Author: bharati

  • अमेरिका ने 75 देशों के लिए सस्पेंड किया वीजा, पाकिस्तान ने तोड़ी चुप्‍पी – हम US के साथ…

    अमेरिका ने 75 देशों के लिए सस्पेंड किया वीजा, पाकिस्तान ने तोड़ी चुप्‍पी – हम US के साथ…

    वाशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तान समेत 75 देशों को बड़ा झटका दिया है। उसने 21 जनवरी से इन देशों के लिए इमिग्रेशन वीजा को सस्पेंड करने का फैसला लिया है। ट्रंप सरकार का यह फैसला पाकिस्तानियों के लिए किसी बेइज्जती से कम नहीं है, क्योंकि पिछले कुछ समय में पाकिस्तान और अमेरिका की करीबी बढ़ी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर व्हाइट हाउस का दौरा कर चुके हैं, जहां ट्रंप ने उनकी जमकर तारीफ भी की थी। ऐसे में अब उसे वीजा बैन वाले 75 देशों की लिस्ट में डालना पाकिस्तान को उसकी हैसियत दिखाने जैसा है।

    इस मामले पर पाकिस्तान ने गुरुवार को चुप्पी तोड़ी है। उसने नपे-तुले अंदाज में कहा है कि हम अमेरिका के साथ संपर्क में है।

    पाकिस्तान ने कहा कि वह अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है और उम्मीद है कि वॉशिंगटन द्वारा अपने इमिग्रेशन सिस्टम की अंदरूनी समीक्षा पूरी करने के बाद रूटीन वीजा प्रोसेसिंग फिर से शुरू हो जाएगी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने इस घोषणा पर ध्यान दिया है और इस कदम के दायरे और अवधि के बारे में स्पष्टीकरण के लिए अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क में है।

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, “हम और जानकारी हासिल करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं। यह एक बदलती हुई खबर है जिस पर हम नजर रख रहे हैं। हम समझते हैं कि यह अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों और सिस्टम की समीक्षा की एक आंतरिक प्रक्रिया है।” प्रवक्ता ने आगे कहा कि पाकिस्तान इस घटनाक्रम को अमेरिका की आंतरिक नीति समीक्षा का हिस्सा मानता है और उम्मीद जताई कि समीक्षा पूरी होने के बाद सामान्य वीजा प्रोसेसिंग फिर से शुरू हो जाएगी।

    पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश को भी झटका

    75 देशों के नागरिकों के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया रोकने वाले अमेरिकी फैसले से सिर्फ पाकिस्तान को ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश को भी झटका लगा है। दरअसल, इस लिस्ट में बांग्लादेश भी शामिल है। यह कदम ऐसे प्रवासियों पर नकेल कसने के प्रयासों का हिस्सा है जो सरकार पर बोझ बन सकते हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिकी विदेश विभाग उन 75 देशों के लिए आप्रवासी वीजा जारी नहीं करेगा जिनके प्रवासी अमेरिकी जनता की कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं। यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिका यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि नए आप्रवासी अमेरिकी जनता से धन संसाधन का दोहन नहीं करेंगे।”

  • अब पुरुष भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट! अमेरिका में भारतीय मूल की डॉक्टर का बड़ा बयान

    अब पुरुष भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट! अमेरिका में भारतीय मूल की डॉक्टर का बड़ा बयान

    वाशिंगटन। अमेरिका में सीनेटर के सामने गर्भपात संबंधी दवाओं को लेकर चल रही बहस में पुरुषों के गर्भवती होने की संभावना पर चर्चा की गई। रिपब्लिकन सीनेटर हॉली ने भारतीय मूल की डॉक्टर से सवाल पूछा कि क्या जैविक पुरुष गर्भधारण कर सकते हैं?

    क्या एक पुरुष गर्भवती हो सकता है? इस सवाल को लेकर एक अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर और भारतीय मूल की डॉक्टर के बीच में जमकर बहस हो गई। यह पूरा मामला डर्कसेन सीनेट कार्यालय में सामने आया,जहां पर गर्भपात संबंधी परेशानियों और सरकार द्वारा गर्भपात की दवाओं पर लगाए जा रहे प्रतिबंध के विरोध कर रही समिति की सुनवाई चल रही थी। इसमें सीनेटर्स के सामने भारतीय मूल की अमेरिकी डॉक्टर निशा वर्मा थी, जबकि मुख्य सवाल रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली पूछ रहे थे।

    प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर चल रही इस बहस की शुरुआत हुई। डॉक्टर वर्मा ने कहा कि गर्भपात से संबंधी दवाओं का पर लगाया गया प्रतिबंध गलत है। 100 से अधिक डीप रिसर्च ऐसी हुई हैं, जिनमें इन्हें सुरक्षित माना गया है। इस पर रिपब्लिकन सीनेटर एशले मूडी ने डॉक्टर वर्मा से सवाल पूछा कि क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं? डॉक्टर ने इसके जवाब से बचती नजर आई।

    इसके बाद रिपब्लिकन सीनेटर हॉली ने माइक अपनी ओर लेते हुए कहा, “एशले ने यह मुद्दा उठाया है, तो चलिए यहीं से शुरू करते हैं। डॉक्टर वर्मा, क्या आपको लगता है, कि पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?”

    डॉक्टर वर्मा ने कहा, “मैं विभिन्न पहचान वाले मरीजों का इलाज करती हूं, मैं कई महिलाओं का इलाज करती हूं, मैं विभिन्न पहचान वाले लोगों का इलाज करती हूं।”

    इस पर उन्हें बीच में टोकते हुए हॉली ने कहा, “अच्छा, लक्ष्य तो सच्चाई जानना है, तो क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?” हॉली ने फिर पूछा। डॉ वर्मा ने कहा, “मुझे ठीक से नहीं पता कि प्रश्न का उद्देश्य क्या है।” इससे पहले कि हॉली ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और कहा कि उद्देश्य जैविक वास्तविकता स्थापित करना है।

    हॉली बार-बार उन्हें इस सवाल का जवाब हां या ना में देने के लिए कहते रहे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बाद में डॉक्टर वर्मा ने कहा कि वह उस सवाल के जवाब में इसलिए हिचकिचाई क्योंकि उन्हें नहीं पता था, कि इस सवाल का क्या उद्देश्य क्या है।

    हालांकि, डॉक्टर वर्मा के इस टालमटोल वाले जवाब के बाद सीनेटर ने और सख्त होते हुए कहा, “कई लोग, बेवसाइट्स आपको विशेषज्ञ कहती हैं। आप एक डॉक्टर हैं और आप विज्ञान और प्रमाणों का पालन करती हैं। मैं केवल प्रमाणों के आधार पर जानना चाहता हूं। क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं? यह हां या ना का प्रश्न है।”

    वर्मा ने फिर भी सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा, “मुझे आपसे ध्रुवीकरण की भावना से रहित बातचीत करने में खुशी होगी।” इसके बाद, हॉली ने फिर से दोहराया कि केवल एक जैविक पुरुष और एक जैविक महिला होती है, और केवल महिला ही गर्भवती हो सकती है।

    हॉली ने डॉक्टर पर तीखा हमला करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि यह असाधारण है कि हम विज्ञान और महिलाओं के बारे में सुनवाई में हैं। रिकॉर्ड के लिए, महिलाएं गर्भवती होती हैं, पुरुष नहीं। आप इस बुनियादी सच्चाई को भी नहीं मानती कि जैविक रूप से पुरुष गर्भवती नहीं होते। जैविक रूप से पुरुष और महिला में अंतर होता है। मुझे नहीं पता कि हम आपको और विज्ञान के जानकार होने के आपके दावों को कैसे गंभीरता से ले सकते हैं।”

    वर्मा ने अपने दृष्टिकोण का बचाव करते हुए कहा, “मैं विज्ञान की जानकार हूं, मैं यहां मरीजों के जटिल अनुभवों का प्रतिनिधित्व करने के लिए भी हूं। मुझे नहीं लगता कि बात घुमाने वाली भाषा या प्रश्न इस उद्देश्य को पूरा करते हैं।”

    जवाब में हॉली ने कहा, “यह कहना बात घुमाना नहीं है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच वैज्ञानिक अंतर है। यह कहना ध्रुवीकरण नहीं है कि महिलाएं एक जैविक वास्तविकता हैं और उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें उसी रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। महिलाओं को महिला और पुरुषों को पुरुष के रूप में मान्यता देने से आपका इनकार विज्ञान, जनविश्वास और महिलाओं के लिए संवैधानिक सुरक्षा के लिए गहरा हानिकारक है।”

    दरअसल, यह पूरा मामला रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक राजनीति से प्रेरित था। रिपब्लिकन पार्टी शुरुआत से ही गर्भपात और समलैंगिकता के खिलाफ आवाज उठाती रही है। वर्तमान में अमेरिका में उन्हीं की सरकार है, ऐसे में गर्भपात संबंधी नियम भी कड़े हो गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप समेत उनके कई साथी खुले आम समलैंगिकों और गर्भपात को लेकर अपने विचार साझा कर चुके हैं।

  • हरलीन देओल ने खेली 64 रनों की मैच जिताऊ पारी… उनके 'रिटार्ड आउट' पर हरमनप्रीत कौर भी थी हैरान

    हरलीन देओल ने खेली 64 रनों की मैच जिताऊ पारी… उनके 'रिटार्ड आउट' पर हरमनप्रीत कौर भी थी हैरान


    नई दिल्ली।
    हरलीन देओल (Harleen Deol)…ये ऐसा नाम है जिस पर पिछले 24 घंटों में ‘क्रिकेट के गलियारों’ में खूब चर्चा हुई है। 14 जनवरी को दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) के खिलाफ हुए मुकाबले में टीम हित में फैसला लेते हुए यूपी वॉरियर्स (UP Warriors) के मैनेजमेंट ने हरलीन देओल को रिटायर्ड आउट (Retired out) कर वापस बुलाया था। वहीं मुंबई इंडियंस के खिलाफ 15 जनवरी को हुए मैच में उन्होंने 64 रनों की मैच जिताऊ पारी खेल हर किसी को हैरान कर दिया। हरलीन तो मैच के बाद इमोशनल नजर आईं ही, वहीं मुंबई इंडियंस की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी उनकी तारीफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि हरमन भी हरलीन को रिटायर्ड आउट करने से हैरान थीं।

    हरमनप्रीत कौर ने मैच के बाद कहा, “हां, बिल्कुल। मुझे लगता है कि उसने दिखा दिया है कि वह टीम में क्यों है और वह टीम के लिए क्या कर सकती है। और मुझे लगता है कि आज उसने बहुत अच्छी बैटिंग की और मुझे लगता है कि वह ऐसी खिलाड़ी है जो हमेशा अपनी टीम के लिए अच्छा करना चाहती है। हां, पिछले मैच में उसे रिटायर होते देखकर हैरानी हुई, लेकिन मुझे लगता है कि वह बहुत पॉजिटिव सोच के साथ आई और मुझे उम्मीद है कि वह इसे जारी रखेगी।”

    मुंबई इंडियंस ने इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए यूपी वॉरियर्स के सामने जीत के लिए 161 रनों का टारगेट रखा था, यूपी ने इस स्कोर को 11 गेंदें और 7 विकेट शेष रहते हासिल कर लिया। हरमनप्रीत कौर ने मुंबई इंडियंस की सीजन की दूसरी हार पर कहा, “(यहां पार स्कोर क्या था?) मुझे लगा 180 या कुछ ऐसा, जिसकी हम तलाश कर रहे थे क्योंकि हम जानते थे कि इस ट्रैक पर पहले बैटिंग करना आसान नहीं है। लेकिन मुझे लगता है कि हमने पावरप्ले में काफी अच्छा किया। हमने विकेट नहीं गंवाया, लेकिन बदकिस्मती से बोर्ड पर रन काफी नहीं थे, लेकिन बाद में, मुझे लगता है कि नेट और निक ने हमें बेहतर स्थिति में पहुंचाया। लेकिन मुझे लगता है कि हरलीन को क्रेडिट जाता है जिस तरह से उन्होंने आज बैटिंग की।

    हां, मेरा मतलब है, जब ओस होती है तो चेज करना हमेशा बेहतर होता है। आज बहुत ज्यादा ओस थी। और मुझे लगता है, हां, टोटल सेट करना कुछ ऐसा है जिसका हम सच में इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद है कि आने वाले मैचों में हम बेहतर अप्रोच के साथ आएंगे। (गेंद के साथ अपने दूसरे ऑप्शन इस्तेमाल करने पर) हां, मुझे लगता है कि यह उनके लिए टीम के लिए कुछ ओवर फेंकने का एक शानदार मौका था। मुझे लगता है कि उन्होंने ठीक-ठाक किया क्योंकि बहुत ज़्यादा ओस थी, गेंदबाज़, आप जानते हैं, अच्छी तरह से ग्रिप नहीं कर पा रहे थे, लेकिन मुझे लगता है कि स्कोर भी, आप जानते हैं, बोर्ड पर काफी नहीं था। तो मुझे लगता है, मुझे लगता है कि उन्होंने ठीक-ठाक बॉलिंग की।”

  • ट्रंप का दावा, ईरान में मैंने रूकवा दी 800 प्रदर्शनकारियों को फांसी की सजा

    ट्रंप का दावा, ईरान में मैंने रूकवा दी 800 प्रदर्शनकारियों को फांसी की सजा

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू होने की आशंका के बीच गुरुवार को स्थिति थोड़ी बेहतर होती दिखी। जहां अमेरिका ने खाड़ी देशों में अपने अड्डों पर अलर्ट लेवल कम कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों में भी नरमी देखने को मिली। इस बीच अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान में खामेनेई शासन को लेकर बड़ा दावा किया है। वाइट हाउस के मुताबिक ईरान गुरुवार को 800 प्रदर्शनकारियों को फांसी पर लटकाने वाला था। वाइट हाउस ने कहा है कि ट्रंप के दबाव के बाद ईरान ने इन फांसी की सजाओं पर रोक लगा दी है। इससे पहले ट्रंप ने भी बुधवार को कहा था कि उन्हें बेहद महत्वपूर्ण सूत्रों से आश्वासन मिला है कि ईरान अब प्रदर्शनकारियों की फांसी की सजा को आगे नहीं बढ़ाएगा।
    वाइट हाउस ने क्या कहा?
    हालांकि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई का इशारा देते हुए यह भी कहा है कि उसके पास अब भी सभी विकल्प खुले हैं। वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति को आज पता चला कि 800 फांसी की सजा जो कल होने वाली थी, उसे रोक दिया गया है।” उन्होंने कहा कि ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो गंभीर परिणाम होंगे और इसलिए ईरान ने फांसी रोक दी है।
    ईरान पर नए अमेरिकी प्रतिबंध

    वहीं अमेरिका ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसक कार्रवाई करने और विदेशी बाजारों में तेल की बिक्री से होने वाली कमाई की हेराफेरी करने के आरोप में कई ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक संदेश में इन प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं। उन्होंने नए प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।

    ईरान के नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का जवाब सड़कों पर सामूहिक गोलीबारी से लेकर अस्पतालों और घायल पीड़ितों पर हमलों जैसी क्रूर हिंसा से दिया है।”

    बेसेंट ने बताया कि वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय की ओर से 18 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी शासन इन संस्थाओं का उपयोग तेल पर लगे प्रतिबंधों से बचने और इससे होने वाली आय को ईरानी जनता की हित के बजाय कहीं और करता है। प्रतिबंधों की सूची में ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी का नाम भी शामिल है।

    इससे पहले ईरान की इस्लामिक सत्ता को चुनौती देने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन गुरुवार को धीरे-धीरे शांत होते नजर आए। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस दौरान ईरान की कार्रवाई में कम से कम 3,428 लोग मारे जा चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।

  • काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर चलाने, अहिल्याबाई समेत कई ऐतिहासिक मूर्तियों को तोड़कर खंडित करने और गंगा में डाल देने का मामला देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर से खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष और राजपरिवार के प्रतिनिधि यशवंत होल्कर भी दो दिन पहले काशी पहुंचे। अपनी नाराजगी जताई। वापस जाने से पहले उन्होंने मणिकर्णिका घाट की पवित्र माटी माथे लगाई। घाट पर तोड़ी गई मढ़ी के निकट उन्होंने पुन: क्षमायाचना की और काशी में महारानी की विरासत संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।

    जिला प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा आश्वस्त किए जाने के बाद वह यहां से रवानगी के लिए तैयार हुए। उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि खंडित मूर्तियों के अवशेष जल्द खोज लिए जाएंगे। उनके मणिकर्णिका घाट पहुंचने से पहले ही काफी संख्या में पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया था। इस बात पर कड़ी नजर रखी गई कि कोई दूर से भी मोबाइल से फोटो या वीडियो न बना सके।

    मणिकर्णिका घाट की मौजूदा स्थिति देखने के बाद वह निकट स्थित ताड़केश्वर मंदिर भी गए। प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि रानी मां की चारों मूर्तियां यही रखी जाएंगी। जो दो साबूत मूर्तियां हैं उन्हें यथाशीघ्र इस मंदिर में भेजवाया जाए। अधिकारियों ने जल्द से जल्द मूर्तियां ताड़केश्वर मंदिर भेजने पर सहमति जता दी है। वहीं ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार को अवकाश का दिन होने से मूर्तियां नहीं लाई जा सकी हैं। उम्मीद है कि 16 जनवरी को शाम तक मूर्तियां गुरुधाम मंदिर से मणिकर्णिका स्थित ताड़केश्वर मंदिर पहुंचा दी जाएं।

    उपाध्याय ने बताया कि हम लोग अपने स्तर से भी मूर्तियों के अवशेष खोजने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। वहां से उठाया गया मलबा कहां फेंका गया है, इसकी जानकारी भी नहीं दी जा रही है। यदि यही बता दिए जाए कि मलबा कहां फेंका गया है तो मूर्तियों के अवशेष खोजने की राह आसान हो सकती है।
    सिविल में मुकदमा दर्ज फिर भी सूचना नहीं दी

    ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि मणिकर्णिका घाट से सटा हिस्सा जो जनाना घाट के नाम से जाना जाता है, यहां लगी मूर्तियों को संरक्षित करने को लेकर ट्रस्ट की ओर से सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। उसमें नगर निगम को पार्टी बनाया गया है। मुकदमे से संबंधित नोटिस तक दिया जा चुका है। वह मुकदमा ही इस बात के लिए किया गया है कि जनाना घाट की मूर्तियों को न तोड़ा जाए। घाट पर बने धार्मिक प्रतीक सुरक्षित रहें। बावजूद इसके ट्रस्ट को बिना सूचित किए तोड़फोड़ की गई। हमारी अब भी इतनी ही मांग है कि मूर्तियां हमें लौटाई जाएं। घाट पर कोई भी निर्माण ट्रस्ट की सहमति के बिना न कराया जाए। मणिकर्णिका घाट ट्रस्ट के अधीन आने वाली धर्मार्थ संपत्ति है।
    प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से अनुरोध

    इससे पहले मणिकर्णिका घाट पर रानी अहिल्याबाई की मूर्तियां तोड़े जाने की जांच तथा उन्हें खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट ने अपनी सुपुर्दगी में देने का अनुरोध प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से किया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर ने मंडलायुक्त की मौजूदगी में नगर आयुक्त को दोनों पत्र गुरुधाम मंदिर में सौंपे।

    यशवंत होल्कर महारानी की तोड़ी गई मूर्तियों के समक्ष क्षमायाचना और शुद्धि पूजन के लिए गुरुधाम मंदिर पहुंचे थे। दो खंडित और दो साबुत मूर्तियां यहीं रखी हैं। उन्होंने कहा कि काशी में रानी अहिल्याबाई की मूर्ति का अपमान अक्षम्य है। काशी में उनकी स्मृतियों के साथ ऐसे आचरण की कल्पना भी इंदौर राजपरिवार को नहीं थी। ट्रस्ट और इंदौर राजपरिवार इसकी कटु शब्दों में भर्त्सना करता है। मणिकर्णिका घाट की मढ़ी के चार किनारों पर बनीं रानी मां की चार मूर्तियां तोड़ी गईं। इनमें से दो खंडित नहीं हैं लेकिन अन्य दो का निचला हिस्सा ही मिला है। उनका शेष हिस्सा सात दिन में हमें उपलब्ध कराया जाए।

    उन्होंने कहा कि हम पुरातात्विक पद्धति से उसका पुनर्निर्माण कराने में सक्षम हैं। जब तक मणिकर्णिका घाट का नवनिर्माण पूरा नहीं हो जाता तब तक मूर्तियों को छोटे विश्वनाथ मंदिर (अहिल्याबाई घाट) के गर्भगृह में रखेंगे और पूजा के लिए पुजारी नियुक्त करेंगे। देशभर की तमाम संपत्तियों की भांति ही मणिकर्णिका घाट के संरक्षण-संवर्द्धन का दायित्व ट्रस्ट का ही है और यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट से मिला है।
    लगा मर्डर मिस्ट्री सुलझा रहे अधिकारी

    मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गईं रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्तियों का गुरुधाम मंदिर में दोपहर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ऐसे अवलोकन कर रहे थे मानो वह कोई मर्डर मिस्ट्री सुलझाने में लगे हों। खंडित और साबूत मूर्तियों को नीचे से ऊपर तक निहारते हुए फोन पर किसी को यथास्थिति से अवगत कराते जा रहे थे।

    यह काम करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि मातहतों और सुरक्षाकर्मियों के अतिरिक्त कुछ अन्य लोग भी परिसर में हैं तो उन्होंने सभी को अनुरोध पूर्वक परिसर से बाहर कर दिया। गेट पर तैनात सिपाही को आदेश दिया कि कोई भी आए गेट नहीं खुलना चाहिए। इसके बाद फिर मूर्तियों की गहन जांच पड़ताल में जुट गए। कुछ सफाई कर्मचारियों से वह साबूत और खंडित मूर्तियां कपड़े में लपेटकर अंदर रखने की तैयारी कर रहे थे।

    इसी बीच होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर पहुंच गए। उनके लिए भी द्वार नहीं खोला गया। करीब दस मिनट बाद मंडलायुक्त एस.राजलिंगम को आता देख सिपाही ने दरवाजा खोला। तब ट्रस्ट के अध्यक्ष और कुछ कर्मचारी परिसर में दाखिल हुए। पूजन सामग्री लेकर पहुंचे कर्मचारियों, पूजा कराने पहुंचे ट्रस्ट के पुजारियों को भी बाहर ही रोक दिया गया।

  • एक क्लिक में जानिए आज भोपाल में क्या खास: आंदोलन से लेकर उत्सव, परीक्षा, फ्लाइट और बिजली कटौती तक

    एक क्लिक में जानिए आज भोपाल में क्या खास: आंदोलन से लेकर उत्सव, परीक्षा, फ्लाइट और बिजली कटौती तक


    भोपाल । आज राजधानी भोपाल में दिनभर हलचल भरा माहौल रहेगा। शिक्षा. संस्कृति. सामाजिक सरोकार और प्रशासनिक गतिविधियों के चलते शहर कई महत्वपूर्ण आयोजनों का गवाह बनेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों से लेकर स्थानीय मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों तक. हर क्षेत्र में गतिविधियां देखने को मिलेंगी। शाम 5 बजे से जागरण लेक यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टोरीटेलिंग फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें देश और विदेश से आए स्टोरीटेलर्स हिस्सा लेंगे। इस दौरान कहानी कहने की कला. उसके सामाजिक प्रभाव और आधुनिक स्वरूप पर विशेष सत्र होंगे। साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए यह कार्यक्रम खास आकर्षण का केंद्र रहेगा।वहीं सुबह 11 बजे से स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर में सीपीटीईडी सम्मेलन आयोजित होगा। क्राइम प्रिवेंशन थ्रू एनवायरनमेंटल डिजाइन विषय पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे और शहरी सुरक्षा को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा होगी।

    सामाजिक सरोकार से जुड़ा निःशुल्क कृत्रिम अंग माप शिविर मानस भवन. पॉलिटेक्निक चौराहे पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इस शिविर में जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा दोपहर 3 बजे मिंटो हॉल में ‘दिल की बात’ पुस्तक का विमोचन होगा. जिसमें साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रहेगी।
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में दोपहर 12 बजे से माह की विशेष प्रदर्शनी शुरू होगी. जो टिबरिल मेस्लांग पर आधारित है। कला और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए यह प्रदर्शनी खास रहेगी। उधर. कोहेफिजा स्थित बीसीसीआई भवन में सुबह 11 बजे से चैंबर चुनाव से जुड़ी नाम वापसी की प्रक्रिया होगी।

    प्रशासनिक मोर्चे पर मंत्रालय के सामने मंत्रालयीन कर्मचारियों का प्रदर्शन प्रस्तावित है। कर्मचारी चौथा समयमान वेतनमान. 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता और आउटसोर्स कर्मचारियों को डाइंग कैडर घोषित किए जाने के विरोध में आंदोलन करेंगे. जिससे क्षेत्र में यातायात और कामकाज प्रभावित हो सकता हैयात्रियों के लिए अहम सूचना यह है कि गणतंत्र दिवस की रिहर्सल के चलते 19 से 26 जनवरी तक दिल्ली की दो फ्लाइट कैंसिल रहेंगी। इससे भोपाल-दिल्ली रूट पर 396 सीटें कम हो गई हैं और विजिटर पास की सुविधा भी बंद कर दी गई है।शिक्षा के क्षेत्र में 16 और 17 जनवरी को होने वाले एजुकेशनल ओलम्पियाड में करीब 2 लाख विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। कक्षा 2 से 8 तक के छात्र सभी विकासखंड मुख्यालयों पर परीक्षा देंगे।

    आज कई इलाकों में बिजली कटौती भी रहेगी। टीटी नगर. जवाहर चौक. टैगोर नगर. इंद्रा नगर. गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया समेत 35 से अधिक क्षेत्रों में 2 से 7 घंटे तक अलग-अलग समय पर बिजली बंद रहेगी।इसी बीच. नर्मदापुरम जिले के माखन नगर बाबई में राज्यस्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन आयोजित होगा. जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त का अंतरण करेंगे। प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक बहनों के खातों में सीधे 1500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। इस किस्त के तहत कुल 1836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। कुल मिलाकर आज भोपाल में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ खास होने जा रहा है।

  • अंतिम संस्कार की रस्में शुरू, इंधर जिंदा हो गईं 103 साल की गंगाबाई

    अंतिम संस्कार की रस्में शुरू, इंधर जिंदा हो गईं 103 साल की गंगाबाई


    नागपुर। आपने मौत को चकमा देकर वापस लौटने वाली कहावत कई बार सुनी होगी। हम अक्सर किसी मुश्किल परिस्थिति से लौटने पर इस मुहावरे का प्रयोग कर लेते हैं। लेकिन क्या हो अगर यह मुहावरा सचमुच आंखों के सामने घटित हो जाए? हाल ही में महाराष्ट्र से एक ऐसा ही हैरतअंगेज मामला सामने आया है जहां 103 साल की गंगाबाई को मृत समझ लिया गया। अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी भी कर ली गई। लेकिन मातम मनाने आए लोग तब हैरान रह गए जब गंगाबाई का शरीर अचानक हिलने लगा और वे वापस उठ बैठीं। इतना ही नहीं, हैरत की बात यह है कि उसी दिन गंगाबाई का जन्मदिन भी था।

    घटना नागपुर जिले के रामटेक की है। 103 साल की गंगाबाई सखारे को परिवार के लोगों में मृत मान लिया। सोमवार शाम को गंगाबाई के शरीर की हरकतें बंद होने के बाद परिवार को लगा कि गंगाबाई की मौत हो गई है। परिवार ने अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दीं और सभी रिश्तेदारों को संदेश भी भेज दिए। मौत की खबर फैलते ही दूर-दराज के इलाकों से रिश्तेदार अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने लगे।
    शव वाहन भी हो गया था बुक

    इसके बाद मंगलवार सुबह तक परम्परा के मुताबिक गंगाबाई को नई साड़ी पहना दी गई, उनके हाथ-पैर बांध दिए गए थे, और उनकी नाक में रुई के फाहे भी लगा दिए गए। घर के बाहर शामियाना लगाया गया, कुर्सियां लगाई गईं, अंतिम संस्कार की सामग्री जुटाई गई और शव वाहन भी बुक किया गया।
    हिलने लगे पैर

    तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे अब हैरान रह गए। गंगाबाई के पोते राकेश सखारे को अचानक उनके पैरों में हरकत सी दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने जैसे ही गंगाबाई की नाक से रुई हटाई, गंगाबाई ने गहरी सांस ली। राकेश सखारे ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैंने उनके पैर हिलते देखे और मदद के लिए चिल्लाया। जब हमने उनकी नाक से रुई हटाई, तो उन्होंने जोर-जोर से सांस लेना शुरू कर दिया।’’

    इसके बाद घर में पसरा मातम जश्न के माहौल में बदल गया। गंगाबाई के जिंदा हो जाने को लोग चमत्कार से कम नहीं बता रहें। वहीं इसके बाद परिवारवालों ने गंगाबाई का 103वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया।

  • ईरान का हवाई क्षेत्र दुनिया की एयरलाइंस के लिए इतना जरूरी क्यों?

    ईरान का हवाई क्षेत्र दुनिया की एयरलाइंस के लिए इतना जरूरी क्यों?

    तेहरान। ईरान में जारी अशांति के बीच गुरुवार को ईरानी हवाई क्षेत्र को पांच घंटे तक बंद रहने के बाद फिर से खोल दिया गया है। एयरस्पेस अचानक बंद करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया, लेकिन इसे अमेरिकी हमले से पहले सतर्कता के तौर पर देखा जा रहा है। हवाई क्षेत्र बंद होते ही दुनिया भर की एयरलाइंस को अपनी उड़ानों के रास्ते बदलने पड़े। हालांकि यह रोक सिर्फ कमर्शियल फ्लाइट्स पर लागू थी।

    गौरतलब है कि देशव्यापी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई और अमेरिका की ओर से सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनियों के बाद ईरान में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि अमेरिका जल्द ही सैन्य कार्रवाई कर सकता है। पिछले साल जून में भी ईरान ने इजरायल के साथ 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था।
    भारतीय एयरलाइंस पर भी असर

    ईरान के हवाई क्षेत्र बंद होने से भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुईं। इंडिगो ने एक बयान जारी कर बताया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है। वहीं एयर इंडिया ने बताया कि उसकी फ्लाइट्स वैकल्पिक रूट से उड़ान भर रही हैं, जिससे देरी या कुछ मामलों में रद्द होने की आशंका है। दोनों एयरलाइंस यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले इसी अहम ईस्ट-वेस्ट रूट पर बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित करती हैं। ऐसे में अगर ईरान ने दोबारा हवाई क्षेत्र बंद किया, तो उनके अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस पर बड़ा असर पड़ सकता है।
    अन्य देशों और एयरलाइंस की चेतावनी

    बुधवार को जर्मनी ने अपनी एयरलाइंस को ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने की नई एडवाइजरी जारी की। इससे पहले लुफ्थांसा ने भी मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी उड़ानों में बदलाव किया था। अमेरिका पहले से ही अपनी सभी कमर्शियल उड़ानों को ईरान के ऊपर से उड़ने की इजाजत नहीं देता और दोनों देशों के बीच कोई सीधी उड़ान नहीं है। फ्लाईदुबई और तुर्कीश एयरलाइंस जैसी कंपनियों ने भी पिछले एक हफ्ते में ईरान के लिए कई उड़ानें रद्द की हैं।
    ईरान का हवाई क्षेत्र क्यों है इतना जरूरी

    ईरान का हवाई क्षेत्र अंतरमहाद्वीपीय उड़ानों के लिए बेहद अहम माना जाता है। यह यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख ईस्ट-वेस्ट रूट पर स्थित है। यूरोप से दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया जाने वाली उड़ानों के लिए यह सबसे सीधा और कम दूरी वाला रास्ता है। इस रूट का इस्तेमाल करने से एयरलाइंस को समय और ईंधन दोनों की बचत होती है। अगर ईरान के ऊपर से उड़ान की इजाजत नहीं मिलती है, तो विमानों को उत्तर या दक्षिण की ओर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे उड़ान का समय कई घंटे बढ़ जाता है और लागत भी काफी ज्यादा हो जाती है।
    एक पुरानी गलती

    ईरान के हवाई क्षेत्र को लेकर चिंता की एक बड़ी वजह उसकी एक पुरानी गलती भी है। 2020 में ईरानी एयर डिफेंस ने यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट PS752 को दुश्मन का विमान समझकर दो मिसाइलें दाग दी थीं। इस हादसे में विमान में सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी। ईरान ने कई दिनों तक विमान को गिराने के आरोपों को सिरे से खारिज किया, लेकिन अंत में इसे स्वीकार कर लिया।

  • मकर संक्रांति के बाद सूर्य ग्रहण की चेतावनी: इन तीन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां..

    मकर संक्रांति के बाद सूर्य ग्रहण की चेतावनी: इन तीन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां..


    नई दिल्ली।  17 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में लगने वाला सूर्य ग्रहण, स्वास्थ्य और धन को लेकर बरतनी होगी विशेष सतर्कता
    साल 2026 की शुरुआत खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मकर संक्रांति के लगभग एक महीने बाद, 17 फरवरी 2026 को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान होगा, जिसे ज्योतिष में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। सूर्य और चंद्रमा की यह युति न केवल प्राकृतिक ऊर्जा में बदलाव लाएगी, बल्कि मानव जीवन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह सूर्य ग्रहण सुबह से लेकर दोपहर तक प्रभावी रहेगा। ग्रहण काल के दौरान मानसिक अस्थिरता निर्णय लेने में भ्रम और भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में पड़ेगा लेकिन तीन राशियों के जातकों के लिए यह समय विशेष सावधानी और संयम की मांग करता है।सिंह राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में सहयोगियों या वरिष्ठों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। छोटी-सी बात बड़ा विवाद बन सकती है, इसलिए वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसानदेह साबित हो सकता है। पारिवारिक जीवन में भी तनाव के संकेत मिल रहे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से थकान सिरदर्द, अनिद्रा या मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। इस दौरान आराम और आत्मसंयम सबसे बड़ा उपाय माना जा रहा है।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह ग्रहण खासतौर पर आर्थिक मामलों में सतर्कता का संकेत दे रहा है। अचानक खर्चों में वृद्धि हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ने का खतरा रहेगा। निवेश, उधार या किसी भी तरह के आर्थिक समझौते से इस समय दूरी बनाए रखना बेहतर होगा। मानसिक बेचैनी और तनाव महसूस हो सकता है। साथ ही यात्रा के दौरान या वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।

    कुंभ राशि, जिसमें यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, उसके जातकों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है। व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्तों में गलतफहमी पैदा हो सकती है। मित्रों या जीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ने की आशंका है। भावनाओं में बहकर लिए गए फैसले बाद में पछतावे का कारण बन सकते हैं। इस समय संवाद बनाए रखना और धैर्य से काम लेना बेहद जरूरी होगा। आत्ममंथन और संयम से कई समस्याओं को टाला जा सकता है।ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण काल में किसी भी शुभ कार्य, नई शुरुआत, खरीद-फरोख्त या बड़े निर्णय से बचना चाहिए। ध्यान, जप, प्रार्थना और सकारात्मक सोच इस दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद धीरे-धीरे परिस्थितियां सामान्य होने लगेंगी और नकारात्मक प्रभाव कम होता जाएगा।

  • जल जीवन मिशन की समीक्षा : 3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी

    जल जीवन मिशन की समीक्षा : 3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी


    भोपाल। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि ने जल जीवन मिशन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। श्री नरहरि ने कार्यों में शिथिलता और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 3 अधीक्षण यंत्रियों एवं 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट किया कि कार्यों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के समस्त जिलों के अधीक्षण यंत्री, 
    कार्यपालन यंत्री एवं सहायक यंत्री स्तर तक के अधिकारी से जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं की अद्यतन स्थिति की विस्तार से जानकारी ली।

    समीक्षा बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की गई। प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति निर्धारित लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है, जिससे मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हो रही है।

    प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत शेष बचे कार्यों को निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से प्रगति की निगरानी की जाएगी।

    प्रमुख सचिव श्री नरहरि ने कहा कि जल जीवन मिशन राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कार्यों की प्रगति में किसी प्रकार की शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि फील्ड स्तर पर समन्वय बढ़ाते हुए गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता के साथ कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।