Author: bharati

  • इमरान हाशमी के फैंस के लिए बड़ी खबर, ‘आवारापन 2’ के बाद अब ‘जन्नत 3’ की कहानी तैयार करने में जुटे मेकर्स

    इमरान हाशमी के फैंस के लिए बड़ी खबर, ‘आवारापन 2’ के बाद अब ‘जन्नत 3’ की कहानी तैयार करने में जुटे मेकर्स

    नई दिल्ली । इमरान हाशमी के प्रशंसकों के लिए एक और बड़ी खबर सामने आई है। अभिनेता की हालिया फिल्म ‘आवारापन 2’ को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया के बीच उनकी लोकप्रिय फिल्म ‘जन्नत’ के तीसरे पार्ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। निर्माता विशेष भट्ट ने पुष्टि की है कि ‘जन्नत 3’ पर काम शुरू हो चुका है और फिलहाल इसकी स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है।

    ‘आवारापन 2’ 14 अगस्त को रिलीज हुई थी और इसके बाद से फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा बनी हुई है। इसी सफलता के बीच विशेष भट्ट ने बताया कि अब उनका ध्यान ‘जन्नत’ फ्रैंचाइजी की अगली फिल्म पर है। उन्होंने संकेत दिया कि फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट को विकसित करने का काम चल रहा है, हालांकि अभी इसके निर्माण से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    इमरान हाशमी के करियर में ‘जन्नत’ फ्रैंचाइजी का खास स्थान रहा है। साल 2008 में रिलीज हुई पहली ‘जन्नत’ में उन्होंने अर्जुन दीक्षित की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनके साथ सोनल चौहान मुख्य भूमिका में नजर आई थीं। रोमांस, अपराध और क्रिकेट सट्टेबाजी की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म को दर्शकों के बीच अच्छी लोकप्रियता मिली थी।

    इसके बाद साल 2012 में ‘जन्नत 2’ रिलीज हुई थी। इस फिल्म में भी इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में थे। दोनों फिल्मों का निर्देशन कुणाल देशमुख ने किया था। अब तीसरे भाग की चर्चा ने फ्रैंचाइजी के पुराने प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि ‘जन्नत 3’ में इमरान हाशमी की भूमिका और बाकी कलाकारों को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और सबसे ज्यादा ध्यान इसकी कहानी पर दिया जा रहा है। ऐसे में फिल्म की शूटिंग कब शुरू होगी, इसका निर्देशन कौन करेगा और इसमें इमरान के साथ कौन से कलाकार दिखाई देंगे, इन सवालों के जवाब आगे सामने आने की उम्मीद है।

    विशेष भट्ट ने ‘आवारापन 2’ को लेकर भी बताया कि फिल्म को बनाने के दौरान टीम को शुरुआती दौर में चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। डिस्ट्रीब्यूटर्स की ओर से शुरुआत में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई गई, जिसके बाद निर्माताओं ने अपने स्तर पर फिल्म में निवेश किया। फिल्म तैयार होने के बाद इसके प्रति बाजार में दिलचस्पी बढ़ी।

    ‘आवारापन 2’ और ‘जन्नत 3’ दो अलग-अलग फ्रैंचाइजी की फिल्में हैं, लेकिन दोनों के साथ इमरान हाशमी का नाम जुड़ा है। अभिनेता की फिल्मों में रोमांस, एक्शन और सस्पेंस के मेल को दर्शकों ने लंबे समय से पसंद किया है। ऐसे में ‘जन्नत 3’ की घोषणा उनके प्रशंसकों के लिए खास उत्सुकता का विषय बन गई है।

    हालांकि अभी फिल्म की रिलीज डेट, निर्देशक, पूरी स्टारकास्ट और कहानी से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ‘जन्नत 3’ की स्क्रिप्ट पर काम शुरू हो चुका है और ‘आवारापन 2’ की सफलता के बाद इमरान हाशमी से जुड़ा यह नया प्रोजेक्ट चर्चा में आ गया है।

  • रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेहत से जुड़ी चिंता बढ़ी, ऑडिट में दूषित पानी और स्वच्छता व्यवस्था की खामियां उजागर

    रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेहत से जुड़ी चिंता बढ़ी, ऑडिट में दूषित पानी और स्वच्छता व्यवस्था की खामियां उजागर

    नई दिल्ली ।रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने गंभीर कमियां उजागर की हैं। रिपोर्ट में देश के कई गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के मानकों का पर्याप्त पालन नहीं होने की बात सामने आई है। जांच के दौरान कुछ स्टेशनों के वाटर कूलर और नलों के पानी में ई-कोलाई तथा टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए।

    यह ऑडिट वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच देश के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, बैठने की जगह और अन्य सुविधाओं को लेकर नियम और दिशा-निर्देश निर्धारित किए थे, लेकिन कई क्षेत्रीय रेलवे जोन में इनका प्रभावी पालन नहीं हुआ।

    जांच में छह अलग-अलग रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पेयजल की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तक नहीं कराए जाने की बात सामने आई। जिन स्टेशनों के पानी के नमूनों की जांच हुई, उनमें भी कुछ स्थानों पर गुणवत्ता मानकों से जुड़ी गंभीर समस्याएं मिलीं।

    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कल्याण, लोनावाला और भिवंडी रोड जैसे स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए नमूनों में ई-कोलाई की मौजूदगी पाई गई। दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन तथा दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन के पेयजल नमूनों में भी ई-कोलाई पाया गया।

    पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन का पानी भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके अलावा अलग-अलग वर्षों में कई रेलवे जोन के अनेक स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। ऐसे बैक्टीरिया दूषित जल की ओर संकेत करते हैं और इनके कारण संक्रमण तथा पेट से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों के शौचालयों और अन्य सुविधाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। यात्री सुविधाओं से संबंधित आंकड़ों के अनुसार 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। वहीं 403 स्टेशनों पर जरूरत के मुताबिक मूत्रालय और 201 स्टेशनों पर निर्धारित मानकों के अनुसार शौचालय उपलब्ध नहीं पाए गए।

    रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में सभी स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इनमें पेयजल, बैठने की व्यवस्था, शेड, शौचालय, पंखे, फुट ओवर ब्रिज और यात्री सूचना बोर्ड जैसी सुविधाएं शामिल थीं। हालांकि ऑडिट में शामिल 512 स्टेशनों में से 458 पर ये सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं थीं या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थीं।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि न्यू दिल्ली, हावड़ा, सियालदह, मुंबई सेंट्रल और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भी कुछ आवश्यक सुविधाएं पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं थीं या उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं थी। इनमें सीटें, पंखे, वाटर कूलर, डस्टबिन और ट्रेन सूचना डिस्प्ले जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    कैग ने रेलवे प्रशासन को पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था में तत्काल सुधार करने की जरूरत बताई है। साथ ही जल आपूर्ति तंत्र की नियमित निगरानी और पानी की गुणवत्ता की व्यवस्थित जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित पेयजल और निर्धारित मानकों के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।

  • CJI सूर्यकांत के बयान के बाद भी NALSAR विवाद जारी, NLSIU छात्रों ने दीक्षांत समारोह में उनके आमंत्रण पर जताई आपत्ति

    CJI सूर्यकांत के बयान के बाद भी NALSAR विवाद जारी, NLSIU छात्रों ने दीक्षांत समारोह में उनके आमंत्रण पर जताई आपत्ति


    नई दिल्ली । 
    भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बयान और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के विवादित आदेश को वापस लिए जाने के बावजूद NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से जुड़ा विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अब नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी इस मामले में NALSAR के विद्यार्थियों के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने CJI सूर्यकांत और BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को आगामी दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने को लेकर आपत्ति जताई है।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों ने CJI के प्रस्तावित कैंपस दौरे को लेकर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद BCI ने 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। आदेश में राज्य बार काउंसिलों को अगले निर्देश तक इन छात्रों का नामांकन नहीं करने को कहा गया था।

    मामला सामने आने के बाद व्यापक प्रतिक्रिया हुई और कुछ ही समय में BCI ने अपना आदेश वापस ले लिया। इसके बाद 14 अगस्त को CJI सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह उनके और छात्रों के बीच की बातचीत है। उन्होंने छात्रों के विरोध के अधिकार पर भी जोर दिया और BCI के कदम पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी।

    इसके बावजूद NALSAR के छात्रों के समर्थन में अब NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों का बयान सामने आया है। 15 अगस्त को जारी इस बयान पर 2026 बैच के 165 स्नातक छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें BCI की ओर से NALSAR के खिलाफ की गई कार्रवाई की आलोचना की गई है।

    छात्रों का कहना है कि भले ही BCI ने नामांकन रोकने और जांच से संबंधित कार्रवाई समाप्त कर दी हो, लेकिन किसी वैधानिक संस्था द्वारा विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई शुरू किया जाना गंभीर विषय है। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्रों के विरोध के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।

    NLSIU से जुड़े छात्रों और पूर्व छात्रों ने यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है। ऐसे में उनका मानना है कि जिन छात्रों के साथ विवाद हुआ, उनके प्रति कथित तौर पर कठोर रुख अपनाने वाले लोगों को उसी समारोह में डिग्री प्रदान करने के लिए आमंत्रित करना उचित नहीं होगा।

    बयान में BCI से NALSAR के छात्रों और फैकल्टी से बिना शर्त माफी मांगने की मांग भी की गई है। छात्रों ने कहा कि विरोध और अपनी बात रखने के अधिकार को किसी संस्थागत कार्रवाई के डर से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे मामलों का असर केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश के दूसरे छात्रों और नागरिकों तक भी संदेश पहुंचता है।

    NLSIU के छात्रों ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर भी आपत्ति जताई है। साथ ही उन्होंने NALSAR के उस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग का समर्थन किया है, जिसके तहत CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जाना प्रस्तावित है।

    फिलहाल BCI का पूर्व आदेश वापस लिया जा चुका है और CJI भी छात्रों के साथ संवाद के अधिकार की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद छात्रों और पूर्व छात्रों की नई प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि संस्थागत अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने को लेकर विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • रक्षाबंधन पर भोपाल-रीवा यात्रियों को राहत, 25 से 31 अगस्त तक चलेंगी विशेष ट्रेनें और वंदे भारत में बढ़े कोच

    रक्षाबंधन पर भोपाल-रीवा यात्रियों को राहत, 25 से 31 अगस्त तक चलेंगी विशेष ट्रेनें और वंदे भारत में बढ़े कोच

    भोपाल:  रक्षाबंधन के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मध्य प्रदेश में रेलवे ने अतिरिक्त यात्री सुविधाओं की तैयारी की है। भोपाल और रीवा के बीच 25 से 31 अगस्त तक अलग-अलग तारीखों में विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही रीवा और रानी कमलापति के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई गई है।

    रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, त्योहार के दौरान भोपाल-रीवा रेल मार्ग पर अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। गाड़ी संख्या 02155 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 25 अगस्त की रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी।

    इसकी वापसी सेवा गाड़ी संख्या 02156 के रूप में 26 अगस्त को शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रीवा से रवाना होगी। ट्रेन अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। इससे त्योहार के दौरान दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    इसके अलावा गाड़ी संख्या 02189 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 26 और 27 अगस्त को संचालित की जाएगी। यह ट्रेन दोनों तारीखों में रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी। इसकी वापसी सेवा गाड़ी संख्या 02190 के रूप में 27 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर रीवा से चलेगी और रात 9 बजे भोपाल पहुंचेगी।

    रक्षाबंधन के बाद 29 और 30 अगस्त को भी यात्रियों के लिए विशेष रेल सुविधा उपलब्ध रहेगी। गाड़ी संख्या 02154 रीवा से 29 अगस्त को शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। वहीं गाड़ी संख्या 02180 भी 30 अगस्त को रीवा से भोपाल के लिए संचालित होगी।

    इसके बाद गाड़ी संख्या 02179 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 31 अगस्त की रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी। इन विशेष ट्रेनों के संचालन से त्योहार के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    विशेष ट्रेनों का मार्ग विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, मैहर और सतना से होकर रहेगा। इससे केवल भोपाल और रीवा के यात्रियों को ही नहीं, बल्कि मार्ग में आने वाले कई शहरों और कस्बों के यात्रियों को भी अतिरिक्त रेल सुविधा मिल सकेगी।

    इसके अलावा रीवा-रानी कमलापति-रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रियों की सुविधा के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। 7 अगस्त से 24 अक्टूबर 2026 तक इस ट्रेन में 8 की जगह 16 कोच वाली रेक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    कोच की संख्या दोगुनी किए जाने से ट्रेन में उपलब्ध सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे त्योहारी सीजन में आरक्षित टिकट की मांग पूरी करने और यात्रियों को अतिरिक्त सीट उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले ट्रेन के समय और ठहराव की जानकारी की पुष्टि करने की अपील की है। यात्रियों को स्टेशन, रेलवे की हेल्पलाइन 139 और रेल ऐप के माध्यम से ताजा जानकारी लेने की सलाह दी गई है। त्योहार के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों और बढ़ी हुई क्षमता से भोपाल-रीवा मार्ग पर यात्रियों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है।

  • एंथ्रोपिक CEO की पत्नी के एपस्टीन से कारोबारी संपर्क का दावा, ईमेल में निवेश मदद मांगने की जानकारी सामने आई

    एंथ्रोपिक CEO की पत्नी के एपस्टीन से कारोबारी संपर्क का दावा, ईमेल में निवेश मदद मांगने की जानकारी सामने आई


    नई दिल्ली ।
    एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई की पत्नी और उनकी करीबी रणनीतिक सलाहकार केमी क्लार्क का नाम जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आने का दावा किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्लार्क ने अपनी कंपनी में निवेश हासिल करने के उद्देश्य से एपस्टीन से संपर्क किया था। इस संबंध में ईमेल संवाद का हवाला दिया जा रहा है, जिनके सामने आने के बाद दोनों के बीच कारोबारी संपर्क को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    बताया गया है कि यह संपर्क उस समय हुआ जब क्लार्क अपनी कंपनी के लिए निवेश और कारोबारी अवसर तलाश रही थीं। उन्होंने अपनी कंपनी को महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नई तरह की एडल्ट एंटरटेनमेंट कंपनी के रूप में पेश किया था। कथित ईमेल संवाद में कंपनी के लिए आवश्यक धनराशि से संबंधित जानकारी भी एपस्टीन के साथ साझा किए जाने की बात सामने आई है।

    क्लार्क का एपस्टीन से परिचय लेखक और साहित्यिक एजेंट जॉन ब्रॉकमैन के माध्यम से होने की जानकारी दी गई है। मार्च 2011 में ब्रॉकमैन ने क्लार्क और एपस्टीन के बीच मुलाकात कराने की पहल की थी। उस समय तक एपस्टीन का नाम यौन अपराधों से जुड़े मामले में सामने आ चुका था और 2008 में उसे यौन अपराध तथा वेश्यावृत्ति के लिए लोगों को उकसाने से जुड़े मामले में दोषी ठहराया जा चुका था।

    दस्तावेजों से जुड़े विवरण के अनुसार, ब्रॉकमैन ने क्लार्क और उनकी कारोबारी साझेदार मिशेल कैपोसेफालो के साथ एपस्टीन की मुलाकात का सुझाव दिया था। इसके बाद क्लार्क की ओर से जवाब भेजे जाने और शाम को एपस्टीन के साथ डिनर करने की इच्छा जताए जाने का उल्लेख किया गया है।

    अगले दिन हुए कथित ईमेल संवाद में क्लार्क ने अपनी कंपनी के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता की जानकारी एपस्टीन को भेजी। उन्होंने पिछली शाम की मुलाकात का उल्लेख करते हुए उसके लिए धन्यवाद भी दिया था। इसके बाद दोनों के बीच विभिन्न विषयों पर ईमेल के जरिए बातचीत होने की जानकारी सामने आई है।

    केमी क्लार्क का नाम डारियो अमोडेई के पेशेवर जीवन से भी जुड़ा रहा है। जानकारी के अनुसार, जब अमोडेई 2016 में ओपनएआई से जुड़े थे, तब क्लार्क उनकी रणनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर रही थीं। बाद में दोनों ने 2022 में विवाह किया। हालांकि, क्लार्क आधिकारिक तौर पर एंथ्रोपिक की कर्मचारी नहीं हैं।

    इसके बावजूद सार्वजनिक और कारोबारी आयोजनों में वह अमोडेई के साथ नजर आती रही हैं। बड़े निवेशकों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी का उल्लेख किया जाता रहा है। दावोस और अमेरिका के सन वैली में आयोजित होने वाले बड़े कारोबारी आयोजनों में भी उनकी भागीदारी की जानकारी सामने आई है।

    इस वर्ष नई दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान भी क्लार्क अपने पति के साथ भारत आई थीं। एंथ्रोपिक के नेतृत्व और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में अमोडेई की भूमिका के कारण उनके परिवार और पेशेवर नेटवर्क से जुड़े किसी भी पुराने कारोबारी संपर्क पर स्वाभाविक रूप से ध्यान जाता है।

    हालांकि, एपस्टीन से जुड़े किसी व्यक्ति के साथ संपर्क या ईमेल संवाद अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं है। सामने आई जानकारी मुख्य रूप से कथित कारोबारी संपर्क, निवेश की संभावनाओं और ईमेल संवाद से संबंधित है। किसी व्यक्ति पर आपराधिक आरोप तय करने के लिए अलग और पुष्ट प्रमाण आवश्यक होते हैं।

    एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में अलग-अलग लोगों के नाम और संपर्क सामने आने के बाद कई पुराने कारोबारी और सामाजिक संबंधों की दोबारा चर्चा हो रही है। केमी क्लार्क से जुड़ा मामला भी इसी व्यापक संदर्भ में सामने आया है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में मुख्य सवाल यह है कि उस समय प्रस्तावित कारोबारी संपर्क किस स्तर तक आगे बढ़ा और क्या निवेश संबंधी कोई वास्तविक समझौता हुआ था।

  • आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    मध्य प्रदेश: के रीवा जिले में स्वतंत्रता दिवस का दिन एक ओर देशभक्ति के उत्सव और दूसरी ओर एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की अंतिम विदाई का गवाह बना। जवा तहसील के डोरी-भितरी गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का 15 अगस्त 2026 को निधन हो गया। जिस दिन देश आजादी का 80वां पर्व मना रहा था, उसी दिन गांव ने उस सेनानी को अंतिम विदाई दी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए जेल की सजा भुगती थी।

    जवाहर सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1932 के राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें छह महीने के कारावास की सजा हुई थी। इसके साथ ही उन पर 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य चरणों में भी योगदान दिया और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तथा नमक आंदोलन से जुड़े रहे।

    स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल जाने और आर्थिक दंड भुगतने के बावजूद जवाहर सिंह की देश के प्रति प्रतिबद्धता कम नहीं हुई। आजादी के बाद भी उन्होंने सामाजिक जीवन में अपनी जिम्मेदारियों को महत्व दिया और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों और उसके मूल्यों के बारे में बताते रहे।

    उनके परिवार के अनुसार, जवाहर सिंह स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को अपने बच्चों और पोतों तक पहुंचाते रहे। उनका मानना था कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि देश को स्वतंत्रता आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए अनेक लोगों ने संघर्ष, त्याग और कठिनाइयों का सामना किया था।

    स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मिलने वाली सम्मान निधि को लेकर भी जवाहर सिंह की सोच अलग रही। बताया जाता है कि उन्होंने शुरुआती दौर में सम्मान निधि लेने से इनकार कर दिया था। उनका विचार था कि शासन की राशि का उपयोग जनहित और देशहित के कार्यों में किया जाना चाहिए। बाद में उन्होंने इस उम्मीद के साथ सम्मान निधि स्वीकार की कि उनके परिवार को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के रूप में सम्मान और पहचान मिलती रहे।

    जवाहर सिंह के तीन पुत्र कमल नारायण सिंह, कमलाकर सिंह और प्रभाकर सिंह हैं। परिवार ने उनके जीवन से जुड़े स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभवों और मूल्यों को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके निधन के बाद परिवार के साथ क्षेत्र के लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    15 अगस्त को उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया राजकीय सम्मान के साथ पूरी की गई। अंतिम यात्रा में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने पुष्पचक्र और पुष्प अर्पित कर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पुलिस जवानों की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।

    अंतिम संस्कार में सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, राज्यसभा सांसद राजमणि सिंह पटेल, युवराज घनश्याम सिंह बसरेही, संचार निर्माण समिति अध्यक्ष प्रवल पाण्डेय, जवा तहसीलदार राजेश शुक्ला और अतरैला थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। जवाहर सिंह के बड़े पुत्र कमल नारायण सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    जवाहर सिंह के अंतिम संस्कार में हजारों ग्रामीणों के शामिल होने की बात सामने आई। लोगों ने उनकी पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए और अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता दिवस के दिन गांव में तिरंगे और देशभक्ति के वातावरण के बीच शोक का माहौल भी दिखाई दिया।

    जवाहर सिंह का सार्वजनिक जीवन में भी क्षेत्र के कई प्रमुख लोगों से संपर्क रहा। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी उनका संपर्क रहा था। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी और सामाजिक जीवन में सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई।

    जवाहर सिंह की अंतिम विदाई उस पीढ़ी को सम्मान देने का अवसर भी बनी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा संघर्ष में बिताया। 15 अगस्त को जब देश आजादी का उत्सव मना रहा था, उसी दिन रीवा के डोरी-भितरी गांव ने एक स्वतंत्रता सेनानी को अंतिम सलामी देकर उनके योगदान को याद किया।

  • गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश:  के पूर्व मंत्री और रहली विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। इसी दौरान उन्होंने अपने आलोचकों पर भी तीखा तंज कसा।

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि बीजेपी में प्रत्येक कार्यकर्ता का अपना महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने प्रसंग का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पार्टी में किसी कार्यकर्ता की अहमियत किसी पद या बाहरी प्रमाण से तय नहीं होती, बल्कि संगठन के प्रति उसकी भूमिका और योगदान महत्वपूर्ण होता है।

    इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। उनके इस बयान की चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़ा एक स्थानीय विवाद सामने आया था। इसी विवाद को उनके ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति गोपाल भार्गव के गढ़ाकोटा स्थित निवास के बाहर लगे बोर्ड पर एक पर्चा चिपकाता दिखाई दिया था। इस पर्चे में भार्गव को ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ कहकर निशाना बनाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।

    रहली के कार्यक्रम में भार्गव ने इसी तरह की आलोचनाओं का जवाब देते हुए हाथी और कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाथी अपनी चाल से आगे बढ़ता रहता है और उसके पीछे कुत्ते भौंकते रहते हैं। उनके बयान का आशय यह था कि आलोचना के बावजूद व्यक्ति को अपने रास्ते और काम से विचलित नहीं होना चाहिए।

    भार्गव ने अपने संबोधन में चींटियों और गन्ने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक जीवन में आलोचनाएं होती रहती हैं, लेकिन उन्हें अपनी जिम्मेदारी और लक्ष्य से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के समान बताने वाला उनका बयान पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने कहा कि संगठन में कोई सेवक की भूमिका निभाता है तो कोई जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी संभालता है। उनके अनुसार, पार्टी में हर स्तर के कार्यकर्ता का अपना महत्व है।

    गोपाल भार्गव का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह रहली विधानसभा सीट से लगातार नौ बार निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उनके सार्वजनिक बयानों पर राजनीतिक नजर बनी रहती है।

    इस बार भी उनके बयान के दो हिस्से सबसे अधिक चर्चा में हैं। पहला, बीजेपी के हर कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री जैसा बताना और दूसरा, आलोचकों के लिए ‘भौंकने वालों’ वाली टिप्पणी करना। उनके समर्थक इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

    फिलहाल बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, भार्गव ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के महत्व और आलोचनाओं से प्रभावित न होने का संदेश दिया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद अब उनके बयान के कारण व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

  • FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की ओर से भ्रामक दावों, गैर-मानकीकृत उत्पादों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर जारी नोटिसों के बाद कई खाद्य कारोबारियों ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं। नियामक की ओर से रविवार को बताया गया कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित कंपनियों ने अपने उत्पादों और पैकेजिंग में आवश्यक बदलाव शुरू किए हैं।

    खाद्य नियामक के अनुसार, सुधारात्मक कार्रवाई में उत्पादों के लेबल पर किए गए भ्रामक दावों को हटाना, उत्पादों के नाम में बदलाव करना और पैकेजिंग को लागू नियमों के अनुरूप बनाना शामिल है। इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

    कुछ कंपनियों को भ्रामक ट्रेडमार्क के इस्तेमाल को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। इनमें ऑनेस्ट इनोवेशन फॉर यू प्राइवेट लिमिटेड और हेलियोस्टोन स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। नोटिस मिलने के बाद दोनों कंपनियों ने अपने संबंधित उत्पादों के नाम में बदलाव किया।

    राजस्थान एग्रो एंड जनरल इंडस्ट्रीज के मामले में भी भ्रामक ट्रेडमार्क से जुड़ी आपत्ति सामने आई थी। कंपनी ने नियामकीय निर्देशों के अनुरूप उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावों को हटाया। इसके अलावा उत्पादों से संबंधित संचार में पीपीएम शब्द का इस्तेमाल भी बंद कर दिया गया।

    एक अन्य मामले में आयोटा नैनोटेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को गैर-मानकीकृत उत्पाद से संबंधित नियमों के उल्लंघन के लिए चिन्हित किया गया। कंपनी ने संबंधित उत्पाद के लेबल से भ्रामक दावों को हटाने के साथ गैर-मानकीकृत पानी का उत्पादन भी बंद कर दिया।

    पंचामृत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया गया था। नियामकीय कार्रवाई के बाद कंपनी ने संबंधित उत्पाद को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। यह कदम कंपनी की ओर से नोटिस के बाद की गई सुधारात्मक कार्रवाई का हिस्सा रहा।

    लिव्योर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के उत्पाद ‘लिव्योर रोस्टेड एडामे बीन्स’ के लेबल पर किए गए ‘वीगन’ और ‘हेल्थी’ दावों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। कंपनी ने इन दावों को नियमों के अनुरूप नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाए।

    कंपनी के अनुसार, लागू नियमों की जानकारी के अभाव में ये दावे अनजाने में उत्पाद के लेबल पर दर्ज हो गए थे। कंपनी ने इस मामले पर खेद जताते हुए माफी मांगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होने का आश्वासन दिया।

    इसके साथ ही कंपनी ने संशोधित लेबल भी तैयार किया। नियमों का उल्लंघन करने वाले दावों वाली मौजूदा पैकेजिंग सामग्री को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई। कंपनी ने अपने उत्पादों के लेबल की समीक्षा और संशोधन का काम भी शुरू कर दिया है।

    खाद्य उत्पादों के लेबल पर लिखी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद की प्रकृति, दावे और संबंधित विवरण में किसी तरह की गलत या भ्रामक जानकारी उपभोक्ता के फैसले को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में नियामकीय निगरानी का उद्देश्य कंपनियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कारोबार करने के लिए बाध्य करना है।

    नोटिसों के बाद कंपनियों की ओर से किए गए बदलाव यह दिखाते हैं कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में नियमों के पालन पर निगरानी बढ़ रही है। आने वाले समय में कंपनियों के लिए लेबलिंग दावों की सटीकता और नियामकीय अनुपालन पहले से अधिक महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

  • कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 19 सेक्टर्स ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि फाइनेंशियल और मेटल्स प्रमुख बढ़त वाले क्षेत्र रहे।

    Keywords:
    Financials, Metals, Nifty, Earnings, BFSI,

    नई दिल्ली ।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

  • शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में बीते सप्ताह हुई बिकवाली का असर देश की सबसे बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी पर भी दिखाई दिया। भारत की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के मार्केटकैप में करीब एक लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इस दौरान पांच अन्य कंपनियों की बाजार वैल्यूएशन में कुल 55,149.45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

    बीते सप्ताह सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,009.25 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 204.65 अंक यानी 0.83 प्रतिशत फिसलकर 24,366 अंक पर रहा। बाजार में बिकवाली के दबाव का सीधा असर कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, जिससे उनकी कुल बाजार पूंजी घट गई।

    शीर्ष 10 कंपनियों में सबसे अधिक नुकसान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस को हुआ। कंपनी का मार्केटकैप 34,263.28 करोड़ रुपये घटकर 8.53 लाख करोड़ रुपये रह गया। आईटी क्षेत्र की इस प्रमुख कंपनी की बाजार वैल्यू में आई कमी ने शीर्ष कंपनियों के कुल मार्केटकैप पर भी असर डाला।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की बाजार पूंजी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 31,869.13 करोड़ रुपये घटकर 17.70 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे अधिक बाजार मूल्य वाली भारतीय कंपनी बनी रही।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मार्केटकैप में 25,891.88 करोड़ रुपये की कमी आई। सप्ताह के अंत में बैंक का बाजार मूल्यांकन 9.86 लाख करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी बैंक की बाजार पूंजी 7,165.37 करोड़ रुपये घटकर 11.21 लाख करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक की वैल्यूएशन 2,792.65 करोड़ रुपये कम होकर 10.18 लाख करोड़ रुपये रह गई।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में पांच ऐसी भी रहीं जिनके मार्केटकैप में सप्ताह के दौरान बढ़ोतरी हुई। इनमें सबसे ज्यादा फायदा भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी को मिला। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 26,438.49 करोड़ रुपये बढ़कर 5.23 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।

    भारती एयरटेल की बाजार पूंजी में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 20,592.13 करोड़ रुपये बढ़कर 12.43 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस बढ़ोतरी के साथ भारती एयरटेल शीर्ष कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरे स्थान पर रही।

    बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 3,548.79 करोड़ रुपये बढ़कर 6.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। लार्सन एंड टुब्रो की बाजार वैल्यूएशन में 2,490.66 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 5.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केटकैप भी 2,079.38 करोड़ रुपये बढ़कर 4.91 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    सप्ताह के अंत में बाजार पूंजी के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    शीर्ष कंपनियों के मार्केटकैप में यह बदलाव बताता है कि व्यापक बाजार में बिकवाली के बावजूद सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों पर एक जैसा दबाव नहीं रहा। कुछ कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी से बाजार मूल्य बढ़ा, जबकि दूसरी कंपनियों में बिकवाली के कारण वैल्यूएशन कम हुई। आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा इन कंपनियों के शेयर प्रदर्शन और निवेशकों के रुझान पर निर्भर करेगी।