पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज का बड़ा दावा, विश्व कप जीत के बाद खिलाड़ियों में बढ़ी कप्तानी की होड़ और जिम्मेदारी हुई कमजोर

नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मौजूदा प्रदर्शन और लगातार बदलते हालात को लेकर पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने टीम की मौजूदा स्थिति के पीछे कई कारणों का जिक्र करते हुए 2021 टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मिली ऐतिहासिक जीत को एक अहम मोड़ बताया। यूसुफ के मुताबिक उस मुकाबले के बाद टीम के कुछ खिलाड़ियों में आत्मसंतुष्टि बढ़ी और आगे बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी निरंतरता कमजोर पड़ गई।

2021 के टी20 विश्व कप में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हराया था। यह विश्व कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की पहली जीत थी। मुकाबले में पाकिस्तान ने 152 रन का लक्ष्य बिना कोई विकेट गंवाए हासिल किया था। बाबर आजम ने नाबाद 68 रन और मोहम्मद रिजवान ने 79 रन की पारी खेलकर टीम को शानदार जीत दिलाई थी। उस समय इस सफलता को पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था।

हालांकि, मोहम्मद यूसुफ का मानना है कि इसी जीत के बाद टीम के भीतर अपेक्षाओं और रवैये में बदलाव आने लगा। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को लगा कि उन्होंने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है, जबकि किसी भी टीम के लिए एक बड़ी जीत के बाद भी लगातार सुधार और मेहनत जरूरी होती है। उनके मुताबिक सफलता के बाद जमीन से जुड़े रहना और अपनी कमियों पर काम करते रहना बेहद महत्वपूर्ण है।

यूसुफ ने खिलाड़ियों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी अच्छे प्रदर्शन के बाद खुद को बहुत बड़ा समझने लगे और विरोधी टीम का सम्मान करना कम कर दे, तो इससे समस्याएं पैदा होती हैं। उनके मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसी कई परेशानियां सामने आई हैं, जिनका असर टीम के प्रदर्शन पर दिखाई दिया।

पूर्व क्रिकेटर ने टीम के भीतर कप्तानी को लेकर पैदा हुई प्रतिस्पर्धा को भी नुकसानदायक बताया। उनका दावा है कि 2021 की जीत के बाद टीम में कई लोग कप्तान बनने की कोशिश में लगे रहे। इससे खिलाड़ियों का ध्यान अपने प्रदर्शन और टीम की जरूरतों से हटकर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की तरफ गया।

पाकिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में वनडे विश्व कप, टी20 विश्व कप, एशिया कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंटों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया। लगातार अस्थिरता, कप्तानी में बदलाव और टीम संयोजन से जुड़े फैसलों ने भी पाकिस्तान क्रिकेट की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

यूसुफ ने क्रिकेट बोर्ड की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार बोर्ड ने टीम को संभालने के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए और अलग-अलग कोचों को जिम्मेदारी दी। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि आखिरकार बोर्ड को कुछ कड़े फैसले लेने पड़े और वह मौजूदा फैसलों का समर्थन करते हैं।

उनकी टिप्पणियों से साफ है कि पाकिस्तान क्रिकेट की समस्या को वह केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं मानते। उनके मुताबिक टीम के भीतर अनुशासन, जिम्मेदारी, नेतृत्व और निरंतरता जैसे पहलुओं को मजबूत करना जरूरी है। पाकिस्तान क्रिकेट के लिए आगे की राह आसान नहीं है और टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए प्रदर्शन के साथ-साथ सोच और कार्यशैली में भी सुधार करना होगा।