FATF ने पाकिस्तान पर नहीं की सख्ती, आतंकी फंडिंग के मामलों की जांच अब 2030 तक टली..

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर निगरानी रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पाकिस्तान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया चर्चा में है। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों की ओर से डिजिटल माध्यमों से कथित तौर पर धन जुटाए जाने के आरोपों के बावजूद संस्था ने फिलहाल कोई नई कार्रवाई नहीं की है। इसके बजाय पाकिस्तान से जुड़े मूल्यांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत संबंधित समूह को 31 मार्च 2029 तक अपना मूल्यांकन पूरा कर रिपोर्ट जमा करनी है। इसके बाद वर्ष 2030 में होने वाली पूर्ण बैठक में रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी और आगे के कदमों पर फैसला लिया जा सकता है।

पेरिस में आयोजित चार दिवसीय पूर्ण बैठक के दौरान पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे पर चर्चा हुई। इसमें पाकिस्तान में सक्रिय वैश्विक आतंकी संगठनों की डिजिटल माध्यमों से होने वाली फंडिंग का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, इन आरोपों के बावजूद तत्काल किसी नई कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। मूल्यांकन और समीक्षा की मौजूदा प्रक्रिया को जारी रखने का फैसला किया गया है। इस समयसीमा के कारण पाकिस्तान के खिलाफ किसी संभावित नए कदम पर निर्णय आने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।

पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की ऑनलाइन फंडिंग को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। पिछले वर्ष सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ऑनलाइन माध्यमों से पाकिस्तान में 391 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया था। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल संगठन की गतिविधियों और उसके ठिकानों के पुनर्निर्माण में किया गया।

इसी मामले में दावा किया गया कि जैश-ए-मोहम्मद ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ध्वस्त हुए अपने मुख्यालय का दोबारा निर्माण कराया है। बताया गया कि चंदे और पाकिस्तान सरकार से मिलने वाली कथित मदद के जरिए यह काम पूरा किया गया। हालांकि, इन आरोपों और दावों को लेकर अलग-अलग स्तर पर आधिकारिक पुष्टि तथा स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का विवरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

FATF के प्रमुख गिल्स थॉम्पसन ने पाकिस्तान की निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान के साथ एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के माध्यम से बातचीत और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।

ग्रे लिस्ट से बाहर होने के बाद भी पाकिस्तान को वित्तीय निगरानी से पूरी तरह मुक्त नहीं माना जा सकता। FATF की व्यवस्था के तहत सदस्य देशों और संबंधित समूहों के माध्यम से वित्तीय पारदर्शिता, धन शोधन रोकने और आतंकवादी वित्तपोषण पर नियंत्रण से जुड़े मानकों का आकलन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत पाकिस्तान की स्थिति की समीक्षा की जा रही है।

अब 31 मार्च 2029 तक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर जमा करने की समयसीमा निर्धारित की गई है। इसके बाद 2030 की पूर्ण बैठक में इस रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान से जुड़े मामलों में FATF की अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई का समय मूल्यांकन के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस प्रक्रिया के पूरा होने तक पाकिस्तान को लेकर निगरानी और समीक्षा जारी रहेगी।