इसके बाद, मार्च 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट से सुशील कुमार को नियमित जमानत मिल गई थी, लेकिन 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले के सभी अहम गवाहों से पूछताछ पूरी नहीं हुई थी इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब तक गवाहों के बयान दर्ज नहीं होते, तब तक आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती। हालांकि कोर्ट ने यह संभावना भी जताई थी कि यदि परिस्थितियां बदलती हैं तो आरोपी फिर से जमानत की याचिका दायर कर सकता है।
अब, सुशील कुमार की ओर से दाखिल की गई नई याचिका में यह तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं। अब तक 222 गवाहों में से 42 अहम गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं जिसमें घायल पक्ष के सदस्य भी शामिल हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले में अब अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं और इस दौरान सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने का कोई कारण नहीं रह गया है। रोहिणी कोर्ट में मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई हो सकती है और अदालत से उम्मीद की जा रही है कि सुशील कुमार को जमानत मिलने की संभावना है खासकर जब उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। अदालत इस याचिका पर अगली सुनवाई के दौरान फैसला ले सकती है।
