भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के स्तंभ रहे ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन किया है। बुधवार को भोपाल में जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लाला जी के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और उनके महान बलिदान को याद करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय एक ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा और स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, “श्रद्धेय लाला लाजपत राय जी का बलिदान और उनके द्वारा दिया गया नेतृत्व भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने गुलामी की बेड़ियों में जकड़े लाखों भारतीयों के भीतर आजादी की अलख जगाई और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।
स्वतंत्रता संग्राम के लाल को सलाम
लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध ‘लाल-बाल-पाल’ लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल की तिकड़ी के प्रमुख सदस्य थे। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों का भी मार्गदर्शक रहा है।
सांयकाल की लाठी और ब्रिटिश साम्राज्य का पतन डॉ. यादव ने उन ऐतिहासिक क्षणों को भी याद किया जब साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला जी ने अंग्रेजों की लाठियां खाते हुए कहा था कि मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की अंतिम कील साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके इन शब्दों ने भारतीय जनमानस में वह ऊर्जा भरी जिसने अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
बलिदान के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज का आत्मनिर्भर भारत उन्हीं महान बलिदानियों के सपनों का भारत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लाला लाजपत राय जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। डॉ. यादव ने ट्वीट और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से भी चित्र साझा कर ‘पंजाब केसरी’ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।