Author: bharati

  • प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का बड़ा फैसला, मध्यरात्रि से सस्ते मिलेंगे पेट्रोल के दाम

    प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का बड़ा फैसला, मध्यरात्रि से सस्ते मिलेंगे पेट्रोल के दाम

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मजबूती को देखते हुए प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल की खुदरा कीमतों में कटौती करने का निर्णय लिया है। कंपनियों द्वारा की गई इस कटौती के तहत पेट्रोल के दामों में औसतन 56 पैसे प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई है। नई दरें मध्यरात्रि से देश भर में प्रभावी हो जाएंगी, जिससे वाहन चालकों और आम जनता को कुछ हद तक आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    कीमतों में संशोधन के बाद देश की राजधानी दिल्ली में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की नई दरें 67.90 रुपये प्रति लीटर तय की गई हैं, जो इससे पहले 68.46 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर दर्ज की जा रही थीं। देश की अन्य प्रमुख तेल विपणन कंपनियों भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा भी इसी तर्ज पर अपने खुदरा मूल्यों में संशोधन किया जाता है। स्थानीय करों और भिन्न व्यवस्थाओं के कारण अलग-अलग कंपनियों के आउटलेट पर कीमतों में एक से दो पैसे का मामूली अंतर देखा जा सकता है।

    तेल कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों और वैट की दरों के आधार पर अलग-अलग शहरों में कटौती की राशि भिन्न रखी गई है। वित्तीय राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दामों में 71 पैसे प्रति लीटर की कमी की गई है, जिसके बाद वहां नया मूल्य 74.43 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। इसी प्रकार कोलकाता में 70 पैसे प्रति लीटर की कटौती के साथ नई दर 75.44 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 71 पैसे की कमी के साथ नया दाम 71.48 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।

    उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक सुधारों के तहत पेट्रोल के मूल्य निर्धारण को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया था, जिससे तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लागत और विनिमय दर के अनुरूप कीमतें तय करने का अधिकार मिला है। इससे पहले जून माह के अंत में पेट्रोल की दरों में 70 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

    तेल विपणन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में सुधार दर्ज किया गया है, जिसके कारण आयात लागत पर आंशिक राहत मिली है। हालांकि, वैश्विक बाजार में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। कंपनियों का कहना है कि पूर्ण स्वतंत्रता मिलने के बावजूद बाजार की अनिश्चितताओं के कारण लागत के अनुपात में दरें नहीं बढ़ाई जा सकी थीं, जिससे चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनियों को संभावित राजस्व में काफी घाटे का सामना करना पड़ा है।

  • राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों से साधा संवाद, ‘दर्द-डेटा-दौलत’ के मुद्दे पर BJP का पलटवार

    राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों से साधा संवाद, ‘दर्द-डेटा-दौलत’ के मुद्दे पर BJP का पलटवार


    नई दिल्ली । प्रयागराज में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच संवाद करते हुए बेरोजगारी पेपर लीक महंगी शिक्षा और रोजगार के घटते अवसरों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। KP ग्राउंड में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने देश के करीब 40 करोड़ युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही इस्तेमाल किया जाए तो भारत आर्थिक और सामाजिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। हालांकि उनके इस कार्यक्रम के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी पलटवार करते हुए राहुल गांधी से झारखंड के आंदोलनरत छात्रों के मुद्दे पर सवाल पूछ दिए। बीजेपी नेताओं ने कहा कि अगर राहुल गांधी वास्तव में छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें प्रयागराज के साथ रांची जाकर उन छात्रों से भी मिलना चाहिए जो प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं की समस्याओं को मुख्य रूप से दर्द डेटा और दौलत के तीन मुद्दों से जोड़कर समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवा रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना था कि लाखों रुपये खर्च करके उच्च शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार हासिल करना है। राहुल गांधी ने दावा किया कि केवल डिग्री या सर्टिफिकेट मिलने से युवा का भविष्य सुरक्षित नहीं हो जाता क्योंकि जब शिक्षा के बाद नौकरी का अवसर नहीं मिलता तो परिवारों पर आर्थिक दबाव और युवाओं में निराशा दोनों बढ़ते हैं।

    पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितताओं का मुद्दा भी राहुल गांधी के भाषण के केंद्र में रहा। उन्होंने कहा कि एक युवा कई वर्षों तक किसी सरकारी परीक्षा की तैयारी करता है लेकिन अगर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो उसकी पूरी मेहनत प्रभावित हो सकती है। उन्होंने ऐसे युवाओं के उदाहरण भी सामने रखे जो आर्थिक दबाव के बीच काम करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है क्योंकि लाखों युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है।

    राहुल गांधी ने इसके बाद डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाली अर्थव्यवस्था में युवा और डेटा मिलकर बड़ी ताकत बन सकते हैं। उनके अनुसार जिस तरह पिछली सदी में पेट्रोलियम को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण संसाधन माना गया उसी तरह डिजिटल दौर में डेटा बेहद महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत के करोड़ों नागरिक रोजाना इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं और इससे बड़ी मात्रा में डेटा तैयार होता है। राहुल ने इस डेटा से होने वाले आर्थिक लाभ और उसके स्वामित्व को लेकर भी सवाल उठाए।

    सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने रील्स और लगातार डिजिटल कंटेंट देखने की आदत को आधुनिक दौर की एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं का काफी समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बीत रहा है जबकि दूसरी तरफ सुरक्षित रोजगार और बेहतर करियर के अवसरों की तलाश जारी है। उनका तर्क था कि युवाओं की ऊर्जा को केवल डिजिटल मनोरंजन तक सीमित करने के बजाय उसे शिक्षा कौशल नवाचार और रोजगार सृजन की दिशा में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    राहुल गांधी का यह कार्यक्रम कांग्रेस के छात्रों की गूंज अभियान का हिस्सा बताया गया। इस अभियान के जरिए कांग्रेस पेपर लीक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों को युवाओं के बीच उठाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि देश के युवाओं की समस्याओं को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना जरूरी है।

    वहीं बीजेपी ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हमला तेज कर दिया। बीजेपी नेताओं ने झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि राहुल गांधी प्रयागराज में छात्रों से संवाद कर सकते हैं तो रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों से मिलने क्यों नहीं जाते। बीजेपी का कहना है कि झारखंड में कांग्रेस सरकार की सहयोगी है और वहां छात्रों की समस्याओं पर राहुल गांधी को सीधे संवाद करना चाहिए।

    राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम के बीच Gen-Z और युवा मतदाताओं को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होती दिखाई दी। पेपर लीक रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे पहले से ही युवाओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नजर युवा वर्ग पर है। प्रयागराज में राहुल गांधी का छात्रों से संवाद इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि युवाओं से जुड़े रोजगार शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे किस तरह राजनीतिक बहस को प्रभावित करते हैं और क्या Gen-Z वास्तव में आगामी चुनावी राजनीति का नया केंद्र बनता है।

  • स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज हुई इन बड़ी फिल्मों ने की ताबड़तोड़ कमाई, बदल दिए कलेक्शन के आंकड़े

    स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज हुई इन बड़ी फिल्मों ने की ताबड़तोड़ कमाई, बदल दिए कलेक्शन के आंकड़े

    नई दिल्ली ।भारतीय फिल्म उद्योग के लिए 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस का अवसर व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। देश भर में राष्ट्रीय पर्व के जश्न और लंबे सप्ताहांत की छुट्टियों का लाभ उठाने के लिए निर्माता इस खास दिन अपनी बड़ी फिल्मों को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करना पसंद करते हैं। बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदर्शित हुई कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

    स्वतंत्रता दिवस पर प्रदर्शित होकर भारतीय सिनेमा के इतिहास में नया मुकाम हासिल करने वाली फिल्मों में वर्ष 1975 में रिलीज हुई ‘शोले’ सबसे ऊपर है। अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के मुख्य अभिनय वाली इस बहुचर्चित फिल्म का निर्माण लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। शुरुआती दिनों में धीमी गति से व्यापार करने के बाद इस फिल्म ने जबरदस्त वापसी की और उस दौर में 15 से 35 करोड़ रुपये तक का रिकॉर्ड कारोबार किया, जिसकी तुलना आज के समय में ढाई सौ से तीन सौ करोड़ रुपये के व्यापार से की जाती है।

    खेल और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत फिल्म ‘चक दे इंडिया’ भी अगस्त 2007 में प्रदर्शित हुई थी। महिला हॉकी टीम पर आधारित इस कहानी को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। लगभग 22 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने दुनिया भर में करीब 91 करोड़ रुपये का शानदार व्यावसायिक संग्रह किया था, जिसने मुख्य अभिनेता शाहरुख खान के अभिनय को एक नई पहचान दी।

    वर्ष 2012 के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदर्शित हुई स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘एक था टाइगर’ ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए आयाम स्थापित किए। लगभग 75 करोड़ रुपये के खर्च से बनी इस एक्शन फिल्म ने सिनेमाघरों में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए करीब 350 करोड़ रुपये का विशाल कलेक्शन दर्ज किया। यह फिल्म मुख्य अभिनेता सलमान खान के करियर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई।

    इसके बाद वर्ष 2014 में 15 अगस्त के अवसर पर एक्शन से भरपूर फिल्म ‘सिंघम रिटर्न्स’ सिनेमाघरों में पहुंची। लगभग 70 करोड़ रुपये के बजट में निर्मित इस फिल्म ने अपने जबरदस्त एक्शन दृश्यों के बल पर दर्शकों को आकर्षित किया और कुल 220 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर व्यावसायिक रूप से बड़ी सफलता दर्ज की।

    हाल के वर्षों में 15 अगस्त के मौके का सबसे बड़ा फायदा फिल्म ‘गदर 2’ को मिला। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस सीक्वल फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अप्रत्याशित सफलता हासिल की। फिल्म ने दुनिया भर में लगभग 690 करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यापार किया और अभिनेता सनी देओल की सिनेमा में मजबूत वापसी दर्ज कराई। इस तरह स्वतंत्रता दिवस का अवसर हमेशा से फिल्म निर्माताओं के लिए व्यापारिक लाभ का बड़ा जरिया रहा है।

  • नेपाल में हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग ने पकड़ा जोर, सीमा वाले जिलों में प्रदर्शन की खबरों से बढ़ी चिंता

    नेपाल में हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग ने पकड़ा जोर, सीमा वाले जिलों में प्रदर्शन की खबरों से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली । नेपाल को दोबारा वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। काठमांडो से शुरू हुई यह बहस अब भारत की सीमा से लगे नेपाल के कई जिलों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हिंदू संगठनों का कहना है कि देश की संवैधानिक पहचान को लेकर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा शुरू करनी चाहिए। संगठनों की ओर से सरकार से तीन महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक बुलाने और हिंदू राष्ट्र की बहाली को लेकर आगे की प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय करने की मांग की गई है।

    हिंदू संगठनों के अनुसार काठमांडो के अलावा मोरंग सुनसरी सप्तरी सिरहा बारा पर्सा और रौतहट जैसे भारत सीमा से जुड़े इलाकों में भी इस मांग को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। संयुक्त हिंदू मोर्चा की ओर से गृह मंत्री सुदन गुरुंग को ज्ञापन सौंपकर नेपाल की संवैधानिक पहचान पर पुनर्विचार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी गई है। नेपाल हिंदू स्वयंसेवक संघ की पशुपति शिक्षा प्रचार समिति से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी सरकार के सामने इस मांग को लगातार उठाए जाने की बात कही है।

    हाल में सरकार और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में धार्मिक सौहार्द सुरक्षा और धार्मिक संस्थानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान संगठनों ने तीन महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की मांग भी रखी। हालांकि नेपाली अधिकारियों ने इस बैठक को किसी औपचारिक समझौते का रूप नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि संगठनों को अपनी मांगें सरकार के सामने रखने का अवसर दिया गया था और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।

    नेपाल की संवैधानिक पहचान का सवाल नया नहीं है। वर्ष 2007 के बाद नेपाल को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में स्थापित किया गया था। इसके बाद से अलग अलग समय पर देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग उठती रही है। अब एक बार फिर यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा तथा दोनों देशों के गहरे सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को देखते हुए इस बहस का प्रभाव सीमा से जुड़े क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है।

    भारत की सीमा से सटे इलाकों में भी इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच चर्चा बढ़ने की बात सामने आ रही है। रुपईडीहा से नेपालगंज तक बाजारों और चौक चौराहों पर नेपाल की धार्मिक पहचान को लेकर बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर किसी भी मांग के साथ सामाजिक सौहार्द और शांति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल सीमा क्षेत्र में सामान्य जनजीवन जारी है।

    विशेषज्ञों और स्थानीय संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि हिंदू राष्ट्र की मांग व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप लेती है तो इसका असर केवल नेपाल की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। भारत नेपाल के सामाजिक संबंधों और दक्षिण एशिया की राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। खुली सीमा और दोनों देशों के बीच लगातार होने वाले आवागमन को देखते हुए सीमा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।

    फिलहाल नेपाल सरकार की ओर से हिंदू राष्ट्र की बहाली को लेकर किसी निर्णायक राजनीतिक प्रक्रिया की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठनों की मांग किस तरह आगे बढ़ती है और क्या यह मुद्दा नेपाल की मुख्यधारा की राजनीति में व्यापक चर्चा का विषय बनता है। साथ ही भारत नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां घटनाक्रम पर किस तरह नजर रखती हैं यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।

  • तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की रिहाई के बाद गरमाई राजनीति, जानिए अभिनेता विशाल ने क्या उठाए बड़े सवाल

    तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की रिहाई के बाद गरमाई राजनीति, जानिए अभिनेता विशाल ने क्या उठाए बड़े सवाल

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध अभिनेता विशाल ने हालिया राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महिला सुरक्षा, फिल्म उद्योग की समस्याओं और राज्य के नए राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत विचार साझा किए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की पुलिस हिरासत के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में इस प्रकार के घटनाक्रम घटित होते रहते हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग फिल्म जगत से जुड़ी महिला कलाकारों के प्रति अनुचित और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं, उनके विरुद्ध भी इसी प्रकार की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    अभिनेता ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि डिजिटल प्लेटफार्मों विशेषकर यूट्यूब पर कई लोग महिला अभिनेत्रियों के खिलाफ खुलेआम अपमानजनक और भद्दी टिप्पणियां करते हैं। उनका मानना है कि ऐसे तत्वों पर नकेल कसना अत्यंत आवश्यक है ताकि फिल्म उद्योग में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक रूप से अभद्र टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए।

    तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव और अभिनेता थलपति विजय के मुख्यमंत्री बनने पर खुशी जताते हुए विशाल ने कहा कि जनता के इस निर्णय से वे काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि विजय ने अपने सफल अभिनय करियर को विराम देकर पूर्ण रूप से जनसेवा और राजनीति का रास्ता चुना है। अब पूरे राज्य को उनके चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों और नई नीतियों के धरातल पर लागू होने का इंतजार है।

    फिल्म उद्योग की अपेक्षाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार सिनेमा क्षेत्र को राहत प्रदान करेगी। विशाल ने विशेष रूप से राज्य में लागू दोहरे कराधान के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि देश के किसी अन्य राज्य में इस प्रकार की कर व्यवस्था नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से अपील की कि तमिलनाडु में फिल्म उद्योग पर मंडरा रहे दोहरे कर के बोझ को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए ताकि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत मिल सके।

    राज्य की बुनियादी ढांचागत समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने शहरों में जलभराव और सीवेज प्रबंधन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आम जनता और नागरिकों को जलजमाव की समस्याओं से मुक्ति मिलनी चाहिए। उन्हें पूरी उम्मीद है कि नई सरकार निचले और मध्यम वर्ग के कल्याण के लिए प्रभावी नीतियां बनाएगी और राज्य के विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

    दूसरी ओर, रिहा होने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ अत्यंत अनुचित व्यवहार किया गया और लगभग तीन हजार पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उन्हें चेन्नई से तंजावुर तक 400 किलोमीटर सड़क मार्ग से ले जाया गया। उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री तृषा के विरुद्ध द्विअर्थी टिप्पणी करने के मामले में उन्हें चेन्नई स्थित आवास से हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद तंजावुर में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

  • यश के ‘टॉक्सिक’ लुक ने मचाई सनसनी, रणबीर के ‘एनिमल’ से तुलना पर छिड़ी जंग

    यश के ‘टॉक्सिक’ लुक ने मचाई सनसनी, रणबीर के ‘एनिमल’ से तुलना पर छिड़ी जंग


    नई दिल्ली । यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक का ट्रेलर सामने आने के बाद से ही फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिल रही है। फिल्म के एक खास सीन ने सोशल मीडिया पर चर्चा को और तेज कर दिया है। ट्रेलर में यश शर्टलेस अंदाज में नजर आते हैं और उनके इस लुक की तुलना रणबीर कपूर की फिल्म एनिमल के चर्चित अवतार से की जा रही है। दोनों फिल्मों के सीन में अभिनेता का दमदार और आक्रामक अंदाज नजर आने के कारण सोशल मीडिया यूजर्स ने दोनों की तस्वीरों को साथ रखकर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं।

    टॉक्सिक के ट्रेलर में यश का किरदार बेहद रहस्यमयी और खतरनाक अंदाज में दिखाई देता है। एक सीन में वह बिना शर्ट के नजर आते हैं और उनके हाथ में बोतल दिखाई देती है। ट्रेलर में इस दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यूजर्स ने यश के लुक को रणबीर कपूर के एनिमल अवतार से मिलता जुलता बताया है। कुछ लोगों ने इसे प्रेरणा या नकल से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर यश के प्रशंसकों ने इस तुलना को खारिज करते हुए अभिनेता के अंदाज की तारीफ की है।

    सोशल मीडिया पर एक वर्ग का कहना है कि यश के इस लुक को देखकर उन्हें एनिमल की याद आ गई। वहीं कुछ प्रशंसकों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यश अपने अंदाज से यह दिखाने वाले हैं कि असली एनिमल कैसा होता है। इस तरह ट्रेलर के एक सीन ने फिल्म की कहानी से ज्यादा सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर ली है। हालांकि केवल एक लुक के आधार पर दोनों फिल्मों की तुलना करना कितना सही है यह फिल्म रिलीज होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

    टॉक्सिक को एक पीरियड एक्शन थ्रिलर फिल्म बताया जा रहा है जिसकी कहानी गोवा के क्राइम अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। फिल्म में यश राया नाम के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है जबकि इसकी कहानी और लेखन में भी यश और गीतू मोहनदास की भूमिका है। फिल्म में यश के साथ नयनतारा कियारा आडवाणी हुमा कुरैशी रुक्मिणी वसंत और तारा सुतारिया जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

    फिल्म की तकनीकी टीम भी काफी मजबूत है। सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी राजीव रवि ने संभाली है जबकि संगीत रवि बसरूर ने तैयार किया है। फिल्म के संपादन का काम उज्ज्वल कुलकर्णी ने किया है। एक्शन कोरियोग्राफी के लिए भी कई अनुभवी कलाकारों को जोड़ा गया है। ऐसे में टॉक्सिक से दर्शकों को बड़े स्तर के एक्शन और दमदार विजुअल्स की उम्मीद है।

    यश के प्रशंसकों के लिए फिल्म इसलिए भी खास है क्योंकि केजीएफ सीरीज के बाद अभिनेता एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार के साथ वापसी कर रहे हैं। टॉक्सिक का ट्रेलर पहले ही फिल्म को लेकर माहौल बना चुका है और अब यश के लुक पर शुरू हुई बहस ने इसकी चर्चा को और बढ़ा दिया है। कई बार टलने के बाद टॉक्सिक अब 26 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म कन्नड़ हिंदी तमिल तेलुगु मलयालम और अंग्रेजी भाषाओं में रिलीज होगी।

    फिल्म रिलीज के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि यश का यह अंदाज दर्शकों को कितना पसंद आता है और क्या टॉक्सिक अपने एक्शन थ्रिलर अवतार के जरिए बॉक्स ऑफिस पर नया असर छोड़ पाती है।

  • Nifty vs Sensex: कौन सा इंडेक्स देता है बेहतर निवेश का मौका? समझें आसान भाषा में पूरा फर्क

    Nifty vs Sensex: कौन सा इंडेक्स देता है बेहतर निवेश का मौका? समझें आसान भाषा में पूरा फर्क


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि निफ्टी और सेंसेक्स में से कौन सा बेहतर है। दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स हैं और देश की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। हालांकि दोनों के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं जिन्हें समझना किसी भी निवेशक के लिए जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि निफ्टी और सेंसेक्स सीधे तौर पर निवेश के साधन नहीं बल्कि बाजार के प्रदर्शन को मापने वाले प्रमुख सूचकांक हैं। इनके आधार पर कई इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश किया जा सकता है।

    सेंसेक्स बीएसई यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स है। इसमें देश की 30 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। इन कंपनियों का चयन बाजार पूंजीकरण और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। सेंसेक्स का प्रदर्शन इन कंपनियों के शेयरों में होने वाली तेजी और गिरावट से प्रभावित होता है। दूसरी तरफ निफ्टी 50 एनएसई यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स है। इसमें 50 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। इसलिए निफ्टी में सेंसेक्स की तुलना में कंपनियों की संख्या अधिक होती है और इसका दायरा भी थोड़ा व्यापक माना जाता है।

    दोनों इंडेक्स में भारत की प्रमुख कंपनियां शामिल रहती हैं और कई बड़ी कंपनियां दोनों में भी मौजूद होती हैं। यही वजह है कि लंबे समय में दोनों के प्रदर्शन में बहुत ज्यादा अंतर देखने को जरूरी नहीं है। हालांकि किसी खास समय में सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन के कारण दोनों इंडेक्स के रिटर्न में अंतर आ सकता है। उदाहरण के लिए यदि निफ्टी में शामिल किसी विशेष सेक्टर की कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं तो निफ्टी को उसका फायदा मिल सकता है। इसी तरह सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से सेंसेक्स मजबूत हो सकता है।

    अगर निवेश के नजरिए से देखा जाए तो किसी एक इंडेक्स को हर निवेशक के लिए बेहतर बताना सही नहीं होगा। निवेशक को अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला करना चाहिए। जो व्यक्ति लंबे समय के लिए बाजार में निवेश करना चाहता है और अलग-अलग बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन में भागीदारी चाहता है वह निफ्टी 50 या सेंसेक्स आधारित इंडेक्स फंड पर विचार कर सकता है। दोनों ही विकल्प बाजार की बड़ी कंपनियों में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश का अवसर देते हैं।

    नए निवेशकों के लिए इंडेक्स आधारित निवेश का एक फायदा यह है कि इसमें किसी एक कंपनी के शेयर चुनने का जोखिम अपेक्षाकृत कम हो सकता है क्योंकि निवेश कई कंपनियों में फैला होता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें जोखिम नहीं होता। शेयर बाजार से जुड़े निवेश में बाजार की स्थिति के अनुसार उतार-चढ़ाव बना रहता है और निवेश की रकम घट या बढ़ सकती है।

    निफ्टी और सेंसेक्स में चुनाव करते समय केवल पिछले रिटर्न को देखकर फैसला करना भी उचित नहीं है। निवेशक को फंड का खर्च अनुपात ट्रैकिंग एरर निवेश की अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्य जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा निवेश शुरू करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता समझना और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की मदद लेना बेहतर रहता है।

    कुल मिलाकर निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के मजबूत और महत्वपूर्ण इंडेक्स हैं। किसी एक को हमेशा दूसरे से बेहतर कहना सही नहीं होगा। लंबे समय के निवेश के लिए दोनों से जुड़े इंडेक्स फंड या अन्य निवेश विकल्प उपयोगी हो सकते हैं लेकिन अंतिम फैसला निवेशक के लक्ष्य जोखिम और निवेश अवधि के आधार पर होना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि केवल इंडेक्स का नाम देखकर निवेश करने के बजाय उसके पीछे की कंपनियों बाजार की स्थिति और निवेश उत्पाद की लागत को समझकर ही फैसला लेना चाहिए।

  • VIP मोबाइल नंबर चाहिए? Jio और Vi पर ऐसे चुनें लकी नंबर, जानें कीमत और बुकिंग का तरीका

    VIP मोबाइल नंबर चाहिए? Jio और Vi पर ऐसे चुनें लकी नंबर, जानें कीमत और बुकिंग का तरीका


    नई दिल्ली । 
    अगर आप अपने मोबाइल नंबर में कोई खास पैटर्न, लकी डिजिट या याद रखने में आसान नंबर चाहते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियों के जरिए ऐसा नंबर चुनने का विकल्प उपलब्ध है। Jio और Vi अपने यूजर्स को पसंदीदा या फैंसी मोबाइल नंबर चुनने की सुविधा देते हैं। इसमें 9999, 786 या जन्मतिथि से जुड़े अंकों जैसे खास पैटर्न वाले नंबर तलाशे जा सकते हैं।

    इस सुविधा की मदद से यूजर्स घर बैठे अपनी पसंद का नंबर खोज सकते हैं। इसके लिए Jio ग्राहकों को MyJio ऐप और Vi ग्राहकों को Vi ऐप का इस्तेमाल करना होता है। हालांकि, पसंदीदा नंबर की उपलब्धता और उसकी कीमत उसके पैटर्न तथा संबंधित कैटेगरी पर निर्भर करती है।

    Jio यूजर्स MyJio ऐप खोलकर होम स्क्रीन पर नीचे की ओर स्क्रॉल करने के बाद Quick Links सेक्शन में जा सकते हैं। यहां Matching Number का विकल्प दिखाई देता है। इस पर क्लिक करने के बाद यूजर अपने मौजूदा नंबर से मिलता-जुलता नंबर भी तलाश सकता है।

    अगर किसी ग्राहक को कोई खास VIP या फैंसी नंबर चाहिए, तो Looking for VIP number? विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद ग्राहक अपनी पसंद के चार से आठ अंकों का पैटर्न दर्ज करके नंबर की तलाश कर सकता है। उपलब्ध विकल्पों में से पसंदीदा नंबर चुनकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

    Jio पर केवल मिलते-जुलते नंबर ही नहीं, बल्कि विशेष पैटर्न वाले नंबर भी खोजे जा सकते हैं। इससे उन ग्राहकों को सुविधा मिलती है जो अपने मौजूदा नंबर जैसा कोई नंबर रखना चाहते हैं या किसी खास संख्या को नए मोबाइल नंबर में शामिल करना चाहते हैं।

    Vi ग्राहकों के लिए भी प्रक्रिया काफी सरल है। इसके लिए Vi ऐप में जाकर VIP Number विकल्प चुनना होता है। इसके बाद जिस नंबर या अंक पैटर्न को ग्राहक अपने मोबाइल नंबर में चाहता है, उसे संबंधित बॉक्स में दर्ज करना होता है।

    सर्च करने के बाद स्क्रीन पर उपलब्ध VIP नंबरों की सूची दिखाई देती है। इनमें कुछ नंबर मुफ्त हो सकते हैं, जबकि कुछ Premium VIP नंबरों के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। ग्राहक अपनी पसंद का नंबर चुनने के बाद पिनकोड और डिलीवरी एड्रेस जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करके ऑर्डर की प्रक्रिया पूरी कर सकता है।

    VIP नंबर की कीमत एक जैसी नहीं होती। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौजूदा नंबर से मिलता-जुलता नंबर चुनने की शुरुआती कीमत करीब 50 रुपये हो सकती है। वहीं Jio की कुछ विशेष गोल्ड कैटेगरी के VIP नंबरों के लिए ऑफलाइन स्टोर से वाउचर लेना पड़ सकता है और इसकी कीमत 12,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

    Vi पर भी फैंसी नंबरों की अलग-अलग कैटेगरी उपलब्ध हैं। कुछ नंबर मुफ्त मिल सकते हैं, जबकि प्रीमियम कैटेगरी के नंबरों की कीमत करीब 590 रुपये से 2,000 रुपये तक हो सकती है। अंतिम कीमत चुने गए नंबर और उसकी कैटेगरी पर निर्भर करेगी।

    नंबर चुनने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राहक अपने ऑपरेटर के निर्देश के अनुसार सिम प्राप्त कर सकता है। ऐसे में अगर आप अपना लकी नंबर, जन्मतिथि से जुड़ा पैटर्न या आसानी से याद रहने वाला नंबर चाहते हैं, तो पहले उपलब्ध नंबरों की सूची और उसकी कीमत जरूर जांचना बेहतर रहेगा।

  • सूर्य व्रत से बढ़ता है आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा, जानिए पूजा और व्रत के खास नियम

    सूर्य व्रत से बढ़ता है आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा, जानिए पूजा और व्रत के खास नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है और उनकी उपासना का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सूर्यदेव की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्मविश्वास तथा मनोबल मजबूत होता है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल सम्मान प्रतिष्ठा पिता नेतृत्व क्षमता और स्वास्थ्य से जुड़ा ग्रह माना जाता है। यही वजह है कि सूर्यदेव को समर्पित व्रत और पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। रविवार का दिन सूर्य उपासना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे सकता है।

    सूर्यदेव का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करके सूर्यदेव का ध्यान करना चाहिए। व्रत की शुरुआत श्रद्धा और संकल्प के साथ करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सूर्योदय के समय सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना चाहिए। जल चढ़ाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करना चाहिए और मन को शांत रखते हुए सूर्यदेव का स्मरण करना चाहिए। जल की धार के बीच से सूर्यदेव के दर्शन करने की परंपरा भी प्रचलित है।

    सूर्यदेव को जल अर्पित करते समय सूर्य मंत्र का जाप किया जा सकता है। ॐ सूर्याय नमः और ॐ आदित्याय नमः जैसे मंत्रों का श्रद्धा के साथ जाप किया जाता है। इसके अलावा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी सूर्य उपासना में विशेष माना जाता है। पूजा के दौरान लाल फूल अक्षत और रोली अर्पित की जा सकती है। हालांकि पूजा सामग्री का इस्तेमाल स्वच्छता और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए करना चाहिए।

    सूर्य व्रत के दौरान भोजन को लेकर भी संयम रखना जरूरी माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास करना चाहिए। फलाहार या सात्विक भोजन का विकल्प अपनाया जा सकता है। अत्यधिक तला हुआ भोजन और नशीले पदार्थों से दूर रहना बेहतर माना जाता है। व्रत के दौरान मन में नकारात्मक विचार रखने के बजाय शांत और सकारात्मक भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यदेव की पूजा केवल बाहरी विधि तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इस दिन व्यक्ति को अपने व्यवहार में भी संयम रखना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। रविवार के दिन लाल वस्त्र या लाल रंग की वस्तुओं का दान भी सूर्य उपासना से जोड़ा जाता है। हालांकि किसी विशेष ग्रह दोष को दूर करने के लिए कोई उपाय करने से पहले योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

    व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्भवती महिलाओं बच्चों बुजुर्गों और किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के कठिन उपवास नहीं रखना चाहिए। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य संबंधी सावधानी रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    इस तरह सूर्यदेव का व्रत श्रद्धा संयम और सकारात्मक भावना के साथ किया जाए तो यह व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक अनुशासन का माध्यम बन सकता है। सुबह जल्दी उठना सूर्यदेव को जल अर्पित करना मंत्र जाप करना और दिन की शुरुआत सकारात्मक विचारों के साथ करना जीवनशैली में अच्छे बदलाव ला सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यदेव की कृपा से आत्मविश्वास सम्मान और ऊर्जा में वृद्धि होती है। इसलिए सूर्य व्रत करते समय सबसे जरूरी है कि पूजा पूरे मन से की जाए और नियमों का पालन श्रद्धा के साथ किया जाए।

  • झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का विरोध प्रदर्शन लगातार गहराता जा रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। इस बीच, प्रसिद्ध अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा ने आंदोलन स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का प्रत्यक्ष समर्थन किया।

    रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे पीयूष मिश्रा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के संघर्ष और पीड़ा को देखकर वे उनके साथ खड़े होने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि छात्रों की तकलीफों और उनके आंसुओं को देखकर वे इस आंदोलन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए वे अपनी ओर से हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के दौरान अभिनेता ने अपनी चर्चित फिल्म का क्रांतिकारी गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ भी गाया, जिससे पूरे प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। यह गीत अपने प्रेरणादायक और संघर्षशील बोलों के लिए जाना जाता है। पीयूष मिश्रा ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन, तिरपाल और अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, ताकि उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि झारखंड में वर्ष 2019 के बाद आयोजित हुई कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र बेहद असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जेएसएससी सीजीएल, जेएसएससी जेई और पीजीटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में व्यापक पैमाने पर धांधली और लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में विवादित परीक्षाओं को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना, पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो से निष्पक्ष जांच कराया जाना और इसमें संलिप्त दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना शामिल है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।

    प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक वर्गों का भी समर्थन मिलने लगा है। युवाओं के इस विरोध-प्रदर्शन ने राज्य में प्रशासनिक एवं परीक्षा प्रणाली में सुधारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।