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  • गंगा दशहरा पर नीलगंगा पहुंचे CM मोहन यादव संतों संग किया पूजन, सिंहस्थ को लेकर बड़ा बयान

    गंगा दशहरा पर नीलगंगा पहुंचे CM मोहन यादव संतों संग किया पूजन, सिंहस्थ को लेकर बड़ा बयान


    उज्जैन । धर्मनगरी उज्जैन में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का विशेष संगम देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नीलगंगा आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने विधि विधान से मां गंगा की प्रतिमा का पूजन और अभिषेक किया। परंपरा का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री ने नीलगंगा सरोवर में गुप्त गंगा के दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

    नीलगंगा घाट पर इस अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। संतों की उपस्थिति में हुए इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्ति रस में डुबो दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ 2028 का आयोजन ऐतिहासिक होगा, जिसमें पूरी दुनिया सनातन संस्कृति की भव्यता और उज्जैन की दिव्यता का साक्षी बनेगी। उन्होंने कहा कि शिप्रा के घाटों पर परंपरा और संतों की भावना के अनुरूप भव्य आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।

    इस धार्मिक आयोजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज, अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज, शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज और नारायण गिरि महाराज सहित कई प्रमुख संत उपस्थित रहे। संतों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या मौजूद रही, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

    नीलगंगा आश्रम स्थित गंगा सरोवर के विकास और सौंदर्यीकरण कार्य भी इस समय तेजी से जारी हैं। करीब 4 करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से यहां घाटों का पुनर्निर्माण, परिक्रमा पथ और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। संतों ने इन विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और इसे धार्मिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    इस मौके पर हरि गिरि महाराज ने कहा कि उज्जैन में विकास कार्य उम्मीदों से कहीं आगे बढ़कर हो रहे हैं। उन्होंने शिप्रा नदी पर बन रहे 29 किलोमीटर लंबे घाटों का उल्लेख करते हुए इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।

    कार्यक्रम के अंत में जूना अखाड़ा के वरिष्ठ संतों ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने भी सभी संतों से आशीर्वाद लिया और प्रदेश के विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए संकल्प दोहराया।

  • पर्यावरण संदेश के साथ प्रशासनिक दौरा: उज्जैन महापौर ने कार छोड़ अपनाया ई-रिक्शा

    पर्यावरण संदेश के साथ प्रशासनिक दौरा: उज्जैन महापौर ने कार छोड़ अपनाया ई-रिक्शा


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग की अपील का असर अब उज्जैन में दिखाई देने लगा है। शहर के महापौर मुकेश टटवाल ने एक नई पहल करते हुए हर शुक्रवार को कार का उपयोग न करने और उसकी जगह ई-रिक्शा, पैदल या इलेक्ट्रिक वाहनों से सफर करने का निर्णय लिया है।

    शुक्रवार को महापौर अटल पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने ई-रिक्शा से वार्डों का निरीक्षण किया और आम नागरिकों से मुलाकात कर ईंधन बचत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल-डीजल का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है।

    महापौर ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इसे लंबे समय तक जारी रखने की योजना है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।

    उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों से भी सप्ताह में कम से कम एक दिन ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक वाहन या पैदल चलने की अपील की। उनका कहना है कि यदि सभी अधिकारी मिलकर यह प्रयास करें तो हर सप्ताह सैकड़ों लीटर पेट्रोल की बचत संभव है।

    इस पहल को शहर में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • सिंहस्थ तैयारियों पर नजर: मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया निरीक्षण और लिया धार्मिक आशीर्वाद

    सिंहस्थ तैयारियों पर नजर: मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया निरीक्षण और लिया धार्मिक आशीर्वाद


    नई दिल्ली । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को जय गुरुदेव आश्रम में पहुंचकर गुरुदेव उमाकांत महाराज से आशीर्वाद लिया और उनके प्रवचनों का श्रवण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संतों और आश्रमों से मिलने वाली शिक्षा समाज को सही दिशा देती है और मानवता के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 महापर्व के लिए स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई धार्मिक स्थलों से जुड़े विकास कार्य जनभागीदारी से आगे बढ़ रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

    आश्रम में गुरुदेव उमाकांत महाराज ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारियों के बावजूद वे निरंतर आध्यात्मिक जुड़ाव बनाए हुए हैं और जनसेवा के कार्यों में सक्रिय हैं।

    आश्रम से निकलने के बाद मुख्यमंत्री रामघाट पहुंचे, जहां उन्होंने सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए चल रहे निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने घाट क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा की।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार उज्जैन को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद फिर चर्चा में, प्रवचन रोकने का लगाया आरोप

    हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद फिर चर्चा में, प्रवचन रोकने का लगाया आरोप


    नई दिल्ली । उज्जैन के लक्ष्मीपुरा में आयोजित सात दिवसीय देवी प्रवचन कार्यक्रम का समापन इस बार विवादों में घिर गया। मॉडल से संन्यास लेकर साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि ने मंच से आरोप लगाया कि कुछ संत उनके प्रवचन को रोकने और उसका समय घटाने की कोशिश कर रहे थे।

    हर्षानंद ने कहा कि शुरुआती दिनों में कार्यक्रम सामान्य रहा, लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी, उनके प्रवचन के समय को सीमित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि विरोध के बावजूद श्रद्धालुओं की उपस्थिति लगातार बढ़ती रही और पंडाल तक बढ़ाना पड़ा।

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से युवतियों को ‘लव जिहाद’ से सतर्क रहने की शपथ दिलाई। इसके साथ ही युवतियों को तलवारबाजी, घुड़सवारी और शस्त्र प्रशिक्षण सीखने की सलाह भी दी गई। करणी सेना की ओर से कार्यक्रम में युवतियों को तलवारें भी वितरित की गईं।

    आयोजन के समापन पर करीब 11 युवतियों को प्रतीकात्मक रूप से तलवारें सौंपी गईं, जबकि लक्ष्य 101 तलवारें बांटने का था।

    हर्षानंद ने यह भी कहा कि वे मां भगवती की कृपा से इस कार्यक्रम में डटी रहीं और कोई भी उन्हें रोक नहीं सका।

    करीब एक माह पहले उन्होंने उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में संन्यास लेकर नया नाम “स्वामी हर्षानंद गिरि” अपनाया था। संन्यास से पहले वे मॉडलिंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में सक्रिय थीं और अब धार्मिक प्रवचनों के जरिए चर्चा में रहती हैं।

  • उज्जैन में प्रदीप पांडे चिंटू ने किए महाकाल दर्शन, बोले-जीवन का सबसे दिव्य पल

    उज्जैन में प्रदीप पांडे चिंटू ने किए महाकाल दर्शन, बोले-जीवन का सबसे दिव्य पल

    नई दिल्ली । आस्था और भक्ति के पवित्र संगम के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एक बार फिर सुर्खियों में रहा, जहां भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता Pradeep Pandey Chintuने बाबा महाकाल के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव साझा किया। अपनी फिल्मों में रोमांस, एक्शन और भावनात्मक किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले चिंटू इस बार पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए।

    उज्जैन पहुंचने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना की और बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाया। इस दौरान उन्होंने भस्म आरती में भी भाग लिया, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत दिव्य और दुर्लभ माना जाता है। सुबह के समय होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

    दर्शन के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए अभिनेता ने कहा कि यह उनकी पहली महाकाल यात्रा थी और यह पल उनके जीवन में हमेशा याद रहने वाला है। उन्होंने बताया कि भस्म आरती का दृश्य इतना अद्भुत और आध्यात्मिक था कि उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। पूरे वातावरण में गूंजते मंत्रोच्चार, भक्तों की आस्था और दिव्यता ने उनके मन को गहराई तक प्रभावित किया।

    उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में मौजूद ऊर्जा और शांति ने उन्हें एक अलग ही अनुभूति कराई, जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। उनके अनुसार, यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं बल्कि आत्मिक शांति का भी माध्यम बनी।

    महाकाल मंदिर की भस्म आरती को लेकर यह मान्यता है कि यह आरती भगवान शिव को समर्पित सबसे विशेष अनुष्ठानों में से एक है। इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालु इसे जीवन का सौभाग्य मानते हैं। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों भक्त देश और विदेश से पहुंचते हैं।

    इस पवित्र स्थल पर केवल आम श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि फिल्म और मनोरंजन जगत की कई प्रसिद्ध हस्तियां भी समय-समय पर दर्शन के लिए आती रहती हैं। हाल के वर्षों में कई कलाकार यहां आकर महाकाल के दर्शन कर चुके हैं और अपने अनुभव साझा कर चुके हैं, जिससे इस मंदिर की लोकप्रियता और भी बढ़ी है।

    अगर अभिनेता के करियर की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2009 में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने लगातार कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया और भोजपुरी सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी फिल्मों ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई है और वह आज इंडस्ट्री के प्रमुख कलाकारों में गिने जाते हैं।

    उनकी हालिया आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह दिखाया कि व्यस्त फिल्मी जीवन के बीच भी कलाकार आस्था और संस्कृति से जुड़े रहते हैं। उज्जैन की यह यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक पड़ाव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आत्मिक अनुभव बनकर सामने आई।

  • उज्जैन में बड़ा विवाद: यादव समाज से परिवार निष्कासित, सामाजिक गतिविधियों पर लगी रोक

    उज्जैन में बड़ा विवाद: यादव समाज से परिवार निष्कासित, सामाजिक गतिविधियों पर लगी रोक


    नई दिल्ली । उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम बंगरेड में यह पूरा विवाद एक शादी समारोह से शुरू हुआ। डॉक्टर विष्णु प्रसाद यादव के यहां आयोजित कार्यक्रम में समाज की ओर से चंदा और धर्मशाला किराए को लेकर असहमति सामने आई। समाज द्वारा ₹5100 की बजाय ₹11,000 की राशि तय किए जाने पर वॉट्सऐप ग्रुप में चर्चा शुरू हुई। इसी दौरान नरेंद्र यादव ने सुझाव दिया कि यदि किसी से गलती हुई है तो उसे स्वीकार कर राशि वापस कर देनी चाहिए।

     टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद, फोन पर गाली-गलौज का आरोप
    पीड़ित नरेंद्र यादव का आरोप है कि उनकी इस टिप्पणी के बाद कुछ लोगों ने नाराजगी जताई। इसके बाद समाज के एक पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें फोन कर अपशब्द कहे और समाज छोड़ने तक की बात कही। नरेंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने यह पूरी बात समाज के ग्रुप में भी साझा की, लेकिन किसी सदस्य ने उनका समर्थन नहीं किया।

     सामाजिक बहिष्कार और निष्कासन का संदेश
    आरोप है कि बिना किसी निष्पक्ष बैठक और बिना उनका पक्ष सुने ही समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में उनके परिवार को निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद उनके परिवार को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोक दिया गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

     प्रशासन तक पहुंचा मामला, पहले भी की गई शिकायत
    नरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने पहले भी एसपी कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
    बाद में समाज की बैठक जरूर हुई, लेकिन उसमें उन्हें शामिल नहीं किया गया। बैठक में केवल चंदे की राशि वापस कर मामले को समाप्त मान लिया गया।

    न्याय की मांग और गंभीर आरोप
    पीड़ित का आरोप है कि धर्मशाला किराए और चंदे में कथित अनियमितताओं का विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

     धर्म परिवर्तन की चेतावनी से बढ़ा मामला
    नरेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और समाज में उनका सम्मान वापस नहीं किया गया, तो वे परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने और अदालत जाने पर विचार करेंगे।

     प्रशासन की प्रतिक्रिया
    जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत को जांच में ले लिया है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    यह मामला सामाजिक संगठनों में आंतरिक विवाद, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते तनाव और सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। प्रशासन की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • “मैं भी उसके पास जाऊंगा…” उज्जैन में पत्नी के गम में पति ने तोड़ा दम, इलाके में सनसनी

    “मैं भी उसके पास जाऊंगा…” उज्जैन में पत्नी के गम में पति ने तोड़ा दम, इलाके में सनसनी


    नई दिल्ली। देवास-उज्जैन क्षेत्र के ग्राम काट बड़ौदा में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां पत्नी की मौत के गहरे सदमे में डूबे एक युवक ने अपनी जान दे दी। 25 वर्षीय सुभाष भाटी ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से मानसिक रूप से बेहद परेशान चल रहा था और बार-बार कहता था “वह चली गई… अब मैं भी उसके पास जाऊंगा।”

    प्रेम विवाह के बाद खुशहाल जीवन पर टूटा दुखों का पहाड़
    सुभाष भाटी ने करीब पांच साल पहले कोमल से प्रेम विवाह किया था। दोनों की कहानी सामान्य रिश्तों की तरह शुरू हुई, लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने सबकुछ बदल दिया। शादी के एक साल बाद सड़क दुर्घटना में कोमल की मौत हो गई, जिसने सुभाष को पूरी तरह तोड़ दिया।
    परिजनों के अनुसार, इस घटना के बाद वह मानसिक अवसाद में चला गया और सामान्य जीवन जीना उसके लिए मुश्किल हो गया।

    लगातार आत्मघाती विचार और पहले भी कोशिशें
    परिजनों ने बताया कि सुभाष कई बार आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। उसने एक-दो बार ट्रेन के सामने कूदने का प्रयास भी किया, लेकिन परिवार समय रहते उसे बचा लेता था। इसके बाद परिवार उसे अकेला नहीं छोड़ता था, लेकिन अंदरूनी दर्द लगातार बढ़ता गया।

    बेटी भी नहीं रोक सकी टूटे हुए मन को
    सुभाष और कोमल की चार साल की एक बेटी है। परिवार उसे समझाने की कोशिश करता रहा कि वह बेटी के लिए जीए, लेकिन सुभाष बार-बार यही कहता था कि बेटी को परिवार संभाल लेगा और उसे अपनी पत्नी के पास जाना है।

    अंतिम कदम और मौत
    रविवार को सुभाष घर से बाहर गया और जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे पहले देवास जिला अस्पताल ले जाया गया और फिर उज्जैन रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    एक खुशहाल शुरुआत का दुखद अंत
    परिवार के अनुसार, सुभाष और कोमल की मुलाकात एक सामाजिक कार्यक्रम में हुई थी, जहां से उनकी दोस्ती शुरू हुई और बाद में शादी में बदल गई। 2020 में दोनों ने विवाह किया और 2022 में बेटी का जन्म हुआ, लेकिन कुछ महीनों बाद ही एक सड़क हादसे ने कोमल की जान ले ली।

    यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सहारे की गंभीर जरूरत को भी उजागर करती है। गहरे सदमे और अकेलेपन में फंसे व्यक्ति को समय पर मदद और काउंसलिंग न मिले तो परिणाम बेहद दुखद हो सकते हैं।:

  • MP: उज्जैन के नागदा में सीढ़ियां चढ़कर बैंक के अंदर पहुंचे नंदी, देखते ही भाग खड़े हुए ग्राहक

    MP: उज्जैन के नागदा में सीढ़ियां चढ़कर बैंक के अंदर पहुंचे नंदी, देखते ही भाग खड़े हुए ग्राहक


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) जिले के नागदा (Nagda) में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। महिदपुर रोड स्थित श्रीराम फाइनेंस बैंक (Shriram Finance Bank) में अचानक एक नंदी और गाय घुस गए। बैंक के अंदर मवेशियों को देख स्टाफ और ग्राहकों में अफरा-तफरी मच गई।

    दरअसल, मध्य प्रदेश में आवारा मवेशियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार आवारा मवेशियों ने बैंक के अंदर बवाल काटा! जानकारी के मुताबिक, नागदा शहर के महिदपुर रोड स्थित पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में श्रीराम फाइनेंस बैंक में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक नंदी और गाय अचानक बैंक के अंदर घुस गए। बैंक में मौजूद ग्राहक और कर्मचारी घबराकर बाहर निकल आए। कुछ देर तक बैंक का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। इस घटना को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसका वीडियो भी सामने आया है।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि बैंक के अंदर नंदी और गाय इधर-उधर भागते हुए नजर आ रही है, वहीं कुछ लोग उसे बाहर निकालने का प्रयास करते हुए दिखाई दे रहे है। हालांकि कुछ ही देर बाद नंदी गाय बैंक के बाहर निकल गए। लेकिन इस घटना से एक बार फिर प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है, आवारा मवेशी अक्सर इस इलाके में नजर आते हैं और कई बार दुकानों और संस्थानों के अंदर भी घुस जाते हैं। ऐसे में हर बार स्थानीय गौ-सेवा संगठनों की मदद लेनी पड़ती है।

  • MP: उज्जैन में फिर गरजा प्रशासन का बुलडोजर… महाकाल मंदिर मार्ग में बाधा बनी 5 इमारतें जमींदोज

    MP: उज्जैन में फिर गरजा प्रशासन का बुलडोजर… महाकाल मंदिर मार्ग में बाधा बनी 5 इमारतें जमींदोज


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) के पास स्थित बेगम बाग क्षेत्र में शनिवार को एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस दौरान 5 बहुमंजिला इमारतों को जमींदोज कर दिया गया। ये सभी इमारतें महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर बनी थीं और इनकी लीज खत्म हो चुकी थी, साथ ही इनमें अवैध रूप से व्यवसायिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था।

    कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए प्रशासन ने बताया कि जिस भूमि पर ये सभी इमारतें बनी हुई थीं, वो जमीन उज्जैन विकास प्राधिकरण की है, और जिसे 30 वर्ष की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था, लेकिन यहां रहने वाले लोगों ने नियम विरुद्ध जाकर इसका व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया था। जिसके चलते लीज समाप्ति के बाद उसका नवीनीकरण नहीं किया गया। वहीं जब उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस बारे में लोगों को नोटिस जारी किए तो संबंधित लोग न्यायालय पहुंच गए। हालांकि लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ अब यह कार्रवाई की गई।


    कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने नहीं किया विरोध

    अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई में स्थानीय लोगों द्वारा किसी प्रकार का कोई विरोध देखने को नही मिला। इससे पहले जब यहां इसी प्रकार से बनी 58 इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही थी, तब जरूर लोगों ने विरोध किया था, हालांकि शनिवार को हुई कार्रवाई शांतिपूवक चलती रही।


    संवेदनशील इलाका होने की वजह से थी कड़ी सुरक्षा

    प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जिस जगह पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है, वह महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग है और मुस्लिम बाहुल्य इलाका होने के कारण अति संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए इस रास्ते से वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह बन्द कर दिया गया और केवल श्रद्धालुओं को पैदल जाने की अनुमति दी गई।


    यह है पूरा मामला, UDA की है जमीन

    उज्जैन विकास प्राधिकरण ने सन् 1985 में बेगम बाग क्षेत्र में 30 साल की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए भूखंड दिए थे। लेकिन भूखंड धारकों ने इनका उपयोग आवासीय तौर पर करने की बजाय पूरी तरह व्यावसायिक तौर पर करना शुरू कर दिया। जो कि पूरी तरह नियम विरुद्ध था। इसके बाद वर्ष 2014-15 में 30 वर्षीय लीज भी खत्म हो गई और प्राधिकरण द्वारा उसका नवीनीकरण नहीं किया गया।


    आवासीय जमीन का हो रहा था व्यवसायिक उपयोग

    इसके बाद भूखंड के दुरुपयोग को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लगातार नोटिस दिए। फिर आगे चलकर वर्ष 2023-24 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने भूखंड धारकों की लीज भी समाप्त कर दी। जिसको लेकर भूखंड धारक न्यायालय पहुंच गए और जहां से उन्हें स्टे मिल गया। इसके बाद अलग-अलग न्यायालय में इन भूखंडों का मामला विचाराधीन रहा। न्यायालय का स्टे हटते ही तोड़ने की कार्यवाही शुरू कर दी गई।


    सालभर के दौरान 58 इमारतों को गिराया जा चुका

    अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक साल के दौरान यहां छह चरणों में इस तरह अवैध रूप से बनी 58 बिल्डिंगों को गिराया जा चुका है। खास बात यह है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित इन भूखंडों में से 45 भूखंड ऐसे थे, जिनमें प्रत्येक का साइज करीब 2400 स्क्वेयर फीट था, लेकिन भूखंड धारकों ने इनके अलग-अलग टुकड़े कर करीब 90 बिल्डिंगें बना ली थीं। और इन 90 इमारतों में से 63 बिल्डिंग्स को जमीदोंज किया जा चुका है, शेष 27 बिल्डिंगों को भी जल्द ही कानूनी प्रक्रिया के तहत तोड़ा जाएगा।


    दो भूखंडों पर बना दी गई, छह इमारतें

    प्रशासन ने बताया कि शनिवार को जिन 5 बिल्डिंगों पर कार्रवाई की जा रही है, वो कुल दो भूखंड थे, जिन पर छह इमारतें बना दी गई थीं और न्यायालय ने इनका स्टे खारिज कर दिया था। इसके बाद विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस दिया गया था, जिनकी समय सीमा समाप्त हो गई है। भवन मालिकों से बातचीत की गई और उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। इसके बाद उन्होंने स्वतः अपनी बिल्डिंग खाली करना शुरू कर दिया। इसी वजह से यह कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है।

    उधर इस बारे में जानकारी देते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप कुमार सोनी ने बताया कि माननीय न्यायालय से स्टे खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। भूखंड धारक को भूखंड आवासीय तौर पर दिए गए थे, जिसका उन्होंने व्यावसायिक उपयोग किया। इसके अलावा लीज समाप्त होने के बाद लीज नवीनीकरण भी नहीं हो सका, इसलिए यह कार्रवाई की गई। जिस जगह यह कार्यवाही चल रही है यहां आगामी सिहंस्थ 2028 में ब्रिज निर्माण प्रस्तावित है।

  • MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया

    MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में बड़नगर तहसील (Badnagar tehsil) के ग्राम बंगरेड (Bangred village) में आयोजित एक तिलक समारोह ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक संदेश दिया है. कई बार देखने को मिलता है कि दहेज के लालच में शादी टूट जाती है. लेकिन बंगरेड में एक परिवार ने दहेज न लेकर समाज के सामने मिसाल पेश की है. परिवार ने करीब 50 लाख रुपए का दहेज लौटा दिया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।


    दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से किया इनकार

    क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजावत के पुत्र आदर्श दीप राजावत का विवाह इंदौर जिले के देपालपुर तहसील अंतर्गत तामलपुर निवासी किसान महेन्द्र सिंह पंवार की पुत्री बिंदिया कुमारी से आगामी नवंबर 2026 में तय हुआ है. जिसकी सगाई (तिलक) के दौरान दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से मना कर दिया।


    50 लाख का दहेज वधु पक्ष को किया वापस

    रविवार को बड़नगर तहसील के बंगरेड स्थित रिसोर्ट में तिलक समारोह कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम के दौरान जब वधु पक्ष द्वारा पारंपरिक रूप से 25 लाख रुपए नकद और 15 तोला सोना (कुल करीब 50 लाख रुपए) देने की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी दूल्हे आदर्श दीप राजावत और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया.


    लोगों ने बताया दहेज प्रथा के खिलाफ प्रेरणादायक पहल

    दूल्हे पक्ष ने बताया कि वे किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे और केवल प्रतीकात्मक रूप में एक सोने की अंगूठी ही लेंगे. इसके बाद पूरे सम्मान के साथ नकद राशि और सोने के आभूषण वधु पक्ष को लौटा दिए गए. लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी और प्रेरणादायक पहल बताया।

    जितेंद्र सिंह राजावत ने कहा, “समाज में दहेज जैसी कुरीतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन यदि लोग आगे आकर पहल करें, तो बदलाव संभव है. कई गरीब परिवार बेटियों की शादी में दहेज के कारण परेशान होते हैं. इसलिए इस पहल से समाज में सकारात्मक सुधार की उम्मीद है।

    दूल्हे को चाहिए सुंदर दुल्हन और ससुर को बहु बिटिया
    उज्जैन में आधा करोड़ का दहेज लेने से मना करने वाले ससुर जीतेंद्र राजावत ने कहा कि “उन्हे एक बहु और उसके साथ आने वाले धन दौलत की जरुरत नहीं है. ईश्वर ने उन्हे बहुत कुछ दिया है. उन्हे तो घर में एक बिटिया चाहिए तो पुत्रवधु के रुप में मिल रही है.” तिलक समारोह के बाद रिंग सेरेमनी में वर पक्ष ने बहु पक्ष की ओर से सिर्फ एक गोल्ड रिंग स्वीकारा. यह शादी नवंबर महीने में होनी है और इससे पहले ससुर की ओर से सिर्फ मजबूत रिश्ते की डिमांड की गई है जिससे दो परिवार एक साथ जुड़ जाएं।