UPI यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नए MDR ढांचे से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली । UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए किसी तरह का नया शुल्क लागू नहीं होगा। नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR ढांचे को लेकर फोनपे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर निगम ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नए राजस्व मॉडल का उद्देश्य भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।

समीर निगम के मुताबिक, UPI ग्राहकों से इस्तेमाल के लिए पहले भी कोई शुल्क नहीं लिया गया है और आगे भी उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P और व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M दोनों तरह के UPI भुगतान ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेंगे।

नए MDR ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि संबंधित व्यापारी करेगा। इसके अलावा एक लाख रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी MDR व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।

समीर निगम ने बताया कि बड़े दुकानदारों के मामले में भी 2,000 रुपये से कम राशि वाले करीब 96 प्रतिशत लेनदेन किसी शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की बड़ी संख्या में होने वाली छोटी राशि की UPI खरीदारी पर ग्राहकों को किसी अतिरिक्त भुगतान का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि MDR का भुगतान करने वाले व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे। उनके अनुसार, शुल्क का ढांचा व्यापारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़े संस्थानों के बीच रहेगा, जबकि ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे।

समीर निगम ने डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में होने वाले खर्च का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित रखने के लिए उद्योग हर साल करीब 10,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपये खर्च करता है। यह खर्च केवल तकनीकी ढांचे तक सीमित नहीं है। KYC, साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन, धोखाधड़ी नियंत्रण, मर्चेंट चार्जबैक और पूंजीगत निवेश जैसी व्यवस्थाओं पर भी लगातार खर्च होता है।

उनके अनुसार, नए MDR मॉडल से मिलने वाला राजस्व उन बैंकों और कंपनियों के निवेश को समर्थन देने में मदद करेगा, जो UPI इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। इससे डिजिटल भुगतान से जुड़ी सेवाओं के संचालन और आगे के विकास के लिए आर्थिक आधार मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

समीर निगम ने भारत में UPI के बढ़ते इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, वर्ष 2020 में UPI के करीब 20 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 50 से 55 करोड़ तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लगातार विस्तार और निवेश की जरूरत है।

उन्होंने नए राजस्व मॉडल को फिनटेक क्षेत्र की निजी कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, इससे कंपनियों को मार्केटिंग, नवाचार तथा अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक आगे बढ़ाने के लिए व्यवसायों को उचित आय अर्जित करने का अवसर मिलना जरूरी है।

इस तरह नए MDR ढांचे में ग्राहकों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रखने पर जोर दिया गया है, जबकि निर्धारित श्रेणी के मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पूरे इकोसिस्टम के संचालन और निवेश के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल तैयार करना बताया गया है।