आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में मार्च में खुदरा महंगाई दर 3.63 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.11 प्रतिशत रही। इसी अवधि में खाद्य महंगाई दर 3.87 प्रतिशत दर्ज की गई, जो फरवरी के 3.47 प्रतिशत से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 3.96 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.71 प्रतिशत रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला है।
आंकड़ों के अनुसार कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्याज की कीमतों में भारी कमी देखने को मिली है, जबकि आलू, लहसुन, अरहर दाल, मटर और चना जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम भी घटे हैं। इन वस्तुओं में सालाना आधार पर नकारात्मक महंगाई दर्ज की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
वहीं दूसरी ओर कुछ वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि भी देखने को मिली है। सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं से जुड़े आभूषणों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा टमाटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों के दाम भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रहे, जिससे कुछ क्षेत्रों में महंगाई का दबाव बढ़ा है।
राज्यों के स्तर पर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान में खुदरा महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है, जिससे इन राज्यों में कीमतों का दबाव अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देता है।
सरकारी व्यवस्था के अनुसार देशभर में हजारों ग्रामीण और शहरी बाजारों से नियमित रूप से कीमतों का डेटा एकत्र किया जाता है, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी शामिल होते हैं। इस विस्तृत प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार किया जाता है, जिससे महंगाई की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाता है।
