Author: bharati

  • पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पेशावर में एक निजी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 20 बच्चों की मौत होने की खबर है, जबकि 40 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। कई बच्चे और स्कूल के कर्मचारी छत के मलबे के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।

    दुर्घटना के बाद बचावकर्मियों ने मलबे में फंसे बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। टीमों ने घटनास्थल पर तलाश अभियान चलाया, ताकि मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचा जा सके। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। हादसे में घायल 20 बच्चों को लेडी रीडिंग अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआती जानकारी में 17 शव अस्पताल लाए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद एक महिला शिक्षक का शव भी अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में हताहत हुए लोगों की संख्या और घायलों की स्थिति को लेकर राहत अभियान के दौरान जानकारी सामने आती रही। हादसे की गंभीरता को देखते हुए बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों को तलाशने में लगा रहा।

    पेशावर में हुए इस हादसे के बाद घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। संबंधित अधिकारियों ने अस्पतालों में भर्ती लोगों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राहत टीमों को भी तेजी से काम करने और मलबे के नीचे फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालने के लिए कहा गया।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों के लिए प्रार्थना की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हादसे में घायल लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बचाव दल को अभियान तेज करने के निर्देश भी दिए, ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

    खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर के सूचना एवं जनसंपर्क सलाहकार समर हारून बिलौर ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से घायल बच्चों को हर संभव सहायता देने को कहा। इस बीच, पेशावर के पुलिस अधिकारी डॉ. मियां सईद ने बताया कि हादसे में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

    स्कूल की छत गिरने के कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य का मुख्य उद्देश्य मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को उपचार उपलब्ध कराना है। हादसे में बच्चों की मौत से इलाके में दुख का माहौल है।

  • सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    मध्य प्रदेश। के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचाने के मामले में विरोध तेज हो गया है। खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के एक हजार से ज्यादा आदिवासी न्याय की मांग को लेकर भोपाल की ओर कूच कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही है। इस आंदोलन के कारण प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है।

    आदिवासियों की ओर से निकाली जा रही पदयात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह आंदोलन शुरुआत में कोसमी गांव के 12 आदिवासी परिवारों को बेदखल किए जाने के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन अब आसपास के दर्जनभर गांवों के लोग भी इसमें शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उनके साथ हुई कार्रवाई की जांच हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। आयोग की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए थे। प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई में उनकी फसलें बर्बाद कर दी गईं और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गांव में लगातार तीन दिन तक धरना दिया था। उनका कहना है कि मकान टूटने और फसलें नष्ट होने से परिवारों के सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

    घटना के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक रमाकांत भार्गव प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने वन विभाग की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए धरने पर बैठकर प्रभावित परिवारों की शिकायतें सुनी थीं। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया।

    दूसरी ओर, प्रशासन की रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर कब्जे को अवैध बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग की ओर से यह कहा गया है कि आरक्षित वन भूमि पर पौधे काटकर अतिक्रमण किया गया था। इस तरह मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और प्रशासन का पक्ष अलग-अलग हैं। जमीन पर कब्जे की स्थिति और कार्रवाई से जुड़े मुद्दे विवाद के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं।

    प्रदर्शनकारी आदिवासी परिवारों की मांग है कि जिस जमीन पर वे पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, उसका पट्टा दिया जाए। इसके अलावा बेदखल परिवारों के पुनर्वास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने तथा नष्ट हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की मांग भी उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें रहने तथा आजीविका के लिए उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए।

    आंदोलन में शामिल लोग कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। भोपाल कूच का उद्देश्य मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें और जमीन से संबंधित दस्तावेज रखना है। अब इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा मांगे गए जवाब, प्रशासन के पक्ष और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, मार्च पर भी की टिप्पणी

    राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, मार्च पर भी की टिप्पणी

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जवाब मांगा है। विपक्ष की इन याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है।

    विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिकाओं में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से संबंधित मुद्दे को उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहा है।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोई भी अदालत को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं और उन पर कोई ध्यान नहीं देता। मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।

    इस सुनवाई से पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ याचिकाएं दाखिल कीं। बैज के मुताबिक, अदालत ने इन याचिकाओं पर संज्ञान लिया और 15 अक्टूबर को सुनवाई हुई।

    दीपक बैज ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वोटों की चोरी करके सत्ता हासिल की गई और चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इन आरोपों से जुड़े सबूत सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे हैं। बैज ने यह भी कहा कि विपक्ष को मामले में अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है। हालांकि, ये बातें कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए आरोप और व्यक्त किया गया विश्वास हैं।

    इस मामले में विपक्षी नेताओं ने अदालत से मुलाकात करने और ज्ञापन सौंपने के लिए पहले भी समय मांगा था। 11 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया था। वे अपनी मांगों और शिकायतों से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला।

    इसके अगले दिन, यानी 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इसके बाद उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर याचिकाएं दाखिल कीं। विपक्ष की ओर से इस कदम के जरिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को न्यायिक चुनौती दी गई है।

    15 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अब इन याचिकाओं में उठाए गए सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना है। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के समक्ष प्रस्तुत जवाब और सुनवाई के दौरान होने वाली कार्यवाही के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर


    मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे लगाने के दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वे मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि छात्रों को जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया। जब छात्र वाहन में बैठ रहे थे, तब वे ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे।

    इसी दौरान वाहन के बाहर मौजूद मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और गालियां देने का आरोप लगा।घटनास्थल पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया और वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग के एडीसीपी अनिल कुमार शर्मा ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें निरीक्षक रतन सिंह परिहार आदिवासी छात्रों के संबंध में टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। एडीसीपी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।

    इस घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नाराजगी जताई है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को गंभीर और निंदनीय बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सिंघार का कहना है कि आदिवासी छात्रों का अपमान करने के आरोपों की जांच के साथ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।उन्होंने मांग उठाई कि मामले में कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस तरह उन्होंने घटना को आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है।

    फिलहाल पुलिस ने थाना प्रभारी को निलंबित करने और मामले की जांच शुरू करने की जानकारी दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन के समय वास्तव में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम में संबंधित अधिकारी की क्या भूमिका रही। मामले में एफआईआर दर्ज होने और जांच के अंतिम निष्कर्षों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया यह मामला अब पुलिस विभाग की कार्रवाई और एफआईआर की मांग को लेकर चर्चा में है। एक ओर थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच शुरू की गई है, वहीं दूसरी ओर उमंग सिंघार ने कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
  • मुरैना में ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और सवारी की मौत

    मुरैना में ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और सवारी की मौत

    मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बानमौर चौराहे के पास गुरुवार को ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और उसमें सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई। पीछे से आए तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर लगने से ई-रिक्शा आगे चल रहे ट्रक से जा भिड़ा। हादसे के बाद टक्कर मारने वाला चालक अपना ट्रक छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक जब्त कर चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, हादसा गुरुवार सुबह बानमौर थाना क्षेत्र में हुआ। गंगाराम पुरा निवासी भूरा श्रीवास ई-रिक्शा लेकर जा रहा था। उसके साथ रिश्तेदार गिर्राज श्रीवास भी सवार था। दोनों का ई-रिक्शा जब आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बानमौर नगर के मुख्य चौराहे पर पहुंचा, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसे टक्कर मार दी।

    टक्कर के कारण ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से जा भिड़ा। इसी दौरान पीछे से टक्कर मारने वाले ट्रक ने ई-रिक्शा को कुचल दिया। हादसे में चालक भूरा श्रीवास और सवारी गिर्राज श्रीवास की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    दुर्घटना के बाद बानमौर चौराहे पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रक चालक वाहन को बीच रास्ते में छोड़कर मौके से भाग निकला। घटना की सूचना मिलने पर बानमौर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए नूराबाद चिकित्सालय भेजे।

    पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को जब्त कर थाना परिसर में सुरक्षित रखवा दिया है। फरार चालक की तलाश की जा रही है। हादसे की जानकारी मिलने पर मृतकों के परिजन भी घटनास्थल पर पहुंच गए। दुर्घटना के कारण मुरैना से ग्वालियर की ओर जाने वाले मार्ग पर कुछ देर तक यातायात बाधित रहा।

  • सोनू निगम के बंगलूरू कॉन्सर्ट पर विवाद गहराया, कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से अनुमति रोकने की मांग की, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    सोनू निगम के बंगलूरू कॉन्सर्ट पर विवाद गहराया, कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से अनुमति रोकने की मांग की, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । गायक सोनू निगम के बंगलूरू में होने वाले कॉन्सर्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से 24 अक्तूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि अप्रैल 2025 में एक कॉलेज में आयोजित संगीत कार्यक्रम के दौरान सोनू निगम की टिप्पणी से कन्नड़ भाषियों की भावनाएं आहत हुई थीं। संगठन ने इस मुद्दे को उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कॉन्सर्ट को अनुमति दी गई, तो राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है।

    कर्नाटक रक्षणा वेदिके के संयोजक टीए नारायण गौड़ा ने 14 अक्तूबर को बंगलूरू के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। पत्र में उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया कि सोनू निगम के प्रस्तावित कॉन्सर्ट को आयोजित करने की अनुमति न दी जाए। संगठन ने आशंका जताई कि कार्यक्रम को मंजूरी मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की स्थिति पैदा हो सकती है।

    सोनू निगम का यह कार्यक्रम 24 अक्तूबर को शाम सात बजे बंगलूरू के थानिसंद्रा मेन रोड स्थित भारतीय मॉल में प्रस्तावित है। यह आयोजन ‘द रिवोल्यूशन इंडिया टूर’ के तहत किया जाना है। संगठन ने पुलिस से सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए मामले में जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

    विवाद की वजह अप्रैल 2025 में बंगलूरू के एक कॉलेज में आयोजित संगीत कार्यक्रम के दौरान हुई कथित टिप्पणी बताई जा रही है। कर्नाटक रक्षणा वेदिके के अनुसार, कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने सोनू निगम से कन्नड़ भाषा में गाना गाने का अनुरोध किया था। संगठन का आरोप है कि इस अनुरोध के दौरान गायक ने ऐसी टिप्पणी की, जिससे कन्नड़ भाषियों की भाषाई अस्मिता और भावनाओं को ठेस पहुंची।

    टीए नारायण गौड़ा ने पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में कहा कि किसी कलाकार से कन्नड़ भाषा में गाना गाने का अनुरोध करना कोई अपराध नहीं है। संगठन ने इसी आधार पर आगामी कॉन्सर्ट की अनुमति रोकने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में सोनू निगम की ओर से कोई प्रतिक्रिया दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इस विवाद को लेकर पहले भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कर्नाटक रक्षणा वेदिके की बंगलूरू शहरी जिला इकाई के अध्यक्ष टीए धर्मराज ने 2 मई 2025 को अवलाहल्ली पुलिस थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में सोनू निगम की कथित टिप्पणी के संबंध में कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

    अब संगठन ने आगामी कॉन्सर्ट को लेकर अपना विरोध दोबारा सामने रखा है। नारायण गौड़ा ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस कार्यक्रम को अनुमति देती है, तो संगठन राज्यभर में प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने पत्र में कहा कि कन्नड़ भाषियों के आत्मसम्मान से बढ़कर किसी कलाकार का कार्यक्रम नहीं है।
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    संगठन ने अधिकारियों से अपनी मांग पर जल्द फैसला लेने और इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप में देने का भी अनुरोध किया है। फिलहाल, सोनू निगम के 24 अक्तूबर को प्रस्तावित बंगलूरू कॉन्सर्ट को अनुमति देने या रोकने के संबंध में पुलिस के निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

  • कॉफी विद करण 9 में सलमान खान ने करिश्मा कपूर के साथ अफेयर पर किया मजाक, छोटी ड्रेस को लेकर भी खोला पुराना किस्सा

    कॉफी विद करण 9 में सलमान खान ने करिश्मा कपूर के साथ अफेयर पर किया मजाक, छोटी ड्रेस को लेकर भी खोला पुराना किस्सा


    नई दिल्ली । करण जौहर के चैट शो कॉफी विद करण 9 के पहले एपिसोड में सलमान खान और करिश्मा कपूर एक साथ नजर आए। इस दौरान दोनों ने अपनी पुरानी दोस्ती, फिल्मों की शूटिंग और साथ काम करने के अनुभवों से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। बातचीत के दौरान सलमान ने करिश्मा के साथ कथित अफेयर को लेकर मजाक किया। इसके अलावा दोनों ने फिल्म दुल्हन हम ले जाएंगे की शूटिंग से जुड़ा एक पुराना वाकया भी सुनाया। शो में सलमान ने अभिनेता रणबीर कपूर और रणवीर सिंह के अभिनय की भी तारीफ की।

    करिश्मा कपूर ने बताया कि उन्होंने सलमान खान के साथ करीब 11 फिल्मों में काम किया है। दोनों ने लगातार कई फिल्मों की शूटिंग की और एक साथ विभिन्न कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। करिश्मा के मुताबिक, उस दौर में उनका कार्यक्रम इतना व्यस्त रहता था कि उन्हें अपना बैग हमेशा तैयार रखना पड़ता था। एक साथ कई परियोजनाओं पर काम करने के कारण उनके पास सामान व्यवस्थित रखने का भी ज्यादा समय नहीं होता था।

    बातचीत के दौरान करिश्मा और सलमान के रिश्ते का विषय भी उठा। करण जौहर ने बताया कि करिश्मा ने उनसे कहा था कि जब फिल्म इंडस्ट्री में दो कलाकार लंबे समय तक साथ काम करते हैं और उनके बीच अच्छी दोस्ती होती है, तो लोग उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाने लगते हैं। करिश्मा ने स्पष्ट किया कि उन्हें सलमान के साथ अपनी दोस्ती पर गर्व है। उनके अनुसार, दोनों के बीच प्रेम संबंध नहीं, बल्कि गहरी दोस्ती थी।

    इस पर सलमान ने मजाकिया अंदाज में कहा कि करिश्मा झूठ बोल रही हैं और दोनों के बीच अफेयर था। करिश्मा ने इस बात पर हैरानी जताई और कहा कि सलमान हमेशा उनके साथ ऐसा ही करते हैं। उनके मुताबिक, सलमान इस तरह की बातें कहकर लोगों को चर्चा करने के लिए नया विषय दे रहे थे।

    सलमान ने मजाक को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनका और करिश्मा का अफेयर था, लेकिन बाद में करिश्मा ने उन्हें छोड़कर शादी कर ली, जिससे उनका दिल टूट गया। इस पर करिश्मा ने सलमान को चुप रहने के लिए कहा। दोनों के बीच हुई यह बातचीत शो के मनोरंजक पलों में शामिल रही।

    करिश्मा ने सलमान के साथ अपनी पहली मुलाकात का किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि जब फिल्म मैंने प्यार किया रिलीज हुई थी, तब वह महज 16 साल की थीं और सलमान को लेकर काफी उत्साहित थीं। उस समय वह सरोज खान से नृत्य सीख रही थीं, जबकि सलमान फिल्म बागी के लिए रिहर्सल कर रहे थे।

    करिश्मा के अनुसार, एक दिन सलमान ने उनसे पूछा कि क्या वह डब्बू अंकल की बेटी हैं। सलमान ने उनसे कहा कि वह उन्हें देख रहे हैं और उन्हें काफी मेहनत करते हुए पाया है। इसके बाद उन्होंने करिश्मा को चॉकलेट दी। करिश्मा ने बताया कि इसी मुलाकात से दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई। उन्होंने यह भी कहा कि सलमान को चॉकलेट बहुत पसंद थी और वह नाश्ते में भी चॉकलेट खा लिया करते थे।

    शो में करिश्मा ने फिल्म दुल्हन हम ले जाएंगे की शूटिंग से जुड़ा एक और किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के एक गाने की शूटिंग के दौरान उन्होंने छोटी ड्रेस पहनी थी, लेकिन सलमान को उनका पहनावा पसंद नहीं आया। सलमान की आपत्ति के बाद करिश्मा निर्देशक डेविड धवन के पास शिकायत लेकर पहुंच गई थीं।

    इस घटना पर सलमान ने सफाई देते हुए कहा कि ड्रेस बहुत छोटी थी और बार-बार ऊपर खिसक रही थी। इसी वजह से उन्हें करिश्मा को ड्रेस ठीक करने के लिए कहना पड़ रहा था।बातचीत के दौरान सलमान से रणबीर कपूर की फिल्म एनिमल और रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर में उनके अभिनय में से किसी एक को चुनने के लिए भी कहा गया।

    सलमान ने दोनों में से किसी एक को बेहतर बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों कलाकारों की अभिनय शैली अलग है और उनकी तुलना करना उचित नहीं होगा। सलमान के मुताबिक, रणवीर सिंह के अभिनय में जबरदस्त ऊर्जा दिखाई देती है, जबकि रणबीर कपूर की अदाकारी में गहराई और इंटेंसिटी नजर आती है। उन्होंने दोनों को शानदार अभिनेता बताया।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत ने पूरे किए 2000 छक्के, संजू सैमसन ने जड़ा ऐतिहासिक शॉट और 22 गेंदों में ठोके 56 रन

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत ने पूरे किए 2000 छक्के, संजू सैमसन ने जड़ा ऐतिहासिक शॉट और 22 गेंदों में ठोके 56 रन


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 2000 छक्के पूरे कर लिए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ 14 अक्टूबर को हैदराबाद में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले के दौरान भारत ने यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया। भारतीय टीम इस प्रारूप में 2000 छक्के लगाने वाली दुनिया की दूसरी टीम बन गई है। इस उपलब्धि के साथ विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने भी अपने प्रदर्शन से खास पहचान बनाई। उन्होंने भारत की ओर से 2000वां छक्का लगाने के अलावा टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 100 छक्के भी पूरे किए।

    भारत ने यह उपलब्धि अपने 297वें टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में हासिल की। इस प्रारूप में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाली टीमों की सूची में वेस्टइंडीज पहले स्थान पर है। कैरेबियाई टीम ने 259 मैचों में कुल 2026 छक्के लगाए हैं। भारत अब 2000 छक्कों का आंकड़ा पार करने वाली दूसरी टीम बन गया है। इस सूची में न्यूजीलैंड 1585 छक्कों के साथ तीसरे, पाकिस्तान 1507 छक्कों के साथ चौथे और दक्षिण अफ्रीका 1407 छक्कों के साथ पांचवें स्थान पर है।

    हैदराबाद में खेले गए मुकाबले में भारत का 2000वां छक्का संजू सैमसन के बल्ले से निकला। उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाज रोस्टन चेज के ओवर की तीसरी गेंद पर शानदार छक्का लगाया। इसी शॉट के साथ भारतीय टीम ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छक्कों का दो हजार का आंकड़ा पूरा कर लिया। यह उपलब्धि भारतीय टीम की इस प्रारूप में लंबे समय से चली आ रही आक्रामक बल्लेबाजी की क्षमता को दर्शाती है।

    संजू सैमसन के लिए यह मुकाबला व्यक्तिगत उपलब्धि के लिहाज से भी खास रहा। वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले छठे भारतीय बल्लेबाज बन गए। मुकाबले के बाद उनके नाम कुल 102 छक्के दर्ज हो गए। भारतीय बल्लेबाजों में रोहित शर्मा 205 छक्कों के साथ सबसे आगे हैं। उनके बाद सूर्यकुमार यादव के 179, अभिषेक शर्मा के 141, हार्दिक पंड्या के 126 और विराट कोहली के 124 छक्के हैं। अब संजू भी इस विशेष सूची में शामिल हो गए हैं।

    मैच में संजू ने लक्ष्य का पीछा करते हुए आक्रामक बल्लेबाजी की। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट पर 247 रन बनाए थे और भारत के सामने 248 रन का लक्ष्य रखा था। इसके जवाब में संजू ने महज 22 गेंदों में 56 रन ठोक दिए। उनकी पारी में चार चौके और चार छक्के शामिल रहे। उन्होंने तेजी से रन बनाकर भारतीय पारी को अच्छी शुरुआत देने की कोशिश की।

    हालांकि, संजू की तेजतर्रार पारी के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। कप्तान श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन बल्ले से अपेक्षित योगदान नहीं दे पाए। भारतीय टीम 223 रन पर सिमट गई और मुकाबला 24 रन से हार गई। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली।

    इस तरह हैदराबाद में भारत को भले ही हार का सामना करना पड़ा, लेकिन टीम ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2000 छक्के पूरे करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। संजू सैमसन ने भी दो अहम उपलब्धियां हासिल कर इस मुकाबले को अपने लिए यादगार बना दिया।


  • मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा, सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी कहानी डॉक्यू-सीरीज में दिखाई गई

    मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा, सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी कहानी डॉक्यू-सीरीज में दिखाई गई

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। बुधवार को आए इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस हत्याकांड की घटनाओं, पुलिस जांच और आरोपियों से जुड़े घटनाक्रम को ‘हनीमून से हत्या’ नाम की डॉक्यू-सीरीज में भी प्रस्तुत किया गया है।

    यह डॉक्यू-सीरीज पांच गंभीर आपराधिक मामलों पर आधारित है। इसमें उन महिलाओं की घटनाओं को दिखाया गया है, जिन्होंने अपने पतियों की हत्या की। घटनाओं को समझाने के लिए पुलिस जांच, संबंधित लोगों के साक्षात्कार और घटनाओं के पुनर्निर्माण का सहारा लिया गया है। मेरठ का ब्लू ड्रम हत्याकांड भी इसमें शामिल है। इस मामले में हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी।

    यह घटना 3 मार्च 2022 की बताई गई है। सौरभ राजपूत लंदन में रहते थे। आरोपों के मुताबिक, उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मिलकर उनकी हत्या कर दी थी। बताया गया कि हत्या के बाद दोनों पूरी रात शव के साथ घर में रहे। अगले दिन उन्होंने चाकू, सीमेंट और एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा। इसके बाद शव के चार टुकड़े किए गए और उन्हें तकिए के कवर में लपेटकर ड्रम में रखा गया। शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट का घोल भी डाला गया।

    आरोपियों की योजना ड्रम को किसी दूसरी जगह ले जाकर ठिकाने लगाने की थी, लेकिन उसका वजन अधिक होने के कारण वे उसे घर से बाहर नहीं ले जा सके। परिणामस्वरूप ड्रम उसी मकान में छिपा रह गया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों के हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड घूमने जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

    बताया गया कि 4 मार्च को दोनों ने ड्राइवर अजब सिंह के साथ कैब बुक की और घूमने निकल गए। इस दौरान वे मनाली, शिमला और कसोल गए। ड्राइवर के अनुसार, दोनों ने यात्रा के दौरान शराब पी और छुट्टियां बिताईं। 17 मार्च को मेरठ लौटने के बाद मुस्कान ने अपनी मां कविता को फोन कर सौरभ की हत्या की जानकारी दी। उसने बताया कि शव किराए के मकान में पड़ा है।

    इसके बाद मुस्कान के पिता प्रमोद ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मकान पर पहुंचकर तलाशी ली, जहां नीले ड्रम के अंदर सौरभ का शव बरामद हुआ। जांच के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया। 19 मार्च को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
    इस मामले में एक अन्य घटनाक्रम तब सामने आया, जब जेल में रहते हुए मुस्कान ने 24 नवंबर को एक बेटी को जन्म दिया। यह उसकी दूसरी बेटी बताई गई है। उसकी पहली बेटी पीहू अपने दादा-दादी के पास रह रही है। इस घटना ने मामले से जुड़े पारिवारिक पहलुओं को भी चर्चा में ला दिया था।

    अब जिला अदालत द्वारा मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद यह हत्याकांड फिर सुर्खियों में है। इस मामले को विस्तार से समझने के इच्छुक दर्शक ‘हनीमून से हत्या’ डॉक्यू-सीरीज देख सकते हैं, जिसमें अपराध की घटनाओं, जांच और उनसे जुड़े सवालों को प्रस्तुत किया गया है।

  • कर्नाटक चुनाव की वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से पूछा रिकॉर्ड कहां गया, अगली सुनवाई पर मांगा जवाब

    कर्नाटक चुनाव की वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से पूछा रिकॉर्ड कहां गया, अगली सुनवाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर वर्ष 2023 में हुई मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने पर भारत निर्वाचन आयोग के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल किया कि चुनाव कराने वाली संस्था के पास अपने ही चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कैसे गायब हो सकते हैं। पीठ ने आयोग की ओर से रिकॉर्ड नहीं मिलने की दलील पर असंतोष जताते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में लापरवाही को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई तक उपलब्ध रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।

    इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने बताया कि वर्ष 2023 की मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिल पा रही है और उसे खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि चुनाव कराना आयोग का मुख्य दायित्व है और इस प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का सुरक्षित रहना जरूरी है। अदालत ने आयोग से उपलब्ध सभी रिकॉर्ड अगली सुनवाई के दौरान पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

    यह पूरा विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में शृंगेरी सीट के नतीजे से जुड़ा है। इस सीट पर कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा को मात्र 201 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डीएनए जीवराज ने चुनाव परिणाम को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती करने का आदेश दिया।

    इसके बाद 3 मई 2026 को जारी संशोधित परिणाम में राजेगौड़ा के मतों की संख्या कम हो गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ राजेगौड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए विधायक पद पर बने रहने की अनुमति दी थी।

    राजेगौड़ा की ओर से पुनर्गणना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। उनका तर्क है कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों की दोबारा जांच करने का आदेश दिया था। हालांकि, उनके अनुसार चुनाव अधिकारी ने निर्धारित दायरे से बाहर जाकर 562 वैध डाक मतपत्रों का भी पुनर्मूल्यांकन कर दिया। इसी प्रक्रिया की वैधता और निष्पक्षता से जुड़े सवालों के बीच मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    राजेगौड़ा ने मामले में पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के साथ वर्ष 2023 की मूल मतगणना और पुनर्गणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की है। इन दस्तावेजों के माध्यम से यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि मतगणना और पुनर्गणना के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद अब निर्वाचन आयोग को अगली सुनवाई पर उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करने होंगे। अदालत ने संकेत दिया है कि रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं होने की स्थिति में मामले में आयोग के विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। हालांकि, वीडियो रिकॉर्डिंग के गायब होने और पुनर्गणना की प्रक्रिया से जुड़े सभी सवालों पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। अगली सुनवाई में रिकॉर्ड की उपलब्धता और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।