Author: bharati

  • 51 शक्तिपीठों में शामिल उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख धाम, कहीं मां विशालाक्षी तो कहीं कात्यायनी रूप में होती हैं पूजा

    51 शक्तिपीठों में शामिल उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख धाम, कहीं मां विशालाक्षी तो कहीं कात्यायनी रूप में होती हैं पूजा

    नई दिल्ली । नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही देशभर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। उत्तर प्रदेश में भी माता रानी के कई प्रसिद्ध मंदिर और शक्तिधाम स्थित हैं, जिनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भक्तों की आस्था का प्रमुख आधार हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सती के शरीर के अंग या आभूषण जहां-जहां गिरे, उन स्थानों को शक्तिपीठ कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर में स्थित देवी मंदिरों को इसी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में विशेष पूजा होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    वाराणसी को भगवान शिव की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां मणिकर्णिका घाट के पास मां विशालाक्षी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका से संबंधित अंग गिरने की कथा प्रचलित है। मां विशालाक्षी को देवी शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। नवरात्रि के दिनों में मंदिर में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। काशी की धार्मिक पहचान और मां विशालाक्षी से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह मंदिर देवी उपासना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।

    प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी शहर में मां ललिता देवी का मंदिर स्थित है, जिसे प्रसिद्ध शक्तिधामों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की अंगुली गिरी थी। प्रयागराज में मां कल्याणी देवी और अलोपी देवी के मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इन मंदिरों में नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त देवी के दर्शन करने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए यहां पहुंचते हैं। प्रयागराज के ये तीनों देवी मंदिर शहर की धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।

    चित्रकूट भगवान श्रीराम से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां रामगिरि क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि माता सती का वक्ष इस स्थान पर गिरा था। यहां देवी को मां शिवानी के रूप में भी पूजा जाता है। नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु मां शिवानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। चित्रकूट की धार्मिक पहचान भगवान राम से जुड़ी परंपराओं के साथ-साथ देवी उपासना से भी संबंधित है। यहां स्थित देवी धाम भक्तों के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। नवरात्रि के दौरान पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है।

    वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां देवी उपासना की भी महत्वपूर्ण परंपरा है। यहां मां कात्यायनी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के केश या चूड़ामणि गिरे थे। नवरात्रि में श्रद्धालु मां कात्यायनी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर मां पाटेश्वरी को समर्पित है। भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित यह मंदिर प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। मान्यता है कि यहां माता सती का स्कंध यानी कंधा गिरा था। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन धामों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं उत्तर प्रदेश में देवी उपासना की विविध परंपराओं को दर्शाती हैं।

  • इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल

    इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर में मैदान आवंटन और किराया निर्धारण को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अधिकारियों से अलग-अलग आयोजनों के लिए जमीन देने की प्रक्रिया का हिसाब मांगा। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम के लिए मैदान उपलब्ध कराने के बदले 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया जबकि विजय नगर में भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई गई। इसी कथित अंतर को लेकर कांग्रेस ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और शुल्क से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचे और सीईओ का घेराव किया। चौकसे ने कहा कि जब तक मैदान पर हुए कार्यक्रमों की अनुमति और भुगतान से संबंधित रसीदें उपलब्ध नहीं कराई जातीं तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन का आवंटन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और सभी आयोजकों पर समान नियम लागू होने चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि दोनों कार्यक्रमों के लिए जारी अनुमति पत्रों और किराए की राशि का विवरण सार्वजनिक किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शुल्क किस आधार पर तय किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान पार्षद राजू भदौरिया ने भी IDA के अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को नियमों के अनुसार काम करना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यदि एक राजनीतिक दल से मैदान के इस्तेमाल के लिए बड़ी रकम ली गई है तो दूसरे दल को जमीन उपलब्ध कराने के दौरान भी नियमों और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। हालांकि भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन पूरी तरह मुफ्त दिए जाने के आरोप की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    विवाद का एक दूसरा पहलू पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान में प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार भी है। यहां करीब 40 दिनों के बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। दुकानों के अलावा जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराए की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये तक किराया होने की चर्चा है।

    पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने फिलहाल प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। बताया जा रहा है कि इस राशि में दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल हैं। कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि तीन से चार दिन के राजनीतिक कार्यक्रम के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो करीब 40 दिन चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर तय होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन और खर्च का विवरण भी मांगा है।

    कांग्रेस की मुख्य मांग है कि IDA मैदान आवंटन के नियम किराए की गणना और शुल्क में छूट से जुड़ी शर्तों को सार्वजनिक करे। पार्टी का कहना है कि पारदर्शिता से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अलग-अलग आयोजनों के लिए राशि में अंतर क्यों है और कहीं सरकारी राजस्व को नुकसान तो नहीं हो रहा। अब इस मामले में IDA का आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण होगा। प्राधिकरण की ओर से आवंटन की शर्तें और शुल्क निर्धारण का आधार सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को लगातार दो कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद तेजी लौटी। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 879.09 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 288.65 अंक यानी 1.30 प्रतिशत मजबूत होकर 22,520.45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी की प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। हाल की गिरावट के बाद शेयरों के आकर्षक मूल्य स्तर पर खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग से बाजार को सहारा मिला।

    शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसमें लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कमोडिटीज भी बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में रहा। इससे संकेत मिला कि तेजी का दायरा आईटी शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी देखने को मिली।

    बाजार में मजबूती का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 904.80 अंक यानी 1.56 प्रतिशत चढ़कर 58,787.30 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 103.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 19,153.70 पर बंद हुआ। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी व्यापक खरीदारी हुई। सेंसेक्स में शामिल आईटीसी, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड बढ़त के साथ बंद हुए। मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाटा स्टील, एचयूएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, इंडिगो, एनटीपीसी, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी तेजी रही। सेंसेक्स पैक में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग की, जबकि शॉर्ट पोजिशन बंद किए जाने से भी बाजार को मजबूती मिली। दूसरी तिमाही के नतीजों के शुरुआती संकेतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी आय की संभावनाओं को लेकर बढ़ते भरोसे ने आईटी कंपनियों के शेयरों को समर्थन दिया। आईटी क्षेत्र में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों की तेजी में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में मदद की। ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका कम होने के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इससे निवेशकों की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    हालांकि, बाजार में आई तेजी के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर घरेलू शेयर बाजार की रिकवरी पर दबाव डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी चरणबद्ध सख्ती वाले रुख के बाद निवेशक ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर अधिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस संदर्भ में सोमवार को जारी होने वाले घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी। महंगाई के ये आंकड़े निवेशकों की उम्मीदों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी अहम रहेंगे। कंपनियों का वास्तविक प्रदर्शन तय करेगा कि शुक्रवार को आई तेजी आगे भी कायम रह पाती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ता है।

  • रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन

    रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन


    नई दिल्ली। भारतीय नौकायन यानी रोइंग की दुनिया में मनजीत सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। अपने कठिन परिश्रम और खेल के प्रति समर्पण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और देश के लिए पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने से लेकर ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा बनने तक उनका सफर कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। खेल में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित ध्यानचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अब मनजीत सिंह खुद नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर भारतीय नौकायन का भविष्य मजबूत बनाने में जुटे हैं।

    मनजीत सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1988 को हुआ था। उन्हें कम उम्र से ही नौकायन में दिलचस्पी थी। भारत में रोइंग ऐसा खेल रहा है जिसे क्रिकेट और हॉकी जैसे लोकप्रिय खेलों की तुलना में सीमित पहचान मिली है। इसके बावजूद मनजीत ने इस चुनौतीपूर्ण खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने 17 साल की उम्र में रोइंग की शुरुआत की और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी क्षमता को निखारा। इस दौरान उन्हें इस्माइल बेग और बजरंग लाल जैसे प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। मनजीत अपने करियर में कोच इस्माइल बेग को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक मानते हैं।

    उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। वह हैदराबाद में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में एशियन जूनियर चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय टीम से बुलावा मिला। यह उनके करियर का अहम पड़ाव था जिसने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का रास्ता खोला। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और भारतीय रोइंग टीम में अपनी जगह मजबूत की।

    मनजीत सिंह ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक और 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पुरुषों की लाइटवेट डबल स्कल्स स्पर्धा में उन्होंने भारतीय टीम के लिए हिस्सा लिया। इस स्पर्धा में उनके साथी देवेंद्र खंडवाल और संदीप कुमार रहे। ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। मनजीत ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया और भारतीय नौकायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दिया।

    उनके करियर में 2010 के ग्वांग्झू एशियन गेम्स का भी खास महत्व रहा। इन खेलों में उन्होंने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में भारत के लिए पदक जीते। रोइंग में सफलता हासिल करने के लिए ताकत के साथ संतुलन और तालमेल की भी जरूरत होती है। खिलाड़ियों को पानी की परिस्थितियों के अनुसार अपनी गति बनाए रखनी पड़ती है और पूरी टीम को एक लय में प्रदर्शन करना होता है। मनजीत ने अपने अनुभव और निरंतर अभ्यास के जरिए इन चुनौतियों का सामना किया।

    खेल के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए अगस्त 2020 में उन्हें ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार खेलों में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। सम्मान मिलने पर मनजीत ने इसे अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था। उनके लिए यह पुरस्कार वर्षों की मेहनत और इंतजार का परिणाम था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के बाद अब उनका ध्यान युवा खिलाड़ियों को तैयार करने पर है। वह नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण देकर उनमें देश के लिए पदक जीतने का जज्बा पैदा कर रहे हैं। उनका सफर बताता है कि किसी कम चर्चित खेल में भी लगन और अनुशासन के दम पर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।

  • मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश। के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।
    नई दिल्ली ।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।

  • सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही। राजस्थान के सिरोही में नगर परिषद सभापति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर विवाद जारी है। पार्टी के नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से तीन पार्षदों और एक पार्षद पति को हटा दिया गया है। इनमें गीता पुरोहित, प्रवीण राठौड़, गौरव प्रजापत और धनपत सिंह शामिल हैं। इस घटनाक्रम को सभापति चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को अपेक्षा से कम वोट मिलने के बाद उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने अब तक किसी पार्षद के क्रॉस वोटिंग करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    सिरोही नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। सितंबर 2026 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के खाते में 10 सीटें आई थीं। दो वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए चुनाव हुआ। कांग्रेस ने रितु जैन को और भाजपा ने पूजा माली को उम्मीदवार बनाया था। मतदान में रितु जैन को 30 वोट मिले, जबकि पूजा माली को केवल 5 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस ने 25 वोटों के अंतर से सभापति पद पर जीत हासिल की। बाद में कांग्रेस के ईश्वर सिंह उपसभापति पद पर निर्विरोध चुने गए और नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।

    भाजपा के 10 पार्षदों के मुकाबले पार्टी उम्मीदवार को केवल पांच वोट मिलने के बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जाने लगी। नतीजों के आधार पर यह सवाल उठा कि क्या भाजपा के कुछ पार्षदों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, सभापति चुनाव में मतदान गोपनीय होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किस पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया। पार्टी के भीतर संदेह और असंतोष के बीच बुधवार देर रात चार लोगों को नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया। फिलहाल उनके खिलाफ पार्टी से निष्कासन या किसी पद से हटाने का आदेश सामने नहीं आया है।

    इस विवाद में गौरव प्रजापत का नाम भी चर्चा में है। सभापति चुनाव के बाद भाजपा के पांच पार्षद सारणेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने हाथ में जल लेकर पार्टी के प्रति वफादार रहने और सभापति पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन करने की कसम खाई थी। इन पार्षदों में गौरव प्रजापत का नाम भी बताया गया था। अब उन्हें भी व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद मंदिर में ली गई कसम का मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, गौरव प्रजापत के क्रॉस वोटिंग करने की पुष्टि नहीं हुई है।

    व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद पार्षद प्रवीण राठौड़ ने संगठन के सभी पदों और जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से ईमानदारी के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे थे और संगठन की ओर से दी गई जिम्मेदारियां निभाते रहे। नगर परिषद चुनाव के बाद पार्टी में हुए घटनाक्रम से उन्हें दुख पहुंचा है। उनके अनुसार, अब पहले की तरह सम्मान और भरोसे के साथ काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सऐप के माध्यम से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भेजा है। राठौड़ ने संगठन के पद छोड़े हैं, लेकिन पार्षद पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

    सिरोही भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी ने कहा कि उन्हें पार्षदों को व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कुछ पार्षदों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं और संगठन इन शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी पार्षद का इस्तीफा नहीं मिला है। इस बीच जिले के अन्य निकायों में भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा है। पिंडवाड़ा में उपसभापति और शिवगंज में सभापति चुनाव के दौरान दूसरी पार्टी को एक-एक वोट मिलने की बात सामने आई है। आबूरोड में सभापति चुनाव में भाजपा को 27 और कांग्रेस को 13 वोट मिले थे, जबकि उपसभापति चुनाव में भाजपा के वोट घटकर 22 और कांग्रेस के बढ़कर 18 हो गए। हालांकि, इन मामलों में भी संबंधित मतदाताओं की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। सिरोही में सभापति चुनाव से पहले रितु जैन के नामांकन पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों उम्मीदवार मैदान में रहे और रितु जैन चुनाव जीत गईं।

  • मध्यप्रदेश में 10 DSP स्तर के अधिकारियों की नई पोस्टिंग, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, भोपाल सहित कई जिलों में बदली जिम्मेदारियां

    मध्यप्रदेश में 10 DSP स्तर के अधिकारियों की नई पोस्टिंग, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, भोपाल सहित कई जिलों में बदली जिम्मेदारियां

    मध्यप्रदेश । में पुलिस विभाग के भीतर अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है। राज्य सरकार के गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा के 10 अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए नई पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। इन अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर पुलिस अधीक्षक, सहायक पुलिस महानिरीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पदों पर पदस्थ किया गया है। नई व्यवस्था के तहत भोपाल पुलिस मुख्यालय के साथ बालाघाट, नर्मदापुरम, सागर और उज्जैन में भी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फेरबदल में इंदौर और भोपाल में पहले से पदस्थ दो सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग दी गई है।

    जारी आदेश के अनुसार, प्रीतम सिंह बालरे को बालाघाट में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, मनोहर सिंह गवली को नर्मदापुरम की अजाक रेंज में पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। इन दोनों अधिकारियों की नई तैनाती के साथ संबंधित स्थानों पर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। गृह विभाग के आदेश में सभी 10 अधिकारियों के लिए अलग-अलग पद और कार्यस्थल निर्धारित किए गए हैं।

    भोपाल में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। बाबूलाल वर्मा को भोपाल स्थित रेडियो मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। राम शंकर सिलावट को भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। इसी तरह महेंद्र रायपुरिया को भोपाल में विसबल के सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों के माध्यम से पुलिस मुख्यालय और उससे संबंधित इकाइयों में अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।

    भोपाल पुलिस मुख्यालय की क्यूडी शाखा में भी दो अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। ऋतुराज गुप्ता को यहां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। सत्येन्द्र कुमार वर्मा को भी इसी शाखा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। दोनों अधिकारियों की नई पोस्टिंग के साथ क्यूडी शाखा में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। गृह विभाग के आदेश में इन पदों पर तैनाती का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

    अन्य जिलों और इकाइयों में भी नई पदस्थापनाएं की गई हैं। विनोद कुमार दीक्षित को उज्जैन लोकायुक्त में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। सतीश कुमार चतुर्वेदी को सागर जोन में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं, बिट्टू शर्मा को भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। इन आदेशों के तहत अधिकारियों को उनके नए पदस्थापना स्थलों पर जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    गृह विभाग की ओर से जारी इस आदेश में कुल 10 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों की नई पोस्टिंग शामिल है। इसमें भोपाल पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के साथ क्षेत्रीय इकाइयों और अन्य स्थानों पर पदस्थापना की गई है। बालाघाट, नर्मदापुरम, सागर और उज्जैन में अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि भोपाल में रेडियो मुख्यालय, विसबल, क्यूडी शाखा और पुलिस मुख्यालय से जुड़े पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। आदेश में अधिकारियों के नाम और उनके नए पदस्थापना स्थलों का उल्लेख किया गया है।

  • मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को तीन महीने में नियुक्ति के निर्देश

    मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को तीन महीने में नियुक्ति के निर्देश

    मध्यप्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने 27 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी नहीं दी और कहा कि ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है। कोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने यह भी माना कि सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा से आगे जाने के लिए जरूरी असाधारण परिस्थितियां भी सरकार साबित नहीं कर पाई।

    इस फैसले से सरकारी भर्तियों में लंबे समय से अटके 13 प्रतिशत पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। हाईकोर्ट ने इन होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार को तीन महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इन पदों पर नियुक्तियां लंबे समय से लंबित थीं, जिससे संबंधित अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ रहा था। फैसले के बाद अनारक्षित वर्ग के उन उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी नियुक्तियां आरक्षण विवाद के कारण रुकी हुई थीं।

    अदालत ने पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को भी राहत दी है। फैसले के अनुसार, मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच हुई कुछ नियुक्तियां रद्द नहीं की जाएंगी। इस अवधि में 14 प्रतिशत से अधिक ओबीसी आरक्षण के आधार पर नियुक्ति पाने वाले उम्मीदवारों की नौकरी पर भी फैसले का असर नहीं पड़ेगा। इस तरह अदालत ने लंबित पदों पर नियुक्तियों के साथ पहले से कार्यरत अभ्यर्थियों की स्थिति को लेकर भी निर्देश दिए हैं।

    यह फैसला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने सुनाया। दोनों न्यायाधीशों ने लाइव कोर्ट में पांच प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से निर्णय का सार समझाया। इनमें ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण को सही मानना, 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त आंकड़े नहीं होना, 50 प्रतिशत की सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थितियों का साबित नहीं होना, 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर नियुक्तियां और पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को राहत देना शामिल है।

    मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विवाद वर्ष 2019 से चल रहा है। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने मार्च 2019 में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला लिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हुईं और बढ़े हुए आरक्षण को लागू करने पर कानूनी रोक लगी। जुलाई 2019 में राज्य सरकार ने संबंधित आरक्षण कानून में संशोधन कर 27 प्रतिशत आरक्षण को वैधानिक आधार देने की कोशिश की, लेकिन विवाद जारी रहा।

    भर्तियों के परिणाम अटकने के बीच सितंबर 2022 में सरकार ने 87-13 प्रतिशत का फार्मूला अपनाया। इसके तहत 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर 87 प्रतिशत पदों के परिणाम जारी करने और शेष 13 प्रतिशत पदों को होल्ड रखने की व्यवस्था की गई। इससे कई भर्तियों में नियुक्तियों का मामला लंबित रहा। ओबीसी वर्ग की ओर से प्रदेश में अपनी आबादी लगभग 52 प्रतिशत होने का दावा करते हुए 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग की जाती रही, जबकि सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों ने इसका विरोध किया।

    यह मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में रहा। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और होल्ड किए गए 13 प्रतिशत पदों पर निर्णय लेने की मांग की थी। इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद भी यह मुद्दा उठाया गया था। अब हाईकोर्ट के फैसले से आरक्षण और नियुक्तियों से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण दिशा सामने आई है। हालांकि, फैसले के सभी कानूनी प्रभावों की विस्तृत स्थिति लिखित आदेश के सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।

  • मध्य प्रदेश में एक करोड़ रुपये के कथित शराब रिश्वत मामले में घिरे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पद से हटाए गए

    मध्य प्रदेश में एक करोड़ रुपये के कथित शराब रिश्वत मामले में घिरे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पद से हटाए गए

    मध्य प्रदेश। के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) दीपम रायचूरा को पद से हटा दिया है। रायचूरा पर वर्ष 2024-25 में शराब ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद देवड़ा ने संबंधित वाणिज्यिक कर विभाग को जल्द जांच करने के निर्देश दिए हैं। आरोपों का आधार करीब 930 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया का कथित बयान बताया जा रहा है। हालांकि, इस बयान में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। रायचूरा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत और मनगढ़ंत बताया है।

    उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने इस मामले में कहा कि दीपम रायचूरा वर्तमान में उनके ओएसडी हैं, लेकिन वर्ष 2024-25 में वे भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। उस समय रायचूरा उनके ओएसडी नहीं थे। देवड़ा के अनुसार, शराब ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी उन्हें अखबारों के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने संबंधित विभाग को मामले की जल्द जांच करने के निर्देश दिए और रायचूरा को ओएसडी के पद से हटा दिया। अब मामले में विभागीय जांच के जरिए आरोपों की पड़ताल की जानी है।

    मोहित गोगिया के नाम से सामने आए कथित बयान में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों का उल्लेख है। आरोप है कि वर्ष 2024-25 में इन दुकानों के ठेके दिलाने के बदले कुल एक करोड़ रुपये लिए गए। कथित बयान के मुताबिक, इसमें 50 लाख रुपये नकद और बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते के माध्यम से दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा शराब ठेकों के लिए आवश्यक बैंक गारंटी से संबंधित फर्जी सावधि जमा रसीद यानी एफडीआर के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। आरोपों में फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में मदद करने और बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने में सहयोग की बात भी शामिल है। कथित बयान में बिचौलियों की भूमिका और एक मोबाइल नंबर पर बातचीत होने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सत्यापित कॉल रिकॉर्ड या चैट की जानकारी उपलब्ध नहीं है और दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

    दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मोहित गोगिया से उनका नाम जोड़कर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं। रायचूरा के मुताबिक, भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर रहते हुए गोगिया से लाइसेंसधारी के तौर पर मुलाकात हुई होगी, लेकिन उन्होंने उससे किसी अन्य संबंध की बात स्वीकार नहीं की है। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को भी झूठा बताया है। ऐसे में मामले में एक ओर कथित बयान के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, जबकि दूसरी ओर रायचूरा ने उन्हें गलत बताते हुए अपना पक्ष रखा है।

    इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पटवारी ने मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग रखी है। उनकी मांगों में शराब ठेकों के आवंटन, बैंक एफडीआर और कथित लेन-देन की जांच शामिल है। उन्होंने 50-50 लाख रुपये के बताए गए भुगतानों और संबंधित बैंक खातों की पड़ताल के साथ जांच के लिए समय-सीमा निर्धारित करने की मांग भी की है। पटवारी ने जांच और कार्रवाई की जानकारी जनता के सामने रखने तथा आरोप सिद्ध होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। ये कांग्रेस की ओर से रखी गई मांगें हैं, सरकार का घोषित निर्णय नहीं।

    फिलहाल वाणिज्यिक कर विभाग को जांच के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में जांच पूरी करने की निश्चित समय-सीमा या विस्तृत जांच प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है। कथित बयान में किए गए दावों की सत्यता, बैंक लेन-देन और एफडीआर से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। एसआईटी गठित करने की मांग पर सरकार का निर्णय भी सामने नहीं आया है। ओएसडी को पद से हटाने की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि आरोपों की वास्तविकता और आगे की संभावित कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    नई दिल्ली । राजधानी में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। इस बदलाव का असर बिहार, मुंबई, हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है।

    रेलवे प्रशासन के अनुसार, 9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना होने वाली ऐसी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें, जिन्हें 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन पहुंचना था, उन्हें शुरुआती स्टेशन से ही रद्द करने का फैसला लिया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि कर लें। ट्रेनों के संचालन, रद्द होने और समय में बदलाव से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए रेलवन ऐप और एनटीईएस ऐप देखने को कहा गया है।

    दानापुर मंडल से संबंधित चार ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें गाड़ी संख्या 20801 मगध एक्सप्रेस शामिल है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को इस्लामपुर से दोपहर 3:30 बजे रवाना होने वाली थी और अगले दिन दोपहर 12 बजे नई दिल्ली पहुंचने का निर्धारित समय था। प्रदर्शन के मद्देनजर इस ट्रेन का परिचालन रद्द कर दिया गया है।

    गाड़ी संख्या 12309 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को राजेंद्र नगर से शाम 7:10 बजे चलने वाली थी और 10 अक्टूबर को सुबह 7:40 बजे नई दिल्ली पहुंचती। इसके अलावा गाड़ी संख्या 12393 संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस का संचालन भी नहीं होगा। यह ट्रेन राजेंद्र नगर से 9 अक्टूबर को शाम 7:20 बजे रवाना होकर 10 अक्टूबर को सुबह 7:55 बजे नई दिल्ली पहुंचने वाली थी।

    रद्द की गई चौथी ट्रेन गाड़ी संख्या 22361 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस है। इसका निर्धारित प्रस्थान समय 9 अक्टूबर को शाम 7:50 बजे था, जबकि नई दिल्ली पहुंचने का समय 10 अक्टूबर को दोपहर 1:10 बजे तय था। इन चारों ट्रेनों के रद्द होने से इनके निर्धारित समय पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    इस बीच, भोपाल होकर चलने वाली मुंबई-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। गाड़ी संख्या 22221 को परिचालन संबंधी कारणों से 9 अक्टूबर को उसके शुरुआती स्टेशन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई से ही रद्द किया गया है। भोपाल स्टेशन से इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को यात्रा की योजना दोबारा बनाने और रेलवे की सूचना एवं पूछताछ सेवाओं से अपडेट जानकारी लेने की सलाह दी गई है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है।

    पूर्वी रेलवे ने भी शुक्रवार के लिए हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाली दो राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी दी है। इनमें गाड़ी संख्या 12301 हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और गाड़ी संख्या 12313 सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस शामिल हैं। इस तरह दिल्ली आने वाली कई प्रमुख ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को प्रस्थान से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जांचना जरूरी है। जिन यात्रियों ने इन ट्रेनों में टिकट बुक कराए हैं, उन्हें यात्रा से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करके ही स्टेशन के लिए निकलना चाहिए।