होर्मुज की जंग में अब दक्षिण कोरिया की एंट्री, सैन्य संसाधन तैनात करने की तैयारी


नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। हालिया हमलों के बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत भी अब पटरी से उतरती नजर आ रही है। इस बीच दक्षिण कोरिया होर्मुज को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

दक्षिण कोरिया होर्मुज में ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ यानी जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में सहयोग के लिए सैन्य संसाधन तैनात करने पर विचार कर रहा है। दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन संसाधनों को इस साल के अंत से पहले भेजने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट्स में सरकारी और सैन्य सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

संसद से मंजूरी लेने की तैयारी
दक्षिण कोरिया के कई मीडिया संस्थानों के अनुसार, सरकार सैन्य संसाधनों की संभावित तैनाती के लिए संसद की मंजूरी लेने की प्रक्रिया तैयार कर रही है। कैबिनेट की समीक्षा के बाद इसी महीने संसद में सहमति प्रस्ताव पेश करने की योजना है।

सरकार के सामने कई विकल्प हैं। इनमें समुद्री गश्ती विमान भेजना, जहाजों को लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराना और समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने तथा उन्हें हटाने वाली यूनिट तैनात करना शामिल है। इसके अलावा सियोल अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई देशों के साथ अपने संभावित योगदान के आकार और स्वरूप को लेकर भी बातचीत कर रहा है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा- अभी फैसला नहीं
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ब्लू हाउस ने कहा है कि सियोल होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में योगदान देने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा कर रहा है। हालांकि, कार्यालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को तथ्यों से अलग बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार ने सैन्य तैनाती का अंतिम फैसला ले लिया है।

ट्रंप के बयान के बाद बदले समीकरण
दक्षिण कोरिया का यह कदम अमेरिका के साथ उसके संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि उन्होंने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कुछ हद तक इसलिए कम किया, क्योंकि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया था।

अब होर्मुज में संभावित सैन्य योगदान को अमेरिका के साथ रिश्तों में आई तल्खी कम करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम के तौर पर देखा जा रहा है।