Author: bharati

  • अमेरिका में नई कार की पूजा के दौरान पंडित ने स्वस्तिक बनाने से किया इनकार, सामने आई बड़ी वजह

    अमेरिका में नई कार की पूजा के दौरान पंडित ने स्वस्तिक बनाने से किया इनकार, सामने आई बड़ी वजह

    नई दिल्ली ।विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और धार्मिक परंपराओं को सहेजकर रखने के लिए जाने जाते हैं। चाहे कोई नया घर खरीदना हो या नई गाड़ी, पूजा-पाठ और अनुष्ठान की रस्में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं। हाल ही में अमेरिका से एक ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां एक भारतीय मूल की महिला ने अपनी नई कार की वैदिक रीति-रिवाज से पूजा कराई। हालांकि, इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान एक अनोखी स्थिति देखने को मिली, जब पंडित ने गाड़ी पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाने से मना कर दिया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के अनुसार, अमेरिका में रह रही सारिका नाम की कंटेंट क्रिएटर ने अपनी नई कार की पूजा का आयोजन किया था। इस दौरान धोती-कुर्ता पहने पंडित ने भारतीय परंपरा के अनुसार पूरी विधि से पूजा संपन्न कराई। कार के बोनट पर सिंदूर से भगवान गणेश की आकृति बनाई गई, पुष्प अर्पित किए गए और सुरक्षा की कामना के साथ गंगाजल का छिड़काव किया गया। इसके अतिरिक्त, टायर के नीचे नींबू रखकर गाड़ी आगे बढ़ाने जैसी पारंपरिक रस्म भी पूरी की गई।

    पूजा के दौरान जब महिला ने कार पर ‘ओम’ और ‘स्वस्तिक’ बनाने का अनुरोध किया, तो पंडित ने ‘ओम’ का चिन्ह सहजता से अंकित कर दिया। हालांकि, जब स्वस्तिक बनाने की बात आई तो उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। पंडित का यह फैसला किसी धार्मिक मान्यता या मतभेद के कारण नहीं, बल्कि अमेरिका में स्वस्तिक को लेकर व्याप्त गलतफहमी और उससे उत्पन्न होने वाले संभावित विवादों से बचाव के लिए था।

    दरअसल, पश्चिमी देशों में कई लोग सनातन परंपरा के शुभ प्रतीक स्वस्तिक और नाजी जर्मनी के प्रतीक ‘हाकेनक्रूज’ के बीच अंतर नहीं समझ पाते हैं। अमेरिका में अनेक लोग स्वस्तिक को नाजी विचारधारा से जोड़कर देखने की भूल कर बैठते हैं। इसी भ्रम के कारण यह आशंका रहती है कि सार्वजनिक स्थान पर गाड़ी पर स्वस्तिक बना देखकर कोई स्थानीय निवासी विरोध दर्ज करा सकता है या फिर वाहन को क्षति पहुंचा सकता है।

    सांस्कृतिक विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदू धर्म में स्वस्तिक को हजारों वर्षों से अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। किसी भी शुभ कार्य, नए प्रतिष्ठान या वाहन क्रय पर स्वस्तिक का निर्माण अनिवार्य माना जाता है। इसके विपरीत, पश्चिमी समाज में ऐतिहासिक कारणों से इस चिन्ह को लेकर एक नकारात्मक धारणा बनी हुई है। इसी व्यावहारिक समस्या को देखते हुए अमेरिका में कई भारतीय परिवार कार के बाहरी हिस्से पर स्वस्तिक बनाने के बजाय उसे कागज पर बनवाकर गाड़ी के अंदर रख लेते हैं।

    विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अक्सर अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों और संवेदनशीलता का ध्यान रखना पड़ता है। मध्य प्रदेश सहित भारत के विभिन्न राज्यों से विदेश गए लोग अपनी संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास करते हैं, लेकिन सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए समय-समय पर व्यावहारिक बदलाव भी अपनाते हैं।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतीकों को लेकर जागरूकता और सही जानकारी के प्रसार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय को पंडित जी की समझदारी और व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने एक धार्मिक रस्म को किसी भी संभावित विवाद से बचा लिया।

  • भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP

    भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP


    भोपाल । भोपाल के बड़े तालाब पर छह दिनों तक चली राजा भोज मल्टी क्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का रविवार को भव्य समापन हुआ। बोट क्लब पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए और विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया। प्रतियोगिता में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया जबकि नेवी यूथ स्पोर्ट्स क्लब गोवा दूसरे और सिकंदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। प्रतियोगिता में 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और अलग अलग वर्गों में कुल 110 रेस के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भोपाल में बड़े तालाब की लहरों पर आयोजित इस प्रतियोगिता ने शहर को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के वाटर स्पोर्ट्स केंद्र के रूप में पहचान दिलाई। भोपाल में इससे पहले भी राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप में देशभर के 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं।
    समापन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश खेलों के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक एक स्टेडियम विकसित किया जाए। इन स्टेडियमों के साथ अलग अलग खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है ताकि गांव और छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग का बजट बढ़ाना उनके लिए संतोष और खुशी की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत को प्रदेश की बढ़ती खेल उपलब्धियों का महत्वपूर्ण आधार बताया।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक कुछ वर्ष पहले तक राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में मध्यप्रदेश की स्थिति 16वें या 17वें स्थान के आसपास थी लेकिन अब प्रदेश तीसरे स्थान तक पहुंच चुका है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत और खेल सुविधाओं के विस्तार को दिया। उनका कहना था कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की उपलब्धियों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।

    डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल 18 खेलों के लिए 11 खेल अकादमियां संचालित की जा रही हैं। सरकार का जोर केवल खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके प्रशिक्षण शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कोचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों के करियर और भविष्य की चिंता करना भी जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत खेलों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

    प्रतियोगिता के दौरान बड़े तालाब की लहरों पर खिलाड़ियों ने संतुलन गति और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। अलग अलग वर्गों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। राष्ट्रीय रैंकिंग से जुड़ी इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन खिलाड़ियों के लिए आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मजबूत करने में मददगार माना जा रहा है।

    NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की उपविजेता टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला शामिल रहे। NSS भोपाल के मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया।

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत है और सरकार इसका उपयोग खेल के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भोपाल में खेल संग्रहालय विकसित करने का आग्रह किया ताकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों को एक स्थान पर प्रदर्शित किया जा सके। उन्होंने बड़े तालाब में शिकारा संचालन को भी पर्यटन विकास से जोड़ने की बात कही।

    समारोह में मुख्यमंत्री ने जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता यामिनी मौर्य समेत विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। शॉटपुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल पोल वॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा कुलदीप कुमार और फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाबोड़े को भी सम्मान मिला। जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की टीम के खिलाड़ियों का भी सम्मान किया गया।

    मध्यप्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने में भोपाल की झीलों की अहम भूमिका है। राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में हुई थी जहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप जैसे आयोजन इस बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से विधानसभा स्तर तक खेल सुविधाएं बढ़ाने की योजना पर जोर दिए जाने से आने वाले समय में प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से भी नई खेल प्रतिभाओं के सामने आने की उम्मीद है।

  • टीकाकरण के बाद मासूम की मौत पर परिजनों का ओवरडोज का आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज

    टीकाकरण के बाद मासूम की मौत पर परिजनों का ओवरडोज का आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज


    भोपाल । भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र की नवजीवन कॉलोनी में दो माह की मासूम बच्ची की इलाज के दौरान मौत के बाद हड़कंप मच गया है। बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि 14 अगस्त को आंगनवाड़ी केंद्र में टीकाकरण और पोलियो की दवा पिलाए जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। परिवार का दावा है कि बच्ची को पोलियो की सात बूंद दवा पिलाने के साथ तीन इंजेक्शन भी लगाए गए थे। इसके बाद उसकी हालत खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां रविवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक फिलहाल टीकाकरण और बच्ची की मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मृत बच्ची की पहचान लक्ष्मी के रूप में हुई है। वह नवजीवन कॉलोनी छोला क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहती थी। परिवार मूल रूप से सिरोंज का रहने वाला बताया जा रहा है। परिजनों के मुताबिक लक्ष्मी परिवार की इकलौती बेटी थी और उसका एक बड़ा भाई है। बच्ची की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

    परिवार के अनुसार 14 अगस्त को लक्ष्मी को नियमित स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी केंद्र ले जाया गया था। वहां उसे पोलियो की दवा पिलाई गई और टीकाकरण किया गया। परिजनों का दावा है कि इसी दौरान बच्ची को तीन इंजेक्शन भी लगाए गए। घर लौटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी हालत को देखते हुए परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।

    बच्ची के पिता हलके राम ने आरोप लगाया है कि दो माह की मासूम को सात बूंद पोलियो दवा पिलाने के अलावा तीन इंजेक्शन लगाए गए थे। उनका कहना है कि दवा या इंजेक्शन की अधिक मात्रा के कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि यह परिवार का आरोप है और इसकी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने भी मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    छोला मंदिर थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के मुताबिक परिजनों के बयान में टीकाकरण के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने मर्ग कायम किया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बच्ची को केंद्र पर कौन से टीके लगाए गए थे और उसे कौन सी दवा दी गई थी। संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों से जानकारी लेने के साथ रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बच्चों को टीके और पोलियो की दवा देना नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। मध्यप्रदेश में पल्स पोलियो अभियान के दौरान पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाती रही है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इसका उद्देश्य बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखना है। ऐसे में इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि बच्ची की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और क्या उसकी तबीयत बिगड़ने के पीछे टीकाकरण से जुड़ी कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया थी या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण। इसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

    फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। परिवार की ओर से लगाए गए ओवरडोज और लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच रिपोर्ट सामने आने तक टीकाकरण को मौत का कारण बताना जल्दबाजी होगी।

  • पिता धर्मेंद्र की सुरक्षात्मक सोच के कारण अधूरा रह गया सनी देओल का पेशेवर रेसर बनने का बड़ा सपना

    पिता धर्मेंद्र की सुरक्षात्मक सोच के कारण अधूरा रह गया सनी देओल का पेशेवर रेसर बनने का बड़ा सपना

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सनी देओल ने अपने निजी जीवन और बचपन की इच्छाओं को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। एक लोकप्रिय टीवी क्विज शो के दौरान दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन से बातचीत करते हुए सनी देओल ने बताया कि वह एक समय पेशेवर फॉर्मूला वन रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे, लेकिन अपने पिता धर्मेंद्र के कारण उनका यह सपना अधूरा ही रह गया।

    सनी देओल हाल ही में अपनी नई फिल्म के प्रचार सिलसिले में सह-कलाकारों आमिर खान और प्रीति जिंटा के साथ पहुंचे थे। बातचीत के दौरान जब अमिताभ बच्चन ने उनके रेसिंग के प्रति जुनून के बारे में पूछा, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें तेज ड्राइविंग और थ्रिलर स्पोर्ट्स का बेहद शौक था। हालांकि, पारिवारिक माहौल और पिता के कड़े रुख के चलते वे इसमें आगे नहीं बढ़ सके।

    अभिनेता ने बताया कि उनके पिता धर्मेंद्र बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा बेहद सतर्क और संवेदनशील रहते थे। उस दौर में मोटर स्पोर्ट्स और फॉर्मूला वन रेसिंग जैसे खेलों को काफी जोखिम भरा और खतरनाक माना जाता था। इसी वजह से धर्मेंद्र जी ने उन्हें ऐसे किसी भी खतरनाक खेल में उतरने की अनुमति नहीं दी और उनका यह शौक महज एक इच्छा बनकर रह गया।

    भले ही सनी देओल का रेसिंग ड्राइवर बनने का सपना पूरा न हो सका हो, लेकिन उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक सफल और प्रतिष्ठित अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1983 में फिल्म ‘बेताब’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाले सनी ने ‘घायल’, ‘दामिनी’, ‘बॉर्डर’ और ‘गदर’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, जिनकी बदौलत वे आज भी दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं।

    वर्तमान में सनी देओल अपनी नई रिलीज हुई फिल्म के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं, जिसका निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। इस फिल्म में उनके साथ प्रीति जिंटा, करण देओल, शबाना आजमी और अली फजल जैसे मंझे हुए कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इमरान हाशमी की नई एक्शन फिल्म के साथ कड़े मुकाबले का सामना कर रही है।

    मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में सनी देओल के प्रशंसकों के बीच उनकी फिल्मों को लेकर हमेशा से जबरदस्त उत्साह देखने को मिलता रहा है। दर्शक उनके एक्शन और दमदार अभिनय को खूब पसंद करते हैं, और उनके पारिवारिक जीवन से जुड़ी यह नई बात जानकर उनके प्रशंसक काफी प्रभावित दिख रहे हैं।

    फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि सनी देओल का यह ईमानदारी भरा स्वीकारोक्ति बयान यह दर्शाता है कि भारतीय परिवारों में माता-पिता की सुरक्षात्मक सोच बच्चों के फैसलों को किस तरह प्रभावित करती है। बहरहाल, सिनेमा जगत में अपने चार दशक लंबे करियर में सनी देओल ने जो मुकाम हासिल किया है, वह बेहद सराहनीय है।

  • पत्नी सुनीता के बयानों पर अभिनेता गोविंदा का पलटवार, कहा- मुझे बदनाम करने की रची जा रही है साजिश

    पत्नी सुनीता के बयानों पर अभिनेता गोविंदा का पलटवार, कहा- मुझे बदनाम करने की रची जा रही है साजिश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच जारी आपसी खींचतान अब सार्वजनिक रूप से खुलकर सामने आ गई है। अपनी पत्नी के हालिया बयानों पर चुप्पी तोड़ते हुए अभिनेता ने एक वीडियो संदेश के जरिए कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। गोविंदा ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी उनके पेशेवर जीवन और काम में अड़चनें पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

    सोशल मीडिया पर सामने आए बयान में गोविंदा ने कहा कि उनकी पत्नी उन्हें सार्वजनिक तौर पर नीचा दिखाने और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि रियलिटी शो ‘लॉकअप’ में वह अपनी मर्जी से नहीं गए थे, बल्कि उनकी पत्नी ने बेटी टीना के जरिए उन्हें वहां आने के लिए कहा था, जिसके बाद वह वहां पहुंचे थे।

    अभिनेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब उनकी पत्नी अपने कार्यक्रमों में व्यस्त थीं, तब उन्होंने हमेशा उनका सहयोग किया और अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, अब जब वे अपने नए प्रोजेक्ट्स और फिल्मों पर काम शुरू कर रहे हैं, तो उनके काम में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। गोविंदा का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से उनके व्यावसायिक अवसरों और जनमानस में उनकी साख पर असर पड़ रहा है।

    हाल ही में सुनीता आहूजा द्वारा एक अन्य अभिनेत्री को लेकर दी गई टिप्पणियों पर भी गोविंदा ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि फिल्म उद्योग में संघर्ष कर रहे या साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले कलाकारों को इस तरह अपमानित या जलील नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्रदत्त क्षमता और शोहरत का इस्तेमाल दूसरों को नीचा दिखाने के लिए करना किसी को शोभा नहीं देता।

    उल्लेखनीय है कि सुनीता आहूजा कुछ समय पूर्व एक रियलिटी शो का हिस्सा बनी थीं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वे बीच में ही बाहर आ गई थीं। उस दौरान गोविंदा अपनी बेटी के साथ उन्हें लेने पहुंचे थे। इस पारिवारिक विवाद की चर्चा अब पूरे मनोरंजन जगत में जोर-शोर से हो रही है।

    उत्तर भारत और मध्य प्रदेश सहित देश भर में गोविंदा के प्रशंसकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग अभिनेता के आगामी प्रोजेक्ट्स का इंतजार कर रहे हैं, जबकि यह देखना बाकी है कि इस पारिवारिक बयानबाजी पर आगे क्या स्थिति बनती है।

  • लाल किले से मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम न लेने पर आरिफ मसूद ने जताई नाराजगी, PM मोदी से माफी की मांग

    लाल किले से मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम न लेने पर आरिफ मसूद ने जताई नाराजगी, PM मोदी से माफी की मांग


    भोपाल । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रधानमंत्री के भाषण पर ऐतराज जताते हुए मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का मुद्दा उठाया है। मसूद ने आरोप लगाया कि आजादी के संघर्ष की चर्चा के दौरान मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने इसे दुखद बताते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। प्रधानमंत्री के भाषण में स्वतंत्रता सेनानियों को व्यापक रूप से श्रद्धांजलि दी गई थी और इसके साथ ही देश के विकास तथा राष्ट्र निर्माण के कई मुद्दों पर जोर दिया गया।

    आरिफ मसूद का कहना है कि भारत की आजादी किसी एक समुदाय की लड़ाई नहीं थी बल्कि इसमें देश के अलग अलग वर्गों और समुदायों के लोगों ने योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन से देश को मुक्त कराने के संघर्ष में अनेक लोगों ने अपना जीवन और सर्वस्व कुर्बान किया। ऐसे में स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा करते समय मुस्लिम सेनानियों के योगदान को भी सामने रखना जरूरी है। मसूद ने अपने ज्ञापन में कहा है कि इतिहास के अलग अलग दौर में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और उलेमा ने भी अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया था।

    मसूद ने अपने तर्क के समर्थन में देश के कई ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री यदि नेशनल वॉर मेमोरियल और अंडमान निकोबार की सेलुलर जेल जैसे स्थानों पर दर्ज नामों को देखें तो वहां विभिन्न समुदायों के स्वतंत्रता सेनानियों की मौजूदगी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक है और इसे किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक ने अपने ज्ञापन में 18वीं और 19वीं सदी के कई आंदोलनों का उल्लेख भी किया है। उन्होंने बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ में वर्णित फकीर और संन्यासी विद्रोह का उदाहरण देते हुए मजनू शाह फकीर और उनके साथियों का नाम लिया। मसूद के मुताबिक मजनू शाह के बाद मूसा शाह चिराग अली और नूरुल मोहम्मद जैसे लोगों ने भी इस संघर्ष को आगे बढ़ाया। उन्होंने 1857 के विद्रोह में अहमदुल्ला शाह मदरासी की भूमिका का भी उल्लेख किया और दावा किया कि उन्होंने कई इलाकों में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया।

    मसूद ने 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उस दौर में बड़ी संख्या में लोगों को कठोर दमन का सामना करना पड़ा और मुस्लिम उलेमा समेत कई लोगों ने भी बलिदान दिया। ज्ञापन में उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों और लेखों का हवाला देते हुए अंग्रेजी शासन के दौरान हुई कार्रवाई का जिक्र किया है। हालांकि ज्ञापन में बताए गए कुछ आंकड़ों और ऐतिहासिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।

    भोपाल में विधायक ने स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरों वाला पोस्टर भी लगाया। उनका कहना है कि आजादी के संघर्ष की पूरी तस्वीर देश के सामने रखी जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां यह समझ सकें कि भारत की स्वतंत्रता अनेक लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम थी। मसूद ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को सभी समुदायों के योगदान के साथ देखा जाए।

    मसूद ने अपने ज्ञापन के अंत में कहा कि देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और इस पर देश से माफी मांगने की मांग की। इस मुद्दे के सामने आने के बाद स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अलग अलग समुदायों की भूमिका और राजनीतिक दलों के बीच इतिहास की व्याख्या को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

  • सिनेमाघरों में मचेगा धमाल टॉक्सिक से लेकर मिर्जापुर द मूवी तक, फैंस को है इन 7 फिल्मों का इंतजार

    सिनेमाघरों में मचेगा धमाल टॉक्सिक से लेकर मिर्जापुर द मूवी तक, फैंस को है इन 7 फिल्मों का इंतजार


    नई दिल्ली ।सिनेमाप्रेमियों के बीच आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। हाल ही में प्रदर्शित फिल्मों को मिले बेहतर प्रतिसाद के बाद अब दर्शक सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली नई फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
    इस रुझान को देखते हुए ऑनलाइन मूवी डेटाबेस प्लेटफॉर्म आईएमडीबी ने सबसे ज्यादा प्रतीक्षित फिल्मों की सूची जारी की है, जो यूजर्स के रियल टाइम रुझान और सर्च डेटा पर आधारित है। सूची में पहले स्थान पर कन्नड़ सुपरस्टार यश अभिनीत बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ बनी हुई है। एक्शन क्राइम थ्रिलर शैली की इस फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है।
    इस भव्य प्रोजेक्ट में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और अक्षय ओबेरॉय जैसे जाने-माने कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म बड़े पर्दे पर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए 26 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। दूसरे स्थान पर लोकप्रिय वेब सीरीज पर आधारित फीचर फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का दबदबा कायम है।
    4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, रवि किशन, रसिका दुग्गल, जीतेंद्र कुमार और अभिषेक बनर्जी जैसे दिग्गज कलाकार अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।सूची में तीसरे स्थान पर मलयालम सिनेमा की एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘खलीफा’ शामिल है, जिसे वैशाख ने निर्देशित किया है।
    इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन, नील नितिन मुकेश और मोहनलाल मुख्य किरदारों में दिखेंगे। चौथे पायदान पर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की थ्रिलर फिल्म ‘हैवान’ है, जिसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। इसमें मोहनलाल, राजपाल यादव और शारिब हाशमी भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं।
    पांचवें स्थान पर तेलुगु भाषा की एक्शन एडवेंचर फिल्म ‘द पैराडाइज’ है, जिसका निर्देशन श्रीकांत ओडेला कर रहे हैं। इस सूची में छठे नंबर पर दुलकर सलमान अभिनीत एक्शन क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘आई एम गेम’ है, जिसका निर्देशन नहास हिदायत ने किया है।वहीं सातवें स्थान पर शिवा निर्वाण द्वारा निर्देशित तेलुगु फिल्म ‘इरुमुडी’ शामिल है।
    फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारतीय सिनेमा और हिंदी सिनेमा का यह अनूठा संगम बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों के मल्टीप्लेक्स व एकल सिनेमाघरों में इन फिल्मों के लिए अग्रिम बुकिंग और प्रचार अभियान की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं।
  • दीपिका पादुकोण की डिलीवरी डेट करीब! बेंगलुरु के लिए हुईं रवाना, रणवीर सिंह भी आए छोड़ने

    दीपिका पादुकोण की डिलीवरी डेट करीब! बेंगलुरु के लिए हुईं रवाना, रणवीर सिंह भी आए छोड़ने


    नई दिल्ली । दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों की दस्तक होने वाली है। बॉलीवुड का यह चर्चित कपल अपने दूसरे बच्चे के स्वागत की तैयारी कर रहा है। इसी बीच 15 अगस्त की शाम दीपिका पादुकोण को मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया जहां से वह बेंगलुरु के लिए रवाना हुईं। एयरपोर्ट पर उनका लुक काफी सिंपल और आरामदायक नजर आया। इस दौरान उनका बेबी बंप भी दिखाई दिया। दीपिका की बेंगलुरु रवानगी को लेकर उनके फैंस के बीच भी काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है।

    दीपिका और रणवीर ने 19 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया के जरिए अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की खुशखबरी साझा की थी। दोनों ने अपनी बेटी दुआ पादुकोण सिंह की एक प्यारी तस्वीर के जरिए यह जानकारी फैंस तक पहुंचाई थी। तस्वीर में दुआ के हाथ में पॉजिटिव प्रेग्नेंसी टेस्ट दिखाई दिया था। इस घोषणा के बाद से ही फैंस लगातार कपल को बधाइयां दे रहे हैं।

    अब प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ दीपिका अपने परिवार के करीब रहना चाहती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वह मुंबई से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई हैं जहां उनका परिवार रहता है। एयरपोर्ट पर उन्हें नीले रंग की ओवरसाइज्ड शर्ट और बैगी जींस में देखा गया। उन्होंने सनग्लासेस लगाए हुए थे और हाथ में टोट बैग के साथ व्हाइट स्नीकर्स पहने थे। उनका पूरा लुक बेहद कंफर्टेबल और कैजुअल दिखाई दिया।

    इस दौरान रणवीर सिंह भी दीपिका को एयरपोर्ट छोड़ने पहुंचे। दीपिका जब कार से बाहर निकलीं तो रणवीर कार के भीतर ही बैठे रहे। दोनों की यह झलक फैंस के लिए खास रही क्योंकि अब कपल अपने परिवार को और बड़ा करने की तैयारी में है। दीपिका और रणवीर की बेटी दुआ का जन्म सितंबर 2024 में हुआ था और अब वह जल्द ही बड़ी बहन बनने वाली हैं।

    दीपिका ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान काम से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म किंग की शूटिंग में भी हिस्सा लिया। प्रेग्नेंसी की घोषणा के बाद वह दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में फिल्म के शूटिंग शेड्यूल में शामिल हुई थीं। उस दौरान उनकी तस्वीरें भी सामने आई थीं जिनमें उनका बेबी बंप नजर आया था।

    किंग दीपिका के लिए खास प्रोजेक्ट माना जा रहा है क्योंकि यह उनकी बेटी दुआ के जन्म के बाद बड़े पर्दे पर महत्वपूर्ण वापसी होगी। फिल्म में वह शाहरुख खान के साथ नजर आएंगी। इसके अलावा रिपोर्ट्स में दीपिका के अल्लू अर्जुन की फिल्म राका से जुड़े होने की भी जानकारी सामने आई है।

    फिलहाल दीपिका के बेंगलुरु पहुंचने के बाद फैंस की नजर इस बात पर है कि कपल अपने दूसरे बच्चे के स्वागत से जुड़ी कोई नई जानकारी कब साझा करता है। हालांकि डिलीवरी की सटीक तारीख या अस्पताल से जुड़ी जानकारी को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अटकल को पक्की खबर मानने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना बेहतर होगा।

  • समुद्र की लहरों से प्राकृतिक जलाभिषेक का अद्भुत केंद्र गंगेश्वर महादेव, पांडवों ने स्थापित किए थे पांच अलग-अलग शिवलिंग

    समुद्र की लहरों से प्राकृतिक जलाभिषेक का अद्भुत केंद्र गंगेश्वर महादेव, पांडवों ने स्थापित किए थे पांच अलग-अलग शिवलिंग

    नई दिल्ली । केन्द्र शासित प्रदेश दीव के फुदम गांव के समीप अरब सागर के तट पर स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम है। दीव शहर से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    इस पवित्र स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के पांच शिवलिंग एक साथ स्थापित हैं। धार्मिक परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे। उन्होंने भगवान शिव की कठिन तपस्या की और पांच अलग-अलग आकारों के शिवलिंगों की स्थापना की। मान्यता है कि युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव ने अपने-अपने कद और स्वभाव के अनुसार इन शिवलिंगों का निर्माण किया था।

    गंगेश्वर महादेव मंदिर की एक और अद्वितीय विशेषता इसका भौगोलिक स्थान और प्राकृतिक जलाभिषेक की प्रक्रिया है। जब समुद्र में उच्च ज्वार आता है, तब अरब सागर की उत्तुंग लहरें प्राकृतिक चट्टानों के बीच से बहती हुई सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती हैं। ये लहरें पांचों शिवलिंगों का स्पर्श कर उनका प्राकृतिक अभिषेक करती हैं और फिर वापस समुद्र में समा जाती हैं।

    ज्वार और भाटा के चक्र के साथ मंदिर का दृश्य बदलता रहता है। भाटा के दौरान जब समुद्र का जलस्तर नीचे चला जाता है, तब पांचों शिवलिंग पूर्णतः स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान श्रद्धालु आसानी से पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मंदिर का यह प्राकृतिक चक्र श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत आध्यात्मिक और दर्शनीय अनुभव प्रदान करता है।

    सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों पर यहां देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तजन भगवान शिव को जलाभिषेक, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। लहरों की गर्जना और हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

    भारत में समुद्र तटीय धार्मिक स्थलों का अपना विशेष महत्व रहा है, और मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु इस स्थान की प्राकृतिक भव्यता से अभिभूत हो जाते हैं। गंगेश्वर महादेव केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के नियमों और धार्मिक श्रद्धा के अनोखे तालमेल को भी प्रदर्शित करता है।

    दीव आने वाले पर्यटकों के लिए समुद्र की विशालता, तटीय चट्टानों की बनावट और समुद्र जल से स्वतः अभिषेक होने वाले यह पवित्र शिवलिंग एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ज्वार के समय विशेष सतर्कता बरती जाती है।

  • सावन के अंतिम सोमवार पर नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, 17 अगस्त को इस शुभ मुहूर्त में होगी पूजा

    सावन के अंतिम सोमवार पर नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, 17 अगस्त को इस शुभ मुहूर्त में होगी पूजा

    नई दिल्ली : सनातन परंपरा में सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त को बेहद शुभ संयोग में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का प्रारंभ 16 अगस्त की शाम से हो रहा है, लेकिन शास्त्रों में उदयातिथि की मान्यता के कारण यह पर्व 17 अगस्त को ही देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस बार नाग पंचमी पर सावन सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता भगवान शिव के अत्यंत प्रिय हैं और उनके गले का आभूषण हैं। यही कारण है कि इस दिन शिवजी के साथ-साथ नाग देव की उपासना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक को भय से मुक्ति मिलती है।

    इस साल पूजन के लिए सुबह का समय अत्यंत फलदायी बताया गया है। 17 अगस्त की सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 29 मिनट तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर स्थापित नाग देव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

    धार्मिक ग्रंथों और भविष्य पुराण में नाग पंचमी के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस तिथि पर नाग लोक में विशेष उत्सव मनाया जाता है, इसलिए पृथ्वी लोक पर भी नाग देव की पूजा का विधान है। महाभारतकालीन राजा जनमेजय के नाग यज्ञ और आस्तिक मुनि द्वारा नागों की रक्षा की कथा भी इस पर्व से गहराई से जुड़ी हुई है, जो जीवों के प्रति दया और संरक्षण का संदेश देती है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु से जुड़े कष्ट होते हैं, उनके लिए इस दिन पूजा-पाठ और दान करना विशेष लाभप्रद माना जाता है। उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं, घर के मुख्य द्वार पर गोबर से नाग देव की आकृति बनाकर पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना भी आवश्यक है। कई स्थानों पर जीवित सर्पों को दूध पिलाने का प्रयास किया जाता है, जो वैज्ञानिक रूप से अनुचित है। इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी जीव को कष्ट दिए बिना केवल मंदिर में स्थापित प्रतिमा या चित्र की ही शास्त्रीय विधि से पूजा करें।