नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज


नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की पहली सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्साह के बीच शुरू हुई। 1 जनवरी की सुबह होते ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में तड़के चार बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह नौ बजे तक लगभग 80 हजार श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके थे। प्रशासन के अनुसार दिनभर यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।महाकाल मंदिर में नए साल के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन की सुविधा सुनिश्चित की गई। इस दौरान महिला क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम की सदस्य भी मंदिर पहुंचीं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

उज्जैन के अलावा नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया और मंगला आरती के बाद दर्शन खोले गए। इसके साथ ही ओरछा के रामराजा मंदिर, मैहर के शारदा देवी मंदिर, नलखेड़ा के मां बगलामुखी धाम और देवास के प्रमुख मंदिरों में भी हजारों भक्त नए साल की पहली सुबह दर्शन के लिए पहुंचे।सीहोर जिले के प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में ठंड और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। दमोह जिले के बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। गुना के हनुमान टेकरी मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहां प्रशासन ने अनुमान लगाया कि एक लाख से अधिक भक्त पहुंचे।

धार्मिक गतिविधियों के साथ ही प्रदेश के शहरों और पर्यटन स्थलों पर नए साल का जश्न भी देर रात तक चलता रहा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में लोग सड़कों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे। मांडू और पचमढ़ी जैसे पर्यटन केंद्रों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और अलाव के माध्यम से नए साल का स्वागत किया गया।जबलपुर के भेड़ाघाट धुआंधार में साल के पहले सूर्योदय को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचे। उगते सूर्य के साथ लोगों ने नए साल की शुरुआत को यादगार बनाया। इस प्रकार, मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव दोनों के लिए विशेष रही।