि वह भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में स्थित धोलेरा संयंत्र की स्थापना और उसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी. यह संयंत्र प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य में बनाया जा रहा है.

    कंपनी ने बताया कि वह इस परियोजना में अपनी अत्याधुनिक लिथोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल करेगी.ये उपकरण हाई टेक माइक्रोचिप के तेज और बड़े पैमाने पर उत्पादन में काम आते हैं, जो कारों से लेकर मोबाइल फोन तक, कई आधुनिक उपकरणों में उपयोग किए जाते हैं.भारत‑नीदरलैंड्स आर्थिक साझेदारीयह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत और नीदरलैंड्स ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक नया समझौता किया है.

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता हुआ था, जिसे यूरोपीय संघ प्रमुख उर्सुला फोन डेर लाएन ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा था.बाजार पूंजीकरण के हिसाब से यूरोप की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनी एएसएमएल ने कहा कि उसे भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में “कई महत्वपूर्ण अवसर” दिखाई दे रहे हैं.कंपनी के सीईओ क्रिस्टोफ फूके ने एक बयान में कहा कि एएसएमएल इस क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है.टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह संयंत्र लगभग 11 अरब डॉलर के निवेश से विकसित किया जा रहा है.इसमें तैयार होने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल उद्योग और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में उपयोग किए जाएंगे.

    यूरोपीय संघ को भारत उन्नत तकनीक और निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानता है, जिसका इस्तेमाल वह अपने यहां तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए करना चाहता है.दूसरी ओर, यूरोपीय संघ भारत को एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में एक बड़े बाजार के रूप में देखता है.

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति देश के युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा कर रही है.उन्होंने कहा, “यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें हम आने वाले समय में और अधिक ऊर्जा जोड़ते रहेंगे”

    नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रोब येटेन ने कहा कि डच कंपनियां आने वाले वर्षों में भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर सकती हैं और वहां रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.उन्होंने कहा, “यह डच कंपनियों के लिए भारत में निवेश करने के लिए अवसर देता है और साथ ही भारतीय प्रतिभाओं को नीदरलैंड्स आकर्षित करने के मौका भी पैदा करता है”

  • Europe Tour: नीदरलैंड में समकक्ष रॉब-शाही परिवार से मिले PM Modi…. अब जाएंगे स्वीडन

    Europe Tour: नीदरलैंड में समकक्ष रॉब-शाही परिवार से मिले PM Modi…. अब जाएंगे स्वीडन


    एम्स्टर्डम।
    चार यूरोपीय देशों के दौरे (Europe Tour) पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अपनी यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड (Netherlands) में हैं। पीएम मोदी (PM Modi ) ने यहां के राजा विलियम (King William) और रानी मैक्सिमा (Queen Maxima) से मुलाकात के बाद डच प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को भी संबोधित किया। नीदरलैंड के बाद पीएम मोदी स्वीडन जाएंगे, जहां उनके स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

    भारत और नीदरलैंड के बीच रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक सहयोग पर बातचीत
    प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ हुई विस्तृत बातचीत को पीएम मोदी ने सफल करार दिया। उन्होंने एक्स हैंडल पर द्विपक्षीय वार्ता और जेटेन के साथ अलग से हुई चर्चाओं की झलकियों को साझा कर लिखा, ‘कई विषयों पर चर्चा हुई। इनमें से एक विषय रक्षा और सुरक्षा था। मैंने रक्षा उद्योग के लिए जल्द से जल्द एक कार्य योजना तैयार करने की संभावना पर चर्चा की।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नीदरलैंड अंतरिक्ष यात्रा, समुद्री प्रणालियों और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड यात्रा की झलकियों को एक्स पर साझा करते हुए एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘भारत-नीदरलैंड साझेदारी का जीवंत सेतु भारतीय प्रवासी हैं। सूरीनामी हिंदुस्तानी समुदाय के लिए ओसीआई कार्ड की पात्रता को चौथी पीढ़ी से छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। हमारे निर्णय का नीदरलैंड में प्रवासी समुदाय ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया है!’


    पीएम के नीदरलैंड दौरे के बाद दोनों देशों में क्या बदलेगा?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए। तकनीक, शिक्षा, सेहत और खनिज के अलावा नवाचार को लेकर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। नीदरलैंड दौरे पर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर भी साझेदारी का निर्णय हुआ है। इसके तहत डच कंपनी ASPL और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स आपसी सहयोग बढ़ाएंगी। पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए फैसलों को ठोस और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के विकास और समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।


    पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी प्रगति हुई है: पीएम मोदी

    डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, ‘हम नीदरलैंड को भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक मानते हैं।लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार व्यवहार भारत और नीदरलैंड के साझा दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।’

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमें हर क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की गति और कौशल को शामिल करना चाहिए। नवाचार और निवेश का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें इनोवेशन, निवेश, स्थिरता और रक्षा के क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जरूरत है। हमारे साझा दृष्टिकोण के तहत, हम भारत-नीदरलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं।’


    पीएम मोदी उम्र में दोगुने, लेकिन उत्साह युवाओं से कम नहीं

    नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता के समय पीएम मोदी को अपनी ट्रेडमार्क परिधान कुर्ते और पायजामे और हाफ जैकेट के साथ शॉल लिए देखा गया। उनकी उम्र की तुलना में लगभग आधे, 38 साल के जेटेन कोर्ट-पैंट और टाई लगाए दिखे। दोनों की मुताकाल के कई वीडियो सामने आए हैं, इसमें देखा जा सकता है कि पीएम मोदी अपने डच समकक्ष की तुलना में भले ही उम्र में दोगुने बड़े हैं, लेकिन उनका उत्साह युवाओं से कम नहीं है।


    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के 38 वर्षीय समकक्ष से की मुलाकात

    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के शाही परिवार से मुलाकात के बाद 38 वर्षीय डच समकक्ष से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड में अपने समकक्ष रॉब जेटेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। दोनों की मुलाकात का वीडियो भी सामने आया है।


    नीदरलैंड के शाही परिवार से मिले पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा

    अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द हेग में नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की, जहां दोनों देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर चर्चा हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और जल प्रबंधन जैसे भविष्य के क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया।


    भारतीय राजदूत पीएम मोदी के स्वीडन आगमन पर क्या बोले?

    स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने पीएम मोदी के दौरे पर कहा, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री रविवार को आ रहे हैं। दोनों की मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद रहेंगे। इस औपचारिक चर्चा के बाद शाम को प्रधानमंत्री दो व्यावसायिक कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। वे स्वीडन के चुनिंदा सीईओ के एक समूह के साथ दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा, यूरोपियन राउंडटेबल ऑफ इंडस्ट्रीज का एक कार्यक्रम भी निर्धारित है। ये यूरोप के 60 शीर्ष सीईओ का एक समूह है। प्रधानमंत्री भारत और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीईओ के समूह के साथ भी बातचीत करेंगे।


    पीएम के आगमन पर गोथेनबर्ग में विशेष उत्साह

    उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री स्वीडन में बेहद लोकप्रिय हैं। विशेष रूप से गोथेनबर्ग में बहुत ऊर्जा महसूस हो रही है क्योंकि प्रधानमंत्री पहली बार गोथेनबर्ग आ रहे हैं। भारतीय प्रवासियों का केंद्र होने के अलावा गोथेनबर्ग स्वीडिश उद्योग का केंद्र और नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र भी है। यहां कई विश्वविद्यालय, संस्थान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रतिष्ठान हैं।

    पीएम मोदी स्वीडन दौरे पर वोल्वो के मुख्यालय जा सकते हैं
    यूरोप दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन के समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर इस देश का दौरा करेंगे। अपनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में स्वीडन आगमन के बाद पीएम मोदी गोथेनबर्ग में वोल्वो के मुख्यालय भी जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच अहम समझौते होने की उम्मीद है। भारतीय प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर वोल्वो ग्रुप के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) जेन्स होल्टिंगर ने कहा, पीएम मोदी की यात्रा हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। यह स्वीडन और भारत के बीच मजबूत संबंधों को दिखाने का भी अवसर है। वोल्वो ग्रुप पिछले 25 वर्षों से भारत में कार्यरत है… भारत में हमारे लगभग 5,000 सहकर्मी हैं, जो विश्व में हमारा दूसरा सबसे बड़ा अनुसंधान केंद्र है।


    मित्रता का एक प्रमुख स्तंभ आर्थिक सहयोग भी है

    पीएम मोदी ने एक अन्य एक्स पोस्ट में लिखा कि भारत और नीदरलैंड के बीच मित्रता का एक प्रमुख स्तंभ आर्थिक सहयोग भी है। उन्होंने कहा, ‘भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अनगिनत अवसर प्रदान करता है। फिनटेक, महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। हमने सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।

  • पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती

    पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब सुरक्षा बलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने ईंधन की खपत कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें वाहनों के उपयोग से लेकर प्रशासनिक यात्राओं तक में सख्त बदलाव शामिल हैं।

    CRPF ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए अपने पूरे वाहनों के ईंधन बजट में 10 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। इसके तहत अब किसी भी अधिकारी को एक से अधिक सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। साथ ही मुख्यालय ने सभी इकाइयों से ईंधन बचत के नए सुझाव भी मांगे हैं ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

    सबसे दिलचस्प बदलाव ग्राउंड लेवल पर देखने को मिल रहा है, जहां CRPF ने तय किया है कि जिन इलाकों में संभव होगा, वहां मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग की जगह साइकिल से गश्त की जाएगी। इसका उद्देश्य न सिर्फ ईंधन की बचत करना है, बल्कि जवानों की फिटनेस को भी बेहतर बनाना है। हालांकि यह नियम संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लागू नहीं होगा।

    इसी तरह ITBP ने भी सख्त कदम उठाते हुए अपने अधिकारियों के सभी विदेशी दौरों पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही प्रशासनिक कार्यों और स्थिर तैनाती वाले क्षेत्रों में वाहनों के उपयोग को भी सीमित करने का निर्देश जारी किया गया है, ताकि अनावश्यक ईंधन खपत को रोका जा सके।

    दोनों सुरक्षा बलों ने यह स्पष्ट किया है कि ईंधन बचत के इन उपायों का असर किसी भी हालत में देश की सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों पर नहीं पड़ेगा। आतंकवाद-रोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा जैसी अहम ड्यूटी में लगे वाहनों को इस कटौती से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

  • भारत की वैश्विक उड़ान का संदेश: नीदरलैंड में मोदी बोले-स्टार्टअप से लेकर सेमीकंडक्टर तक, अब ग्रोथ इंजन बनेगा भारत

    भारत की वैश्विक उड़ान का संदेश: नीदरलैंड में मोदी बोले-स्टार्टअप से लेकर सेमीकंडक्टर तक, अब ग्रोथ इंजन बनेगा भारत



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड के द हेग दौरे पर प्रवासी भारतीयों को संबोधित करने पहुंचे, जहां उन्होंने भारत की तेज आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है और अब वैश्विक ग्रोथ इंजन बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में भारतीय समुदाय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और पीएम ने इसे भारत के किसी उत्सव जैसा माहौल बताया।

    अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश में स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है और आज यह संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत में यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और डिजिटल इंडिया अभियान ने इस विकास को नई गति दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में UPI के जरिए होने वाले डिजिटल ट्रांजेक्शन ने दुनिया में एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जहां अरबों लेनदेन हर साल डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं।

    पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में हो रहे निवेश का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से कुछ में उत्पादन भी शुरू हो चुका है। इससे भारत जल्द ही चिप डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ ट्रांसफॉर्मेशन नहीं बल्कि फास्टेस्ट और बेस्ट ग्रोथ मॉडल चाहता है।

    विदेशी निवेश और नवाचार पर जोर देते हुए पीएम ने कहा कि भारत के युवा आज स्टार्टअप, एआई, सेमीकंडक्टर और नई टेक्नोलॉजी में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब लोगों के सपने पूरे होते हैं। इसी वजह से देश में पेटेंट फाइलिंग और इनोवेशन में भी तेजी आई है।

    कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने नीदरलैंड में बसे भारतीय समुदाय की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी अपनी मेहनत और प्रतिभा से नीदरलैंड की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने डच नेतृत्व द्वारा भारतीय समुदाय की प्रशंसा का भी उल्लेख किया।

    मोदी ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे बचपन से ही देशभक्ति की भावना से जुड़े रहे हैं और जनता का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि 2014 में मिली स्थिर सरकार के बाद भारत ने विकास की नई गति पकड़ी है और यह यात्रा लगातार जारी है।

    इस यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहल भी सामने आई, जब नीदरलैंड ने 11वीं सदी की ‘अनाइमंगलम कॉपर प्लेट्स’ भारत को वापस लौटाईं। ये प्राचीन तांबे की पट्टिकाएं चोल काल से जुड़ी हैं और इनमें दक्षिण भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों का महत्वपूर्ण विवरण दर्ज है। इनका वजन लगभग 30 किलो है और इन्हें भारत की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कुल मिलाकर पीएम मोदी का यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों को मजबूत करने, प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव बढ़ाने और भारत की वैश्विक आर्थिक छवि को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • पीएम मोदी UAE दौरे पर रवाना, ऊर्जा और व्यापार समझौतों पर रहेगा फोकस

    पीएम मोदी UAE दौरे पर रवाना, ऊर्जा और व्यापार समझौतों पर रहेगा फोकस



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय विदेश दौरे की शुरुआत करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंच रहे हैं। इस दौरे को भारत और UAE के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी यहां राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मुलाकात में भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। खास तौर पर ऊर्जा सुरक्षा इस दौरे का प्रमुख एजेंडा है, जिसमें LPG, LNG सप्लाई और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े समझौतों पर बात होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कुछ अहम डील्स पर सहमति बन सकती है।

    द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और UAE के बीच LPG और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर दो महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, तेल और गैस आपूर्ति को दीर्घकालिक आधार पर सुरक्षित करने पर भी चर्चा हो सकती है।

    UAE की ऊर्जा नीति भी इस समय बदलाव के दौर में है। हाल ही में UAE ने OPEC से अलग होने की घोषणा की है और 2027 तक अपना कच्चा तेल उत्पादन बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में भारत और UAE के बीच ऊर्जा सहयोग और भी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारत के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकती है।

    पूर्व भारतीय राजदूत संजय सुधीर ने ANI से बातचीत में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पीएम मोदी का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण है और यह भारत की कूटनीतिक सक्रियता का मजबूत संकेत भी है। उनका कहना है कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकती है।

    विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को भी नई गति देना है। भारत और UAE के बीच पहले से ही व्यापक रणनीतिक साझेदारी मौजूद है, जिसे इस दौरे से और आगे बढ़ाने की योजना है।

    भारत और UAE के बीच व्यापारिक संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है। भारत से UAE को पेट्रोलियम प्रोडक्ट, जेम्स एंड ज्वेलरी, मेटल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी, फूड आइटम और केमिकल्स जैसे उत्पादों का निर्यात किया जाता है।

    साल 2022-23 में भारत ने UAE से लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का आयात किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन अभी भी आयात की ओर झुका हुआ है। हालांकि, लगातार बढ़ते सहयोग और नए समझौतों से इस अंतर को कम करने की कोशिश की जा रही है।

    UAE के राष्ट्रपति अल नाहयान इससे पहले जनवरी में भारत के 105 मिनट के दौरे पर आए थे, जहां पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका एयरपोर्ट पर स्वागत किया था। उस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड और डिफेंस समेत नौ अहम समझौते हुए थे।

    कुल मिलाकर, पीएम मोदी का यह UAE दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक विस्तार और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे होने की उम्मीद है।