Author: bharati

  • बांग्लादेश में राम प्रतिमा को लेकर विवाद: धमकियों के बाद मंदिर समिति ने रोका निर्माण कार्य

    बांग्लादेश में राम प्रतिमा को लेकर विवाद: धमकियों के बाद मंदिर समिति ने रोका निर्माण कार्य


    नई दिल्ली-] बांग्लादेश । बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से जुड़े एक धार्मिक स्थल पर भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। रंगपुर संभाग के पलाशबाड़ी क्षेत्र में एक मंदिर परिसर में बन रही प्रतिमा को लेकर बढ़ते विरोध और कथित धमकियों के बाद मंदिर समिति ने निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और साम्प्रदायिक सौहार्द को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

    मंदिर समिति के अनुसार, प्रतिमा निर्माण को लेकर कुछ कट्टरपंथी तत्वों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया था। स्थिति तब अधिक संवेदनशील हो गई जब एक स्थानीय उपदेशक द्वारा कथित रूप से सार्वजनिक मंच से निर्माणाधीन प्रतिमा को हटाने और उसे ध्वस्त करने संबंधी बयान दिए गए। इन बयानों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जाने लगी और स्थानीय लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया।

    स्थिति को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने विवाद को और बढ़ने से रोकने तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से निर्माण कार्य रोकने का निर्णय लिया। समिति के एक सदस्य ने कहा कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि शांति और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं और स्थानीय समुदायों के बीच सहमति बनती है तो निर्माण कार्य फिर से शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।

    मंदिर समिति ने अपने बयान में कहा कि समाज और देश के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल प्रतिमा निर्माण को स्थगित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय नागरिकों, धार्मिक नेताओं और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    रिपोर्टों के अनुसार, विवाद के दौरान कुछ भड़काऊ बयान भी सामने आए, जिनसे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि किसी बड़े हिंसक टकराव की सूचना नहीं मिली है, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

    बांग्लादेश में हाल के वर्षों में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े कई मुद्दे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हैं। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों और आस्था से जुड़े मामलों को संवाद और कानून के दायरे में रहकर सुलझाया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन की त्वरित और निष्पक्ष भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि समय रहते संवाद स्थापित किया जाए और कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ने से रोका जा सकता है। फिलहाल पलाशबाड़ी में स्थिति शांत बताई जा रही है, लेकिन प्रतिमा निर्माण को लेकर आगे क्या फैसला होगा, इस पर स्थानीय लोगों और धार्मिक समुदायों की नजर बनी हुई है।

  • भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

    भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों का स्वागत करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार अगले वर्ष जनवरी में दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) आयोजित करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। उद्योग विभाग और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने आयोजन की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि यह समिट न केवल निवेश आकर्षित करने का बड़ा मंच बनेगी, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक छवि को और मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    फरवरी 2025 में आयोजित पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को बड़ी सफलता मिली थी। दो दिवसीय इस आयोजन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और इसमें देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान मध्य प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। अब सरकार को उम्मीद है कि दूसरी जीआईएस में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है तथा प्रदेश नए निवेश रिकॉर्ड बना सकता है।

    सूत्रों के अनुसार आगामी समिट के लिए कई संभावित स्थलों का निरीक्षण किया जा चुका है। इनमें लाल परेड ग्राउंड, नीलबड़-रातीबड़ क्षेत्र में ज्यूडिशियल एकेडमी के आसपास की जमीन तथा राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का परिसर शामिल है। अंतिम निर्णय इस आधार पर लिया जाएगा कि आयोजन में कितने निवेशक, उद्योगपति और विदेशी प्रतिनिधि भाग लेने वाले हैं। पिछली बार मानव संग्रहालय परिसर में हुए आयोजन को भव्य रूप दिया गया था और पूरे शहर को विशेष रूप से सजाया गया था।

    सरकार इस बार केवल भव्यता पर ही नहीं, बल्कि आयोजन की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पिछली समिट के दौरान सामने आई तकनीकी खामियों और ध्वनि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में अधिकारियों ने इन मुद्दों की समीक्षा की और बेहतर व्यवस्थाओं के निर्देश दिए।

    निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कोलार रोड स्थित सतगढ़ी क्षेत्र में 172 एकड़ भूमि पर मल्टी-प्रोडक्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना है। सरकार का मानना है कि ऐसे औद्योगिक क्लस्टर निवेशकों को आकर्षित करने में मददगार साबित होंगे।

    हालांकि पिछली जीआईएस के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्य विवादों में भी रहे। फाउंटेन और अन्य सजावटी कार्यों पर हुए खर्च को लेकर जांच हुई और कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए। लोकायुक्त तक पहुंची शिकायतों के बाद जांच में रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई थी। ऐसे में इस बार सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही पर अधिक जोर देती दिखाई दे रही है।

    कुल मिलाकर दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट मध्य प्रदेश के लिए निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर लेकर आ सकती है। यदि सरकार पिछली कमियों को दूर कर बेहतर आयोजन करने में सफल रहती है तो भोपाल एक बार फिर देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा सकता है।

  • क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल

    क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक क्रिकेट के इतिहास में आज का दिन यानी 17 जून खेल प्रेमियों के लिए किसी ऐतिहासिक उत्सव या बड़ी दावत से कम नहीं होने वाला है। आज दुनिया के अलग-अलग कोनों और मैदानों पर एक या दो नहीं, बल्कि कुल 7 बड़े क्रिकेट मुकाबले खेले जाने का एक अनोखा संयोग बना है।
    इन 7 मैचों में से 6 मुकाबले सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) स्तर के हैं, जबकि एक मैच ‘लिस्ट ए’ क्रिकेट का हिस्सा है। इस खेल महाकुंभ की सबसे खास और गौरवशाली बात यह है कि आज अकेले भारत की तीन अलग-अलग राष्ट्रीय टीमें तीन अलग-अलग देशों में अपनी चुनौती पेश करने के लिए मैदान पर उतर रही हैं। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से शुरू होने वाला यह दे-दनादन क्रिकेट का सिलसिला देर रात या यूं कहें कि अगले दिन 18 जून की भोर में 3 बजे तक लगातार जारी रहेगा, जिससे प्रशंसकों को करीब 16 घंटे तक नॉन-स्टॉप रोमांच देखने को मिलेगा।

    भारतीय टीमों के इस त्रिकोणीय अभियान की बात करें तो आज इंडिया ए, मुख्य पुरुष टीम इंडिया और भारतीय महिला क्रिकेट टीम तीनों एक्शन में दिखाई देंगी। सबसे पहले सुबह 10 बजे श्रीलंका की धरती पर खेली जा रही ट्राई-नेशन वनडे सीरीज में इंडिया ए की भिड़ंत अफगानिस्तान ए से होने जा रही है।

    इसके ठीक बाद, दोपहर 1:30 बजे मुख्य भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के दूसरे बेहद महत्वपूर्ण वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में जीत के इरादे से उतरेगी। वहीं, शाम के समय महिला क्रिकेट का रोमांच चरम पर होगा, जब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम शाम 7:00 बजे आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 के एक बेहद अहम मुकाबले में नीदरलैंड की टीम का सामना करेगी।

    भारत के अलावा आज के इस महाशेड्यूल में बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की टीमों का भी जबरदस्त दबदबा देखने को मिलने वाला है। आज इन दोनों देशों की भी दो-दो टीमें मैदान पर एक-दूसरे से लोहा लेंगी। दोपहर 1:30 बजे बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा। इसके ठीक बाद, दोपहर 3:00 बजे महिला टी20 विश्व कप के अंतर्गत बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी, जो दोनों देशों के प्रशंसकों के लिए बेहद दिलचस्प होने वाला है।

    फुटबॉल जैसी गति के साथ टी20 और वनडे के इस रोमांच के बीच पारंपरिक और क्लासिक टेस्ट क्रिकेट के प्रेमियों के लिए भी आज का दिन बेहद खास है। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की मजबूत टीमों के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला भी आज दोपहर 3:30 बजे से शुरू होने जा रहा है, जो पांच दिनों तक क्रिकेट की सर्वोच्च कला का प्रदर्शन करेगा।

    दिन के अंतिम हिस्से में महिला टी20 विश्व कप का एक और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें रात 11:00 बजे साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान की महिला टीमें एक-दूसरे के खिलाफ अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान संभालेंगी। इस प्रकार सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाला यह शेड्यूल क्रिकेट के हर प्रारूप के प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
  • सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    नई दिल्ली । वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा वार्षिक सर्वेक्षण ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज हो सकता है। इससे न केवल गोल्ड रिजर्व का महत्व बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    सर्वेक्षण में 76 केंद्रीय बैंकों ने हिस्सा लिया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इसमें शामिल 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक भंडार में सोने की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर की तुलना में काफी अधिक होगी। दिलचस्प बात यह है कि विकसित देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक भी इस मुद्दे पर लगभग एक जैसी राय रखते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हो रहे बदलावों के कारण केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित संपत्तियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं। लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित रिजर्व मुद्रा माना जाता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक व्यापार में बदलावों के चलते कई देशों ने वैकल्पिक सुरक्षित संपत्तियों की तलाश शुरू कर दी है। सोना इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। सर्वेक्षण में शामिल 74 प्रतिशत रिजर्व प्रबंधकों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी और कम हो सकती है। ऐसे में सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभा सकता है।

    बाजार विशेषज्ञ और केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का कहना है कि दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का रुख बेहद मजबूत बना हुआ है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव के कारण निकट भविष्य में सोने पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी संभावनाएं सकारात्मक हैं। उनका अनुमान है कि अगले एक वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

    सोने की बढ़ती मांग केवल निवेशकों तक सीमित नहीं है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। जब दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान अपनी संपत्तियों का बड़ा हिस्सा सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो यह निवेशकों के लिए भी एक मजबूत संकेत माना जाता है। यही कारण है कि आर्थिक संकट, युद्ध, महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन जैसी परिस्थितियों में सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और केंद्रीय बैंक इसी तरह सोना खरीदते रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड मार्केट में नई तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनता जा रहा है।

  • न्यू जर्सी में एमबाप्पे का महाधमाका: जस्ट फोंटेन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त, दिग्गजों की सूची में शीर्ष की ओर बढ़े फ्रांसीसी कप्तान

    न्यू जर्सी में एमबाप्पे का महाधमाका: जस्ट फोंटेन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त, दिग्गजों की सूची में शीर्ष की ओर बढ़े फ्रांसीसी कप्तान


    नई दिल्ली ।
    पिछले संस्करण की उपविजेता रही फ्रांस की फुटबॉल टीम ने फीफा विश्व कप 2026 में अपने अभियान का शानदार और धमाकेदार आगाज किया है। अमेरिका के न्यू जर्सी में खेले गए ग्रुप ‘आई’ के एक बेहद रोमांचक और कड़े मुकाबले में फ्रांस ने अफ्रीकी महाद्वीप की मजबूत टीम सेनेगल को 3-1 से पराजित कर दिया। इस मुकाबले में फ्रांस की जीत के महानायक उनके स्टार स्ट्राइकर और कप्तान कायलियन एमबाप्पे रहे, जिन्होंने मैच के उत्तरार्ध में अपने जादुई खेल से पासा पलट दिया। एमबाप्पे ने मुकाबले में दो महत्वपूर्ण गोल दागे और इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने फुटबॉल इतिहास की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज करा ली है।

    मैच के शुरुआती हिस्से की बात करें तो पहले हाफ में सेनेगल की टीम ने उम्मीद से कहीं बेहतर और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। मैच के 7वें मिनट में ही सेनेगल के इस्माइला सर्र ने फ्रांस के मजबूत डिफेंस को भेदते हुए गोल पोस्ट के समीप पहुंचकर पहला खतरनाक प्रयास किया। सेनेगल ने पूरे पहले हाफ में फ्रांसीसी टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। फ्रांस की ओर से 19वें मिनट में ओस्मान डेम्बेले ने जवाबी हमला किया, लेकिन वे गोल करने में असफल रहे। इसके बाद 25वें मिनट में सेनेगल के निकोलस जैक्सन गोल करने के बेहद करीब पहुंचे, परंतु उनका शॉट पोस्ट के ठीक बगल से बाहर निकल गया। खेल के 40वें मिनट में स्टार खिलाड़ी सादियो माने का एक बेहतरीन शॉट भी चूक गया, जिसके चलते पहला हाफ पूरी तरह से गोलरहित बराबरी पर समाप्त हुआ और पहले हाफ में एमबाप्पे भी अधिकांश समय गेंद से दूर ही नजर आए।

    हालांकि, दूसरे हाफ की शुरुआत होते ही फ्रांसीसी टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। मैच के 57वें मिनट में एमबाप्पे ने सेनेगल के डिफेंडरों को छकाते हुए एक बेहतरीन मौका बनाया, लेकिन सेनेगल के गोलकीपर एडौर्ड मेंडी ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे नाकाम कर दिया। फ्रांस के खिलाड़ियों ने दबाव जारी रखा और आखिरकार 66वें मिनट में गतिरोध टूट गया। माइकल ओलिसे से मिले एक सटीक पास को नियंत्रित करते हुए कप्तान कायलियन एमबाप्पे ने सेनेगल के डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और गोलकीपर को चकमा देते हुए गेंद को जाल में पहुंचाकर फ्रांस को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी।

    एक गोल की बढ़त हासिल करने के बाद फ्रांस का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैच के 82वें मिनट में युवा फॉरवर्ड ब्रैडली बारकोला ने एक और दर्शनीय गोल दागकर फ्रांस की बढ़त को दोगुना यानी 2-0 कर दिया। निर्धारित 90 मिनट के खेल के बाद लग रहा था कि मैच इसी स्कोर पर समाप्त होगा, लेकिन रेफरी द्वारा जोड़े गए 8 मिनट के इंजरी टाइम ने मुकाबले के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। इंजरी टाइम के शुरुआती पलों में सेनेगल के इब्राहिम मबाये ने एक शानदार गोल कर अपनी टीम की वापसी की उम्मीदें जगाईं और स्कोर 2-1 कर दिया। हालांकि, सेनेगल की यह खुशी कुछ ही सेकेंड टिक सकी, क्योंकि खेल खत्म होने की अंतिम सीटी बजने से ठीक पहले एमबाप्पे ने एक और अविश्वसनीय गोल दागकर फ्रांस को 3-1 से आगे कर दिया और जीत पूरी तरह पक्की कर दी।

    इस ऐतिहासिक मुकाबले में दो गोल करने के साथ ही कायलियन एमबाप्पे के नाम अब फीफा विश्व कप के इतिहास में कुल 14 गोल दर्ज हो गए हैं। इस कीर्तिमान के साथ ही उन्होंने फ्रांस के महान पूर्व खिलाड़ी जस्ट फोंटेन के 13 गोलों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और वे अब विश्व कप इतिहास में फ्रांस के लिए सर्वाधिक गोल करने वाले इकलौते खिलाड़ी बन गए हैं। इसके साथ ही एमबाप्पे ने विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने के मामले में जर्मनी के दिग्गज गेर्ड मुलर के 14 गोलों के सर्वकालिक रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली है। अब विश्व कप के इतिहास में उनसे ज्यादा गोल केवल ब्राजील के रोनाल्डो (15 गोल) और जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोस (16 गोल) के नाम दर्ज हैं। एमबाप्पे का यह शानदार फॉर्म दर्शाता है कि वे आने वाले मैचों में फुटबॉल जगत के कई और बड़े रिकॉर्ड्स को अपने नाम करने के बेहद करीब हैं।

  • G7 में जापान का बड़ा संदेश: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, चीन की चुनौतियां और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जताई चिंता

    G7 में जापान का बड़ा संदेश: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, चीन की चुनौतियां और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जताई चिंता

    फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों, चीन से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को प्रमुखता से उठाते हुए सदस्य देशों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं भी दबाव का सामना कर रही हैं।

    जापानी प्रधानमंत्री ने जी-7 नेताओं के साथ हुई बैठकों और रात्रिभोज चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज विश्व राजनीति और वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना केवल एशियाई देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक और सामरिक हितों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जापान ने चीन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर अपना दृष्टिकोण साझेदार देशों के सामने रखा है।

    ताकाइची ने कहा कि जी-7 देशों के बीच इस बात पर व्यापक सहमति बनी है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग और समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाने पर जोर दिया। आधुनिक तकनीक, रक्षा उत्पादन और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता आज दुनिया की प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं में शामिल हो चुकी है।

    पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जापानी प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहे और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

    ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र रहा। जापान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सहयोग बढ़ाने और परमाणु प्रसार को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। जापान का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों के प्रसार को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।

    इसी सम्मेलन में भारत ने भी विकास साझेदारी और वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी साझेदारी की वास्तविक सफलता इस बात में है कि वह सहयोगी देशों को आत्मनिर्भर बनने में कितना सक्षम बनाती है। उन्होंने अफ्रीका में भारत की विकास परियोजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत साझेदारी के माध्यम से दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उधर, चीन के बढ़ते निर्यात को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताएं भी चर्चा का विषय बनी रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी शुल्कों के बावजूद चीन का औद्योगिक उत्पादन और निर्यात क्षमता मजबूत बनी हुई है, जिससे वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा और आर्थिक संतुलन से जुड़े नए सवाल खड़े हो रहे हैं। कुल मिलाकर, जी-7 शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में सुरक्षा, व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े मुद्दे वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रहने वाले हैं।

  • गोविंदा और सुनीता आहूजा के तलाक की खबरों पर बेटी टीना का बड़ा खुलासा, शादी में दरार के दावों को बताया महज अफवाह

    गोविंदा और सुनीता आहूजा के तलाक की खबरों पर बेटी टीना का बड़ा खुलासा, शादी में दरार के दावों को बताया महज अफवाह

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में लंबे समय तक ‘जोड़ी नंबर 1’ के रूप में मशहूर रहे अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के वैवाहिक जीवन को लेकर सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दावा तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट पर विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि इस स्टार कपल की 39 साल पुरानी शादी में गंभीर खटपट चल रही है और दोनों जल्द ही तलाक लेकर अलग होने वाले हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में तो यहां तक दावा कर दिया गया कि सुनीता आहूजा ने इशारों-इशारों में पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को लेकर शक जाहिर किया है। इन लगातार बढ़ती और परेशान करने वाली अटकलों के बीच अब गोविंदा की बेटी टीना आहूजा ने सामने आकर इस पूरे विवाद का सच उजागर किया है।

    एक प्रमुख मीडिया संस्थान से विशेष बातचीत के दौरान टीना आहूजा ने माता-पिता के रिश्ते और उनके तलाक को लेकर चल रही खबरों पर खुलकर अपनी बात रखी। टीना ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि वे इस तरह की मनगढ़ंत कहानियां अपने बचपन के दिनों से देखती आ रही हैं। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में हर दशक में किसी न किसी सेलिब्रिटी को लेकर एक नई और झूठी कहानी गढ़ दी जाती है, जिसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता।

    अपनी बात आगे बढ़ाते हुए टीना ने कहा कि पहले के समय में इस तरह की गॉसिप और भ्रामक खबरें केवल फिल्मी पत्रिकाओं और मैगजीन्स में छपती थीं। इसके बाद जब इंटरनेट का दौर आया, तो यह खबरें वेबसाइट्स पर दिखने लगीं और अब वर्तमान समय में इंस्टाग्राम तथा यूट्यूब जैसे डिजिटल माध्यमों पर व्यूज बटोरने के लिए ऐसी अफवाहों को परोसा जा रहा है। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि आखिरकार वे भी एक इंसान हैं और जब कोई उनके परिवार के बारे में इस तरह की आधारहीन और खींची हुई बातें लिखता है, तो वे अंदर से बेहद परेशान हो जाती हैं।

    टीना आहूजा ने कड़े शब्दों में कहा कि आज के डिजिटल युग में केवल ‘क्लिकबेट’ यानी लोगों का ध्यान खींचने और लाइक्स-व्यूज कमाने के लिए ऐसी झूठी खबरें जानबूझकर क्रिएट की जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोई संत नहीं हैं कि उन्हें इन नकारात्मक बातों से फर्क न पड़े, निश्चित रूप से ऐसी झूठी खबरें उन्हें और उनके परिवार को प्रभावित करती हैं। हालांकि, फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होने के नाते समय के साथ उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाना सीख लिया है।

    पारिवारिक रिश्तों की मजबूती पर भरोसा जताते हुए टीना ने कहा कि जब आपको अपने घर और माता-पिता का असली सच पता होता है, तो ऐसी फालतू की बातों पर प्रतिक्रिया न देना ही सबसे बेहतर विकल्प होता है। उन्होंने साफ कर दिया कि गोविंदा और सुनीता के बीच सब कुछ पूरी तरह ठीक है और उनके अलग होने की बातें महज एक कोरी कल्पना हैं। गौरतलब है कि टीना आहूजा इन दिनों अपने प्रोफेशनल वर्कफ्रंट को लेकर भी चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी मां सुनीता आहूजा के साथ टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा है, जहां वे जीटीवी के नए रियलिटी शो ‘मां है ना’ में नजर आ रही हैं, जिसे अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी द्वारा होस्ट किया जा रहा है।

  • पीओके में बढ़ा असंतोष: पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग तेज

    पीओके में बढ़ा असंतोष: पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग तेज


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी अशांति और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। हाल के दिनों में वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई, गिरफ्तारियों और कथित मौतों को लेकर पाकिस्तान सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियां आलोचनाओं के घेरे में हैं। खास बात यह है कि इस बार आवाज केवल स्थानीय स्तर से नहीं, बल्कि उन कश्मीरी समूहों की ओर से भी उठ रही है जो लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर अलग रुख रखते आए हैं।

    कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन के अध्यक्ष डॉ. मुबीन शाह ने पीओके की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन ने लोगों की आवाज सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया है, जिससे क्षेत्र में असंतोष और बढ़ा है। उनका कहना है कि पीओके में हो रही घटनाओं ने नियंत्रण रेखा के दोनों ओर रहने वाले कश्मीरियों को झकझोर दिया है।

    डॉ. शाह ने कहा कि कश्मीरी समाज के लिए यह क्षेत्र केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में वहां आम नागरिकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई ने लोगों के मन में गहरी नाराजगी पैदा की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय लोगों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

    पीओके में चल रहे आंदोलन को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का समर्थन प्राप्त है। इस आंदोलन के समर्थन में कई प्रवासी कश्मीरी संगठनों ने पाकिस्तान सरकार के सामने 12 सूत्रीय मांग पत्र भी रखा है। इसमें प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग रोकने, गिरफ्तार लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने और हिंसा तथा मौतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग शामिल है। संगठनों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है तथा नागरिकों की आवाज को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए।

    कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन, जो दुनिया के कई देशों में सक्रिय कश्मीरी संगठनों का संयुक्त मंच है, ने भी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है। संगठन का मानना है कि पीओके में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े सवालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की है कि घटनाओं की स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।

    विश्लेषकों का मानना है कि पीओके में उभर रहा यह असंतोष केवल स्थानीय आर्थिक समस्याओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक नीतियों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नागरिक अधिकारों से जुड़े व्यापक मुद्दों का रूप लेता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में पाकिस्तान सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है, इस पर क्षेत्र की राजनीतिक दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • मिरोस्लाव क्लोस के सर्वकालिक महान रिकॉर्ड की मेसी ने की बराबरी, केन्सास सिटी में अर्जेंटीना की धमाकेदार जीत के साथ फुटबॉल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज

    मिरोस्लाव क्लोस के सर्वकालिक महान रिकॉर्ड की मेसी ने की बराबरी, केन्सास सिटी में अर्जेंटीना की धमाकेदार जीत के साथ फुटबॉल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज

    नई दिल्ली । वैश्विक फुटबॉल के महाकुंभ फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने एक नया और अभूतपूर्व इतिहास रच दिया है। अमेरिका के केन्सास सिटी में अल्जीरिया के खिलाफ खेले गए एक बेहद रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना के कप्तान ने अपने जादुई खेल का प्रदर्शन करते हुए शानदार हैट्रिक जमाई। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के दम पर अर्जेंटीना ने मुकाबले में 3-0 की एकतरफा और मजबूत बढ़त हासिल की। इसके साथ ही 37 वर्षीय दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी के नाम अब फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में कुल 16 गोल दर्ज हो गए हैं, जो खेल जगत के सबसे बड़े मंच पर एक महारिकॉर्ड के रूप में स्थापित हो गया है।

    इस शानदार और अविस्मरणीय हैट्रिक के साथ ही लियोनेल मेसी ने जर्मनी के पूर्व दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोस के उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है, जो लंबे समय से अटूट माना जा रहा था। क्लोस ने साल 2002 से 2014 के बीच चार विश्व कप संस्करणों के कुल 24 मैचों में 16 गोल दागे थे। अब मेसी और क्लोस संयुक्त रूप से फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इस सूची में ब्राजील के महान खिलाड़ी रोनाल्डो 15 गोल के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि जर्मनी के गेर्ड मुलर और फ्रांस के युवा स्टार किलियन एमबाप्पे 14-14 गोल के साथ क्रमशः अगले पायदानों पर काबिज हैं।

    यह मेसी के लंबे और सुनहरे अंतरराष्ट्रीय करियर का एक अनूठा मोड़ है, क्योंकि उनके पांच विश्व कप संस्करणों के सफर में यह पहली बार है जब उन्होंने विश्व कप के किसी एकल मैच में हैट्रिक लगाई है। इसके साथ ही मेसी दुनिया के उन चुनिंदा खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं जिन्होंने पांच अलग-अलग विश्व कप टूर्नामेंटों में गोल करने का गौरव हासिल किया है। इस मामले में उन्होंने पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो के रिकॉर्ड की बराबरी की है। मैच के दौरान मेसी का दबदबा इस कदर था कि विरोधी टीम के गोलकीपर लुका जिदान उनके प्रहारों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए।

    मैच में मेसी के गोल करने का सिलसिला एक बेहद सटीक और पावरफुल शॉट के साथ शुरू हुआ, जिसे रोकने में विपक्षी गोलकीपर नाकाम रहे। इसके बाद दूसरा गोल तब देखने को मिला जब एलेक्सिस मैक एलिस्टर के एक जोरदार शॉट को अल्जीरियाई गोलकीपर नियंत्रित नहीं कर सके और रिबाउंड पर मुस्तैद खड़े मेसी ने गेंद को जाल में धकेलने में कोई चूक नहीं की। हैट्रिक को पूरा करने वाला तीसरा गोल पूरी तरह से मेसी के पारंपरिक और सिग्नेचर स्टाइल का नमूना था। पेनल्टी एरिया के कोने पर निको गोंजालेज से मिले पास को इंटर मियामी के इस स्टार खिलाड़ी ने अपने बाएं पैर के बाहरी हिस्से से नियंत्रित किया और बॉक्स के बाहर से एक ऐसा घुमावदार शॉट लगाया कि गेंद सीधे गोलपोस्ट के निचले बाएं कोने में समा गई।

    इस शानदार प्रदर्शन के बाद जब मैच के 79वें मिनट में कोच ने रणनीति के तहत लियोनेल मेसी को मैदान से बाहर बुलाने का निर्णय लिया, तो स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर करतल ध्वनि से अपने चहेते खिलाड़ी का अभिवादन किया। साल 2006 में अपने विश्व कप सफर की शुरुआत करने वाले मेसी अब तक इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 27 मैच खेलने वाले खिलाड़ी भी बन चुके हैं। अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में जन्मे और बचपन से ही फुटबॉल को अपनी जिंदगी मानने वाले मेसी अब इतिहास का इकलौता सबसे सफल विश्व कप फुटबॉलर बनने के वैश्विक रिकॉर्ड से महज एक गोल दूर हैं। आने वाले मैचों में एक और गोल करते ही वे क्लोस को पीछे छोड़कर फुटबॉल के स्वर्णिम इतिहास में अकेले शीर्ष पर विराजमान हो जाएंगे।

  • शिव कृपा की प्राप्ति के लिए विरला संयोग है पंचमुखी बेलपत्र, घर की नकारात्मकता दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए ज्योतिष में बताए गए अचूक उपा

    शिव कृपा की प्राप्ति के लिए विरला संयोग है पंचमुखी बेलपत्र, घर की नकारात्मकता दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए ज्योतिष में बताए गए अचूक उपा

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म और सनातन पूजा पद्धति में देवों के देव महादेव की आराधना का विशेष महत्व है। भगवान शिव की पूजा में आमतौर पर तीन पत्तियों वाले सामान्य बेलपत्र का उपयोग किया जाता है, जो हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, तीन पत्तियों वाला बेलपत्र त्रिगुणों और त्रिनेत्र का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इन सबके बीच पांच पत्तियों वाले यानी पंचमुखी बेलपत्र का मिलना एक अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी संयोग माना जाता है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि पंचमुखी बेलपत्र में साक्षात भगवान शिव का वास होता है और जिस व्यक्ति को यह विरला बेलपत्र प्राप्त होता है, उस पर भोलेनाथ की असीम और विशेष अनुकंपा होती है।

    मध्य प्रदेश। शिव पुराण और प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार, पंचमुखी बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करना अमोघ फलदायी माना गया है। यदि कोई भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दुर्लभ बेलपत्र को महादेव के चरणों में या शिवलिंग पर अर्पित करता है, तो उसके जीवन से सभी प्रकार की परेशानियां, मानसिक तनाव और दरिद्रता का परित्याग हो जाता है। जिस प्रकार आध्यात्मिक जगत में एकमुखी रुद्राक्ष को मिलना सबसे कठिन और दुर्लभ माना जाता है, ठीक उसी प्रकार पांच, सात या ग्यारह पत्तियों वाले बेलपत्र का मिलना भी प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार है। इसी दुर्लभता का फायदा उठाकर कई बार बाजार में स्वार्थी तत्वों द्वारा नकली बेलपत्र भी बेचे जाते हैं, जिससे भक्तों को सावधान रहने की आवश्यकता है।

    प्राकृतिक और असली पंचमुखी बेलपत्र की पहचान करना बेहद सरल है, बशर्ते इसके नियमों की सही जानकारी हो। असली पंचमुखी बेलपत्र की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसके पांचों पत्ते एक ही प्राकृतिक डंठल से आपस में जुड़े होते हैं। इन्हें अलग से किसी गोंद, केमिकल या धागे की सहायता से नहीं जोड़ा जाता है। बनावट के लिहाज से इसमें सबसे ऊपर का मध्य पत्ता आकार में थोड़ा बड़ा होता है और उसके दोनों किनारों पर दो-दो छोटे पत्ते समानांतर रूप से जुड़े होते हैं। पहचान का एक और मुख्य बिंदु यह है कि इन पांचों पत्तियों की प्राकृतिक जाली, शिराएं और गहरा हरा रंग पूरी तरह से एक समान होता है, जिसमें कोई कृत्रिम अंतर दिखाई नहीं देता है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचमुखी बेलपत्र के कई चमत्कारी और अचूक उपायों का वर्णन किया गया है, जो मानव जीवन की दिशा बदल सकते हैं। यदि कोई परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो, व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो या नौकरी में पदोन्नति की बाधाएं समाप्त नहीं हो रही हों, तो उन्हें पंचमुखी बेलपत्र का उपाय अवश्य करना चाहिए। इसके लिए जातक को पूरी श्रद्धा के साथ इस दिव्य बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए और पूजा संपन्न होने के बाद इसे आशीर्वाद स्वरूप घर लाकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर पवित्रता से रख देना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धीरे-धीरे धन की आवक बढ़ती है और तंगी दूर होती है।

    इसके अतिरिक्त, घर की नकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक कलह को शांत करने में भी यह बेलपत्र बेहद प्रभावी माना जाता है। इसके निवारण के लिए शिवलिंग पर चढ़ाए गए पंचमुखी बेलपत्र को घर लाकर अपने पूजा स्थल या मंदिर में स्थापित करना चाहिए। श्रद्धालु चाहें तो इसे भगवान शिव और माता पार्वती के चित्र या प्रतिमा के समीप एक सुंदर फ्रेम में मढ़वाकर भी रख सकते हैं। प्रतिदिन इस पंचमुखी बेलपत्र की नियमित पूजा-आरती करने से घर के भीतर मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।