Author: bharati

  • निफ्टी-सेंसेक्स की तेजी के बाद अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कच्चे तेल और घरेलू आंकड़ों पर रहेगी

    निफ्टी-सेंसेक्स की तेजी के बाद अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कच्चे तेल और घरेलू आंकड़ों पर रहेगी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए 10 से 14 अगस्त के बीच आने वाला कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के कारण अहम माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, घरेलू महंगाई के आंकड़े और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार की दिशा तय करने में इन सभी कारकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच हमले रुके हुए हैं और इसी वजह से कच्चे तेल की कीमत करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। तेल की कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दिखाई दे सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।

    घरेलू मोर्चे पर खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े अगले सप्ताह जारी किए जाएंगे। महंगाई के आंकड़े अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के दबाव के साथ मांग और आपूर्ति की स्थिति का संकेत देते हैं। ऐसे में निवेशक इन आंकड़ों का विश्लेषण करके बाजार की आगे की दिशा को लेकर अपनी रणनीति तय कर सकते हैं।

    इसके अलावा कई सूचीबद्ध कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित करेंगे। 10 से 14 अगस्त के बीच स्काईगोल्ड, बॉश, बॉम्बे डाइंग, डॉलर, डीबीएल, आईटीडीसी, वोडाफोन आइडिया, आइडियाफोर्ज, हिंदुस्तान कॉपर, लिंडे इंडिया, वीगार्ड, जी, बाटा इंडिया, ईपैक, ईपीएल, आईएफसीआई और जेएनके इंडिया समेत कई कंपनियों के नतीजे सामने आने हैं।

    बीते कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में कुल मिलाकर मजबूती देखने को मिली। निफ्टी 187.05 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,570.65 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स में 404.53 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 78,499.17 के स्तर पर बंद हुआ।

    बाजार में व्यापक तेजी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 548.25 अंक यानी 0.87 प्रतिशत बढ़कर 63,463.55 पर पहुंच गया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 528.15 अंक यानी 2.73 प्रतिशत की मजबूत तेजी दर्ज हुई और यह 19,867.80 पर बंद हुआ।

    सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा और इसमें 5.01 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.30 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 3.70 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 3.14 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 2.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

    इसी तरह निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग में 2.04 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज में 1.32 प्रतिशत, निफ्टी इंफ्रा में 1.01 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.64 प्रतिशत की मजबूती रही। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया 3.94 प्रतिशत गिरा। निफ्टी रियल्टी में 1.72 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.48 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.28 प्रतिशत नीचे रहे।

    कुल मिलाकर अगले सप्ताह बाजार की निगाह घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर रहेगी। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव और महंगाई के आंकड़ों में होने वाले बदलाव निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक रहेंगे। तिमाही नतीजों से कंपनियों के कारोबार और कमाई की तस्वीर भी स्पष्ट होगी, जिससे अलग-अलग शेयरों और क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

  • राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब

    राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली । 
    रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों तथा उनके सरपरस्तों के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए भारत ने स्पष्ट किया कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

    राजनाथ सिंह दिल्ली कैंट स्थित सेना के बेस अस्पताल में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश की नारी शक्ति के सिंदूर की रक्षा के लिए भी भारत किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।

    रक्षामंत्री ने इस अवसर पर आयोजित रक्तदान कार्यक्रम को ‘सिंदूर’ महारक्तदान यात्रा का नाम दिए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह नाम अपने भीतर एक प्रतीकात्मक संदेश रखता है और रक्तदान का आयोजन मानवता, सहृदयता तथा राष्ट्रप्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।

    उन्होंने कहा कि रक्त का निर्माण किसी कारखाने या प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता। यह स्वस्थ मानव शरीर में ही बनता है और एक व्यक्ति ही दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त देकर उसकी सहायता कर सकता है। इसी वजह से रक्तदान को जीवनदान और महादान के रूप में देखा जाता है।

    राजनाथ सिंह ने बताया कि इस अभियान में सांगली से आए सैकड़ों खिलाड़ी भी रक्तदान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस पहल के माध्यम से एक ऐसा रक्त भंडार तैयार होगा, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेना के जवानों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा।

    रक्षामंत्री ने रक्तदान करने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि एथलीटों की पहचान उनकी शारीरिक क्षमता से होती है, लेकिन इस अवसर पर उन्होंने करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की शक्ति का भी परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय नागरिकों और जवानों के परिवारों के साथ खड़ा होना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस आयोजन में एथलीटों और अन्य प्रतिभागियों की ओर से करीब एक हजार यूनिट रक्तदान किया गया। राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय सेना के जवानों और उनके परिवारों के प्रति भरोसे का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय राष्ट्र उनके साथ खड़ा रहेगा और इससे बड़ी राष्ट्रसेवा की भावना का उदाहरण मुश्किल है।

    रक्षामंत्री ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से रक्तदान को केवल किसी विशेष कार्यक्रम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे समाज की नियमित संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज भी होना चाहिए जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

    राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की ओर से फिटनेस को लेकर दिए गए संदेश और खेलो इंडिया तथा फिटनेस से जुड़े अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि नागरिक जितने अधिक फिट रहेंगे, उतना ही वे समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे और रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे सकेंगे।

  • महेश बाबू के 51वें जन्मदिन पर ‘वाराणसी’ से उनके किरदार रुद्र का नया लुक सामने आया है।

    महेश बाबू के 51वें जन्मदिन पर ‘वाराणसी’ से उनके किरदार रुद्र का नया लुक सामने आया है।

    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू ने अपने 51वें जन्मदिन के मौके पर फैंस को खास तोहफा दिया है। 9 अगस्त को जन्मदिन मना रहे अभिनेता ने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ से अपने किरदार रुद्र का नया लुक साझा किया। फिल्म को लेकर लंबे समय से दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है और महेश बाबू की नई तस्वीरों ने इस उत्साह को और बढ़ा दिया है।

    जन्मदिन के अवसर पर जारी की गई तस्वीरों में महेश बाबू का अंदाज पहले से काफी अलग नजर आ रहा है। अभिनेता गंभीर और रहस्यमयी लुक में दिखाई दे रहे हैं। उनका स्टाइल और व्यक्तित्व फिल्म के बड़े स्तर की ओर संकेत करता है। तस्वीरों में वह अफ्रीका की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच नजर आते हैं, जहां फिल्म की शूटिंग भी की गई है।

    ‘वाराणसी’ की शूटिंग अफ्रीका की चर्चित लोकेशन्स किलिमंजारो और मसाई मारा में हुई है। सामने आई तस्वीरों में महेश बाबू कभी विशाल प्राकृतिक दृश्यों को निहारते दिखाई देते हैं तो कभी शांत अंदाज में नजर आते हैं। बैकग्राउंड में मौजूद वन्यजीवन और प्राकृतिक दृश्य फिल्म की भव्य दुनिया को और आकर्षक बनाते हैं।

    फिल्म का निर्देशन एसएस राजामौली कर रहे हैं। ऐसे में महेश बाबू और राजामौली की पहली साझेदारी को लेकर दर्शकों में खास दिलचस्पी है। सामने आए लुक से यह संकेत मिलता है कि रुद्र के किरदार को बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है। हालांकि फिल्म की कहानी से जुड़ी अधिकांश जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है।

    कहानी को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार फिल्म की घटनाएं वर्ष 2027 की पृष्ठभूमि में दिखाई जा सकती हैं। कथानक में ‘शाम्भवी’ नाम के एक एस्टेरॉयड का जिक्र है, जो वाराणसी की ओर बढ़ रहा होता है। इसके कारण पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा खतरा पैदा होने की स्थिति बनती है। हालांकि फिल्म की आधिकारिक कहानी को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

    महेश बाबू फिल्म में एक आर्कियोलॉजिस्ट की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार का नाम रुद्र बताया गया है। कहानी में उनका सामना एक ऐसे घटनाक्रम से होता है, जिसका संबंध इतिहास, रोमांच और वैश्विक खतरे से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से फिल्म को सामान्य एक्शन कहानी से अलग पैमाने पर तैयार किए जाने की चर्चा है।

    फिल्म में प्रियंका चोपड़ा भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देंगी। वह मंदाकिनी नाम की महिला किरदार निभा रही हैं, जिसे एक हिस्टोरियन और कुशल शूटर के रूप में पेश किए जाने की जानकारी है। महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा की जोड़ी भी फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

    वहीं पृथ्वीराज सुकुमारन फिल्म में नकारात्मक भूमिका में नजर आएंगे। उनके किरदार को लेकर भी अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में महेश बाबू के रुद्र, प्रियंका चोपड़ा के मंदाकिनी और पृथ्वीराज सुकुमारन के किरदार के बीच कहानी किस तरह आगे बढ़ेगी, इसे लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

    फिल्म के विशाल स्तर, अंतरराष्ट्रीय लोकेशन्स और बड़े कलाकारों की मौजूदगी के कारण ‘वाराणसी’ पर खास नजर है। जन्मदिन के मौके पर जारी महेश बाबू का नया लुक फिल्म की चर्चा को और तेज कर रहा है। हालांकि कहानी के कई अहम पहलुओं पर अभी पर्दा पड़ा हुआ है, लेकिन रुद्र का नया अंदाज फिल्म की दुनिया और किरदार की गंभीरता की झलक जरूर देता है।

  • दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत

    दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत


    नई दिल्ली ।दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। स्कारबोरो रीफ को लेकर चीन की ओर से उठाए गए नए कदम पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। अमेरिका ने चीन द्वारा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने के फैसले का विरोध करते हुए फिलीपींस के साथ खड़े रहने की बात कही है।

    स्कारबोरो रीफ दक्षिण चीन सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है, जिस पर चीन और फिलीपींस दोनों अपना दावा करते रहे हैं। इस इलाके में मछली पकड़ने और समुद्री गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। फिलीपींस के मछुआरे इस क्षेत्र में लंबे समय से मछली पकड़ते रहे हैं और नए नियमों के बाद उनके सामने संभावित परेशानियों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    चीन ने एक अगस्त को स्कारबोरो रीफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों में क्षेत्र की देखभाल, निगरानी और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। इसके तहत चीन के कई सरकारी विभाग मिलकर इस समुद्री क्षेत्र की निगरानी और प्रबंधन करेंगे। चीन का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और क्षेत्र की सुरक्षा तथा संरक्षण को व्यवस्थित करना है।

    चीन ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मंजूरी सितंबर 2024 में दी थी। अब नए नियमों के जरिए वहां प्रशासनिक और निगरानी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है। हालांकि, फिलीपींस को आशंका है कि इन व्यवस्थाओं का असर उसके मछुआरों की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

    अमेरिका ने चीन के इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि नए नियमों से फिलीपींस के उन मछुआरों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में मछली पकड़ते रहे हैं। अमेरिका ने चीन से क्षेत्र के आसपास मौजूद देशों के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखने की अपील की है।

    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में फिलीपींस के साथ है। इसके साथ ही उसने खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन की बात दोहराई है। इससे दक्षिण चीन सागर के विवाद में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

    स्कारबोरो रीफ को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। वर्ष 2016 में समुद्री कानून से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक पैनल ने दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावों को कानूनी आधार नहीं माना था। फिलीपींस ने इस फैसले का समर्थन किया था, जबकि चीन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

    2016 के बाद भी दोनों देशों के बीच इस समुद्री क्षेत्र को लेकर मतभेद खत्म नहीं हुए। समय-समय पर समुद्री गतिविधियों, मछली पकड़ने और क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर तनाव सामने आता रहा है। स्कारबोरो रीफ पर चीन की नई प्रशासनिक व्यवस्था ने इसी पुराने विवाद को फिर से सक्रिय कर दिया है।

    मौजूदा घटनाक्रम में चीन अपने नए नियमों को क्षेत्र के संरक्षण और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि फिलीपींस इसे अपने मछुआरों और समुद्री अधिकारों के संदर्भ में देख रहा है। अमेरिका के खुलकर फिलीपींस का समर्थन करने से इस विवाद का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

    फिलहाल दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। स्कारबोरो रीफ पर लागू किए गए नए नियमों को लेकर दोनों पक्षों के रुख में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और दोनों देशों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।

  • UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    नई दिल्ली ।यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के बीच पिछले कुछ दिनों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर सवाल उठ रहे थे। खासतौर पर 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के कारण यह आशंका बनी हुई थी कि आने वाले समय में डिजिटल भुगतान महंगा हो सकता है। अब सरकार ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    लोकसभा में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने यूपीआई भुगतान व्यवस्था और संभावित MDR को लेकर अपना रुख सामने रखा है। सरकार के मुताबिक, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। ऐसे में रोजमर्रा के व्यक्तिगत लेनदेन करने वाले ग्राहकों पर प्रस्तावित व्यवस्था का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट उस शुल्क को कहा जाता है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी या दुकानदार की ओर से बैंक अथवा भुगतान सेवा उपलब्ध कराने वाली संस्था को दिया जाता है। यह डिजिटल भुगतान की सुविधा से जुड़ी लागत का हिस्सा होता है। इसलिए इसे सीधे ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं माना जाता है।

    सरकार ने कहा है कि यदि भविष्य में यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा। सभी तरह के यूपीआई भुगतान पर एक समान शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं बताई गई है। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले लेनदेन इससे बाहर रहेंगे और अधिकांश छोटे दुकानदारों तथा कारोबारियों पर भी इसका बड़ा असर नहीं पड़ने की बात कही गई है।

    संभावित व्यवस्था के तहत तय सीमा से अधिक मूल्य वाले कुछ चुनिंदा मर्चेंट भुगतान पर MDR लगाया जा सकता है। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में शुल्क की राशि काफी कम रखी जा सकती है। यह शुल्क कार्ड के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क की तुलना में भी कम हो सकता है।

    सरकार ने संभावित MDR की जरूरत के पीछे यूपीआई के लगातार बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया है। डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने और भुगतान प्रणाली को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार खर्च की आवश्यकता होती है। इसी वजह से डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत और उसके प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है।

    हालांकि, अभी यूपीआई पर MDR लागू करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो उसका भुगतान व्यापारी करेंगे, ग्राहकों से सीधे शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं होगी। इससे व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान करने वाले लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका फिलहाल नहीं है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कह चुके हैं। भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अभी बातचीत जारी है। अंतिम नीति तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन श्रेणियों के मर्चेंट भुगतान को संभावित शुल्क के दायरे में रखा जा सकता है।

    इस बीच वित्त मंत्रालय ने उन दावों को भी गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि किसी बाहरी दबाव के कारण यूपीआई से जुड़ी नीति में बदलाव किया जा रहा है। सरकार का मौजूदा रुख स्पष्ट है कि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा और यदि भविष्य में MDR की व्यवस्था लागू होती है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा।

    इसलिए फिलहाल सामान्य यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की स्थिति है। छोटे व्यक्तिगत भुगतान करने वालों को किसी नए शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, व्यापारिक लेनदेन को लेकर अंतिम नियम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संभावित MDR किन भुगतान श्रेणियों पर लागू होगा और उसकी वास्तविक दर कितनी होगी।

  • IPL 2027 में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों के खेलने पर सस्पेंस, मैकडोनाल्ड के बयान से मची हलचल

    IPL 2027 में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों के खेलने पर सस्पेंस, मैकडोनाल्ड के बयान से मची हलचल


    नई दिल्ली । आईपीएल 2027 के शुरू होने से काफी पहले ही ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया के हेड कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। दरअसल अगले साल ऑस्ट्रेलियाई टीम का इंटरनेशनल शेड्यूल बेहद व्यस्त रहने वाला है और इसी वजह से टीम के प्रमुख टेस्ट खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने को लेकर मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं। हालांकि मैकडोनाल्ड ने यह साफ नहीं किया है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2027 से पूरी तरह बाहर रहेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि खिलाड़ियों की फिटनेस, वर्कलोड और इंटरनेशनल प्रतिबद्धताओं को देखते हुए अलग-अलग फैसले लिए जा सकते हैं।

    आईपीएल 2027 के मार्च के मध्य से मई के अंत तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद जून में संभावित वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल होना है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के पास इंटरनेशनल क्रिकेट से आराम का समय काफी सीमित रह सकता है। अगले 12 महीनों में ऑस्ट्रेलियाई टीम को करीब 20 टेस्ट और 14 व्हाइट-बॉल इंटरनेशनल मुकाबले खेलने हैं। इस व्यस्त कार्यक्रम में भारत के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भी शामिल है। इसके अलावा टेस्ट क्रिकेट की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर इंग्लैंड के खिलाफ एक विशेष टेस्ट और फिर एशेज सीरीज भी ऑस्ट्रेलिया के कार्यक्रम का हिस्सा है।

    ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख टेस्ट खिलाड़ियों के लिए आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती हो सकता है। हालांकि एंड्रयू मैकडोनाल्ड का मानना है कि आईपीएल ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के मैनेजमेंट प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बेहतरीन टी20 प्रतियोगिताओं में से एक आईपीएल में अपने प्रमुख खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिलने से उन्हें फायदा हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाना जरूरी होगा।

    ऑस्ट्रेलिया के कई बड़े सितारे फिलहाल आईपीएल फ्रेंचाइजी से जुड़े हुए हैं। पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड, कैमरन ग्रीन और ट्रेविस हेड जैसे खिलाड़ी आईपीएल में अपनी पहचान बना चुके हैं। इसके अलावा जोश इंग्लिस भी लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा हैं। ऐसे में अगर ऑस्ट्रेलिया के नियमित टेस्ट खिलाड़ी अगले सीजन में अपनी उपलब्धता सीमित करते हैं या टूर्नामेंट से बाहर रहने का फैसला करते हैं तो इसका सीधा असर आईपीएल फ्रेंचाइजियों की रणनीति पर पड़ सकता है। खासकर रिटेंशन और टीम संयोजन को लेकर फ्रेंचाइजियों को पहले से योजना बनानी होगी।

    मैकडोनाल्ड के बयान में सबसे ज्यादा जोर तेज गेंदबाजों के वर्कलोड और रिकवरी पर रहा। ऑस्ट्रेलिया के पास अगले कुछ समय में बेहद महत्वपूर्ण मुकाबले हैं और टीम मैनेजमेंट नहीं चाहता कि लगातार क्रिकेट खेलने की वजह से उसके प्रमुख तेज गेंदबाजों की फिटनेस प्रभावित हो। भारत दौरा, एशेज और वनडे विश्व कप जैसे बड़े लक्ष्य सामने होने के कारण खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम देना ऑस्ट्रेलिया की प्राथमिकता हो सकती है।

    मैकडोनाल्ड ने यह भी संकेत दिया कि देश और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच किसी एक को चुनने का फैसला सभी खिलाड़ियों के लिए एक जैसा नहीं होगा। खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग फैसले लिए जा सकते हैं। अगर किसी खिलाड़ी के लिए आईपीएल उसके वर्कलोड प्लान में फिट बैठता है तो वह टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकता है और अगर ऐसा संभव नहीं होता है तो खिलाड़ी और टीम मैनेजमेंट मिलकर फैसला कर सकते हैं।

    इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2027 में नहीं खेलेंगे। मैकडोनाल्ड के बयान से इतना जरूर साफ है कि इस बार खिलाड़ियों की उपलब्धता केवल फ्रेंचाइजी या व्यक्तिगत इच्छा से तय नहीं होगी बल्कि फिटनेस, इंटरनेशनल शेड्यूल और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा। ऐसे में आईपीएल 2027 की नीलामी और रिटेंशन से पहले ऑस्ट्रेलियाई सितारों की उपलब्धता पर सभी फ्रेंचाइजियों की नजरें टिकी रहेंगी।

  • हरियाली तीज 2026 को बनाएं यादगार, शादी के बाद पहली तीज पर कपल्स जरूर करें ये खास काम

    हरियाली तीज 2026 को बनाएं यादगार, शादी के बाद पहली तीज पर कपल्स जरूर करें ये खास काम


    नई दिल्ली । शादी के बाद आने वाला पहला त्योहार हर नवविवाहित कपल के लिए बेहद खास होता है। खासकर हरियाली तीज का उत्सव नई दुल्हन के लिए प्यार, उत्साह और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी कई खूबसूरत यादें लेकर आता है। हरी चूड़ियां, मेहंदी, सोलह श्रृंगार, पारंपरिक कपड़े, झूले और तीज की रस्मों के बीच पहली तीज को लेकर नवविवाहित महिलाओं में अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। अगर शादी के बाद आपकी भी यह पहली तीज है तो इसे केवल पूजा और व्रत तक सीमित रखने के बजाय पति के साथ मिलकर इस दिन को खास और यादगार बनाया जा सकता है।

    पहली तीज को खास बनाने की शुरुआत तैयारियों से ही की जा सकती है। पति-पत्नी मिलकर घर की सजावट से लेकर कपड़ों और पूजा की तैयारियों तक में एक-दूसरे का साथ दें। दुल्हन इस मौके पर हरे रंग की साड़ी, लहंगा या सूट पहन सकती हैं। पति भी पारंपरिक कुर्ता-पायजामा या किसी एथनिक आउटफिट में तैयार होकर पत्नी के साथ ट्विनिंग कर सकते हैं। घर को फूलों, पत्तियों और पारंपरिक सजावट से सजाया जा सकता है। अगर घर में झूले की व्यवस्था हो तो उसे भी फूलों से सजाकर तीज के माहौल को और खूबसूरत बनाया जा सकता है। साथ मिलकर की गई ये छोटी-छोटी तैयारियां पति-पत्नी के बीच अपनापन बढ़ाने का काम कर सकती हैं।

    पहली तीज पर दुल्हन के श्रृंगार का भी खास महत्व होता है। हरी चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, पायल और पारंपरिक गहने इस दिन के लुक को और आकर्षक बना सकते हैं। दुल्हन अपनी शादी के गहनों में से किसी खास आभूषण को पहली तीज पर पहन सकती हैं। इससे शादी के बाद के इस पहले बड़े त्योहार की भावनात्मक याद और मजबूत हो सकती है। मेहंदी में पति के नाम या दोनों से जुड़ा कोई छोटा डिजाइन भी शामिल किया जा सकता है।

    तीज की पूजा और पारंपरिक रस्मों में भी पति अपनी पत्नी का साथ दे सकते हैं। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में तीज मनाने की परंपराएं अलग होती हैं इसलिए पूजा और व्रत अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना बेहतर है। पति पूजा की सामग्री तैयार करने से लेकर अन्य जरूरी कामों में पत्नी की मदद कर सकते हैं। अगर पत्नी व्रत रख रही हैं तो उनकी सुविधा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। व्रत को लेकर अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उचित निर्णय लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

    पहली तीज को यादगार बनाने के लिए कपल एक छोटा फोटोशूट भी कर सकते हैं। इसके लिए किसी महंगे स्टूडियो की जरूरत नहीं है। घर की बालकनी, फूलों से सजा झूला, पूजा का स्थान या घर का कोई खूबसूरत कोना ही शानदार बैकग्राउंड बन सकता है। पारंपरिक कपड़ों में कुछ कैंडिड तस्वीरें इस खास दिन की यादों को लंबे समय तक सहेजकर रख सकती हैं।

    इस दिन पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए छोटा सा सरप्राइज भी प्लान कर सकते हैं। इसके लिए महंगा गिफ्ट जरूरी नहीं है। फूल, पसंदीदा मिठाई, चूड़ियां, किताब, छोटी ज्वेलरी या हाथ से लिखा हुआ प्रेम पत्र भी इस दिन को खास बना सकता है। पत्नी भी पति की पसंद की कोई छोटी चीज देकर उन्हें सरप्राइज कर सकती हैं। पूजा और व्रत के बाद समय मिले तो दोनों मिलकर घर पर पारंपरिक भोजन तैयार कर सकते हैं और परिवार के साथ त्योहार का आनंद ले सकते हैं।

    सबसे जरूरी बात यह है कि पहली हरियाली तीज को केवल एक धार्मिक रस्म की तरह न मनाएं बल्कि इसे एक-दूसरे के साथ समय बिताने और नई यादें बनाने का अवसर बनाएं। पारिवारिक परंपराओं का सम्मान करते हुए स्वास्थ्य का ध्यान रखें और महंगे उपहारों के बजाय साथ, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता दें। कुछ साल बाद जब पहली तीज की तस्वीरें और यादें सामने आएंगी तो यही छोटी-छोटी खुशियां इस त्योहार को सबसे खास बना देंगी।

  • कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ

    कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ


    नई दिल्ली । खून हमारे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का काम करता है लेकिन जब रक्त का प्रवाह सामान्य से प्रभावित होने लगे या खून में थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आम बोलचाल में इसे खून गाढ़ा होना कहा जाता है। मेडिकल तौर पर कुछ स्थितियों में इसे हाइपरकोएगुलेबिलिटी या हाइपरविस्कॉसिटी से जोड़ा जाता है। हालांकि हर बार खून गाढ़ा होने का मतलब एक ही बीमारी नहीं होता और इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी खून के तरल हिस्से को कम कर सकती है। इससे रक्त अधिक कंसंट्रेटेड दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ने पर भी रक्त अधिक गाढ़ा हो सकता है। एरिथ्रोसाइटोसिस जैसी स्थितियां इसके उदाहरण हैं। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और धूम्रपान भी ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।

    कुछ परिस्थितियों में शरीर में खून के थक्के बनने की संभावना सामान्य से अधिक हो सकती है। सर्जरी के बाद लंबे समय तक आराम करना, गंभीर चोट, लंबी यात्रा या लगातार कई घंटे बैठे रहना ऐसे कारण हैं जिनमें विशेष सावधानी की जरूरत होती है। गर्भावस्था और प्रसव के आसपास का समय तथा कुछ हार्मोनल दवाएं भी कुछ लोगों में क्लॉटिंग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा कुछ आनुवंशिक स्थितियों के कारण भी किसी व्यक्ति में ब्लड क्लॉट बनने की संभावना अधिक हो सकती है।

    खून में थक्का बनने की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह शरीर की नस या धमनी में रक्त के सामान्य प्रवाह को रोक सकता है। अगर पैर की किसी गहरी नस में थक्का बनता है तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी कहा जाता है। इसमें आमतौर पर पैर में सूजन, दर्द या असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्थिति तब गंभीर हो सकती है जब यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

    इसी तरह यदि कोई थक्का मस्तिष्क तक जाने वाली रक्त वाहिका में रक्त प्रवाह को बाधित करता है तो स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर में अचानक दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैर में अचानक सूजन या दर्द, सांस लेने में अचानक परेशानी, सीने में दर्द या स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    ब्लड क्लॉट का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं माना जाता। लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों, बहुत कम शारीरिक गतिविधि करने वालों, मोटापे से जूझ रहे लोगों और धूम्रपान करने वालों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। लंबी यात्रा करने वाले लोगों को भी लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना चाहिए। जिन लोगों में पहले ब्लड क्लॉट की समस्या हो चुकी है या परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास रहा है उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बचाव के लिए सबसे जरूरी बात लंबे समय तक लगातार निष्क्रिय रहने से बचना है। यदि आपका काम कई घंटे बैठकर करने वाला है तो बीच-बीच में उठकर कुछ देर चलना और पैरों को सक्रिय रखना फायदेमंद हो सकता है। लंबी यात्रा के दौरान भी समय-समय पर चलने-फिरने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने और शरीर में रक्त संचार को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

    इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से दूरी बनाना और वजन को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का खून गाढ़ा है या नहीं। ऐसी स्थिति का कारण जानने के लिए डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के ब्लड थिनर या कोई अन्य दवा लेना उचित नहीं है। अगर आपको ब्लड क्लॉट के लक्षण दिखाई दें या किसी कारण से इसका जोखिम अधिक हो तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

  • इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा

    इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा


    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार विस्तार से अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओडिशा के संबलपुर से भाजपा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे के फैसले और युवा पीढ़ी को लेकर अपनी सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि जेन जी उनके लिए अपने बच्चों की तरह हैं और कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के बच्चों का भविष्य और उनकी सुरक्षा है।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे देश में पैदा हुए हैं और इन बच्चों की अपनी आकांक्षाएं हैं। उनके मुताबिक यही युवा आने वाले समय में भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा। नीट विवाद के बीच उन्होंने देश और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया।

    प्रधान ने इससे पहले भी अपने इस्तीफे को लेकर यही तर्क दिया था। उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई की घटना को देखते हुए और बच्चों तथा देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उनका आरोप रहा कि जेन जी के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई। अब भुवनेश्वर में छात्रों और शिक्षकों के बीच दिए गए संबोधन में उन्होंने एक बार फिर अपने इसी रुख को दोहराया।

    हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर विवाद के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान को अपने गृह राज्य ओडिशा में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीजू जनता दल के कार्यकर्ता उनके कई कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रायराखोल में एक कार्यक्रम के दौरान भी प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। विरोध के बीच प्रधान ने कहा कि वह इस तरह की नारेबाजी से परेशान नहीं हैं। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा तब भी वह वापस नहीं जाएंगे बल्कि लौटकर आएंगे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक युवाओं को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि नवीन बाबू उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा व्यक्ति बताते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है जिससे राज्य के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी हो।

    प्रधान ने कहा कि संभव है कि वह राज्य के लिए सम्मान न ला पा रहे हों लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी भी ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। इस दौरान सभा में मौजूद लोगों ने उनके सवाल के जवाब में समर्थन जताया। कार्यक्रम में बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा के उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे।

    धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्र नीट से जुड़े विवादों को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर प्रधान अपने फैसले को युवाओं और देश की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि पद छोड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और ओडिशा की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके बयान से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में नीट विवाद के साथ ओडिशा की राजनीतिक लड़ाई में भी उनका मुद्दा प्रमुख बना रह सकता है।

  • मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    नई दिल्ली ।ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, राहु ग्रह ने मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है। ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र को धन, पद, प्रतिष्ठा, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना गया है, जबकि राहु को अचानक शुभ या अशुभ परिणाम देने वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। राहु के इस नक्षत्र परिवर्तन से राशि चक्र की तीन विशेष राशियों मेष, सिंह और कन्या को साल के अंत तक जबरदस्त आर्थिक लाभ और करियर में प्रगति मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए राहु का यह गोचर बेहद अनुकूल रहने की संभावना है। मेष राशि का स्वामी ग्रह स्वयं मंगल है और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामित्व भी मंगल के ही पास है। इस शुभ संयोग के प्रभाव से मेष राशि के जातकों के आत्मविश्वास में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी। लंबे समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और सफलतापूर्वक पूरे होंगे। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को भी अच्छा वित्तीय मुनाफा होने की संभावना है। हालांकि, ज्योतिषविदों ने किसी भी बड़े निर्णय को जल्दबाजी में न लेने की सलाह दी है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए भी राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यधिक शुभ एवं लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इस दौरान जातकों की कई पुरानी इच्छाएं पूरी होने के योग बन रहे हैं। आय के नए स्रोत विकसित होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। अचल संपत्ति या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। अचानक किसी बड़े वित्तीय लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी क्षेत्र या प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को पदोन्नति और उच्च पद मिलने के प्रबल संकेत हैं।

    कन्या राशि के लोगों के लिए राहु का मंगल के नक्षत्र में जाना करियर और व्यापार में नए अवसर लेकर आएगा। नौकरीपेशा लोगों को मनपसंद स्थान या विभाग में काम करने का मौका मिल सकता है। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या नौकरी छोड़कर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बेहद अनुकूल रहेगा। अतिरिक्त आय के साधन बनने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी। कुल मिलाकर यह अवधि तीनों राशियों के जातकों के लिए प्रगतिशील और लाभदायक सिद्ध होगी।