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  • ट्रंप प्रशासन की चुनावी शर्तों पर कोर्ट की रोक, एंटी-टेरर फंडिंग को चुनावी बदलावों से जोड़ने पर फटकार

    ट्रंप प्रशासन की चुनावी शर्तों पर कोर्ट की रोक, एंटी-टेरर फंडिंग को चुनावी बदलावों से जोड़ने पर फटकार


    वाशिंगटन। अमेरिका में चुनावी नियमों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। वॉशिंगटन डीसी के अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमीर एच. अली ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर रोक लगा दी, जिसके तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को मिलने वाली आतंकवाद-रोधी (एंटी-टेरर) फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव से जोड़ा गया था। 28 सितंबर को दिए गए 24 पेज के फैसले में अदालत ने कहा कि संघीय एजेंसियों के पास कांग्रेस से मिली ऐसी शर्तें लगाने की वैधानिक अनुमति नहीं थी।

    यह मामला करीब 1.1 अरब डॉलर के Homeland Security Grant Program से जुड़ा है। इस कार्यक्रम के तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को आतंकवादी हमलों और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए फंड दिया जाता है। ट्रंप प्रशासन ने फंडिंग की शर्तों में चुनाव संबंधी कई बदलाव शामिल किए थे। इनमें कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को हाथ से चिह्नित पेपर बैलेट से बदलना, चुनाव परिणामों के मैनुअल ऑडिट और मतदाता सूची में नागरिकता की जांच जैसी शर्तें शामिल थीं।

    20 फीसदी फंड रोकने की थी शर्त

    FEMA की ओर से जारी फंडिंग नियमों में कहा गया था कि तय चुनावी शर्तों को पूरा नहीं करने वाले राज्यों और शहरी क्षेत्रों की करीब 20 फीसदी ग्रांट राशि रोकी जा सकती है। शर्तों में मतदाताओं और चुनावकर्मियों की नागरिकता की जांच के लिए संघीय डेटाबेस के इस्तेमाल तथा मतदान प्रणाली और चुनावी ऑडिट में बदलाव जैसी आवश्यकताएं शामिल थीं।

    प्रशासन का तर्क था कि इन बदलावों का उद्देश्य चुनावों को विदेशी हस्तक्षेप और साइबर हमलों से सुरक्षित करना है। हालांकि, स्थानीय सरकारों ने अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि FEMA को आतंकवाद-रोधी फंड के बदले चुनावी व्यवस्था में बदलाव कराने का अधिकार नहीं है।

    जज बोले- FEMA को चुनावी नियम तय करने का अधिकार नहीं

    जज अमीर अली ने अपने फैसले में कहा कि कांग्रेस ने FEMA को आतंकवाद और अन्य सुरक्षा खतरों से महत्वपूर्ण ढांचे की रक्षा के लिए अनुदान देने का अधिकार दिया है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल चुनाव प्रशासन के नियम तय करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, चुनावी बदलावों की शर्तें उस ग्रांट के मूल उद्देश्य से पर्याप्त रूप से जुड़ी हुई नहीं थीं।

    अदालत ने इस तरह FEMA को एंटी-टेरर ग्रांट के जरिए राज्यों और स्थानीय निकायों पर चुनावी बदलाव लागू कराने से रोक दिया।

    ओहायो, टेनेसी और टेक्सास के स्थानीय निकायों ने की थी चुनौती

    यह मुकदमा ओहायो के कोलंबस, टेनेसी के नैशविल और डेविडसन काउंटी तथा टेक्सास की हैरिस, एल पासो, ट्रैविस और डलास काउंटी समेत स्थानीय सरकारों की ओर से दायर किया गया था। उनका आरोप था कि DHS और FEMA ने कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों से आगे जाकर चुनाव प्रशासन को प्रभावित करने की कोशिश की।

    अदालत का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों को लेकर संघीय सरकार और राज्यों के बीच कई कानूनी विवाद चल रहे हैं। इस मामले में अदालत ने फिलहाल यह स्पष्ट कर दिया है कि एंटी-टेररिज्म फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव की शर्त से जोड़ने के लिए FEMA को कांग्रेस की ओर से पर्याप्त वैधानिक अधिकार नहीं मिला था।

  • Russia-Ukraine के बीच भीषण हवाई हमलों में 10 लोगों की मौत… ट्रंप ने पुतिन से की समझौते की अपील

    Russia-Ukraine के बीच भीषण हवाई हमलों में 10 लोगों की मौत… ट्रंप ने पुतिन से की समझौते की अपील


    कीव।
    रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच हवाई हमले तेज हो गए हैं। शनिवार को यूक्रेन में रूसी हमलों में चार लोगों की मौत हुई, जबकि रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र (Krasnodar Krai) में यूक्रेनी ड्रोन हमले (Ukrainian drone attacks) में तीन लोगों की जान गई। रूसी कब्जे वाले यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र में भी यूक्रेनी हमलों में तीन लोगों की मौत की सूचना है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) के साथ समझौता करने की अपील की।


    यूक्रेन में रूसी हमलों से चार लोगों की मौत

    यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने शनिवार को कीव, जापोरिज्जिया, सूमी और खारकीव समेत कई इलाकों को निशाना बनाया। जापोरिज्जिया में एक घर के मलबे में दबने से दो महिलाओं की मौत हो गई। सूमी शहर में भी रूसी हमले में दो लोगों की जान गई। कीव क्षेत्र के बोरीस्पिल जिले में रूसी ड्रोन हमले के बाद एक गोदाम में आग लग गई, जिसमें दो लोग घायल हुए। राजधानी कीव के कई इलाकों में भी ड्रोन हमलों की सूचना है। अधिकारियों के अनुसार, यहां चार लोग घायल हुए और आवासीय तथा कार्यालय इमारतों को नुकसान पहुंचा।


    रूस का दावा- डेटा सेंटर को हुआ नुकसान

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि कीव पर किए गए हमले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़े एक डेटा सेंटर को नुकसान पहुंचा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस रोजाना हमलों को और तेज कर रहा है। उन्होंने कीव और जापोरिज्जिया के रिहायशी इलाकों समेत कई स्थानों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस के खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया की अपील की।


    ट्रंप ने जेलेंस्की से पुतिन के साथ समझौते की अपील की

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जेलेंस्की के साथ हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि यूक्रेनी राष्ट्रपति पुतिन के साथ समझौता करें। ट्रंप ने कहा, “मैं चाहता हूं कि वह समझौता करें। मैं चाहता हूं कि वह पुतिन के साथ समझौता करें और मैं चाहता हूं कि पुतिन भी उनके साथ समझौता करें।” उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष निकट भविष्य में, संभवतः सर्दियों के भारी होने से पहले, किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं।

  • संबंध सुधारने में जुटे अमेरिका-चीन….. इस साल दो बार होगी ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात

    संबंध सुधारने में जुटे अमेरिका-चीन….. इस साल दो बार होगी ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका और चीन (America and China) के बीच संबंध सुधरने लगे हैं। अमेरिका (America) के अपने राजकीय दौरे के समापन से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (President Xi Jinping) ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) से दो बार और मुलाकात होगी। शी ने ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया को नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में आने का निमंत्रण दिया। चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि इसके एक महीने बाद फ्लोरिडा में ‘ट्रंप नेशनल डोरल मियामी गोल्फ क्लब’ में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी फिर से मुलाकात हो सकती है।

    शी ने कहा, ”मैं राष्ट्रपति और प्रथम महिला को चीन आने के लिए आमंत्रित करता हूं।” इस पर ट्रंप ने कहा, ”हम आएंगे और हम काफी बातचीत करेंगे।” चीनी राष्ट्रपति के दौरे के समापन से पहले ट्रंप उन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार भी ले जाएंगे। ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली साम्यवादी देश के नेता को अमेरिकी लोकतंत्र के महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज दिखाएंगे।

    शी के अमेरिका के राष्ट्रीय अभिलेखागार का दौरा करने के बाद वाशिंगटन से रवाना होने की संभावना है। यहां स्वतंत्रता की घोषणा, संविधान और अधिकार विधेयक जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। शी की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह शी को ”उस गौरवशाली इतिहास के कुछ सबसे महत्वपूर्ण खजाने” दिखाना चाहते हैं।

    ट्रंप दंपति ने गुरुवार रात प्रौद्योगिकी उद्योग के दिग्गजों की मौजूदगी में अपने मेहमानों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया था। दोनों नेताओं ने बृहस्पतिवार को बंद कमरे में 90 मिनट तक बैठक भी की। बैठक के बाद चीन सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व, यूक्रेन और कोरियाई प्रायद्वीप जैसे मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने इस चर्चा के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है।

    वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को किसी भी प्रकार की सीधे-सीधे या छिपकर की जाने वाले मदद उन्हें बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है, चाहे यह मदद खुफिया जानकारी से लेकर, सैन्य उपकरण और तकनीकी पुर्जे मुहैया कराने जैसी हो। चीन में अमेरिका के राजदूत डेविड पेड्यू ने अमेरिका में हुई दोनों शीर्ष नेताओं की बैठक के संदर्भ में यह जानकारी दी।

    पेड्यू ने बताया कि गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर अमेरिका का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन पिछले कुछ हफ्तों से लगातार इस विषय को उठाता रहा है और इसे ताइवान से जुड़ी अमेरिकी प्रतिबद्धताओं से अलग रखकर देखा जा रहा है।

  • व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से झटका, तीन संस्थानों की प्रेस एक्सेस बहाल करने का आदेश

    व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से झटका, तीन संस्थानों की प्रेस एक्सेस बहाल करने का आदेश


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को व्हाइट हाउस से तीन मीडिया संस्थानों को प्रतिबंधित करने के मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी फेडरल जज टिमोथी केली ने तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी प्रेस एक्सेस तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। यह मामला प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़े विवाद के बीच अदालत पहुंचा था।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को तीन प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस परिसर से प्रतिबंधित करने का फैसला किया था। इसके बाद संबंधित संस्थानों ने अदालत का रुख किया और अपने पत्रकारों की पहुंच बहाल करने की मांग की। उनका कहना था कि प्रतिबंध अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट में दी गई प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन करता है।

    मामले की सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने इस बात पर ध्यान दिया कि प्रतिबंध लागू करने से पहले संबंधित पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि किसी व्यक्ति से संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार वापस लेने से पहले उसे नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    जज केली ने ट्रंप प्रशासन को तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश ऐसे समय आया है जब प्रतिबंध के खिलाफ दायर मुकदमे में मीडिया संस्थानों ने तत्काल राहत की मांग की थी।

    ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में इस फैसले का बचाव करते हुए कहा गया कि व्हाइट हाउस में पत्रकारों की पहुंच कोई पूर्ण संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि प्रशासन की ओर से दी जाने वाली सुविधा है। सरकार ने सुरक्षा से जुड़े कारणों का भी हवाला दिया और तर्क दिया कि राष्ट्रपति के पास संवेदनशील सरकारी परिसर में प्रवेश को नियंत्रित करने का अधिकार है।

    न्याय विभाग ने यह भी दलील दी कि संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, लेकिन इससे पत्रकारों को बिना अनुमति व्हाइट हाउस या अन्य संवेदनशील सरकारी परिसरों में असीमित प्रवेश का अधिकार नहीं मिल जाता।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पुराने अपीलीय फैसलों का भी संदर्भ लिया। इन फैसलों के आधार पर कहा गया कि व्हाइट हाउस की प्रेस एक्सेस वापस लेने से पहले संबंधित पत्रकारों या मीडिया संस्थानों को उचित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए।

    इस विवाद के बीच अमेरिका के कई बड़े टीवी नेटवर्क ने भी व्हाइट हाउस की साझा लाइव वीडियो कवरेज रोक दी थी। यह कदम तीन मीडिया संस्थानों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में उठाया गया था। इससे राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा मीडिया कवरेज प्रभावित हुई।

    अदालत के आदेश के बाद अब तीनों प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है और प्रतिबंध को लेकर प्रशासन तथा मीडिया संस्थानों के बीच विवाद अदालत में आगे भी जारी रहेगा।

  • ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात के बीच अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पर राहत, व्यापारिक युद्धविराम जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया

    ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात के बीच अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पर राहत, व्यापारिक युद्धविराम जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव के बीच दोनों देशों ने फिलहाल राहत की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। दोनों देशों ने मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम की अवधि को करीब दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। पहले यह समझौता 10 नवंबर 2026 को समाप्त होना था, लेकिन अब इसकी अवधि बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 कर दी गई है।

    इस फैसले से अमेरिका और चीन को टैरिफ सहित कई व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापारिक विवाद में टैरिफ, आयात-निर्यात और अन्य आर्थिक विषयों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में युद्धविराम की अवधि बढ़ने से बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का अवसर मिलेगा।

    यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान सामने आया है। शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ अमेरिका पहुंचे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ने उनका स्वागत किया। इसके बाद ट्रंप और जिनपिंग के बीच मुलाकात भी हुई।

    दोनों नेताओं की बैठक को अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बातचीत के दौरान टैरिफ समेत कई आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम करने और आगे की बातचीत का रास्ता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने का सीधा मतलब यह है कि दोनों देशों के पास अब अपने विवादित मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले की तुलना में अधिक समय रहेगा। इससे तत्काल व्यापारिक टकराव बढ़ने की स्थिति को टालने में मदद मिल सकती है।

    अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद जरूरी है।

    अमेरिका और चीन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार नीति से जुड़े फैसलों पर दुनियाभर की नजर रहती है।

    युद्धविराम की अवधि बढ़ने के बावजूद दोनों देशों के बीच सभी व्यापारिक मतभेद समाप्त नहीं हुए हैं। टैरिफ और अन्य आर्थिक मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अस्थायी राहत को आगे किसी व्यापक व्यापारिक समझौते की दिशा में ले जा सकें।

    अब 10 जनवरी 2027 तक अमेरिका और चीन के पास व्यापारिक विवादों पर बातचीत आगे बढ़ाने का अतिरिक्त समय है। ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात के बीच हुआ यह फैसला दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक संवाद को बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

  • डीजल निर्यात पर रोक के पक्ष में ट्रंप, अमेरिका में रिकॉर्ड कीमतों के बीच फैसला; वैश्विक बाजार पर भी असर की आशंका

    डीजल निर्यात पर रोक के पक्ष में ट्रंप, अमेरिका में रिकॉर्ड कीमतों के बीच फैसला; वैश्विक बाजार पर भी असर की आशंका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डीजल के निर्यात पर रोक लगाने के विचार का समर्थन किया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका बड़ी मात्रा में डीजल का उत्पादन करता है और यदि इसका अधिक हिस्सा घरेलू बाजार में उपलब्ध कराया जाए तो ईंधन की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी कहा है कि प्रशासन पूर्ण या आंशिक निर्यात प्रतिबंध की व्यवहार्यता का आकलन कर रहा है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    अमेरिका में 6.52 डॉलर प्रति गैलन पहुंचा डीजल

    अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार 22 सितंबर को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत 6.5276 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई। यह अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। एक साल पहले यही कीमत 3.6880 डॉलर प्रति गैलन थी। यानी एक साल में डीजल की कीमत में करीब 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    डीजल की कीमत बढ़ने का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं है। अमेरिका में ट्रक, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और माल ढुलाई में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए ईंधन महंगा होने पर परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    ट्रंप ने क्या कहा?

    संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पहले भी अमेरिकी डीजल को विदेश भेजने के बजाय घरेलू बाजार में रखने की बात कही है। उनके मुताबिक इससे अमेरिकी बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है और डीजल के साथ पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ असर पड़ सकता है। बेसेंट ने कहा कि प्रशासन यह देख रहा है कि पूर्ण या आंशिक निर्यात रोक व्यावहारिक होगी या नहीं और इससे अमेरिकी रिफाइनरियों के संचालन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    यह मुद्दा नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले भी महत्वपूर्ण हो गया है। कई रिपब्लिकन सांसद और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निर्यात प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं।

    रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संकट का असर

    वैश्विक डीजल बाजार पहले से ही आपूर्ति दबाव का सामना कर रहा है। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों, मध्य-पूर्व में संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। रॉयटर्स के अनुसार रूस, मध्य-पूर्व और प्रमुख एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से डीजल निर्यात जुलाई में पिछले साल की तुलना में करीब 13 लाख बैरल प्रतिदिन कम रहा।

    ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ बैठक से पहले रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों से रूस को नुकसान हुआ है, लेकिन इसका असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

    अमेरिका निर्यात रोकता है तो वैश्विक बाजार पर क्या असर?

    अमेरिका दुनिया के प्रमुख रिफाइंड ईंधन आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। अमेरिकी डीजल का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में जाता है। ऐसे में यदि अमेरिका निर्यात पर पूर्ण या बड़ी आंशिक रोक लगाता है तो घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी ईंधन की कमी पैदा हो सकती है।

    इसका असर खास तौर पर यूरोप पर पड़ सकता है, जहां रूस से ऊर्जा आयात पर प्रतिबंधों के बाद अमेरिकी ईंधन की भूमिका बढ़ी है। वैश्विक बाजार पहले से ही तंग है, इसलिए अमेरिकी निर्यात घटने पर अन्य क्षेत्रों में डीजल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।

    हालांकि निर्यात रोकने से अमेरिकी घरेलू कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह भी निश्चित नहीं है। रिफाइनरियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच कीमतों के अंतर के आधार पर उत्पादन और बिक्री के फैसले लेती हैं। लंबे समय में निर्यात पर रोक का असर उत्पादन, रिफाइनिंग मार्जिन और आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    पेट्रोल की कीमतों पर असर कितना?

    ट्रंप ने संकेत दिया है कि डीजल को घरेलू बाजार में रखने से पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि डीजल और पेट्रोल के बाजार अलग-अलग हैं और दोनों की कीमतों पर कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग क्षमता, क्षेत्रीय मांग तथा वैश्विक आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए केवल डीजल निर्यात रोकने से पेट्रोल की कीमत कितनी घटेगी, इसका अभी कोई निश्चित अनुमान नहीं है।

    भारत पर भी पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर

    अमेरिकी डीजल निर्यात पर रोक का भारत पर सीधा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इससे वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। यदि अमेरिकी निर्यात में बड़ी कमी आती है और अन्य उत्पादक इसकी भरपाई नहीं कर पाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय डीजल और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत पर वास्तविक प्रभाव कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर, घरेलू ईंधन मूल्य नीति और दुनिया भर में उपलब्ध वैकल्पिक आपूर्ति पर निर्भर करेगा।

    फिलहाल अंतिम फैसला नहीं

    ट्रंप के समर्थन के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने डीजल निर्यात पर रोक लगाने का अंतिम फैसला नहीं किया है। सरकार पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध के संभावित लाभ और अमेरिकी रिफाइनिंग उद्योग तथा वैश्विक ईंधन बाजार पर उसके प्रभाव का आकलन कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन का फैसला अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक डीजल बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा।

  • ट्रंप नाकाबंदी हटाएंगे तो 7 दिन में खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट… ईरान ने दिए संकेत

    ट्रंप नाकाबंदी हटाएंगे तो 7 दिन में खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट… ईरान ने दिए संकेत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बातचीत की कोशिशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है तो ईरान 7 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है. ईरान ने यह प्रस्ताव अमेरिका तक मध्यस्थों के जरिए पहले ही पहुंचाया है।

    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत में होर्मुज को लेकर तेहरान की शर्तें रखीं. ईरानी पक्ष के मुताबिक, इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां जारी करना और सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना शामिल है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल को न्यूयॉर्क में बातचीत आगे बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है।


    गल्फ देशों ने भी बढ़ाई बातचीत की कोशिश

    होर्मुज को लेकर कूटनीतिक कोशिशें सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं हैं. कतर ने कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ मिलकर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है. सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की ने भी बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया है।

    अराघची ने न्यूयॉर्क में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गल्फ देशों के नेताओं के साथ बैठक की. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सभी पक्षों की बात सुन रहा है और ईरान के साथ समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सकती है।


    बातचीत के बीच जारी है सैन्य दबाव

    हालांकि बातचीत की कोशिशों के साथ दोनों तरफ से सख्त बयान भी जारी हैं. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान ईरान को लेकर दबाव बढ़ाने की अपील की और बाद में तेहरान से जल्द फैसला लेने को कहा।

    ईरान की तरफ से भी होर्मुज को लेकर साफ संकेत दिए गए हैं कि यह उसके लिए बातचीत में एक अहम मुद्दा है. ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने कहा कि बातचीत अब होर्मुज से जुड़ गई है और ईरान स्ट्रेट को लेकर पीछे नहीं हटेगा।

    यानी न्यूयॉर्क में चल रही कूटनीतिक हलचल के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब ईरान-अमेरिका बातचीत का सबसे अहम मुद्दा बनता दिख रहा है. ईरान ने इसे खोलने के लिए 7 दिन का संकेत दिया है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तें माननी होंगी।

  • मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    नई दिल्ली ।अमेरिका में व्हाइट हाउस और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच बढ़े विवाद के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 घंटे चलने वाली अपनी टीवी सेवा शुरू कर दी है। इस सेवा का नाम ‘ट्रंप टीवी’ रखा गया है। इसके जरिए राष्ट्रपति के भाषण, प्रशासन की घोषणाएं और सरकार से जुड़े प्रमुख फैसलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।

    यह कदम उस समय सामने आया है, जब कई प्रमुख टीवी चैनलों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी अनुमति को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच गया। संबंधित मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि केवल खबरों की सामग्री पसंद नहीं आने के आधार पर पत्रकारों की पहुंच रोकना संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है।

    विवाद की शुरुआत पत्रकारों के प्रवेश बैज निष्क्रिय किए जाने के बाद हुई। इसके बाद संबंधित संस्थानों के संवाददाताओं को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित सूचना और प्रक्रिया के उनके पत्रकारों की पहुंच सीमित की।

    मीडिया संस्थानों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति या किसी सरकारी अधिकारी को केवल खबरों की सामग्री से असहमति के कारण प्रेस के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े हितों को खत्म करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती दी है।

    इसी बीच प्रमुख टीवी नेटवर्कों के बीच राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा कवरेज को लेकर भी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को सीएनएन को उस प्रेस पूल व्यवस्था से हटा दिया गया, जिसके तहत प्रमुख समाचार नेटवर्क व्हाइट हाउस की महत्वपूर्ण गतिविधियों की कवरेज आपस में साझा करते हैं।

    विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने अपना 24 घंटे चलने वाला टीवी प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका उद्देश्य प्रशासन की महत्वपूर्ण सूचनाओं, घोषणाओं और फैसलों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाना बताया गया है। इस सेवा पर राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण और प्रशासन से संबंधित वीडियो सामग्री दिखाई जाएगी।

    व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि इस माध्यम से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां और घोषणाएं लोगों तक पहुंचेंगी, जो पहले उनकी नजर से छूट जाती थीं। सेवा को प्रशासन की गतिविधियों और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की जानकारी सीधे उपलब्ध कराने वाले मंच के रूप में पेश किया गया है।

    दूसरी ओर, प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों का कहना है कि सरकारी परिसर में पत्रकारों की पहुंच को केवल खबरों की सामग्री के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है और किसी भी प्रतिबंध के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि व्हाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि उनके अनुसार गलत खबरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने ऐसी खबरों को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि इसे रोका जाना चाहिए।

    व्हाइट हाउस का तर्क है कि संविधान में मीडिया के अधिकारों का सम्मान किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस, ब्रीफिंग रूम या राष्ट्रपति के प्रेस पूल तक स्वतः पहुंच का अधिकार मिल जाता है।

    अब इस पूरे विवाद में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ मीडिया संस्थान पत्रकारों की पहुंच और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन अपने फैसले को उचित बता रहा है। इसी बीच ‘ट्रंप टीवी’ की शुरुआत ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच चल रहे विवाद को एक नया रूप दे दिया है।

  • ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार को अपना वीकेंड प्रवास बीच में छोड़कर व्हाइट हाउस लौट आए। वह मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड से रविवार को वापस आने वाले थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही वॉशिंगटन पहुंच गए। ट्रंप की अचानक वापसी के पीछे प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।

    ट्रंप की वापसी ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान की ओर से कहा गया है कि इन शर्तों को मध्यस्थ कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जा चुका है।

    ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। ईरान की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि उसकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो वह निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

    ईरान की ओर से रखी गई शर्तों और चेतावनी के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर अमेरिका ने भी सतर्कता बढ़ाई है। अमेरिकी राजनयिक मिशनों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को बदलती परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    सऊदी अरब और हूती समूह के बीच जारी सैन्य गतिविधियों ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है। हूती समूह ईरान समर्थित है और सऊदी अरब के खिलाफ पहले भी सैन्य कार्रवाई कर चुका है। इनमें नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाली घटनाएं भी शामिल रही हैं।

    अमेरिकी सुरक्षा चेतावनी में कहा गया है कि ईरान और उसके समर्थक समूह मध्य पूर्व के बाहर भी अमेरिकी हितों या अमेरिका और उसके नागरिकों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं। इस वजह से अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी चेतावनी में यात्रा को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। क्षेत्र से आने-जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डों और एयरलाइंस के संचालन से संबंधित जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। सुरक्षा स्थिति में बदलाव होने पर उड़ानों और यात्रा कार्यक्रमों में भी असर पड़ सकता है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का कैंप डेविड से निर्धारित समय से एक दिन पहले व्हाइट हाउस लौटना महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उनकी वापसी का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ईरान की ओर से एक तरफ बातचीत के लिए शर्तें सामने रखी गई हैं, जबकि दूसरी तरफ मांगें पूरी नहीं होने पर निर्णायक युद्ध की चेतावनी दी गई है। ऐसे में अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया और ईरान के रुख पर क्षेत्रीय हालात की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

    फिलहाल पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां, अमेरिकी सुरक्षा अलर्ट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा और यात्रा संबंधी सावधानियां बढ़ा दी गई हैं।

  • ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे ऊर्जा खरीदार देशों पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

    ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे ऊर्जा खरीदार देशों पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े एचआर 5334 विधेयक पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया। इस कानून में रूस पर प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों को लागू करने तथा उनका दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे जारी रखने की व्यवस्था भी की गई है।

    ट्रंप के इस फैसले पर भारत में कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि किसी धौंस जमाने वाले का मुकाबला करने का एक ही तरीका है और वह है मजबूती से उसका प्रतिरोध करना।

    नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसमें रूस के ऊर्जा कारोबार और उससे जुड़े प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था है। रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।

    कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध नीति का प्रभाव बढ़ सकता है। हालांकि कानून पर हस्ताक्षर होने के साथ भारत पर तत्काल कोई नया टैरिफ लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है।

    विधेयक में रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और रक्षा कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के प्रावधान भी शामिल हैं। रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने वाले देशों और संस्थाओं पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य रूस के आर्थिक और रणनीतिक नेटवर्क पर प्रतिबंधों का प्रभाव मजबूत करना है।

    कानून में रूस के ऊर्जा निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर भी ध्यान दिया गया है। इसके जरिए प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई का रास्ता तैयार किया गया है। रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ और अन्य प्रतिबंधों का इस्तेमाल किए जाने की व्यवस्था की गई है।

    ईरान को लेकर भी कानून में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। इसमें ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इस तरह रूस के साथ ईरान को लेकर भी अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था को कानूनी आधार मिला है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इस विधेयक को 16 सितंबर 2026 को मंजूरी दी थी। इसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया। 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया।

    भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस के साथ उसका ऊर्जा कारोबार लंबे समय से जारी है। रूस भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भारत के आर्थिक और ऊर्जा हितों से जुड़ता है।

    जयराम रमेश की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा भारत की राजनीतिक बहस में भी सामने आया है। नए कानून के तहत भारत पर तत्काल कोई नया शुल्क लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि आगे अमेरिकी प्रशासन इस कानून के प्रावधानों का किस तरह इस्तेमाल करता है, इससे भारत समेत रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर संभावित प्रभाव स्पष्ट होगा।