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  • ग्वालियर में प्राइवेट वीडियो पति को भेजने पर भड़की महिला, एक्स बॉयफ्रेंड पर कैंची से किया हमला, 8 से 9 गहरे घाव से गंभीर हालत

    ग्वालियर में प्राइवेट वीडियो पति को भेजने पर भड़की महिला, एक्स बॉयफ्रेंड पर कैंची से किया हमला, 8 से 9 गहरे घाव से गंभीर हालत


    मध्य प्रदेश। के ग्वालियर में निजी वीडियो और ऑडियो को लेकर हुए विवाद में एक महिला ने अपने पूर्व प्रेमी पर कैंची से हमला कर दिया। इस घटना में 40 वर्षीय धर्मेंद्र प्रजापति गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके शरीर पर कैंची से किए गए 8 से 9 गहरे घाव बताए गए हैं। घटना के बाद घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    यह घटना ग्वालियर के कंपू थाना क्षेत्र की ललितपुर कॉलोनी में हुई। धर्मेंद्र प्रजापति यहां किराए के मकान में रहता था। बताया गया है कि महिला और धर्मेंद्र के बीच करीब ढाई साल तक प्रेम संबंध रहे थे। महिला के पहले पति बालवीर प्रजापति की मौत हो चुकी थी। इसके बाद वह धर्मेंद्र के संपर्क में आई और दोनों के बीच संबंध बन गए।कुछ समय बाद महिला ने धर्मेंद्र से दूरी बना ली और सिकंदर कंपू निवासी सोनू यादव से शादी कर ली।

    आरोप है कि शादी के बाद भी धर्मेंद्र महिला से संपर्क बनाए हुए था और उसे परेशान कर रहा था। इसी बीच महिला और धर्मेंद्र के पुराने संबंधों से जुड़े निजी ऑडियो और वीडियो उसके पति सोनू यादव तक पहुंच गए। महिला का आरोप है कि धर्मेंद्र ने ये निजी सामग्री उसके पति को भेजी थी।

    निजी वीडियो और ऑडियो पति तक पहुंचने के बाद महिला और उसके पति के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम से नाराज महिला कथित तौर पर धर्मेंद्र के घर पहुंची। वहां दोनों के बीच विवाद हुआ और महिला ने उस पर कैंची से हमला कर दिया। हमले में धर्मेंद्र गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा।

    चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उसके शरीर पर कई गहरे घाव होने के कारण घटना को गंभीर माना जा रहा है। पुलिस अब पूरे मामले के घटनाक्रम और हमले की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है।

    महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप
    पुलिस पूछताछ के दौरान महिला ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र उसे लगातार ब्लैकमेल कर रहा था और उसकी शादीशुदा जिंदगी में दखल दे रहा था। महिला के अनुसार, निजी वीडियो और ऑडियो उसके पति को भेजे जाने के बाद घर में विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी बात से नाराज होकर उसने धर्मेंद्र पर हमला किया। हालांकि, महिला की ओर से लगाए गए ब्लैकमेलिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    कंपू थाना पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस घायल धर्मेंद्र के बयान, घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्यों और दोनों पक्षों के आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यह मामला निजी वीडियो और ऑडियो के कथित प्रसार से शुरू हुए विवाद के हिंसक रूप लेने से जुड़ा है। फिलहाल पुलिस का ध्यान हमले की परिस्थितियों, ब्लैकमेलिंग के आरोपों और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच पर है।

  • भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर


    मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे लगाने के दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वे मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि छात्रों को जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया। जब छात्र वाहन में बैठ रहे थे, तब वे ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे।

    इसी दौरान वाहन के बाहर मौजूद मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और गालियां देने का आरोप लगा।घटनास्थल पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया और वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग के एडीसीपी अनिल कुमार शर्मा ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें निरीक्षक रतन सिंह परिहार आदिवासी छात्रों के संबंध में टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। एडीसीपी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।

    इस घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नाराजगी जताई है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को गंभीर और निंदनीय बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सिंघार का कहना है कि आदिवासी छात्रों का अपमान करने के आरोपों की जांच के साथ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।उन्होंने मांग उठाई कि मामले में कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस तरह उन्होंने घटना को आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है।

    फिलहाल पुलिस ने थाना प्रभारी को निलंबित करने और मामले की जांच शुरू करने की जानकारी दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन के समय वास्तव में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम में संबंधित अधिकारी की क्या भूमिका रही। मामले में एफआईआर दर्ज होने और जांच के अंतिम निष्कर्षों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया यह मामला अब पुलिस विभाग की कार्रवाई और एफआईआर की मांग को लेकर चर्चा में है। एक ओर थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच शुरू की गई है, वहीं दूसरी ओर उमंग सिंघार ने कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
  • राहुल गांधी से मिले दिल्ली प्रदर्शनकारी, पुलिस पर मारपीट और अभद्र भाषा के आरोप लगाकर सुनाई आपबीती, छात्रों से सबूत सुरक्षित रखने की अपील

    राहुल गांधी से मिले दिल्ली प्रदर्शनकारी, पुलिस पर मारपीट और अभद्र भाषा के आरोप लगाकर सुनाई आपबीती, छात्रों से सबूत सुरक्षित रखने की अपील

    नई दिल्ली ।दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर मारपीट और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने राहुल गांधी से मुलाकात कर अपने साथ हुई कथित घटनाओं के बारे में बताया। इस दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शन में शामिल युवक-युवतियों को कैमरे के सामने अपनी बात रखने का मौका दिया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
    प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिसकर्मी उन्हें संसद मार्ग से दिल्ली गेट तक ले जाते समय पीटते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि वे पैसे लेकर प्रदर्शन करने आते हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि उनकी वजह से पुलिस की ड्यूटी दोगुनी हो गई है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा कि उन्होंने पुलिसकर्मियों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालांकि, ये सभी बातें प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
    इस मामले को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा, “अमित शाह जी, देख लीजिए… यह है एक हिंदुस्तान।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे घटनाओं के वीडियो बनाएं और उपलब्ध सबूतों को संभालकर रखें। राहुल गांधी ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि ऊपर से लेकर नीचे तक सभी को सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने छात्रों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात भी कही।
    प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के बारे में अपनी बात रखने वालों में केरल की एक युवती भी शामिल थी। उसने आरोप लगाया कि महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उसके साथ मारपीट की। युवती ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उसने विरोध के दौरान पुलिसकर्मी से कहा था, “जितना मारना है मारो, फिर प्रोटेस्ट में मिलते हैं।” राहुल गांधी ने युवती की हिम्मत की तारीफ करते हुए उसे ‘शेरनी’ कहा। युवती की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में खबर में पुलिस का पक्ष या किसी आधिकारिक जांच का विवरण नहीं दिया गया है।
    प्रदर्शनकारियों ने मुलाकात के दौरान अपने विरोध के तरीके और पुलिस के व्यवहार को लेकर भी बातें साझा कीं। उनका कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर पीटा गया और अपमानित किया गया। उन्होंने संसद मार्ग से दिल्ली गेट तक ले जाए जाने के दौरान मारपीट होने का आरोप दोहराया। राहुल गांधी ने उनकी बातें सुनीं और वीडियो तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
    इस मुलाकात के दौरान प्रदर्शनकारियों में शामिल एक व्यक्ति ने बांसुरी पर ‘वैष्णव जन तो’ की धुन बजाई। उसने कहा कि नफरत का जवाब प्यार से दिया जाएगा। इस प्रसंग के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपने संदेश को सामने रखा। राहुल गांधी ने भी उनकी एकजुटता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी आवाज को धर्म, जाति या लिंग के आधार पर अलग-अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों की आवाज को इन पहचानों के आधार पर बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए।
    प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बीच पुलिस की कथित कार्रवाई का मुद्दा सामने आया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि, पुलिस का जवाब या मामले में किसी आधिकारिक कार्रवाई का विस्तृत विवरण शामिल नहीं है।
  • दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…

    दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में जब पिछली बार कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) यानी CJP का आंदोलन हुआ था. तब देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को इस्तीफा देना पड़ा था. शायद यही वो बात थी जो सरकार और सीजेपी नेताओं दोनों को याद रही. सीजेपी इस बार 10 अक्टूबर को जुलाई जैसा ही कुछ करना चाहती थी. लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर उसे रोकने में जुटी थी. दिल्ली पुलिस की तैयारी और राजधानी में लागू पाबंदियां इसकी गवाह हैं।

    एक तरफ कॉकरोच थे, जिनके साथ युवा और कुछ छात्र संगठन खड़े थे. दूसरी तरफ राजधानी में तैनात पुलिस और पैरामिलिट्री की फौज थी. इस बार सीजेपी के प्रदर्शन को आंदोलन बनने से रोक दिया गया। 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट का कॉल दिया था. लेकिन दिल्ली लैंड होते ही फ्लाइट से सीजेपी के तीनों बड़े नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के बाद प्रदर्शन ठंडा पड़ गया।

    नई दिल्ली के इलाके में शनिवार को दिनभर पुलिस और सीजेपी समर्थकों के बीच चूहा-बिल्ली का खेल देखने को मिला. सीजेपी समर्थकों की जंतर-मंतर पर जुटने और वहां धरना देने की हर कोशिश नाकाम साबित हुई. दिपके ने अपने डिटेंशन से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे बाद में जारी किया गया. सीजेपी के प्लान-B के तहत दिपके, रांका और सौरव दास के पकड़े जाने के बाद अंजिक्य शिंदे को प्रोटेस्ट लीड करने का जिम्मा दिया गया. लेकिन लीड करने के लिए समर्थकों की भीड़ को जमा ही नहीं होने दिया गया।

    अंजिक्य शिंदे ने समर्थकों से प्रोटेस्ट जारी रखने की अपील की और हर जगह को जंतर-मंतर बनाने का आह्वान भी किया. लेकिन रविवार आते-आते सीजेपी समर्थक हल्के पड़ गए. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस की मौजूदगी थी. प्रोटेस्ट के दूसरे दिन रविवार को सड़कों पर सन्नाटा रहा. कनॉट प्लेस के आसपास कुछ इलाके में छिटपुट लोग जमा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी खदेड़ दिया. सीजेपी के तीनों बड़े नेताओं की रिहाई भी हुई, लेकिन शर्त यह थी कि एक साल तक वे कोई प्रदर्शन नहीं करेंगे।

    पुलिस इस बार पहले से ज्यादा तैयार थी और तैयारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत थी. जुलाई में हुए पेपर लीक प्रोटेस्ट से इस बार का प्रोटेस्ट एकदम अलग रहा. पेपर लीक के मुद्दे से वह आमजन भी जुड़े जिनका राजनीति से सीधे कोई सरोकार नहीं था. जंतर-मंतर पर लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे हुए थे. पिछली बार छात्रों का बड़ा हुजूम नजर आया, जिसे तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं था।

    लेकिन इस बार के प्रदर्शन की वजह वोट चोरी, एक सियासी मुद्दा ज्यादा है. SIR के तहत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, इसके पीछे चुनाव आयोग और सरकार के अपने तर्क हैं. विपक्ष खास तौर पर राहुल गांधी सालभर से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं. कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं. पिछले सप्ताह तीन दिन तक लगातार राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरा. आखिर में राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी है. अब उसी मुद्दे के साथ दिपके की सीजेपी जब मैदान में आई तो उसे पहले जैसा जनसमर्थन नहीं मिल सका।

    वोट चोरी के मुद्दे को पहले से ही विपक्ष दल पूरे जोर-शोर से उठा रहे हैं और एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर सीजेपी इसके जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट से यह बात साफ हो गई कि सीजेपी को इस बार पेपर लीक जैसा समर्थन नहीं मिला. दूसरी बात पुलिस ने इस बार पहले से ज्यादा सतर्कता बरती. दिल्ली को छावनी बना दिया गया. ट्रेनें, मेट्रो, बाजार, यहां तक कि इंटरनेट पर भी पाबंदी लगाई गई. सरकार को पता था कि अगर एक बार सीजेपी जंतर-मंतर डेरा डाल लेती तो उन्हें वहां से हटाना मुश्किल होगा. लेकिन पुलिस ने ऐसा होने ही नहीं दिया।

    रविवार को सीजेपी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है. आशुतोष रांका, सौरव दाव और रत्ना सिंह ने पुलिस और सरकार पर प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता करने के आरोप लगाए. दिपके इस प्रेस वार्ता का हिस्सा नहीं थे. क्योंकि दादी के निधन के बाद वह वापस महाराष्ट्र अपने गांव लौट चुके हैं. उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट में कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और फिर से सड़कों पर उतरेंगे. लेकिन अब तक सीजेपी की तरफ से आगे की रणनीति का खुलासा नहीं किया गया है।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन रविवार, 11 अक्टूबर को भी जारी रहने वाला है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस ने इस मामले में 20 एफआईआर दर्ज की हैं। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की गई है। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है।

    शनिवार को प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद रविवार को भी विरोध प्रदर्शन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर लोगों को रास्तों पर पाबंदियों के बारे में चेतावनी दी गई है। सुरक्षा प्रबंधों के तहत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में एकत्र हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की रिहाई की भी जानकारी सामने आई। रिहा होने के बाद वह अपने घर लौट गए। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की दिल्ली पुलिस के जवानों से बहस हो गई। पुलिस जब उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी, तब दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे भारत के राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश पर ‘काली इमरजेंसी’ थोप दी है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने और दिल्ली मेट्रो के बड़े पैमाने पर बंद रहने का भी उल्लेख किया। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती लोकतांत्रिक इतिहास के लिए बड़ा झटका है। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

    मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मेट्रो सामान्य रूप से चले और इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा न आए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से 45 पर ही प्रवेश और निकास पर रोक लगाई गई थी। मेट्रो संचालन को लेकर यह जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।

    इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र संस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। खड़गे के अनुसार, उन्हें फैसले लेने की पूरी आजादी नहीं मिल रही है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र के साथ धोखे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। प्रदर्शन और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच दिल्ली में सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • .पूजा-पाठ और त्योहारों को लेकर विवाद में पति पर पत्नी की हत्या का आरोप, राजगढ़ में कुल्हाड़ी से हमला कर वारदात को दिया अंजाम

    .पूजा-पाठ और त्योहारों को लेकर विवाद में पति पर पत्नी की हत्या का आरोप, राजगढ़ में कुल्हाड़ी से हमला कर वारदात को दिया अंजाम

    मध्य प्रदेश: के राजगढ़ जिले में धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पाठ को लेकर पति-पत्नी के बीच चल रहा विवाद एक गंभीर आपराधिक घटना में बदल गया। गुराड़खेड़ा गांव में रामबाबू गुर्जर पर अपनी पत्नी गायत्रीबाई गुर्जर (36) की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या करने का आरोप है। घटना शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे की बताई गई है। वारदात के बाद आरोपी पति के फरार होने की जानकारी सामने आई है। यह घटना राजगढ़ कोतवाली थाना क्षेत्र की है। मृतका के पिता ने बताया कि गायत्रीबाई ने घटना से पहले फोन कर अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। उसने पिता से जल्द आने के लिए कहा था और आशंका व्यक्त की थी कि उसका पति उसे मार देगा। इस फोन कॉल के बाद हुई वारदात से परिवार में शोक का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश की जा रही है।

    परिजनों के मुताबिक, रामबाबू और गायत्रीबाई के बीच भगवान में आस्था रखने, पूजा-पाठ करने और त्योहार मनाने को लेकर अक्सर विवाद होता था। मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि रामबाबू अपनी पत्नी के पूजा करने पर आपत्ति जताता था। वह उससे कहता था कि भगवान को नहीं मानना चाहिए और भगवान ही सब कुछ नहीं हैं। परिवार के अनुसार, गायत्रीबाई धार्मिक गतिविधियों में रुचि रखती थी, जबकि पति को उसके पूजा-पाठ और त्योहार मनाने से परेशानी थी। यह भी बताया गया कि रामबाबू अधिकतर समय घर से बाहर रहता था। परिजनों ने धार्मिक मान्यताओं को लेकर होने वाले विवाद को इस घटना की पृष्ठभूमि बताया है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    शुरुआती जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह गायत्रीबाई पर कुल्हाड़ी से चार वार किए गए। उसकी पीठ पर तीन और गर्दन पर एक वार किया गया था। हमले में महिला की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। राजगढ़ कोतवाली थाना प्रभारी मंजू मखेनिया के मुताबिक, पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल की टीम को बुलाया। टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी रामबाबू गुर्जर की तलाश शुरू कर दी है। जांच में घटना से जुड़े तथ्यों और पारिवारिक विवाद की परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है।

    गुराड़खेड़ा गांव राजगढ़ कोतवाली थाने से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित है। गांव राजस्थान की सीमा से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गायत्रीबाई का शव उसके पिता को सौंप दिया गया। शनिवार शाम करीब 5:30 बजे शव जिला अस्पताल पहुंचा था। मृतका के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा गब्बर 14 साल का है, जबकि छोटा बेटा धनराज आठ साल का है। मां की मौत के बाद दोनों बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की तलाश जारी है। फिलहाल पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • ग्वालियर के डबरा में 8 करोड़ की जमीन के विवाद में गोलीबारी, संदीप परिहार की मौत, मौके से करीब 50 कारतूस बरामद

    ग्वालियर के डबरा में 8 करोड़ की जमीन के विवाद में गोलीबारी, संदीप परिहार की मौत, मौके से करीब 50 कारतूस बरामद

    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र में टेकनपुर के पास शुक्रवार शाम जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच गोलीबारी हुई। करीब आधे घंटे तक चली इस घटना में संदीप परिहार की मौत हो गई। बताया गया है कि संदीप भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य आलोक शर्मा के भाई नवीन शर्मा का कर्मचारी था। गोलीबारी के दौरान उसके पेट में चार गोलियां लगीं। पुलिस उसे घायल अवस्था में एक स्कूल के अंदर से बरामद कर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दूसरे पक्ष के एक युवक के भी गोली लगने से घायल होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विवाद हाईवे से लगी चार बीघा जमीन को लेकर था, जिसकी कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    यह जमीन टेकनपुर बस स्टैंड के पास पुरानी रोड पर स्थित है। इसे लेकर नवीन शर्मा और श्याम गुर्जर के बीच विवाद चल रहा था। जानकारी के मुताबिक, नवीन शर्मा का पिछले तीन वर्षों से इस जमीन पर कब्जा था। शुक्रवार को वहां बाउंड्री वॉल बनाने का काम चल रहा था। इसी दौरान श्याम गुर्जर पक्ष के लोग मौके पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद बढ़ने पर गोलीबारी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों और वहां से गुजर रहे लोगों के अनुसार, घटनास्थल पर लगातार गोलियां चलाई गईं। बताया गया कि करीब आधे घंटे तक चली फायरिंग में बड़ी संख्या में राउंड दागे गए। घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    जमीन के स्वामित्व को लेकर भी पहले से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब पांच महीने पहले जमीन की रजिस्ट्री श्याम गुर्जर और विनय गुर्जर के नाम कराई गई थी। रजिस्ट्री के बाद जमीन का नामांतरण भी हो गया था। इससे पहले करीब आठ महीने पूर्व जमीन का इकरारनामा किए जाने के समय भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। बताया गया है कि यह जमीन पहले डबरा निवासी हरीबाबू सेठ की थी, जिसे गुर्जर पक्ष ने खरीद लिया था। इसके बावजूद जमीन पर कब्जे और निर्माण को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था। शुक्रवार को बाउंड्री वॉल के निर्माण के दौरान यही विवाद गोलीबारी तक पहुंच गया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। तलाशी के दौरान संदीप परिहार स्कूल के अंदर घायल अवस्था में मिला। उसके पेट में चार गोलियां लगी थीं। पुलिस उसे ग्वालियर लेकर गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल पर खड़ी थार गाड़ी पर भी गोलियों के निशान मिले हैं। पुलिस ने इस गाड़ी से करीब 50 कारतूस बरामद किए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देहात जयराज कुबेर और आसपास के थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए। दूसरे पक्ष के एक युवक के घायल होने की जानकारी की भी चर्चा रही, लेकिन पुलिस की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई थी।

    मृतक संदीप परिहार के भाई ने विनय गुर्जर, सोनेराम गुर्जर, लालो गुर्जर, बाबा और अन्य लोगों पर गोली मारने का आरोप लगाया है। पुलिस इन आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देहात जयराज कुबेर ने बताया कि जमीन विवाद के दौरान गोली लगने से एक युवक की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। घटना के समय तक मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी। पुलिस की जांच में गोलीबारी की परिस्थितियों, बरामद कारतूसों और दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर चले आ रहे विवाद से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

  • MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका

    MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका


    शहडोल।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवा कांग्रेस नेताओं (Youth Congress leaders) को शनिवार को शहडोल रेलवे स्टेशन (Shahdol Railway Station) पर पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम, प्रदेश सचिव अभिषेक शुक्ला, जिला महासचिव शेख आबिद, जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजिल और सत्यम प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सभी को सिटी कोतवाली ले गई, जहां कुछ घंटे रखने के बाद देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।

    युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता दिल्ली में आयोजित आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर उन्हें रोककर कार्रवाई की। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल रही। युवा कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सरकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं और आंदोलन में शामिल होने का प्रयास जारी रखेंगे।


    ‘कितनी बार गिरफ्तार करोगे, आंदोलन में जरूर जाएंगे’

    युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम ने कहा कि युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं और दमनकारी सरकार से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ता दिल्ली जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें कितनी बार गिरफ्तार किया जाएगा। गौतम ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता एक रास्ते से जाएंगे, तो दूसरे कार्यकर्ता अन्य रास्तों से दिल्ली पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन में शामिल होकर रहेंगे।


    रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ भी अलर्ट

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए शहडोल रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भी सतर्क नजर आया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में आंदोलन में शामिल होने जा रहे लोगों की संख्या की जानकारी हर दो घंटे में मुख्यालय को भेजने के निर्देश मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • मध्यप्रदेश में 10 DSP स्तर के अधिकारियों की नई पोस्टिंग, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, भोपाल सहित कई जिलों में बदली जिम्मेदारियां

    मध्यप्रदेश में 10 DSP स्तर के अधिकारियों की नई पोस्टिंग, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, भोपाल सहित कई जिलों में बदली जिम्मेदारियां

    मध्यप्रदेश । में पुलिस विभाग के भीतर अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है। राज्य सरकार के गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा के 10 अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए नई पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। इन अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर पुलिस अधीक्षक, सहायक पुलिस महानिरीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पदों पर पदस्थ किया गया है। नई व्यवस्था के तहत भोपाल पुलिस मुख्यालय के साथ बालाघाट, नर्मदापुरम, सागर और उज्जैन में भी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फेरबदल में इंदौर और भोपाल में पहले से पदस्थ दो सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग दी गई है।

    जारी आदेश के अनुसार, प्रीतम सिंह बालरे को बालाघाट में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, मनोहर सिंह गवली को नर्मदापुरम की अजाक रेंज में पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। इन दोनों अधिकारियों की नई तैनाती के साथ संबंधित स्थानों पर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। गृह विभाग के आदेश में सभी 10 अधिकारियों के लिए अलग-अलग पद और कार्यस्थल निर्धारित किए गए हैं।

    भोपाल में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। बाबूलाल वर्मा को भोपाल स्थित रेडियो मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। राम शंकर सिलावट को भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। इसी तरह महेंद्र रायपुरिया को भोपाल में विसबल के सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों के माध्यम से पुलिस मुख्यालय और उससे संबंधित इकाइयों में अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।

    भोपाल पुलिस मुख्यालय की क्यूडी शाखा में भी दो अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। ऋतुराज गुप्ता को यहां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। सत्येन्द्र कुमार वर्मा को भी इसी शाखा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। दोनों अधिकारियों की नई पोस्टिंग के साथ क्यूडी शाखा में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। गृह विभाग के आदेश में इन पदों पर तैनाती का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

    अन्य जिलों और इकाइयों में भी नई पदस्थापनाएं की गई हैं। विनोद कुमार दीक्षित को उज्जैन लोकायुक्त में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। सतीश कुमार चतुर्वेदी को सागर जोन में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं, बिट्टू शर्मा को भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। इन आदेशों के तहत अधिकारियों को उनके नए पदस्थापना स्थलों पर जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    गृह विभाग की ओर से जारी इस आदेश में कुल 10 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों की नई पोस्टिंग शामिल है। इसमें भोपाल पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के साथ क्षेत्रीय इकाइयों और अन्य स्थानों पर पदस्थापना की गई है। बालाघाट, नर्मदापुरम, सागर और उज्जैन में अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि भोपाल में रेडियो मुख्यालय, विसबल, क्यूडी शाखा और पुलिस मुख्यालय से जुड़े पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। आदेश में अधिकारियों के नाम और उनके नए पदस्थापना स्थलों का उल्लेख किया गया है।

  • गाजियाबाद में पुलिस भर्ती दौड़ के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत, 12 की तबीयत बिगड़ी

    गाजियाबाद में पुलिस भर्ती दौड़ के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत, 12 की तबीयत बिगड़ी


    नई दिल्ली ।
    गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित पीएसी की 47वीं बटालियन के मैदान में उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत हो गई। यह घटना पांच और छह अक्टूबर को आयोजित दौड़ के दौरान हुई। मृतकों में मथुरा निवासी 26 वर्षीय अतुल कुमार और शामली निवासी 23 वर्षीय विवेक कुमार शामिल हैं। वहीं, मंगलवार को दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 12 अभ्यर्थियों को संयुक्त जिला अस्पताल ले जाया गया। इनमें कुछ अभ्यर्थियों को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और कमजोरी की शिकायत हुई, जबकि तीन के पैर में फ्रैक्चर भी सामने आया।

    पुलिस के अनुसार, मथुरा जिले के गांव कारब निवासी अतुल कुमार पुत्र सतीश चंद्र 5 अक्टूबर को सिपाही भर्ती की दौड़ में शामिल हुए थे। दौड़ के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, शामली जिले के गांव पुरमाफी निवासी 23 वर्षीय विवेक कुमार पुत्र बालेंद्र सिंह की मंगलवार को दौड़ के बाद तबीयत बिगड़ गई। उन्हें संयुक्त जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

    एसीपी कविनगर अभय डागा के मुताबिक, दोनों अभ्यर्थियों की दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ी थी और इसी दौरान उनकी मौत हुई। मौत की सही वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पुलिस ने मामले में मौत के सटीक कारण का पता लगाने के लिए रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।

    संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार, मंगलवार को 12 अभ्यर्थियों को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया। इनमें विवेक को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया था। अन्य अभ्यर्थियों में किसी को सांस लेने में परेशानी हुई तो किसी ने सीने में दर्द और कमजोरी की शिकायत की। शामली निवासी अंकुर के दाएं पैर में परेशानी थी, जबकि मथुरा निवासी योगेश को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत के बाद उपचार दिया गया। गोविंदपुरम निवासी राहुल को सामान्य कमजोरी की शिकायत थी। भाविक और गौरव को सांस लेने में परेशानी हुई, जबकि सूरज को सीने में दर्द के बाद इमरजेंसी में इलाज दिया गया।

    मथुरा निवासी हेमेंद्र और बंटी को भी सांस संबंधी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया। मथुरा निवासी अंकित को सीने में दर्द होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया, जबकि सचिन को सांस लेने में परेशानी के कारण इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इलाज के बाद कुछ अभ्यर्थियों की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का उपचार जारी रहा। इससे पहले सोमवार को भी दौड़ के दौरान कई अभ्यर्थियों को चोट और तबीयत बिगड़ने के कारण अस्पताल पहुंचाया गया था। मेरठ निवासी गौरव और मुकीमपुर निवासी कृष्णा के पैर में फ्रैक्चर होने पर उन्हें रेफर किया गया था। मेरठ के भासुमा गांव निवासी सौरव भी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

    यूपी पुलिस आरक्षी भर्ती की दौड़ 3 से 9 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है। 3, 5 और 6 अक्टूबर को पुरुष अभ्यर्थियों की दौड़ हुई, जिसमें प्रतिदिन करीब 875 अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। 7 अक्टूबर को महिला अभ्यर्थियों की दौड़ निर्धारित है, जिसमें करीब 650 अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। दौड़ के लिए सुबह पांच बजे से प्रवेश शुरू होता है और पूरी प्रक्रिया सुबह नौ बजे तक पूरी की जाती है। अतुल और विवेक के परिजन उन्हें पुलिस की वर्दी में देखने का सपना लेकर भर्ती में भेजे थे, लेकिन दोनों की मौत के बाद परिवारों में मातम छा गया।