PMC चुनाव में सियासी सरगर्मी,अजित पवार से नहीं बनी बात, शरद पवार गुट फिर MVA में वापसी के लिए तैयार


नई दिल्ली। पुणे महानगरपालिका (PMC) चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शरद पवार गुट की एनसीपी (NCP-SP) ने अजित पवार गुट के साथ गठबंधन की बातचीत टूटने के बाद फिर से महाविकास आघाड़ी (MVA) के साथ वार्ता शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार ने शरद पवार गुट की प्रमुख मांगों को ठुकरा दिया और 68 सीटों का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

पिछले सात दिनों से दोनों एनसीपी गुटों के बीच संभावित गठबंधन पर चर्चा चल रही थी, लेकिन बातचीत अंततः असफल रही।

अजित पवार ने जोर देकर कहा कि शरद पवार गुट के समर्थित उम्मीदवार केवल ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर ही चुनाव लड़ें। शरद पवार गुट का कहना है कि यदि यह शर्त मान ली जाती तो पुणे शहर में उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाता।

अजित पवार ने 68 सीटों का प्रस्ताव ठुकराया
अजित पवार ने तर्क दिया कि 2017 के PMC चुनाव में एनसीपी एकजुट थी, तब केवल 43 सीटें जीती थीं। इसलिए 68 सीटों की मांग अव्यवहारिक है।

शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता ने कहा, अजित पवार की शर्तों को मान लेना हमारे लिए अस्वीकार्य था, क्योंकि इससे पुणे में हमारे उम्मीदवारों का अस्तित्व ही खत्म हो जाता।

इस इनकार के बाद सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल सहित NCP-SP के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि PMC चुनाव एमवीए के साथ मिलकर लड़ा जाएगा।

नतीजतन, पुणे में तीनों पारंपरिक एमवीए सहयोगी दलकांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी-एसपीके बीच नई वार्ता शुरू हो गई है। हालांकि पिंपरी-चिंचवड़ में दोनों एनसीपी गुटों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना बनी हुई है।

शरद पवार गुट की MVA में वापसी
पहले शरद पवार गुट और अजित पवार के गठबंधन की संभावना ने एमवीए में दरार पैदा कर दी थी जिसके चलते कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) अलग होकर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे। लेकिन अब एनसीपी-एसपी के एमवीए में लौटने से तीनों दलों के बीच समन्वय बैठकें फिर शुरू हो गई हैं।

अजित पवार ने इस बीच शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और पुणे में उनके नेतृत्व वाली शिवसेना नेताओं से संपर्क साधा। सूत्रों के मुताबिक एनसीपी की शिवसेना नेता उदय सामंत के साथ भी बातचीत चल रही है और अजित पवार समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।