Author: bharati

  • ‘आप ही भारत के रियल बॉस…’ स्टारलिंक विवाद में मस्क का अंबानी पर फिर तंज, लगाए आरोप

    ‘आप ही भारत के रियल बॉस…’ स्टारलिंक विवाद में मस्क का अंबानी पर फिर तंज, लगाए आरोप


    नई दिल्ली। भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मस्क ने लगातार दूसरे दिन सोशल मीडिया पर अंबानी पर निशाना साधते हुए तंज कसा कि क्या वही भारत के ‘रियल बॉस’ हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी अपना कारोबारी एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा का मौका नहीं देना चाहते। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने में सुरक्षा और नियामकीय शर्तों का पालन जरूरी है।

    मस्क बोले- क्या स्टारलिंक को मुकाबले का मौका देंगे?

    दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क ने शुक्रवार देर शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने मुकेश अंबानी को संबोधित करते हुए लिखा, ‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी, कृपया मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि मुझे यह एहसास नहीं हुआ कि आप ही भारत के रियल बॉस हैं।’

    मस्क ने आगे तंज कसते हुए आरोप लगाया कि अंबानी भारत के लोगों का एकाधिकार के दम पर शोषण जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसके बावजूद अंबानी स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने का मौका देने पर विचार करेंगे?

    अपने पोस्ट में मस्क ने भारत के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि देश के कई क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई और छोटे कारोबारियों के अवसर प्रभावित होते हैं। इंटरनेट की बेहतर पहुंच से छोटे व्यवसाय अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकते हैं। मस्क के मुताबिक, स्टारलिंक ऐसे इलाकों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।

    एक दिन पहले भी पूछा था- क्या अंबानी हैं भारत के असली बॉस?

    मस्क ने इससे एक दिन पहले भी इसी मुद्दे पर सवाल उठाया था। उन्होंने डॉ. अनिरुद्ध की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा था कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं? संबंधित पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि सरकार भारतीय नागरिकों के हितों के बजाय बड़े कारोबारी समूहों को फायदा पहुंचाने वाली व्यवस्था को बचा रही है।

    मस्क ने दावा किया था कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 देशों में लाइसेंस मिल चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जरूरी नियमों और शर्तों का पालन करने के बावजूद कंपनी को भारत में लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा है। इसके बाद उन्होंने अंबानी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एकाधिकार को लेकर अपनी आपत्ति दोहराई।

    भारत में स्टारलिंक की एंट्री का इंतजार

    एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है। इस तकनीक से उन क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी पहुंचाने की संभावना है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है।

    भारत में स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। कंपनी का तर्क है कि उसकी सेवा ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट की कमी दूर करने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, भारतीय बाजार में सेवा शुरू करने के लिए कंपनी को सरकार से आवश्यक मंजूरियां हासिल करनी होंगी और देश के दूरसंचार नियमों तथा सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

    सिंधिया बोले- किसी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं

    स्टारलिंक विवाद के बीच केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उनका यह बयान मस्क की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के बीच आया है।

    सरकार का रुख है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों और डेटा सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद लाइसेंस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    डेटा सुरक्षा और स्थानीय गेटवे को लेकर सख्ती

    स्टारलिंक की भारत में शुरुआत के रास्ते में सुरक्षा और नियामकीय शर्तें अहम हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्रालय और रक्षा एजेंसियों की ओर से भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को भारत में ही प्रोसेस और स्टोर करने जैसी शर्तों पर जोर दिया गया है।

    स्टारलिंक की इंटर-सैटेलाइट लेजर लिंक तकनीक को लेकर भी भारतीय एजेंसियां कानूनी निगरानी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की समीक्षा कर रही हैं। इसके अलावा, सरकारी मापदंडों के तहत कंपनी को भारत में 20 स्थानीय गेटवे स्टेशन स्थापित करने की जरूरत बताई गई है। इनका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर नेटवर्क ट्रैफिक की निगरानी और नियमानुसार उसे नियंत्रित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    इस पूरे विवाद में एक ओर मस्क भारतीय बाजार में स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा का अवसर देने की मांग उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार के लिए सुरक्षा, डेटा संरक्षण और नियामकीय अनुपालन प्रमुख शर्तें हैं। अंबानी पर मस्क के एकाधिकार संबंधी आरोपों पर उनका पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।

  • रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा

    रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, नवंबर में रूस 5 लाख मीट्रिक टन डीजल और देगा, जिसके बाद 10 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी। ईंधन की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने की कोशिशों के बीच हुए इस ऐलान पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे रूस के खिलाफ युद्ध रोकने के प्रयासों को कमजोर करने वाला फैसला बताते हुए कहा कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने से मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखने में इस्तेमाल हो सकता है।

    ट्रंप ने पुतिन से बातचीत के बाद किया समझौते का ऐलान
    ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को डीजल की आपूर्ति करेगा। उनके मुताबिक, शुरुआती खेप के बाद नवंबर में 5 लाख मीट्रिक टन और फिर 10 लाख मीट्रिक टन डीजल दिया जाएगा।

    यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब ट्रंप प्रशासन 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस आपूर्ति समझौते की शर्तों और इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    जेलेंस्की बोले- रूस को पैसा देना युद्ध में निवेश जैसा
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ हुए इस समझौते की आलोचना की। उनका कहना है कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने का अवसर देने से उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन मिल सकते हैं।

    जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पुतिन को इस तरह का लाभ देने से सभ्य दुनिया को न तो शांति मिलेगी और न ही कोई फायदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस इस डीजल से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल और अधिक हिंसा तथा धोखे के लिए करेगा।

    जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की आमदनी बढ़ाने वाला ऐसा फैसला युद्ध खत्म करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मॉस्को पर दबाव बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वह युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हो।

    अमेरिका में मौजूद यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुआ ऐलान
    इस समझौते की घोषणा उस समय की गई, जब यूक्रेन का एक प्रतिनिधिमंडल रूस के साथ जारी संघर्ष का समाधान तलाशने के लिए अमेरिका में मौजूद था। ऐसे में ट्रंप के ऐलान ने यूक्रेन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    जेलेंस्की ने इस फैसले को मजबूत साझेदारों की ओर से लिया गया कमजोर निर्णय बताया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का इस्तेमाल केवल एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारी टीम का इस्तेमाल सिर्फ एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है। यह सही नहीं है और साझेदारों को एक-दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।”

    ईंधन की कीमतें घटाने की कोशिश और रूस को मिलने वाला आर्थिक लाभ
    ट्रंप प्रशासन के सामने ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती है। रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने पर अमेरिकी बाजार को अतिरिक्त ईंधन मिल सकता है, लेकिन इस कदम का भू-राजनीतिक असर भी महत्वपूर्ण है।

    जेलेंस्की की आपत्ति का मुख्य आधार यही है कि रूस को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली कमाई उसके युद्ध संबंधी खर्चों में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, रूस को आर्थिक लाभ देने के बजाय उस पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि युद्ध समाप्त करने की संभावनाएं मजबूत हों।

    इस तरह डीजल आपूर्ति का यह प्रस्ताव एक ओर अमेरिकी ईंधन बाजार से जुड़ा है, तो दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध और शांति वार्ता पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर विवाद खड़ा कर रहा है।

  • सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितरों के भोग में जरूर शामिल करें ये 7 चीजें, श्राद्ध की थाली में इन खाद्य पदार्थों का है विशेष महत्व

    सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितरों के भोग में जरूर शामिल करें ये 7 चीजें, श्राद्ध की थाली में इन खाद्य पदार्थों का है विशेष महत्व

    नई दिल्ली । पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो किसी कारण अपने मृत परिजनों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि पर नहीं कर पाए हों या जिन्हें उनकी मृत्यु की सही तारीख याद न हो। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है। इस अवसर पर पितरों को भोजन अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भोग की थाली में कुछ विशेष खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इनमें खीर, चावल, उड़द दाल से बने व्यंजन, पूड़ी, मौसमी सब्जियां, मौसमी फल और पितरों की पसंद का भोजन प्रमुख हैं।

    श्राद्ध की थाली में सबसे पहले खीर को विशेष स्थान दिया जाता है। मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोग में खीर जरूर शामिल करनी चाहिए। इसे पितरों के भोजन का अहम हिस्सा माना जाता है। परंपरा के अनुसार, खीर गाय के दूध से तैयार करने की बात कही जाती है। धार्मिक मान्यता में भैंस के दूध के बजाय गाय के दूध से बनी खीर को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए इस दिन भोग तैयार करते समय खीर बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर विशेष ध्यान दिया जाता है। श्राद्ध की थाली में दूसरा महत्वपूर्ण पदार्थ चावल है। मान्यता है कि पितरों को चावल अर्पित करने से पितृ दोष से राहत मिल सकती है। इसी कारण श्राद्ध के भोजन में चावल को शामिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    तीसरे स्थान पर उड़द दाल से बने व्यंजनों को रखा जाता है। श्राद्ध के भोजन में उड़द दाल की कोई डिश शामिल करने की परंपरा बताई जाती है। इसके लिए उड़द की दाल बनाई जा सकती है। इसके अलावा उड़द के पकौड़े, दाल की कचौड़ी और दही बड़े जैसे व्यंजन भी तैयार किए जा सकते हैं। चौथा खाद्य पदार्थ पूड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूड़ी को पितरों के प्रिय भोजन में शामिल माना जाता है, इसलिए इसे श्राद्ध की थाली में रखने की सलाह दी जाती है। भोग तैयार करते समय इन पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करके श्राद्ध की थाली सजाई जाती है। इन खाद्य पदार्थों को पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    पांचवीं चीज मौसमी सब्जियां हैं। श्राद्ध के भोजन में मौसम के अनुसार उपलब्ध सब्जी शामिल की जा सकती है। इस अवसर पर विशेष रूप से कद्दू की सब्जी बनाने की परंपरा का उल्लेख किया जाता है। इसके बाद छठे स्थान पर मौसमी फलों को रखा जाता है। पितरों को फल अर्पित करने के लिए मौसम में उपलब्ध किसी भी फल को श्राद्ध की थाली में शामिल किया जा सकता है। फल भी भोग का हिस्सा माने जाते हैं। सातवीं चीज पितरों की पसंद का भोजन है। मान्यता के अनुसार, सामान्य रूप से तैयार किए जाने वाले व्यंजनों के साथ उन खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया जा सकता है, जो दिवंगत परिजन को पसंद थे। इनमें राजमा, छोले, कढ़ी और रबड़ी जैसे व्यंजन शामिल हो सकते हैं। इस तरह खीर, चावल, उड़द दाल के पकवान, पूड़ी, मौसमी सब्जी, फल और पसंदीदा पकवान मिलाकर भोग की थाली तैयार की जा सकती है।

    सर्वपितृ अमावस्या पर भोग बनाते समय भोजन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस दिन शुद्ध सात्विक भोजन तैयार करने और श्रद्धापूर्वक उसे पूर्वजों को अर्पित करने पर जोर दिया जाता है। श्राद्ध की परंपरा में भोजन केवल खाद्य पदार्थों का संग्रह नहीं, बल्कि दिवंगत परिजनों के प्रति सम्मान और स्मरण का माध्यम भी माना जाता है। हालांकि, पितृ दोष से राहत और पितरों की कृपा से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। सर्वपितृ अमावस्या पर परिवार अपनी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध तथा भोग की विधि अपना सकते हैं।

  • ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा

    ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा


    नई दिल्ली। दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन के बीच शुक्रवार, 9 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के पास जनपथ रोड पर ‘लाल हिट जनता पार्टी’ से जुड़े युवाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के कथित अपमान और विपक्षी दलों की विरोध-प्रदर्शन की शैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने दिल्ली पुलिस और सरकार के समर्थन में नारे लगाए और आरोप लगाया कि विपक्षी दल प्रदर्शन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकजुट हुए हैं।

    ‘PM का अपमान नहीं सह सकते, पुलिस की तैयारी पुख्ता हो’

    समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में प्रदर्शन कर रहे एक युवक ने कहा कि वे प्रधानमंत्री का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते, इसलिए सड़कों पर उतरे हैं। उसने कहा कि पुलिस की तैयारियां इतनी पुख्ता होनी चाहिए कि विरोध करने वाले यहां न पहुंच सकें। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि सरकार प्रदर्शन की अनुमति नहीं देगी और कहा कि अब ‘कॉकरोचों’ का अंतिम समय आ गया है।

    एक अन्य युवक ने कहा कि शुक्रवार को उनके साथ जो हुआ, वैसा ही व्यवहार अगले दिन बड़ी संख्या में आने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ भी होना चाहिए। उसने दावा किया कि 10 अक्टूबर को दो लाख लोगों की भीड़ जुट सकती है और तब प्रशासन की कार्रवाई देखी जाएगी।

    विपक्ष पर अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप

    प्रदर्शनकारियों ने विपक्षी दलों पर लगातार इस्तीफे की मांग करने और नेताओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। एक युवक ने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर किसी न किसी का इस्तीफा मांगने लगता है। उसके मुताबिक, अगर कोई देश के लिए अच्छा काम करेगा, तो विपक्ष एक दिन उसका भी इस्तीफा मांगने लगेगा।

    प्रदर्शनकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। उसने मांग की कि विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और जंतर-मंतर का भी किया जिक्र

    प्रदर्शन में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उल्लेख करते हुए जंतर-मंतर पर चल रही गतिविधियों पर सवाल उठाए। उसने आरोप लगाया कि कभी शिक्षा मंत्री तो कभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है। प्रदर्शनकारी ने आशंका जताई कि आगे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की जा सकती है।

    उसने कहा कि उनका समूह 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकत्र हुआ है और चाहता है कि यह प्रदर्शन न हो।

    ‘देश का मजाक बनाया जा रहा है’

    ‘लाल हिट जनता पार्टी’ के बैनर तले प्रदर्शन करने पहुंचे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उनका समूह पुलिस के समर्थन में प्रदर्शन करने आया है, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी जा रही है। उसने एक महिला के रोने वाले वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि घटना को देखकर उन्हें गुस्सा आया है और वे पुलिस को इस तरह की स्थिति में नहीं देख सकते।

    उसने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का अपमान किया जा रहा है और देश में कहीं भी किसी के इस्तीफे की मांग उठने लगती है। प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे देश के मुखिया का अपमान सहन नहीं करेंगे और आगे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।

    फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की ये टिप्पणियां विपक्षी दलों के खिलाफ उनके विरोध और नाराजगी को दर्शाती हैं। प्रदर्शन की अनुमति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

  • MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप

    MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिन तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस बीच रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। पचमढ़ी में प्रदेश की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई।

    अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है।

    पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। अमरकंटक और इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.9 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.1 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18.8 डिग्री और शाजापुर में 19 डिग्री सेल्सियस रहा।

    रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी के तालुन में पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा।

    3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसकी वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसे मौसमी सिस्टम का सक्रिय होना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी मानसूनी सिस्टम की सक्रियता के चलते कुछ इलाकों में बारिश हुई है। हालांकि, शनिवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि अगले तीन दिन प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    जून की कम बारिश से सीजन का आंकड़ा 4% नीचे

    इस साल जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    कम बारिश की प्रमुख वजह जून में बारिश का कोटा पूरा नहीं होना रहा। इस महीने सामान्य के मुकाबले 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से इसकी भरपाई की कोशिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी के कारण पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में मानसून सीजन की सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन 25 जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हुई: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    कम बारिश वाले प्रमुख जिले: इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार।

    इस तरह मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश हो रही है। वहीं, रात के तापमान में गिरावट और दिन में तेज धूप के चलते मौसम में गर्मी और ठंडक का मिला-जुला असर बना हुआ है।

  • Shani Dev Puja: शनिवार को तेल चढ़ाने की परंपरा क्यों है खास, जानिए शनिदेव की पूजा विधि और इससे जुड़ी मान्यताएं

    Shani Dev Puja: शनिवार को तेल चढ़ाने की परंपरा क्यों है खास, जानिए शनिदेव की पूजा विधि और इससे जुड़ी मान्यताएं


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है और वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिदेव के मंदिरों में पहुंचते हैं और उन्हें सरसों का तेल चढ़ाकर सुख समृद्धि तथा जीवन की परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शनिदेव पर तेल चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई और इसके पीछे कौन सी पौराणिक कथा प्रचलित है।

    धार्मिक मान्यताओं में शनिदेव को तेल अर्पित करने के पीछे एक प्रचलित कथा का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार एक बार शनिदेव और भगवान हनुमान के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में शनिदेव को चोट लगी और उन्हें पीड़ा होने लगी। भगवान हनुमान ने उनकी पीड़ा कम करने के लिए उनके शरीर पर तेल लगाया। मान्यता है कि इससे शनिदेव को राहत मिली और तभी से उन्हें तेल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई। हालांकि इस कथा के अलग-अलग रूप विभिन्न धार्मिक परंपराओं में मिलते हैं और इसे आस्था से जुड़ी मान्यता के रूप में देखा जाता है।

    शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाने का संबंध शनि ग्रह की पूजा और उससे जुड़ी धार्मिक धारणाओं से भी है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्म अनुशासन धैर्य और न्याय का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा के साथ शनिदेव की पूजा करने से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और वह अपने कर्मों के प्रति अधिक सजग बनता है। कई श्रद्धालु शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान भी विशेष पूजा करते हैं। हालांकि किसी ग्रह की स्थिति के कारण जीवन में आने वाली परेशानियों या उनके समाधान के बारे में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    शनिवार को शनिदेव की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद शनिदेव का स्मरण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में जाकर पूजा करें। परंपरा के अनुसार शनिदेव की प्रतिमा या शिला पर सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। कुछ मंदिरों में तेल चढ़ाने के विशेष नियम होते हैं इसलिए वहां के पुजारी या मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। पूजा के दौरान काले तिल और फूल अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु शनि मंत्र का जाप कर सकते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।

    शनिदेव की पूजा में केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं बल्कि अच्छे आचरण का महत्व भी बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दूसरों के साथ न्याय करना मेहनत से काम करना कमजोर लोगों की सहायता करना और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना शनिदेव की कृपा पाने के महत्वपूर्ण तरीके माने जाते हैं। इसलिए शनिवार को पूजा करने के साथ अपने व्यवहार और कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए।

    एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि पूजा में तेल चढ़ाना श्रद्धा का विषय है और इसे किसी समस्या के समाधान की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। मंदिर में तेल का उपयोग करते समय स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखें। तेल को जमीन पर न फैलाएं और मंदिर के नियमों का पालन करें। सच्ची आस्था के साथ सद्कर्म और जिम्मेदारी से जीवन जीना ही इस परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश माना जा सकता है।

  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    नई दिल्ली । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार, 9 अक्टूबर की रात 8 बजे मुलाकात का समय दिया है। विपक्षी सांसद इस बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में संशोधन और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखेंगे। दिल्ली में पिछले चार दिनों से विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी है।

    मुलाकात के लिए शुरुआत में 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का समय मांगा गया था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति से मिलने के लिए 10 सांसदों को समय दिया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि राष्ट्रपति से मुलाकात का पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था। विपक्षी दल चाहते हैं कि SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर राष्ट्रपति को अपनी बात बताई जाए। शुक्रवार रात होने वाली बैठक में प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों और चिंताओं को सामने रखेगा।

    INDIA ब्लॉक के दल SIR प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची में किए गए बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

    विपक्ष का प्रदर्शन 6 अक्टूबर को उस समय तेज हुआ, जब INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। अगले दिन, 7 अक्टूबर को भी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इन घटनाओं के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी सांसदों के बीच तनाव की स्थिति बनी।

    8 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भी SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए गए। प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं ने अपनी आगे की रणनीति पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार दो दिनों तक विपक्षी सांसदों के लिए दिल्ली में दोपहर के भोजन की बैठक आयोजित की। 7 अक्टूबर को सांसद जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में जुटे, जबकि 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के मोएट्स रेस्टोरेंट में बैठक हुई। इन बैठकों के बाद सांसद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे।

    7 अक्टूबर की बैठक में समाजवादी पार्टी के सांसद शामिल नहीं हुए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सपा की ओर से समय पर सूचना नहीं मिलने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने कहा था कि सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कम समय मिलने के कारण कुछ दल अपने प्रतिनिधि नहीं भेज सके। अगले दिन समाजवादी पार्टी के सांसद भी बैठक और प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच हुए टकराव से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों की जांच जारी है। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों के साबित होने का प्रमाण नहीं है। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। विपक्षी सांसदों की कोशिश होगी कि वे मतदाता सूची, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के समक्ष रखें।

  • 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    नई दिल्ली । दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कुछ रेल सेवाएं रद्द किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मेट्रो स्टेशन और रेलवे सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल प्रदर्शन की अनुमति देने के सवाल पर विचार नहीं कर रही, क्योंकि सुनवाई के दौरान कोई आयोजक उसके सामने उपस्थित नहीं हुआ। इस सुनवाई का मुख्य मुद्दा सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियों से आम लोगों को होने वाली परेशानी रहा। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे कदम उठाने को कहा, जिनसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जरूरतों के साथ-साथ लोगों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।

    यह याचिका भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद एमए बेबी ने दाखिल की थी। इसमें मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर कुछ ट्रेनों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई। याचिका के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को पत्र लिखकर 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने को कहा था। यह व्यवस्था 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से लागू किए जाने और हालात सामान्य होने तक जारी रखने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया कि इस कदम का असर केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों पर नहीं, बल्कि रोजाना काम, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए यात्रा करने वाले नागरिकों पर भी पड़ सकता है।

    याचिका में जिन स्टेशनों का उल्लेख किया गया, उनमें सुप्रीम कोर्ट, हौज खास, लाजपत नगर, कश्मीरी गेट, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, शाहदरा और रोहिणी सहित कई स्टेशन शामिल बताए गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि इनमें से कई स्टेशन अस्पतालों, कॉलेजों, अदालतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हैं। याचिका में 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने पर भी सवाल उठाया गया। इनमें हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का जिक्र किया गया। याचिका में मरीजों, विद्यार्थियों, यात्रियों और दूसरे नागरिकों को संभावित परेशानी का मुद्दा उठाया गया। साथ ही, दावा किया गया कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे कुछ लोगों को दूसरे राज्यों में रोका गया या हिरासत में लिया गया।

    याचिकाकर्ता ने अदालत से मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला रोकने, सेवाएं सामान्य करने और रद्द ट्रेनों को जहां तक संभव हो दोबारा चलाने का निर्देश देने की मांग की थी। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। याचिका में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आने वाले लोगों को केवल इसी कारण रोकने से बचने का अनुरोध किया गया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों से लाखों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों के पास निजी वाहन हो सकते हैं, लेकिन अदालतों में काम करने वाले कई कर्मचारी मेट्रो से आते हैं। पीठ ने अधिकारियों से बैरिकेडिंग की जानकारी सार्वजनिक करने और लोगों को वैकल्पिक सड़कों के बारे में बताने की जरूरत पर भी जोर दिया।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार लोगों को होने वाली असुविधा के मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करेगी। उन्होंने दलील दी कि सुरक्षा संबंधी कदम सभी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए जा रहे हैं। उन्होंने पिछली एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 जून को प्रदर्शन की एक दिन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रदर्शन 17 दिनों तक चला और संसद की ओर जाने की कोशिश भी हुई। उनके अनुसार, उस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट पर पाबंदी सीमित क्षेत्र में है और महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं हुई थीं। अदालत ने प्रदर्शन की अनुमति के सवाल पर विचार करने से इनकार करते हुए सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों की परेशानी पर ध्यान केंद्रित रखा।

    सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति और सीमित जगह को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जगह की कमी के कारण प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, स्वच्छता और एंबुलेंस जैसी व्यवस्थाओं में समस्याएं पैदा हो सकती हैं और उनके अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मेट्रो, ट्रेन और सड़क परिवहन को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता तथा कदम हालात के अनुरूप होने चाहिए। अदालत ने लोगों को यह स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत बताई कि कौन-सी सेवाएं कब उपलब्ध होंगी और किन रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। केंद्र की ओर से आश्वासन दिया गया कि अधिकारियों से बातचीत के बाद संतुलित कदम उठाए जाएंगे, यातायात का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश होगी और लोगों की सुविधा के लिए सलाह जारी की जाएगी।

  • झांसी-शिवपुरी हाईवे पर भीषण हादसा, मां-बाप की मौत से अनाथ हुए तीन बच्चे, 4 साल के मासूम पर टूटा दुखों का पहाड़

    झांसी-शिवपुरी हाईवे पर भीषण हादसा, मां-बाप की मौत से अनाथ हुए तीन बच्चे, 4 साल के मासूम पर टूटा दुखों का पहाड़


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में झांसी-शिवपुरी हाईवे पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से एक दंपती की मौत हो गई। दोनों सड़क की साफ-सफाई और रखरखाव के काम में लगे मजदूर थे। हादसे में पत्नी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि गंभीर रूप से घायल पति की ग्वालियर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। दंपती अपने पीछे चार साल के बेटे और 10 तथा 13 साल की दो बेटियों को छोड़ गए हैं। माता-पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया है।

    यह हादसा गुरुवार दोपहर करीब दो बजे दिनारा थाना क्षेत्र के ग्राम रामनगर में ऋषभ ढाबे के पास हुआ। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सिरसौद निवासी बलबीर लोधी हाईवे पर मेंटेनेंस और साफ-सफाई का काम करता है। घटना के समय उसके साथ सुपरवाइजर रमाकांत यादव समेत करीब दस मजदूर सड़क पर काम कर रहे थे। इसी दौरान दिनारा की ओर से एक अर्टिगा कार तेज रफ्तार से आई और सड़क किनारे काम कर रहे मजदूरों को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से रामश्री बंशकार उनके पति धर्मेंद्र बंशकार और सीता देवी घायल हो गए।

    हादसा इतना गंभीर था कि रामश्री बंशकार की मौके पर ही मौत हो गई। उनके पति धर्मेंद्र के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं। वहीं सीता देवी के पैरों में भी चोट लगी। घटना के बाद मौके पर मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। साथियों ने घायलों की मदद की और एंबुलेंस के जरिए उन्हें उपचार के लिए भेजा गया। धर्मेंद्र की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पहले झांसी ले जाया गया। बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर कर दिया। वहां रात में उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

    दंपती की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रामश्री और धर्मेंद्र के तीन छोटे बच्चे हैं। इनमें सबसे छोटा बेटा महज चार साल का है जबकि दोनों बेटियों की उम्र 10 और 13 साल बताई गई है। हादसे ने इन बच्चों से उनके माता-पिता दोनों छीन लिए। परिवार की रोजी-रोटी के लिए मेहनत करने वाले माता-पिता की असमय मौत के बाद बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। गांव और आसपास के क्षेत्र में घटना को लेकर शोक का माहौल है।

    टक्कर के कारण घटनास्थल पर खड़ी कंपनी की महिंद्रा कैंपर गाड़ी और एक हीरो सीडी डीलक्स बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे के समय गोमा विश्वकर्मा और रमाकांत यादव सहित अन्य मजदूर मौके पर मौजूद थे। उन्होंने दुर्घटना को होते देखा। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। रामश्री के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए करैरा अस्पताल भेजा गया। मामले में फरियादी बलबीर लोधी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। सड़क पर सफाई और रखरखाव के दौरान मजदूरों को तेज रफ्तार वाहनों से खतरा बना रहता है। ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों की सावधानी और सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। फिलहाल पुलिस दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।