Author: bharati

  • स्टारलिंक विवाद में कमल हासन की एंट्री, मस्क को सुनाई खरी-खरी, कंगना रनौत बोलीं- तीखा और सटीक जवाब

    स्टारलिंक विवाद में कमल हासन की एंट्री, मस्क को सुनाई खरी-खरी, कंगना रनौत बोलीं- तीखा और सटीक जवाब


    नई दिल्ली । भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को लेकर छिड़ी बहस अब राजनीतिक और मनोरंजन जगत तक पहुंच गई है। दुनिया के चर्चित अरबपति एलन मस्क की ओर से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए जाने के बाद अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने उन्हें दोटूक जवाब दिया है। हासन ने भारत की नियामक स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए साफ कहा कि किसी भी देश की नीतियां किसी अरबपति के दबाव में तय नहीं होनी चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत का भी समर्थन मिला है। कंगना ने हासन की बातों की तारीफ करते हुए उनके जवाब को तीखा सटीक और व्यंग्यात्मक बताया।
    कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कमल हासन की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि यह बात चुभने वाली है और किसी भी अरबपति को भारत या अमेरिका जैसे देशों की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए। कंगना ने हासन की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बात बेहद प्रभावशाली तरीके से रखी है। इस प्रतिक्रिया के बाद स्टारलिंक लाइसेंसिंग विवाद में कंगना की एंट्री ने चर्चा को और तेज कर दिया है। आमतौर पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाली कंगना ने इस बार भारत के नीतिगत अधिकारों के समर्थन में कमल हासन का साथ दिया है।
    कमल हासन ने अपने बयान में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वायत्तता पर जोर दिया। उन्होंने एलन मस्क को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी अरबपति को किसी देश की नीति तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए फिर चाहे वह भारत हो या अमेरिका। हासन के मुताबिक भारत एक लोकतंत्र है और कोई कॉलोनी नहीं है। देश अपने भविष्य से जुड़े फैसले खुद लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के लिए अपने दरवाजे खुले रखता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विदेशी कारोबारी हित या दूसरे देशों के दोहरे मापदंड भारत की नीतियों को प्रभावित करें।
    हासन ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के मामले में प्रतिस्पर्धा और किफायती कनेक्टिविटी की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। भारत जैसे बड़े देश में दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना महत्वपूर्ण है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाओं का विस्तार सीमित है। ऐसे में नई तकनीक और कंपनियां लोगों के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं। हालांकि इसके लिए निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी जरूरी है।
    दरअसल एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रही है। मस्क ने लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे और दूसरे देशों में सेवा को मिली मंजूरी का हवाला दिया था। भारत में किसी भी दूरसंचार सेवा को शुरू करने के लिए संबंधित नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। स्टारलिंक लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद उपग्रहों के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है और इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक भी इंटरनेट पहुंचाना है जहां सामान्य नेटवर्क का विस्तार मुश्किल है।
    इस पूरे विवाद ने एक बार फिर तकनीकी निवेश विदेशी कंपनियों की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की नीतिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को सामने ला दिया है। कमल हासन के बयान और कंगना रनौत के समर्थन के बाद यह मुद्दा केवल इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि वैश्विक कंपनियों के लिए बाजार खोलते समय राष्ट्रीय हितों की रक्षा कैसे की जाए।
  • नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म को मिलेगा खास ट्रिब्यूट, अनीत पड्डा की ‘शक्ति शालिनी’ अब मार्च 2027 में हो सकती है रिलीज

    नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म को मिलेगा खास ट्रिब्यूट, अनीत पड्डा की ‘शक्ति शालिनी’ अब मार्च 2027 में हो सकती है रिलीज


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की आगामी हॉरर-कॉमेडी फिल्म शक्ति शालिनी अपनी रिलीज डेट में बदलाव को लेकर चर्चा में है। अनीत पड्डा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म को पहले क्रिसमस 2026 के मौके पर सिनेमाघरों में उतारने की तैयारी थी लेकिन अब इसकी रिलीज 2027 तक टल गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के निर्माता दिनेश विजान और निर्देशक आदित्य सरपोतदार नई रिलीज डेट पर विचार कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि फिल्म मार्च 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि इसकी अंतिम रिलीज डेट को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
    फिल्म की रिलीज आगे बढ़ने की एक बड़ी वजह शाहरुख खान की आगामी फिल्म किंग के साथ बॉक्स ऑफिस पर होने वाली संभावित टक्कर को बताया जा रहा है। मेकर्स नहीं चाहते कि दोनों फिल्मों की रिलीज एक ही समय पर होने से किसी फिल्म के कारोबार पर असर पड़े। इसके अलावा सैयारा की सफलता के बाद अनीत पड्डा को एक और बड़ी फिल्म में दर्शकों के सामने पेश करने की रणनीति भी इस फैसले से जुड़ी बताई जा रही है। निर्माता चाहते हैं कि शक्ति शालिनी को सिनेमाघरों में पर्याप्त जगह मिले और दर्शकों का ध्यान फिल्म की कहानी तथा इसके नए किरदार पर केंद्रित रहे।
    शक्ति शालिनी मैडॉक फिल्म्स के हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा है। इस फ्रेंचाइजी में पहले स्त्री और मुंज्या जैसी फिल्मों ने दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में नई फिल्म से भी काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। अक्टूबर 2025 में फिल्म का टीजर जारी करते समय इसकी रिलीज क्रिसमस 2026 के लिए तय की गई थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से इसकी रिलीज डेट बदलने की चर्चाएं चल रही थीं। अब नाना पाटेकर के निधन के बाद इस फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है क्योंकि निर्देशक आदित्य सरपोतदार के मुताबिक यह दिग्गज अभिनेता की आखिरी फिल्म होगी।
    रिपोर्ट के अनुसार नाना पाटेकर ने मई 2026 में फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली थी। निर्देशक आदित्य सरपोतदार ने अभिनेता के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह फिल्म नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म साबित होगी। उन्होंने फिल्म के साथ अभिनेता के जुड़ाव को भी याद किया। नाना पाटेकर इस फिल्म को लेकर उत्साहित थे और इसके रिलीज होने का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में अब फिल्म उनके प्रशंसकों के लिए एक खास यादगार बन सकती है।
    शक्ति शालिनी में अनीत पड्डा के साथ नाना पाटेकर विशाल जेठवा विनीत कुमार सिंह और सीमा बिस्वास भी नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन आदित्य सरपोतदार ने किया है जबकि इसका निर्माण दिनेश विजान की मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले हुआ है। फिल्म की कहानी और किरदारों को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन इसे हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। अब दर्शकों की निगाहें इसकी नई रिलीज डेट और फिल्म से जुड़े अगले अपडेट पर टिकी हैं। नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म होने के कारण शक्ति शालिनी उनके चाहने वालों के लिए भावनात्मक महत्व भी रखेगी।
  • उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा

    उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा


    नई दिल्ली । उत्तराखंड में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदला कि हरिद्वार से लेकर ऊधम सिंह नगर तक लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार 9 अक्टूबर को तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया। आसमान से गिरे बड़े-बड़े ओलों की वजह से कई गाड़ियों और मकानों के शीशे टूट गए जबकि सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें और कृषि उपज प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक बढ़ गई। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए।
    हरिद्वार में शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए और बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गई। शुरुआत में बारिश की रफ्तार कम रही लेकिन कुछ ही देर में इसकी तीव्रता बढ़ने लगी। बारिश के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी ओलावृष्टि का असर देखने को मिला। अचानक हुई इस मौसमी घटना से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कई जगह खड़े वाहनों के शीशे टूट गए जबकि मकानों की खिड़कियों और सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा। तेज बारिश और ओलों के कारण लोगों को काफी परेशानी हुई। मौसम में आए बदलाव के बाद तापमान नीचे जाने से ठंडक भी बढ़ गई।
    हरिद्वार के अलावा ऊधम सिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसका असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है और किसानों की फसलों तथा कृषि उपज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसान चिंतित हैं। फसल को नुकसान होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि प्रभावित खेतों और संपत्तियों को हुए कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द नुकसान का आकलन करने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती है।
    ओलावृष्टि से नुकसान की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र का रुख किया। मुख्यमंत्री शुक्रवार को हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। इसी दौरान उन्हें ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में ओलावृष्टि और उससे हुए नुकसान की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपना हेलिकॉप्टर प्रभावित क्षेत्र की ओर मोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए हालात का जायजा लिया और फिर जमीन पर पहुंचकर प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने नुकसान का सही आकलन कर निर्धारित समय के भीतर किसानों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। धामी ने भरोसा दिलाया कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और प्रभावित लोगों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
    दूसरी ओर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने हरिद्वार समेत प्रभावित क्षेत्रों में फसलों सब्जियों और संपत्तियों को हुए नुकसान का सही आकलन कराने की मांग की। साथ ही जिन लोगों को अधिक नुकसान हुआ है उन्हें उचित मुआवजा और सहायता देने की अपील की। अब प्रभावित लोगों की नजर प्रशासनिक सर्वेक्षण और राहत संबंधी फैसलों पर है।

  • UPI से पेमेंट पर अभी नहीं कटेगा MDR…. जनवरी 2027 तक डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद!

    UPI से पेमेंट पर अभी नहीं कटेगा MDR…. जनवरी 2027 तक डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद!


    नई दिल्ली।
    डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) करने वाले लोगों और कारोबारियों (Businesspeople) के लिए UPI MDR को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 9 अक्टूबर को होने वाली UPI स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं हो पाई। इसी बैठक में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate- MDR) को लेकर फैसला होना था। अब यह साफ नहीं है कि अगली बैठक कब होगी और MDR को लागू करने पर अंतिम फैसला कब लिया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक सुबह होनी थी। इस बैठक में यूपीआई पर लगने वाले चार्ज को लेकर फैसला किया जाना था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि बैठक अब कब होगी और MDR पर फैसला कब तक आएगा। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की बात कही गई थी। इधर, MDR लागू होने में देरी की आशंका के बीच 9 अक्टूबर को पेटीएम, मोबिक्विक और पाइन लैब्स के शेयरों में करीब 5% तक गिरावट दर्ज की गई।


    तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव

    यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी यूपीआई से जुड़े अहम फैसले लेने वाली आधिकारिक समिति है। इसमें प्रमुख यूपीआई ऐप, बैंक और पेमेंट कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) देश में यूपीआई का ऑपरेट करता है। बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि 8 अक्टूबर को बताया था कि NPCI यूपीआई पर MDR लागू करने की तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।


    क्या है UPI MDR और कितनी लगेगी फीस

    बता दें कि MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों से ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के बदले लिया जाता है। पिछले महीने UPI स्टीयरिंग कमेटी ने 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% यानी 40 बेसिस पॉइंट MDR तय किया था। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक UPI से 10,000 रुपये का पेमेंट करता है, तो 0.4% के हिसाब से MDR 40 रुपये होगा। वहीं, 2,000 रुपये के पेमेंट पर यह शुल्क 8 रुपये बनता है। हालांकि, रियल चार्ज और लागू होने की शर्तें संबंधित नियमों पर निर्भर करेंगी।


    MDR लागू करने में क्यों हो रही देरी

    MDR को लेकर दुकानदारों के संगठन, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट कंपनियां चिंताएं जता रही हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के सीजन में इस तरह का शुल्क लागू करने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, अलग-अलग तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर अलग दरें लागू होने से भी कारोबारियों के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। दूसरी तरफ, सरकार को भी चिंता है कि बढ़ती महंगाई के बीच MDR से कारोबारियों का खर्च बढ़ सकता है। आशंका यह भी है कि कुछ कारोबारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। बता दें कि 8 अक्टूबर को वित्त मंत्री ने कहा था कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR का मामला रिलेटेड पार्टी के बीच तय किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर NPCI और पेमेंट इंडस्ट्री के अगले फैसले पर है।


    कार्ड और UPI के MDR में क्या है अंतर

    कार्ड पेमेंट आमतौर पर तय मर्चेंट कैटेगरी और रिलेटिवली यूनिफॉर्म फी स्ट्रक्चर के तहत काम करते हैं। दूसरी ओर, UPI का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़े पैमाने पर होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्ड करीब 1.1 करोड़ टर्मिनल पर स्वीकार किए जाते हैं, जबकि UPI का नेटवर्क लगभग 10 करोड़ कारोबारियों तक फैला है। UPI में बिजली-पानी के बिल, लोन की किस्त और शेयर बाजार से जुड़े पेमेंट जैसे कई अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं। इन सभी पर एक जैसी फी स्ट्रक्चर लागू करना आसान नहीं है।

  • राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त

    राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त


    नई दिल्ली।
    भारत और फ्रांस (India and France) के बीच राफेल विमानों (Rafale Aircraft) की खरीद को लेकर बातचीत की प्रक्रिया जारी है। इस बीच भारत ने एक ऐसी शर्त रखी है, जिसे लेकर फ्रांस पसोपेश में है। भारत ने कहा है कि वह इन लड़ाकू विमानों में स्वदेशी हथियार (Indigenously Developed Weapons) प्रणाली लगाएगा। हालांकि, फ्रांस इसके लिए अब तक तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि भारत ने फ्रांस को दो टूक कह दिया है कि अगर यह शर्त नहीं मानी गई तो सौदा भी नहीं हो सकता।

    राफेल लड़ाकू विमान खरीद प्रक्रिया से जुड़े वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते के तहत 18 विमान फ्रांस से बनकर आने हैं, जबकि 96 विमान भारत में बनने हैं। भारत इन विमानों में स्वदेशी रक्षा प्रणाली यानी देश में निर्मित मिसाइल, राडार आदि स्थापित करना चाहता है।


    फ्रांस सहमत नहीं

    वहीं, फ्रांस का कहना है कि भारत को राफेल में जोड़ी जाने वाली रक्षा प्रणालियां भी फ्रांस से ही लेनी चाहिए। इसे लेकर जारी बातचीत में भारत ने स्पष्ट तौर पर यह संकेत दे दिए हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर हो रहा है और स्वदेशी हथियारों को तरजीह दे रहा है। ऐसे में फ्रांस को यह शर्त माननी ही होगी। इससे राफेल सौदे में नया मोड़ आ गया है।


    ऐतराज नहीं होना चाहिए

    वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा बिना सोर्स कोड दिए भारतीय हथियार प्रणाली राफेल में लगाने पर फ्रांस को कोई एतराज नहीं होना चाहिए।


    50% स्वदेशी सामग्री पर तैयार था फ्रांस

    इससे पूर्व भारत ने यह शर्त रखी थी कि जिन 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा, उनमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। फ्रांस पहले इसके लिए भी तैयार नहीं था, लेकिन बाद में उसने यह बात मान ली थी। हाल ही में वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने कहा है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे इस वित्त वर्ष के आखिर तक हो सकता है। इस पर जल्द फैसला लिए जाने की उम्मीद है।


    सोर्स कोड नहीं देना चाहती दसाल्ट एविएशन

    सूत्रों के अनुसार, राफेल विमानों का निर्माण करने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन भारत की शर्त मानने के लिए इसलिए भी तैयार नहीं है, क्योंकि इसके लिए उसे सोर्स कोड देना पड़ेगा। सोर्स कोड ऐसा सॉफ्टेवयर होता है, जो विमान के साथ-साथ उसमें लगी हर प्रणाली के संचालन के लिए जिम्मेदार है। अगर सोर्स कोड भारत को मिल गया, तो फिर भारत राफेल जैसा विमान खुद भी बना सकता है। इसीलिए दसाल्ट तैयार नहीं है।


    भारत बिना कोड के हथियार लगाने में सक्षम

    वायुसेना का मानना है कि कोई भी कंपनी क्रेता को कभी अपना सोर्स कोड नहीं देती है। ऐसे में दसाल्ट एविएशन का रुख स्वाभाविक है। वायुसेना के अनुसार, भारत दसाल्ट से सोर्स कोड की मांग कर भी नहीं रहा है। वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘हमने फ्रांस से कहा है कि हम सोर्स कोड के बिना भी राफेल में भारतीय हथियार प्रणाली स्थापित करने में सक्षम हैं। वायुसेना और डीआरडीओ ने इसका रास्ता निकाल लिया है।’

  • MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका

    MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका


    शहडोल।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवा कांग्रेस नेताओं (Youth Congress leaders) को शनिवार को शहडोल रेलवे स्टेशन (Shahdol Railway Station) पर पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम, प्रदेश सचिव अभिषेक शुक्ला, जिला महासचिव शेख आबिद, जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजिल और सत्यम प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सभी को सिटी कोतवाली ले गई, जहां कुछ घंटे रखने के बाद देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।

    युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता दिल्ली में आयोजित आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर उन्हें रोककर कार्रवाई की। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल रही। युवा कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सरकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं और आंदोलन में शामिल होने का प्रयास जारी रखेंगे।


    ‘कितनी बार गिरफ्तार करोगे, आंदोलन में जरूर जाएंगे’

    युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम ने कहा कि युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं और दमनकारी सरकार से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ता दिल्ली जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें कितनी बार गिरफ्तार किया जाएगा। गौतम ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता एक रास्ते से जाएंगे, तो दूसरे कार्यकर्ता अन्य रास्तों से दिल्ली पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन में शामिल होकर रहेंगे।


    रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ भी अलर्ट

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए शहडोल रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भी सतर्क नजर आया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में आंदोलन में शामिल होने जा रहे लोगों की संख्या की जानकारी हर दो घंटे में मुख्यालय को भेजने के निर्देश मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त तड़का, 9 एपिसोड की इस सीरीज ने राइटर्स को भी किया परेशान, जानिए कहां देखें ‘दहन-राकन का रहस्य’

    हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त तड़का, 9 एपिसोड की इस सीरीज ने राइटर्स को भी किया परेशान, जानिए कहां देखें ‘दहन-राकन का रहस्य’


    नई दिल्ली ।
    अगर आपको हॉरर और सस्पेंस से भरपूर कहानियां देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद दहन-राकन का रहस्य आपके लिए एक दिलचस्प विकल्प हो सकती है। इस सीरीज में डरावने रहस्य रहस्यमयी घटनाएं और एक ऐसे गांव की कहानी दिखाई गई है जिसे शापित माना जाता है। इसकी कहानी में लोककथाओं और अंधविश्वास के साथ वैज्ञानिक जांच का पहलू भी जुड़ा हुआ है। सीरीज की IMDb रेटिंग 7.1 बताई गई है। खास बात यह है कि इसकी कहानी लिखने वाले लेखकों के बीच राइटिंग के दौरान इतने मतभेद होते थे कि एक समय पर उन्हें थेरेपिस्ट की मदद तक लेनी पड़ी थी। यही वजह है कि इस सीरीज के पीछे की कहानी भी दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाती है।

    दहन-राकन का रहस्य की कहानी राजस्थान के शिलासपुर नाम के एक गांव के इर्दगिर्द घूमती है। यहां अवनी राउत नाम की आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग होती है। इस किरदार को अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा ने निभाया है। अवनी अपने पति की मौत से जुड़े सदमे और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अपनी जिंदगी को संभालने की कोशिश कर रही होती हैं। इसी दौरान उन्हें मैंगोन कॉर्पोरेशन की एक अहम दुर्लभ खनिज खनन परियोजना की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में यह काम एक प्रशासनिक चुनौती जैसा नजर आता है लेकिन जल्द ही मामला रहस्यमयी घटनाओं और गांव की पुरानी मान्यताओं से जुड़ने लगता है।

    गांव के मुखिया स्वरूप की भूमिका सौरभ शुक्ला ने निभाई है। वह जमीन की खुदाई का विरोध करते हैं और चेतावनी देते हैं कि अगर धरती को छेड़ा गया तो रिधियाकन नाम का राक्षस जाग सकता है। उनके मुताबिक इस रहस्यमयी शक्ति के जागने से गांव पर बड़ी मुसीबत आ सकती है। दूसरी ओर खनन परियोजना से जुड़े काम और प्रशासनिक जिम्मेदारियां अवनी के सामने कई सवाल खड़े करती हैं। गांव में मरे हुए पक्षियों का मिलना और रहस्यमयी हत्याओं जैसी घटनाएं कहानी को और डरावना बना देती हैं। अब यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि इन घटनाओं के पीछे कोई अलौकिक ताकत है या फिर इसके पीछे कोई ऐसा सच छिपा है जिसे सामने आने से रोका जा रहा है।

    सीरीज की खासियत यह है कि इसमें केवल डर पैदा करने पर जोर नहीं दिया गया है बल्कि रहस्य को धीरे-धीरे खोलने की कोशिश भी की गई है। अवनी एक डॉक्टर की मदद से घटनाओं के पीछे वैज्ञानिक कारण तलाशती हैं। इस दौरान गांव की मान्यताओं प्रशासनिक दबाव और खनन परियोजना से जुड़े सवाल कहानी को आगे बढ़ाते हैं। टिस्का चोपड़ा और सौरभ शुक्ला के अलावा इसमें राजेश तैलंग मुकेश तिवारी रोहन जोशी और लहर खान सहित कई कलाकार नजर आते हैं। सीरीज का निर्देशन विक्रांत पंवार और जय शर्मा ने किया है।

    इस सीरीज से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा इसकी लेखन प्रक्रिया का भी है। लेखक निसर्ग मेहता ने एक बातचीत में बताया था कि कहानी लिखते समय तीनों लेखकों के बीच काफी बहस होती थी। कई बार दो लेखक एक राय पर होते थे तो तीसरा उनसे असहमत रहता था। वहीं शिवा बाजपयी ने बताया कि उनके बीच बहस के दौरान रोना-धोना तक हुआ और कभी-कभी वे एक-दूसरे पर पेंसिल भी फेंक देते थे। हालात ऐसे हो गए थे कि एक समय पर उन्हें थेरेपिस्ट को भी हायर करना पड़ा। हालांकि लेखकों के मुताबिक असहमति ने कहानी को बेहतर बनाने में मदद की और निर्देशक ने उन्हें अपनी कल्पना के मुताबिक कहानी विकसित करने की पूरी स्वतंत्रता दी।

    अगर आप डरावनी कहानियों के साथ रहस्य और थ्रिलर का अनुभव लेना चाहते हैं तो दहन-राकन का रहस्य देख सकते हैं। यह सीरीज डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर उपलब्ध बताई गई है। शापित गांव की कहानी खनन से जुड़ा रहस्य और वैज्ञानिक जांच का मेल इसे हॉरर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक विकल्प बनाता है।

  • भारतीय मूल की नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार… बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे दादा

    भारतीय मूल की नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार… बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे दादा


    नई दिल्ली।
    नवनेथम नवी पिल्लई (Navanethem Navi Pillay) को साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) दिया गया है। भारतीय मूल (Indian-origin) की नवी पिल्लई संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख (Former UN Human Rights Chief) रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की जज भी हैं। उन्हें यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए मिला है। नवी पिल्लई का भारत से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाता है, क्योंकि वे भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनके दादा 1890 के दशक में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान भारत से बंधुआ मजदूर के रूप में गन्ने के खेतों में काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे।

    नवी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में एक प्रवासी तमिल हिंदू परिवार में हुआ। उनके पिता नारायणसामी बस ड्राइवर थे और उनकी मां शांतमा नायडू ने उन्हें पारंपरिक मूल्यों के साथ पाला, जिसने उनके जीवन को एक मजबूत आधार दिया। भारत की इस विरासत और पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ पिल्लई रंगभेद के कठोर दौर में भी आगे बढ़ीं और दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने वाली भारतीय मूल की पहली महिलाओं में से एक बनकर उभरीं।


    नवनेथम नवी पिल्लई का संघर्ष भरा जीवन

    नवनेथम नवी पिल्लई का जीवन रंगभेद के दौर में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों के संघर्ष और न्याय के लिए उनकी लंबी लड़ाई से जुड़ा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए काम किया है। नोबेल समिति के मुताबिक, नवी पिल्लई का काम उन सभी लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत है, जो दुनिया को अधिक शांतिपूर्ण बनाना चाहते हैं। दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं। जजों और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी संस्थाओं को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में यह पुरस्कार याद दिलाता है कि हिंसा के बिना विवादों को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान जरूरी है।

    नवनेथम नवी पिल्लई को पुरस्कार मिलने की सूचना देने के लिए समिति उनसे संपर्क नहीं कर पाई थी। इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 287 उम्मीदवारों के नामांकन मिले थे। इनमें एक चौथाई से कुछ अधिक नाम संस्थाओं के थे। पुरस्कार के लिए नामांकन करने का अधिकार राष्ट्राध्यक्षों, राष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, विदेश नीति संस्थानों के प्रमुखों, पूर्व नोबेल विजेताओं और नोबेल समिति के सदस्यों समेत कुछ चुनिंदा लोगों और संस्थाओं को होता है।


    नोबेल शांति पुरस्कार के बारे में जानिए

    नोबेल शांति पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी। अब तक यह 112 व्यक्तियों और 28 अलग-अलग संस्थाओं को दिया जा चुका है। रेड क्रॉस को यह सम्मान तीन बार, जबकि संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी को दो बार मिल चुका है। हालांकि, 19 बार ऐसा भी हुआ है, जब यह पुरस्कार नहीं दिया गया। इनमें से ज्यादातर मौके दोनों विश्व युद्धों के दौरान आए। साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद भी यह पुरस्कार किसी को नहीं दिया गया था। महात्मा गांधी को 12 बार नामांकित किया गया, लेकिन उन्हें कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। इस साल पुरस्कार के तहत 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना की राशि दी जाएगी, जो करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर है।

  • Ind vs WI: दूसरे टी20 में वेस्टइंडीज की धमाकेदार जीत….501 रन बने… छक्कों की बरसात, टूटे कई रिकॉर्ड

    Ind vs WI: दूसरे टी20 में वेस्टइंडीज की धमाकेदार जीत….501 रन बने… छक्कों की बरसात, टूटे कई रिकॉर्ड


    रांची।
    शुक्रवार को रांची (Ranchi) के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स (JSCA International Stadium Complex) में भारत और वेस्टइंडीज (India vs West Indies) के बीच टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला (T20 Series, Second Match) खेला गया. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 6 विकेट से जीत हासिल की. मुकाबले में मेहमान टीम वेस्टइंडीज को जीत के लिए 250 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 9 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. वेस्टइंडीज की जीत में कप्तान शाई होप (102* रन) और शेरफेन रदरफोर्ड (84 रन) की अहम भूमिका रही. दोनों ने चौथे विकेट के लिए 120 रनों की साझेदारी कर मैच का नक्शा पलट दिया।

    इस जीत के साथ ही वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली. भारत- वेस्टइंडीज के बीच रांची में हुए मुकाबले में रनों की बारिश हुई और दोनों टीमों के गेंदबाज बेबस दिखे. इस मुकाबले में कुछ खास रिकॉर्ड्स बने।

    मेन्स टी20 इंटरनेशनल के इतिहास का ये दूसरा सबसे सफल रनचेज रहा. इस मामले में साउथ अफ्रीका पहले नंबर पर है, जिसने साल 2023 में सेंचुरियन के मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 259 रनों का टारगेट चेज कर लिया था. ये टी20 इंटरनेशनल में भारत के खिलाफ सबसे सफल रनचेज रहा. वहीं वेस्टइंडीज ने टी20 क्रिकेट में पहली बार इतना बड़ा टारगेट का सफलतापूर्वक पीछा किया है।


    मेन्स टी20 इंटरनेशनल में सबसे सफल रनचेज

    259- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023
    250- वेस्टइंडीज बनाम भारत, रांची, 2026
    244- ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड, 2018
    244- बुल्गारिया बनाम जिब्राल्टर, सोफिया, 2025
    243- बुल्गारिया बनाम सर्बिया, सोफिया, 2022
    232- वेस्टइंडीज बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग, 2015
    230- इंग्लैंड बनाम साउथ अफ्रीका, मुंबई WS, 2016


    मेन्स टी20 में चेज किए 250 या उससे अधिक के लक्ष्य

    267- वॉशिंगटन फ्रीडम बनाम MI न्यूयॉर्क, ऑकलैंड, 2026
    265- पंजाब किंग्स बनाम दिल्ली कैपिटल्स, दिल्ली, 2026
    262- पंजाब किंग्स बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स, कोलकाता, 2024
    259- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023
    258- ब्रिस्बेन हीट बनाम पर्थ स्कॉर्चर्स, ब्रिस्बेन, 2025
    253- मिडलसेक्स बनाम सरे, द ओवल, 2023
    250- वेस्टइंडीज बनाम भारत, रांची, 2026

    इस मुकाबले में कुल 501 रन बने. दूसरी बार ऐसा हुआ है जब किसी मेन्स टी20 इंटरनेशनल में 500 या उससे ज्यादा रन स्कोर किए गए. इस मामले में साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच 2023 में सेंचुरियन के मैदान पर खेला गया मुकाबला टॉप पर है. उस मुकाबले में कुल 517 रन बने थे।


    मेन्स टी20 इंटरनेशनल मैच में सर्वाधिक रन

    517- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2009
    501- भारत बनाम वेस्टइंडीज, रांची, 2026
    499- भारत बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, T20 विश्व कप 2026
    496- भारत बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026
    489- वेस्टइंडीज बनाम भारत, लॉडरहिल, 2016

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच इस मुकाबले में कुल 81 बाउंड्रीज (46 चौके और 33 छक्के) लगे. इससे ज्यादा बाउंड्रीज टी20 इंटरनेशनल के इतिहास में केवल दो मौके पर लगे. भारत की पारी में 25 चौके और 13 छक्के लगे. वहीं वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने इस मैच में 21 चौके और 20 छक्के उड़ाए।


    टी20I मैचों में सर्वाधिक बाउंड्रीज

    81- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023 (चौके/छक्के: 46/35)
    80- जिब्राल्टर बनाम बुल्गारिया, सोफिया, 2025 (चौके/छक्के: 39/41)
    79- भारत बनाम वेस्टइंडीज, रांची, 2026 (चौके/छक्के: 46/33)
    73- भारत बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, 2026 (चौके/छक्के: 39/34)
    72- भारत बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026 (चौके/छक्के: 36/36)

    वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने इस मैच में सिर्फ 45 बॉल पर शतक जड़ दिया. होप ने 102* रन बनाए, जिसमें 9 छक्के और 6 चौके शामिल रहे. होप ने दूसरी बार टी20 इंटरनेशनल मैच में शतक लगाया है. यह गेंदों के लिहाज से वेस्टइंडीज के किसी बल्लेबाज का दूसरा सबसे तेज शतक रहा. होप अब भारत के खिलाफ सबसे तेज टी20 इंटरनेशनल शतक जड़ने के मामले में भी संयुक्त रूप से टॉप पर आ गए हैं. इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने भी टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में 45 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी।


    वेस्टइंडीज के लिए सबसे तेज टी20I शतक (गेंदों के हिसाब से)

    39- जॉनसन चार्ल्स बनाम साउथ अफ्रीका, सेंचुरियन, 2023
    45- शाई होप बनाम भारत, रांची, 2026
    47- क्रिस गेल बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, 2016
    48- इविन लुईस बनाम भारत, लॉडरहिल, 2016
    50- क्रिस गेल बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग, 2007


    वेस्टइंडीज के लिए टी20I में सर्वाधिक शतक

    2- क्रिस गेल,
    2 – इविन लुईस
    2- शाई होप

    दो फुल मेम्बर्स टीम के बीच हुए मेन्स टी20 इंटरनेशनल मैचों में अब तक 10 बार किसी टीम ने 20 या उससे अधिक छक्के लगाए हैं. वेस्टइंडीज और भारतीय टीम ने यह कारनामा चार-चार बार किया है. जबकि अफगानिस्तान और इंग्लैंड ने एक-एक बार ये मुकाम हासिल किया।

  • नाना पाटेकर के निधन से टूट गईं हेमा मालिनी, बोलीं एक हफ्ते पहले आया था फोन, उस वक्त बात नहीं कर पाने का रहेगा मलाल

    नाना पाटेकर के निधन से टूट गईं हेमा मालिनी, बोलीं एक हफ्ते पहले आया था फोन, उस वक्त बात नहीं कर पाने का रहेगा मलाल


    नई दिल्ली । हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया है। अपने दमदार अभिनय और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर के जाने से उनके प्रशंसक और फिल्मी दुनिया की कई हस्तियां भावुक हैं। इस बीच दिग्गज अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने नाना से जुड़ी एक ऐसी याद साझा की है जिसने उनके दुख को और गहरा कर दिया। हेमा मालिनी ने बताया कि नाना पाटेकर ने निधन से करीब एक सप्ताह पहले उन्हें फोन किया था लेकिन उस समय वह यात्रा कर रही थीं और कॉल नहीं उठा सकीं। अब अभिनेता के निधन के बाद उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह उनसे उस समय बात नहीं कर पाईं।
    हेमा मालिनी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में नाना पाटेकर को याद करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले उनकी नाना से बातचीत हुई थी। इसके बाद करीब एक सप्ताह पहले भी उनका फोन आया था लेकिन यात्रा में व्यस्त होने के कारण वह कॉल रिसीव नहीं कर सकीं। हेमा ने कहा कि जब उन्होंने नाना के निधन की खबर सुनी तो उन्हें गहरा सदमा लगा। किसी परिचित और सहकर्मी से आखिरी बार बात करने का मौका हाथ से निकल जाना अक्सर मन में कसक छोड़ जाता है। हेमा मालिनी के लिए भी यह याद अब भावुक कर देने वाली बन गई है।
    नाना पाटेकर हिंदी और मराठी फिल्मों के उन कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता से अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए और गंभीर भूमिकाओं से लेकर प्रभावशाली संवाद अदायगी तक दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ी। उनका अभिनय केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्हें फिल्म जगत में एक विशिष्ट कलाकार के रूप में सम्मान मिला। हेमा मालिनी ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री ने एक बहुत बड़े अभिनेता को खो दिया है। उनके मुताबिक नाना खुद अभिनय की एक संस्था जैसे थे।
    नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता भी उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। खास तौर पर किसानों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए किए गए उनके प्रयासों की चर्चा होती रही है। नाना पाटेकर नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों की सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों के लिए काम करने से जुड़े रहे। हेमा मालिनी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके अभिनय के साथ समाज के लिए किए गए कामों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि नाना ने अपनी प्रतिभा से फिल्म इंडस्ट्री में अलग मुकाम बनाया और जरूरतमंदों की मदद के लिए भी लगातार प्रयास किए।
    नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियां उन्हें अपने तरीके से याद कर रही हैं। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और प्रशंसकों के लिए यह केवल एक अभिनेता को खोने का दुख नहीं बल्कि एक ऐसी शख्सियत के जाने का दर्द है जिसने अपने काम से गहरी छाप छोड़ी। हेमा मालिनी की याद ने इस दुख को एक निजी भावनात्मक पहलू भी दिया है। एक फोन कॉल जिसे उस समय सामान्य व्यस्तता के कारण नहीं उठाया जा सका अब एक अधूरी बातचीत की याद बन गया है। नाना पाटेकर का अभिनय और सामाजिक योगदान उनके प्रशंसकों के बीच लंबे समय तक याद किया जाएगा।