Author: bharati

  • ग्रेट निकोबार परियोजना पर फिर उठे सवाल, जयराम रमेश ने NGT से मांगी सीलबंद रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

    ग्रेट निकोबार परियोजना पर फिर उठे सवाल, जयराम रमेश ने NGT से मांगी सीलबंद रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी से उस उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है, जिसे परियोजना को मिली पर्यावरण संबंधी मंजूरियों की समीक्षा के लिए गठित किया गया था। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं और यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसमें कोई गंभीर खामी रही है या नहीं।

    जयराम रमेश ने कहा कि एनजीटी को अपनी स्वतंत्र भूमिका और कानूनी अधिकारों को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अलग-अलग न्यायाधिकरण, विशेष रूप से एनजीटी, अपनी संस्थागत विश्वसनीयता और अधिकार को फिर से मजबूत करेंगे तथा कानून के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करेंगे।

    उन्होंने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस विधेयक पर लोकसभा में चर्चा प्रस्तावित है। यह विधेयक पिछले वर्षों में गठित 16 अर्द्ध-न्यायिक अधिकरणों के लिए नई व्यवस्था तय करने से जुड़ा है। इनमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण भी शामिल है, जिसका गठन अक्टूबर 2010 में संसद के एक कानून के तहत किया गया था।

    रमेश ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक का संबंध 19 नवंबर 2025 के उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले से भी है। इस फैसले में न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के प्रमुख प्रावधानों को रद्द किया गया था। साथ ही न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन की दिशा में निर्देश दिए गए थे।

    कांग्रेस नेता ने न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह 2021 के कानून को चुनौती देने वाले लोगों में शामिल थे। इससे पहले उन्होंने वित्त अधिनियम, 2017 के उन प्रावधानों को भी चुनौती दी थी, जिनके माध्यम से न्यायाधिकरणों की व्यवस्था में बदलाव किए गए थे।

    रमेश ने आरोप लगाया कि कुछ संशोधनों को धन विधेयक का हिस्सा बनाकर संसद के दोनों सदनों, खासकर राज्यसभा में विस्तृत विधायी समीक्षा से बचने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरणों की भूमिका और स्वतंत्रता को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है और अब इस व्यवस्था में जरूरी सुधारों को लागू करने की आवश्यकता सामने आई है।

    ग्रेट निकोबार परियोजना से जुड़ी उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट को उन्होंने इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, समिति ने अपनी रिपोर्ट 8 जुलाई 2025 को एनजीटी के समक्ष सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की थी। उन्होंने मांग की कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरियों की समीक्षा के दौरान समिति ने किन तथ्यों और निष्कर्षों को सामने रखा था।

    जयराम रमेश ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक करना एनजीटी की पारदर्शिता और स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण संकेत होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायाधिकरण पर्यावरणीय मामलों में अपने कानूनी दायित्वों का पालन करते हुए स्वतंत्र रूप से काम करेंगे।

    न्यायाधिकरण सुधार विधेयक में अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता तथा नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है। इसमें राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन की रूपरेखा भी शामिल है। ऐसे में ग्रेट निकोबार परियोजना की समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग ने पर्यावरणीय मंजूरियों के साथ न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के मुद्दे को भी प्रमुखता से सामने ला दिया है।

  • मेटा को केंद्र की दो टूक, भारत में ग्लोबल पॉलिसी नहीं बल्कि स्थानीय कानूनों के मुताबिक करना होगा मॉडरेशन

    मेटा को केंद्र की दो टूक, भारत में ग्लोबल पॉलिसी नहीं बल्कि स्थानीय कानूनों के मुताबिक करना होगा मॉडरेशन


    नई दिल्ली । 
    भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालन और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर केंद्र सरकार ने मेटा के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार का कहना है कि भारत में फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म केवल अपनी वैश्विक नीतियों के आधार पर काम नहीं कर सकते। उन्हें भारतीय कानूनों और देश की भाषाई तथा सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप अपने कंटेंट मॉडरेशन तंत्र को लागू करना होगा।

    मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इन चर्चाओं के बाद सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कंपनी के पूरे एल्गोरिदम को बदलने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि प्लेटफॉर्म की नीतियां और मॉडरेशन व्यवस्था भारत में लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हो तथा स्थानीय परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व दिया जाए।

    सरकार विशेष रूप से भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर चिंतित है। अधिकारियों के अनुसार, विदेशों में बैठे मॉडरेशन दल कई बार भारत की अलग-अलग भाषाओं, सामाजिक संदर्भों और स्थानीय संवेदनशीलताओं को पूरी तरह नहीं समझ पाते। ऐसे में कंटेंट की सही पहचान और उचित कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञता और इनपुट बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई है।

    बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट यानी सीएसएएम को लेकर सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। इस तरह के कंटेंट के मामले में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं करने की बात कही गई है। सरकार चाहती है कि मेटा अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट की पहचान, रोकथाम और कार्रवाई के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था विकसित करे और संदिग्ध सामग्री के दोबारा सामने आने की संभावना को भी कम करे।

    डीपफेक के मुद्दे पर भी सरकार और मेटा के बीच चर्चा हुई है। खासतौर पर मशहूर हस्तियों से जुड़े सिंथेटिक कंटेंट को लेकर सरकार ने मानवीय समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि केवल स्वचालित तकनीक के आधार पर किसी सामग्री को हटाने से गलत निर्णय की संभावना बनी रह सकती है। इसलिए संवेदनशील मामलों में ह्यूमन इन द लूप व्यवस्था के जरिए अंतिम समीक्षा की जरूरत बताई गई है।

    सरकार ने यह भी जानना चाहा है कि एक बार किसी हानिकारक या सिंथेटिक कंटेंट की पहचान होने के बाद उसे दोबारा यूजर्स तक पहुंचने और रिकमेंड होने से रोकने के लिए मेटा की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। रिकमेंडेशन सिस्टम और वायरल कंटेंट को लेकर भी कंपनी से सवाल किए गए हैं।

    बैठकों में यह मुद्दा भी सामने आया कि कई बार यूजर्स को उनकी सामान्य पसंद से अलग सामग्री क्यों दिखाई जाती है और क्या रिकमेंडेशन सिस्टम सिंथेटिक या हानिकारक कंटेंट को अनावश्यक रूप से आगे बढ़ा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि पहचाने जा चुके नुकसानदायक कंटेंट की पहुंच को एल्गोरिदम के जरिए दोबारा बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।

    इसके साथ ही मेटा के इंटरमीडियरी स्टेटस और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा से जुड़े अनुपालन की भी समीक्षा की जा रही है। सरकार यह देख रही है कि प्लेटफॉर्म की कंटेंट रिकमेंडेशन में भूमिका उसके कानूनी दायित्वों को किस तरह प्रभावित करती है।

    फिलहाल सरकार और मेटा के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है और अगले दौर की बैठक होने की उम्मीद है। केंद्र का स्पष्ट संदेश यह है कि उद्देश्य मेटा के एल्गोरिदम को पूरी तरह बदलना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उसके प्लेटफॉर्म, कंटेंट नीति और मॉडरेशन व्यवस्था भारतीय कानूनों के साथ देश की भाषाई और सांस्कृतिक जरूरतों के अनुरूप काम करें।

  • फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़

    फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़


    नई दिल्ली । 
    फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में हुई तेज टर्बुलेंस की घटना की जांच के बीच मामले में नया पहलू सामने आया है। 4 अगस्त को हुई इस घटना के बाद विमान के कैप्टन का साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन को लेकर पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक टेस्ट में कैप्टन के पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि एयरलाइन ने इस नतीजे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।

    एयर इंडिया के मुताबिक संबंधित फ्लाइट के क्रू सदस्यों का तय नियमों के तहत फ्लाइट के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। एयरलाइन का कहना है कि इन टेस्ट के नतीजे उसके साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। एयरलाइन ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अधिकारियों की जांच में पूरा सहयोग जारी रखेगी।

    यह वही एयरबस A320 विमान था, जिसमें कुल 145 लोग सवार थे। यात्रा के दौरान ओडिशा के पास विमान को तेज एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। झटकों के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे की ओर चला गया। घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी और कई लोगों को चोटें आईं।

    दिल्ली पहुंचने के बाद 13 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद विमान की उड़ान, टर्बुलेंस की प्रकृति और क्रू द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके समेत कई पहलुओं पर सवाल उठे। अब कैप्टन के कथित पॉजिटिव डोप टेस्ट ने जांच के दायरे में एक और महत्वपूर्ण पहलू जोड़ दिया है।

    नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि टर्बुलेंस किस वजह से हुआ और क्या मौसम संबंधी परिस्थितियां इसकी वजह थीं। इसके अलावा विमान पर टर्बुलेंस के संभावित तकनीकी प्रभाव की भी जांच की जा रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि झटकों के कारण किसी हाइड्रोलिक सिस्टम पर असर पड़ा था या नहीं।

    जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि टर्बुलेंस के बाद विमान को दिल्ली तक ले जाना उचित निर्णय था या उसे किसी नजदीकी हवाई अड्डे पर उतारा जाना चाहिए था। वाराणसी और लखनऊ जैसे वैकल्पिक हवाई अड्डों पर विमान को डायवर्ट किए जाने की संभावना पर भी जांच में विचार किया जा रहा है।

    नियमों के तहत जांच पूरी होने तक संबंधित फ्लाइट क्रू को उड़ान ड्यूटी से हटाया जाता है। इस मामले में भी पायलट फिलहाल उड़ान नहीं भर रहे हैं। साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े डोप टेस्ट के नियमों के अनुसार पहली बार पॉजिटिव पाए जाने वाले क्रू सदस्य को नशामुक्ति और पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसके बाद निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट मिलने पर ही सक्रिय ड्यूटी पर लौटने की अनुमति मिल सकती है।

    अगर उड़ान ड्यूटी पर लौटने के बाद वही व्यक्ति दूसरी बार ऐसे पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसके लाइसेंस को तीन साल के लिए निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में फ्लाइंग लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान है।

    अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुसार किसी भी लाइसेंसधारी पायलट को ऐसे साइकोएक्टिव पदार्थों के प्रभाव में उड़ान संचालन नहीं करना चाहिए, जिनसे सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ विमान उड़ाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अब इस मामले में टर्बुलेंस की वजह, विमान की तकनीकी स्थिति और कैप्टन के कथित डोप टेस्ट समेत सभी पहलुओं की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

  • आगा खान की भारत यात्रा को लेकर शहजाद पूनावाला ने पीएम मोदी के प्रति जताया आभार…

    आगा खान की भारत यात्रा को लेकर शहजाद पूनावाला ने पीएम मोदी के प्रति जताया आभार…


    नई दिल्ली ।
    भारतीय जनता पार्टी छोड़ने के बाद पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति एक बार फिर आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में प्रधानमंत्री को दो बार धन्यवाद कहा। उनके इस पोस्ट का संबंध वैश्विक इस्माइली समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख मौलाना हजार इमाम शाह रहीम अल-हुसैनी आगा खान की आगामी भारत यात्रा से है।

    पूनावाला ने अपने संदेश में बताया कि भारत सरकार के निमंत्रण पर आगा खान 9 से 15 सितंबर 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। उन्होंने इस निमंत्रण को भारत और वैश्विक इस्माइली समुदाय के बीच संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।

    शहजाद पूनावाला का संबंध शिया इस्माइली समुदाय से बताया जाता है। इस समुदाय के आध्यात्मिक नेतृत्व का संबंध आगा खान की इमामत से है। ऐसे में आगा खान की भारत यात्रा को लेकर पूनावाला की प्रतिक्रिया व्यक्तिगत और सामुदायिक संदर्भ से भी जुड़ी हुई है।

    पूनावाला ने अपने संदेश में कहा कि भारत सरकार की ओर से दिया गया निमंत्रण वैश्विक इस्माइली समुदाय द्वारा सराहा गया है। उन्होंने इसे भारत और इस्माइली इमामत के बीच मित्रता, पारस्परिक सम्मान तथा साझा मूल्यों पर आधारित लंबे संबंधों का संकेत बताया।

    उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस्माइली समुदाय ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास, संस्कृति और परोपकार के क्षेत्र में भारत तथा दुनिया के कई हिस्सों में योगदान दिया है। उनके अनुसार, आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के माध्यम से भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य, विरासत संरक्षण, ग्रामीण विकास और सामुदायिक सशक्तिकरण से जुड़े कई कार्य किए गए हैं।

    पूनावाला ने अपने संदेश में कहा कि इन पहलों का लाभ विभिन्न वर्गों के लोगों तक पहुंचा है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर इस समुदाय की ओर से बहुलवाद, जीवन की गुणवत्ता और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्माइली समुदाय के बीच संबंधों को भी रेखांकित किया। पूनावाला के मुताबिक, दोनों के बीच संबंध पारस्परिक सम्मान, विकास के साझा दृष्टिकोण और निरंतर सहयोग पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि समुदाय आगा खान की यात्रा और भारत में अपनी जमात से उनकी मुलाकात को लेकर उत्साहित है।

    पूनावाला ने अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री मोदी को एक बार फिर धन्यवाद दिया। उन्होंने भारत सरकार की ओर से दिए गए निमंत्रण को गर्मजोशी और उदारता से भरा कदम बताया। इसी वजह से उनका यह पोस्ट राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना, क्योंकि वह हाल ही में बीजेपी से अलग हुए हैं।

    हालांकि पार्टी छोड़ने के बाद भी पूनावाला की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक टिप्पणियां सामने आती रही हैं। इस बार उनका संदेश किसी राजनीतिक मुद्दे के बजाय आगा खान की प्रस्तावित आधिकारिक यात्रा और भारत-इस्माइली समुदाय के संबंधों पर केंद्रित रहा।

    आगा खान की सितंबर में प्रस्तावित यात्रा के दौरान भारत और इस्माइली इमामत के बीच लंबे समय से चले आ रहे संपर्क, सामुदायिक संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े पहलुओं पर ध्यान रहने की संभावना है। पूनावाला का बयान इसी व्यापक संदर्भ में प्रधानमंत्री के प्रति उनके आभार को सामने रखता है।

  • वित्त वर्ष 2031 तक 63 लाख यूनिट पहुंच सकता है भारतीय कार बाजार: आरसी भार्गव

    वित्त वर्ष 2031 तक 63 लाख यूनिट पहुंच सकता है भारतीय कार बाजार: आरसी भार्गव

    नई दिल्ली ।भारतीय कार उद्योग आने वाले वर्षों में विस्तार की मजबूत संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने रविवार, 9 अगस्त 2026 को कहा कि वित्त वर्ष 2030-31 तक देश का कार बाजार बढ़कर 61 से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी कारों की बाजार हिस्सेदारी में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

    आरसी भार्गव के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की भविष्य की वृद्धि का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया जीएसटी सुधारों से केवल वाहन उद्योग को ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्रों को भी गति मिली है। कंपनी अगले पांच वर्षों के दौरान कार बाजार की संभावित वृद्धि का अधिक सटीक अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया में है।

    मारुति सुजुकी इंडिया की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक एकीकृत रिपोर्ट में कंपनी के कारोबार और भविष्य की रणनीति से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, छोटी कारों के बाजार में सुधार, एसयूवी पोर्टफोलियो की मजबूती, अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात में बेहतर प्रदर्शन ने कंपनी की वृद्धि को समर्थन दिया है।

    वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने 24.22 लाख वाहनों की रिकॉर्ड वार्षिक बिक्री दर्ज की। यह कंपनी की अब तक की सबसे अधिक सालाना बिक्री है। इसी अवधि में कंपनी ने 4.47 लाख वाहनों का निर्यात किया, जो उसके निर्यात कारोबार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

    कंपनी लगातार तीसरे वर्ष 20 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री करने में सफल रही है। आरसी भार्गव ने बिक्री के अगले दस लाख यूनिट के माइलस्टोन को लेकर भी सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि कंपनी इस उपलब्धि को पहले की अपेक्षा जल्दी हासिल करने को लेकर आशावादी है।

    मारुति सुजुकी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने बताया कि कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं को तेज किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनी ने 5 लाख यूनिट की अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ी है। इसका उद्देश्य बदलती मांग और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पादन को मजबूत करना है।

    ताकेउची ने कहा कि भारतीय ग्राहकों की पसंद और अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी अपने एसयूवी पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। मारुति सुजुकी अगले पांच से छह वर्षों में सात नई एसयूवी लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में घरेलू मांग के साथ निर्यात, तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी ने विनिर्माण, निर्यात, तकनीकी विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास और टिकाऊ मोबिलिटी के माध्यम से देश की आर्थिक विकास यात्रा में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई है।

    कंपनी के अनुसार, भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य में ऑटोमोबाइल उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में कार बाजार का संभावित विस्तार केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादन, रोजगार, निर्यात और तकनीकी क्षमताओं को भी प्रभावित कर सकता है।

  • गुजरात में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों के लिए बनेगा विशेष प्रतिबंधित बाड़ा, प्राकृतिक माहौल में होगी निगरानी और सुरक्षा

    गुजरात में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों के लिए बनेगा विशेष प्रतिबंधित बाड़ा, प्राकृतिक माहौल में होगी निगरानी और सुरक्षा


    नई दिल्ली ।
    गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। विभाग ने अमरेली जिले के धारी के पास स्थित आंबरडी सफारी पार्क में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों को रखने के लिए लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशेष प्रतिबंधित बाड़ा विकसित करने का काम शुरू किया है। इस क्षेत्र को इस तरह तैयार किया जाएगा कि शेरों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा वातावरण उपलब्ध हो सके और उनकी गतिविधियों पर सुरक्षित तरीके से निगरानी भी रखी जा सके। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य ऐसे शेरों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखते हुए उनके संरक्षण और प्रबंधन के बीच संतुलन कायम करना है।

    गुजरात सरकार के वन विभाग की ओर से यह कदम शेरों की बढ़ती आबादी के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ती संभावित टकराव की स्थिति को देखते हुए उठाया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार शेरों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। हर वर्ष 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व शेर दिवस भी शेरों की सुरक्षा, उनके संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

    वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आंबरडी सफारी पार्क में विशेष बाड़े के लिए तारबंदी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का काम शुरू कर दिया गया है। इस क्षेत्र में ऐसे शेरों को रखा जाएगा जिनका व्यवहार इंसानों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर चुका है। उन्हें सामान्य वन क्षेत्र या आबादी के नजदीक छोड़ने के बजाय नियंत्रित क्षेत्र में रखा जाएगा, ताकि शेरों की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध होने से इन जानवरों को लंबे समय तक अपेक्षाकृत बेहतर परिस्थितियों में रखने में मदद मिल सकती है।

    वन्यजीव प्रबंधन में स्थानांतरण एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया मानी जाती है। जब कोई जंगली जानवर भोजन, पानी या अन्य कारणों से आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच जाता है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर उपयुक्त वन क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाता है। घायल या बीमार वन्यजीवों के उपचार, उनके लिए बेहतर आवास उपलब्ध कराने और कुछ परिस्थितियों में आबादी प्रबंधन के लिए भी स्थानांतरण किया जाता है। गुजरात में शेरों और तेंदुओं के अलावा मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों को भी परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाता रहा है।

    आंबरडी सफारी पार्क इस पूरी योजना के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गिर के प्राकृतिक पर्यावरण से जुड़ा प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्र है। लगभग 365 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस पार्क में एशियाई शेरों के साथ तेंदुए, चीतल, नीलगाय, चिंकारा, मोर और कई अन्य पक्षियों को देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में शुरू किए गए इस पार्क का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ लोगों को प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति जागरूक करना भी रहा है। यहां विकसित सफारी सुविधाओं के कारण पर्यटकों को गिर क्षेत्र के वन्यजीवन को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

    नए प्रतिबंधित बाड़े के निर्माण से शेर संरक्षण की व्यवस्था को एक अतिरिक्त आधार मिलने की उम्मीद है। मानव बस्तियों में बार-बार पहुंचने या इंसानों पर हमला करने वाले शेरों को अलग और नियंत्रित वातावरण में रखने से संभावित संघर्ष को कम किया जा सकता है। साथ ही, वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से ऐसे शेरों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर रखना भी संभव होगा। गुजरात की यह पहल शेरों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की सुरक्षा और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों में बड़ा बदलाव, एसबीआई की वैल्यूएशन में सबसे ज्यादा बढ़त

    शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों में बड़ा बदलाव, एसबीआई की वैल्यूएशन में सबसे ज्यादा बढ़त

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार की शीर्ष 10 सबसे अधिक मूल्यवान कंपनियों में बीते सप्ताह बाजार पूंजीकरण के स्तर पर मिला-जुला रुझान देखने को मिला। शीर्ष दस में शामिल चार कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यूएशन में 1.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि छह कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये घट गया। इस दौरान भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई सबसे अधिक लाभ पाने वाली कंपनी रही।

    एसबीआई के बाजार पूंजीकरण में सप्ताह के दौरान 63,922.03 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही बैंक की कुल बाजार वैल्यूएशन बढ़कर 10,11,721.84 करोड़ रुपये हो गई। बैंक के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन को इस बढ़त की प्रमुख वजहों में माना गया।

    मार्केटकैप में बढ़ोतरी के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज दूसरे प्रमुख लाभार्थियों में रही। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 32,816.4 करोड़ रुपये बढ़कर 18,01,925.19 करोड़ रुपये पहुंच गई। इससे कंपनी शीर्ष मूल्यवान कंपनियों की सूची में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही।

    सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के बाजार पूंजीकरण में भी अच्छी बढ़त दर्ज हुई। कंपनी की वैल्यूएशन 31,875.35 करोड़ रुपये बढ़कर 8,87,770.13 करोड़ रुपये हो गई। इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो का मार्केटकैप भी 14,637.76 करोड़ रुपये बढ़ा और 5,56,482.45 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में छह कंपनियों को बाजार पूंजीकरण के स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी गिरावट भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी में रही। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 40,543.23 करोड़ रुपये कम होकर 4,96,891.82 करोड़ रुपये रह गई।

    बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में 37,168.96 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इसके बाद कंपनी की कुल वैल्यूएशन 6,73,648.55 करोड़ रुपये रह गई। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप भी 24,183.16 करोड़ रुपये घटकर 11,27,967.47 करोड़ रुपये पर आ गया।

    आईसीआईसीआई बैंक की बाजार वैल्यूएशन में 9,507.67 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 10,20,370.63 करोड़ रुपये रह गई। भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 7,581.65 करोड़ रुपये घटकर 12,22,423.98 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    हिंदुस्तान यूनिलीवर भी उन कंपनियों में शामिल रही जिनके मार्केटकैप में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 4,793.16 करोड़ रुपये घटकर 4,88,808.97 करोड़ रुपये रह गई। इस तरह शीर्ष 10 कंपनियों के बीच सप्ताह के दौरान बाजार मूल्यांकन में स्पष्ट रूप से अलग-अलग दिशा देखने को मिली।

    इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार कुल मिलाकर बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 404.53 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 187.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की इस तेजी के बीच कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी, जबकि कई प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट रही।

    बाजार पूंजीकरण में हुए इस बदलाव से शीर्ष कंपनियों के बीच निवेशकों के रुझान में अंतर भी सामने आया। खास तौर पर एसबीआई की मजबूत बढ़त ने सप्ताह के दौरान उसके कुल बाजार मूल्यांकन को 10 लाख करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर पहुंचा दिया। वहीं, कुछ अन्य बड़ी कंपनियों में गिरावट के कारण उनके बाजार पूंजीकरण में कमी दर्ज हुई।

  • तेजस्वी प्रकाश ने बताया क्यों एकता कपूर की लोकप्रियता आज भी कायम है, बदलाव की क्षमता को बताया सबसे बड़ी ताकत

    तेजस्वी प्रकाश ने बताया क्यों एकता कपूर की लोकप्रियता आज भी कायम है, बदलाव की क्षमता को बताया सबसे बड़ी ताकत

    नई दिल्ली । टेलीविजन और मनोरंजन की दुनिया में बदलते दर्शकों की पसंद के बीच अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश ने निर्माता एकता कपूर की कार्यशैली और बदलाव को अपनाने की क्षमता की सराहना की है। तेजस्वी का कहना है कि एकता कपूर ने खुद को केवल टेलीविजन सीरियल्स तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समय के साथ अपने काम और कंटेंट के तरीके में जरूरी बदलाव किए हैं। उनके मुताबिक लंबे समय से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रहने के बावजूद एकता कपूर की प्रासंगिकता बनी हुई है।

    तेजस्वी प्रकाश इन दिनों गेमिंग रियलिटी शो ‘प्लेग्राउंड’ के पांचवें सीजन को लेकर चर्चा में हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने एकता कपूर के काम और उनके व्यावसायिक नजरिए पर अपनी राय साझा की। तेजस्वी ने कहा कि एकता को केवल टेलीविजन की निर्माता के रूप में देखना उनके काम के व्यापक दायरे को सीमित करना होगा। उन्होंने एकता को एक कुशल रणनीतिकार और समझदार बिजनेसवुमन बताया।

    तेजस्वी के अनुसार, एकता कपूर को यह समझने की क्षमता है कि किसी समय दर्शकों के बीच किस तरह का कंटेंट पसंद किया जा रहा है। इसी समझ के आधार पर वह अपने काम की दिशा में बदलाव करती हैं। तेजस्वी ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में दर्शकों की पसंद लगातार बदलती रहती है और ऐसे माहौल में पुराने तरीकों पर लगातार निर्भर रहने के बजाय बदलाव को स्वीकार करना जरूरी है।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखा है, जो काम करने के पुराने तरीकों को बदलने के लिए तैयार नहीं होते। चाहे उनका तरीका प्रभावी रहे या नहीं, वे उसी दिशा में काम करते रहते हैं। तेजस्वी के मुताबिक ऐसी सोच विकास की संभावनाओं को सीमित कर सकती है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए यह समझना जरूरी है कि कब अपने तरीके में बदलाव किया जाना चाहिए।

    तेजस्वी ने एकता कपूर के संदर्भ में कहा कि उन्होंने अपने काम के दौरान हुई गलतियों को समझा और उनसे सीख लेकर आवश्यक बदलाव किए। उनके अनुसार, अपनी गलतियों से सीखना और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है। यही क्षमता एकता कपूर के लंबे करियर में भी दिखाई देती है।

    तेजस्वी प्रकाश का एकता कपूर के साथ काम करने का अनुभव भी रहा है। वह चर्चित टेलीविजन शो ‘नागिन 6’ में नजर आई थीं। इस दौरान उन्हें एकता कपूर के प्रोडक्शन से जुड़े काम को करीब से देखने का अवसर मिला। तेजस्वी ने अपने अनुभव के आधार पर एकता की कार्यशैली को लेकर सकारात्मक बात कही।

    उन्होंने रियलिटी शो ‘लॉक अप’ को लेकर भी एकता कपूर की टीम की प्रशंसा की। तेजस्वी ने कहा कि शो के दूसरे सीजन की सफलता से उन्हें खुशी और गर्व महसूस हुआ। वह खुद भी ‘लॉक अप’ का हिस्सा रह चुकी हैं और उन्होंने बताया कि शो से उनका जुड़ाव भले ही सीमित स्तर पर रहा हो, लेकिन उसके मंच का हिस्सा बनना उनके लिए अच्छा अनुभव था।

    तेजस्वी ने यह भी कहा कि एकता कपूर की पहचान केवल टेलीविजन तक सीमित नहीं है। वह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और आने वाले समय में उनके कई नए प्रोजेक्ट्स हैं। तेजस्वी का मानना है कि एकता कपूर ने बदलते मनोरंजन बाजार के अनुरूप अपनी भूमिका और काम के दायरे को लगातार विस्तार दिया है। इसी कारण उन्हें लगता है कि एकता कपूर की लोकप्रियता और चमक अभी भी कायम है।

  • चीन में डॉल्फिन तूफान का खतरा, 1400 उड़ानें रद्द और हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

    चीन में डॉल्फिन तूफान का खतरा, 1400 उड़ानें रद्द और हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

    नई दिल्ली । चीन के पूर्वी तट पर टाइफून डॉल्फिन के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर एहतियाती कदम उठाए हैं। रविवार को तूफान के पहुंचने की आशंका के बीच शंघाई आने-जाने वाली करीब 1400 उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके अलावा हांगझोउ हवाई अड्डे से संचालित होने वाली 270 उड़ानों को भी रद्द किया गया। प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा के लिए उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

    तूफान के रविवार देर रात या सोमवार सुबह चीन के झेजियांग अथवा पड़ोसी फुजियान प्रांत के तटीय क्षेत्र में पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके मद्देनजर रविवार सुबह रेड टाइफून अलर्ट जारी किया गया। यह तूफान से संबंधित सबसे गंभीर चेतावनी का स्तर है। झेजियांग के मध्य और पूर्वी हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार शंघाई के अलावा फुजियान, अनहुई और जिआंग्सू प्रांतों के कुछ हिस्सों में सोमवार दोपहर तक भारी बारिश जारी रह सकती है। जमीन से टकराने के बाद तूफान के धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है। इसके बाद इसके पूर्वी चीन में उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने का अनुमान है।

    टाइफून डॉल्फिन का असर चीन पहुंचने से पहले जापान के ओकिनावा क्षेत्र में भी देखा गया। वहां भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण सात लोगों को मामूली चोटें आईं। घायलों में 100 साल से अधिक उम्र का एक व्यक्ति भी शामिल है, जो तेज हवाओं की चपेट में आकर गिर गया और उसके सिर में चोट लगी। रविवार दोपहर तक ओकिनावा में करीब 5,290 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित थी।

    ताइवान में भी तूफान के प्रभाव के कारण रविवार को द्वीप के उत्तरी हिस्से में तेज हवाओं और भारी बारिश की स्थिति बनी रही। खराब मौसम के चलते दर्जनों फेरी सेवाएं रोक दी गईं, जबकि 180 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। समुद्री और हवाई परिवहन पर पड़े इस असर से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    चीन में तूफान के संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। फुजियान में शनिवार शाम तक करीब 99 हजार लोगों को जोखिम वाले इलाकों से हटाया गया। झेजियांग और फुजियान में 200 से अधिक फेरी मार्गों पर सेवाएं रोक दी गई हैं।

    तटीय और समुद्री गतिविधियों पर भी व्यापक रोक लगाई गई है। शुक्रवार सुबह तक 474 निर्माण जहाजों को बंदरगाहों पर वापस बुला लिया गया था। ऑफशोर परियोजनाओं पर काम रोक दिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में कुछ ट्रेन सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की गई हैं।

    डॉल्फिन से करीब दो सप्ताह पहले दक्षिणी ग्वांगडोंग प्रांत में टाइफून नौल ने दस्तक दी थी। उस समय इसे इस साल चीन में पहुंचा सबसे शक्तिशाली तूफान बताया गया था। चीन पहुंचने से पहले नौल ने फिलीपींस में भी भारी असर डाला था, जहां तीन लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हुए थे। ऐसे में डॉल्फिन के संभावित प्रभाव को देखते हुए चीन के तटीय प्रशासन ने परिवहन, निकासी और आपदा प्रबंधन से जुड़े उपायों को प्राथमिकता दी है।

  • बारिश शुरू होते ही बदल जाती है बिहार की खूबसूरती करकटगढ़ से राजगीर तक ये जगहें जरूर करें एक्सप्लोर

    बारिश शुरू होते ही बदल जाती है बिहार की खूबसूरती करकटगढ़ से राजगीर तक ये जगहें जरूर करें एक्सप्लोर


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम आते ही प्रकृति का रंग पूरी तरह बदल जाता है। सूखे और सामान्य दिखाई देने वाले पहाड़ हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं और छोटे बड़े झरने पानी से लबालब होकर अपनी खूबसूरती बिखेरने लगते हैं। ऐसे मौसम में अगर आप भी परिवार दोस्तों या अपने पार्टनर के साथ किसी ऐसी जगह जाने का प्लान बना रहे हैं जहां प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताए जा सकें तो बिहार आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। बिहार को अक्सर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है लेकिन मानसून के दौरान यहां के प्राकृतिक नजारे भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। राज्य में कई ऐसी जगहें हैं जहां बारिश के मौसम में हरियाली पहाड़ झरने और बादलों से घिरे दृश्य किसी खूबसूरत तस्वीर की तरह नजर आते हैं।

    रोहतास जिले में स्थित करमचट डैम मानसून के दौरान घूमने के लिए बेहद आकर्षक जगह बन जाता है। चेनारी के पास मौजूद यह डैम सासाराम से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बारिश के बाद आसपास की हरियाली और पानी से भरा डैम पूरे इलाके की खूबसूरती बढ़ा देता है। यहां सुबह सूर्योदय और शाम के समय सूर्यास्त का नजारा देखने लायक होता है। शांत वातावरण के कारण यह जगह परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए भी अच्छी मानी जाती है।

    अगर आपको झरने और पहाड़ों के बीच घूमना पसंद है तो कैमूर का करकटगढ़ वॉटरफॉल आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के क्षेत्र में मौजूद यह झरना मानसून में अपने पूरे वेग के साथ बहता दिखाई देता है। करीब 100 फीट ऊंचा और लगभग 300 फीट चौड़ा यह जलप्रपात आसपास की हरियाली और जंगल के बीच बेहद आकर्षक नजर आता है। बारिश के दिनों में झरने की आवाज और पहाड़ी वातावरण यहां आने वाले लोगों को प्रकृति के करीब होने का अहसास कराता है।

    कैमूर की पहाड़ियां भी प्रकृति प्रेमियों के लिए शानदार जगह हैं। यहां घने जंगल गहरी घाटियां प्राकृतिक गुफाएं और कई छोटे बड़े झरने मौजूद हैं। मानसून के दौरान पहाड़ियों पर हरियाली बढ़ जाती है और मौसम भी सुहावना हो जाता है। प्रकृति के साथ इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यहां मौजूद प्राचीन शैलचित्र और ऐतिहासिक अवशेष भी आकर्षण का केंद्र हैं।

    राजगीर का विश्व शांति स्तूप भी मानसून में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। रत्नागिरी पहाड़ी पर ऊंचाई पर स्थित यह सफेद स्तूप बादलों और हरियाली से घिरा नजर आता है। यहां पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। रोपवे से सफर करते समय आसपास की पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण का शानदार दृश्य देखने को मिलता है। शांत वातावरण के कारण यह स्थान पर्यटन के साथ आध्यात्मिक अनुभव भी देता है।

    गया जिले के पास स्थित गुरपा हिल भी बारिश के मौसम में घूमने के लिए खास जगह हो सकती है। बिहार और झारखंड की सीमा के आसपास मौजूद यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक महत्व भी रखता है। मानसून में यहां के जंगल पहाड़ और झरने और अधिक खूबसूरत हो जाते हैं। पहाड़ी की ऊंचाई से आसपास का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है और यहां मौजूद धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करते हैं।

    मानसून में बिहार घूमने का अनुभव इन जगहों की वजह से और खास हो सकता है। हालांकि बारिश के दौरान पहाड़ी और झरने वाले क्षेत्रों में फिसलन और अचानक बढ़ते पानी का खतरा हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले मौसम और स्थानीय प्रशासन की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है। सुरक्षित तरीके से घूमते हुए इन प्राकृतिक जगहों की खूबसूरती का आनंद लिया जाए तो बिहार का मानसून ट्रिप लंबे समय तक याद रह सकता है।