इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट


इंदौर । इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित 103.42 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 32 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में दाखिल की है। इस मामले में ठेकेदारों के अलावा नगर निगम, लोकल फंड ऑडिट और रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के कई अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

ईडी ने यह शिकायत 24 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में प्रस्तुत की। अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित कर दी है।

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी बिल, नकली वर्क ऑर्डर, फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन की निकासी की। जांच में यह भी सामने आया कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर नगर निगम से लगभग 103.42 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया, जिसे बाद में विभिन्न माध्यमों से इस्तेमाल किया गया। ईडी इस पूरे लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानते हुए इसकी वित्तीय परतों की भी जांच कर रही है।

चार्जशीट में शामिल दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सरकारी धन की निकासी के लिए व्यवस्थित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच की गई और उन्हें आरोपी बनाया गया।

अब विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों की कानूनी समीक्षा होगी। मामले को इंदौर नगर निगम से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।