आईसीएमआर के अध्ययन में खुलासा, आदतों में समय रहते सुधार से टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा

नई दिल्ली । भारत सहित वैश्विक स्तर पर कम उम्र के युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियों और अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामलों में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है। बीस वर्ष से कम आयु के युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर, धमनियों में ब्लॉकेज और दिल के दौरों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि यह समस्या केवल आनुवंशिक कारणों तक सीमित नहीं रह गई है। चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार, दैनिक दिनचर्या में शामिल गलत आदतें और अस्वस्थ जीवनशैली इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का सबसे मुख्य कारण बनकर सामने आई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्टों में भी यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि गैर-संक्रामक रोगों में हृदय रोग दुनिया भर में होने वाली सर्वाधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए हालिया शोध में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। इस अध्ययन के अनुसार, देश के लगभग नब्बे प्रतिशत वयस्कों के रक्त नमूनों में कोलेस्ट्रॉल या वसा का कम से कम एक स्तर सामान्य मापदंडों से असंतुलित पाया गया है। शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना धमनियों में रुकावट पैदा करता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई बार ये स्वास्थ्य समस्याएं बिना किसी स्पष्ट शारीरिक लक्षण के लंबे समय तक शरीर के भीतर विकसित होती रहती हैं, जिससे स्थिति अचानक गंभीर रूप ले लेती है और व्यक्ति को संभलने का अवसर नहीं मिलता।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई आदतें दिल की सेहत को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रही हैं। लगातार कई घंटों तक एक ही स्थान पर बैठकर काम करना, शारीरिक व्यायाम की कमी, जंक फूड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन धमनियों को सख्त और संकीर्ण बना देता है। इसके अलावा, धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से रक्त में ऑक्सीजन का स्तर घटता है तथा रक्त धमनियों की अंदरूनी दीवारों को क्षति पहुंचती है। अत्यधिक मानसिक तनाव, अनिद्रा और खानपान में अत्यधिक नमक व शर्करा की मात्रा भी उच्च रक्तचाप को बढ़ावा देकर हृदय के कार्यकलापों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही दैनिक आदतों में सकारात्मक परिवर्तन किए जाएं, तो हृदय रोगों, स्ट्रोक और अकाल मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन, नियमित रूप से योग या व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन जैसी स्वास्थवर्धक आदतों को अपनाना अनिवार्य है। साथ ही, पारिवारिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए नियमित अंतराल पर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की निवारक जांच कराना आवश्यक है। समय पर की गई यह सतर्कता बेजुबान दिल को सुरक्षित रखने और गंभीर चिकित्सा आपात्काल से बचाने में अत्यंत कारगर सिद्ध हो सकती है।