Author: bharati

  • धुरंधर 2 के ट्रेलर की तैयारी तेज, इसी बीच सामने आया सनी देओल से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

    धुरंधर 2 के ट्रेलर की तैयारी तेज, इसी बीच सामने आया सनी देओल से जुड़ा दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दमदार एक्टर सनी देओल एक बार फिर चर्चा में हैं। एक तरफ उनकी आने वाली फिल्म धुरंधर 2 को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है वहीं दूसरी ओर उनके करियर से जुड़ा एक पुराना और रोचक किस्सा सुर्खियों में आ गया है। बताया जा रहा है कि धुरंधर 2 के ट्रेलर की तैयारियां तेज हो चुकी हैं डायरेक्टर ने एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर पर काम शुरू कर दिया है। इसी बीच सनी देओल और जूही चावला से जुड़ी एक अनसुनी कहानी ने लोगों का ध्यान खींच लिया है।

    90 के दशक में सनी देओल न सिर्फ अपने एक्शन बल्कि अपनी गहरी आवाज और इंटेंस रोमांटिक अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में लगभग सभी टॉप एक्ट्रेसेस के साथ काम किया और हर किसी के साथ उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस जूही चावला ने सनी देओल के साथ किसिंग सीन का रीटेक करने से साफ इनकार कर दिया था?

    जूही चावला ने क्यों किया इनकार

    यह किस्सा है निर्देशक धर्मेश दर्शन की फिल्म लूटेरे का जिसमें सनी देओल और जूही चावला लीड रोल में नजर आए थे। धर्मेश दर्शन ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि फिल्म में एक लिप-लॉक किसिंग सीन था जिसे रीटेक करने की जरूरत पड़ी। लेकिन जूही चावला ने साफ कह दिया कि वह दोबारा यह सीन नहीं करेंगी।इसका कारण था उनका कॉन्ट्रैक्ट। जूही चावला के कॉन्ट्रैक्ट में सिर्फ एक ही किसिंग सीन की शर्त थी और वह उसी पर अडिग रहीं। धर्मेश दर्शन के मुताबिक जूही ने पहले ही यह बात साफ कर दी थी कि वह तय शर्तों से बाहर नहीं जाएंगी।

    मान तो गई थीं लेकिन थीं कन्फ्यूज

    धर्मेश दर्शन ने बताया कि फिल्म का मशहूर गाना मैं तेरी रानी तू राजा राजस्थान के खूबसूरत लोकेशन पर शूट किया गया था। इस गाने में सनी देओल और जूही चावला के बीच एक अहम लिप-टू-लिप सीन फिल्माया जाना था। जूही इसके लिए तैयार तो थीं लेकिन पूरी तरह कन्फ्यूज थीं। इसी वजह से शूटिंग में देरी भी हुई।उन्होंने बताया कि आउटडोर शूट पूरी तरह तैयार था लेकिन उसी दौरान जूही किसी दूसरी फिल्म की शूटिंग के लिए उदयपुर चली गईं जिससे यह सीन और आगे खिसक गया। आखिरकार जब सीन कैमरे के सामने आया तो जूही ने उसे एक ही टेक में पूरा कर दिया।

    पहला टेक ही बना फाइनल
    धर्मेश दर्शन ने कहा जूही ने सीन पूरा किया और अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्त पर कायम रहीं। हमने कभी रीटेक शूट नहीं किया। वही पहला टेक फाइनल कट में गया। उन्होंने उस पल को आज भी बचकाना लेकिन प्यारा बताया।एक तरफ जहां सनी देओल आज भी अपनी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं वहीं उनके करियर से जुड़े ऐसे किस्से फैंस के लिए हमेशा दिलचस्प बने रहते हैं। अब सभी की नजरें धुरंधर 2 के ट्रेलर पर टिकी हैं जो जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाला है।

  • 46 साल बाद तेलुगु सिनेमा में अनिल कपूर की धमाकेदार वापसी, जूनियर एनटीआर के साथ ‘ड्रैगन’ में निभाएंगे अहम भूमिका

    46 साल बाद तेलुगु सिनेमा में अनिल कपूर की धमाकेदार वापसी, जूनियर एनटीआर के साथ ‘ड्रैगन’ में निभाएंगे अहम भूमिका


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के एनर्जी से भरपूर स्टार अनिल कपूर एक बार फिर इतिहास रचने जा रहे हैं। मिस्टर इंडिया के नाम से मशहूर अनिल कपूर 46 साल बाद तेलुगु सिनेमा में वापसी कर रहे हैं। खास बात यह है कि उनकी इस वापसी की फिल्म है बहुचर्चित ड्रैगन जिसमें वह आरआरआर फेम जूनियर एनटीआर के साथ अहम किरदार में नजर आएंगे। यह खबर सामने आते ही हिंदी और साउथ दोनों इंडस्ट्री के फैंस में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

    बहुत कम लोग जानते हैं कि अनिल कपूर ने बतौर लीड एक्टर अपने करियर की शुरुआत हिंदी नहीं बल्कि तेलुगु फिल्म वामसा वृक्षम से की थी जो साल 1980 में रिलीज हुई थी। इसके बाद अनिल कपूर ने बॉलीवुड का रुख किया और मिस्टर इंडिया तेजाब राम लखन नायक जैसी सुपरहिट फिल्मों के जरिए खुद को इंडस्ट्री का मजबूत स्तंभ बना लिया। अब लगभग पांच दशकों के लंबे अंतराल के बाद उनका तेलुगु सिनेमा में लौटना उनके करियर का एक बड़ा और भावनात्मक पड़ाव माना जा रहा है।

    ड्रैगन में दिखेगा अनिल कपूर का दमदार अंदाज

    आईएमडीबी द्वारा जारी की गई 2026 की मोस्ट एंटिसिपेटेड फिल्मों की लिस्ट में ड्रैगन 14वें स्थान पर शामिल है। इस लिस्ट में जैसे ही फिल्म की स्टारकास्ट के तौर पर एनटी रामा राव जूनियर और अनिल कपूर का नाम सामने आया सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। खुद अनिल कपूर ने यह लिस्ट अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर कर अपने तेलुगु कमबैक की पुष्टि की।

    साउथ में सिर्फ एक नहीं तीन प्रोजेक्ट्स

    अनिल कपूर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा एक लैंड कर चुकी है बाकी दो लाइन में हैं। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि ड्रैगन के बाद भी वह दो और साउथ फिल्मों में नजर आने वाले हैं। यानी आने वाले वर्षों में अनिल कपूर का साउथ सिनेमा में मजबूत प्रभाव देखने को मिलेगा।

    प्रशांत नील के निर्देशन में बनेगी फिल्म

    फिल्म ड्रैगन का निर्देशन केजीएफ फेम प्रशांत नील कर रहे हैं जो अपनी दमदार कहानी और भव्य एक्शन के लिए जाने जाते हैं। केजीएफ चैप्टर 1 और 2 के अलावा उन्होंने सालार पार्ट 1 और 2 जैसी बड़ी फिल्मों का निर्देशन किया है। ऐसे में ड्रैगन से भी दर्शकों को हाईऑक्टेन एक्शन और मजबूत कहानी की उम्मीद है।

    तेलुगु सिनेमा से पुराना रिश्ता

    तेलुगु सिनेमा में अपने शुरुआती अनुभव को याद करते हुए अनिल कपूर ने बताया था कि वामसा वृक्षम के दौरान वह सुबह 4 बजे उठकर तैयारी किया करते थे। उन्होंने कहा था कि उस अनुभव ने उन्हें अनुशासन और कड़ी मेहनत का महत्व सिखाया। इस फिल्म में उनके साथ जे. वी. सोमयाजुलु कांता राव और मुक्कमाला जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। फिल्म को आईएमडीबी पर 6.6 की रेटिंग मिली थी।कुल मिलाकर अनिल कपूर की यह वापसी सिर्फ एक कमबैक नहीं बल्कि हिंदी और तेलुगु सिनेमा के बीच एक नए अध्याय की शुरुआत है।
  • भारत के कौशल विकास को नई उड़ान: पुणे में पीएम-सेतु उद्योग परामर्श आयोजित

    भारत के कौशल विकास को नई उड़ान: पुणे में पीएम-सेतु उद्योग परामर्श आयोजित


    नई दिल्ली । भारत के कौशल विकास और उद्यमिता के भविष्य को आकार देने के लिए पुणे में 19 जनवरी 2026 को पीएम-सेतु उद्योग परामर्श का आयोजन किया गया। यह परामर्श कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय  एमएसडीई महाराष्ट्र सरकार और यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी यशादा के सहयोग से आयोजित किया गया। पीएम-सेतुप्रधानमंत्री की दृष्टि के अनुरूप एक महत्वाकांक्षी योजना हैजिसका उद्देश्य देश में भविष्य के लिए तैयारवैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल का निर्माण करना है। कार्यशाला में निर्माणवस्त्रऑटोमोटिवएफएमसीजीइलेक्ट्रॉनिक्सतेल और गैसनवीकरणीय ऊर्जा समेत 50 से अधिक प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया। मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी और महाराष्ट्र सरकार की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने परामर्श की अध्यक्षता की और क्षेत्र के आईटीआई और उद्योगों का दौरा भी किया।

    पीएम-सेतु योजना का केंद्र बिंदु हब-एंड-स्पोक दृष्टिकोण है। इसके तहत 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिकीकरण के तहत विकसित किया जाएगा। 200 हब आईटीआई में उन्नत बुनियादी ढांचा और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास किया जाएगाजबकि 800 स्पोक आईटीआई स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण का विस्तार करेंगे। योजना के तहत आईटीआई का स्वामित्व सरकार का होगालेकिन उद्योग इसका प्रबंधन करेंगे। इस तरह मांग-आधारित प्रशिक्षणशिक्षुता और उद्योगों के साथ क्लस्टर-आधारित साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि पीएम-सेतु उद्योग के लिए कौशल विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करता है। उद्योग क्लस्टर मॉडल के जरिए वे प्रशिक्षणपाठ्यक्रम सुधारसंकाय प्रशिक्षणशिक्षुता और नियोजन प्रक्रियाओं में योगदान देंगे। इससे भर्ती लागत कम होगीउत्पादकता बढ़ेगी और उद्योग मानकों के अनुरूप कुशल प्रतिभाएं तैयार होंगी।

    योजना के प्रारंभिक कार्य पहले ही 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुके हैं। 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी राज्य संचालन समितियों को अधिसूचित किया है। परामर्श के दौरान व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु औपचारिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। इनमें महाराष्ट्र के व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय और फिएट इंडियाश्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया तथा अनुदीप फाउंडेशन के बीच साझेदारियां शामिल हैं। पीएम-सेतु योजना भारत में कौशल विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों का निर्माण करेगीपाठ्यक्रम को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालेगी और उभरते क्षेत्रों में मजबूत प्रतिभा आपूर्ति श्रृंखला तैयार करेगी। उद्योग और सरकार के सहयोग से युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का यह प्रयास भारत के कौशल विकास की यात्रा को नई दिशा देगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रनजिन्हें एमजीआर के नाम से भी जाना जाता हैको उनकी जन्‍म जयंती के अवसर पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने अपने बयान में एमजीआर की बहुआयामी विरासत की सराहना करते हुए उनकी तमिलनाडु के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया। एमजीआर ने न केवल राज्य के विकास में अहम योगदान दियाबल्कि तमिल संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी अपना योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि एमजीआर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उन्होंने तमिलनाडु की प्रगति में एमजीआर के योगदान को उत्कृष्ट बताया और तमिल संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका को उल्लेखनीय करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके दृष्टिकोण और आदर्शों को समाज के लिए साकार करने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

    एमजीआर का जीवन राजनीतिफिल्म और समाज सेवा के क्षेत्र में प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने तमिलनाडु में शिक्षास्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल कीजो आज भी लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं। उनके नेतृत्व में तमिलनाडु ने औद्योगिक विकासआर्थिक सुदृढ़ता और सामाजिक उत्थान में नए आयाम हासिल किए। प्रधानमंत्री ने एमजीआर की छवि को केवल एक राजनीतिक नेता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बताया कि एमजीआर ने तमिल संस्कृति और भाषा को व्यापक रूप से फैलाने में भी योगदान दियाजिससे तमिल साहित्यकला और सांस्कृतिक पहचान का वैश्विक स्तर पर सम्मान बढ़ा। उनके प्रयासों की वजह से तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित महसूस कराती है।

    एमजीआर की जयंती पर प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि केवल उनके योगदान को याद करने तक सीमित नहीं हैबल्कि यह नागरिकों और युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरित होने का संदेश भी देती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एमजीआर का दृष्टिकोणउनकी सामाजिक सोच और तमिलनाडु के प्रति उनका समर्पण आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि ने एमजीआर की याद और उनके योगदान को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। उनके जीवन की उपलब्धियां न केवल तमिलनाडुबल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

  • गणतंत्र दिवस 2026: लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खुलेगा, 26 जनवरी को विशेष भ्रमण का मौका

    गणतंत्र दिवस 2026: लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खुलेगा, 26 जनवरी को विशेष भ्रमण का मौका


    भोपाल । गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर मध्य प्रदेश के नागरिकों के लिए एक खास मौका तैयार किया गया है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार लोकभवन को 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खोला जा रहा है। इस तीन दिवसीय अवसर पर नागरिक न केवल राज्यपाल कार्यालय का अवलोकन कर सकेंगेबल्कि उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लघु फिल्मों का भी आनंद लेने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही लोकभवन में चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगीजो राज्य की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को दर्शाएगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य आमजन को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना और गणतंत्र दिवस के महत्व को और अधिक प्रभावी ढंग से समझाना है। उन्होंने कहा कि लोकभवन का यह खुलापन नागरिकों को राज्यपाल के कार्यालय की कार्यप्रणालीइतिहास और समकालीन गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा।

    लोकभवन में आमजन का भ्रमण तीन दिनों के लिए निर्धारित किया गया है। 25 और 27 जनवरी को लोकभवन अपरान्ह 2 बजे से सायं 8 बजे तक खुलेगाजबकि 26 जनवरीगणतंत्र दिवस के दिन विशेष तौर पर प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही आमजन भ्रमण कर पाएंगे। इस दिन लोकभवन का दौरा गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़े उत्सव और कार्यक्रमों के साथ विशेष रूप से आयोजित किया जाएगा। लोकभवन में प्रवेश और निकास की सुविधा गेट क्रमांक-1 के माध्यम से सुनिश्चित की गई है। प्रशासन ने बताया कि इस दौरान नागरिकों के आराम और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। भ्रमण के दौरान आगंतुकों को लोकभवन की ऐतिहासिक संरचनाचित्रकला और राज्य के प्रशासनिक दृष्टिकोण की झलक देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा नागरिकों को छोटे वीडियो और लघु फिल्मों के माध्यम से गणतंत्र दिवस की महत्ताभारतीय संविधान और लोकतंत्र की मूलभूत अवधारणाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

    इस अवसर से आमजन न केवल राज्यपाल के दफ्तर का दौरा कर पाएंगेबल्कि उन्हें राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसारइस तरह की पहल नागरिकों में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने में सहायक होती है। लोकभवन में लगे चित्र और प्रदर्शनीसांस्कृतिक कार्यक्रम और लघु फिल्में सभी आयु वर्ग के नागरिकों के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान करेंगी। इस तरह, गणतंत्र दिवस 2026 के दौरान 25 से 27 जनवरी तक आयोजित यह विशेष आयोजन न केवल राज्यपाल कार्यालय को आमजन के करीब लाएगाबल्कि नागरिकों को लोकतंत्रसंस्कृति और प्रशासनिक प्रणाली के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाएगा। नागरिक इस अवसर का लाभ उठाकर लोकभवन के सुंदर और ऐतिहासिक वातावरण में सजीव अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

  • असदुद्दीन ओवैसी का सख्त बयान: AIMIM में किसी को भी पार्टी तोड़ने की कोशिश न करने की चेतावनी

    असदुद्दीन ओवैसी का सख्त बयान: AIMIM में किसी को भी पार्टी तोड़ने की कोशिश न करने की चेतावनी

    नई दिल्ली।  AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के संदर्भ में पार्टी के कॉरपोरेटर्स को सख्त चेतावनी दी है। ओवैसी ने कहा कि महाराष्ट्र में नगर निगम में किससे गठबंधन करना है या नहीं, इसका निर्णय पूरी तरह से पार्टी करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पार्षद खुद से फैसला नहीं ले सकता, अगर ऐसा हुआ तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    ओवैसी ने कहा, “अगर हमारी पार्टी को तोड़ने की कोशिश हुई तो जनता से उन्हें तमाचा मिलेगा। बिहार में हमारी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की गई थी, जनता ने उन्हें जवाब दिया था।” उन्होंने यह भी कहा कि कॉरपोरेटर AIMIM से चुनकर आए हैं, वे कहीं नहीं जाएंगे।

    कॉरपोरेटर्स के लिए स्पष्ट निर्देश

    ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि बीएमसी में हमारी पार्टी के 8 कॉरपोरेटर जीतकर आए हैं, इसलिए उनसे निवेदन है कि बिना पार्टी की अनुमति के कोई भी निर्णय न लें। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई पार्षद स्वतंत्र निर्णय लेगा, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

    विपक्ष के वोटर लिस्ट आरोपों पर जवाब

    वोटर लिस्ट के विवादित आरोपों पर ओवैसी ने कहा कि उनकी टीम ने वोटर लिस्ट की जांच की, और यह सही पाई गई। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के वार्ड में शिवसेना का पार्षद जीत गया, जबकि अमरावती और अकोला में AIMIM के कॉरपोरेटर जीते हैं। इसके अलावा औरंगाबाद में 33 कॉरपोरेटर और बीएमसी में 8 कॉरपोरेटर AIMIM के जीत के गौरवशाली परिणाम हैं।

    कामयाबी में शामिल विभिन्न समुदाय

    ओवैसी ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव के प्रचार पर भी बात की और कहा, “मुझे खेद है कि हम वेस्ट महाराष्ट्र में प्रचार नहीं कर सके। लेकिन हमारी कामयाबी में कई हिन्दू भाई और दलित साथी भी शामिल हैं। जो पार्षद हमारे जीतकर आए हैं, वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।”

    उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के उन वोटरों का धन्यवाद करेंगे, जिन्होंने AIMIM के 125 पार्षदों को चुना। ओवैसी ने अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत की सराहना की और कहा कि उनकी टीम ने कड़ी मेहनत की है।

    बीजेपी पर निशाना और सामाजिक संदेश

    ओवैसी ने बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बालासोर में मॉब लिंचिंग हुई और ओडिशा में बीजेपी की सरकार है। वहां खुलेआम हत्या हो रही है। यह हमारी समाजिक जिम्मेदारी है कि हम ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं।”

    AIMIM की रणनीति और भविष्य की योजना

    ओवैसी ने यह भी कहा कि पार्टी महाराष्ट्र में स्ट्रॉन्ग और संगठित होकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेटर और पार्टी कार्यकर्ता जनता की सेवा में लगे रहेंगे और सभी नागर निकायों में पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे। उन्होंने दोहराया कि कोई भी पार्षद स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकता, और पार्टी की नीति के खिलाफ कोई कदम उठाना भारी पड़ सकता है।

  • GMP से संकेत: BCCL IPO पर मुनाफे की संभावना, हर शेयर पर 60% से ज्यादा कमाई?

    GMP से संकेत: BCCL IPO पर मुनाफे की संभावना, हर शेयर पर 60% से ज्यादा कमाई?


    नई दिल्ली। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCL) IPO की लिस्टिंग को लेकर बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनी होने के नाते इस IPO को निवेशकों का खासा ध्यान मिला है और ग्रे मार्केट एक्टिविटीज को ट्रैक करने वाली कई वेबसाइट्स के मुताबिक इस IPO की लिस्टिंग ₹14.2 प्रीमियम पर होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर यह अनुमान सही रहा, तो IPO की लिस्टिंग ₹37.2 प्रति शेयर के भाव पर हो सकती है, जो IPO के अपर प्राइस बैंड ₹23 के मुकाबले 61.74% का जबरदस्त मुनाफा दर्शाता है।
    लिस्टिंग की तारीख पहले 16 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन BMC चुनाव परिणामों के चलते इसे बदलकर 9 जनवरी 2026 कर दिया गया है। इस IPO को निवेशकों से भारी प्रतिक्रिया मिली है और यह लगभग 147 गुना सब्सक्राइब हुआ। IPO 9 जनवरी से 13 जनवरी तक खुला रहा और अंतिम दिन में कुल 34,69,46,500 शेयरों के मुकाबले 50,95,55,58,000 शेयरों के लिए बोलियां आईं, जो इस इश्यू की लोकप्रियता को दर्शाता है।

    हालांकि यह IPO पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) है, यानी भारत कोकिंग कोल को इस इश्यू से कोई धन नहीं मिलेगा। IPO से जो भी राशि जुटेगी, वह प्रमोटर और शेयरहोल्डर कोल इंडिया लिमिटेड को मिलेगी।

    इसके बावजूद निवेशकों ने इस IPO को खूब समर्थन दिया, जो इस सेक्टर में बढ़ती विश्वास और कंपनी की मजबूत पोजिशन का संकेत है।

    कैटेगरी के हिसाब से देखें तो इस IPO को सबसे अधिक सब्सक्रिप्शन क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) से मिला, जिन्होंने इसे 300 गुना से अधिक सब्सक्राइब किया। QIB सेगमेंट के लिए रिजर्व 7,91,69,000 शेयरों के मुकाबले 24,60,65,19,600 शेयरों के लिए बोलियां आईं। रिटेल इन्वेस्टर कैटेगरी में भी अच्छा उत्साह दिखा और यह 49.33 गुना सब्सक्राइब हुआ। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और शेयरहोल्डर कैटेगरी में भी क्रमशः 258.16 गुना और 87.29 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

    कुल मिलाकर, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड IPO ने बाजार में शानदार रिस्पॉन्स दर्ज किया है और ग्रे मार्केट के संकेत भी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लिस्टिंग पर अच्छा रिटर्न संभव है। लिस्टिंग की नई तारीख 9 जनवरी 2026 होने के बाद निवेशकों की नजर इस IPO पर और अधिक केंद्रित हो गई है।

  • क्रिकेट स्टार्स विराट और कुलदीप ने किया महाकाल के दरबार दर्शन, भस्म आरती में हुई शामिल

    क्रिकेट स्टार्स विराट और कुलदीप ने किया महाकाल के दरबार दर्शन, भस्म आरती में हुई शामिल

    नई दिल्ली।  भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली, बाएं हाथ के करिश्माई स्पिनर कुलदीप यादव और फील्डिंग कोच टी दिलीप शनिवार को उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। क्रिकेटरों ने सुबह भस्म आरती में भी भाग लिया। विराट कोहली को महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति ने इस अवसर पर सम्मानित किया।

    गौतम गंभीर और केएल राहुल भी हुए शामिल

    इससे पहले, शुक्रवार को टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल भी महाकाल मंदिर पहुंचे थे। उनके साथ बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक भी मौजूद रहे। सभी सुबह 4:00 बजे भस्म आरती में शामिल हुए और महाकाल की कृपा प्राप्त की।

    कुलदीप यादव ने अनुभव साझा किया

    आईएएनएस से बातचीत में कुलदीप यादव ने कहा, “यह बहुत अच्छा अनुभव था, और पूरी टीम यहां आई थी। भगवान महाकाल के दर्शन करना हमेशा अच्छा लगता है। उनकी कृपा से सब कुछ ठीक चल रहा है, और मैं उम्मीद करता हूँ कि भगवान सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। आज का अनुभव बहुत अच्छा रहा।”

    भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज रोमांचक मोड़ पर

    नई दिल्ली: माइकल ब्रेसवेल की कप्तानी में कई सीनियर खिलाड़ियों के बिना खेल रही न्यूजीलैंड टीम ने भारतीय टीम को कड़ी टक्कर दी है। तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-1 की बराबरी पर है।

    भारत ने 11 जनवरी को वडोदरा में खेले गए पहले मैच में 4 विकेट से जीत हासिल की थी। इसके बाद 14 जनवरी को राजकोट में खेले गए दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराकर सीरीज रोमांचक बना दी।

    निर्णायक तीसरा वनडे इंदौर में

    भारतीय टीम रविवार को होलकर क्रिकेट स्टेडियम, इंदौर में तीसरा और निर्णायक वनडे खेलेगी। यह मैच सीरीज तय करेगा, इसलिए बेहद रोमांचक होने की संभावना है।

    रोहित और कोहली से उम्मीदें

    केएल राहुल के नाबाद शतक के बावजूद दूसरे वनडे में हार का सामना करने वाली भारतीय टीम तीसरे मैच में रोहित शर्मा से बड़ी पारी की उम्मीद करेगी। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका सीरीज में शानदार फॉर्म में दिखने वाले रोहित शर्मा इस सीरीज के पहले दो मैचों में बड़ा स्कोर नहीं बना सके हैं। वहीं, विराट कोहली भी राजकोट में बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे। निर्णायक मुकाबले में कप्तान गिल उनसे भी बड़ी पारी की उम्मीद करेंगे।

  • भारत की 7 सबसे खूबसूरत अल्पाइन झीलें: स्वर्ग जैसी प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव

    भारत की 7 सबसे खूबसूरत अल्पाइन झीलें: स्वर्ग जैसी प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव

    नई दिल्ली।  भारत का हिमालय न केवल अपनी ऊँचाई और बर्फ से ढकी चोटियों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की अल्पाइन झीलें भी देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। अगर आप प्राकृतिक सुंदरता का वास्तविक अनुभव लेना चाहते हैं, तो ये सात झीलें आपके लिए स्वर्ग जैसी छटा पेश करती हैं। इनमें केदारताल, समिति, गदसर, सत्सर, घेपन, चंद्रताल और मार्सर झीलें शामिल हैं, जो ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इन झीलों तक पहुंचना कभी आसान नहीं होता, लेकिन हर कदम पर खुलती खूबसूरत वादियां और पर्वतीय नजारे थकान को भी भूल जाने पर मजबूर कर देते हैं।

    केदारताल झील: चुनौतीपूर्ण ट्रेक और बर्फीली चोटियां

    केदारताल झील 15,485 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और इसे भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग जगहों में से एक माना जाता है। यह झील माउंट थलय सागर, माउंट गंगोत्री, माउंट जोगिन, माउंट भृगुपंथ और मंडी पर्वत की विशाल चोटियों से घिरी हुई है। ट्रेक के दौरान आपको बर्फ से ढके रास्तों और ठंडी हवाओं का सामना करना पड़ता है। केदारताल ट्रेक का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग ₹12,000 से ₹25,000 तक आता है। यहाँ का दृश्य और शांति, कठिनाइयों को पूरी तरह भुला देती है।

    समिति झील: गौमुख ट्रेक का अंत और प्राकृतिक सुंदरता

    समिति झील 13,779 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और यह गौमुख ट्रेक के आखिरी दिन ही दिखाई देती है। झील के आस-पास का वातावरण पूरी तरह से प्राकृतिक और साफ-सुथरा है। यहां की ठंडी हवा, बर्फ और पहाड़ियों का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। समिति झील तक पहुँचने में मेहनत जरूर लगती है, लेकिन इसकी सुंदरता हर थकान को दूर कर देती है।

    गदसर झील: कश्मीर ग्रेट लेक्स का रत्न

    गदसर झील कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक का हिस्सा है और इसे अक्सर भारत के सबसे खूबसूरत ट्रेक्स में गिना जाता है। ट्रेक के चौथे दिन झील दिखाई देती है और इसकी शांत जलधारा, मनमोहक रंग और स्थानीय कहानियां इसे विशेष बनाती हैं। झील में प्रवेश मुफ्त है, लेकिन नाव की सवारी का खर्च होता है। 2-सीटर पैडल बोट ₹100-₹200, 4-सीटर ₹200-₹400, और 6-सीटर रोइंग बोट ₹300-₹900 में उपलब्ध है।

    सत्सर झील: जंगल में एकांत और स्वर्ग जैसा अनुभव

    सत्सर झील पूरी तरह से एकांत में स्थित है और सड़क मार्ग से दिखाई नहीं देती। यहां पहुंचने के लिए जंगल से होते हुए लगभग एक घंटे की हाइक करनी पड़ती है। यह झील ऑफ-द-बीटन-पाथ डेस्टिनेशन है और ट्रेकर्स को शांति, रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत मिश्रण देती है। सत्सर झील का ट्रेक और भ्रमण प्रति व्यक्ति ₹18,000 से ₹40,000+ तक हो सकता है, जो गाइड, अवधि और सुविधाओं पर निर्भर करता है।

    घेपन झील: लाहौल का छिपा खजाना

    घेपन झील (घेपन घाट) लाहौल में स्थित है और लगभग इस लिस्ट में शामिल नहीं हो पाई थी। ट्रेक लीडर रवि और आयुषी ने हाल ही में अपने एक्सप्लोरेटरी ट्रेक पर इसे खोजा। झील के शांत और आकर्षक दृश्य इसे ट्रेकर्स के बीच लोकप्रिय बनाते हैं। यहाँ का खर्च ट्रेक पैकेज पर निर्भर करता है और प्रति व्यक्ति लगभग ₹10,000 से ₹20,000+ हो सकता है।

    चंद्रताल झील: सड़क और ट्रेक दोनों विकल्प

    चंद्रताल झील हिमाचल प्रदेश में स्थित है और इसे सड़क मार्ग से भी पहुँचा जा सकता है। हालांकि हम्प्टा पास के चुनौतीपूर्ण चार दिन के ट्रेक के बाद इसे अल्पाइन झील ट्रेक की सूची में शामिल किया गया है। यहां ट्रांसपोर्ट और रहने का खर्च अलग-अलग होता है। मनाली/काज़ा से टैक्सी का किराया ₹4,000-₹20,000+ हो सकता है। झील का नीला पानी और आसपास का बर्फीला परिदृश्य इसे यादगार बनाता है।

    मार्सर झील: दुर्गमता में छुपा आकर्षण

    मार्सर झील आसानी से नहीं पहुँचाई जा सकती, लेकिन इसकी दुर्गमता और लोककथाओं की वजह से यह ट्रेकर्स के लिए आकर्षण का केंद्र है। आसपास के रहस्य, शांत वातावरण और बर्फ से ढकी चोटियां इसे किसी भी साहसी यात्री के लिए स्वर्ग जैसा अनुभव देती हैं।

  • 2040 तक भारत बनेगा दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर नेवी शक्ति ब्रिटेन को छोड़ेगा पीछे; जानिए कितने देशों को पछाड़ देगा भारत

    2040 तक भारत बनेगा दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर नेवी शक्ति ब्रिटेन को छोड़ेगा पीछे; जानिए कितने देशों को पछाड़ देगा भारत


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना आने वाले डेढ़ दशक में समुद्री ताकत के मामले में इतिहास रचने जा रही है। मौजूदा रुझानों और स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी कार्यक्रमों की रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि भारत साल 2040 तक दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर परमाणु पनडुब्बी शक्ति बन जाएगा। इस दौरान भारत न सिर्फ फ्रांस बल्कि ब्रिटेन जैसे परंपरागत समुद्री शक्ति वाले देश को भी पीछे छोड़ देगा और अमेरिका रूस व चीन के बाद शीर्ष चार नौसैनिक शक्तियों में शामिल हो जाएगा।

    फिलहाल परमाणु पनडुब्बियों की संख्या के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है। उसके पास 60 से 70 के बीच परमाणु पनडुब्बियां हैं जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल और अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं। इसके बाद रूस और चीन का स्थान आता है। अभी चौथे नंबर पर ब्रिटेन और पांचवें पर फ्रांस है जबकि भारत इस सूची में तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। इस समय भारतीय नौसेना के पास दो सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां हैं। एक तीसरी परमाणु पनडुब्बी के इस साल के अंत तक और चौथी के अगले साल सेवा में शामिल होने की उम्मीद है। यह संख्या भले ही अभी कम लगती हो लेकिन यह भारत के अब तक के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रम की शुरुआती अवस्था है।

    भारत की यह बढ़त पूरी तरह स्वदेशी कार्यक्रमों पर आधारित है। इसमें INS अरिहंत से शुरू हुई अरिहंत क्लास पनडुब्बियां भविष्य की S5 क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और प्रोजेक्ट-77 के तहत विकसित की जा रही परमाणु अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं। भारतीय नौसेना दो S5 क्लास पनडुब्बियों का निर्माण शुरू कर चुकी है और भविष्य में चार और S5 क्लास पनडुब्बियां बनाने की योजना है। यानी कुल छह S5 क्लास पनडुब्बियां भारत की समुद्री परमाणु ताकत की रीढ़ बनेंगी। इसके साथ ही प्रोजेक्ट-77 के तहत परमाणु अटैक पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। शुरुआत में दो पनडुब्बियां बनाई जाएंगी लेकिन आगे चलकर इनकी संख्या छह तक पहुंच सकती है। ये पनडुब्बियां विमानवाहक पोतों की सुरक्षा दुश्मन पनडुब्बियों की निगरानी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करेंगी।

    अनुमान है कि 2035 तक भारत के पास कुल आठ परमाणु पनडुब्बियां होंगी जिनमें चार अरिहंत क्लास दो S5 क्लास और दो प्रोजेक्ट-77 की पनडुब्बियां शामिल होंगी। इस स्तर पर भारत फ्रांस को पीछे छोड़ देगा जिसकी परमाणु पनडुब्बियों की संख्या फिलहाल नौ के आसपास है और आगे इसमें ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। 2040 तक भारत कम से कम 10 परमाणु पनडुब्बियों का बेड़ा खड़ा कर लेगा जबकि ब्रिटेन की संख्या लगभग नौ पर स्थिर रहने की उम्मीद है। इस तरह भारत 15 साल बाद फ्रांस और ब्रिटेनदोनों देशों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी परमाणु पनडुब्बी शक्ति बन जाएगा। INS अरिहंत से शुरू हुई यह यात्रा भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति संतुलन में निर्णायक स्थान दिलाने की ओर बढ़ा रही है।