Author: bharati

  • इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा

    इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा


    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार विस्तार से अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओडिशा के संबलपुर से भाजपा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे के फैसले और युवा पीढ़ी को लेकर अपनी सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि जेन जी उनके लिए अपने बच्चों की तरह हैं और कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के बच्चों का भविष्य और उनकी सुरक्षा है।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे देश में पैदा हुए हैं और इन बच्चों की अपनी आकांक्षाएं हैं। उनके मुताबिक यही युवा आने वाले समय में भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा। नीट विवाद के बीच उन्होंने देश और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया।

    प्रधान ने इससे पहले भी अपने इस्तीफे को लेकर यही तर्क दिया था। उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई की घटना को देखते हुए और बच्चों तथा देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उनका आरोप रहा कि जेन जी के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई। अब भुवनेश्वर में छात्रों और शिक्षकों के बीच दिए गए संबोधन में उन्होंने एक बार फिर अपने इसी रुख को दोहराया।

    हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर विवाद के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान को अपने गृह राज्य ओडिशा में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीजू जनता दल के कार्यकर्ता उनके कई कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रायराखोल में एक कार्यक्रम के दौरान भी प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। विरोध के बीच प्रधान ने कहा कि वह इस तरह की नारेबाजी से परेशान नहीं हैं। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा तब भी वह वापस नहीं जाएंगे बल्कि लौटकर आएंगे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक युवाओं को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि नवीन बाबू उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा व्यक्ति बताते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है जिससे राज्य के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी हो।

    प्रधान ने कहा कि संभव है कि वह राज्य के लिए सम्मान न ला पा रहे हों लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी भी ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। इस दौरान सभा में मौजूद लोगों ने उनके सवाल के जवाब में समर्थन जताया। कार्यक्रम में बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा के उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे।

    धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्र नीट से जुड़े विवादों को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर प्रधान अपने फैसले को युवाओं और देश की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि पद छोड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और ओडिशा की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके बयान से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में नीट विवाद के साथ ओडिशा की राजनीतिक लड़ाई में भी उनका मुद्दा प्रमुख बना रह सकता है।

  • मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    नई दिल्ली ।ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, राहु ग्रह ने मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है। ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र को धन, पद, प्रतिष्ठा, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना गया है, जबकि राहु को अचानक शुभ या अशुभ परिणाम देने वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। राहु के इस नक्षत्र परिवर्तन से राशि चक्र की तीन विशेष राशियों मेष, सिंह और कन्या को साल के अंत तक जबरदस्त आर्थिक लाभ और करियर में प्रगति मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए राहु का यह गोचर बेहद अनुकूल रहने की संभावना है। मेष राशि का स्वामी ग्रह स्वयं मंगल है और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामित्व भी मंगल के ही पास है। इस शुभ संयोग के प्रभाव से मेष राशि के जातकों के आत्मविश्वास में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी। लंबे समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और सफलतापूर्वक पूरे होंगे। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को भी अच्छा वित्तीय मुनाफा होने की संभावना है। हालांकि, ज्योतिषविदों ने किसी भी बड़े निर्णय को जल्दबाजी में न लेने की सलाह दी है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए भी राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यधिक शुभ एवं लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इस दौरान जातकों की कई पुरानी इच्छाएं पूरी होने के योग बन रहे हैं। आय के नए स्रोत विकसित होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। अचल संपत्ति या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। अचानक किसी बड़े वित्तीय लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी क्षेत्र या प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को पदोन्नति और उच्च पद मिलने के प्रबल संकेत हैं।

    कन्या राशि के लोगों के लिए राहु का मंगल के नक्षत्र में जाना करियर और व्यापार में नए अवसर लेकर आएगा। नौकरीपेशा लोगों को मनपसंद स्थान या विभाग में काम करने का मौका मिल सकता है। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या नौकरी छोड़कर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बेहद अनुकूल रहेगा। अतिरिक्त आय के साधन बनने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी। कुल मिलाकर यह अवधि तीनों राशियों के जातकों के लिए प्रगतिशील और लाभदायक सिद्ध होगी।

  • ईरान और ओमान समुद्री मार्ग समझौते के करीब, अमेरिका के सामने तेहरान ने रखीं कड़ी शर्तें

    ईरान और ओमान समुद्री मार्ग समझौते के करीब, अमेरिका के सामने तेहरान ने रखीं कड़ी शर्तें


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में जारी रणनीतिक और कूटनीतिक तनाव के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। ईरानी सैन्य प्रतिष्ठान ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की प्रक्रिया पूरी तरह से अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तों को स्वीकार करने पर निर्भर करेगी। जब तक अमेरिका ईरान की सभी मांगों और शर्तों को पूरी तरह से नहीं मान लेता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही बहाल नहीं की जाएगी।

    आईआरजीसी के आधिकारिक प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को खोलने के लिए कुछ विशेष व्यवस्थाएं और कड़ी शर्तें तय की गई हैं। उन्होंने कहा कि यह मार्ग तभी खोला जाएगा जब अमेरिकी प्रशासन क्षेत्रीय बातचीत और मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप पूरी तरह बंद करेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन के समक्ष रखी गई शर्तें ओमान के साथ चल रही कूटनीतिक वार्ताओं से अलग हैं।

    दूसरी तरफ, कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर नए प्रोटोकॉल पर सहमति बनती दिख रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि दोनों देश एक व्यावहारिक और नई जहाजरानी व्यवस्था पर समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जलमार्ग को पूर्ण रूप से चालू करने से पहले अमेरिका से जुड़े कुछ आर्थिक और तकनीकी मुद्दों का समाधान होना बाकी है।

    ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाघेर ज़ोलघद्र ने अमेरिका के समक्ष रखी गई शर्तों की विस्तृत रूपरेखा साझा की है। ईरान की प्रमुख मांगों में उसके खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य धमकियों और कार्रवाइयों को तुरंत रोकना, फारस की खाड़ी क्षेत्र में नाकाबंदी में शामिल नौसैनिक और वायुसैनिक बलों की वापसी, संघर्ष के दौरान हुए वित्तीय और ढांचागत नुकसान का उचित मुआवजा देना, आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना और विदेश में जब्त की गई ईरानी परिसंपत्तियों को तत्काल जारी करना शामिल है।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां कूटनीतिक समझौते के लिए सबसे उपयुक्त अवसर प्रस्तुत करती हैं। हालांकि, उन्होंने दृढ़ता से दोहराया कि तेहरान अपने नागरिकों के अधिकारों और राष्ट्रीय स्वाभिमान से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा। उन्होंने देश की आंतरिक क्षमताओं और जनता के भरोसे को प्राथमिकता देने की बात कही।

    इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में यमन के मारिब शहर से भी हिंसा की खबरें सामने आई हैं। यमनी सशस्त्र बलों ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर आवासीय इलाकों और विस्थापित लोगों के शिविरों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है। इन हमलों में दो लोगों की मौत हुई है और चौदह अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यमनी सैन्य नेतृत्व ने उचित समय और स्थान पर इन हमलों का कड़ा जवाब देने की घोषणा की है।

  • मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का निवासी एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़का अभिनय क्षेत्र में अपना करियर बनाने और एक प्रसिद्ध टेलीविजन धारावाहिक में काम करने की चाहत में बिना बताए घर से निकलकर मुंबई पहुंच गया। लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचे इस किशोर को मुंबई की गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी परिसर में पुलिस की सतर्कता से सकुशल बरामद कर लिया गया है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, आरे पुलिस स्टेशन की गश्ती टीम को गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी के पास एक नाबालिग अकेले घूमता हुआ दिखाई दिया। संदिग्ध स्थिति में घूम रहे लड़के को सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों ने रोककर पूछताछ की। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे आरे पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां उसने अपने घर से भागकर मुंबई आने की पूरी जानकारी पुलिस अधिकारियों के सामने साझा की।

    नाबालिग ने बताया कि वह गुरुवार दोपहर को अपने घर से स्कूल जाने का बहाना बनाकर निकला था, लेकिन वह स्कूल न जाकर सीधे छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन पहुंच गया। वहां से उसने ट्रेन पकड़कर पहले नागपुर का सफर किया और फिर नागपुर से कनेक्टिंग ट्रेन लेकर मुंबई के लिए रवाना हो गया। अगले दिन सुबह गोरेगांव रेलवे स्टेशन उतरने के बाद वह पैदल ही फिल्म सिटी परिसर तक पहुंच गया।

    पूछताछ में लड़के ने स्वीकार किया कि वह देश के लोकप्रिय कॉमेडी टेलीविजन धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से अत्यधिक प्रभावित था और उसमें अभिनय का अवसर प्राप्त करना चाहता था। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से अभिनय के जुनून में आए इस लड़के के संदर्भ में जब मुंबई पुलिस ने स्थानीय पुलिस और परिजनों से संपर्क किया, तो पता चला कि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा रखी थी।

    मुंबई पुलिस ने बालक के परिजनों को उसके सुरक्षित मिलने की जानकारी दे दी है। फिलहाल नाबालिग को आरे पुलिस स्टेशन में सुरक्षा और देखरेख में रखा गया है। सूचना मिलने के बाद उसके पिता छिंदवाड़ा से मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं, ताकि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर अपने पुत्र को सकुशल घर वापस ले जा सकें।

  • 83 की उम्र में भी अमिताभ बच्चन का जुनून कायम, KBC डायरेक्टर ने बताया हर एपिसोड की तैयारी का राज

    83 की उम्र में भी अमिताभ बच्चन का जुनून कायम, KBC डायरेक्टर ने बताया हर एपिसोड की तैयारी का राज


    नई दिल्ली । कौन बनेगा करोड़पति अपने 18वें सीजन के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच लौटने की तैयारी में है और इस बार भी शो की सबसे बड़ी पहचान अमिताभ बच्चन ही हैं। शो की शुरुआत से ही बिग बी इसके चेहरे रहे हैं। तीसरे सीजन को छोड़ दिया जाए तो पिछले 26 वर्षों से अमिताभ बच्चन और KBC का रिश्ता लगातार कायम है। दर्शकों को हर एपिसोड में उनका सवाल पूछने का अंदाज और कंटेस्टेंट्स के साथ उनकी बातचीत दिखाई देती है लेकिन कैमरे के पीछे बिग बी जिस तरह हर एपिसोड की तैयारी करते हैं उसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। KBC के डायरेक्टर अरुण शेषकुमार ने एक खास बातचीत में अमिताभ बच्चन की कार्यशैली और उनकी ऊर्जा से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं का खुलासा किया है।

    अरुण शेषकुमार के मुताबिक 26 साल बीत जाने के बावजूद अमिताभ बच्चन के काम करने का तरीका आज भी पहले जैसा ही है। वह शूटिंग के दिन सुबह सेट पर पहुंचते हैं और सबसे पहले स्क्रिप्ट देखते हैं। शो की शुरुआत और अंत का हिस्सा स्क्रिप्टेड होता है जबकि बाकी पूरा एपिसोड कंटेस्टेंट के साथ मौके पर होने वाली बातचीत के आधार पर आगे बढ़ता है। यही वजह है कि हर कंटेस्टेंट को समझना उनके लिए बेहद जरूरी हो जाता है।

    डायरेक्टर ने बताया कि टीम को पहले से यह पता नहीं होता कि हॉट सीट पर आखिर कौन पहुंचेगा। ऐसे में हर एपिसोड से पहले करीब 10 संभावित कंटेस्टेंट्स की प्रोफाइल और उनकी जिंदगी से जुड़ी कहानियां तैयार रखी जाती हैं। अमिताभ बच्चन इन सभी प्रोफाइल को ध्यान से पढ़ते हैं और कंटेस्टेंट्स की जिंदगी को समझने की कोशिश करते हैं। जब कोई व्यक्ति हॉट सीट पर पहुंचता है तो बिग बी उसकी कहानी और संघर्ष के मुताबिक बातचीत का अंदाज तय करते हैं। यही खूबी उन्हें सिर्फ एक टीवी होस्ट नहीं बल्कि कंटेस्टेंट्स के साथ जुड़ने वाला कलाकार बनाती है।

    अरुण शेषकुमार के मुताबिक अमिताभ बच्चन की एक और बड़ी खासियत यह है कि वह सामने बैठे व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज और घबराहट को तुरंत समझ लेते हैं। अगर कोई कंटेस्टेंट तनाव में होता है या अपनी बात खुलकर नहीं रख पाता तो बिग बी पहले उसे सहज करने की कोशिश करते हैं। वह बातचीत के जरिए उसका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और फिर उसे अपनी कहानी साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं। यही कारण है कि KBC में कंटेस्टेंट और होस्ट के बीच होने वाली बातचीत कई बार बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक नजर आती है।

    अमिताभ बच्चन की भूमिका केवल शो की मेजबानी तक सीमित नहीं है। डायरेक्टर के अनुसार हर सीजन में बिग बी के सुझाव मिलते हैं और उनका योगदान शो को बेहतर बनाने में अहम रहता है। वह सिर्फ गेम से जुड़े बदलावों पर सुझाव नहीं देते बल्कि पूरे कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए अपनी राय साझा करते हैं। इतने लंबे समय से शो का हिस्सा होने के बावजूद उनका उत्साह और नएपन को लेकर नजरिया आज भी बरकरार है।

    सबसे ज्यादा चर्चा अमिताभ बच्चन की उम्र और उनकी ऊर्जा को लेकर होती है। अरुण शेषकुमार बताते हैं कि 83 साल की उम्र में भी सेट पर कई बार सबसे ज्यादा ऊर्जा अमिताभ बच्चन में ही दिखाई देती है। वह कहते हैं कि टीम के कई सदस्य उनसे उम्र में काफी छोटे होने के बावजूद उनकी ऊर्जा की बराबरी नहीं कर पाते। बिग बी का काम के प्रति जुनून और समर्पण पूरी टीम के लिए प्रेरणा है।

    हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए KBC की टीम शूटिंग के दौरान उनकी सेहत और आराम का विशेष ध्यान रखती है। कोशिश की जाती है कि काम के घंटे बहुत लंबे न हों और उन्हें पर्याप्त ब्रेक मिलता रहे। सेट पर उनकी सुविधा और आराम का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसके बावजूद कैमरा ऑन होते ही उनकी ऊर्जा और पेशेवर अंदाज ऐसा दिखाई देता है कि उनकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि 26 साल बाद भी अमिताभ बच्चन KBC की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं।

  • दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    नई दिल्ली । विश्व फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी और अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी का 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में लंबी बीमारी से जूझने के बाद अंतिम सांस ली। खेल जगत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से शनिवार को उनके निधन की दुखद खबर सामने आई।

    जॉर्ज मेसी का अपने बेटे लियोनेल मेसी के जीवन और पेशेवर करियर में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे केवल एक पिता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने वर्षों तक मेसी के आधिकारिक एजेंट के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। मेसी के बचपन से लेकर पेशेवर फुटबॉल में वैश्विक पहचान बनाने और करियर से जुड़े बड़े फैसलों को आकार देने में उनकी मुख्य भूमिका मानी जाती है।

    बीते जून महीने में जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य को लेकर विभिन्न प्रकार की खबरें सामने आने लगी थीं, जिसके बाद मेसी परिवार को सार्वजनिक रूप से एक बयान जारी करना पड़ा था। उस समय परिवार ने पुष्टि की थी कि वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं और चिकित्सकों की सख्त देखरेख में इलाज करा रहे हैं। परिवार ने उस वक्त लोगों और मीडिया से निजता का सम्मान करने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की थी।

    पिता की गंभीर स्थिति का प्रभाव लियोनेल मेसी की खेल गतिविधियों पर भी देखा गया था। एक महत्वपूर्ण मैच के दौरान गोल करने के बाद वे काफी भावुक नजर आए थे और उन्होंने स्वीकार किया था कि व्यक्तिगत जीवन में उनके लिए समय कठिन चल रहा है। इसके अलावा, हाल ही में आयोजित एक प्रमुख प्रदर्शनी मैच से भी उन्होंने दूरी बनाई थी, जिसे उनके पिता के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया था।

    उल्लेखनीय है कि लियोनेल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना की टीम ने वर्ष 2022 में कतर में आयोजित फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। इसके अलावा हालिया दौर में भी उनकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं के फाइनल तक का सफर तय किया है। पिता के निधन की खबर से वैश्विक फुटबॉल समुदाय और मेसी के प्रशंसकों में शोक की लहर व्याप्त है।

  • मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी

    मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी


    नई दिल्ली। मोटापा आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है और इसके कारण डायबिटीज दिल की बीमारी फैटी लिवर नींद के दौरान सांस रुकने जैसी कई गंभीर परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए पिछले कुछ समय में GLP-1 दवाओं की चर्चा तेजी से बढ़ी है। इन दवाओं ने मोटापे के इलाज में एक नया विकल्प जरूर दिया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वजन घटाने वाली सर्जरी की जरूरत पूरी तरह खत्म हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक हर व्यक्ति के लिए मोटापे का इलाज अलग हो सकता है और इसका फैसला उसकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर किया जाना चाहिए।

    GLP-1 दवाएं शरीर में भूख और खाने की इच्छा को नियंत्रित करने वाले तंत्र पर असर डालती हैं। इनसे कुछ लोगों को कम खाने और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करने में मदद मिल सकती है। इसके कारण वजन कम करने में सहायता मिलती है। यही वजह है कि जो लोग वजन घटाने की सर्जरी से बचना चाहते हैं उनके लिए GLP-1 दवाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई हैं। हालांकि इन दवाओं को किसी आसान या जादुई तरीके के रूप में देखना सही नहीं है।

    मोटापे के इलाज में केवल वजन कम करना ही लक्ष्य नहीं होता बल्कि व्यक्ति की पूरी सेहत में सुधार करना भी जरूरी होता है। अगर किसी व्यक्ति को गंभीर मोटापे के साथ टाइप 2 डायबिटीज दिल से जुड़ी समस्या फैटी लिवर या स्लीप एपनिया जैसी बीमारी है तो डॉक्टर इलाज के दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में वजन घटाने की सर्जरी अब भी प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि GLP-1 दवाओं के आने के बाद सर्जरी की जरूरत खत्म हो गई है।

    GLP-1 दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दवा शुरू करने से पहले व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री वजन बढ़ने के कारण दूसरी बीमारियों और इस्तेमाल की जा रही दवाओं की जानकारी लेना जरूरी होता है। दवा की मात्रा और उपचार की अवधि भी डॉक्टर ही तय करते हैं। कुछ लोगों में दवा से पाचन संबंधी परेशानी सहित अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं इसलिए नियमित चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।

    वजन कम करने के दौरान खानपान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रहती है। GLP-1 दवाओं से भूख कम हो सकती है लेकिन शरीर को पर्याप्त प्रोटीन फाइबर विटामिन खनिज और पानी मिलना जरूरी है। केवल कम खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि पौष्टिक भोजन लेना भी जरूरी है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि अच्छी नींद और तनाव को नियंत्रित करना वजन को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।


    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।

    कुल मिलाकर GLP-1 दवाओं ने मोटापे के इलाज के क्षेत्र में नई संभावनाएं जरूर खोली हैं लेकिन हर मरीज के लिए यही सबसे अच्छा विकल्प हो ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को दवाओं से अच्छा लाभ मिल सकता है जबकि गंभीर मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों में सर्जरी की भूमिका बनी रह सकती है। इसलिए वजन घटाने के लिए किसी भी दवा या सर्जरी का फैसला खुद से लेने के बजाय योग्य डॉक्टर से पूरी जांच और सलाह के बाद ही करना चाहिए। सही इलाज के साथ संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनाना ही लंबे समय तक स्वस्थ वजन बनाए रखने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • चेहरे की चमक खो गई है तो बदलें अपनी डेली रूटीन, त्वचा की देखभाल के ये तरीके आएंगे काम

    चेहरे की चमक खो गई है तो बदलें अपनी डेली रूटीन, त्वचा की देखभाल के ये तरीके आएंगे काम


    नई दिल्ली। खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा हर किसी की चाहत होती है लेकिन बदलता मौसम धूल मिट्टी प्रदूषण तनाव और अनियमित दिनचर्या त्वचा की प्राकृतिक चमक को प्रभावित कर सकते हैं। कई बार लोग चेहरे पर चमक लाने के लिए तरह तरह के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन त्वचा की सही देखभाल के लिए महंगे उत्पादों से ज्यादा जरूरी एक अच्छी और नियमित स्किन केयर रूटीन है। अगर त्वचा को पर्याप्त नमी मिले और उसे धूप प्रदूषण तथा गंदगी से बचाया जाए तो लंबे समय तक त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    स्किन केयर की शुरुआत चेहरे की सफाई से करनी चाहिए। दिनभर त्वचा पर धूल मिट्टी पसीना और प्रदूषण जमा हो सकता है। इसलिए सुबह और रात चेहरे को अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार उपयुक्त क्लींजर से साफ करना जरूरी है। बहुत ज्यादा बार चेहरा धोने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है और रूखापन बढ़ सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को खासतौर पर तेज खुशबू या कठोर सामग्री वाले उत्पादों के इस्तेमाल से सावधानी बरतनी चाहिए।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल भी बेहद जरूरी माना जाता है। तैलीय त्वचा वाले लोगों को हल्के और नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर का चुनाव करना चाहिए जबकि रूखी त्वचा के लिए थोड़ा अधिक हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है। नियमित मॉइस्चराइजिंग त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करती है और त्वचा को मुलायम महसूस करा सकती है।

    धूप से त्वचा की सुरक्षा भी स्किन केयर का अहम हिस्सा है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा पर टैनिंग और समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बाहर निकलने से पहले ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। लंबे समय तक धूप में रहने की स्थिति में सनस्क्रीन को दोबारा लगाने की जरूरत पड़ सकती है। इसके साथ छाता या टोपी जैसी चीजों की मदद से भी धूप से बचाव किया जा सकता है।

    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहर से इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना पौष्टिक भोजन लेना और पर्याप्त नींद लेना भी त्वचा के लिए महत्वपूर्ण है। डाइट में मौसमी फल हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें बीज और नट्स जैसी पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।


    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहर से इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना पौष्टिक भोजन लेना और पर्याप्त नींद लेना भी त्वचा के लिए महत्वपूर्ण है। डाइट में मौसमी फल हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें बीज और नट्स जैसी पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।

    तनाव और नींद की कमी का असर भी चेहरे पर दिखाई दे सकता है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने और तनाव को कम करने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित व्यायाम भी शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे या नए स्किन केयर प्रोडक्ट को चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना समझदारी है।

    अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे खुजली लालिमा दाने अत्यधिक रूखापन या किसी अन्य तरह की समस्या बनी रहती है तो खुद से उपचार करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। सही त्वचा प्रकार की पहचान और जरूरत के अनुसार उत्पादों का इस्तेमाल ही बेहतर स्किन केयर की कुंजी है। नियमित सफाई मॉइस्चराइजिंग धूप से बचाव पौष्टिक आहार और अच्छी नींद को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से निखरा हुआ रखने में मदद मिल सकती है।
  • पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती

    पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती


    नई दिल्ली । पंजाब की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने अपनी रणनीति का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। अब तक पंथक मुद्दों के जरिए सिख मतदाताओं तक पहुंच बनाने वाली आम आदमी पार्टी हिंदू मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है। इसी रणनीति के तहत भगवान श्रीराम पर आधारित हमारे राम नाटक के मंचन और भगवान शिव को समर्पित भजन संध्याओं का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 7 अगस्त को मोहाली से हमारे राम के मंचन की शुरुआत की। इसके बाद प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इसके आयोजन की तैयारी है। इसे पंजाब की बदलती राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की यह पहल केवल भगवान श्रीराम तक सीमित नहीं है। इससे पहले भगवान शिव के नाम पर एक शाम शिव के नाम भजन संध्या कार्यक्रम की शुरुआत भी की जा चुकी है। इन आयोजनों को पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने की योजना है। बताया गया है कि राज्य के 22 शहरों में शिव भजन संध्याओं का आयोजन किया जाएगा। वहीं हमारे राम के कुल 41 मंचन किए जाने की तैयारी है। पंजाब कैबिनेट ने इसी साल जनवरी में हमारे राम के 40 शो कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई। इस नाटक में अभिनेता आशुतोष राणा रावण की भूमिका निभा रहे हैं।

    राजनीतिक नजरिए से देखें तो पंजाब में आम आदमी पार्टी की यह रणनीति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में हिंदू मतदाताओं की आबादी करीब 39 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है और कई शहरी व सीमावर्ती क्षेत्रों में उनका चुनावी प्रभाव काफी अहम है। पठानकोट, होशियारपुर, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, फाजिल्का और मोहाली जैसे क्षेत्रों में हिंदू मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है। ऐसे में आम आदमी पार्टी का धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए इन इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास राजनीतिक तौर पर खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पंजाब की राजनीति में हिंदू वोटरों को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत आधार माना जाता रहा है। हाल के चुनावों में भी भाजपा ने हिंदू बहुल और शहरी इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 18.6 प्रतिशत पहुंचा था। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर और रोपड़ जैसे कंडी बेल्ट के क्षेत्रों में भी भाजपा का प्रभाव देखने को मिला। ऐसे में आम आदमी पार्टी की ओर से राम और शिव से जुड़े कार्यक्रमों को इन इलाकों तक ले जाना चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राजनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक पंजाब में कोई भी राजनीतिक दल हिंदू मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी अब पंथक राजनीति के साथ हिंदू मतदाताओं तक भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि पार्टी इन आयोजनों को सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने की पहल के तौर पर पेश कर रही है। आयोजकों के अनुसार हमारे राम के मंचन के जरिए भगवान श्रीराम के सत्य, धर्म, दया और सद्भावना के आदर्शों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की रणनीति में आगे भी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भूमिका बढ़ती दिखाई दे रही है। भगवान शिव के नाम पर होने वाली भजन संध्याओं के अलावा अगले साल फरवरी तक संत श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर भी विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इससे साफ है कि पार्टी पंजाब के अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

    अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी की यह रणनीति चुनावी राजनीति में कितना असर डालती है। एक तरफ भाजपा हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रहेगी तो दूसरी ओर आप पंथक मुद्दों के साथ हिंदू वोटरों को भी साधने की कोशिश करेगी। ऐसे में पंजाब में आने वाले चुनाव से पहले हिंदू और पंथक वोटों का समीकरण किस दिशा में जाता है यह राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • IND vs SL टेस्ट में रिकॉर्ड बुक पर नजर, जडेजा-जायसवाल दे सकते हैं रोहित-कोहली को चुनौती; गिल का दबदबा कायम

    IND vs SL टेस्ट में रिकॉर्ड बुक पर नजर, जडेजा-जायसवाल दे सकते हैं रोहित-कोहली को चुनौती; गिल का दबदबा कायम


    नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज सिर्फ मुकाबले के लिहाज से ही अहम नहीं रहने वाली है बल्कि इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में रिकॉर्ड की रेस भी देखने को मिलेगी। रवींद्र जडेजा और यशस्वी जायसवाल के पास WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों की सूची में पूर्व कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा को पीछे छोड़ने का शानदार मौका है। खास बात यह है कि जडेजा इस रिकॉर्ड की रेस में विराट कोहली से महज 8 रन पीछे हैं। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में ही वह कोहली को पीछे छोड़ सकते हैं।

    भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज से पहले तीन दिन का प्रैक्टिस मैच भी खेला जा रहा है। इस मुकाबले में रवींद्र जडेजा ने अर्धशतक लगाकर अपनी शानदार फॉर्म के संकेत दे दिए हैं। दूसरी ओर यशस्वी जायसवाल इस अभ्यास मैच में कुछ खास नहीं कर सके और बिना खाता खोले आउट हो गए। भारतीय कप्तान शुभमन गिल चोट के कारण इस प्रैक्टिस मैच का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में गिल का दबदबा कायम है।

    वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के इतिहास में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज शुभमन गिल हैं। गिल ने 40 मैचों में 2843 रन बनाए हैं और इस सूची में नंबर एक पर हैं। उनके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत का नंबर आता है जिन्होंने WTC में 2780 रन बनाए हैं। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा 2716 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं जबकि विराट कोहली 2617 रन बनाकर चौथे पायदान पर हैं। रवींद्र जडेजा 2610 रन के साथ पांचवें नंबर पर मौजूद हैं।

    जडेजा के लिए यह सीरीज इसलिए खास है क्योंकि उन्हें विराट कोहली को पीछे छोड़ने के लिए सिर्फ 8 रन की जरूरत है। उनके मौजूदा 2610 रन हैं जबकि कोहली के नाम 2617 रन दर्ज हैं। यानी श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जडेजा जैसे ही 8 रन पूरे करेंगे वह WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों की सूची में विराट कोहली को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंच जाएंगे। इसके बाद उनकी नजर रोहित शर्मा के 2716 रन के आंकड़े पर होगी। जडेजा और रोहित के बीच फिलहाल 106 रन का अंतर है। अगर वह सीरीज में 107 रन या उससे ज्यादा बना लेते हैं तो रोहित शर्मा को भी पीछे छोड़ सकते हैं।

    यशस्वी जायसवाल की स्थिति भी काफी दिलचस्प है। वह अभी 2511 रन के साथ छठे स्थान पर हैं और टॉप-5 में शामिल होने से केवल 100 रन दूर हैं। पांचवें नंबर पर मौजूद जडेजा के 2610 रन हैं। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में जायसवाल के पास टॉप-5 में पहुंचने का बेहतरीन मौका है। उन्हें विराट कोहली के 2617 रन से आगे निकलने के लिए 107 रन और रोहित शर्मा के 2716 रन को पीछे छोड़ने के लिए 206 रन बनाने होंगे।

    रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब WTC की इस रन रेस में नई पीढ़ी के बल्लेबाजों के पास आगे निकलने का मौका है। जडेजा अनुभव के दम पर तेजी से ऊपर चढ़ सकते हैं जबकि जायसवाल के पास लंबा करियर और बड़े स्कोर बनाने का अवसर है। ऐसे में भारत और श्रीलंका की टेस्ट सीरीज के दौरान सिर्फ टीम के प्रदर्शन पर ही नहीं बल्कि इन खिलाड़ियों की व्यक्तिगत रिकॉर्ड रेस पर भी क्रिकेट फैंस की नजरें रहेंगी।

    फिलहाल शुभमन गिल 2843 रन के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं और ऋषभ पंत 2780 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। रोहित शर्मा, विराट कोहली और रवींद्र जडेजा के बीच भी ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है। ऐसे में आने वाली टेस्ट सीरीज भारतीय क्रिकेट के WTC इतिहास में रन बनाने वालों की सूची को काफी हद तक बदल सकती है।