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  • दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास

    दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सफलता की कहानी जब भी लिखी जाएगी तो उसमें दीप्ति शर्मा का नाम बेहद खास अंदाज में दर्ज होगा। गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए मैच का रुख बदलने वाली दीप्ति ने 2025 वनडे विश्व कप में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। खुद को बजरंगबली का भक्त बताने वाली दीप्ति मैदान पर भी अपनी टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाती नजर आती हैं। 24 अगस्त 1997 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मी दीप्ति ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और भारतीय टीम के तीनों फॉर्मेट में अपनी उपयोगिता साबित की।

    दीप्ति बाएं हाथ से बल्लेबाजी करती हैं जबकि दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करती हैं। भारतीय टीम के लिए उन्होंने 2014 में वनडे क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2016 में टी20 और 2021 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। धीरे धीरे वह टीम इंडिया की ऐसी ऑलराउंडर बन गईं जिनसे किसी भी मुकाबले में बल्ले और गेंद दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दबाव की परिस्थितियों में भी वह अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखने में कामयाब रहती हैं।

    2025 में भारत में खेले गए वनडे विश्व कप में दीप्ति ने अपनी इसी क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया। टूर्नामेंट में उन्होंने नौ मुकाबलों में 215 रन बनाए और तीन अर्धशतक लगाए। गेंदबाजी में उन्होंने 22 विकेट हासिल किए और पूरे टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज बनीं। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन विश्व कप के फाइनल में आया जहां उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

    फाइनल मुकाबले में दीप्ति ने पहले बल्ले से शानदार पारी खेली और 58 गेंदों पर 58 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके बाद जब गेंदबाजी की बारी आई तो उन्होंने विपक्षी बल्लेबाजों पर ऐसा शिकंजा कसा कि मैच का रुख भारत की ओर पूरी तरह मुड़ गया। दीप्ति ने 9.3 ओवर में 39 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत को 52 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और टीम पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम करने में सफल रही।

    दीप्ति का रिकॉर्ड सिर्फ विश्व कप तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने सात मैचों की 12 पारियों में 402 रन बनाए हैं और उनके नाम 25 विकेट भी हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 124 मैचों की 106 पारियों में 2771 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वाधिक वनडे स्कोर 188 रन है जो भारतीय महिला क्रिकेट में एक बड़ा व्यक्तिगत रिकॉर्ड है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। 149 मैचों में उनके नाम 1270 रन और 168 विकेट दर्ज हैं।

    दीप्ति की प्रतिभा का सम्मान सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वह विमेंस प्रीमियर लीग के साथ ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग और द हंड्रेड जैसी बड़ी विदेशी लीग में भी अपना जलवा दिखा चुकी हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल करती है। आने वाले वर्षों में भी उनसे कई बड़े प्रदर्शन और रिकॉर्ड की उम्मीद की जा सकती है।

  • WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर

    WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की प्वाइंट्स टेबल में ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच खेले गए दूसरे टेस्ट के नतीजे का असर साफ दिखाई देने लगा है। मैके में ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पारी और 51 रन से हराकर न सिर्फ दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर की बल्कि डब्ल्यूटीसी की तालिका में अपनी स्थिति भी और मजबूत कर ली। इस हार का सीधा फायदा भारतीय टीम को मिला है क्योंकि बांग्लादेश का जीत प्रतिशत गिर गया है और अब अगर भारत श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में जीत दर्ज करता है तो वह बांग्लादेश को पीछे छोड़कर अंक तालिका में ऊपर पहुंच सकता है। ऑस्ट्रेलिया इस समय 80 प्रतिशत जीत के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है जबकि दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत जीत के साथ दूसरे नंबर पर है। न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है। बांग्लादेश को दूसरे टेस्ट से पहले तक 66 प्रतिशत जीत हासिल थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया से मिली करारी हार के बाद उसका जीत प्रतिशत घटकर 55.56 हो गया है और टीम चौथे स्थान पर है।

    भारत के लिए यह स्थिति इसलिए अहम हो जाती है क्योंकि टीम इस समय श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है। पहले टेस्ट में शानदार जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम दूसरे टेस्ट में भी मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। यदि टीम इंडिया कोलंबो टेस्ट अपने नाम करने में सफल रहती है तो डब्ल्यूटीसी प्वाइंट्स टेबल में उसका समीकरण और बेहतर हो सकता है। ऐसे में बांग्लादेश की हार भारतीय टीम के लिए राहत लेकर आई है। हालांकि डब्ल्यूटीसी में सिर्फ जीत ही महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि जीत प्रतिशत के आधार पर टीमों की स्थिति तय होती है इसलिए हर टेस्ट का परिणाम बेहद अहम माना जाता है।

    मैके में खेले गए दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत से ही बांग्लादेश पर दबाव बनाए रखा। बांग्लादेश की पहली पारी महज 64 रन पर सिमट गई जिसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 210 रन बनाए और 146 रन की बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद बांग्लादेश की दूसरी पारी भी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम सिर्फ 95 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे दिन ही पारी और 51 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस मैच में मिचेल स्टार्क ऑस्ट्रेलिया की जीत के सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में छह और दूसरी पारी में चार विकेट लेकर मैच में कुल 10 विकेट झटके।

    ऑस्ट्रेलिया की इस शानदार जीत में कप्तान पैट कमिंस और नाथन लायन ने भी अहम भूमिका निभाई। कमिंस ने दोनों पारियों में कुल छह विकेट लिए जबकि लायन ने भी महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। बांग्लादेश ने सीरीज के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को नौ विकेट से हराकर बड़ा उलटफेर किया था लेकिन दूसरे टेस्ट में कंगारू टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए मेहमान टीम को कोई मौका नहीं दिया। अब सीरीज 1-1 से बराबर हो चुकी है और डब्ल्यूटीसी की दौड़ में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। वहीं भारतीय टीम की नजर अब श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के नतीजे पर है क्योंकि जीत उसे डब्ल्यूटीसी की तालिका में महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है।

  • कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा

    कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली क्रिकेट क्लब स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दूसरे सेशन में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया। टी-ब्रेक तक भारतीय टीम ने पहली पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 187 रन बना लिए थे। देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया जबकि कप्तान शुभमन गिल ने भी बेहतरीन पारी खेलते हुए पचासा जड़ा। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई मजबूत साझेदारी ने भारत को शुरुआती झटकों से उबारकर मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

    पहले टेस्ट में शतक लगाने वाले देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में भी अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी। टी-ब्रेक तक वह 117 गेंदों में 63 रन बनाकर क्रीज पर टिके हुए थे। उनकी पारी में सात शानदार चौके शामिल रहे। पडिक्कल ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों का सामना किया और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी शानदार बल्लेबाजी की और 108 गेंदों पर 50 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके लगाए। गिल और पडिक्कल ने तीसरे विकेट के लिए 209 गेंदों पर 120 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारतीय पारी को मजबूती दी और श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। हालांकि अर्धशतक पूरा करने के बाद गिल ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और असिथा फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर निरोशन डिकवेला को कैच दे बैठे।

    भारत की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने शुरुआती दौर में ही केएल राहुल का विकेट गंवा दिया। राहुल सिर्फ 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद यशस्वी जायसवाल ने तेज शुरुआत की और कई शानदार चौके लगाए लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। जायसवाल 53 गेंदों पर 45 रन बनाकर असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इन शुरुआती झटकों के बाद गिल और पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ धैर्य से बल्लेबाजी की और लगातार रन बनाते हुए भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। टी-ब्रेक के समय ऋषभ पंत एक रन बनाकर पडिक्कल का साथ दे रहे थे। श्रीलंका की ओर से असिथा फर्नांडो अब तक दो विकेट ले चुके थे जबकि लाहिरू कुमारा को एक सफलता मिली।

    दूसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया है। कुलदीप यादव की जगह मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। सारांश ने इसी मुकाबले से अपना टेस्ट डेब्यू किया। कप्तान गिल ने टॉस के समय बताया था कि कुलदीप संक्रमण के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    वहीं श्रीलंका की टीम में भी एक खिलाड़ी ने टेस्ट डेब्यू किया है। कामिल मिशारा को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। भारतीय टीम दो मैचों की टेस्ट सीरीज में पहले ही 1-0 से आगे है। पहले टेस्ट में भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में दूसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम की नजर जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर है।

  • कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका

    कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। स्टार स्पिनर कुलदीप यादव इस मुकाबले में भारतीय प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हैं। टॉस जीतकर भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और इसके बाद टीम की अंतिम एकादश सामने आई तो उसमें कुलदीप यादव का नाम नहीं था। इसके बाद उनके बाहर रहने को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने बताया कि कुलदीप अभी वायरल बीमारी से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और इसी वजह से वह इस मुकाबले के लिए चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे।

    बीसीसीआई ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि कुलदीप यादव वायरल बीमारी से पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं। इसी कारण उन्हें श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतर सकते हैं। यानी टीम में उनकी मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है लेकिन सामान्य परिस्थितियों में वह इस टेस्ट में गेंदबाजी या बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी टॉस के दौरान कुलदीप की स्थिति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्भाग्य से कुलदीप को इन्फेक्शन हो गया है और इसी कारण वह इस मुकाबले का हिस्सा नहीं हैं। कुलदीप का बाहर होना भारतीय टीम के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि वह टीम के प्रमुख स्पिन विकल्पों में शामिल हैं और टेस्ट क्रिकेट में अपनी विविधतापूर्ण गेंदबाजी से बल्लेबाजों के लिए लगातार परेशानी खड़ी करते रहे हैं।

    कुलदीप यादव इससे पहले गाले में खेले गए पहले टेस्ट का हिस्सा थे। हालांकि उस मुकाबले में उनका प्रदर्शन अपेक्षा के मुताबिक प्रभावी नहीं रहा और उन्हें केवल एक विकेट मिला था। दूसरे टेस्ट से पहले यह चर्चा थी कि टीम मैनेजमेंट उन्हें आराम देकर किसी दूसरे स्पिन विकल्प को मौका दे सकता है। लेकिन अब बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि कुलदीप के बाहर रहने की मुख्य वजह उनकी बीमारी है।

    कुलदीप की अनुपस्थिति में भारतीय टीम ने मध्यप्रदेश के अनुभवी ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। यह सारांश के अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला मुकाबला है। 33 वर्षीय सारांश लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और मध्यप्रदेश की टीम के लिए उनके प्रदर्शन को काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। उन्होंने टीम को रणजी ट्रॉफी का पहला खिताब दिलाने के सफर में भी अहम भूमिका निभाई थी।

    सारांश जैन बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं। ऐसे में भारतीय टीम को उनसे बल्ले और गेंद दोनों से उपयोगी योगदान की उम्मीद होगी। कुलदीप की गैरमौजूदगी में सारांश के पास खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर साबित करने का बड़ा मौका है। कोलंबो की परिस्थितियों में उनकी ऑफ स्पिन भारतीय टीम के लिए कितनी उपयोगी साबित होती है और डेब्यू मैच में वह कैसा प्रदर्शन करते हैं इस पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रहेगी।

  • गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    नई दिल्ली । श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 165 रनों की शानदार जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त जरूर बना ली है लेकिन वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 के फाइनल की दौड़ में भारत की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गॉल में मिली जीत से भारतीय टीम के अंक प्रतिशत में सुधार हुआ है और फाइनल की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं लेकिन अंक तालिका में टीम अभी पांचवें स्थान पर ही बनी हुई है। ऐसे में अब बचे हुए आठ टेस्ट मुकाबले भारत के लिए बेहद अहम हो गए हैं और फाइनल की रेस में बने रहने के लिए टीम को लगभग हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

    गॉल टेस्ट से पहले भारत ने नौ मुकाबलों में चार जीत दर्ज की थीं और उसका पॉइंट्स प्रतिशत 48.15 था। इस जीत के बाद भारत का पीसीटी बढ़कर 53.33 हो गया है। हालांकि इस सुधार के बावजूद भारतीय टीम अभी बांग्लादेश से पीछे है। बांग्लादेश ने पांच टेस्ट में तीन जीत के साथ 66.67 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और वह चौथे स्थान पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 77.78 प्रतिशत के साथ तालिका में सबसे ऊपर है। दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत और न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ भारत से आगे हैं। इससे साफ है कि भारत को सिर्फ अपने प्रदर्शन पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा बल्कि दूसरी टीमों के नतीजे भी फाइनल की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    भारत के पास अब इस चक्र में आठ टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम इन सभी मुकाबलों में जीत दर्ज करती है तो उसका पॉइंट्स प्रतिशत करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में भारत की फाइनल में पहुंचने की संभावना बेहद मजबूत हो जाएगी। लेकिन समस्या यह है कि इन आठ मुकाबलों में एक भी हार भारत के समीकरण को काफी प्रभावित कर सकती है। एक हार की स्थिति में पीसीटी लगभग 68.52 तक गिर सकता है जबकि दो हार होने पर यह करीब 62.96 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच जाएगा। यानी भारत के लिए अब हर टेस्ट का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

    श्रीलंका के खिलाफ सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। भारत की कोशिश इस मुकाबले को जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम करने की होगी। इसके बाद टीम इंडिया के सामने न्यूजीलैंड की चुनौती होगी जहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होंगी और हाल के वर्षों में कीवी टीम ने भारत को टेस्ट क्रिकेट में कड़ी चुनौती दी है।

    इसके बाद भारत की अगली बड़ी परीक्षा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी होगी। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ घरेलू मैदान पर होने वाली यह सीरीज WTC फाइनल की दौड़ में निर्णायक साबित हो सकती है। भारत अगर ऑस्ट्रेलिया को 4-1 या 3-1 से हराने में सफल रहता है तो उसके फाइनल की राह काफी मजबूत हो जाएगी। इसके उलट सीरीज में ज्यादा नुकसान भारत के समीकरण को मुश्किल बना सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर चार अंक हासिल होते हैं और हार की स्थिति में कोई अंक नहीं मिलता। यही वजह है कि भारत के लिए अब हर टेस्ट में जीत की अहमियत बढ़ गई है। गॉल की जीत ने टीम इंडिया को राहत जरूर दी है लेकिन फाइनल का टिकट अभी दूर है। आने वाले आठ टेस्ट मुकाबले अब भारत के लिए सिर्फ सीरीज जीतने की लड़ाई नहीं बल्कि WTC फाइनल में जगह बनाने की निर्णायक जंग बनने वाले हैं।

  • गाले में भारत का दबदबा कायम श्रीलंका 206 रन पर ढेर सुथार ने दूसरी पारी में झटके 6 विकेट सीरीज में 1-0 की बढ़त

    गाले में भारत का दबदबा कायम श्रीलंका 206 रन पर ढेर सुथार ने दूसरी पारी में झटके 6 विकेट सीरीज में 1-0 की बढ़त


    नई दिल्ली। गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को पहले टेस्ट में 165 रन से हरा दिया। पांचवें दिन भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की दूसरी पारी को 206 रन पर समेट दिया और इसी के साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत ने 1-0 की बढ़त बना ली। भारत की इस बड़ी जीत के सबसे बड़े हीरो युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार रहे जिन्होंने दूसरी पारी में 55 रन देकर 6 विकेट चटकाए। सुथार ने पूरे मैच में 10 विकेट अपने नाम किए और अपनी गेंदबाजी से श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    श्रीलंका के सामने भारत ने जीत के लिए 372 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और उसके शीर्ष चार बल्लेबाज सिर्फ 47 रन के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। इस शुरुआती झटके के बाद श्रीलंका की टीम लगातार दबाव में रही। हालांकि कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 59 रन की जुझारू पारी खेली जबकि पहली पारी में शतक लगाने वाले सोनल दिनुशा ने 84 रन बनाकर कुछ देर तक भारतीय गेंदबाजों का सामना किया। दोनों ने श्रीलंका की उम्मीदों को कुछ समय के लिए जिंदा रखा लेकिन भारत के गेंदबाजों के सामने यह साझेदारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।

    सोनल दिनुशा और धनंजय डी सिल्वा के आउट होते ही श्रीलंका की जीत की बची खुची उम्मीदें भी खत्म हो गईं। पूरी टीम 77.4 ओवर में 206 रन पर सिमट गई। मानव सुथार ने 23.4 ओवर में 55 रन देकर 6 विकेट लिए। उनके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा ने 2 विकेट चटकाए जबकि मोहम्मद सिराज और रविंद्र जडेजा को एक एक सफलता मिली। सुथार की शानदार गेंदबाजी ने उन्हें मैच में 10 विकेट दिलाए और वह भारत की जीत के मुख्य सूत्रधार बनकर उभरे।

    इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 462 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। देवदत्त पडिक्कल ने शानदार 167 रन की पारी खेलकर टीम को मजबूत आधार दिया। उनके अलावा केएल राहुल ने 82 रन बनाए जबकि ध्रुव जुरेल ने 51 रनों का अहम योगदान दिया। बारिश से प्रभावित मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने परिस्थितियों के अनुरूप धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। पडिक्कल की पारी को भारत की पहली पारी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना गया।

    भारत के 462 रन के जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई। सोनल दिनुशा ने शानदार शतक लगाकर टीम को संभालने की कोशिश की जबकि निरोशन डिकवेला ने 80 रन बनाए। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज श्रीलंका को बड़ी साझेदारियां बनाने से रोकने में सफल रहे और भारत को पहली पारी में 178 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई।

    दूसरी पारी में भारत 193 रन पर ऑलआउट हो गया। ऋषभ पंत ने तेजतर्रार 66 रन की पारी खेलकर भारत की बढ़त को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। भारत की कुल बढ़त के आधार पर श्रीलंका को 372 रन का लक्ष्य मिला लेकिन मेजबान टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी।

    इस जीत के साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब दोनों टीमों की नजरें दूसरे टेस्ट पर होंगी जो 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा। गाले में मिली इस जीत ने भारत के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान को भी मजबूती दी है। वहीं मानव सुथार के 10 विकेट ने भारतीय क्रिकेट में एक नए स्पिन सितारे के उभरने के संकेत दे दिए हैं।

  • ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान

    ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान


    नई दिल्ली । वनडे वर्ल्ड कप 2027 को लेकर क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की शुरुआत की तारीख में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC अब 2 अक्टूबर 2027 को टूर्नामेंट शुरू करने पर विचार कर रहा है। यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भारत में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। हालांकि अभी ICC की ओर से नई शुरुआत की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।

    शुरुआती कार्यक्रम के मुताबिक 2027 वनडे वर्ल्ड कप की शुरुआत अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद होनी थी। पहले 8 अक्टूबर को मुख्य टूर्नामेंट शुरू करने की योजना सामने आई थी और उससे पहले वार्म अप मुकाबले खेले जाने थे। अब अगर ICC की नई योजना पर सहमति बनती है तो मुख्य टूर्नामेंट 2 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। फाइनल फिलहाल 21 नवंबर को होने की उम्मीद है। इस स्थिति में प्रतियोगिता करीब 50 दिनों तक चल सकती है।

    गांधी जयंती को टूर्नामेंट के आगाज से जोड़ने के पीछे महात्मा गांधी और दक्षिण अफ्रीका के बीच गहरा ऐतिहासिक संबंध भी एक अहम वजह माना जा रहा है। गांधी ने अपने जीवन के करीब 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका में बिताए थे। वहीं उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया था। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप की शुरुआत गांधी जयंती से करना एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    2027 का वर्ल्ड कप कई मायनों में खास होने वाला है। इस बार प्रतियोगिता में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और मुकाबले दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे तथा नामीबिया में खेले जाएंगे। ICC ने टूर्नामेंट के लिए 12 वेन्यू की जानकारी भी साझा की है। दक्षिण अफ्रीका के आठ शहरों में मुकाबले होंगे जबकि जिम्बाब्वे के तीन और नामीबिया के एक वेन्यू को शामिल किया गया है।

    टूर्नामेंट के फॉर्मेट में भी बड़ा बदलाव किया गया है। ICC ने 2027 वर्ल्ड कप को 14 टीमों का करने के साथ क्वालिफिकेशन चरण में नई सुपर सीरीज व्यवस्था जोड़ी है। सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाइड टीमों को सुपर सीरीज में आपस में मुकाबले करने होंगे और इस चरण से एक टीम मुख्य प्रतियोगिता के लिए आगे बढ़ेगी। इसके बाद मुख्य टूर्नामेंट में 12 टीमों को दो ग्रुप में बांटकर मुकाबले कराए जाएंगे। ग्रुप चरण के बाद सुपर सिक्स चरण और फिर सेमीफाइनल तथा फाइनल का रास्ता होगा।

    वर्ल्ड कप के लिए भारत समेत कई बड़ी टीमों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका बांग्लादेश अफगानिस्तान और मेजबान दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे भी क्वालिफाई कर चुके हैं। वहीं नामीबिया समेत बाकी टीमों की स्थिति क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से तय होगी।

    फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा गांधी जयंती के दिन वर्ल्ड कप शुरू होने को लेकर है। अगर ICC इस प्रस्ताव पर मुहर लगाता है तो 2027 वनडे वर्ल्ड कप का आगाज सिर्फ क्रिकेट के लिहाज से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदेश के लिहाज से भी बेहद खास बन जाएगा। हालांकि अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि ICC के आधिकारिक ऐलान के बाद ही होगी।

  • श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम

    श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम


    नई दिल्ली।
    इंडिया वर्सेस श्रीलंका (India vs Sri Lanka) दो मैच की टेस्ट सीरीज (Test series) का आगाज आज यानी शनिवार, 15 अगस्त से होने जा रहा है। सीरीज का पहला मैच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम (Indian team) के लिए यह टेस्ट मैच काफी खास रहने वाला है क्योंकि यह टीम इंडिया (Team India) के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का 600वां मैच होगा। भारत इस मुकाम तक पहुंचने वाला मात्र तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया से ज्यादा अभी तक सिर्फ दो ही देशों ने मैच खेले हैं, इस लिस्ट में क्रिकेट के इतिहास की दो सबसे पुरानी टीम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का नाम दर्ज है। इंग्लैंड के नाम तो सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है।


    इंग्लैंड के नाम 1000 से अधिक टेस्ट खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड

    क्रिकेट का जनक इंग्लैंड को कहा जाता है। उनके नाम इस खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। क्रिकेट इतिहास में इंग्लैंड एकमात्र टीम है जिसने 1000 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। जी हां, इंग्लैंड की टीम अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 1097 मैच खेल चुके हैं, जिसमें 405 में उन्हें जीत मिली 336 में हार का सामना करना पड़ा, जबकि 356 मैच ड्रॉ रहे।


    टॉप-2 में ऑस्ट्रेलिया भी

    इंग्लैंड के बाद अगर किसी टीम ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं तो वह है ऑस्ट्रेलिया की टीम। कंगारू टीम बांग्लादेश के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज में अपना 883वां मुकाबला खेल रही है। उनका जीत का रिकॉर्ड इंग्लैंड से काफी बेहतर रहा है। उन्होंने अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 426 मैच जीता है, 235 हारे हैं जबकि 219 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं।

    भारत 600 टेस्ट खेलने वाला बनेगा तीसरा देश
    इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 600 टेस्ट मैच खेलने वाला तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया ने अभी तक इस फॉर्मेट में खेले 599 मुकाबलों में से 186 जीते, 188 हारे और 224 ड्रॉ रहे।


    वेस्टइंडीज बेहद नजदीक

    वेस्टइंडीज की टीम भी 600 टेस्ट मैच के रिकॉर्ड के बेहद नजदीक है। उन्होंने भी इस फॉर्मेट में अभी तक 596 मैच खेल लिए हैं। जबकि अन्य टीम अभी काफी पीछे हैं। न्यूजीलैं, पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका जैसी टीमों ने अभी तक 450 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। वहीं श्रीलंका ने अभी तक 350 टेस्ट मैच भी नहीं खेले हैं।

  • एक सीरीज में मचाया तहलका फिर टीम इंडिया से हुए दूर, जानिए विजय भारद्वाज का पूरा क्रिकेट सफर

    एक सीरीज में मचाया तहलका फिर टीम इंडिया से हुए दूर, जानिए विजय भारद्वाज का पूरा क्रिकेट सफर


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिनका अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद छोटा रहा लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनकी उपलब्धियां किसी बड़े सितारे से कम नहीं रहीं। विजय भारद्वाज भी इसी सूची में शामिल हैं। 15 अगस्त 1975 को बेंगलुरु में जन्मे इस ऑलराउंडर ने भारतीय टीम में धमाकेदार अंदाज में दस्तक दी थी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1999-2000 के एलजी कप में उनके प्रदर्शन ने उन्हें रातोंरात चर्चा में ला दिया था। गेंद और बल्ले दोनों से प्रभाव छोड़ने वाले भारद्वाज को उस टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया था।

    एलजी कप में विजय भारद्वाज ने अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी से शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 विकेट हासिल किए थे। निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 89 रन भी बनाए थे। इस प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य के अहम खिलाड़ियों में गिना जाने लगा। उनकी उपयोगिता यह थी कि वह जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी और फील्डिंग में भी योगदान दे सकते थे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उस शुरुआती सफलता को वह लंबे समय तक बरकरार नहीं रख सके।

    विजय भारद्वाज ने सितंबर 1999 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया और इसके बाद टेस्ट क्रिकेट में भी मौका मिला। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर कुल तीन टेस्ट और 10 वनडे तक ही सीमित रहा। तीन टेस्ट की तीन पारियों में उन्होंने 28 रन बनाए और एक विकेट लिया। वहीं 10 वनडे में उन्होंने 136 रन बनाने के साथ 16 विकेट अपने नाम किए। उनका आखिरी वनडे मुकाबला 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ रहा। इसके बाद उनकी भारतीय टीम में वापसी नहीं हो सकी।

    लेकिन अगर विजय भारद्वाज के पूरे क्रिकेट करियर को केवल भारत के लिए खेले 13 मुकाबलों के आधार पर देखा जाए तो उनकी कहानी अधूरी रह जाएगी। कर्नाटक के लिए उनका घरेलू क्रिकेट करियर बेहद प्रभावशाली रहा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 96 मैचों की 149 पारियों में 5553 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 14 शतक और 26 अर्धशतक निकले। गेंदबाजी में भी उन्होंने 59 विकेट हासिल किए। लिस्ट ए क्रिकेट में उनके नाम 1707 रन और 46 विकेट दर्ज हैं।

    कर्नाटक के मजबूत दौर में भारद्वाज टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। वह 1990 के दशक में कर्नाटक की तीन रणजी ट्रॉफी खिताबी जीत का हिस्सा रहे। 2000 से 2002 तक उन्होंने कर्नाटक की कप्तानी भी की। घरेलू क्रिकेट में उनके लगातार प्रदर्शन ने साबित किया कि वह सिर्फ एक सीरीज के खिलाड़ी नहीं थे बल्कि लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते थे। उनके करियर पर चोटों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी असर पड़ा और यही वजह रही कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका सफर अपेक्षा के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका।

    4 नवंबर 2006 को विजय भारद्वाज ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया। इसके बाद उन्होंने खेल से दूरी बनाने के बजाय कोचिंग और कमेंट्री को अपना नया रास्ता बनाया। वह नेशनल क्रिकेट एकेडमी से लेवल थ्री कोच के रूप में प्रमाणित हैं। आईपीएल के शुरुआती दौर में वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के सहायक कोच भी रहे। इसके अलावा ओमान क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच के रूप में भी काम किया। बाद के वर्षों में उन्होंने कन्नड़ क्रिकेट कमेंट्री और विश्लेषण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

    विजय भारद्वाज की कहानी यही बताती है कि किसी खिलाड़ी के करियर को केवल अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता। भारत के लिए उनका सफर भले ही छोटा रहा लेकिन कर्नाटक क्रिकेट में उनका योगदान और बाद में कोचिंग व कमेंट्री के जरिए खेल से जुड़ाव उनकी क्रिकेट विरासत को आज भी खास बनाता है।

  • श्रीलंका की धरती पर टीम इंडिया का दबदबा, 24 टेस्ट में 9 जीत; कोहली की कप्तानी में 2017 में किया था क्लीन स्वीप

    श्रीलंका की धरती पर टीम इंडिया का दबदबा, 24 टेस्ट में 9 जीत; कोहली की कप्तानी में 2017 में किया था क्लीन स्वीप


    नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का रोमांच 15 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में टीम इंडिया श्रीलंका की धरती पर अपने मजबूत रिकॉर्ड को बरकरार रखने के इरादे से मैदान में उतरेगी। भारतीय टीम के सामने न सिर्फ सीरीज जीतने की चुनौती होगी बल्कि पिछले कुछ वर्षों से श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में चले आ रहे दबदबे को कायम रखने की जिम्मेदारी भी होगी।

    श्रीलंका की सरजमीं पर भारतीय टीम का रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है। भारत ने अब तक वहां कुल 24 टेस्ट मैच खेले हैं। इनमें टीम इंडिया ने 9 मुकाबलों में जीत दर्ज की है, जबकि 7 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा। वहीं 8 टेस्ट मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि विदेशी परिस्थितियों में खेलने के बावजूद भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है।

    भारत ने आखिरी बार 2017 में श्रीलंका का दौरा किया था। उस दौरे पर विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंकाई टीम का सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया था। उस दौरे की जीत भारतीय टेस्ट क्रिकेट के यादगार अभियानों में शामिल रही। टीम इंडिया ने तीनों मुकाबलों में अपना दबदबा कायम रखा और श्रीलंका को किसी भी मैच में वापसी का मौका नहीं दिया।

    अगर भारत और श्रीलंका के बीच ओवरऑल टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक 46 टेस्ट मुकाबले खेले गए हैं। इनमें भारत ने 22 मैचों में जीत हासिल की है, जबकि श्रीलंका को सिर्फ 7 मुकाबलों में जीत मिली है। दोनों टीमों के बीच कई मुकाबले ड्रॉ भी रहे हैं। यह आंकड़ा साफ तौर पर बताता है कि टेस्ट क्रिकेट में श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम का पलड़ा काफी भारी रहा है।

    भारत और श्रीलंका की आखिरी टेस्ट भिड़ंत 2022 में हुई थी। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने उस सीरीज में श्रीलंका को 2-0 से हराया था। ऐसे में भारतीय टीम के पास श्रीलंका के खिलाफ लगातार सीरीज जीतने का सिलसिला आगे बढ़ाने का मौका है। हालांकि इस बार कप्तानी की जिम्मेदारी शुभमन गिल के कंधों पर है और उनके लिए यह सीरीज बतौर टेस्ट कप्तान एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है।

    सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम ने तीन दिवसीय वॉर्मअप मुकाबले में भी अपनी तैयारियों का मजबूत संकेत दिया। टीम इंडिया ने श्रीलंका क्रिकेट इलेवन को 6 विकेट से हराया। इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने अच्छी लय दिखाई। यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल, रवींद्र जडेजा और कप्तान शुभमन गिल ने प्रभावशाली बल्लेबाजी की।

    देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में शानदार शतक लगाते हुए 142 रन की नाबाद पारी खेली। उनके प्रदर्शन से भारतीय टीम के मध्यक्रम को मजबूती मिली। वहीं अन्य बल्लेबाजों ने भी उपयोगी पारियां खेलकर सीरीज से पहले अपनी तैयारियों का संकेत दिया।

    अब सबकी नजरें 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज पर हैं। शुभमन गिल के लिए यह सिर्फ श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज नहीं होगी बल्कि बतौर कप्तान अपने नेतृत्व को मजबूत करने का भी बड़ा अवसर होगा। भारत के शानदार पुराने रिकॉर्ड, हालिया प्रदर्शन और खिलाड़ियों की अच्छी फॉर्म को देखते हुए टीम इंडिया को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन और मौसम जैसी चुनौतियां भारतीय टीम की परीक्षा ले सकती हैं। ऐसे में गिल की कप्तानी में टीम इंडिया अपने पुराने दबदबे को नए अंदाज में कायम कर पाती है या नहीं, इसका जवाब सीरीज के दौरान मिलेगा।