Author: bharati

  • MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा

    MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण (27 Percent OBC reservation ) से जुड़े मामले में हाईकोर्ट (High Court) के फैसले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी और इसके प्रावधानों में गंभीर कानूनी खामियां थीं। राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके मुताबिक, न्यायालय ने 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, वर्ष 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक की गई भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।


    कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    सीएम मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से तत्कालीन सरकार की प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठे हैं।


    विधिक परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करेगी और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ओबीसी आरक्षण के मामले में फैसले के प्रभाव और राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें

    Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करके लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की चाह रखने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस शेयर में पैसा लगाया जाए और कौन सी कंपनी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। बाजार में रोजाना शेयरों की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे में कई निवेशक तेजी से मुनाफा कमाने की उम्मीद में बिना पूरी जानकारी के शेयर खरीद लेते हैं। हालांकि शेयर बाजार में कमाई की कोई गारंटी नहीं होती और गलत फैसले से पूंजी का नुकसान भी हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबार को समझना बेहद जरूरी है।

    अगर आप शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी निवेश अवधि और जोखिम सहने की क्षमता तय करें। कम समय में जरूरत पड़ने वाली रकम को शेयर बाजार में लगाना उचित नहीं माना जाता क्योंकि बाजार गिरने पर नुकसान में शेयर बेचने की नौबत आ सकती है। लंबी अवधि के निवेश के लिए ऐसी कंपनियों का अध्ययन किया जा सकता है जिनका कारोबार मजबूत हो और जिनकी कमाई बढ़ने की संभावनाएं हों। केवल किसी परिचित की सलाह या इंटरनेट पर मिलने वाले बड़े मुनाफे के दावों के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

    निवेश के लिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का क्षेत्र एक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कंपनियों पर भी नजर रखी जा सकती है। रोजमर्रा की जरूरतों के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां और बिजली तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां भी निवेशकों के अध्ययन में शामिल हो सकती हैं। लेकिन किसी सेक्टर का तेजी से बढ़ना इस बात की गारंटी नहीं है कि उससे जुड़ा हर शेयर अच्छा रिटर्न देगा। कंपनी की मौजूदा कीमत और भविष्य में कारोबार बढ़ाने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।

    किसी शेयर को खरीदने से पहले पांच महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। पहला संकेत कंपनी की बिक्री और मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी है। दूसरा संकेत कंपनी पर कर्ज की स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता है। तीसरा संकेत कंपनी का प्रबंधन और कारोबार चलाने का तरीका है। चौथा संकेत कंपनी के पास भविष्य में विकास के अवसर होना है। पांचवां संकेत शेयर की मौजूदा कीमत का कंपनी की कमाई और वित्तीय स्थिति के मुकाबले उचित होना है। इन पहलुओं का अध्ययन करने से निवेशक को कंपनी की मजबूती और संभावित जोखिम समझने में मदद मिल सकती है।

    जो लोग खुद कंपनियों का विश्लेषण नहीं कर पाते वे म्यूचुअल फंड और इंडेक्स फंड के विकल्पों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स देश की 50 प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है। इससे जुड़े इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक एक साथ कई कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं। इससे किसी एक कंपनी पर निर्भरता कम हो सकती है लेकिन बाजार में गिरावट आने पर ऐसे निवेश का मूल्य भी घट सकता है।

    निवेश करते समय पूरी रकम एक ही शेयर में लगाने से बचना चाहिए। अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार निवेश करें और आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग बचत रखें। बिना पर्याप्त जानकारी के इंट्राडे ट्रेडिंग और फ्यूचर एंड ऑप्शन जैसे जोखिम वाले कारोबार में पैसा लगाना भारी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर मिलने वाली शेयर खरीदने की सलाह और निश्चित मुनाफे के दावों की जांच किए बिना उन पर भरोसा न करें।

    शेयर बाजार में बेहतर निवेश का रास्ता जल्दबाजी के बजाय जानकारी और अनुशासन से होकर गुजरता है। किसी भी शेयर को खरीदने से पहले कंपनी के कारोबार और उसकी कीमत का आकलन करें तथा अपने वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखें। कोई भी शेयर निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं देता। बड़ी रकम निवेश करने से पहले जरूरत के अनुसार सेबी में पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लेना समझदारी हो सकती है।

  • सर्दियों में बढ़ती डैंड्रफ से हैं परेशान, दही, एलोवेरा और मेथी समेत ये 5 घरेलू हेयर मास्क आजमाएं

    सर्दियों में बढ़ती डैंड्रफ से हैं परेशान, दही, एलोवेरा और मेथी समेत ये 5 घरेलू हेयर मास्क आजमाएं

    नई दिल्ली ।सर्दियों में बालों में रूसी और सिर की त्वचा यानी स्कैल्प में खुजली की समस्या बढ़ सकती है। काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने पर कंधों पर सफेद परत दिखाई देने से कई लोग असहज महसूस करते हैं। डैंड्रफ की समस्या बालों की खूबसूरती और रोजमर्रा की देखभाल को प्रभावित कर सकती है। ठंड के मौसम में स्कैल्प का रूखापन और हेयर केयर रूटीन में बदलाव परेशानी को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में बालों को साफ रखने के साथ स्कैल्प की उचित देखभाल करना भी जरूरी है। कुछ घरेलू हेयर मास्क बालों को मुलायम बनाने और उनकी कंडीशनिंग में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन नुस्खों को डैंड्रफ का पक्का इलाज नहीं मानना चाहिए। लगातार रूसी या खुजली रहने पर उचित उपचार की जरूरत हो सकती है।

    दही और एलोवेरा से बना हेयर मास्क बालों की देखभाल के लिए एक विकल्प है। एलोवेरा त्वचा को ठंडक देने में मदद कर सकता है, जबकि दही बालों को कंडीशन करने में सहायक हो सकता है। इसे बनाने के लिए दो चम्मच सादे दही में एक चम्मच शुद्ध एलोवेरा जेल मिलाएं। तैयार मिश्रण को थोड़ी देर बालों और स्कैल्प पर लगाकर रखें। इसके बाद हल्के शैंपू से अच्छी तरह धो लें। अगर इस मिश्रण को लगाने के बाद खुजली या जलन बढ़ती है, तो इसे तुरंत धो देना चाहिए। दूसरा विकल्प मेथी और दही का हेयर पैक है। इसके लिए एक से दो चम्मच मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दें। सुबह दानों को पीसकर पेस्ट बना लें और उसमें थोड़ा दही मिलाएं। इस मिश्रण को कुछ देर बालों पर लगाकर रखें और फिर अच्छी तरह धो लें। यह पैक बालों को कंडीशन करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे डैंड्रफ का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।

    तीसरा विकल्प शुद्ध एलोवेरा जेल का इस्तेमाल है। स्कैल्प में रूखापन या हल्की खुजली महसूस होने पर कुछ लोग इसे आजमा सकते हैं, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति और हर तरह की रूसी में समान नहीं होता। इस्तेमाल से पहले थोड़ी मात्रा में जेल स्कैल्प के छोटे हिस्से पर लगाकर जांच करना जरूरी है। अगर कोई परेशानी नहीं होती, तो इसे थोड़ी देर लगाकर बाद में धो सकते हैं। खुशबू या अल्कोहल वाले जेल से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है, इसलिए उत्पाद का चुनाव सावधानी से करना चाहिए। चौथा विकल्प केला और नारियल तेल का हेयर मास्क है। यह खास तौर पर बालों के रूखेपन को कम करने और उन्हें मुलायम बनाने के लिए उपयोगी हो सकता है। इसे तैयार करने के लिए आधे पके केले को अच्छी तरह मैश करें और उसमें एक छोटा चम्मच नारियल तेल मिलाएं। इस मिश्रण को बालों की लंबाई पर लगाएं और लगभग 15 से 20 मिनट बाद शैंपू से धो लें। इसे डैंड्रफ खत्म करने का प्रमाणित तरीका नहीं समझना चाहिए।

    पांचवां विकल्प अंडे और ऑलिव ऑयल से बना हेयर मास्क है। इस मिश्रण का इस्तेमाल बालों की लंबाई को मुलायम बनाने के लिए किया जाता है। इसे बनाने के लिए एक अंडे में एक चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसे बालों की लंबाई पर लगाएं और फिर ठंडे या हल्के गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लें। गर्म पानी का इस्तेमाल करने से अंडा बालों में जम सकता है और उसे निकालना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इस मास्क से डैंड्रफ खत्म होने के मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे मुख्य रूप से बालों की कंडीशनिंग के लिए ही देखना चाहिए। किसी भी नए घरेलू मिश्रण को इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर जांच करना बेहतर है। नींबू का रस, एसेंशियल ऑयल या अन्य घरेलू सामग्री सीधे स्कैल्प पर लगाने से जलन हो सकती है।

    डैंड्रफ बार-बार लौटता है, तो केवल घरेलू हेयर मास्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे में स्कैल्प की स्थिति के अनुसार विशेष रूप से तैयार एंटी-डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल अधिक उपयोगी हो सकता है। शैंपू चुनते समय उसके लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना चाहिए। अगर रूसी के साथ तेज खुजली, लालिमा, घाव या बाल झड़ने की समस्या हो, अथवा नियमित देखभाल के बावजूद डैंड्रफ ठीक न हो, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। घरेलू मास्क बालों को मुलायम बनाने और उनकी देखभाल में मदद कर सकते हैं, लेकिन लगातार बनी रहने वाली रूसी के लिए सही उपचार को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • बैंक से कर्ज लिया फिर भी मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा, मध्य प्रदेश सरकार की योजना पर क्यों मचा घमासान

    बैंक से कर्ज लिया फिर भी मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा, मध्य प्रदेश सरकार की योजना पर क्यों मचा घमासान


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदेश के करीब 50 लाख लोगों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए सरकार ने 3800 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री होने से लोगों को अपनी संपत्ति के दस्तावेज मिलेंगे और बैंक से कर्ज लेने जैसी सुविधाओं का लाभ उठाना आसान होगा। लेकिन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में सामने आए आंकड़े इस योजना की जरूरत और प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े कर रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख प्राप्त करने वाले 2102 हितग्राही पहले ही बैंकों से कुल 175 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक का कर्ज ले चुके हैं। इनमें कुछ भूखंडों पर करीब 17 करोड़ रुपये तक का ऋण दर्ज है।

    इस जानकारी के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब आबादी भूमि के अधिकार अभिलेख के आधार पर बैंक पहले ही कर्ज दे रहे हैं और संबंधित भूखंडों को बंधक भी बनाया जा चुका है तो अब मुफ्त रजिस्ट्री की व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ रही है। हालांकि सरकार की योजना का उद्देश्य केवल बैंक ऋण उपलब्ध कराना नहीं बल्कि लोगों को भूमि का विधिवत पंजीकृत मालिकाना हक दिलाना भी है। ऐसे में अधिकार अभिलेख और पंजीकृत स्वामित्व के बीच कानूनी अंतर को समझना जरूरी है। बैंक से कर्ज मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया अनावश्यक है। लेकिन पहले से ऋण प्राप्त कर चुके हितग्राहियों के मामलों में नियमों और प्रक्रिया की स्पष्टता को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं।

    राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार रतलाम जिले की जावरा तहसील के टोलखेड़ी निवासी संजय के भूखंड पर 16 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक का कर्ज दर्ज है। खरगोन जिले के धनोरा में लक्ष्मीबाई और अन्य संबंधित हितग्राहियों के भूखंड पर भी करीब 16 करोड़ 81 लाख रुपये का ऋण दर्ज बताया गया है। इसके अलावा विदिशा जिले के गूलरखेड़ी में आकाश कटारे के भूखंड पर 96 लाख रुपये और देवास जिले के डबलचौकी में सुरेश अग्रवाल के भूखंड पर 52.20 लाख रुपये का कर्ज दर्ज है। इंदौर उज्जैन नीमच रतलाम मंदसौर सीहोर और कई अन्य जिलों में भी आबादी भूमि पर लाखों रुपये के ऋण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

    दरअसल अप्रैल 2022 में तत्कालीन भू-अभिलेख आयुक्त की ओर से राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को पत्र भेजा गया था। इसमें आबादी भूमि को बंधक रखने और बंधक हटाने की प्रक्रिया को कृषि भूमि के खसरे की तरह अपनाने की बात कही गई थी। पत्र के अनुसार कर्ज की अदायगी नहीं होने पर बैंक को संबंधित संपत्ति पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल सकता है। इसी व्यवस्था के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने आबादी भूमि पर ऋण देने की प्रक्रिया अपनाई। ऐसे में पहले से बंधक संपत्तियों की रजिस्ट्री के दौरान कानूनी प्रक्रिया और बैंक के हितों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।

    दूसरी ओर मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया पटवारियों के विरोध के कारण भी अटकी हुई है। विवाद की मुख्य वजह रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक यानी एक्जीक्यूटर की भूमिका देना और उनकी व्यक्तिगत आईडी तथा कानूनी जिम्मेदारी से जुड़े सवाल हैं। सरकार ने पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति जताई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने सोमवार से स्वामित्व योजना का काम शुरू करने की घोषणा की है।

    सरकार ने इस योजना के तहत करीब 50 लाख लोगों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 3800 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है और कई राजस्व तथा अन्य अधिकारियों को पंजीयन से जुड़े अधिकार दिए गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले से अधिकार अभिलेख और बैंक ऋण वाले भूखंडों की रजिस्ट्री किस प्रक्रिया से होगी और योजना को कानूनी विवादों से बचाते हुए समय पर कैसे पूरा किया जाएगा। योजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब हितग्राहियों को स्पष्ट स्वामित्व मिलेगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी होगी।
  • शारदीय नवरात्रि में नारंगी से पीकॉक ग्रीन तक नौ रंगों की परंपरा, जानें किस दिन किस देवी की पूजा होती है और क्या है रंगों का महत्व

    शारदीय नवरात्रि में नारंगी से पीकॉक ग्रीन तक नौ रंगों की परंपरा, जानें किस दिन किस देवी की पूजा होती है और क्या है रंगों का महत्व


    नई दिल्ली ।
    शारदीय नवरात्रि का पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ इस दौरान पारंपरिक कपड़े पहनने और हर दिन अलग रंग चुनने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है। भक्त पूजा, गरबा और डांडिया जैसे आयोजनों के लिए अपने परिधानों की तैयारी पहले से करते हैं। नवरात्रि के प्रत्येक दिन को एक देवी स्वरूप से जोड़ा जाता है और प्रचलित रंगों की सूची में नारंगी, सफेद, लाल, रॉयल ब्लू, पीला, हरा, ग्रे, पर्पल और पीकॉक ग्रीन शामिल हैं। इन रंगों को उत्साह, शांति, शक्ति, प्रसन्नता और नई शुरुआत जैसे भावों से जोड़ा जाता है। हालांकि, रंगों का क्रम और उनसे जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार बदल सकती हैं। पूजा के लिए किसी विशेष रंग के कपड़े पहनना अनिवार्य नहीं है।

    नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन नारंगी रंग पहनने की परंपरा बताई जाती है। नारंगी रंग को उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस अवसर पर नारंगी रंग की साड़ी, सूट या कुर्ता पहनकर पारंपरिक अंदाज अपना सकते हैं। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है और सफेद रंग को इस दिन से जोड़ा जाता है। सफेद रंग शांति, सादगी और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सफेद सूट या साड़ी के साथ हल्की जूलरी पहनकर सादगी भरा उत्सवी लुक तैयार किया जा सकता है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन लाल रंग पहनने की परंपरा है। लाल रंग को शक्ति और साहस से जोड़कर देखा जाता है। लाल साड़ी, अनारकली सूट या अन्य पारंपरिक परिधान इस दिन के लिए चुने जा सकते हैं।

    नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है और प्रचलित सूची में रॉयल ब्लू रंग शामिल है। इस रंग को गहराई, स्थिरता और शांति से जोड़ा जाता है। भक्त नीले रंग का कुर्ता, साड़ी या लहंगा पहनकर उत्सव के अनुरूप अपना पहनावा चुन सकते हैं। पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। इस दिन पीला रंग पहनने की परंपरा बताई गई है। पीले रंग को खुशहाली, प्रसन्नता और उमंग का प्रतीक माना जाता है। पीले रंग की कुर्ती, साड़ी या सूट पारंपरिक परिधान के विकल्प हो सकते हैं। छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है और हरे रंग को इस दिन से जोड़ा जाता है। हरा रंग प्रकृति, विकास और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर हरे रंग के परिधान पहनकर नवरात्रि के उत्सव में शामिल हुआ जा सकता है।

    सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन ग्रे रंग को प्रचलित रंगों की सूची में रखा गया है। ग्रे रंग को संतुलन और स्थिरता से जोड़ा जाता है। इस दिन ग्रे रंग की साड़ी या एथनिक सूट के साथ सिल्वर जूलरी पहनने का विकल्प चुना जा सकता है। आठवें दिन मां महागौरी की आराधना होती है और पर्पल यानी बैंगनी रंग इस दिन से संबंधित माना गया है। बैंगनी रंग को गरिमा, समृद्धि और भव्यता से जोड़ा जाता है। इस दिन बैंगनी साड़ी, सूट या लहंगा पहनकर उत्सवी लुक तैयार किया जा सकता है। नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन पीकॉक ग्रीन यानी मोरपंखी हरे रंग को प्रचलित रंगों की सूची में शामिल किया गया है। इस रंग की साड़ी, सूट या लहंगा पहनकर भक्त अंतिम दिन के उत्सव के लिए पारंपरिक पहनावा चुन सकते हैं।

    नवरात्रि में नौ रंगों के कपड़े पहनने की परंपरा का उद्देश्य त्योहार के उत्साह और देवी उपासना से जुड़े भावों को पहनावे के माध्यम से व्यक्त करना भी है। अलग-अलग रंगों को विशेष गुणों और प्रतीकों से जोड़ा जाता है। लाल रंग शक्ति, सफेद शांति और हरा रंग प्रकृति तथा विकास का प्रतीक माना जाता है। इसी तरह नारंगी को ऊर्जा, पीले को प्रसन्नता और बैंगनी को भव्यता से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन रंगों की सूची हर जगह एक जैसी नहीं होती और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए नवरात्रि के दौरान रंगों का चयन व्यक्तिगत पसंद, स्थानीय परंपरा और सुविधा के अनुसार किया जा सकता है। मां दुर्गा की आराधना में श्रद्धा और पूजा का महत्व प्रमुख है; किसी खास रंग के कपड़े पहनना धार्मिक रूप से अनिवार्य नहीं माना जाता।

  • Vastu for Wealth: घर की सही दिशा से लेकर तिजोरी की जगह तक, आर्थिक खुशहाली के लिए जानें वास्तु के महत्वपूर्ण उपाय

    Vastu for Wealth: घर की सही दिशा से लेकर तिजोरी की जगह तक, आर्थिक खुशहाली के लिए जानें वास्तु के महत्वपूर्ण उपाय


    नई दिल्ली। हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहे और आर्थिक परेशानियों का सामना कम से कम करना पड़े। इसके लिए लोग मेहनत करने के साथ ही बचत और निवेश पर भी ध्यान देते हैं। वास्तु शास्त्र में घर की दिशाओं और वस्तुओं की व्यवस्था को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। इनके अनुसार घर का व्यवस्थित और स्वच्छ वातावरण सकारात्मकता बढ़ाने में मदद कर सकता है। यदि आप भी घर में धन और समृद्धि से जुड़ी वास्तु मान्यताओं को अपनाना चाहते हैं तो कुछ आसान बातों का ध्यान रख सकते हैं। हालांकि इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में देखना चाहिए। इनसे धन बढ़ने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर की उत्तर दिशा को धन और अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दिशा को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। यहां बेकार सामान और कूड़ा जमा करने से बचें। घर में रोशनी और हवा आने की उचित व्यवस्था रखें। उत्तर दिशा में साफ-सफाई बनाए रखना घर को सुंदर और व्यवस्थित रखने का भी अच्छा तरीका है। किसी भी दिशा को लेकर अनावश्यक डर रखने के बजाय घर के वातावरण को स्वच्छ और सुविधाजनक बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

    तिजोरी और धन रखने की जगह को लेकर भी वास्तु शास्त्र में कुछ नियम बताए जाते हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार तिजोरी को इस तरह रखा जा सकता है कि उसका दरवाजा उत्तर दिशा की ओर खुले। कुछ मान्यताओं में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर से संबंधित माना जाता है। तिजोरी के आसपास अनावश्यक सामान न रखें और जरूरी दस्तावेजों तथा नकदी को व्यवस्थित तरीके से रखें। वास्तविक जीवन में आर्थिक सुरक्षा के लिए नकदी और कीमती वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर रखना सबसे जरूरी है।

    घर के मुख्य द्वार को भी वास्तु में महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि प्रवेश द्वार साफ और आकर्षक होना चाहिए। दरवाजे के सामने कचरा या बेकार वस्तुएं जमा नहीं करनी चाहिए। पर्याप्त रोशनी और रास्ते में खुलापन रखने से घर में आना जाना आसान होता है। मुख्य द्वार की नियमित सफाई करना और दरवाजे की खराबी समय पर ठीक करवाना भी उपयोगी है। घर का प्रवेश स्थान साफ रहने से पूरे घर में व्यवस्थित माहौल बना रहता है।

    वास्तु मान्यताओं में पानी और रसोई की व्यवस्था को भी महत्व दिया जाता है। घर में नल से पानी लगातार टपक रहा हो तो उसे जल्द ठीक करवाना चाहिए। इससे पानी की बर्बादी रुकती है और अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकता है। रसोई को साफ रखना और भोजन को ढककर रखना स्वास्थ्य तथा स्वच्छता के लिहाज से जरूरी है। घर में टूटे हुए सामान और अनुपयोगी वस्तुओं को जरूरत के अनुसार हटाने से जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

    धन और समृद्धि बनाए रखने के लिए केवल वास्तु उपायों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित बचत करना खर्चों का हिसाब रखना और भविष्य के लिए वित्तीय योजना बनाना अधिक व्यावहारिक कदम हैं। अपनी आय के अनुसार बजट तैयार करें और गैर जरूरी खरीदारी से बचें। निवेश करने से पहले उसके जोखिम और शर्तों को अच्छी तरह समझें। किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले विश्वसनीय जानकारी हासिल करें। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं को अपनाते समय भी अपनी आर्थिक क्षमता का ध्यान रखें और महंगे अनुष्ठानों के नाम पर अनावश्यक खर्च न करें। साफ-सफाई सुव्यवस्थित घर सकारात्मक सोच और समझदारी से लिया गया आर्थिक निर्णय जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • भोपाल-इंदौर मेट्रो में बचेंगे पैसे, सिंगल टिकट से लेकर ग्रुप टिकट तक पर बड़ी राहत, जानिए कैसे मिलेगा 44% तक का लाभ

    भोपाल-इंदौर मेट्रो में बचेंगे पैसे, सिंगल टिकट से लेकर ग्रुप टिकट तक पर बड़ी राहत, जानिए कैसे मिलेगा 44% तक का लाभ


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। त्योहारों के मौसम में यात्रियों को आकर्षित करने और मेट्रो में सफर को किफायती बनाने के लिए मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने टिकट पर अतिरिक्त छूट देने का फैसला किया है। नई व्यवस्था 11 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और इसका लाभ 31 दिसंबर 2026 तक उठाया जा सकेगा। इसके तहत यात्रियों को सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं रिटर्न टिकट और ग्रुप टिकट पर भी पहले की तुलना में ज्यादा बचत होगी। मेट्रो कॉरपोरेशन के मुताबिक मौजूदा ई-वॉलेट बोनस और नई टिकट छूट को मिलाकर यात्रियों को अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत तक का फायदा मिल सकता है।

    नई व्यवस्था के तहत सिंगल जर्नी टिकट यानी एक तरफ की यात्रा के टिकट पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। रिटर्न जर्नी टिकट लेने वाले यात्रियों को कुल 30 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलेगा। पहले इस टिकट पर 5 प्रतिशत की छूट मिलती थी। इसी तरह ग्रुप टिकट पर मिलने वाली छूट को बढ़ाकर कुल 35 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाती थी। इस बदलाव से रोजाना मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के साथ ही परिवार और दोस्तों के साथ घूमने जाने वालों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

    ग्रुप टिकट की सुविधा में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले इसका लाभ लेने के लिए कम से कम आठ यात्रियों का होना जरूरी था। अब इस संख्या को घटाकर केवल दो यात्री कर दिया गया है। यानी दो लोग भी एक साथ ग्रुप टिकट लेकर छूट का फायदा उठा सकेंगे। इससे परिवार के सदस्यों और दोस्तों के लिए मेट्रो से सफर करना पहले से अधिक किफायती हो सकता है। हालांकि 20 रुपये वाले सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत की छूट लागू नहीं होगी। यात्रियों को टिकट खरीदने से पहले संबंधित नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

    मेट्रो में बचत का एक और तरीका मोबाइल ऐप का ई-वॉलेट है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन पहले से ही रिचार्ज की राशि के आधार पर बोनस दे रहा है। 200 से 499 रुपये तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत बोनस मिलता है। 500 से 999 रुपये तक के रिचार्ज पर 10 प्रतिशत बोनस दिया जाता है। वहीं 1000 से 1499 रुपये तक के रिचार्ज पर 12 प्रतिशत और 1500 से 2000 रुपये तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है। नई टिकट छूट के साथ इस बोनस का लाभ लेने पर यात्रियों की बचत और बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक फायदा टिकट के प्रकार और रिचार्ज राशि पर निर्भर करेगा।

    भोपाल और इंदौर मेट्रो में डिजिटल टिकटिंग की सुविधा भी यात्रियों के लिए उपयोगी है। यात्री एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के जरिए टिकट प्राप्त कर सकते हैं और यूपीआई क्यूआर कोड तथा ई-वॉलेट जैसे डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर सकते हैं। इससे टिकट खरीदने की प्रक्रिया आसान होती है और नकद भुगतान की जरूरत भी कम होती है।

    किराये की बात करें तो एक से दो स्टेशन की यात्रा के लिए 20 रुपये तीन से पांच स्टेशन के लिए 30 रुपये और छह से आठ स्टेशन के लिए 40 रुपये किराया निर्धारित है। पूरे रूट पर अधिकतम किराया 80 रुपये तक है। नई छूट लागू होने के बाद यात्रियों को मेट्रो के सफर पर खर्च कम करने का अवसर मिलेगा। त्योहारों के दौरान शुरू की जा रही यह पहल कितने नए यात्रियों को मेट्रो की ओर आकर्षित करती है इस पर भी नजर रहेगी।

  • Shaniwar Vrat 2026: शनि दोष से मुक्ति की कामना के लिए ऐसे करें शनिदेव का व्रत, जानिए पूजा से लेकर दान तक की पूरी विधि

    Shaniwar Vrat 2026: शनि दोष से मुक्ति की कामना के लिए ऐसे करें शनिदेव का व्रत, जानिए पूजा से लेकर दान तक की पूरी विधि


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को न्याय और कर्मफल का देवता कहा जाता है। माना जाता है कि वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिदेव की पूजा करते हैं और सुख समृद्धि तथा जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत की कामना करते हैं। शनि व्रत रखने वाले भक्तों को पूजा के साथ अपने आचरण और व्यवहार में भी संयम बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    शनि व्रत रखने के लिए शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थल की सफाई करें। शनिदेव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान मन में श्रद्धा और सकारात्मक भावना रखें। कई श्रद्धालु इस दिन शनिदेव के साथ भगवान हनुमान की भी आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति से भय और परेशानियों का सामना करने का साहस मिलता है। पूजा करते समय परिवार की सुख शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जा सकती है।

    शनिदेव की पूजा के लिए सरसों का तेल काला तिल और नीले या काले फूल जैसी सामग्री का उपयोग परंपरा के अनुसार किया जाता है। पूजा स्थल पर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित करें और शनि मंत्र का जाप करें। ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। पूजा के दौरान किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष रखने के बजाय मन को शांत और विचारों को सकारात्मक बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।

    शनि व्रत के दौरान खानपान को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग नियम प्रचलित हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ फलाहार करके व्रत करते हैं। व्रत रखने से पहले अपनी सेहत और क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो उसे कठोर उपवास करने से बचना चाहिए। शाम के समय शनिदेव की पूजा और आरती करने के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जा सकता है।

    शनिवार के दिन दान का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन वस्त्र काले तिल या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य उपयोगी वस्तुएं दान की जा सकती हैं। गरीबों और असहाय लोगों की सहायता करना भी पुण्य का कार्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पशु पक्षियों के प्रति दया रखना और जरूरतमंदों की मदद करना भी अच्छे कर्मों में शामिल है। शनि पूजा का संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है बल्कि ईमानदारी मेहनत और जिम्मेदारी से जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

    शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा के साथ अपने कर्मों को बेहतर बनाना भी जरूरी माना जाता है। किसी का अपमान करने से बचें और जरूरतमंद लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। शनिवार का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से मन को शांति मिल सकती है। हालांकि पूजा और व्रत के फल को लेकर धार्मिक विश्वास अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए व्रत को आस्था और आत्मअनुशासन के रूप में अपनाना चाहिए।

  • शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू, पहले दिन घटस्थापना के लिए जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी सामग्री

    शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू, पहले दिन घटस्थापना के लिए जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी सामग्री

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होती है। इस दिन विधि-विधान से कलश स्थापित करने की परंपरा है।

    घटस्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु इन समयावधियों को ध्यान में रखकर पूजा की तैयारी कर सकते हैं। कलश स्थापना नवरात्रि की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इसके बाद भक्त मां दुर्गा की आराधना करते हुए नौ दिनों तक पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

    कलश स्थापना से पहले पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री एकत्र कर लेनी चाहिए। इसके लिए चौड़े मुंह वाला मिट्टी का पात्र, साफ मिट्टी, जौ, कलश, गंगाजल, शुद्ध पानी, सिक्का, सुपारी, साबुत चावल यानी अक्षत, दूर्वा, रोली और कलावा की जरूरत होती है। इसके साथ ही आम या अशोक के पांच अथवा सात पत्ते और पानी वाला नारियल भी रखना चाहिए। पूजा के लिए लाल कपड़ा या चुनरी, फूल, फल, पान, इलायची, लौंग, घी का दीपक, मिठाई और बताशे भी उपयोगी सामग्री हैं।

    नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। इस चौकी पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। फिर पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें। इसके बाद माता रानी को फूल, चुनरी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री व्यवस्थित रखना सुविधाजनक होता है।

    घटस्थापना की प्रक्रिया में सबसे पहले मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालकर जौ बोए जाते हैं। इसके ऊपर मिट्टी की हल्की परत डालें और थोड़ा पानी छिड़कें। इसके बाद इस पात्र को पूजा स्थल पर रख दें। नवरात्रि के नौ दिनों तक जौ में थोड़ा-थोड़ा पानी डालते रहना चाहिए, ताकि उनमें अंकुर निकल सकें। धार्मिक परंपरा में जौ बोने को समृद्धि और अच्छी फसल के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसे नई शुरुआत और खुशहाली से भी जोड़ा जाता है।

    इसके बाद कलश पर कलावा बांधें और उसमें गंगाजल तथा साफ पानी भरें। कलश में साबुत सुपारी, सिक्का, अक्षत और हल्दी की गांठ जैसी शुभ वस्तुएं रखी जा सकती हैं। फिर कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच अथवा सात पत्ते सजाएं और उसके ऊपर नारियल स्थापित करें। तैयार कलश को जौ वाले पात्र के पास रखें। इसके बाद मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप, फूल, फल तथा मिठाई अर्पित करें। अंत में मां दुर्गा के मंत्रों का जाप कर आरती करें।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में बोए गए जौ का अच्छी तरह अंकुरित होना शुभ संकेत माना जाता है। जौ को समृद्धि और अच्छी फसल से जोड़ने की परंपरा के चलते घटस्थापना के दौरान इन्हें विशेष महत्व दिया जाता है। इस प्रकार कलश स्थापना, जौ बोने और मां दुर्गा की पूजा के साथ नवरात्रि के नौ दिवसीय पर्व का आरंभ होता है।

  • ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे

    ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता के उस दावे को झूठा बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बात स्वीकार कर ली। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल पर दुर्भावनापूर्ण राजनीति करने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। यह विवाद इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सौंपे गए ज्ञापन के बाद सामने आया है।

    राहुल के दावे पर भाजपा ने उठाए सवाल

    इंडिया ब्लॉक के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

    मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात से हैरान और स्तब्ध हैं कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बातों को स्वीकार कर लिया।

    राहुल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अजीब’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं और राष्ट्रपति की बातचीत को अपने तरीके से पेश कर रहे हैं।

    ‘हर संवैधानिक संस्था को राजनीति का शिकार बना रहे’

    सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोप स्वीकार कर लिए, ऐसा दावा करना राहुल गांधी की दुर्भावनापूर्ण राजनीति को दर्शाता है। उनके मुताबिक, राहुल हर संवैधानिक संस्था को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी के बयान के दौरान उनके साथ खड़े नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव भी कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के कथन का सच्चाई से कोई संबंध नहीं दिखता और कांग्रेस नेता का पिछला रिकॉर्ड भी इसी तरह के बयानों का संकेत देता है।

    त्रिवेदी ने आगे कहा कि राहुल का दावा अजीब होने के साथ-साथ तथ्यों से ज्यादा राजनीतिक मंशा से प्रेरित लगता है।

    भाजपा ने राहुल से मांगा सबूत

    भाजपा नेता ने राहुल गांधी से सवाल किया कि राष्ट्रपति ने उनके आरोपों को स्वीकार किया था, इस दावे के समर्थन में उनके पास क्या सबूत हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

    इस मामले में फिलहाल भाजपा की ओर से राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद जो दावा किया, उसे लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।