मुद्रास्फीति में नरमी और रेपो रेट का गणित आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि देश में मुद्रास्फीति महंगाई दर के आंकड़े अब धीरे-धीरे आरबीआई के संतोषजनक दायरे में आ रहे हैं। इसी अनुकूल स्थिति का लाभ उठाते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है। वर्तमान में जो रेपो रेट लागू है उसमें कटौती के बाद यह घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर आ सकता है। गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। जब बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ता फंड मिलता है तो वे अपनी लेंडिंग दरों में कटौती करते हैं जिसका सीधा फायदा अंतिम उपभोक्ता को सस्ती EMI के रूप में मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह वर्तमान कटौती चक्र की अंतिम कटौती हो सकती है जिसके बाद स्थिरता का दौर शुरू होगा।
सिस्टम में नकदी बढ़ाने का मास्टर प्लान आरबीआई केवल ब्याज दरें घटाने तक सीमित नहीं है बल्कि वह भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक लिक्विडिटी मैनेजमेंट प्लान पर भी काम कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। ओपन मार्केट ऑपरेशंसके माध्यम से होने वाली यह खरीद दो चरणों में 29 जनवरी और 5 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के हाथ में अधिक पैसा देना है ताकि वे आम जनता और उद्योगों को बिना किसी बाधा के कर्ज बांट सकें। इसके अतिरिक्त 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी भी की जाएगी जो विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने और दीर्घकालिक तरलता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।
अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति वित्तीय जानकारों का कहना है कि बजट के ठीक बाद आरबीआई के ये कदम वास्तविक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। ब्याज दरों में कमी से न केवल व्यक्तिगत कर्जदारों को राहत मिलेगी बल्कि कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए भी पूंजी जुटाना सस्ता होगा जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 6 फरवरी को होने वाले औपचारिक ऐलान पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
