Author: bharati

  • 172 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान, अमेरिका भी करेगा सम्मानित

    172 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान, अमेरिका भी करेगा सम्मानित

    नई दिल्ली ।फ्लाईदुबई की उड़ान में गंभीर संकट के दौरान 172 यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए साहस दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इजरायल के सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने उन्हें ‘प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हीरोइज्म’ देने की घोषणा की है। इसके अलावा, अमेरिका में भी कैप्टन मच्छार के साहस को सम्मान दिया जाएगा। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति उनके योगदान की सराहना करते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में बयान दर्ज कराएंगे।

    इजरायल के राष्ट्रपति की ओर से सम्मान देने की घोषणा कैप्टन मच्छार के स्वस्थ होने के बाद की जाएगी। भारत में इजरायली दूतावास ने इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए कहा कि कैप्टन की बहादुरी और साहस ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। उनके पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना करते हुए इजरायल ने उनके योगदान के लिए आभार जताया है। यह सम्मान विमान में पैदा हुए गंभीर संकट के दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के मद्देनजर दिया जा रहा है।

    यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड 1073 में हुई थी। आरोप है कि उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। राजा कृष्णमूर्ति के बयान के मुताबिक, विमान महज 30 सेकंड में लगभग 16,000 फीट नीचे आ गया था। ऐसे हालात में कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विमान और उसमें सवार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रयास करते रहे।

    गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छार किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोलने में सफल रहे। इससे विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों को कॉकपिट के भीतर पहुंचने तथा कथित हमलावर को काबू करने का अवसर मिला। इस कार्रवाई ने संकट के दौरान स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैप्टन की कोशिशों के बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दो रिजर्व पायलटों ने नियंत्रण संभाला और उड़ान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबूक में उतारा।

    विमान में कुल 172 यात्री सवार थे। इनमें चार अमेरिकी नागरिक और 27 बच्चे भी शामिल थे। घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इसके बावजूद विमान को सुरक्षित उतारने में सफलता मिली। कैप्टन मच्छार के साहस और संकट के समय लिए गए फैसलों को इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटना में उनकी भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।

    भारतीय नागरिक कैप्टन स्मित मच्छार के पास विमान संचालन का 17 वर्षों का अनुभव है। इसमें 11 वर्ष कप्तान के रूप में काम करने का अनुभव शामिल है। राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि जानलेवा हमले का सामना करने के बावजूद कैप्टन ने विमान में सवार लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में भी कैप्टन को यह अहसास था कि विमान में मौजूद लोगों की जिंदगी उनके अगले कदम पर निर्भर हो सकती है। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने खतरे को समझा और कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने का साहसिक फैसला किया।

    कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना दर्ज कराने की घोषणा की है। उन्होंने अन्य सांसदों से भी इस बहादुरी को सम्मानित करने की अपील की। उनका कहना है कि कैप्टन की सूझबूझ, दृढ़ निश्चय और साहस ने यात्रियों तथा चालक दल को हमले को रोकने और संभावित बड़े हादसे से बचने का अवसर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विमान में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के पीछे एक परिवार है और कैप्टन के प्रयासों से अनेक परिवारों को अपूरणीय दुख से बचने का अवसर मिला।

  • IDA की जमीन को लेकर इंदौर में सियासी घमासान, कांग्रेस का आज घेराव, भाजपा के आयोजन और पटाखा बाजार के किराये पर उठे सवाल

    IDA की जमीन को लेकर इंदौर में सियासी घमासान, कांग्रेस का आज घेराव, भाजपा के आयोजन और पटाखा बाजार के किराये पर उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर में इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के मैदान आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने प्राधिकरण पर मैदान उपलब्ध कराने में दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए जवाब मांगा है। पार्टी का दावा है कि राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए मैदान आवंटित करने पर 14 लाख रुपये से अधिक का शुल्क लिया गया जबकि विजय नगर में भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई गई। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि दोनों आयोजन के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया तो इसके पीछे क्या आधार था और क्या भाजपा के कार्यक्रम के लिए कोई विशेष छूट दी गई थी। इन मुद्दों को लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में शुक्रवार दोपहर कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचकर सीईओ का घेराव करने वाले हैं।

    कांग्रेस की मांग है कि सार्वजनिक जमीन के आवंटन से संबंधित सभी दस्तावेज और नियम सार्वजनिक किए जाएं। पार्टी जानना चाहती है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई थी और भुगतान किन शर्तों के तहत लिया गया। वहीं भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के तहत 7 अक्टूबर को विजय नगर में आयोजित कार्यक्रम के लिए मैदान किस आधार पर आवंटित किया गया और इसके बदले कोई शुल्क लिया गया या नहीं। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता होनी चाहिए और राजनीतिक आयोजनों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। हालांकि भाजपा को जमीन मुफ्त दिए जाने और नियमों की अनदेखी के आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    मैदान आवंटन को लेकर विवाद के बीच पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान पर प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार का मामला भी उठाया गया है। यहां करीब 40 दिनों तक चलने वाले बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। बाजार में जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराये की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये किराया होने की चर्चा है।

    पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। इसमें दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि जब कुछ दिनों के राजनीतिक आयोजन के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो लगभग 40 दिन तक चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर निर्धारित होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन शुल्क और खर्च का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि अलग-अलग आयोजनों के लिए शुल्क निर्धारण में अंतर है तो IDA को उसका स्पष्ट आधार बताना चाहिए। पार्टी ने आशंका जताई है कि आवंटन प्रक्रिया में अनियमितता होने पर प्राधिकरण को राजस्व का नुकसान हो सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में IDA का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही शुल्क निर्धारण और आवंटन की शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद अब प्राधिकरण के जवाब पर नजर रहेगी क्योंकि यह विवाद सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और समान नियम लागू करने के सवाल से जुड़ा है।

  • इंदौर में RE-2 सड़क का रास्ता साफ करने उतरा प्रशासन, 130 मकानों पर कार्रवाई से मचेगी हलचल, अब पूरी होगी अधूरी सड़क

    इंदौर में RE-2 सड़क का रास्ता साफ करने उतरा प्रशासन, 130 मकानों पर कार्रवाई से मचेगी हलचल, अब पूरी होगी अधूरी सड़क


    इंदौर । इंदौर में RE-2 रोड के अधूरे हिस्से का निर्माण पूरा करने के लिए प्रशासन और नगर निगम ने एक बार फिर कार्रवाई शुरू कर दी है। बंगाली चौराहा से पीपल्याहाना के बीच बनने वाली इस सड़क के रास्ते में बाधक मकानों को हटाया जा रहा है। गुरुवार सुबह से भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर निगम की टीम कार्रवाई में जुटी हुई है। जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण में बाधा बन रहे शेष 130 मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। मौके पर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर और एसडीएम घनश्याम धनगर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। पिछले दिनों कार्रवाई के दौरान पथराव की घटना सामने आने के बाद इस बार सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि अभियान के दौरान कानून व्यवस्था बनी रहे।

    RE-2 रोड इंदौर की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच आवागमन को बेहतर बनाना और प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है। सड़क निर्माण के लिए प्रशासन पहले भी कई चरणों में बाधक निर्माण हटाने की कार्रवाई कर चुका है। बिचौली कांकड़ शिव नगर और शिव दर्शन नगर क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के व्यवस्थापन की प्रक्रिया भी इस परियोजना से जुड़ी हुई है। अब सड़क के शेष हिस्से को निर्माण के लिए खाली कराने के उद्देश्य से कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

    परियोजना के आंकड़ों के अनुसार RE-2 रोड की कुल लंबाई 4.25 किलोमीटर और चौड़ाई 45 मीटर है। इसमें से लगभग 3.20 किलोमीटर हिस्से का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि करीब एक किलोमीटर हिस्सा बाधक निर्माण के कारण लंबे समय से अधूरा पड़ा है। इस परियोजना पर अब तक लगभग 55 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। शेष हिस्से का निर्माण पूरा होने के बाद सड़क को पूरी तरह उपयोग में लाने का रास्ता साफ हो सकता है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग मिलने की उम्मीद है।

    प्रशासन से पहले मिली जानकारी के अनुसार शिव नगर के 80 मकानों में 117 परिवार रहते हैं जबकि शिव दर्शन नगर के 55 मकानों में 72 परिवार निवासरत हैं। इन परिवारों का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नीलगिरि परिसर में व्यवस्थापन किया जाना है। वहीं पीपल्याहाना और बिचौली कांकड़ क्षेत्र के कई परिवारों को पहले ही आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ऐसे में सड़क निर्माण के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्थापन की स्थिति और शेष परिवारों को मिलने वाली सुविधाएं भी अहम रहेंगी।

    RE-2 रोड का अधूरा हिस्सा पूरा होने से भूरी टेकरी पीपल्याहाना बंगाली चौराहा और नायता मुंडला आरटीओ क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल सड़क निर्माण में बाधक मकानों को हटाने की कार्रवाई जारी है। परियोजना पूरी होने के बाद शहरवासियों को एक अतिरिक्त मार्ग मिल सकता है जिससे प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। अब इस परियोजना की प्रगति और प्रभावित परिवारों के व्यवस्थापन पर नजर रहेगी।

  • सूर्य नक्षत्र परिवर्तन 2026: 11 अक्टूबर से वृषभ, सिंह, कन्या और कुंभ राशि के जातकों को करियर में मिल सकते हैं नए अवसर

    सूर्य नक्षत्र परिवर्तन 2026: 11 अक्टूबर से वृषभ, सिंह, कन्या और कुंभ राशि के जातकों को करियर में मिल सकते हैं नए अवसर

    नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य देव 11 अक्टूबर 2026 को चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, यश, उच्च पद और प्रशासनिक सफलता का कारक माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य की स्थिति और नक्षत्र में बदलाव का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ सकता है। इस बार सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश चार राशियों के लिए विशेष रूप से अनुकूल बताया जा रहा है। वृषभ, सिंह, कन्या और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में नए अवसर मिलने की संभावना जताई गई है।

    चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य और मंगल से जुड़ी यह स्थिति ऊर्जा, साहस और काम करने की क्षमता को बढ़ाने वाली मानी जाती है। इस नक्षत्र परिवर्तन को कुछ राशियों के लिए अपने काम में आगे बढ़ने, नई जिम्मेदारियां हासिल करने और आर्थिक स्थिति सुधारने के अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, ज्योतिषीय अनुमान निश्चित परिणामों की गारंटी नहीं होते। वास्तविक जीवन में सफलता व्यक्ति के प्रयासों, परिस्थितियों और फैसलों पर भी निर्भर करती है।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में अनुकूल माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, नौकरी करने वालों को अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने और अपने काम से पहचान बनाने का अवसर मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों के लिए कोई नया समझौता या परियोजना लाभकारी साबित होने की संभावना जताई गई है। परिवार के सदस्यों का सहयोग भी महत्वपूर्ण फैसले लेने में मददगार हो सकता है। इस अवधि में आर्थिक योजनाओं पर ध्यान देना और नए अवसरों का आकलन करके कदम उठाना उपयोगी रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए इस परिवर्तन को विशेष रूप से सकारात्मक बताया गया है, क्योंकि ज्योतिष में सूर्य को सिंह राशि का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों के काम की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सराहना किए जाने और नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई गई है। कुछ जातकों के लिए पदोन्नति के अवसर भी बन सकते हैं। आर्थिक मामलों में सुधार की उम्मीद के साथ लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी भी वित्तीय योजना को केवल ज्योतिषीय अनुमान के आधार पर तय करने के बजाय वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

    कन्या राशि के जातकों के लिए सूर्य का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करियर से जुड़े बदलावों के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। जो लोग लंबे समय से नौकरी बदलने या नए अवसर तलाशने की योजना बना रहे हैं, उन्हें प्रयास तेज करने का अवसर मिल सकता है। कारोबार करने वालों के लिए नए संपर्क और ग्राहक मिलने की संभावना जताई गई है। ऐसे संपर्क भविष्य में व्यापार बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। धन से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणामों की उम्मीद बताई गई है। आय के नए स्रोत तलाशने और अपनी पेशेवर क्षमताओं को बेहतर बनाने पर ध्यान देना इस अवधि में उपयोगी हो सकता है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए इस नक्षत्र परिवर्तन को कार्यक्षेत्र और कारोबार में नए रास्ते खुलने से जोड़कर देखा जा रहा है। नौकरी करने वालों को अपनी अलग पहचान बनाने और आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। व्यापारियों को नई परियोजनाओं या बड़े ग्राहकों के साथ काम करने का मौका मिलने की संभावना जताई गई है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पुरानी बचत बढ़ाने पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वृषभ, सिंह, कन्या और कुंभ राशि के लिए यह समय नए अवसरों की तलाश, मेहनत और आर्थिक योजनाओं पर ध्यान देने का संकेत देता है।

  • नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन हो गया। 8 अक्टूबर की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और उनकी पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना को अंतिम विदाई देने के लिए परिवार के सदस्यों के साथ उनके करीबी और फिल्म जगत से जुड़े कई लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार देर रात किए जाने को लेकर जब मल्हार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसकी वजह बताई।

    मल्हार पाटेकर से पूछा गया कि अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया, जबकि कई अन्य लोग और फिल्म जगत की हस्तियां भी नाना को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचना चाहती थीं। सवाल में यह भी कहा गया कि बॉलीवुड के कई लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, ऐसे में उसी रात अंतिम विदाई देने की क्या जरूरत थी। इस पर मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार के फैसले के पीछे ऐसी कोई खास वजह नहीं थी, जैसा सवाल में पूछा जा रहा था।

    मल्हार ने बताया कि नाना पाटेकर के साथ यह घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विशेष कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार रात में ही करना जरूरी था या अगले दिन नहीं किया जा सकता था। परिवार ने परिस्थितियों को देखते हुए उसी दिन उन्हें विदाई देने का निर्णय लिया। इस तरह मल्हार ने देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया।

    नाना पाटेकर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग शामिल हुए। नाना के चाहने वाले और करीबी भी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा।

    नाना पाटेकर की तबीयत गोवा स्थित उनके फ्लैट में बिगड़ी थी। जानकारी के मुताबिक, उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद उनके बेटे मल्हार के अनुसार, घर पर मेडिकल टीम बुलाई गई। टीम जब पहुंची, तब नाना बेहोशी की हालत में थे। उन्हें बचाने की कोशिश की गई और फिर तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए प्रयास जारी रखे।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर नाना पाटेकर को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। मल्हार के बयान के अनुसार, सुबह घटना होने और काफी समय बीत जाने के कारण परिवार ने देर रात अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों ने नाना को श्रद्धांजलि दी और उन्हें याद किया।

  • विष योग 2026: मेष, तुला और कुंभ राशि के जातक रहें सतर्क, खर्चों और पारिवारिक मामलों में बरतनी होगी सावधानी

    विष योग 2026: मेष, तुला और कुंभ राशि के जातक रहें सतर्क, खर्चों और पारिवारिक मामलों में बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 को चंद्रमा के राशि परिवर्तन से चंद्र-शनि विष योग का निर्माण होगा। पंचांग के मुताबिक, चंद्रमा सुबह कन्या राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि शनि पहले से मीन राशि में मौजूद हैं। कन्या और मीन राशि एक-दूसरे से सातवें स्थान पर हैं। इस स्थिति में चंद्रमा और शनि के बीच समसप्तक योग बनेगा और दोनों ग्रह एक-दूसरे पर सप्तम दृष्टि डालेंगे। ज्योतिष शास्त्र में इस स्थिति को विष योग कहा जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्मकुंडली में चंद्रमा और शनि की युति होने या दोनों ग्रहों के एक-दूसरे से सातवें भाव में स्थित होने पर विष योग बनता है। माना जाता है कि इस योग का प्रभाव मानसिक स्थिति, आर्थिक मामलों, पारिवारिक जीवन और कार्यक्षेत्र पर पड़ सकता है। इसी आधार पर 9 अक्टूबर से बनने वाले इस योग को कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। मेष, तुला और कुंभ राशि के जातकों को विशेष रूप से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और इनके आधार पर किसी घटना या परेशानी की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

    मेष राशि के जातकों के लिए इस अवधि में मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, इस दौरान बेवजह के विवादों से दूर रहना और किसी भी परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। आर्थिक लेन-देन करते समय जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतने और जल्दबाजी न करने पर जोर दिया गया है। वाणी पर नियंत्रण रखना भी महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि छोटी-सी बात गलतफहमी या विवाद का कारण बन सकती है। मानसिक शांति के लिए नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने का सुझाव दिया गया है।

    तुला राशि के जातकों को इस दौरान अपने बजट और खर्चों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अचानक खर्च बढ़ने की आशंका के चलते आमदनी और जरूरतों को ध्यान में रखकर आर्थिक योजना बनाना बेहतर रहेगा। चंद्रमा के बारहवें भाव और शनि के छठे भाव में होने की स्थिति को देखते हुए विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों की गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही गई है। किसी व्यक्ति पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचने की सलाह भी दी गई है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ मतभेद की संभावना बताई गई है। इस अवधि में शांत रहकर बातचीत करने और आर्थिक फैसलों में सावधानी रखने को प्राथमिकता देने का सुझाव है। ज्योतिषीय उपाय के रूप में भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी गई है।

    कुंभ राशि के जातकों को पारिवारिक रिश्तों और आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मान्यता के अनुसार, घर-परिवार में किसी बात को लेकर तनाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए बातचीत के दौरान संयम रखना जरूरी होगा। व्यापार करने वालों को पैसों के लेन-देन में सतर्क रहने और बड़े आर्थिक फैसले भरोसेमंद व्यक्ति की मौजूदगी में लेने का सुझाव दिया गया है। स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करने की भी सलाह दी गई है। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अक्टूबर के मध्य तक इंतजार करने का विकल्प सुझाया गया है। विष योग के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, विष योग के दौरान मेष, तुला और कुंभ राशि के जातकों को स्वास्थ्य, खर्च, कार्यस्थल और पारिवारिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए। बजट की योजना बनाना, लेन-देन में सावधानी रखना और विवादों से बचना उपयोगी व्यावहारिक कदम हैं। पूजा-पाठ और मंत्र जाप को धार्मिक आस्था से जुड़े उपायों के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • कोहली, रोहित और धोनी की राह पर श्रेयस अय्यर, रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के साथ रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

    कोहली, रोहित और धोनी की राह पर श्रेयस अय्यर, रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के साथ रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

    नई दिल्ली: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला 9 अक्टूबर को रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला जाएगा। भारतीय टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर कर रहे हैं। सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने आठ विकेट से जीत दर्ज की थी। अब टीम की कोशिश दूसरे मैच में भी जीत हासिल कर सीरीज में 2-0 की बढ़त बनाने की होगी। यह मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम सात बजे शुरू होगा।

    रांची का मैदान टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए अब तक अच्छा साबित हुआ है। यहां खेले गए चार मुकाबलों में भारत ने तीन में जीत दर्ज की है, जबकि एक मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा। इस बार वेस्टइंडीज की टीम पहली बार रांची में टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेलेगी। ऐसे में मेजबान टीम अपने घरेलू मैदान के रिकॉर्ड को कायम रखने के इरादे से उतरेगी, जबकि कैरेबियाई टीम के सामने इस मैदान पर अपनी पहली चुनौती का सामना करने का मौका होगा।

    रांची में भारतीय टीम को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एकमात्र हार न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली थी। 27 जनवरी 2023 को खेले गए उस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 21 रन से हराया था। उस समय भारतीय टीम की कप्तानी हार्दिक पंड्या के हाथों में थी। इसके अलावा भारत ने इस मैदान पर श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले खेले हैं और तीन मैचों में जीत हासिल की है।

    रांची में भारत की जीतों का सिलसिला अलग-अलग कप्तानों के नेतृत्व में देखने को मिला है। यहां पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 12 फरवरी 2016 को खेला गया था। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को 69 रन से हराया था। इसके बाद 7 अक्टूबर 2017 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम ने विराट कोहली के नेतृत्व में नौ विकेट से जीत दर्ज की। वहीं, 19 नवंबर 2021 को रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से मात दी थी। अब श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम के सामने इसी जीत के रिकॉर्ड को आगे बढ़ाने का अवसर है।

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के कुल रिकॉर्ड में भी भारतीय टीम आगे है। दोनों देशों के बीच अब तक 32 मैच खेले गए हैं। इनमें भारत ने 21 मुकाबले जीते हैं, जबकि वेस्टइंडीज को 10 मैचों में सफलता मिली है। एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। इस आंकड़े के आधार पर भारत का पलड़ा भारी दिखाई देता है, लेकिन दूसरे टी20 में टीम को जीत दर्ज करने के लिए मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

    दूसरे मुकाबले के लिए भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव और मयंक यादव शामिल हैं। संजू सैमसन और ईशान किशन दोनों विकेटकीपर के विकल्प हैं। भारतीय टीम के घोषित स्क्वॉड में वैभव सूर्यवंशी, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव और नीतीश कुमार रेड्डी समेत 15 खिलाड़ी शामिल हैं।

    वेस्टइंडीज की संभावित प्लेइंग इलेवन में शाई होप, कामिल पूरन, शिमरॉन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, रोस्टन चेज, अकील हुसैन, शमर स्प्रिंगर और शमर जोसेफ के नाम हैं। टीम के घोषित स्क्वॉड में आमिर जंगू, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल और क्वेंटिन सैम्पसन भी शामिल हैं। रांची में होने वाला यह मुकाबला भारत के लिए सीरीज में बढ़त मजबूत करने और अपने घरेलू रिकॉर्ड को कायम रखने का मौका होगा।

  • नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिर चर्चा में आया मीटू विवाद, तनुश्री दत्ता ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया कवरेज पर दिया बयान

    नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिर चर्चा में आया मीटू विवाद, तनुश्री दत्ता ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया कवरेज पर दिया बयान


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद फिल्म इंडस्ट्री में शोक का माहौल है। इसी बीच अभिनेत्री तनुश्री दत्ता की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई है। दोनों कलाकारों के बीच साल 2018 में सामने आए विवाद के कारण तनुश्री की प्रतिक्रिया पर लोगों की नजरें टिक गई हैं। अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में नाना पाटेकर के निधन की खबर का जिक्र करते हुए लखनऊ में होने वाले अपने कार्यक्रम को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने संकेत दिया कि इस खबर के बाद मीडिया का ध्यान उनके कार्यक्रम से हटकर उनके बयान पर केंद्रित हो सकता है। हालांकि उनकी पोस्ट को ही इस मामले पर उनकी अंतिम प्रतिक्रिया मानना जल्दबाजी होगी।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तनुश्री दत्ता ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए नाना पाटेकर के निधन की खबर पर अपनी बात रखी। अभिनेत्री ने बताया कि उनके लिए उस दिन का कार्यक्रम काफी महत्वपूर्ण था और वह लखनऊ में एक बड़े आयोजन में हिस्सा लेने की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने अपने दिन की योजना पहले से बना रखी थी। वह कार्यक्रम पर ध्यान देने के साथ सोशल मीडिया पर लाइव आने और अपने कंटेंट को साझा करने की तैयारी में थीं। लेकिन नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद उन्हें आशंका हुई कि शाम तक मीडिया का ध्यान उनके कार्यक्रम के बजाय इस खबर और उनकी प्रतिक्रिया पर केंद्रित हो जाएगा।

    तनुश्री ने यह भी कहा कि वह इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया तभी देंगी जब उन्हें खुद समझ आएगा कि उन्हें क्या कहना चाहिए। उन्होंने नाना पाटेकर के परिवार के प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त कीं। उनकी पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों और पुराने विवाद की पृष्ठभूमि के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। हालांकि अभिनेत्री के बयान को संदर्भ के साथ समझना जरूरी है क्योंकि उन्होंने अपनी ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया देने की बात बाद के लिए छोड़ी थी।

    तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर के बीच विवाद साल 2018 में देशभर में चर्चा का विषय बना था। उस समय तनुश्री ने आरोप लगाया था कि साल 2008 में फिल्म हॉर्न ओके प्लीज की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया था। अभिनेत्री ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने इस मामले में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी CINTAA से शिकायत की थी। इन आरोपों के सामने आने के बाद बॉलीवुड में मीटू अभियान को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई थी। कई महिलाओं ने अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न के अनुभव सार्वजनिक किए थे और फिल्म इंडस्ट्री में कामकाज के माहौल पर सवाल उठे थे।

    नाना पाटेकर ने तनुश्री के आरोपों को खारिज किया था। मामले में पुलिस जांच हुई और वर्ष 2019 में सबूतों की कमी के चलते पुलिस ने इसे बंद करने की रिपोर्ट दी थी। बाद में शिकायत से संबंधित आपराधिक कार्यवाही भी अदालत में खारिज कर दी गई थी। इसलिए इस विवाद का उल्लेख करते समय आरोपों और कानूनी घटनाक्रम के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

    नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के चर्चित अभिनेताओं में शामिल रहे हैं। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं और अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई। उनके निधन की खबर के बीच तनुश्री दत्ता की पोस्ट ने पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल अभिनेत्री की टिप्पणी में अपने कार्यक्रम और मीडिया कवरेज को लेकर चिंता प्रमुख रूप से दिखाई देती है। अब आगे उनकी ओर से कोई विस्तृत बयान आता है या नहीं इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।

  • किसी के 100 तो किसी के 14 बच्चे: अरबपतियों की दुनिया में बड़े परिवारों का चलन, जानिए इसके पीछे की सोच

    किसी के 100 तो किसी के 14 बच्चे: अरबपतियों की दुनिया में बड़े परिवारों का चलन, जानिए इसके पीछे की सोच

    नई दिल्ली: दुनिया के अति-अमीर लोगों की जीवनशैली में कई ऐसी बातें देखने को मिलती हैं, जो आम लोगों की जिंदगी से काफी अलग हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करना और उनकी देखभाल के लिए सहायकों की पूरी टीम रखना भी शामिल है। जहां बहुत से परिवारों के लिए एक बच्चे की परवरिश का खर्च और जिम्मेदारी बड़ी चुनौती होती है, वहीं कुछ अरबपति दर्जनों बच्चों के माता-पिता बन रहे हैं। इस चलन ने परिवार, संपत्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा और बच्चों के पालन-पोषण को लेकर नई चर्चा शुरू की है। कुछ मामलों में बच्चों की संख्या इतनी अधिक है कि उनकी देखभाल के लिए कई नैनी और सहायक नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे परिवारों में बच्चों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय रहती है। इससे यह सवाल भी उठता है कि आर्थिक संपन्नता के बावजूद माता-पिता अपने बच्चों के साथ कितना समय बिता पाते हैं और उनके भावनात्मक विकास में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी कितनी रहती है।

    कारोबारी और मनोरंजन जगत की चर्चित हस्ती किम कार्दशियन का उदाहरण इस व्यवस्था को समझने में मदद करता है। उनके पूर्व पति से चार बच्चे हैं और उनकी देखभाल के लिए पांच नैनी नियुक्त होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इन सहायकों की ड्यूटी अलग-अलग पालियों में चलती है। एक समय में एक नैनी बच्चों की देखभाल करती है, जबकि अन्य अपनी निर्धारित पाली के अनुसार जिम्मेदारी संभालती हैं। इस तरह बच्चों की दिनचर्या, उनकी जरूरतों और देखभाल के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई गई है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों में घरेलू सहायकों की मदद लेना असामान्य नहीं है। बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित लोगों की सहायता से माता-पिता अपने काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन जब बच्चों की संख्या अधिक हो और उनकी देखभाल का बड़ा हिस्सा सहायकों के जिम्मे हो, तो माता-पिता की व्यक्तिगत भागीदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    तकनीक क्षेत्र के कारोबारी पावेल दुरुव का मामला भी बड़ी संख्या में बच्चों को लेकर चर्चा में रहा है। रूस में जन्मे दुरुव के बारे में बताया गया है कि शुक्राणु दान के माध्यम से दुनिया के 12 देशों में उनके 100 से अधिक जैविक बच्चे हैं। इस मामले में बच्चों का जन्म पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था से अलग माध्यम के जरिए हुआ है। चीन के उद्योगपति शू बो के बारे में भी सरोगेसी के माध्यम से 100 से अधिक बच्चे होने का विवरण सामने आया है। इन उदाहरणों से पता चलता है कि प्रजनन तकनीकों और आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता ने कुछ संपन्न लोगों के लिए परिवार बनाने के विकल्पों का दायरा बढ़ाया है। हालांकि, ऐसे मामलों में बच्चों की परवरिश, उनके साथ संबंध और पारिवारिक जिम्मेदारियों का स्वरूप व्यक्ति तथा परिवार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

    अत्यधिक संपन्नता के बीच बड़े परिवारों का चलन सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ लोगों के लिए अधिक संतान होना परिवार की निरंतरता या व्यक्तिगत पसंद का विषय हो सकता है, जबकि अन्य मामलों में इसके पीछे अलग-अलग विचार और परिस्थितियां हो सकती हैं। हालांकि, केवल बच्चों की संख्या के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा तय नहीं की जा सकती। बड़ी संख्या में बच्चों की परवरिश के लिए आर्थिक संसाधनों के साथ समय, भावनात्मक सहयोग और नियमित देखभाल की भी जरूरत होती है। नैनी और दूसरे सहायकों की मदद से बच्चों की दैनिक जरूरतें पूरी की जा सकती हैं, लेकिन माता-पिता के साथ उनका व्यक्तिगत संबंध भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

    बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर परिवार के माहौल, देखभाल की निरंतरता और माता-पिता के साथ संबंधों का प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों वाले परिवारों के सामने यह चुनौती रहती है कि प्रत्येक बच्चे को पर्याप्त ध्यान और व्यक्तिगत समय कैसे दिया जाए। दूसरी ओर, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी परिवार की परिस्थितियों को समझे बिना बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाए। हर बच्चे की जरूरतें और पारिवारिक अनुभव अलग हो सकते हैं। अंततः संपत्ति और सुविधाएं बच्चों के जीवन को आसान बनाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन उनके पालन-पोषण में भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हैं। अरबपतियों के बड़े परिवारों के उदाहरण इसी व्यापक बहस को सामने लाते हैं कि आधुनिक समाज में परिवार का आकार, आर्थिक क्षमता और बच्चों की परवरिश के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

  • विश्व डाक दिवस: दूतों और घोड़ा डाक से ईमेल तक, हजारों साल में कैसे बदल गई संदेश पहुंचाने की दुनिया?

    विश्व डाक दिवस: दूतों और घोड़ा डाक से ईमेल तक, हजारों साल में कैसे बदल गई संदेश पहुंचाने की दुनिया?

    नई दिल्ली: एक समय था जब दूर रहने वाले किसी अपने का हाल जानने के लिए चिट्ठी का इंतजार करना पड़ता था। गांव की गलियों में डाकिया दिखाई देता तो लोगों की निगाहें उसके थैले पर टिक जाती थीं। किसी को नौकरी का नियुक्ति पत्र मिलता था, तो किसी के घर परीक्षा का परिणाम, मनी ऑर्डर या रिश्तेदारों की चिट्ठी पहुंचती थी। समय के साथ टेलीफोन, फैक्स, ईमेल, मोबाइल और इंटरनेट ने संदेश भेजने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। अब तस्वीरें, वीडियो और जरूरी दस्तावेज कुछ सेकंड में दुनिया के दूसरे हिस्से तक पहुंच जाते हैं। हालांकि, संचार की इस आधुनिक व्यवस्था की शुरुआत हजारों साल पहले दूतों और संदेशवाहकों से हुई थी। विश्व डाक दिवस के अवसर पर संदेश पहुंचाने की इसी लंबी यात्रा को समझना महत्वपूर्ण है।

    प्राचीन समय में संदेश पहुंचाने के लिए आज की तरह डाकघर, डाक टिकट या नियमित डाक वितरण व्यवस्था नहीं थी। राजा-महाराजा और शासक अपने संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए पैदल दूतों और घुड़सवार संदेशवाहकों की मदद लेते थे। शासन व्यवस्था के विस्तार के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों तक सूचनाएं पहुंचाने की जरूरत भी बढ़ती गई। भारत में दिल्ली सल्तनत के दौरान प्रशासनिक संदेशों के लिए डाक व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था। अलाउद्दीन खिलजी के समय घोड़े और पैदल संदेशवाहकों के जरिए सूचनाएं पहुंचाने की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। बाद में शेरशाह सूरी ने सड़कों और सरायों के नेटवर्क के साथ घोड़ा डाक व्यवस्था को मजबूत किया। इन व्यवस्थाओं ने संदेश पहुंचाने के संगठित तरीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अठारहवीं सदी में भारत में डाक व्यवस्था का स्वरूप अधिक व्यवस्थित होने लगा। ब्रिटिश शासन के दौरान प्रशासनिक जरूरतों के लिए डाक सेवाओं का विस्तार किया गया। वर्ष 1774 में कलकत्ता के जनरल पोस्ट ऑफिस की स्थापना को इस विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद मद्रास और बॉम्बे में भी जनरल पोस्ट ऑफिस स्थापित किए गए। वर्ष 1854 में भारतीय डाक व्यवस्था के विकास को नई दिशा मिली और डाक शुल्क, टिकट तथा वितरण प्रणाली को अधिक व्यवस्थित किया गया। इससे विभिन्न क्षेत्रों के बीच पत्र भेजना आसान हुआ। डाक टिकटों ने भी इस व्यवस्था को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। वर्ष 1852 में सिंध क्षेत्र में ‘सिंध डाक’ टिकट जारी किया गया, जिसे भारत के शुरुआती डाक टिकटों में गिना जाता है। वर्ष 1854 में ऐसे टिकट जारी किए गए जिनका इस्तेमाल व्यापक स्तर पर किया जा सकता था। इससे पहले वर्ष 1840 में ब्रिटेन का ‘पेनी ब्लैक’ जारी हो चुका था, जिसे दुनिया का पहला चिपकने वाला डाक टिकट माना जाता है।

    डाक व्यवस्था का विस्तार होने के साथ डाकिया आम लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन गया। मोबाइल और इंटरनेट के दौर से पहले चिट्ठियां दूर रहने वाले रिश्तेदारों और मित्रों से संपर्क बनाए रखने का प्रमुख माध्यम थीं। नौकरी के पत्र, सरकारी सूचनाएं, परीक्षा परिणाम और व्यक्तिगत संदेश डाक के जरिए पहुंचते थे। मनी ऑर्डर की सुविधा ने भी लोगों को दूर रहकर अपने परिवारों तक पैसे भेजने में मदद की। विशेष रूप से उन इलाकों में यह सुविधा उपयोगी थी, जहां बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित थी। पोस्टकार्ड ने कम खर्च में संदेश भेजना आसान बनाया, जबकि रेलवे मेल सर्विस ने लंबी दूरी तक डाक पहुंचाने की गति बढ़ाई। इस तरह सड़क और रेल के बाद हवाई परिवहन ने भी डाक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाया।

    भारत में वर्ष 1911 में इलाहाबाद से नैनी के बीच पहली आधिकारिक हवाई डाक उड़ान हुई। यह उड़ान करीब 18 किलोमीटर की दूरी तक गई थी। उस समय डाक को हवाई मार्ग से पहुंचाना संचार व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयोग था। इसके बाद परिवहन के आधुनिक साधनों ने दूरस्थ स्थानों तक पत्र और जरूरी दस्तावेज पहुंचाने की क्षमता बढ़ाई। हर साल 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। इसी तारीख को वर्ष 1874 में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना हुई थी। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों की डाक सेवाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय डाक व्यवस्था को बेहतर बनाना था।

    भारत की आजादी के बाद डाक सेवाओं का विस्तार ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक किया गया। समय के साथ डाकघरों ने चिट्ठियों के अलावा बचत, बीमा और अन्य सेवाएं भी उपलब्ध करानी शुरू कीं। वर्ष 1986 में स्पीड पोस्ट की शुरुआत ने जरूरी पत्रों और दस्तावेजों को तेजी से पहुंचाने का विकल्प दिया। इसके बाद टेलीफोन, फैक्स और ईमेल ने संचार की गति और बढ़ा दी। इंटरनेट के विस्तार के साथ नौकरी के आवेदन, व्यावसायिक पत्राचार और दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाने लगे। मोबाइल फोन, एसएमएस और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप ने इस बदलाव को और तेज कर दिया। अब संदेशों के साथ फोटो, वीडियो, ऑडियो और दस्तावेज भी तुरंत साझा किए जा सकते हैं।

    डिजिटल संचार के विस्तार के बावजूद डाक सेवा की उपयोगिता समाप्त नहीं हुई है। आज डाक विभाग पार्सल, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग, बीमा और कई सरकारी सेवाओं से भी जुड़ा है। भारत में 1.55 लाख से अधिक डाकघरों का नेटवर्क दूरदराज के क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चिट्ठियों की संख्या में बदलाव आया है, लेकिन डाक व्यवस्था नए समय की जरूरतों के अनुसार अपना स्वरूप बदल रही है। वहीं, हाथ से लिखी चिट्ठियों का भावनात्मक महत्व भी बरकरार है। पुरानी चिट्ठियां लोगों को रिश्तों, यादों और बीते समय से जोड़ती हैं। दूतों से शुरू हुआ संदेश पहुंचाने का सफर आज डिजिटल मैसेजिंग तक पहुंच चुका है, लेकिन अपनों तक अपनी बात पहुंचाने की मानवीय जरूरत अब भी पहले जैसी है।