Author: bharati

  • मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी

    मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी


    नई दिल्ली। मोटापा आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है और इसके कारण डायबिटीज दिल की बीमारी फैटी लिवर नींद के दौरान सांस रुकने जैसी कई गंभीर परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए पिछले कुछ समय में GLP-1 दवाओं की चर्चा तेजी से बढ़ी है। इन दवाओं ने मोटापे के इलाज में एक नया विकल्प जरूर दिया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वजन घटाने वाली सर्जरी की जरूरत पूरी तरह खत्म हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक हर व्यक्ति के लिए मोटापे का इलाज अलग हो सकता है और इसका फैसला उसकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर किया जाना चाहिए।

    GLP-1 दवाएं शरीर में भूख और खाने की इच्छा को नियंत्रित करने वाले तंत्र पर असर डालती हैं। इनसे कुछ लोगों को कम खाने और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करने में मदद मिल सकती है। इसके कारण वजन कम करने में सहायता मिलती है। यही वजह है कि जो लोग वजन घटाने की सर्जरी से बचना चाहते हैं उनके लिए GLP-1 दवाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई हैं। हालांकि इन दवाओं को किसी आसान या जादुई तरीके के रूप में देखना सही नहीं है।

    मोटापे के इलाज में केवल वजन कम करना ही लक्ष्य नहीं होता बल्कि व्यक्ति की पूरी सेहत में सुधार करना भी जरूरी होता है। अगर किसी व्यक्ति को गंभीर मोटापे के साथ टाइप 2 डायबिटीज दिल से जुड़ी समस्या फैटी लिवर या स्लीप एपनिया जैसी बीमारी है तो डॉक्टर इलाज के दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में वजन घटाने की सर्जरी अब भी प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि GLP-1 दवाओं के आने के बाद सर्जरी की जरूरत खत्म हो गई है।

    GLP-1 दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दवा शुरू करने से पहले व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री वजन बढ़ने के कारण दूसरी बीमारियों और इस्तेमाल की जा रही दवाओं की जानकारी लेना जरूरी होता है। दवा की मात्रा और उपचार की अवधि भी डॉक्टर ही तय करते हैं। कुछ लोगों में दवा से पाचन संबंधी परेशानी सहित अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं इसलिए नियमित चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।

    वजन कम करने के दौरान खानपान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रहती है। GLP-1 दवाओं से भूख कम हो सकती है लेकिन शरीर को पर्याप्त प्रोटीन फाइबर विटामिन खनिज और पानी मिलना जरूरी है। केवल कम खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि पौष्टिक भोजन लेना भी जरूरी है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि अच्छी नींद और तनाव को नियंत्रित करना वजन को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।


    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।

    कुल मिलाकर GLP-1 दवाओं ने मोटापे के इलाज के क्षेत्र में नई संभावनाएं जरूर खोली हैं लेकिन हर मरीज के लिए यही सबसे अच्छा विकल्प हो ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को दवाओं से अच्छा लाभ मिल सकता है जबकि गंभीर मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों में सर्जरी की भूमिका बनी रह सकती है। इसलिए वजन घटाने के लिए किसी भी दवा या सर्जरी का फैसला खुद से लेने के बजाय योग्य डॉक्टर से पूरी जांच और सलाह के बाद ही करना चाहिए। सही इलाज के साथ संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनाना ही लंबे समय तक स्वस्थ वजन बनाए रखने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • चेहरे की चमक खो गई है तो बदलें अपनी डेली रूटीन, त्वचा की देखभाल के ये तरीके आएंगे काम

    चेहरे की चमक खो गई है तो बदलें अपनी डेली रूटीन, त्वचा की देखभाल के ये तरीके आएंगे काम


    नई दिल्ली। खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा हर किसी की चाहत होती है लेकिन बदलता मौसम धूल मिट्टी प्रदूषण तनाव और अनियमित दिनचर्या त्वचा की प्राकृतिक चमक को प्रभावित कर सकते हैं। कई बार लोग चेहरे पर चमक लाने के लिए तरह तरह के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन त्वचा की सही देखभाल के लिए महंगे उत्पादों से ज्यादा जरूरी एक अच्छी और नियमित स्किन केयर रूटीन है। अगर त्वचा को पर्याप्त नमी मिले और उसे धूप प्रदूषण तथा गंदगी से बचाया जाए तो लंबे समय तक त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    स्किन केयर की शुरुआत चेहरे की सफाई से करनी चाहिए। दिनभर त्वचा पर धूल मिट्टी पसीना और प्रदूषण जमा हो सकता है। इसलिए सुबह और रात चेहरे को अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार उपयुक्त क्लींजर से साफ करना जरूरी है। बहुत ज्यादा बार चेहरा धोने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है और रूखापन बढ़ सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को खासतौर पर तेज खुशबू या कठोर सामग्री वाले उत्पादों के इस्तेमाल से सावधानी बरतनी चाहिए।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल भी बेहद जरूरी माना जाता है। तैलीय त्वचा वाले लोगों को हल्के और नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर का चुनाव करना चाहिए जबकि रूखी त्वचा के लिए थोड़ा अधिक हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है। नियमित मॉइस्चराइजिंग त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करती है और त्वचा को मुलायम महसूस करा सकती है।

    धूप से त्वचा की सुरक्षा भी स्किन केयर का अहम हिस्सा है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा पर टैनिंग और समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बाहर निकलने से पहले ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। लंबे समय तक धूप में रहने की स्थिति में सनस्क्रीन को दोबारा लगाने की जरूरत पड़ सकती है। इसके साथ छाता या टोपी जैसी चीजों की मदद से भी धूप से बचाव किया जा सकता है।

    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहर से इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना पौष्टिक भोजन लेना और पर्याप्त नींद लेना भी त्वचा के लिए महत्वपूर्ण है। डाइट में मौसमी फल हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें बीज और नट्स जैसी पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।


    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहर से इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना पौष्टिक भोजन लेना और पर्याप्त नींद लेना भी त्वचा के लिए महत्वपूर्ण है। डाइट में मौसमी फल हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें बीज और नट्स जैसी पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।

    तनाव और नींद की कमी का असर भी चेहरे पर दिखाई दे सकता है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने और तनाव को कम करने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित व्यायाम भी शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे या नए स्किन केयर प्रोडक्ट को चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना समझदारी है।

    अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे खुजली लालिमा दाने अत्यधिक रूखापन या किसी अन्य तरह की समस्या बनी रहती है तो खुद से उपचार करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। सही त्वचा प्रकार की पहचान और जरूरत के अनुसार उत्पादों का इस्तेमाल ही बेहतर स्किन केयर की कुंजी है। नियमित सफाई मॉइस्चराइजिंग धूप से बचाव पौष्टिक आहार और अच्छी नींद को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से निखरा हुआ रखने में मदद मिल सकती है।
  • पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती

    पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती


    नई दिल्ली । पंजाब की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने अपनी रणनीति का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। अब तक पंथक मुद्दों के जरिए सिख मतदाताओं तक पहुंच बनाने वाली आम आदमी पार्टी हिंदू मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है। इसी रणनीति के तहत भगवान श्रीराम पर आधारित हमारे राम नाटक के मंचन और भगवान शिव को समर्पित भजन संध्याओं का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 7 अगस्त को मोहाली से हमारे राम के मंचन की शुरुआत की। इसके बाद प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इसके आयोजन की तैयारी है। इसे पंजाब की बदलती राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की यह पहल केवल भगवान श्रीराम तक सीमित नहीं है। इससे पहले भगवान शिव के नाम पर एक शाम शिव के नाम भजन संध्या कार्यक्रम की शुरुआत भी की जा चुकी है। इन आयोजनों को पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने की योजना है। बताया गया है कि राज्य के 22 शहरों में शिव भजन संध्याओं का आयोजन किया जाएगा। वहीं हमारे राम के कुल 41 मंचन किए जाने की तैयारी है। पंजाब कैबिनेट ने इसी साल जनवरी में हमारे राम के 40 शो कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई। इस नाटक में अभिनेता आशुतोष राणा रावण की भूमिका निभा रहे हैं।

    राजनीतिक नजरिए से देखें तो पंजाब में आम आदमी पार्टी की यह रणनीति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में हिंदू मतदाताओं की आबादी करीब 39 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है और कई शहरी व सीमावर्ती क्षेत्रों में उनका चुनावी प्रभाव काफी अहम है। पठानकोट, होशियारपुर, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, फाजिल्का और मोहाली जैसे क्षेत्रों में हिंदू मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है। ऐसे में आम आदमी पार्टी का धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए इन इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास राजनीतिक तौर पर खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पंजाब की राजनीति में हिंदू वोटरों को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत आधार माना जाता रहा है। हाल के चुनावों में भी भाजपा ने हिंदू बहुल और शहरी इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 18.6 प्रतिशत पहुंचा था। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर और रोपड़ जैसे कंडी बेल्ट के क्षेत्रों में भी भाजपा का प्रभाव देखने को मिला। ऐसे में आम आदमी पार्टी की ओर से राम और शिव से जुड़े कार्यक्रमों को इन इलाकों तक ले जाना चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राजनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक पंजाब में कोई भी राजनीतिक दल हिंदू मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी अब पंथक राजनीति के साथ हिंदू मतदाताओं तक भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि पार्टी इन आयोजनों को सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने की पहल के तौर पर पेश कर रही है। आयोजकों के अनुसार हमारे राम के मंचन के जरिए भगवान श्रीराम के सत्य, धर्म, दया और सद्भावना के आदर्शों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की रणनीति में आगे भी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भूमिका बढ़ती दिखाई दे रही है। भगवान शिव के नाम पर होने वाली भजन संध्याओं के अलावा अगले साल फरवरी तक संत श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर भी विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इससे साफ है कि पार्टी पंजाब के अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

    अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी की यह रणनीति चुनावी राजनीति में कितना असर डालती है। एक तरफ भाजपा हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रहेगी तो दूसरी ओर आप पंथक मुद्दों के साथ हिंदू वोटरों को भी साधने की कोशिश करेगी। ऐसे में पंजाब में आने वाले चुनाव से पहले हिंदू और पंथक वोटों का समीकरण किस दिशा में जाता है यह राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • IND vs SL टेस्ट में रिकॉर्ड बुक पर नजर, जडेजा-जायसवाल दे सकते हैं रोहित-कोहली को चुनौती; गिल का दबदबा कायम

    IND vs SL टेस्ट में रिकॉर्ड बुक पर नजर, जडेजा-जायसवाल दे सकते हैं रोहित-कोहली को चुनौती; गिल का दबदबा कायम


    नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज सिर्फ मुकाबले के लिहाज से ही अहम नहीं रहने वाली है बल्कि इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में रिकॉर्ड की रेस भी देखने को मिलेगी। रवींद्र जडेजा और यशस्वी जायसवाल के पास WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों की सूची में पूर्व कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा को पीछे छोड़ने का शानदार मौका है। खास बात यह है कि जडेजा इस रिकॉर्ड की रेस में विराट कोहली से महज 8 रन पीछे हैं। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में ही वह कोहली को पीछे छोड़ सकते हैं।

    भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज से पहले तीन दिन का प्रैक्टिस मैच भी खेला जा रहा है। इस मुकाबले में रवींद्र जडेजा ने अर्धशतक लगाकर अपनी शानदार फॉर्म के संकेत दे दिए हैं। दूसरी ओर यशस्वी जायसवाल इस अभ्यास मैच में कुछ खास नहीं कर सके और बिना खाता खोले आउट हो गए। भारतीय कप्तान शुभमन गिल चोट के कारण इस प्रैक्टिस मैच का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में गिल का दबदबा कायम है।

    वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के इतिहास में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज शुभमन गिल हैं। गिल ने 40 मैचों में 2843 रन बनाए हैं और इस सूची में नंबर एक पर हैं। उनके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत का नंबर आता है जिन्होंने WTC में 2780 रन बनाए हैं। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा 2716 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं जबकि विराट कोहली 2617 रन बनाकर चौथे पायदान पर हैं। रवींद्र जडेजा 2610 रन के साथ पांचवें नंबर पर मौजूद हैं।

    जडेजा के लिए यह सीरीज इसलिए खास है क्योंकि उन्हें विराट कोहली को पीछे छोड़ने के लिए सिर्फ 8 रन की जरूरत है। उनके मौजूदा 2610 रन हैं जबकि कोहली के नाम 2617 रन दर्ज हैं। यानी श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जडेजा जैसे ही 8 रन पूरे करेंगे वह WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों की सूची में विराट कोहली को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंच जाएंगे। इसके बाद उनकी नजर रोहित शर्मा के 2716 रन के आंकड़े पर होगी। जडेजा और रोहित के बीच फिलहाल 106 रन का अंतर है। अगर वह सीरीज में 107 रन या उससे ज्यादा बना लेते हैं तो रोहित शर्मा को भी पीछे छोड़ सकते हैं।

    यशस्वी जायसवाल की स्थिति भी काफी दिलचस्प है। वह अभी 2511 रन के साथ छठे स्थान पर हैं और टॉप-5 में शामिल होने से केवल 100 रन दूर हैं। पांचवें नंबर पर मौजूद जडेजा के 2610 रन हैं। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में जायसवाल के पास टॉप-5 में पहुंचने का बेहतरीन मौका है। उन्हें विराट कोहली के 2617 रन से आगे निकलने के लिए 107 रन और रोहित शर्मा के 2716 रन को पीछे छोड़ने के लिए 206 रन बनाने होंगे।

    रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब WTC की इस रन रेस में नई पीढ़ी के बल्लेबाजों के पास आगे निकलने का मौका है। जडेजा अनुभव के दम पर तेजी से ऊपर चढ़ सकते हैं जबकि जायसवाल के पास लंबा करियर और बड़े स्कोर बनाने का अवसर है। ऐसे में भारत और श्रीलंका की टेस्ट सीरीज के दौरान सिर्फ टीम के प्रदर्शन पर ही नहीं बल्कि इन खिलाड़ियों की व्यक्तिगत रिकॉर्ड रेस पर भी क्रिकेट फैंस की नजरें रहेंगी।

    फिलहाल शुभमन गिल 2843 रन के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं और ऋषभ पंत 2780 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। रोहित शर्मा, विराट कोहली और रवींद्र जडेजा के बीच भी ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है। ऐसे में आने वाली टेस्ट सीरीज भारतीय क्रिकेट के WTC इतिहास में रन बनाने वालों की सूची को काफी हद तक बदल सकती है।

  • 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण से इन 3 राशियों पर मंडराया संकट, जानिए किसे रहना होगा सबसे ज्यादा सावधान

    12 अगस्त के सूर्य ग्रहण से इन 3 राशियों पर मंडराया संकट, जानिए किसे रहना होगा सबसे ज्यादा सावधान

    नई दिल्ली । वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण आगामी 12 अगस्त को घटित होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस खगोलीय घटना को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है। गणना के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। इस ग्रहण के प्रभाव से राशि चक्र की तीन प्रमुख राशियों सिंह, धनु और कुंभ के त्रिक भाव सक्रिय हो रहे हैं, जिसके कारण इन राशियों के जातकों को स्वास्थ्य, करियर और आर्थिक मामलों में अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    ज्योतिष शास्त्र में छठे, आठवें और बारहवें भाव को त्रिक भाव कहा जाता है, जिन्हें सामान्यतः संघर्ष, व्यय और बाधाओं का कारक माना जाता है। ग्रहण के प्रभाव से सिंह राशि के जातकों के 12वें भाव पर असर पड़ेगा, जो अनियंत्रित खर्चों और आर्थिक नुकसान का संकेत देता है। इस अवधि में सिंह राशि के लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है और पारिवारिक स्तर पर वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं। विशेष रूप से विदेश से जुड़ा व्यापार करने वालों और सेहत के प्रति लापरवाह रहने वालों को सावधान रहने की जरूरत है।

    धनु राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण आठवें भाव में घटित हो रहा है, जो अचानक आने वाली रुकावटों और संकटों से संबंधित माना जाता है। इस दौरान बने-बनाए कार्यों में अड़चनें आ सकती हैं। ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार, धनु राशि वाले इस समय किसी भी प्रकार के बड़े वित्तीय निवेश या जोखिम भरे फैसलों से बचें। यात्रा के दौरान सामान की सुरक्षा और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए ग्रहण का प्रभाव छठे भाव में देखने को मिलेगा, जिसे रोग और प्रतिस्पर्धियों का भाव माना जाता है। इस दौरान कार्यस्थल पर गुप्त शत्रुओं की सक्रियता बढ़ सकती है, जो कार्यों में रुकावट डालने का प्रयास कर सकते हैं। व्यापार से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करने और सहकर्मियों के साथ संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पेट और रक्त से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति भी सचेत रहना होगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस खगोलीय घटना के प्रभाव से बचने के लिए संबंधित राशि के जातकों को ईश्वर आराधना और नियमित मंत्र जाप करने का परामर्श दिया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस ग्रहण को लेकर धार्मिक और आध्यात्मिक तैयारियां भी की जा रही हैं।

  • स्कूल क्विज में सावरकर का जिक्र बना सियासी मुद्दा, केरल में कांग्रेस और माकपा के बीच बढ़ी तकरार

    स्कूल क्विज में सावरकर का जिक्र बना सियासी मुद्दा, केरल में कांग्रेस और माकपा के बीच बढ़ी तकरार

    नई दिल्ली । केरल में एक स्कूल क्विज प्रतियोगिता के दौरान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ा सवाल पूछे जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कासरगोड जिले के कुम्बला और मंजेश्वर क्षेत्र के तीन स्कूलों के बच्चों के बीच आयोजित फ्रीडम क्विज में सावरकर से संबंधित सवाल शामिल किए जाने पर विपक्षी दलों और वामपंथी संगठनों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। मामला बढ़ने के बाद केरल के राज्य शिक्षा मंत्री एन शमसुद्दीन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शिक्षा मंत्री के कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक सामान्य शिक्षा निदेशक को यह पता लगाने का निर्देश दिया गया है कि क्विज के सवाल किसने तैयार किए थे और कार्यक्रम का आयोजन किस स्तर पर किया गया था।

    विवाद की शुरुआत उस सवाल को लेकर हुई जिसमें पूछा गया था कि वह स्वतंत्रता सेनानी कौन हैं जिन्हें अंग्रेजों ने सबसे कठोर सजा दी थी। इस सवाल के जवाब के तौर पर सावरकर का नाम दिया गया था। स्कूल स्तर के इस क्विज में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे जा रहे थे लेकिन सावरकर से जुड़े सवाल के सामने आने के बाद मामला शिक्षा के दायरे से निकलकर सीधे राजनीति के केंद्र में पहुंच गया। विपक्षी माकपा और वामपंथी छात्र संगठनों ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए कांग्रेस सरकार पर संघ परिवार के एजेंडे के साथ खड़े होने का आरोप लगाया।

    शिक्षा मंत्री की ओर से जारी बयान में यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित क्विज सामान्य शिक्षा विभाग या समाज विज्ञान क्लब की आधिकारिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं था। बयान में कहा गया कि विभाग ने किसी व्यक्ति को इस तरह के सवाल तैयार करने या स्वतंत्र रूप से ऐसी प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए अधिकृत नहीं किया था। मंत्री ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश देते हुए यह भी कहा कि ऐतिहासिक रूप से गलत सवाल को शामिल करने वाले व्यक्ति की सोच पक्षपातपूर्ण हो सकती है। अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि क्विज तैयार करने और आयोजित करने की जिम्मेदारी किसकी थी और विवादित सवाल किस आधार पर शामिल किया गया।

    मामले ने केरल की राजनीति में भी नया विवाद खड़ा कर दिया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में संघ परिवार के विचारों को जगह देने की कोशिश की जा रही है। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन ने यूडीएफ सरकार पर आरएसएस के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सावरकर के वास्तविक इतिहास को छिपाने और उनका महिमामंडन करने की कोशिश हो रही है। विजयन ने केंद्र सरकार और संघ पर इतिहास को नए तरीके से पेश करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए इस पूरे विवाद को राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जोड़कर भी देखा।

    पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने भी इस मामले को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि क्विज में सावरकर से संबंधित सवाल शामिल करना राज्य के सामान्य शिक्षा क्षेत्र के भगवाकरण और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को विकृत करने की कोशिश का हिस्सा है। वामपंथी छात्र संगठनों ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि स्कूल स्तर की प्रतियोगिता में ऐतिहासिक तथ्यों को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है।

    फिलहाल सरकार ने जांच के आदेश देकर विवाद को शांत करने की कोशिश की है लेकिन सावरकर से जुड़ा यह सवाल केरल में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है। एक ओर माकपा इसे इतिहास और शिक्षा के भगवाकरण से जोड़ रही है तो दूसरी ओर सरकार यह पता लगाने में जुटी है कि विवादित सवाल आखिर क्विज में कैसे शामिल हुआ। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सवाल तैयार करने के पीछे जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था कौन थी और कार्यक्रम किस प्रक्रिया के तहत आयोजित किया गया था।

  • IIT दिल्ली के कार्यक्रम पर सियासी विवाद तेज, ओवैसी ने संविधान की धाराओं से जताई आपत्ति

    IIT दिल्ली के कार्यक्रम पर सियासी विवाद तेज, ओवैसी ने संविधान की धाराओं से जताई आपत्ति


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने के बाद अब कार्यक्रम से जुड़े कथित निर्देशों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में छात्रों को प्रधानमंत्री से मेडल या डिग्री लेते समय सिर झुकाने और वैदिक मंत्रोच्चार के दौरान खड़े रहने के निर्देश दिए गए थे। ओवैसी ने इन कथित निर्देशों पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान की भावना और वैज्ञानिक सोच से जुड़े प्रावधानों के विपरीत बताया है। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    ओवैसी ने कहा कि IIT दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित सरकारी तकनीकी संस्थान में छात्रों के लिए इस तरह के कथित निर्देश गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनका कहना है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार छात्रों को यह तक बताया गया था कि प्रधानमंत्री से मेडल लेते समय उन्हें किस तरह और कितनी मात्रा में गर्दन झुकानी है। इसके साथ ही वैदिक मंत्रों के पाठ के दौरान सभी छात्रों के खड़े रहने की बात भी सामने आई। ओवैसी ने कहा कि अगर इस तरह के निर्देश वास्तव में दिए गए हैं तो इन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    अपने बयान में ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लेख किया। उनका तर्क है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों को संविधान की कसौटी पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि IIT जैसे संस्थान केवल तकनीकी शिक्षा के केंद्र नहीं हैं बल्कि वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51A के वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने से जुड़े प्रावधान का भी हवाला दिया।

    ओवैसी ने प्रधानमंत्री के सामने छात्रों के कथित तरीके से अभिवादन करने के निर्देश पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी सरकारी शिक्षण संस्थान में छात्रों को इस तरह के निर्देश देना उचित नहीं है। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित का मतलब केवल सरकार का समर्थन करना नहीं है बल्कि जब किसी सरकारी फैसले या कदम को गलत माना जाए तो उसके खिलाफ आवाज उठाना भी राष्ट्रीय हित का हिस्सा हो सकता है।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में करीब 587 पीएचडी स्कॉलर्स और 3,000 से ज्यादा छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान छात्रों को उनके भविष्य और देश में नवाचार की भूमिका को लेकर संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से जिज्ञासा बनाए रखने और बड़ी चुनौतियों को छोटे हिस्सों में बांटकर उनका समाधान खोजने की बात कही।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने के साथ अपने शिक्षकों और संस्थान से जुड़े रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं की प्रतिभा और नवाचार से जुड़ा है। ऐसे में IIT दिल्ली का यह कार्यक्रम शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

    फिलहाल ओवैसी की आपत्ति मुख्य रूप से कथित प्रोटोकॉल और धार्मिक मंत्रोच्चार के दौरान दिए गए निर्देशों को लेकर है। इन निर्देशों की वास्तविक प्रकृति और उनका आधिकारिक आधार क्या था इस पर संस्थान या सरकार की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। इसलिए इस पूरे मामले में अंतिम स्थिति आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच IIT दिल्ली का दीक्षांत समारोह एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में परंपरा प्रोटोकॉल संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को लेकर बहस के केंद्र में आ गया है।

  • 'टॉक्सिक' फिल्म के धमाकेदार ट्रेलर में दिखीं संजीदा शेख, किरदार को लेकर बढ़ी उत्सुकता

    'टॉक्सिक' फिल्म के धमाकेदार ट्रेलर में दिखीं संजीदा शेख, किरदार को लेकर बढ़ी उत्सुकता

    नई दिल्ली । दक्षिण भारतीय सिनेमा के बहुचर्चित अभिनेता यश की आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर हाल ही में आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। एक्शन और थ्रिलर से भरपूर इस ट्रेलर को सोशल मीडिया पर दर्शकों और प्रशंसकों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रही हैं। हालांकि, इस भारी-भरकम एक्शन ट्रेलर के बीच टीवी और हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री संजीदा शेख की संक्षिप्त उपस्थिति ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

    गीतू मोहनदास के निर्देशन में बन रही इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में संजीदा शेख एक महत्वपूर्ण कैमियो भूमिका में नजर आने वाली हैं। ट्रेलर के विभिन्न दृश्यों के बीच उनके किरदार की बहुत छोटी झलक दिखाई गई है। फिल्म निर्माताओं की ओर से अभी तक उनके चरित्र और कहानी में उनकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया गया है, जिसके कारण दर्शकों के बीच उनके किरदार को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

    संजीदा शेख बीते कुछ वर्षों में कई बड़े और चर्चित प्रोजेक्ट्स में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर चुकी हैं। हाल के दिनों में वे ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’, ‘फाइटर’, ‘धमाल 4’ और ‘इक्का’ जैसी बड़ी फिल्मों और वेब सीरीज का हिस्सा रही हैं। संजय लीला भंसाली के पीरियड ड्रामा हीरामंडी में उनके काम को काफी सराहा गया था, वहीं फाइटर में वे ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण के साथ सहायक भूमिका में दिखाई दी थीं। इस क्रम में टॉक्सिक उनके करियर की एक और बेहद महत्वपूर्ण फिल्म मानी जा रही है।

    ट्रेलर में संजीदा के रोल को लेकर भले ही सस्पेंस बरकरार हो, लेकिन सिनेमा जगत में ऐसी चर्चाएं हैं कि वे फिल्म की कहानी में अभिनेत्री नयनतारा के चरित्र की मां की भूमिका निभाती हुई नजर आ सकती हैं। ट्रेलर को लेकर जहां सोशल मीडिया पर मिली-जुली आलोचनात्मक समीक्षाएं देखने को मिल रही हैं, वहीं संजीदा शेख की स्क्रीन प्रेजेंस और उनके आकर्षक लुक की दर्शक खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं।

    क्राइम बैकग्राउंड और डार्क शेड पर आधारित फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ अपनी उच्च स्तरीय विजुअल स्टाइल और धमाकेदार एक्शन दृश्यों के लिए जानी जा रही है। यह बहुभाषी फिल्म 26 अगस्त को दुनिया भर के सिनेमाघरों में एक साथ प्रदर्शित की जाएगी। ट्रेलर में संजीदा की संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली मौजूदगी ने फिल्म की कहानी और उनके रहस्यमयी किरदार के प्रति दर्शकों की उत्सुकता को और अधिक बढ़ा दिया है।

  • JPSC Prelims 2025 की परीक्षा पर गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग

    JPSC Prelims 2025 की परीक्षा पर गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग


    नई दिल्ली । झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हरिश्रन देवगन की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित JPSC Prelims 2025 को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया है। हालांकि अभी यह याचिकाकर्ता की मांग है और इन आरोपों पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है।

    याचिका में कहा गया है कि परीक्षा से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष तरीके से जांच होना जरूरी है ताकि अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जा सके और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने पर विचार किया जाए। इस मांग के पीछे तर्क दिया गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि हजारों अभ्यर्थी वर्षों की तैयारी के बाद ऐसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

    याचिका में प्रस्तावित स्वतंत्र जांच समिति की संरचना को लेकर भी विस्तार से मांग रखी गई है। इसके मुताबिक समिति की अध्यक्षता झारखंड से बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश से कराई जा सकती है। इसके अलावा समिति में फोरेंसिक साइंस और आईटी से जुड़े विशेषज्ञों के साथ परीक्षा सुरक्षा विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। OMR जांच और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों के अलावा पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े जानकारों को भी समिति का हिस्सा बनाए जाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित प्रत्येक पहलू की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच करना बताया गया है।

    याचिका में परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इसमें मूल OMR शीट से लेकर प्रश्न पत्र और आंसर की तक को संरक्षित रखने की बात कही गई है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों से संबंधित बायोमेट्रिक रिकॉर्ड परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज डिस्पैच रजिस्टर परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट और स्कैनिंग तथा मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक ये दस्तावेज किसी भी स्वतंत्र जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकते हैं।

    JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के रुख पर नजर रहेगी। फिलहाल परीक्षा रद्द होगी या नहीं और CBI अथवा किसी स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाएगी या नहीं इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसलिए याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

  • प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का बड़ा फैसला, मध्यरात्रि से सस्ते मिलेंगे पेट्रोल के दाम

    प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का बड़ा फैसला, मध्यरात्रि से सस्ते मिलेंगे पेट्रोल के दाम

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मजबूती को देखते हुए प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल की खुदरा कीमतों में कटौती करने का निर्णय लिया है। कंपनियों द्वारा की गई इस कटौती के तहत पेट्रोल के दामों में औसतन 56 पैसे प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई है। नई दरें मध्यरात्रि से देश भर में प्रभावी हो जाएंगी, जिससे वाहन चालकों और आम जनता को कुछ हद तक आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    कीमतों में संशोधन के बाद देश की राजधानी दिल्ली में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की नई दरें 67.90 रुपये प्रति लीटर तय की गई हैं, जो इससे पहले 68.46 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर दर्ज की जा रही थीं। देश की अन्य प्रमुख तेल विपणन कंपनियों भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा भी इसी तर्ज पर अपने खुदरा मूल्यों में संशोधन किया जाता है। स्थानीय करों और भिन्न व्यवस्थाओं के कारण अलग-अलग कंपनियों के आउटलेट पर कीमतों में एक से दो पैसे का मामूली अंतर देखा जा सकता है।

    तेल कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों और वैट की दरों के आधार पर अलग-अलग शहरों में कटौती की राशि भिन्न रखी गई है। वित्तीय राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दामों में 71 पैसे प्रति लीटर की कमी की गई है, जिसके बाद वहां नया मूल्य 74.43 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। इसी प्रकार कोलकाता में 70 पैसे प्रति लीटर की कटौती के साथ नई दर 75.44 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 71 पैसे की कमी के साथ नया दाम 71.48 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।

    उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक सुधारों के तहत पेट्रोल के मूल्य निर्धारण को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया था, जिससे तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लागत और विनिमय दर के अनुरूप कीमतें तय करने का अधिकार मिला है। इससे पहले जून माह के अंत में पेट्रोल की दरों में 70 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

    तेल विपणन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में सुधार दर्ज किया गया है, जिसके कारण आयात लागत पर आंशिक राहत मिली है। हालांकि, वैश्विक बाजार में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। कंपनियों का कहना है कि पूर्ण स्वतंत्रता मिलने के बावजूद बाजार की अनिश्चितताओं के कारण लागत के अनुपात में दरें नहीं बढ़ाई जा सकी थीं, जिससे चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनियों को संभावित राजस्व में काफी घाटे का सामना करना पड़ा है।