Author: bharati

  • इंदौर में युवक की मौत से सनसनी, पुलिस ट्रेनिंग कर रही युवती से प्रेम की बात सामने आई; सुसाइड नोट नहीं मिला

    इंदौर में युवक की मौत से सनसनी, पुलिस ट्रेनिंग कर रही युवती से प्रेम की बात सामने आई; सुसाइड नोट नहीं मिला


    इंदौर  इंदौर के खुड़ैल थाना क्षेत्र में 27 वर्षीय युवक की मौत का मामला सामने आया है। युवक का शव देवगुराड़िया की मानसरोवर कॉलोनी स्थित उसके किराए के कमरे में मिला। मृतक की पहचान आयुष पिता उत्तम गोस्वामी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से सागर का रहने वाला था और पिछले कुछ महीनों से इंदौर में रहकर निजी कंपनी में ड्राइवर का काम कर रहा था। शुरुआती पुलिस जांच में उसके इंदौर आने की वजह सागर की एक युवती से प्रेम संबंध होने की बात सामने आई है। युवती इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कर रही थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए परिजनों और परिचितों से जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक शनिवार को आयुष किसी का फोन नहीं उठा रहा था। लगातार संपर्क करने की कोशिश के बाद उसके मकान मालिक से बात की गई। मकान मालिक जब कमरे पर पहुंचा तो अंदर आयुष का शव मिला। घटना की जानकारी तत्काल पुलिस और परिवार को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आयुष पिछले कुछ महीनों से इंदौर में रह रहा था। उसके दोस्तों और परिचितों से पूछताछ में सामने आया कि सागर की रहने वाली एक युवती से उसका प्रेम संबंध था। बताया गया है कि युवती इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग के लिए आई थी। इसके बाद आयुष भी इंदौर आने की जिद करने लगा था। परिवार के मुताबिक वह कुछ समय पहले इंदौर आया और यहां निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने लगा।

    फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि युवक की मौत से पहले उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी और पिछले कुछ दिनों में उसकी किन लोगों से बातचीत हुई थी। पुलिस उसके मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध जानकारी की भी जांच कर सकती है ताकि घटनाक्रम की पूरी कड़ी सामने आ सके। हालांकि शुरुआती जानकारी में प्रेम प्रसंग को वजह बताए जाने के बावजूद पुलिस ने अभी इसे मौत का अंतिम कारण नहीं माना है।

    आयुष के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि घटना से पहले युवक के साथ क्या परिस्थितियां बनी थीं। उसके परिवार और दोस्तों के बयान भी जांच में अहम हो सकते हैं। पुलिस यह भी पता कर रही है कि क्या युवक किसी तनाव या अन्य व्यक्तिगत परेशानी से गुजर रहा था।

    आयुष अपने परिवार में चार बहनों का इकलौता भाई था। उसकी मौत की खबर मिलते ही सागर स्थित परिवार में मातम छा गया। परिजनों के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि परिवार को आयुष से भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं। इंदौर में नौकरी करते हुए वह अपने जीवन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

    पुलिस मामले में हर संभावित पहलू की जांच कर रही है। प्रेम प्रसंग से जुड़ी जानकारी को भी इसी जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि युवती के साथ आयुष का संबंध किस तरह का था और क्या घटना से पहले दोनों के बीच किसी तरह की बातचीत या विवाद हुआ था। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार करना होगा।

    फिलहाल खुड़ैल पुलिस ने मामला जांच में लिया है। पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मुख्य उद्देश्य मौत की वास्तविक वजह और उससे पहले की परिस्थितियों को स्पष्ट करना है। वहीं परिवार और परिचितों से पूछताछ के बाद मामले से जुड़े कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

  • झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    नई दिल्ली । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। प्रदर्शन 23वें दिन में पहुंच गया है और अब आंदोलनकारी छात्रों का निशाना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस और राहुल गांधी भी बन गए हैं। छात्रों ने अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है।

    आंदोलनकारी छात्रों ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी का पुतला जलाने का ऐलान किया है। इसके बाद 20 अगस्त को रांची में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर सरकार को स्पष्ट और प्रभावी कदम उठाना चाहिए।

    राहुल गांधी को लेकर छात्रों की नाराजगी की वजह उनके साथ हुई बातचीत के बाद कार्रवाई नहीं होने को बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बाद उनकी मांगों पर कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया।

    छात्रों का कहना है कि अब केवल बातचीत और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि यदि राहुल गांधी वास्तव में उनकी समस्याओं के समर्थन में हैं तो उन्हें आंदोलन के बीच पहुंचकर छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।

    आंदोलनकारियों ने कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि झारखंड सरकार में कांग्रेस के 16 विधायक हैं। यदि सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो कांग्रेस को अपने समर्थन को लेकर निर्णय लेना चाहिए। छात्रों का तर्क है कि समर्थन वापस लेने से सरकार पर उनकी मांगों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा है कि आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण तरीके से चलाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन का तरीका बदला जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में प्रदर्शन के और व्यापक होने की संभावना है।

    20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को आंदोलन का अहम चरण माना जा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी शिकायतों पर निर्णय करे और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

    इस पूरे घटनाक्रम का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्य विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआईएमएल के दो विधायक शामिल हैं।

    यदि कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेती है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 40 विधायक रह जाएंगे, जो बहुमत के आंकड़े से एक कम है। हालांकि, विधानसभा में जेकेएलएम का एक विधायक भी है। उसका समर्थन मिलने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा 41 विधायकों के आंकड़े तक पहुंच सकता है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे से आगे बढ़कर राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करने वाला विषय बनता जा रहा है।

  • इंदौर में बारिश का इंतजार खत्म होने की उम्मीद, अगले कुछ दिन बदलेंगे मौसम का मिजाज; 20 इंच से ज्यादा पानी की जरूरत

    इंदौर में बारिश का इंतजार खत्म होने की उम्मीद, अगले कुछ दिन बदलेंगे मौसम का मिजाज; 20 इंच से ज्यादा पानी की जरूरत


    इंदौर । इंदौर में अगस्त का आधा महीना बीत चुका है लेकिन बारिश के लिहाज से शहर को अभी भी बड़ी राहत का इंतजार है। अगस्त में अब तक किसी भी दिन आधा इंच से ज्यादा बारिश दर्ज नहीं होने से बारिश का आंकड़ा उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाया है। रविवार को शहर में बादल छाए रहे और मौसम में नमी बनी रही। अब मानसून सीजन के करीब डेढ़ महीने का समय बाकी है और इसी अवधि में अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग के हालिया पूर्वानुमान में भी मध्य प्रदेश में 21 अगस्त तक बारिश की गतिविधियां बने रहने के संकेत दिए गए हैं।

    इस सीजन में इंदौर में अब तक करीब 18 इंच बारिश होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद शहर को सामान्य स्थिति तक पहुंचने के लिए अभी अच्छी मात्रा में बारिश की जरूरत है। अगस्त के शुरुआती पखवाड़े में रुक रुककर बूंदाबांदी तो हुई लेकिन लगातार तेज बारिश का दौर नहीं बन सका। यही वजह है कि शहर में बारिश का आंकड़ा अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। हालिया रिपोर्टों में भी इंदौर में बारिश की कमी और भारी बारिश के लंबे इंतजार का उल्लेख किया गया है।

    अब मौसम विशेषज्ञों की नजर बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली पर है। इस सिस्टम के प्रभाव से मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने की संभावना है। इसके चलते मध्य प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में बारिश का दौर बढ़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में आने वाले दिनों में व्यापक बारिश की संभावना बनी हुई है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।

    मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इंदौर में आने वाले कुछ दिन अहम माने जा रहे हैं। यदि बंगाल की खाड़ी से बनने वाला सिस्टम प्रभावी रहा और मानसून ट्रफ लगातार सक्रिय रही तो पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर बढ़ सकता है। इससे इंदौर में रुक रुककर होने वाली बूंदाबांदी की जगह तेज बारिश के दौर बनने की संभावना बढ़ेगी। हालांकि किसी एक सिस्टम के आधार पर पूरे सीजन की बारिश का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी क्योंकि मानसून की गतिविधि लगातार बदलती रहती है।

    इंदौर में अगस्त के दौरान अच्छी बारिश का इतिहास भी रहा है। शहर में अगस्त महीने की सर्वाधिक बारिश का आंकड़ा 1944 से जुड़ा है जब करीब 28 इंच पानी दर्ज किया गया था। वहीं 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 से जुड़ा है जब करीब साढ़े 10 इंच बारिश हुई थी। इससे यह साफ होता है कि अगस्त के दूसरे हिस्से में भी इंदौर में कम समय में काफी बारिश होने की संभावना बन सकती है। हालांकि पुराने रिकॉर्ड भविष्य की बारिश की गारंटी नहीं देते।

    आमतौर पर अगस्त इंदौर के मानसून के लिहाज से महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इस महीने में बारिश के कई दौर देखने को मिलते हैं। इस बार शुरुआती हिस्से में कमजोर गतिविधि के कारण शहर के बारिश के आंकड़े पर असर पड़ा है। अब आने वाले दिनों में यदि मौसम प्रणाली सक्रिय रहती है तो यह कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

    मानसून सीजन का अभी करीब डेढ़ महीना बाकी है। इसलिए फिलहाल बारिश के अंतिम आंकड़े को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मौसम विशेषज्ञों की नजर अब बंगाल की खाड़ी के सिस्टम और मानसून ट्रफ की स्थिति पर बनी हुई है। यदि दोनों का असर पश्चिमी मध्य प्रदेश तक पहुंचता है तो इंदौर में अच्छी बारिश का इंतजार खत्म हो सकता है। वहीं लगातार बारिश होने पर शहर के जलस्रोतों और आसपास के इलाकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद रहेगी। फिलहाल रविवार को बादल छाए रहने और अगले दिनों में बारिश की संभावना ने इंदौरवासियों को राहत की उम्मीद जरूर दी है।

  • MD की डिलीवरी से पहले पुलिस ने दबोचा आरोपी, नाबालिग भी साथ; चंदन नगर में शराब तस्करी पर 3 गिरफ्तार

    MD की डिलीवरी से पहले पुलिस ने दबोचा आरोपी, नाबालिग भी साथ; चंदन नगर में शराब तस्करी पर 3 गिरफ्तार


    इंदौर  इंदौर में नशे और अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने एक साथ दो थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की है। खजराना और चंदन नगर पुलिस की अलग अलग कार्रवाई में कुल पांच आरोपियों को पकड़ा गया है। खजराना पुलिस ने करीब 100 ग्राम MD ड्रग के साथ एक युवक और एक नाबालिग को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक दोनों किसी अन्य व्यक्ति को ड्रग की डिलीवरी देने के लिए इलाके में पहुंचे थे। वहीं चंदन नगर पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ड्राय डे के बावजूद अवैध तरीके से शराब बेचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हजारों रुपए कीमत की शराब जब्त की है।

    खजराना पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए युवक की पहचान राहुल पिता मनोहर परमार के रूप में हुई है। वह देवास के चाणक्यपुरी और सिविल लाइंस क्षेत्र का निवासी बताया गया है। पुलिस के साथ कार्रवाई के दौरान एक नाबालिग भी पकड़ा गया। पुलिस का दावा है कि दोनों के कब्जे से करीब 100 ग्राम MD बरामद हुई है। दोनों कथित तौर पर इलाके में किसी अन्य व्यक्ति तक ड्रग पहुंचाने के लिए आए थे।

    पुलिस ने जब्त की गई सामग्री को जांच के लिए सुरक्षित किया है और अब इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि MD कहां से लाई गई थी और इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी पहले से किसी नशे के नेटवर्क से जुड़े हुए थे या नहीं। मामले में आगे की जांच के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।

    नाबालिग की भूमिका को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। चूंकि वह उम्र में कम है इसलिए उसके संबंध में कार्रवाई किशोर न्याय से जुड़े प्रावधानों के तहत की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नाबालिग को कथित तौर पर ड्रग की तस्करी में किस तरह शामिल किया गया और उसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।

    दूसरी कार्रवाई चंदन नगर थाना क्षेत्र में हुई जहां पुलिस ने 15 अगस्त को ड्राय डे के दौरान अवैध शराब बेचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों की पहचान सत्या पिता कालू वसुनिया निवासी चंदन नगर रईस पिता मोहम्मद शकुर पठान निवासी सहयोग नगर और प्रदीप पिता ओमप्रकाश सेन निवासी सिरपुर के रूप में हुई है।

    पुलिस ने तीनों के कब्जे से हजारों रुपए कीमत की शराब जब्त करने का दावा किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने यह भी जानकारी जुटाई कि आरोपी ड्राय डे के बावजूद शराब की बिक्री कर रहे थे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के बीच हुई इस कार्रवाई को पुलिस की निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है।

    चंदन नगर पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में शामिल रईस को कुछ समय पहले जिलाबदर किया गया था। इसके बावजूद उसके इलाके में मौजूद रहने और कथित तौर पर अवैध शराब का कारोबार करने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि जिलाबदर की कार्रवाई के बाद वह इंदौर में कैसे पहुंचा और क्या उसके खिलाफ पहले से दर्ज मामलों की भी कोई भूमिका है।

    दोनों मामलों में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है। MD बरामदगी के मामले में पुलिस का फोकस ड्रग की सप्लाई चेन तक पहुंचने पर है जबकि शराब के मामले में यह जांच की जा रही है कि ड्राय डे के दौरान शराब कहां से लाई गई और इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    इंदौर पुलिस की इन कार्रवाइयों से साफ है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे ड्राय डे के दौरान भी अवैध शराब बिक्री और नशीले पदार्थों की तस्करी पर निगरानी रखी गई। हालांकि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    नई दिल्ली । वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह हथियार की जांच के दौरान अचानक गोली चलने से अफरा तफरी मच गई। घटना में एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से जुड़े दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए। दोनों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और गोली चलने की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, एक यात्री अपनी पत्नी के साथ मुंबई जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था। यात्री के पास बंदूक थी और उसने विमान यात्रा के दौरान हथियार ले जाने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत हथियार की जांच की जा रही थी।

    बताया गया है कि हथियार की जांच के दौरान अचानक बंदूक से एक राउंड फायर हो गया। गोली चलने के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया। घटना में सुरक्षा जांच का काम कर रहे दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए।

    घटना के तुरंत बाद दोनों घायल कर्मचारियों को न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। घायलों की स्थिति को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर आगे जानकारी दी जा सकती है।

    जिस यात्री के हथियार से गोली चली, वह मुंबई जाने वाली IX-1810 फ्लाइट से यात्रा करने वाला था। वह अपनी पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचा था। हथियार साथ होने की जानकारी पहले से दिए जाने के बावजूद जांच के दौरान अचानक फायरिंग हो गई। इस कारण अब सुरक्षा प्रक्रिया और घटना की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके से जुड़े घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बंदूक से गोली किस परिस्थिति में चली और हथियार की जांच के समय सुरक्षा संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का किस तरह पालन किया जा रहा था।

    पुलिस और संबंधित अधिकारी यह भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि फायरिंग के समय हथियार की स्थिति क्या थी और जांच के दौरान किन परिस्थितियों में अचानक एक राउंड फायर हुआ। मामले में उपलब्ध जानकारी और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील परिसर में हथियार की जांच के दौरान गोली चलने की घटना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, घटना के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान घायलों के उपचार और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर है।

    पुलिस की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग किस वजह से हुई और इस दौरान सुरक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी या नहीं। फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है और आगे की जानकारी जांच के आधार पर सामने आने की संभावना है।

  • वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर बरसे CM मोहन यादव, बोले- देशभक्ति के गीत का सम्मान करना चाहिए

    वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर बरसे CM मोहन यादव, बोले- देशभक्ति के गीत का सम्मान करना चाहिए


    इंदौर । इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार ऐसा अवसर आया है जब वंदे मातरम् को पूरे देश में व्यापक रूप से सम्मान दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता इस राष्ट्रीय गीत को लेकर सम्मान का भाव नहीं दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस न इंदौर में वंदे मातरम् गाती है और न ही दिल्ली में उसके नेता इसका सम्मान करते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अपने रुख को लेकर देश से माफी मांगने की मांग की।

    मुख्यमंत्री इंदौर दौरे के दौरान शहर के चिड़ियाघर भी पहुंचे। यहां उन्होंने तोते उड़ाकर नए 14D थिएटर का शुभारंभ किया। इस थिएटर में दर्शकों को सामान्य फिल्म देखने से अलग तरह का अनुभव देने की व्यवस्था की गई है। थिएटर में करीब 20 मिनट के शो के लिए टिकट दर 70 रुपये निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। (naidunia.com)

    इंदौर में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि देश के स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़ा हुआ प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देश के प्रति समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसे सम्मान मिलना पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के मौके पर देशभक्ति से जुड़े प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के कथित बयानों पर आपत्ति जताई और कहा कि यदि किसी नेता ने वंदे मातरम् का अपमान किया है तो उसे देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि मुख्यमंत्री के इस बयान में जिन कांग्रेस नेताओं या बयानों का उल्लेख किया गया है उनकी विस्तृत जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने अपने इंदौर दौरे के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अटल जी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और विपक्ष में लंबे समय तक काम करने का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व में संवाद के जरिए समाधान निकालने और सभी को साथ लेकर चलने की विशेष क्षमता थी।

    मोहन यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल से जुड़े कई प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने पड़ोसी देश के साथ संवाद का रास्ता अपनाया लेकिन जब पाकिस्तान ने इसका सम्मान नहीं किया तो कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने दृढ़ता के साथ जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने अटल जी के नेतृत्व को राष्ट्रहित और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से जोड़ते हुए उनके योगदान को याद किया।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का माध्यम है।

    इंदौर के चिड़ियाघर में 14D थिएटर का शुभारंभ शहर में मनोरंजन और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक नई पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सामान्य थिएटर की तुलना में 14D तकनीक दर्शकों को स्क्रीन पर दिखाई जा रही कहानी के साथ अधिक इमर्सिव अनुभव देने के लिए जानी जाती है। इसमें दृश्य प्रभावों के साथ सीट मूवमेंट और अन्य प्रभावों का इस्तेमाल किया जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान मछलियां भी छोड़ीं और शहर की पर्यावरणीय तथा मनोरंजन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इंदौर लगातार शहरी विकास के साथ पर्यटन और मनोरंजन के नए विकल्प विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    वंदे मातरम् को लेकर मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति से जुड़े गीतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। मुख्यमंत्री ने इसे राजनीतिक विवाद से आगे देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान का विषय बताया। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • दिमागी नक्सल बयान पर सियासी घमासान, चिदंबरम ने कहा गर्व है, विपक्ष ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर उठाए सवाल

    दिमागी नक्सल बयान पर सियासी घमासान, चिदंबरम ने कहा गर्व है, विपक्ष ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए संबोधन में दिमागी नक्सल शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में समाज को गलत दिशा में ले जाने वाले तत्वों को पहचानने की जरूरत पर जोर दिया था। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। चिदंबरम की इस प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान को विपक्ष और सरकार से असहमति रखने वाले लोगों के संदर्भ में देखा और इस तरह की शब्दावली के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्बन नक्सल शब्द के पुराने इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री की ओर से अर्बन नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन संसद में इसकी परिभाषा को लेकर सवाल पूछे जाने पर स्पष्ट परिभाषा सामने नहीं आई थी।

    जयराम रमेश ने जाति जनगणना के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक जाति जनगणना की मांग को अर्बन नक्सल सोच से जोड़कर देखा जाता था, जबकि बाद में सरकार ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, सरकार की ओर से पहले किसी मांग या विचार को एक विशेष राजनीतिक शब्दावली से जोड़ना और बाद में उसी दिशा में कदम उठाना सवाल खड़े करता है।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने या उनसे असहमति जताने वालों को इस तरह के विशेषणों से संबोधित करना उचित नहीं है।

    वाम दलों ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी को गंभीरता से लिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के महासचिव एमए बेबी ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। वाम नेताओं ने दिमागी नक्सल जैसे शब्द के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक विमर्श के लिए गंभीर विषय बताया।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन से हुई। लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों और समाज को प्रभावित करने वाली विचारधाराओं का उल्लेख किया। इसी दौरान उन्होंने दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया और ऐसे तत्वों को पहचानने की आवश्यकता बताई, जो उनके अनुसार समाज को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास करते हैं।

    प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद अब सार्वजनिक बहस का रूप ले चुके हैं। कांग्रेस और वाम दल जहां इस शब्दावली को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री के बयान का संदर्भ सामाजिक और वैचारिक चुनौतियों से जुड़ा बताया जा रहा है।

    दिमागी नक्सल शब्द पर शुरू हुआ यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीतिक दल स्वतंत्रता दिवस के संदेशों और देश की दिशा से जुड़े मुद्दों पर अपनी-अपनी विचारधारा के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। चिदंबरम की टिप्पणी और विपक्षी नेताओं की आपत्तियों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस शब्द को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

  • अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को देश ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। नई दिल्ली स्थित उनके स्मारक सदैव अटल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता भी शामिल हुए। सभी ने वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके योगदान और भारतीय राजनीति में उनकी विशिष्ट भूमिका को याद किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व को लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रभावी नेतृत्व और राष्ट्रहित से जोड़कर देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाजपेयी को याद करते हुए उनके नेतृत्व और विचारों को देश के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित किया और उनके विचार तथा कार्य आज भी देशवासियों को दिशा देते हैं। वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी रहा।

    अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे जिनकी पहचान केवल प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता, कवि और राजनेता के तौर पर भी बनी। उनकी भाषण शैली, सरल व्यवहार और राजनीतिक संवाद का अलग अंदाज उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता था। संसद में उनके वक्तव्यों को लंबे समय तक राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

    वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 में उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला, लेकिन उनकी सरकार 13 दिन ही चल सकी। इसके बाद वर्ष 1998 में उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1999 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2004 तक सरकार का नेतृत्व किया। इस दौरान गठबंधन सरकार को स्थिरता के साथ चलाना उनके राजनीतिक कौशल की महत्वपूर्ण मिसाल माना गया।

    उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में वर्ष 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण भारत की महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाओं में शामिल रहा। इस निर्णय के बाद भारत की परमाणु क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में बुनियादी ढांचे और सड़क संपर्क को मजबूत करने से जुड़ी कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया।

    स्वर्णिम चतुर्भुज योजना उनके कार्यकाल की प्रमुख विकास परियोजनाओं में रही। इसका उद्देश्य देश के प्रमुख महानगरों और महत्वपूर्ण शहरों को बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना था। इसके अलावा ग्रामीण सड़क संपर्क और दूरसंचार क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पहल हुईं।

    अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान के प्रति देश की मान्यता के रूप में देखा गया।

    16 अगस्त 2018 को वाजपेयी का निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर भी उनके स्मारक सदैव अटल पर नेताओं ने पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। भारतीय राजनीति में वाजपेयी की विरासत आज भी उनके नेतृत्व, भाषण कला, कविताओं और राष्ट्रसेवा से जुड़ी स्मृतियों के रूप में मौजूद है।

  • दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    नई दिल्ली :आधुनिक दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण अधिकांश लोग पतले दिखने को ही अच्छी फिटनेस का पर्याय मानने लगे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल वजन कम होना या दुबला दिखना किसी व्यक्ति के पूर्ण स्वस्थ होने का प्रमाण नहीं है। वास्तविक फिटनेस का सीधा संबंध इस बात से है कि आपका शरीर दैनिक जीवन के कार्यों को कितनी सहजता और ऊर्जा के साथ पूरा करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बाहरी शारीरिक बनावट के आधार पर किसी के स्वास्थ्य का सही आकलन नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति दिखने में सामान्य या पतला है, लेकिन दिनभर सुस्ती महसूस करता है, सीढ़ियां चढ़ने में हांफने लगता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो उसे पूर्णतः स्वस्थ नहीं माना जा सकता। असली फिटनेस शरीर को क्रियाशील, ऊर्जावान और बीमारियों से मुक्त बनाए रखने में निहित है।

    शारीरिक क्षमता का परीक्षण दैनिक गतिविधियों से होता है। थोड़ा सा चलने, वजन उठाने या सामान्य मेहनत के काम करने पर अत्यधिक थकान या सांस फूलना खराब कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का संकेत हो सकता है। यदि पहले की तुलना में सामान्य काम करने में भी परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय अपनी जीवनशैली और आहार में आवश्यक सुधार करना चाहिए।

    एक स्वस्थ शरीर के लिए लचीलापन और शारीरिक संतुलन भी बेहद महत्वपूर्ण घटक हैं। बिना किसी कठिनाई के झुकना, मुड़ना और दैनिक गतिविधियों के दौरान संतुलन बनाए रखना अच्छी शारीरिक स्थिति को दर्शाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से हल्का व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।

    शारीरिक संकेतकों की बात करें तो रेस्टिंग हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पैमाना हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, सामान्य स्थिति में नियंत्रित ब्लड प्रेशर और स्थिर हृदय गति अंदरूनी रूप से मजबूत शरीर का संकेत देती है। बाहर से फिट दिखने वाले व्यक्ति भी उच्च रक्तचाप या अन्य आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं, इसलिए नियमित जांच आवश्यक है।

    शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन भी उतना ही अनिवार्य है। अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन या उदासी व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल मांसपेशियों को मजबूत करती है, बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग केवल वजन घटाने वाले भ्रामक पैमानों के पीछे न भागें। संतुलित पोषण, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त दिनचर्या को अपनाकर ही वास्तविक फिटनेस हासिल की जा सकती है। अपने शरीर के संकेतों को समझना और आंतरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना ही लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे कारगर तरीका है।

  • कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बड़ा आदेश: CPCT के साथ 10 सर्टिफिकेट कोर्स और 50 क्रेडिट अनिवार्य, नहीं तो मानदेय पर संकट

    कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बड़ा आदेश: CPCT के साथ 10 सर्टिफिकेट कोर्स और 50 क्रेडिट अनिवार्य, नहीं तो मानदेय पर संकट


    भोपाल । मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए सरकार ने तकनीकी दक्षता और साइबर सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक नगर पालिक निगम नगरपालिका और नगर परिषद में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को निर्धारित योग्यता और प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इसके लिए 30 दिन की समय सीमा तय की गई है। तय अवधि में जरूरी शर्तें पूरी नहीं करने वाले ऑपरेटरों के नियोजन और मानदेय या वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नगरीय निकायों का काम तेजी से ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हो रहा है।

    विभाग के अनुसार नगरीय निकायों की अलग अलग शाखाओं में कंप्यूटर ऑपरेटर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हैं। जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर संपत्ति कर जलकर राजस्व प्रधानमंत्री आवास योजना और दूसरी नागरिक सेवाओं से जुड़े ऑनलाइन काम इनके माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में ऑपरेटरों की कंप्यूटर दक्षता के साथ सरकारी डेटा की सुरक्षा और साइबर खतरों की समझ भी जरूरी मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में CPCT पहले से ही कई कंप्यूटर आधारित सरकारी पदों के लिए महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षा रही है। सरकारी विभागों में कंप्यूटर दक्षता से जुड़े पदों पर CPCT की अनिवार्यता के उदाहरण पहले भी सामने आते रहे हैं।

    नए निर्देशों के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी गई हैं। पहली शर्त CPCT परीक्षा पास करने से जुड़ी है। यानी संबंधित ऑपरेटर के पास निर्धारित कंप्यूटर दक्षता का प्रमाण होना जरूरी होगा। दूसरी शर्त भारत सरकार के मिशन कर्मयोगी यानी iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने की है। तीसरी शर्त इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने की है। मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता और कार्य दक्षता बढ़ाना है।

    आदेश के साथ प्रशिक्षण के लिए जरूरी पाठ्यक्रमों की सूची भी बताई गई है। इनमें बेसिक कंप्यूटर से जुड़े पाठ्यक्रमों के अलावा माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल जैसे सॉफ्टवेयर से जुड़े प्रशिक्षण शामिल हैं। डेटा एंट्री और सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने वाले काम में इनकी उपयोगिता बताई गई है। इसके साथ साइबर सिक्योरिटी बेसिक्स और डिजिटल सेफ्टी जैसे पाठ्यक्रमों के जरिए सरकारी कंप्यूटर सिस्टम और पासवर्ड सहित महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने की जानकारी दी जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित निर्णय लेने से जुड़े प्रशिक्षण भी ऑपरेटरों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं।

    सरकार की इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन कंप्यूटर ऑपरेटरों पर पड़ सकता है जिन्होंने अभी तक निर्धारित तकनीकी योग्यता या प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। आदेश के मुताबिक 30 दिनों की समय सीमा में जरूरी शर्तें पूरी नहीं होने पर संबंधित ऑपरेटर को आगे नियोजन में रखने या हटाने और नियमानुसार मानदेय या वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। यानी यह सिर्फ प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश नहीं है बल्कि इसके साथ सेवा और भुगतान पर भी असर जुड़ा हुआ है।

    नगरीय निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या एक समान नहीं होती। बड़े नगर निगमों में कई जोनल कार्यालय और अलग अलग शाखाएं होने के कारण ऑपरेटरों की जरूरत ज्यादा होती है। वहीं नगरपालिकाओं में राजस्व स्थापना लेखा और नागरिक सेवाओं से जुड़े काउंटरों पर ऑपरेटर काम करते हैं। नगर परिषदों में अपेक्षाकृत कम संख्या में कर्मचारी डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक कामकाज को संभालते हैं।

    सरकार के इस कदम का उद्देश्य डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ सरकारी डेटा को साइबर खतरों से सुरक्षित रखना भी बताया जा रहा है। नगरीय निकायों में नागरिकों से जुड़ी बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत और प्रशासनिक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। ऐसे में कंप्यूटर सिस्टम चलाने वाले कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी होना जरूरी है। बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सरकारी संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार अनजान लिंक ओटीपी और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों से सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।

    इस आदेश के बाद अब नगरीय निकायों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने 30 दिन में अपनी तकनीकी योग्यता और प्रशिक्षण पूरा करने की चुनौती है। विभाग की मंशा साफ है कि डिजिटल शासन व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता केवल कंप्यूटर चलाने तक सीमित न रहे बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा डेटा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की भी पर्याप्त समझ हो। आने वाले दिनों में नगरीय निकायों में इन निर्देशों के पालन और ऑपरेटरों की योग्यता की स्थिति पर निगरानी बढ़ने की संभावना है।