जी-20 मंच पर भारत की मजबूत आर्थिक कूटनीति: अमेरिका के साथ ग्रोथ एजेंडे पर सहमति, कई देशों ने बढ़ाई आर्थिक साझेदारी में रुचि


नई दिल्ली । जी-20 की बैठक में भारत ने वैश्विक आर्थिक विकास और वित्तीय संतुलन को लेकर अपना स्पष्ट और मजबूत रुख पेश किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत अमेरिकी अध्यक्षता के तहत जी-20 में आर्थिक विकास वैश्विक असंतुलन को दूर करने और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर अमेरिका के साथ पूरी तरह सहमत है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ हुई सकारात्मक और रचनात्मक द्विपक्षीय बैठक के बाद सीतारमण ने कहा कि नई दिल्ली और वाशिंगटन वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अध्यक्षता ने विकास को प्राथमिकता दी है और वैश्विक आर्थिक असंतुलन को गंभीर चुनौती के रूप में सामने रखा है। साथ ही वित्तीय साक्षरता को भी विशेष महत्व दिया गया है और भारत इन सभी विषयों पर खुली और निष्पक्ष चर्चा का समर्थन करता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास जी-20 के वित्तीय ट्रैक का केंद्रीय विषय है और दुनिया की बदलती आर्थिक परिस्थितियों में वैश्विक असंतुलन को दूर करना भी बेहद जरूरी हो गया है। भारत चाहता है कि जी-20 के सदस्य देश उन सभी चुनौतियों पर गंभीर और व्यापक चर्चा करें जो अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। सीतारमण ने अमेरिकी अध्यक्षता द्वारा इन मुद्दों को प्राथमिकता देने की सराहना करते हुए कहा कि भारत एशविले में चल रही चर्चाओं में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर मजबूत आर्थिक सहयोग और बेहतर समन्वय के बिना आने वाली चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा।

जी-20 बैठक के दौरान सीतारमण ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर अलग से बातचीत भी की। उन्होंने इस बैठक को बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बताया। हालांकि बैठक के विस्तृत मुद्दों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई लेकिन उनके बयान से यह साफ संकेत मिला कि आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूद असंतुलन को कम करने के विषय पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापक सहमति बनी है। यह सहमति ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब दुनिया कई आर्थिक और भू राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है।

वित्त मंत्री ने जी-20 बैठक के दौरान पोलैंड कतर दक्षिण कोरिया और रूस के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि सभी देशों के प्रतिनिधियों के पास भारत की आर्थिक स्थिति और विकास से जुड़े तथ्य मौजूद थे और वे भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। कुछ देशों के साथ आगे आर्थिक और वित्तीय संवाद की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। दक्षिण कोरिया के साथ इस साल के अंत में विशेष संवाद होगा जबकि कतर के साथ भी आर्थिक सहयोग को लेकर आगे बातचीत की जाएगी।

भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था ने भी जी-20 मंच पर देश की स्थिति को मजबूती दी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि वित्तीय और पेशेवर सेवा क्षेत्र में 12.1 प्रतिशत का विस्तार दर्ज किया गया। सीतारमण ने इन आंकड़ों को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियां सामने आने पर सरकार भारत को बेहतर और लाभकारी स्थिति में बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाती रहेगी।

वित्त मंत्री की विदेश यात्रा की शुरुआत कनाडा से हुई जहां उन्होंने वहां के वित्त मंत्री के साथ बातचीत की। इसके बाद वह निवेश और वित्तीय एजेंसियों से चर्चा के लिए शिकागो पहुंचीं और फिर जी-20 बैठक में भाग लेने के लिए एशविले गईं। यहां कार्यक्रम पूरे होने के बाद वह न्यूयॉर्क में उन अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से मुलाकात करेंगी जो भारतीय बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। जी-20 मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी और कई देशों के साथ बढ़ते आर्थिक संवाद से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।