नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और फिलहाल युद्ध के खतरे को पूरी तरह टाला नहीं जा सका है। बातचीत की कोशिशों के बीच रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना रुख फिर स्पष्ट कर दिया। ईरान ने कहा कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को किसी भी दबाव के बावजूद नहीं छोड़ेगा और किसी अन्य देश के आदेश में काम नहीं करेगा।
तेहरान में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु नीति किसी से डरकर नहीं बदलेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दर्शकों के सामने कहा कि यूरेनियम संवर्धन उनके लिए गैर-समझौते वाला मुद्दा है।अराघची ने कहा, “हम संवर्धन क्यों करते हैं और इसे छोड़ने से इंकार क्यों करते हैं, भले ही युद्ध का खतरा हो? क्योंकि किसी को भी हम पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है।”
अमेरिका पर भरोसा नहीं
ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को दबाव बनाने की कमजोर रणनीति बताया। अराघची ने कहा, “क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती हमें डराती नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। अराघची ने बताया कि कुछ संकेत अमेरिकी गंभीरता दिखाते हैं, जबकि कई संकेत इसे झूठा साबित करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान के खिलाफ जारी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अमेरिका की गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं।
समझौते के लिए ईरान की शर्तें
अराघची ने कहा कि ईरान सभी संकेतों का मूल्यांकन करेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत समझौते की राह खोल सकती है, लेकिन केवल तभी जब अमेरिकी मांगें वास्तविक और न्यायसंगत हों। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका का दृष्टिकोण सम्मानजनक और आपसी हितों पर आधारित होगा, तभी समझौता संभव है।”
