10 गुना मुनाफे का लालच देकर फंसाता था आरोपी
पहले असली नोट देकर जीतता था भरोसा
असली के बीच चिल्ड्रन बैंक नोट छिपाकर देता था माल
3 लाख के बदले 30 लाख की डील
शक हुआ तो पुलिस को दी सूचना
बैग खोलते ही सामने आया सच
नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

असली के बीच चिल्ड्रन बैंक नोट छिपाकर देता था माल
3 लाख के बदले 30 लाख की डील
शक हुआ तो पुलिस को दी सूचना
नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

पोल्ट्री फार्म की आड़ में चल रही थी एमडीएमए फैक्ट्री
मुख्य सरगना गिरफ्तार, अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ाव
फोरलेन पर घेराबंदी कर 500 ग्राम एमडी जब्त
ब्राउन शुगर के साथ एक और आरोपी पकड़ा गया
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी रतलाम जिले में एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया जा चुका है। इससे साफ है कि क्षेत्र में संगठित ड्रग नेटवर्क सक्रिय रहा है, जिस पर मध्य प्रदेश पुलिस लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।

जानकारी के अनुसार जुलूस जब सय्यद बाबा चौक से होते हुए एक स्थानीय मस्जिद के पास पहुंचा तभी अचानक मस्जिद के पीछे की ओर से कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया इस अप्रत्याशित पथराव से जुलूस में अफरा तफरी मच गई और लोग इधर उधर भागने लगे इस घटना में तीन लोग घायल हो गए जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है घायल व्यक्ति को तुरंत श्रीरामपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार जारी है
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया और कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया हालांकि स्थिति को बिगड़ने से पहले ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाल लिया पुलिस बल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की इसके बाद स्थिति धीरे धीरे सामान्य हुई
पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए मस्जिद के मौलाना सहित 10 से 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी गई है अधिकारियों के अनुसार घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है जिनमें धारा 190 191(1) 191(2) 192 110 और 118(1) शामिल हैं इन धाराओं के तहत आरोपियों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी
घटना के बाद पूरे श्रीरामपुर शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है
गौरतलब है कि श्रीरामपुर में हर वर्ष रामनवमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है इस अवसर पर शहर में विशाल जुलूस निकाला जाता है जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और पूरे शहर में मेले जैसा माहौल रहता है हालांकि इस बार हुई इस घटना ने उत्सव के माहौल को कुछ समय के लिए प्रभावित जरूर किया लेकिन प्रशासन की तत्परता से हालात पर काबू पा लिया गया
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और शहर में शांति बनी हुई है पुलिस द्वारा लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी

पुलिस सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ के निर्देशों पर की गई। उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध खनन और परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर उनके वाहनों को जप्त किया जाए।
इसी क्रम में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा सघन अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी और रेत तथा पत्थर का अवैध परिवहन कर रहे ट्रैक्टर-ट्रालियों को पकड़ा। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन वाहनों के पास खनन और परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं थे, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जप्त कर लिया गया।
पुलिस ने मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो इन ट्रैक्टर-ट्रालियों के माध्यम से अवैध खनन सामग्री का परिवहन कर रहे थे। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन गतिविधियों के पीछे किसी बड़े नेटवर्क या माफिया गिरोह की संलिप्तता तो नहीं है।
अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन न केवल शासन को राजस्व की हानि पहुंचाता है बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। नदियों और खनिज संसाधनों के अनियंत्रित दोहन से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, जिसका असर लंबे समय तक देखने को मिलता है।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी थाना प्रभारी नियमित रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखें और ऐसी गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करें।
इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि प्रशासन अवैध खनन के खिलाफ पूरी तरह सख्त है और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
पुलिस का यह अभियान न केवल अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए भी आवश्यक है। आने वाले समय में इस तरह की और भी कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जिससे अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के काफिले के लिए पहले से तय ट्रैफिक प्लान बनाया गया था और संबंधित पुलिसकर्मियों को उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंप दी गई थीं। इसके बावजूद मौके पर यातायात को निर्धारित योजना के अनुसार नियंत्रित नहीं किया जा सका। परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए सड़कों पर अव्यवस्था फैल गई और आम लोगों के साथ साथ काफिले की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इस चूक को सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद गंभीर माना गया है।
घटना सामने आते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत रिपोर्ट तलब की और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ड्यूटी पर तैनात तीन पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती। उनकी इस चूक के कारण ही ट्रैफिक मैनेजमेंट बिगड़ा और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। इसके बाद यातायात डीसीपी ने बिना किसी देरी के तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।
कार्रवाई के तहत संबंधित तीन पुलिसकर्मियों की 25 प्रतिशत वेतन कटौती की गई है जो अपने आप में एक सख्त और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। डीसीपी ने साफ तौर पर कहा है कि वीआईपी ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का काफिला हो या कोई अन्य विशेष मूवमेंट हर स्थिति में पुलिसकर्मियों को पूरी जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी निभानी होगी।
इस घटना के बाद पुलिस विभाग ने सभी कर्मचारियों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में यदि इस तरह की कोई लापरवाही सामने आती है तो केवल वेतन कटौती तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी बल्कि इससे भी अधिक कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस सख्त रुख का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पुलिस बल में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
इंदौर में हुई यह कार्रवाई अब पूरे पुलिस महकमे के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। यह संदेश दिया गया है कि जिम्मेदारी में चूक करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि वीआईपी मूवमेंट जैसे मामलों में कोई भी छोटी सी लापरवाही बड़े परिणाम ला सकती है इसलिए हर स्तर पर सतर्कता और समन्वय बेहद जरूरी है।

सूचना मिलते ही पुलिस बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंच गए। दोनों संस्थानों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और एहतियातन छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। अभी तक किसी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक का पता नहीं चला है।
पिछले दो दिनों का पैटर्न भी चिंताजनक रहा। 17 मार्च को नापतोल विभाग को इसी तरह की धमकी मिली थी जिसमें सायनाइड गैस वाले सिलेंडरों का जिक्र था। इससे पहले एम्स भोपाल और पीपल्स यूनिवर्सिटी को भी बार बार धमकी वाले ई मेल प्राप्त हुए थे।
पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार पिछले एक महीने में भोपाल में पांचवीं बार विभिन्न संस्थानों को बम धमकी मिली है। अब तक सभी धमकियां फर्जी साबित हुई हैं। कोई भी विस्फोटक नहीं मिला लेकिन हर बार सर्च ऑपरेशन इमारतें खाली कराना और आम जनता में दहशत फैलाना जैसी परेशानियां उत्पन्न होती हैं।

पुलिस के अनुसार 8 मार्च को आईसीसी टी20 विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भारत की जीत के बाद कॉलोनी में जश्न का माहौल था। इसी दौरान पटाखे फोड़ने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने झगड़े का रूप ले लिया और मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि शिलोम जेम्स और उसके साथी ने पड़ोसियों के साथ न केवल मारपीट की बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
इस घटना ने इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचा है क्योंकि शिलोम जेम्स पहले से ही राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी रह चुका है। जांच के दौरान सामने आया था कि उसने मुख्य आरोपियों की मदद की थी और साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी। इस मामले में उसकी भूमिका को लेकर पहले ही पुलिस कार्रवाई कर चुकी है।
अब ताजा मामले के सामने आने के बाद पुलिस शिलोम जेम्स के आपराधिक रिकॉर्ड को खंगालने में जुट गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि गंभीर अपराधों में नाम आने के बावजूद आरोपी किस तरह खुलेआम विवादों में शामिल हो रहे हैं।
लसूड़िया थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे। कुल मिलाकर एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने शिलोम जेम्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और पुलिस अब उसके खिलाफ हर पहलू से जांच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक पुलिस अधीक्षक ने जिले में कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान पाया कि कई थाना क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों में कमी आई है। विशेष रूप से अपराध रोकथाम के लिए की जाने वाली कार्रवाई जैसे शांति भंग की आशंका पर गिरफ्तारी बाउंड ओवर की कार्रवाई और अन्य एहतियाती कदम अपेक्षाकृत कम किए गए। इसे पुलिस अधीक्षक ने गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित थाना प्रभारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
इसी के तहत 26 थाना प्रभारियों को निंदा की सजा दी गई है। यह सजा भले ही सेवा नियमों के अनुसार लघु दंड की श्रेणी में आती है लेकिन इसका प्रभाव अधिकारी के पूरे करियर पर पड़ सकता है। सरकारी सेवा में निंदा का अर्थ है कि कर्मचारी के खिलाफ औपचारिक रूप से लिखित चेतावनी जारी की जाती है और इसे उसके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। यह प्रविष्टि भविष्य में पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों के दौरान महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पुलिस विभाग के जानकारों के अनुसार निंदा की कार्रवाई भले ही निलंबन या वेतन कटौती जैसी कठोर सजा नहीं होती लेकिन यह अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। कई मामलों में इस तरह की प्रविष्टि होने से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और अधिकारी को आगे की सेवा में सावधानी बरतने की चेतावनी के रूप में भी देखा जाता है।
बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि थाना स्तर पर कानून व्यवस्था को लेकर गंभीरता बनी रहे और अधिकारी अपराध नियंत्रण के लिए आवश्यक कार्रवाई समय पर करें। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि प्रतिबंधात्मक कार्रवाई अपराध रोकने का एक अहम माध्यम होती है और इसमें कमी आने से कानून व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल है। कई थाना प्रभारियों को उम्मीद नहीं थी कि समीक्षा के बाद इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कार्रवाई होगी। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कदम अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराने और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पुलिस अधीक्षक की इस कार्रवाई को विभाग में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्पष्ट संकेत दिया गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध रोकने के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आठ मार्च को एक महिला ने थाना मुलताई में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी छह मार्च की सुबह करीब दस बजे घर से निकली थी लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटी। काफी देर तक बेटी के घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद चिंतित मां ने पुलिस थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
महिला ने पुलिस को दी गई शिकायत में आशंका जताई थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसकी बेटी को बहला फुसलाकर अपने साथ कहीं ले गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुलताई थाना पुलिस ने तुरंत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने बालिका की तलाश के लिए अलग अलग टीमें गठित कीं और संभावित स्थानों पर खोजबीन शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ की और तकनीकी माध्यमों की मदद से भी सुराग जुटाए। पुलिस की सतत प्रयासों और त्वरित कार्रवाई के चलते बालिका का पता लगाने में सफलता मिली। पुलिस टीम ने बालिका को सकुशल बरामद कर लिया और उसे सुरक्षित थाना लाया गया।
इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए बालिका को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। बेटी के सुरक्षित मिलने से परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली और पुलिस का आभार व्यक्त किया। परिजनों का कहना था कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई कर उनकी बड़ी चिंता दूर कर दी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नाबालिगों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाता है और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करना प्राथमिकता होती है। इस मामले में भी शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और कम समय में बालिका को सुरक्षित बरामद कर लिया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है कि बालिका को किस परिस्थिति में और किसके द्वारा बहला फुसलाकर ले जाया गया था। यदि इस घटना में किसी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुलताई थाना पुलिस की इस कार्रवाई को क्षेत्र में सराहना मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की तत्परता के कारण एक नाबालिग बालिका सुरक्षित अपने घर पहुंच सकी जो कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।

सूत्रों के अनुसार फार्म हाउस की देखभाल फिलहाल गांव के एक व्यक्ति द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने मौके पर 18 जुआरियों को गिरफ्तार किया, जबकि पांच आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
जब्त सामग्री और संपत्ति
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 13 लाख 67 हजार 971 रुपए नकद, 52 ताश के पत्ते, 10 नई ताश की गड्डियां, 30 मोबाइल फोन और दो कारें जब्त की हैं। जब्त की गई संपत्ति की कुल कीमत लगभग 28 लाख 67 हजार 971 रुपए बताई जा रही है।
दबिश की कहानी
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि अवलीपुरा के फार्म हाउस में बड़े पैमाने पर जुआ चल रहा है। पुलिस टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी और मौके पर दबिश दी। मुख्य गेट बाहर से बंद था, लेकिन अंदर से लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। पुलिस ने पीछे से प्रवेश किया और बरामदे में रोशनी में जुआ खेलते लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
18 गिरफ्तार आरोपियों को एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद सभी को जेल भेज दिया गया। पुलिस अभी भी भागे हुए पांच आरोपियों की तलाश कर रही है।
जुए का प्लान और सरगना
जानकारी के अनुसार यह जुआ 1 मार्च को जमने वाला था, लेकिन किसी कारणवश कैंसिल हो गया। नई तारीख 10 मार्च तय की गई थी। पकड़े गए जुआरियों का कहना है कि वे पहली बार यहां आए थे। पुलिस ने मुख्य सरगना जगदीश राठौर उर्फ कूबड़ा की पहचान की है, जो लगातार जगह बदलकर जुए के अड्डे चलाता है।
मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र हीहोर ने बताया कि कार्रवाई मुखबिर की सूचना पर की गई थी और पकड़े गए आरोपियों से नकदी, मोबाइल और वाहन जब्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए टीम सतर्क है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
कीवर्ड्स (comma-separated): महू, मानपुर, फार्म हाउस, वंदना वैद्य, अम्बरीश वैद्य, जुआ, जुआरियों गिरफ्तार, नकद जब्त, पुलिस कार्रवाई, एसडीएम कोर्ट, मध्य प्रदेश, अवलीपुरा, जुआ अड्डा, जगदीश राठौर