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  • नीट विवाद: PM मोदी के जवाबदेही मॉडल की दिग्विजय सिंह ने की सराहना….

    नीट विवाद: PM मोदी के जवाबदेही मॉडल की दिग्विजय सिंह ने की सराहना….


    नई दिल्ली।
    नीट विवाद (NEET Controversy) को लेकर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जहां प्रधानमंत्री (Prime Minister) के साथ आर-पार के मूड में है, वहीं पार्टी के सबसे मुखर चेहरों में से एक दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने प्रधानमंत्री की नीयत और देश की संस्थागत व्यवस्था पर खुलकर भरोसा जताया है। शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह सोमवार को हुए बैठक में साफ कहा कि जब देश का शीर्ष नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के समक्ष परीक्षा प्रणाली को सुधारने की जवाबदेही ले रहा है, तो इस सकारात्मक रुख की सराहना की जानी चाहिए।

    सूत्रों ने बताया, बैठक में परीक्षा सुधार, एनटीए की कार्यप्रणाली और नीट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान दिग्विजय ने कहा कि जब सरकार जवाबदेही स्वीकार रही है तो इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। हालांकि, उनकी टिप्पणी का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। वैसे यह पहला अवसर नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से मोदी की किसी विशेषता का उल्लेख किया हो। पिछले वर्ष उन्होंने भाजपा-आरएसएस की संगठनात्मक क्षमता की सराहना करते हुए कहा था कि एक साधारण कार्यकर्ता का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना संगठन की ताकत को दर्शाता है।


    पीएम छात्रों के नाम खुला पत्र लिखें

    अध्यक्ष ने कहा, 21 जून की दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों और अभिभावकों में विश्वास जगाना बेहद जरूरी है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान छात्रों के नाम खुला पत्र या फिर संदेश लिखें जिसमें छात्रों को लगे कि वो अकेले नहीं हैं।


    राजनीतिकरण पर सवाल तो सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी

    सूत्रों के मुताबिक, भाजपा से जुड़े सदस्यों ने समिति में शामिल विपक्ष के सदस्यों से पूछा कि नीट यूजी की दोबारा परीक्षा पर राजनीति क्यों हो रही है। परीक्षा के बीच जांच के नाम पर ऐसी बैठकें क्योंकि की जा रही हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, राजनीति का तो कोई सवाल ही नहीं है। अध्यक्ष ने मंत्रालय और अधिकारियों को 21 जून को होने वाली दोबारा नीट के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं भी दी हैं।


    पुनर्मूल्यांकन फीस पर राहुल बोले- सीबीएसई के जेबकतरों से सावधान

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और उसकी फीस को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा को एक सेवा के बजाय एक व्यापार के तौर पर देखा जाता है, तो गलतियां सुधारी नहीं जातीं, बल्कि और बढ़ जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे अपने वक्त,अपने आत्मविश्वास खोने और अपने भविष्य के रूप में चुका रहे हैं। इसके साथ उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली की वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे सीबीएसई छात्रों संग अपनी बातचीत का वीडियो क्लिप भी साझा किया।

    इसके साथ उन्होंने लिखा, जेबकतरों से सावधान रहें। आज वे सीधे सीबीएसई के अंदर ही बैठे हैं। सीबीएसई की वजह से गलत नंबर आने पर आपको डिजिटल स्कैन कॉपी पाने के लिए 100 रुपये प्रति विषय, नंबरों की दोबारा गिनती के लिए 100 रुपये प्रति पेपर और पुनर्मूल्यांकन के लिए 25 प्रति सवाल शुल्क देना पड़ता है। अपनी ही आंसर सीट की सही जांच के लिए एक छात्र को 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, जरा सोचिए कि जब करीब 4 लाख चार लाख छात्रों ने ऐसे आवेदन दिए हैं, तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा होगा।

  • PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम

    PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी कार कंपनी (Country Largest Car Maker) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) ने वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को लागू कर दिया है। सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को कहा कि कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है।


    क्या कहा कंपनी ने?

    कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके।

    कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है।


    विदेश यात्रा पर क्या कहा?

    इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

    साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के बचत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है।


    हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग लैब

    इस बीच, मारुति सुजुकी ने सरकार के कौशल विकास मिशन के तहत हरियाणा के रोहतक में अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग लैब स्थापित की है। कंपनी ने बयान में कहा कि रोहतक स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हसनगढ़ में स्थापित इस मैन्युफैक्चरिंग लैब में पहले वर्ष में लगभग 200 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस लैब में छात्रों को वाहन असेंबली, वेल्डिंग और रंगाई जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा- इस लैब में आधुनिक मशीनों और कार्यस्थल जैसे वातावरण का उपयोग किया जाएगा। कौशल विकास मिशन के अनुरूप यह पहल छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने और बदलते वाहन परिवेश के लिए प्रतिभा को निखारती है। मारुति सुजुकी देशभर में 31 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को सहयोग दे रही है और अब तक 18 ऐसी लैब स्थापित कर चुकी है।

  • 12 साल के कार्यकाल पर भावुक हुए पीएम मोदी के पुराने शब्द फिर चर्चा में, नेताओं ने दी शुभकामनाएं

    12 साल के कार्यकाल पर भावुक हुए पीएम मोदी के पुराने शब्द फिर चर्चा में, नेताओं ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव उस समय दर्ज हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से लेकर अब तक उनके नेतृत्व में कई बड़े राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलाव देखने को मिले हैं। इस खास अवसर पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का माहौल रहा और विभिन्न नेताओं की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने पर समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी उत्साह देखने को मिला।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। आम चुनाव के परिणामों के बाद उन्हें संसदीय दल का नेता चुना गया और फिर उन्होंने देश की बागडोर संभाली। उस समय राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की नई शुरुआत मानी गई थी। वर्षों बाद अब जब उनके नेतृत्व का यह सफर 12 साल तक पहुंच गया है, तो उनके शुरुआती दौर के कई पुराने भाषण और बयान एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।

    विशेष रूप से संसदीय दल की बैठक में दिया गया उनका एक भावनात्मक संबोधन फिर से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उस दौरान उन्होंने पार्टी के संघर्ष, समर्पण और कार्यकर्ताओं के योगदान को याद किया था। उन्होंने उन लोगों का भी जिक्र किया था जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद पार्टी के लिए वर्षों तक मेहनत की। अपने संबोधन में उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि जिस प्रकार भारत उनके लिए मां के समान है, उसी तरह उनकी पार्टी भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके इस बयान को उस समय भी काफी भावनात्मक माना गया था और अब एक बार फिर इसकी चर्चा हो रही है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पुराने संघर्षों को भी याद किया था। उन्होंने उन नेताओं के योगदान का उल्लेख किया जिन्होंने संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस दौर के कई राजनीतिक क्षणों को आज भी समर्थक ऐतिहासिक मानते हैं। समय के साथ देश की राजनीति में कई बदलाव आए, लेकिन उस संबोधन को आज भी उनके राजनीतिक सफर के महत्वपूर्ण पड़ावों में गिना जाता है।

    प्रधानमंत्री के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कई नेताओं ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उनके नेतृत्व में देश के विकास, सुशासन और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का भी उल्लेख किया गया। पिछले वर्षों में लागू की गई विभिन्न योजनाओं और नीतियों को लेकर भी चर्चा रही। समर्थकों का मानना है कि इन वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में नई दिशा प्राप्त की है। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी यह अवसर सरकार के लंबे कार्यकाल और उसकी उपलब्धियों को लेकर चर्चा का केंद्र बना रहा।

  • PM मोदी को झालमुड़ी खिलाकर फेमस हुए बंगाल के विक्रम को पाक-बांग्लादेश से मिल रही धमकियां…..

    PM मोदी को झालमुड़ी खिलाकर फेमस हुए बंगाल के विक्रम को पाक-बांग्लादेश से मिल रही धमकियां…..


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) के झारग्राम (Jhargram) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के चुनाव प्रचार के दौरान सड़क किनारे के स्टॉल से झालमुड़ी (Jhalmuri) खरीदने का वीडियो वायरल हुआ था। उस स्टॉल के मालिक विक्रम कुमार साहू अचानक चर्चा में आ गए। पीएम मोदी खुद उनके हाथ से तैयार झालमुड़ी खाते दिखे। हालांकि, फेमस होने के साथ ही साहू की मुश्किलें भी शुरू हो गईं। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से उनके मोबाइल पर बार-बार मौत की धमकियां मिल रही हैं। धमकियां टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए आ रही हैं।

    एक वीडियो कॉल में तो साहू को बंदूक दिखाकर धमकाया गया। इससे उनके परिवार में दहशत फैल गई और उन्होंने कुछ दिनों के लिए अपनी दुकान भी बंद कर दी थी। झारग्राम पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साहू के स्टॉल पर यूनिफॉर्म और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों की तैनाती कर दी है। स्टॉल पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स को भी मामले में शामिल किया गया है।


    धमकियां देने वाले फोन नंबर्स की पहचान

    पुलिस अधिकारी के अनुसार, धमकियां देने वाले फोन नंबर्स की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद सुरक्षा के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच शुरू कर दी गई है। साहू ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि धमकियों से वे और उनका परिवार बेहद डरा हुआ था। साहू ने कहा कि शुरुआती दिनों में डर के मारे दुकान बंद रखनी पड़ी, लेकिन अब पुलिस सुरक्षा के साथ वे फिर से अपने काम पर लौट आए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी का झालमुड़ी खाने का वीडियो न सिर्फ चुनावी अभियान को यादगार बनाया, बल्कि झालमुड़ी जैसे पारंपरिक बंगाली स्ट्रीट फूड को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। विपक्ष ने इसे लेकर निशाना भी साधा। झारग्राम पुलिस का कहना है कि वे हर स्तर पर साहू की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। इस मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

  • पटियाला से युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत बांटे गए 188 नियुक्ति पत्र

    पटियाला से युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत बांटे गए 188 नियुक्ति पत्र

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार की देशव्यापी रोजगार मुहिम के तहत पंजाब के पटियाला में आयोजित रोजगार मेले ने सैकड़ों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दी। पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स में आयोजित 19वें रोजगार मेले के दौरान 188 युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर पूरे कार्यक्रम का माहौल उत्साह, उम्मीद और खुशी से भरा दिखाई दिया। नौकरी पाने वाले युवाओं और उनके परिवारों के चेहरों पर संतोष और गर्व साफ झलक रहा था।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वर्चुअल माध्यम से देशभर के नवनियुक्त उम्मीदवारों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी एवं समर्पण के साथ काम करने का संदेश दिया। रोजगार मेले में मौजूद उम्मीदवारों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को प्रेरणादायक बताया और इसे अपने करियर की नई शुरुआत के रूप में देखा।

    पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान प्रिंसिपल चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुशील कुमार श्रीवास्तव ने नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें से 126 उम्मीदवारों को पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स के विभिन्न विभागों और ट्रेडों में नियुक्त किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और सरकारी भर्ती प्रक्रिया को अधिक तेज एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बताया। कई उम्मीदवारों ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की सिफारिश या आर्थिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ा और केवल योग्यता के आधार पर उनका चयन हुआ। युवाओं का कहना था कि इस प्रक्रिया ने सरकारी नौकरियों के प्रति उनका विश्वास और मजबूत किया है।

    रोजगार मेले में चयनित पश्चिम बंगाल की रितिका दत्ता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2024 में आवेदन किया था और अब उनका चयन पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स में हुआ है। उन्होंने इस अवसर के लिए सरकार और प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। वहीं उत्तर प्रदेश की शांति चतुर्वेदी ने बताया कि उनका चयन डिपो मटेरियल सुपरिटेंडेंट के पद पर हुआ है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और योग्य उम्मीदवारों को ही मौका मिला।

    उत्तर प्रदेश के ही विजय दुबे ने बताया कि उनका चयन जेई मैकेनिकल पद पर हुआ है और यह उनके लंबे इंतजार और मेहनत का परिणाम है। हिमाचल प्रदेश के योगेश ने भी चयन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सरकारी नौकरी मिलने से उनके परिवार में उत्साह का माहौल है।

    रोजगार मेले के आयोजन को युवाओं के लिए सकारात्मक पहल माना जा रहा है। लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रोजगार की चुनौतियों के बीच ऐसे कार्यक्रम युवाओं के आत्मविश्वास को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। पटियाला में आयोजित यह रोजगार मेला न केवल नियुक्ति पत्र वितरण तक सीमित रहा, बल्कि यह युवाओं के सपनों और उम्मीदों को नई दिशा देने वाला आयोजन भी बन गया।

  • अजय राय के बयान से बढ़ा राजनीतिक घमासान, योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस को बताया हताश और मानसिक रूप से दिवालिया

    अजय राय के बयान से बढ़ा राजनीतिक घमासान, योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस को बताया हताश और मानसिक रूप से दिवालिया


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस नेता अजय राय की कथित विवादित टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की अभद्र और असंसदीय भाषा पार्टी के राजनीतिक संस्कारों को दर्शाती है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस प्रकार की टिप्पणी न केवल अनुचित है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी खिलाफ है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी लगातार राजनीतिक हताशा और निराशा में डूबती जा रही है, जिसका असर उसके नेताओं की भाषा और व्यवहार में साफ दिखाई दे रहा है। योगी ने यह भी कहा कि कांग्रेस अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है जहां वह देशवासियों से क्षमा मांगने लायक भी नहीं बची है।

    यह विवाद उस समय बढ़ा जब सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता अजय राय का एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में कथित तौर पर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने इसे मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस पर लगातार हमले शुरू कर दिए।

    राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की भाषा लगातार मर्यादा से बाहर होती जा रही है और यह पार्टी की राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। उनके अनुसार लगातार चुनावी हार और जनाधार में गिरावट के कारण कांग्रेस अब व्यक्तिगत टिप्पणियों और आक्रामक बयानबाजी का सहारा ले रही है।

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस मामले को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब किसी राजनीतिक दल के पास जनता के सामने रखने के लिए मुद्दे नहीं बचते, तब वह व्यक्तिगत आरोपों और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में भाषा की मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है और इस तरह की टिप्पणियां राजनीतिक संस्कृति को कमजोर करती हैं।

    इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक संवाद की भाषा और मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी पहले भी देखने को मिलती रही है, लेकिन इस तरह के विवाद अक्सर राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में असहमति और आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी होती है।

    फिलहाल यह मामला राजनीतिक स्तर पर लगातार तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। भाजपा इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर बनी हुई है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

  • सोशल मीडिया स्टार बने दुकानदार की मुश्किलें बढ़ीं, पीएम मोदी से जुड़ी मुलाकात के बाद धमकी का आरोप

    सोशल मीडिया स्टार बने दुकानदार की मुश्किलें बढ़ीं, पीएम मोदी से जुड़ी मुलाकात के बाद धमकी का आरोप

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी दौरे के दौरान झालमुड़ी खिलाने वाले स्थानीय दुकानदार को जान से मारने की धमकियां मिलने का आरोप है। इस घटना के बाद दुकानदार और उसका परिवार गहरे डर और तनाव में है।

    यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झाड़ग्राम पहुंचे थे। जनसभा समाप्त होने के बाद जब उनका काफिला लौट रहा था, तभी उन्होंने अचानक सड़क किनारे एक छोटी सी झालमुड़ी की दुकान पर रुककर स्थानीय विक्रेता बिक्रम साऊ से मुलाकात की थी। इस दौरान पीएम मोदी ने उनके हाथ की बनी झालमुड़ी का स्वाद लिया और उनसे बातचीत भी की। यह पल कैमरे में कैद हो गया और कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद बिक्रम साऊ रातों-रात सुर्खियों में आ गए।

    इस वायरल घटना के बाद उनकी दुकान पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और वे एक तरह से स्थानीय स्तर पर चर्चित चेहरा बन गए। लेकिन अब यही लोकप्रियता उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। दुकानदार का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लगातार अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल्स और वीडियो कॉल्स आ रही हैं, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के नंबर शामिल बताए जा रहे हैं।

    बिक्रम साऊ का कहना है कि इन कॉल्स के दौरान उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। अचानक मिल रही इन धमकियों से पूरा परिवार दहशत में है और सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि परिवार ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है और शिकायत दर्ज कराई है।

    दुकानदार के अनुसार, जो घटना पहले उनके जीवन का सबसे खुशी का पल थी, वही अब उनके लिए डर का कारण बन गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें पहचान तो मिली, लेकिन इसके साथ ही अनचाही परेशानियां भी बढ़ गईं।

    इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि एक सामान्य दुकानदार, जिसकी पहचान एक साधारण स्ट्रीट फूड विक्रेता के रूप में थी, अचानक इस तरह की धमकियों का सामना कर रहा है।

    पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और कॉल्स की ट्रेसिंग की कोशिश की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि या गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आम लोगों की जिंदगी कितनी तेजी से बदल सकती है, और कभी-कभी यह लोकप्रियता उनके लिए चुनौती भी बन जाती है। फिलहाल बिक्रम साऊ और उनका परिवार सुरक्षा और सामान्य जीवन की वापसी की उम्मीद कर रहा है, जबकि प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है।

  • नई दिल्ली में बड़ा कूटनीतिक कदम, भारत और साइप्रस बने रणनीतिक साझेदार, पीएम मोदी ने बताया निवेश बढ़ाने का रोडमैप

    नई दिल्ली में बड़ा कूटनीतिक कदम, भारत और साइप्रस बने रणनीतिक साझेदार, पीएम मोदी ने बताया निवेश बढ़ाने का रोडमैप


    नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है, जहां भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के रूप में औपचारिक रूप दे दिया है। यह निर्णय उच्चस्तरीय बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें दोनों देशों ने आपसी सहयोग को नई दिशा देने और भविष्य में आर्थिक तथा कूटनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर सहमति जताई। इस साझेदारी को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    इस अवसर पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि भारत और साइप्रस के रिश्ते केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं। यही वजह है कि यह संबंध समय के साथ और अधिक गहरे और स्थिर होते गए हैं।

    प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बताया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेष रूप से साइप्रस से भारत में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो पिछले दशक में लगभग दोगुना हो चुका है। इसी सकारात्मक रुझान को देखते हुए दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में इस निवेश को फिर से दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार, वित्तीय सहयोग और निवेश के नए क्षेत्रों को विकसित करने पर सहमति बनी है।

    बैठक में यह भी माना गया कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच मजबूत साझेदारी और स्थिर निवेश माहौल बेहद जरूरी है। इसी कारण दोनों देशों ने मिलकर ऐसे नए अवसरों की पहचान करने पर जोर दिया है, जो भविष्य में आर्थिक विकास को नई गति दे सकें। इसमें तकनीकी सहयोग और व्यापार विस्तार को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी।

    दोनों देशों ने वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए और अंतरराष्ट्रीय शांति तथा स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद और सहयोग सबसे प्रभावी माध्यम हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी सहमति बनी, ताकि वे बदलते वैश्विक परिदृश्य में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

    इस रणनीतिक साझेदारी के साथ भारत और साइप्रस ने अपने संबंधों को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां सहयोग केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित न रहकर भविष्य की संभावनाओं को भी ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगा। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और साझा विकास की मजबूत दिशा को दर्शाती है।

  • पीएम मोदी की उच्चस्तरीय मंत्रिपरिषद बैठक शुरू, पश्चिम एशिया संकट और कैबिनेट फेरबदल पर नजर

    पीएम मोदी की उच्चस्तरीय मंत्रिपरिषद बैठक शुरू, पश्चिम एशिया संकट और कैबिनेट फेरबदल पर नजर



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में दिल्ली के सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक शुरू हो गई है। यह इस साल की पहली बड़ी कैबिनेट बैठक मानी जा रही है, जो ऐसे समय पर हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक हालात को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल हुए हैं। सरकार ने पहले ही सभी मंत्रियों को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। बैठक शाम 5 बजे शुरू हुई और इसमें शासन के प्रदर्शन, नीतियों के क्रियान्वयन और विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जा रही है।

    किन मुद्दों पर चर्चा संभव
    बैठक में सरकार की प्रमुख योजनाओं की प्रगति, उनके प्रभाव और जनता तक पहुंच को लेकर विस्तृत समीक्षा होने की संभावना है। साथ ही विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन और अब तक लिए गए नीतिगत फैसलों के नतीजों पर भी चर्चा की जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात खासकर तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों पर भी सरकार की नजर बनी हुई है। इसी वजह से आर्थिक स्थिरता और ईंधन आपूर्ति जैसे मुद्दे बैठक के एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।

    विदेश यात्रा के बाद अहम बैठक
    यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब प्रधानमंत्री हाल ही में अपनी पांच देशों की कूटनीतिक यात्रा पूरी कर लौटे हैं। इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा की। इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना बताया गया है।

  • पीएम मोदी के गिफ्ट पर टिप्पणी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल

    पीएम मोदी के गिफ्ट पर टिप्पणी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री को भेंट किए गए ‘मेलोडी’ चॉकलेट गिफ्ट के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने रुपये की डॉलर के मुकाबले गिरती कीमत को लेकर टिप्पणी करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।

    सोशल मीडिया पर दिए गए अपने बयान में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि “मेलोडी खाओ और खुश हो जाओ”, जिसे उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से सरकार की कार्यशैली पर कटाक्ष के रूप में पेश किया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और विभिन्न पक्षों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को लेकर बहस पहले से ही जारी है।

    उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि रुपये की गिरती कीमत को लेकर चिंता जताने के बजाय सरकार इसे अलग नजरिए से पेश कर रही है। उनके अनुसार, यह कहना कि डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर नहीं हो रहा, वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता। इस टिप्पणी को उन्होंने आर्थिक मुद्दों पर सरकार के रुख पर अप्रत्यक्ष सवाल के रूप में पेश किया।

    इससे पहले भी उन्होंने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को जोड़ते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी, जिसमें युवाओं की नौकरी की अपेक्षाओं और मौजूदा रोजगार स्थिति पर कटाक्ष किया गया था। इन बयानों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है और सोशल मीडिया पर भी व्यापक बहस छेड़ दी है।

    विवाद बढ़ने के साथ ही यह मामला केवल एक गिफ्ट या बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक स्थिति और राजनीतिक संवाद का विषय बन गया है। समर्थकों और आलोचकों के बीच इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां एक पक्ष इसे व्यंग्य के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा इसे राजनीतिक हमला मान रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक माहौल में प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखे जाते हैं, लेकिन इनके सार्वजनिक प्रभाव व्यापक हो सकते हैं। खासकर जब यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हैं, तो उनका असर राजनीतिक विमर्श पर भी दिखाई देता है।

    कुल मिलाकर ‘मेलोडी’ गिफ्ट से शुरू हुआ यह मामला अब रुपये की स्थिति और आर्थिक नीतियों की बहस तक पहुंच गया है। इससे एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि राजनीतिक बयानबाजी और प्रतीकात्मक घटनाएं किस तरह तेजी से राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन जाती हैं और विभिन्न मुद्दों को एक साथ जोड़ देती हैं।