Author: bharati

  • मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज

    मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और सियासी घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक की बातें बाहर आने पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि गोपनीय चर्चा सार्वजनिक करने वाले नेता को भविष्य में बैठक में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। दूसरी ओर सीहोर में आदिवासी परिवारों के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की आलोचना कर रहे विधायक कमलेश्वर डोडियार को एक व्यक्ति ने टोक दिया। वहीं रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का उद्योगपति इलॉन मस्क को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और अंदरूनी समीकरणों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक में मंत्रियों द्वारा सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि बैठक में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। जब रीवा में मीडिया ने उनसे बैठक की चर्चाओं को लेकर सवाल किए तो वे नाराज दिखाई दिए। शुक्ल ने साफ कहा कि कोर ग्रुप की बैठक में हुई बातें बाहर पहुंचाने वाला व्यक्ति भविष्य में उस बैठक में बैठने लायक नहीं रहेगा। उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर गोपनीय जानकारी बाहर जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि किसने जानकारी साझा की है इस बारे में कोई नाम सामने नहीं आया है।

    इसी बीच सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। रतलाम जिले के सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका पर सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि शिवराज मुख्यमंत्री रहे हैं और आदिवासियों को पट्टे देने का अधिकार उनके पास था लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। इसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मामा उनके सुख-दुख के साथी हैं और इस समय आदिवासियों का साथ दे रहे हैं।

    इसके बाद विधायक के बयान का रुख बदल गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को बुरा आदमी नहीं कहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव से हजार गुना अच्छे थे। इस घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद विरोध जारी है और प्रभावित लोग जमीन के अधिकारों तथा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

    रीवा में भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान भी सुर्खियों में रहा। एक कार्यक्रम में उन्होंने दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल इलॉन मस्क को लेकर तीखी टिप्पणी की। सांसद ने कहा कि वे मस्क को दो घूंसे मारकर भगा देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को कोई झुका नहीं सकता। सांसद ने यह भी कहा कि मस्क को भारत में अनुमति तभी मिलेगी जब वे प्रधानमंत्री की शर्तें मानेंगे। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके बयान पर तंज कसा तो कुछ ने इसे सुर्खियां बटोरने वाला बयान बताया।

    इन राजनीतिक घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों में एक वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारी उनकी मौजूदा शक्तियां कम कराने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उनकी जिम्मेदारियां बरकरार रखी गईं और उन्हें एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में भाजपा की आंतरिक बैठकों की गोपनीयता से लेकर आदिवासी मुद्दे और नेताओं के तीखे बयानों तक कई विषय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इन बयानों और घटनाओं पर पार्टी तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया किस तरह सामने आती है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष

    आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष


    सीहोर 
    । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी गुरुवार को भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने की तैयारी में हैं। वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखेंगे और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाएंगे। कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पीड़ित परिवारों से मिल चुके हैं। उन्होंने कार्रवाई को अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए नाराजगी जताई थी।

    वन विभाग ने 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और खेती के जरिए अपना जीवनयापन करते हैं। मकान टूटने से 12 परिवारों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। आंदोलन में शामिल रमेश बारेला के मुताबिक आदिवासी समाज की मांग है कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए जाएं। प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे दिए जाएं और उनके रहने भोजन तथा स्वास्थ्य की व्यवस्था की जाए। साथ ही फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाए।

    आदिवासी समाज ने आरोप लगाया है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे उन परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है जो लंबे समय से कृषि और जंगल पर निर्भर हैं। समाज ने सीहोर जिले के कई गांवों के साथ विदिशा जिले के ग्यारसपुर मेहंदीपुर डगरवाड़ा बदनपुर शमशाबाद लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं। आदिवासी प्रतिनिधियों ने पुराने पट्टों और जमीन के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

    आंदोलनकारियों का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यारनगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने और ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन शिकायतों की जांच और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर आदिवासी समाज मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करेगा। रमेश बारेला ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित पदयात्रा में शिवराज सिंह चौहान के शामिल होने की जानकारी उनके पास नहीं है और इसमें आदिवासी समाज के लोग ही हिस्सा लेंगे।

    दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने वन भूमि पर अवैध कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3 लाख 37 हजार 500 सागौन के पौधे लगाए गए थे। इनमें से 78 हजार 700 पौधे काटे जाने और 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

    जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों को भी आधार बनाया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 2021 तक संबंधित क्षेत्र खाली दिखाई देता था जबकि 2022 से वहां झोपड़ियों और खेती के संकेत मिले। रिपोर्ट के अनुसार 11 अक्टूबर की कार्रवाई में नौ झोपड़ियां हटाई गईं और पूरी प्रक्रिया की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई। वन विभाग का दावा है कि रिजर्व फॉरेस्ट की 31.48 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मध्यप्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। अब मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात और सरकारी पक्ष की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित परिवारों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल जमीन के अधिकारों और वन भूमि से जुड़े नियमों को लेकर विवाद जारी है।


  • बिना टिकट पकड़े जाने पर विवाद हुआ तो कैमरा खोलेगा राज, भोपाल मंडल के TTE को मिलेंगे बॉडी वियरिंग कैमरे

    बिना टिकट पकड़े जाने पर विवाद हुआ तो कैमरा खोलेगा राज, भोपाल मंडल के TTE को मिलेंगे बॉडी वियरिंग कैमरे


    भोपाल । ट्रेनों में टिकट चेकिंग के दौरान यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने नई पहल की है। अब टिकट चेकिंग स्टाफ की वर्दी पर बॉडी वियरिंग कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए रेलवे ने 56 कैमरों का ऑर्डर दिया है। इन कैमरों की मदद से टिकट चेकिंग के दौरान यात्री और कर्मचारी के बीच होने वाली बातचीत तथा घटनाक्रम को रिकॉर्ड किया जा सकेगा। रेलवे को उम्मीद है कि इससे शिकायतों की जांच आसान होगी और टिकट चेकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के मुताबिक पिछले दो साल से टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए बॉडी वियरिंग कैमरों की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब इन्हें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेलवे की तैयारी अगले दो से तीन महीने में कैमरों का इस्तेमाल शुरू करने की है। शुरुआती चरण में इनका उपयोग प्रमुख ट्रेनों में किया जाएगा। इसके बाद जरूरत और उपलब्धता के अनुसार दूसरे चरण में अधिक कर्मचारियों को भी कैमरों से लैस किया जा सकता है।

    दरअसल टिकट चेकिंग स्टाफ यात्रियों के सीधे संपर्क में रहता है। ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कई बार बहस या विवाद की स्थिति बन जाती है। कुछ मामलों में यात्री कर्मचारियों पर दुर्व्यवहार करने या उनकी बात नहीं सुनने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराते हैं। दूसरी ओर कर्मचारियों को भी ड्यूटी के दौरान विवादों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने के बाद रेलवे को यह पता लगाने के लिए जांच करनी पड़ती है कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था। इसमें समय लग सकता है।

    बॉडी वियरिंग कैमरों से रिकॉर्ड होने वाली बातचीत और घटनाक्रम शिकायतों की जांच में मददगार साबित हो सकते हैं। रेलवे के अनुसार रेल मदद पर मिलने वाली शिकायतों का मंडल स्तर पर विश्लेषण किया जाता है। यदि किसी घटना की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होगी तो संबंधित अधिकारियों के लिए दोनों पक्षों की भूमिका समझना और शिकायत का उचित निराकरण करना आसान हो सकता है। इससे बिना टिकट यात्रा पर कार्रवाई या टिकट चेकिंग के दौरान हुए विवादों की जांच में भी मदद मिलेगी।

    रेलवे पहले चरण में शान-ए-भोपाल और वंदे भारत जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में कैमरों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा भोपाल मंडल से शुरू होने वाली या यहां से गुजरने वाली अन्य प्रमुख ट्रेनों में भी इन्हें लगाया जा सकता है। शुरुआत में 56 कैमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। आगे चलकर इस व्यवस्था का विस्तार करने की योजना है।

    भोपाल मंडल में टिकट चेकिंग स्टाफ की संख्या करीब 300 से 320 बताई गई है। ऐसे में शुरुआती कैमरों के बाद बाकी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से इस सुविधा से जोड़ने की तैयारी की जा सकती है। रेलवे बुकिंग और रिजर्वेशन काउंटरों पर तैनात कर्मचारियों के लिए भी बॉडी वियरिंग कैमरों की संभावनाओं पर विचार करेगा।
    रेलवे का उद्देश्य केवल शिकायतों की जांच करना नहीं बल्कि टिकट चेकिंग प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना भी है।

    रिकॉर्डिंग से यात्रियों और कर्मचारियों दोनों को अपना पक्ष रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस व्यवस्था का वास्तविक असर कैमरों के नियमित इस्तेमाल और रिकॉर्डिंग के उचित प्रबंधन पर निर्भर करेगा। फिलहाल कैमरों की खरीद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले दो से तीन महीनों में इन्हें इस्तेमाल में लाने की तैयारी है।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच

    भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दुकान में जल रही भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी। इसके बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में कई दुकानों और एक दर्जन से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। अब पुलिस के साथ नगर निगम भी बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती कर रहा है।

    जांच के मुताबिक बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में भट्टी जल रही थी। उसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैलती चली गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास की चार अन्य दुकानों को भी प्रभावित किया। इनमें आम्रपाली रेस्टोरेंट विजय स्टोर एक कैफे और मोबाइल की दुकान शामिल थीं। हादसे के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक आग की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी।

    दूसरी ओर नगर निगम यह भी जांच कर रहा है कि संबंधित दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं। फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच के बाद इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यह घटना एक बार फिर बाजारों में अग्नि सुरक्षा और दुकानों के आसपास रखे सामान से पैदा होने वाले खतरे को लेकर सवाल खड़े करती है।

    आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को बाजार में आगे बढ़ने में परेशानी हुई थी। दुकानों के सामने रखे सामान और रेहड़ियों के कारण रास्ता बाधित होने की बात सामने आई थी। इसी के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई और दो दमकल वाहनों को बाजार में चलाकर रास्तों की स्थिति देखी गई। जहां दमकलों के आगे बढ़ने में बाधा आई वहां निगम के अमले ने सामान जब्त किया।

    नगर निगम अब रेहड़ी संचालकों को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग की जा रही है। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित सीमा से आगे सामान रखने पर कार्रवाई होगी।

    इस घटना के बाद बाजार में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर व्यापक सवाल भी उठ रहे हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर दो अन्य छोले-भटूरे की दुकानें संचालित हो रही हैं। आसपास नमकीन की दुकानें भी हैं जहां भट्टियां जलती हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।

    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय रही है। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे थे। जुमेराती इब्राहिमपुरा नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत अन्य बाजारों में भी सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच की जरूरत है।

    बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 17 दिसंबर 2017 को लगी आग में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद फायर सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन उनके रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। न्यू मार्केट की घटना ने साफ कर दिया है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच नियमित रखरखाव और दमकल वाहनों के लिए रास्ते खुले रखना भी उतना ही जरूरी है।


  • OTT Release This Friday, वीकेंड पर क्या देखें, 16 अक्टूबर को आ रहीं 9 नई फिल्में, जानिए किस प्लेटफॉर्म पर मिलेगा एंटरटेनमेंट

    OTT Release This Friday, वीकेंड पर क्या देखें, 16 अक्टूबर को आ रहीं 9 नई फिल्में, जानिए किस प्लेटफॉर्म पर मिलेगा एंटरटेनमेंट


    नई दिल्ली। ओटीटी पर फिल्में और वेब सीरीज देखने वालों के लिए 16 अक्टूबर 2026 का शुक्रवार खास होने वाला है। इस दिन अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नौ फिल्में रिलीज होने की जानकारी सामने आई है। इस बार दर्शकों को क्राइम कॉमेडी से लेकर एक्शन और थ्रिलर तक कई तरह की कहानियां देखने को मिलेंगी। वहीं हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए भी खास विकल्प मौजूद हैं। अगर आप इस वीकेंड घर बैठे मनोरंजन करने की योजना बना रहे हैं तो इन फिल्मों को अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं मास्टरप्लान की जो अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाली है। इस क्राइम कॉमेडी में स्टैनली टुची रोजर नाम के एक ऐसे चोर की भूमिका में हैं जो चोरी की दुनिया से दूर हो चुका है। लेकिन मोनालिसा की मशहूर पेंटिंग चुराने के लिए वह एक हैकर और फ्रांस के विस्फोटक विशेषज्ञ के साथ मिलकर योजना बनाता है। कहानी में तब नया मोड़ आता है जब रोजर अपने साथियों के सामने एक चौंकाने वाला राज खोलता है। अपराध और कॉमेडी का मिश्रण इस फिल्म को दिलचस्प बना सकता है।

    दूसरी फिल्म डीसी सोनी लिव पर रिलीज होने वाली है। इसमें लोकेश कनगराज देवदास नाम के एक बागी अपराधी की भूमिका में दिखाई देंगे। एक लूट के दौरान पुलिस अधिकारी की मौत के बाद वह फरार हो जाता है और चंद्रा नाम की महिला की मदद लेता है। वामिका गब्बी ने चंद्रा का किरदार निभाया है। शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के चर्चित उपन्यास देवदास से प्रेरित यह कहानी अपराध और रिश्तों को एक अलग नजरिए से पेश करती है।

    एप्पल टीवी पर आने वाली तेनजिंग इतिहास और रोमांच में दिलचस्पी रखने वाले दर्शकों के लिए खास हो सकती है। फिल्म में शेरपा पर्वतारोही तेनजिंग नोर्गे की जिंदगी और 1953 में एडमंड हिलेरी के साथ एवरेस्ट फतह करने की ऐतिहासिक यात्रा दिखाई गई है। इसमें पहाड़ों के प्रति उनके लगाव के साथ संघर्ष और भेदभाव के बीच सम्मान हासिल करने की कोशिशों को भी दर्शाया गया है।

    जी5 पर रिलीज होने वाली मलयालम साइकोलॉजिकल थ्रिलर आशा की कहानी एक विधवा के इर्दगिर्द घूमती है। उर्वशी ने आशा का किरदार निभाया है जो अपने अतीत की कड़वी यादों से परेशान है। एक छोटी कार दुर्घटना के बाद उसकी जिंदगी में घटनाएं तेजी से बदलने लगती हैं। इसी दौरान उसकी मुलाकात जीमोन से होती है और दोनों के बीच शुरू हुआ विवाद गंभीर रूप ले लेता है।

    नेटफ्लिक्स पर मनी ट्रैप द कारुन ट्रेजर और एन्ना विलाई जैसी फिल्में भी रिलीज होने वाली हैं। मनी ट्रैप में एक रहस्यमयी नक्शे के जरिए खजाने तक पहुंचने की कोशिश और बड़ी ठगी की योजना दिखाई गई है। दूसरी ओर एन्ना विलाई की कहानी रामेश्वरम में रहने वाले एक ऐसे व्यक्ति की है जो समुद्र से सिक्के निकालकर परिवार चलाता है। सोने का पेंडेंट मिलने के बाद उसकी ईमानदारी ही उसके लिए परेशानी का कारण बन जाती है।

    लायंसगेट प्ले पर आने वाली सैक्रिफाइस में एक चैरिटी कार्यक्रम के दौरान बंधक बनाए गए लोगों की कहानी दिखाई गई है। ग्रीस के एक सुनसान द्वीप पर होने वाला जश्न अचानक खतरनाक स्थिति में बदल जाता है। फिल्म में अन्या टेलर-जॉय क्रिस इवांस और सलमा हायेक जैसे कलाकार नजर आएंगे।

    हॉरर पसंद करने वालों के लिए ईवल डेड बर्न और फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स भी सूची में शामिल हैं। ईवल डेड बर्न में पति की मौत के बाद ससुराल पहुंची महिला के साथ होने वाली डरावनी घटनाओं को दिखाया गया है। वहीं फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स मौत और उससे बचने की कोशिशों पर आधारित सुपरनेचुरल हॉरर कहानी है। इस तरह 16 अक्टूबर की ओटीटी रिलीज लिस्ट में अलग-अलग पसंद के दर्शकों के लिए कई विकल्प हैं। हालांकि रिलीज की तारीख और प्लेटफॉर्म की उपलब्धता क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है इसलिए देखने से पहले संबंधित ओटीटी ऐप पर जानकारी जांच लेना बेहतर होगा।

  • Jailer 2 Hit or Flop, रजनीकांत की फिल्म को मिले मिले-जुले रिव्यू, क्या बॉक्स ऑफिस पर बनेगी 2026 की सबसे बड़ी हिट

    Jailer 2 Hit or Flop, रजनीकांत की फिल्म को मिले मिले-जुले रिव्यू, क्या बॉक्स ऑफिस पर बनेगी 2026 की सबसे बड़ी हिट


    नई दिल्ली। रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित फिल्म जेलर 2 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म के रिलीज होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कई यूजर्स ने फिल्म की जमकर तारीफ करते हुए इसे ब्लॉकबस्टर बताया है। वहीं कुछ दर्शकों को फिल्म का दूसरा हिस्सा धीमा और कमजोर लगा है। ऐसे में फिल्म को लेकर शुरुआती प्रतिक्रियाएं काफी हद तक सकारात्मक हैं लेकिन दर्शकों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है।

    फिल्म के पहले हाफ को लेकर सोशल मीडिया पर खास चर्चा देखने को मिल रही है। कई दर्शकों ने रजनीकांत के अंदाज और उनके दमदार स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की है। एक यूजर के मुताबिक फिल्म का पहला हाफ मनोरंजक है और इसमें डार्क ह्यूमर का अच्छा इस्तेमाल किया गया है। योगी बाबू की कॉमेडी को भी पसंद किया जा रहा है। दर्शकों ने अनिरुद्ध रविचंदर के बैकग्राउंड म्यूजिक की तारीफ करते हुए कहा कि संगीत फिल्म के कई दृश्यों को और प्रभावशाली बनाता है। कुछ लोगों का कहना है कि फिल्म में ऐसे कई सीन हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं।

    एक अन्य यूजर ने रजनीकांत की एक्टिंग की प्रशंसा करते हुए उन्हें बेहतरीन कलाकार बताया। कुछ दर्शकों ने जेलर 2 को न्यूक्लियर ब्लास्ट तक कह दिया। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार की कॉमेडी और सुपरस्टार को बड़े पर्दे पर पेश करने के अंदाज की भी तारीफ की जा रही है। दर्शकों के मुताबिक फिल्म की कहानी पहले भाग के घटनाक्रम को आगे बढ़ाती है और रजनीकांत के प्रशंसकों को कई शानदार पल देखने को मिल सकते हैं।

    हालांकि फिल्म के दूसरे हाफ को लेकर कुछ दर्शकों ने निराशा भी जताई है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का कहना है कि शुरुआती हिस्से में मनोरंजन और कॉमेडी का अच्छा संतुलन है लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। कुछ दर्शकों ने दूसरे हाफ को कमजोर और बोरिंग बताया है। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में पहले हाफ को भी औसत से कम बताया गया है। इससे साफ है कि फिल्म सभी दर्शकों की उम्मीदों पर एक समान खरी नहीं उतरी है।

    रजनीकांत के एंट्री सीन को लेकर भी सोशल मीडिया पर खूब प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई प्रशंसकों ने इसे फिल्म के सबसे दमदार पलों में शामिल बताया है। इसके अलावा अनिरुद्ध के संगीत और निर्देशक नेल्सन की शैली की तारीफ भी की जा रही है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में ऋतिक रोशन के कैमियो का भी जिक्र है जिसे लेकर दर्शकों में उत्सुकता देखने को मिल रही है।

    बॉक्स ऑफिस की बात करें तो शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जेलर 2 पहले दिन 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती है। कुछ दर्शकों ने यह भी अनुमान लगाया है कि फिल्म इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो सकती है। हालांकि ये शुरुआती अनुमान हैं और वास्तविक प्रदर्शन का आकलन आधिकारिक कमाई के आंकड़े सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

    जेलर 2 साल 2023 में रिलीज हुई फिल्म जेलर का सीक्वल है। इसका निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार ने किया है। फिल्म में रजनीकांत के साथ विजय सेतुपति मोहनलाल विद्या बालन जैकी श्रॉफ और राम्या कृष्णन जैसे कलाकार नजर आ रहे हैं। फिलहाल सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है लेकिन इसे हिट या फ्लॉप घोषित करने के लिए बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों और आगे मिलने वाली दर्शकों की प्रतिक्रिया का इंतजार करना होगा।

  • बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने की तैयारी में शाहरुख की ‘किंग’, 450 करोड़ का बजट, टीजर को लेकर बड़ी चर्चा

    बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने की तैयारी में शाहरुख की ‘किंग’, 450 करोड़ का बजट, टीजर को लेकर बड़ी चर्चा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की आने वाली फिल्म किंग को लेकर फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ती जा रही है। फिल्म की शूटिंग से जुड़ी खबरों के बाद अब इसके टीजर और बजट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म का टीजर शाहरुख खान के जन्मदिन यानी 2 नवंबर को रिलीज किया जा सकता है। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस खबर ने शाहरुख के प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं क्योंकि लंबे समय बाद अभिनेता एक नए अंदाज में बड़े पर्दे पर नजर आने की तैयारी कर रहे हैं। फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके कथित बजट की हो रही है। बताया जा रहा है कि किंग को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इस पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

    शाहरुख खान इस फिल्म में अभिनय करने के साथ इसके निर्माण से भी जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार किंग उनके प्रोडक्शन की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल हो सकती है। इतने बड़े बजट के साथ फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। हालांकि किसी फिल्म की सफलता केवल उसके बजट पर निर्भर नहीं करती बल्कि कहानी निर्देशन अभिनय संगीत और दर्शकों की प्रतिक्रिया भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किंग की असली ताकत का पता फिल्म का टीजर और ट्रेलर सामने आने के बाद ही चलेगा। फिलहाल फिल्म को लेकर सामने आ रही जानकारियों ने इसे बॉलीवुड की चर्चित आगामी फिल्मों में शामिल कर दिया है।

    फिल्म के टीजर को लेकर कहा जा रहा है कि इसे शाहरुख खान के 61वें जन्मदिन के मौके पर जारी करने की योजना है। अगर ऐसा होता है तो प्रशंसकों को 2 नवंबर को फिल्म की पहली झलक देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक शाहरुख इस फिल्म में अपने पुराने किरदारों से अलग अंदाज में दिखाई देंगे। उनका लुक और एक्शन फिल्म के प्रमुख आकर्षण हो सकते हैं। उनके दमदार संवादों को लेकर भी काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं। हालांकि टीजर की रिलीज तारीख और उसमें दिखाई जाने वाली झलक को लेकर अंतिम जानकारी मेकर्स की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

    किंग की मार्केटिंग को लेकर भी बड़ी तैयारी की चर्चा है। रिपोर्ट के अनुसार टीजर जारी होने के साथ ही फिल्म का प्रचार अभियान शुरू किया जा सकता है। मेकर्स की कोशिश बताई जा रही है कि फिल्म दर्शकों के बीच उसी तरह उत्साह पैदा करे जैसा शाहरुख की पठान और जवान ने किया था। फिल्म के एक्शन और संगीत को खास बनाने पर भी ध्यान दिए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा डैडी कूल नाम के एक गाने की चर्चा है जिसे शाहरुख खान और उनकी बेटी सुहाना खान पर फिल्माया गया बताया जा रहा है। पिता और बेटी की जोड़ी को पर्दे पर देखने के लिए भी दर्शकों में दिलचस्पी बनी हुई है।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसे खास बनाती है। रिपोर्ट के मुताबिक शाहरुख और सुहाना खान के अलावा रानी मुखर्जी दीपिका पादुकोण करीना कपूर अभिषेक बच्चन बॉबी देओल अरशद वारसी जयदीप अहलावत और अनिल कपूर जैसे कलाकार फिल्म में नजर आ सकते हैं। हालांकि पूरी कास्ट और सभी किरदारों की जानकारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार ही तय मानी जानी चाहिए। फिल्म की रिलीज 24 दिसंबर 2026 को क्रिसमस के मौके पर प्रस्तावित बताई गई है। यदि तय कार्यक्रम के मुताबिक फिल्म सिनेमाघरों में पहुंचती है तो छुट्टियों के दौरान इसे दर्शकों का बड़ा वर्ग मिल सकता है। अब सभी की निगाहें 2 नवंबर पर टिकी हैं क्योंकि टीजर सामने आने के बाद ही शाहरुख खान की किंग के लुक कहानी और एक्शन को लेकर तस्वीर अधिक साफ हो सकेगी।

  • राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा

    राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच संभावित नजदीकी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी में CJP के नेताओं को आमंत्रित करने की कोशिश की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस और इस संगठन के संबंधों को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसे दोनों के बीच दोस्ती या किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं तक पहुंचने के लिए वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की मदद लेने की कोशिश की थी। इस घटनाक्रम को विपक्षी एकजुटता की रणनीति और कांग्रेस के बदलते राजनीतिक रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह कांग्रेस की ओर से CJP से संपर्क करने और उसके नेताओं को राहुल गांधी की हाई टी में आमंत्रित करने का फैसला किया गया। इसके लिए प्रशांत भूषण से मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया गया था। प्रशांत भूषण के करीबी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से उनसे संपर्क किया गया था। उस समय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में थे जबकि CJP के कुछ प्रमुख नेता जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में थे। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दीपके तक पहुंचने की कोशिश की गई लेकिन वह निमंत्रण को लेकर विशेष उत्साहित नहीं थे। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस संपर्क से दोनों पक्षों के बीच आगे कोई औपचारिक बातचीत होगी या नहीं।

    CJP मई में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। इसके बाद जून और जुलाई में संगठन ने परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के चलते संगठन को व्यापक पहचान मिली। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का एक वर्ग शुरुआत से ही CJP को लेकर संदेह जताता रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं की राय रही है कि यह संगठन आम आदमी पार्टी के प्रभाव में काम करता है या उसके राजनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी ओर CJP खुद को स्वतंत्र संगठन बताती रही है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे अभियान ने दोनों पक्षों के बीच संभावित संवाद की चर्चा को बढ़ा दिया है।

    राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले सभी समूह एक व्यापक आंदोलन का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि संगठन और झंडे अलग हो सकते हैं लेकिन संविधान की रक्षा और नागरिक अधिकारों की मांग करने वालों के उद्देश्य समान हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई समूह संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। इस बयान को विपक्षी दलों और अन्य संगठनों को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाया और युवाओं को जेल भेजे जाने की आलोचना की। राहुल गांधी के बयान पर अभिजीत दीपके ने उनका आभार जताया था। इससे दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाओं को लेकर चर्चा और तेज हो गई। हालांकि CJP सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं हुई थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि समान मुद्दों पर समर्थन के बावजूद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तालमेल पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है।

    इसी बीच अभिजीत दीपके ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने समर्थकों से शाम पांच बजे राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने की अपील की है। दूसरे शहरों में भी तिरंगा फहराने का आग्रह किया गया है। अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित मार्च में कितने लोग शामिल होते हैं और कांग्रेस तथा CJP के बीच आगे कोई संवाद होता है या नहीं। फिलहाल हाई टी के निमंत्रण की कोशिश को विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में एक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन इसे दोनों के बीच नई राजनीतिक दोस्ती का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

  • सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान

    सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान


    नई दिल्ली।
    दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी से जुड़े नेताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह के साथ सीजेपी से जुड़े सौरभ दास आशुतोष रांका रत्ना सिंह और अभिजीत दीपके के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं। शिकायत दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस सब डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की ओर से दर्ज कराई गई है। आरोप है कि एसीपी के संबंध में अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी से जुड़े नेताओं और पुलिस के बीच विवाद पहले से चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ दास और आशुतोष रांका को बुधवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों को जंतर मंतर पर प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश करने और सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब एससी एसटी एक्ट के तहत नया मामला दर्ज होने से पार्टी से जुड़े लोगों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

    सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर समर्थकों से शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर आएं और तिरंगा फहराएं। दीपके ने यह भी अपील की कि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते वे अपने शहरों में भी तिरंगा फहराएं। उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर भी बयान दिया और कहा कि जेल जाने की संभावना से उन्हें चिंता नहीं है। प्रस्तावित मार्च को लेकर अब प्रशासन की व्यवस्था और कानून व्यवस्था की स्थिति पर नजर रहेगी।

    इससे पहले नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आपातकाल लगाना चाहती है तो उसे आधिकारिक रूप से ऐसा करना चाहिए। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसे किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि सीजेपी एक स्वतंत्र समूह है और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्र रहने का मतलब इंडिया गठबंधन के खिलाफ होना नहीं है।

    विदेशी फंडिंग को लेकर उठे सवालों पर भी दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के इस दावे पर कि भारत में हाल के कुछ विरोध प्रदर्शनों को विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही है उन्होंने कहा कि यदि उनके पास इससे संबंधित सबूत हैं तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपना चाहिए। दीपके ने सवाल उठाया कि यदि ऐसे प्रमाण मौजूद हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। फिलहाल सीजेपी से जुड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले और प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

  • मौसम का बिगड़ता मिजाज बढ़ाएगा मुश्किलें, अल नीनो से बारिश और तापमान पर असर की आशंका, खाद्य कीमतों पर रहेगी नजर

    मौसम का बिगड़ता मिजाज बढ़ाएगा मुश्किलें, अल नीनो से बारिश और तापमान पर असर की आशंका, खाद्य कीमतों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली।
    भारत में अल नीनो को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। विश्व मौसम संगठन यानी डब्ल्यूएमओ के ताजा अनुमान के मुताबिक प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने की यह स्थिति फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है। इसका असर भारत के मौसम और कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। मौसम में बदलाव के कारण सर्दियों की बारिश और तापमान प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही आने वाले महीनों में फसलों की पैदावार और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी नजर रखनी होगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव का वास्तविक आकलन करने के लिए मौसम के ताजा आंकड़ों और अगले मानसून के पूर्वानुमान को समझना जरूरी होगा।
    विश्व मौसम संगठन के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है।

    रिपोर्ट में दिसंबर के आसपास इसके चरम पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। कुछ अनुमानों में तापमान सामान्य से करीब चार डिग्री सेल्सियस तक अधिक होने की आशंका व्यक्त की गई है। यदि ऐसा होता है तो अल नीनो की स्थिति मजबूत हो सकती है। इससे पहले 2015 में भी इस जलवायु घटना का प्रभाव काफी व्यापक रहा था। नए अनुमान में तापमान के चरम पर पहुंचने का समय नवंबर से बढ़ाकर दिसंबर बताया गया है। ऐसे में आशंका है कि इसका प्रभाव फरवरी 2027 के बाद भी कुछ समय तक बना रह सकता है।

    अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान के पैटर्न पर पड़ सकता है। भारत में इसका संबंध अक्सर मानसूनी बारिश में बदलाव से जोड़ा जाता है। हालांकि हर अल नीनो वर्ष में भारत में सूखा पड़े या बारिश सामान्य से कम हो ऐसा जरूरी नहीं है। इसका असर अन्य मौसमी परिस्थितियों और समुद्र तथा वायुमंडल के बीच होने वाली गतिविधियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए अगले मानसून की स्थिति को लेकर अभी से किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    इस बीच कृषि उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम रही और धान की बुवाई का क्षेत्र करीब 17 लाख हेक्टेयर घटा है। इसके चलते धान उत्पादन में लगभग 70 लाख टन की कमी आने का अनुमान जताया गया है। भारत में चावल प्रमुख खाद्यान्नों में शामिल है और देश में इसकी खपत के मुकाबले उत्पादन आम तौर पर अधिक रहता है। ऐसे में उत्पादन में गिरावट का वास्तविक असर घरेलू आपूर्ति और बाजार कीमतों पर निर्भर करेगा। यदि उपलब्धता प्रभावित होती है तो चावल समेत कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि उत्पादन में अनुमानित कमी का मतलब यह नहीं है कि देश में अनाज की तत्काल कमी हो जाएगी।

    मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. केजे रमेश के अनुसार अल नीनो का मिश्रित प्रभाव मानसून पर देखा गया है और धान की बुवाई में कमी आई है। उनका कहना है कि जितनी गंभीर आशंका जताई जा रही थी उतना प्रतिकूल असर सामने नहीं आया। उन्होंने फरवरी और मार्च तक परिस्थितियां सामान्य होने की उम्मीद जताई है। सर्दियों की बारिश के संबंध में भी कुछ पूर्वानुमानों में सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना बताई गई है। इससे साफ है कि अल नीनो के प्रभाव का आकलन करते समय सभी मौसमी संकेतों को साथ लेकर चलना होगा।

    जलवायु परिवर्तन का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की एक रिपोर्ट में तापमान बढ़ने से भारत की आर्थिक वृद्धि को होने वाले संभावित नुकसान की ओर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक गर्मी से कृषि उत्पादकता और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे रोजगार और आर्थिक विकास की गति पर दबाव पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट में जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई है। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति और फसल उत्पादन के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे। किसानों के लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान जल प्रबंधन और कृषि संबंधी तैयारी इस चुनौती से निपटने में मददगार साबित हो सकती है।