Author: bharati

  • गंभीर का मास्टरमाइंड और सूर्या का 'स्काई' अवतार: टी20 विश्व कप में खिताब बचाने उतरेगी कोच-कप्तान की यह बेमिसाल जोड़ी

    गंभीर का मास्टरमाइंड और सूर्या का 'स्काई' अवतार: टी20 विश्व कप में खिताब बचाने उतरेगी कोच-कप्तान की यह बेमिसाल जोड़ी

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में एक नई और आक्रामक युग की शुरुआत हो चुकी है। राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा की सफल विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अब गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव के कंधों पर है। 72 घंटे से भी कम समय में भारतीय टीम टी20 विश्व कप में अपने खिताब को बचाने के अभियान का आगाज करेगी, और दुनिया भर की नजरें उस केमिस्ट्री पर टिकी हैं जो मैदान के बाहर गंभीर के दिमाग में पकती है और मैदान के अंदर सूर्या के बल्ले से आकार लेती है।

    आंकड़े दे रहे हैं गवाही नतीजों के लिहाज से देखें तो गंभीर और सूर्या की जोड़ी अब तक अपराजेय सी नजर आई है। 39 मैचों में 31 जीत और लगभग 80 प्रतिशत का जीत का रिकॉर्ड यह बताने के लिए काफी है कि इन दोनों की फ्रीक्वेंसी एक ही धुन पर बज रही है। भारतीय क्रिकेट में अक्सर कप्तान को जनरल माना जाता रहा है, जैसा रवि शास्त्री और विराट कोहली के दौर में था। लेकिन टी20 प्रारूप के बदलते मिजाज ने अब ‘फुटबॉल मैनेजर’ शैली की कोचिंग की मांग की है। यहाँ गंभीर एक रणनीतिकार की भूमिका में हैं और सूर्या उस योजना को शत-प्रतिशत मैदान पर उतारने वाले ‘एक्जीक्यूटर’ हैं।

    पुराना रिश्ता, नई इबारत इन दोनों का रिश्ता आज का नहीं है। सूर्यकुमार यादव को पहली बार वैश्विक पहचान तब मिली थी जब वे गौतम गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए फिनिशर की भूमिका निभा रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि सूर्या का मशहूर नाम ‘स्काई’ (SKY) भी उन्हें गंभीर ने ही दिया था। यह भारतीय क्रिकेट का एक खुला राज है कि 2024 में हार्दिक पंड्या के ऊपर सूर्यकुमार को टी20 की कप्तानी दिलाने में गंभीर की अहम भूमिका रही थी। गंभीर को पता था कि सूर्या जैसा निडर खिलाड़ी ही उनकी आक्रामक रणनीति को अंजाम दे सकता है।

    अलग मिजाज, एक लक्ष्य निजी तौर पर दोनों ध्रुवों की तरह अलग हैं। गंभीर दिल्ली के एक समृद्ध व्यावसायिक परिवार से आते हैं और स्वभाव से बेहद गंभीर और ‘नो-नॉनसेन्स’ खिलाड़ी रहे हैं। वहीं सूर्या मुंबई के मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और मैदान पर बेहद शांत और हंसमुख नजर आते हैं। लेकिन इस सामाजिक-आर्थिक अंतर के बावजूद दोनों का ‘क्रिकेटिंग डीएनए’ एक है। दोनों ही पक्के राष्ट्रवादी हैं और हार न मानने की जिद्द उनके चरित्र का मुख्य हिस्सा है। गंभीर जानते हैं कि उन्हें सहवाग जैसी नैसर्गिक प्रतिभा नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने कड़ी मेहनत से अपनी जगह बनाई। ठीक उसी तरह सूर्या ने भी लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट में संघर्ष किया और अपनी जगह छीनी।

    अब विश्व कप के महामंच पर गंभीर का गेम प्लान तैयार है और सूर्या को बस अपनी उस आजादी के साथ खेलना है जिसके लिए वे जाने जाते हैं। अगर यह जुगलबंदी अपने पूरे शबाब पर रही, तो भारत को अपना विश्व कप खिताब बचाने से रोकना नामुमकिन होगा।

  • दिशा पाटनी संग अफेयर की चर्चाओं पर पहली बार बोले सिंगर तलविंदर, क्या मिल गया बॉलीवुड को नया कपल?

    दिशा पाटनी संग अफेयर की चर्चाओं पर पहली बार बोले सिंगर तलविंदर, क्या मिल गया बॉलीवुड को नया कपल?


    नई दिल्ली।बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी और मशहूर सिंगर तलविंदर सिंह सिद्धू के बीच बढ़ती नजदीकियों ने इन दिनों हर तरफ सुर्खियां बटोर रखी हैं। काफी समय से दोनों को एक साथ देखे जाने के बाद अब आखिरकार तलविंदर सिंह ने इन चर्चाओं पर अपनी चुप्पी तोड़ी है जिससे फैंस के बीच उत्साह और असमंजस दोनों बढ़ गए हैं। एक हालिया इंटरव्यू के दौरान जब तलविंदर से दिशा के साथ उनके कथित अफेयर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेहद ही दिलचस्प और सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। तलविंदर ने खुलासा किया कि उनकी और दिशा की पहली मुलाकात एक्ट्रेस नुपुर सेनन और सिंगर स्टेबिन बेन की शादी से ठीक पहले हुई थी और उस वक्त उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात इंटरनेट पर इस कदर तहलका मचा देगी।

    तलविंदर के मुताबिक जैसे ही उनकी साथ वाली तस्वीरें वायरल हुईं उन्हें एहसास हुआ कि लोग उन्हें एक कपल के तौर पर देख रहे हैं। रिश्ते की सच्चाई पर बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि वे फिलहाल एक-दूसरे को जानने और समझने की कोशिश कर रहे हैं यानी अभी चीजें शुरुआती दौर में हैं। उन्होंने न तो रिश्ते को पूरी तरह स्वीकार किया और न ही इसे अफवाह बताकर खारिज किया। दिलचस्प मोड़ तब आया जब तलविंदर से सीधे तौर पर उनके प्यार के बारे में पूछा गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्हें तो हर दिन प्यार होता है और वह इस वक्त भी प्यार की गिरफ्त में हैं। हालांकि उन्होंने यह रहस्य बरकरार रखा कि वह प्यार दिशा पाटनी ही हैं या कोई और।

    गौरतलब है कि इन दोनों की बॉन्डिंग सबसे पहले नुपुर सेनन की शादी के फंक्शन में नजर आई थी जिसके बाद उन्हें एयरपोर्ट और मुंबई के विभिन्न कार्यक्रमों में साथ देखा गया। दिशा की बेस्ट फ्रेंड मौनी रॉय का तलविंदर के साथ मस्ती करना भी इस बात की गवाही देता है कि सिंगर अब दिशा के करीबी सर्कल का हिस्सा बन चुके हैं। तलविंदर जो हमेशा मास्क के पीछे अपना चेहरा छिपाकर रखते हैं और एक प्राइवेट इंसान माने जाते हैं उनका इस तरह खुलकर बोलना दिशा के फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो दिशा पाटनी अपनी प्रोफेशनल लाइफ में भी काफी व्यस्त हैं। हाल ही में फिल्म कंगुआ में नजर आने के बाद अब वह जल्द ही फिल्म ओ रोमियो में शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी के साथ दिखाई देंगी। इसके अलावा वह वेलकम टू द जंगल जैसी बड़ी फिल्मों का भी हिस्सा हैं। अब देखना यह होगा कि दिशा और तलविंदर का यह ‘डिस्कवरी फेज’ कब आधिकारिक रिश्ते में तब्दील होता है।

  • कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर

    कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर


    नई दिल्ली/कैम्ब्रिज। विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना संजोए भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भारतीय शिक्षा प्रणाली, विशेषकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE के स्तर को वैश्विक मान्यता प्रदान की है। अब CBSE से 12वीं कक्षा पास करने वाले मेधावी छात्र अपने बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के चुनिंदा अंडरग्रेजुएट UG कोर्सेज में प्रवेश के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे। यह कदम न केवल भारतीय छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता पर मुहर भी लगाता है।

    वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की पहचान इससे पहले कई विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए भारतीय छात्रों को जटिल प्रक्रियाओं और अतिरिक्त प्रवेश परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के इस फैसले ने उस बाधा को काफी हद तक कम कर दिया है। यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डेबोरा प्रेंटिस ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय छात्रों में अद्भुत प्रतिभा और जुनून है। कैम्ब्रिज इस मेधा को पहचानते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना चाहता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि केवल 12वीं के अंक ही प्रवेश का एकमात्र आधार नहीं होंगे; छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित अन्य मापदंडों और शर्तों को भी पूरा करना होगा, लेकिन बोर्ड अंकों को मान्यता मिलना प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना देगा।

    शैक्षणिक संबंधों को नई दिशाCAS की स्थापना भारत और कैम्ब्रिज के बीच इन शैक्षणिक संबंधों को और गहरा बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ने कैम्ब्रिज इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह केंद्र रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के संगम के रूप में कार्य करेगा। CAS का मुख्य उद्देश्य भारत की तेजी से उभरती ‘नॉलेज इकोनॉमी’ को वैश्विक शिक्षा नेटवर्क से जोड़ना है। इस सेंटर के माध्यम से न केवल छात्रों को, बल्कि भारतीय रिसर्च स्कॉलर्स और शिक्षकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध करने और दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ काम करने का बेहतरीन मंच मिलेगा।

    भविष्य की राह हुई आसान कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का यह कदम भविष्य में अन्य वैश्विक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा। इससे भारतीय छात्रों के लिए करियर के नए और रोमांचक रास्ते खुलेंगे। यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है जो अपने बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय स्कूली शिक्षा की साख दुनिया भर में बढ़ेगी और वैश्विक विश्वविद्यालयों में भारतीय चेहरों की मौजूदगी पहले से कहीं अधिक प्रभावी और सशक्त होगी।

  • रणबीर कपूर का खुलासा: डरावना था एनिमल का किरदार लेकिन डायरेक्टर के भरोसे ने फिल्म को बनाया यादगार

    रणबीर कपूर का खुलासा: डरावना था एनिमल का किरदार लेकिन डायरेक्टर के भरोसे ने फिल्म को बनाया यादगार


    नई दिल्ली।भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 2023 की सबसे चर्चित और विवादित फिल्म ‘एनिमल’ ने रणबीर कपूर को एक ऐसे मुकाम पर खड़ा कर दिया है जहाँ उनकी अदाकारी की चर्चा सरहदों के पार भी हो रही है। हाल ही में फिल्म के जापान प्रीमियर से पहले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रणबीर ने अपनी इस यात्रा के कई अनकहे पहलुओं को साझा किया। उन्होंने बड़ी बेबाकी से यह स्वीकार किया कि जब डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने उन्हें पहली बार फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई थी तो वह खुद अपने ही किरदार रणविजय से काफी डर गए थे। उन्हें महसूस हुआ था कि यह किरदार कोई आम हीरो नहीं है बल्कि इसमें एक गहरा अंधेरा और खतरनाक जुनून छिपा है।

    रणबीर ने बताया कि एक अभिनेता के तौर पर उन्हें हमेशा से कुछ अलग करने की तलाश रहती है और ‘एनिमल’ की कहानी में उन्हें वह जोखिम नजर आया। हालांकि शुरुआत में वह डरे हुए थे लेकिन जैसे-जैसे संदीप ने उन्हें इस कहानी के पीछे के जज्बात और एक पिता के प्रति बेटे के पागलपन भरे प्यार को समझाया रणबीर का डर एक्साइटमेंट में बदल गया। उन्होंने कहा कि संदीप रेड्डी वांगा के काम करने का तरीका और उनका अटूट आत्मविश्वास ही वह मुख्य वजह थी जिसने उन्हें इस फिल्म के लिए ‘हां’ कहने पर मजबूर किया। उन्हें लगा कि अगर डायरेक्टर इस कहानी को इतनी ईमानदारी और जुनून के साथ पर्दे पर उतारना चाहता है तो उन्हें भी अपनी सीमाओं को तोड़ना ही होगा।

    फिल्म के दौरान आने वाली शारीरिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए रणबीर ने उस यादगार क्लाइमेक्स सीन को याद किया जिसने पर्दे पर तहलका मचा दिया था। उन्होंने बताया कि बॉबी देओल के साथ शर्टलेस फाइट सीक्वेंस शूट करना उनके लिए सबसे कठिन अनुभव रहा। कड़ाके की ठंड में बिना कपड़ों के उस तीव्रता के साथ लड़ना न केवल शारीरिक रूप से थका देने वाला था बल्कि मानसिक तौर पर भी उस गुस्से को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक्शन सीन्स की मौलिकता ने ही उन्हें इस प्रक्रिया का आनंद लेने के लिए प्रेरित किया।

    रणबीर कपूर की यह फिल्म न केवल उनके करियर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बनी बल्कि इसने सिनेमाई दुनिया में एक नई बहस को भी जन्म दिया। फिल्म में रश्मिका मंदाना बॉबी देओल और तृप्ति डिमरी के किरदारों ने भी कहानी में जान फूंकी। अब जबकि दुनिया भर के दर्शक फिल्म के सीक्वल ‘एनिमल पार्क’ का इंतजार कर रहे हैं रणबीर अपनी अगली बड़ी फिल्म ‘रामायण’ की तैयारी में जुट गए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि जिस अभिनेता ने खूंखार रणविजय बनकर दर्शकों को डराया वह अब भगवान राम के रूप में पर्दे पर क्या जादू बिखेरते हैं।

  • शनि की राशि में साल का पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी को मचेगी खगोलीय हलचल; इन 3 राशियों पर टूटेगा मुसीबतों का पहाड़!

    शनि की राशि में साल का पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी को मचेगी खगोलीय हलचल; इन 3 राशियों पर टूटेगा मुसीबतों का पहाड़!


    नई दिल्ली। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसारयह ग्रहण शनि की स्वामित्व वाली राशि कुंभ में लगेगा। शनि और सूर्य के बीच शत्रुता का भाव होने के कारणशनि की राशि में सूर्य का पीड़ित होना कई जातकों के लिए मानसिकआर्थिक और शारीरिक कष्ट का कारण बन सकता है।

    ग्रहण का समय और दृश्यता
    भारतीय समयानुसारयह ग्रहण शाम 5:31 बजे शुरू होगा और रात 7:57 बजे समाप्त होगा। हालांकियह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगाजिसके कारण यहाँ सूतक काल के नियम प्रभावी नहीं होंगे। लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसारभले ही ग्रहण दिखाई न देइसका ग्रहों के गोचर पर प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान

    कुंभ राशि चूंकि ग्रहण इसी राशि में लग रहा हैइसलिए सबसे अधिक प्रभाव कुंभ जातकों पर ही पड़ेगा।सावधानी: मानसिक तनाव बढ़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घेर सकती हैं। बनते हुए काम बिगड़ सकते हैंइसलिए किसी भी बड़े निवेश या निर्णय से अभी बचें। सिंह राशि सूर्य सिंह राशि का स्वामी है। अपने स्वामी ग्रह का शत्रु राशि कुंभ में ग्रहण ग्रस्त होना सिंह राशि वालों के लिए शुभ नहीं है।

    सावधानी: वैवाहिक जीवन में तनाव और साझेदारी के कामों में नुकसान हो सकता है। कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रु आपको नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं। वाणी पर नियंत्रण रखें। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण पारिवारिक सुख में कमी ला सकता है। सावधानी: माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। संपत्ति या वाहन से जुड़े विवादों में फंसने के योग बन रहे हैं। आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतेंअन्यथा धन हानि निश्चित है।

    उपाय: कैसे बचें अशुभ प्रभाव से?

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसारग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण काल के दौरान और बाद में ये कार्य करने चाहिए: दान: ग्रहण के बाद काले तिलगुड़ या सात अनाज का दान करें। जाप: ‘ओम सूर्याय नम: और शनि मंत्र ‘ओम शं शनैश्चराय नम:का जाप करें। शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

  • अजित पवार का वायरल वीडियो: रेखा के सामने बोले अमिताभ बच्चन हैं सबसे पसंदीदा अभिनेता..

    अजित पवार का वायरल वीडियो: रेखा के सामने बोले अमिताभ बच्चन हैं सबसे पसंदीदा अभिनेता..


    नई दिल्ली। 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार एक विमान दुर्घटना में निधन हो गए। यह घटना पूरे देश में शोक और चिंता की लहर फैलाने वाली थी। वे बारामती में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे और उनका विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें उनके साथ कुल पांच लोगों की मौत हो गई।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मंच पर अजित पवार, बॉलीवुड की पावर सिंगर आशा भोसले और सदाबहार अभिनेत्री रेखा एक साथ दिखाई दे रहे हैं। वहां मौजूद दर्शकों के सामने जब उनसे उनकी पसंद-नापसंद के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा पसंद अमिताभ बच्चन हैं।

    इसके बाद उन्होंने रेखा को अपनी पसंदीदा अभिनेत्री बताया और साझा किया कि उन्हें अमिताभ-रेखा की फिल्में ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘घर’ बेहद पसंद हैं। रेखा इस बात पर मुस्कुरा उठीं और दर्शक भी इस पल को देखकर उत्साहित नजर आए।यह वीडियो अब एक्स (पहले ट्विटर) पर तेजी से शेयर हो रहा है और फैंस अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कई लोग इसे भावनात्मक और यादगार पल बता रहे हैं, तो कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स इसे चर्चा का विषय बना रहे हैं।

    अमिताभ बच्चन और रेखा की ऑन-स्क्रीन जोड़ी 1970 और 1980 के दशक में बेहद लोकप्रिय थी। दोनों ने ‘सिलसिला’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘गंगा की सौगंध’ और ‘दो अनजाने’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया।

    अजित पवार के निधन पर देश के कई बड़े सितारों ने भी शोक व्यक्त किया। अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार कमल हासन सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। उनके निधन के बाद महाराष्ट्र में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया और बारामती में उनका अंतिम संस्कार बड़े सम्मान के साथ संपन्न हुआ।

  • रम्बा हो की कल्पना अय्यर ने बताया क्यों छोड़ा बॉलीवुड, 27 साल बाद किया खुलासा

    रम्बा हो की कल्पना अय्यर ने बताया क्यों छोड़ा बॉलीवुड, 27 साल बाद किया खुलासा


    नई दिल्ली। साल 1981 का सुपरहिट गाना रम्बा हो आज भी लोगों के दिलों में बसा है। इस गाने में नजर आईं एक्ट्रेस कल्पना अय्यर हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई हैं। उनका एक डांस वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वे उसी अंदाज में रम्बा हो पर थिरकती दिख रही हैं। सात दशक की उम्र पार कर चुकीं कल्पना की एनर्जी और आत्मविश्वास ने फैंस को चौंका दिया।

    इस वायरल वीडियो के बाद फैंस के मन में सवाल उठने लगा कि इतनी लोकप्रियता के बावजूद कल्पना अय्यर ने बॉलीवुड को अचानक क्यों अलविदा कह दिया। 27 साल बाद उन्होंने इसका खुलकर जवाब दिया। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि समय के साथ इंडस्ट्री का माहौल बदल गया था। हर जगह ग्रुप बनने लगे और काम सीमित दायरों में घूमने लगा।

    कल्पना ने साफ कहा कि वे किसी भी ग्रुप का हिस्सा नहीं थीं। उनके मुताबिक जिस तरह का काम वह कर रही थीं उससे उन्हें सुकून नहीं मिल रहा था। खुशी और संतुष्टि न होने पर सफर को जबरदस्ती आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं था। उनका यह फैसला किसी नाराजगी या कड़वाहट से नहीं बल्कि आत्मचिंतन और आत्मसम्मान से लिया गया।

    इसी बातचीत में उन्होंने सलमान खान का जिक्र किया जो फिल्म हम साथ साथ हैं में उनके को‑स्टार थे। जब पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी मदद मांगी तो कल्पना ने साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि वे किसी से सिफारिश करवाने में विश्वास नहीं रखतीं। अगर कोई समझदार व्यक्ति उन्हें योग्य समझता है, तो खुद ही संपर्क करेगा।

    कल्पना अय्यर का फिल्मी सफर भले ही लंबा न रहा हो लेकिन यादगार रहा। उन्होंने सत्ते पे सत्ता, बड़े दिलवाला, हम पांच लाडला, अंजाम जैसी फिल्मों में काम किया। फिल्म हम साथ साथ हैं में उनका किरदार संगीता आज भी याद किया जाता है। उनकी आखिरी फिल्म दिल ही दिल साल 1999 में रिलीज़ हुई थी। आज जब रम्बा हो फिर से नई पीढ़ी और सोशल मीडिया के जरिए गूंज रहा है कल्पना अय्यर की कहानी प्रेरणा बनकर सामने आई है। उनका आत्मसम्मान और काम के प्रति सच्चाई आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है।

  • बंगाल में संवैधानिक संकट: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर लगाया भड़काने का आरोप; चुनाव अधिकारियों के लिए मांगी विशेष सुरक्षा

    बंगाल में संवैधानिक संकट: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर लगाया भड़काने का आरोप; चुनाव अधिकारियों के लिए मांगी विशेष सुरक्षा


    नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन SIR को लेकर निर्वाचन आयोग ECI और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रही जंग अब सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में पहुँच गई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक बेहद तीखे हलफनामे में चुनाव आयोग ने बंगाल की स्थिति को ‘असाधारण’ करार देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयोग का कहना है कि राज्य में चुनाव अधिकारियों को न केवल डराया-धमकाया जा रहा है, बल्कि मुख्यमंत्री के सार्वजनिक भाषणों से अधिकारियों के खिलाफ नफरत और हिंसा का माहौल बनाया जा रहा है।

    अधिकारियों की जान को खतरा और पुलिस की चुप्पी चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी मशीनरी को पंगु बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोग ने हलफनामे में जिक्र किया कि मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘हरि दास’ नामक एक माइक्रो-ऑब्जर्वर का नाम सार्वजनिक रूप से लिया, जिससे उस अधिकारी की जान खतरे में पड़ गई है। हालात इतने बेकाबू हैं कि मुर्शिदाबाद के 9 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने सामूहिक इस्तीफा देते हुए काम करने से मना कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं और राज्य पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उत्तर दिनाजपुर में तो 700 लोगों की भीड़ ने उस केंद्र पर ही धावा बोल दिया जहाँ सूची संशोधन का कार्य चल रहा था। आयोग ने स्पष्ट कहा कि पुलिस FIR दर्ज करने में भी आनाकानी कर रही है।

    देश का इकलौता राज्य जहाँ CEO को मिली ‘Y+’ सुरक्षा चुनाव आयोग ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि बंगाल की जमीनी हकीकत देश के अन्य राज्यों से पूरी तरह अलग और डरावनी है। यही कारण है कि केंद्र सरकार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को ‘Y+ श्रेणी’ की सुरक्षा प्रदान करनी पड़ी है। पूरे भारत में बंगाल इकलौता ऐसा राज्य बन गया है जहाँ एक चुनाव अधिकारी को अपनी सुरक्षा के लिए कमांडो के घेरे में रहना पड़ रहा है। आयोग ने दलील दी कि जहाँ अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, वहीं बंगाल में राजनीतिक हस्तक्षेप ने संकट खड़ा कर दिया है।

    ममता बनर्जी का पक्ष:लोकतंत्र को खतरा दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका की पैरवी करते हुए चुनाव आयोग की नीयत पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केवल बंगाल में ही ‘माइक्रो-ऑब्जर्वर्स’ की नियुक्ति क्यों की जा रही है? मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि करीब 58 लाख वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने मांग की कि 2026 का विधानसभा चुनाव पुरानी सूची के आधार पर ही हो और वर्तमान संशोधन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह नामों की त्रुटियों को सुधारते समय संवेदनशीलता बरते ताकि किसी भी असली नागरिक का मताधिकार न छीने। अब सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं कि क्या बंगाल में चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो पाएगी या हिंसा का यह साया गहराता जाएगा।

  • अमेरिका की नई योजना: 50 देशों के साथ चीन के खनिज प्रभुत्व को देगा चुनौती, भारत की भूमिका अहम

    अमेरिका की नई योजना: 50 देशों के साथ चीन के खनिज प्रभुत्व को देगा चुनौती, भारत की भूमिका अहम


    नई दिल्ली। अमेरिका चीन के वर्चस्व वाले क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठा रहा है। 4 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ बैठक में अमेरिका ने करीब 50 देशों का एक ट्रेडिंग ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उत्पादन, प्रोसेसिंग और कीमतों को स्थिर करना और चीन के प्रभुत्व को तोड़ना है।

    अमेरिका की रणनीति
    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बैठक में कहा कि सदस्य देशों के उत्पादकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम कीमत और टैरिफ जैसी व्यवस्थाएं की जाएंगी। उनका कहना था कि अमेरिका अपनी क्रिटिकल मिनरल्स इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करना चाहता है और चीन जैसी बाजार-सक्रियता से बचाव जरूरी है। वेंस ने इसे “साथी और सहयोगी के बीच सुरक्षित जोन” बताया, जिसमें अमेरिकी उद्योग को आवश्यक खनिजों की निर्बाध आपूर्ति और मित्र देशों में संयुक्त उत्पादन बढ़ाने पर जोर होगा।

    ब्लॉक का उद्देश्य
    चीन वर्तमान में दुनिया के लगभग 70% रेयर अर्थ माइनिंग और 90% प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, जेट इंजन, सेमीकंडक्टर और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम के लिए ये खनिज जरूरी हैं। अमेरिका का यह ब्लॉक चीन के एकाधिकार को तोड़ने और सप्लाई चेन को ‘डी-रिस्क’ De-risk करने की वैश्विक रणनीति है।

    भारत की भागीदारी और अवसर
    भारत ने इस बैठक में सक्रिय भूमिका निभाई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आपूर्ति शृंखला में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत के पास लिथियम और कॉपर के बड़े भंडार हैं, और इस ब्लॉक के माध्यम से उसे माइनिंग और प्रोसेसिंग में अमेरिकी तकनीक और फंड का लाभ मिल सकता है। इससे भारत अपनी चिप-मैन्युफैक्चरिंग और EV योजनाओं के लिए चीन पर निर्भर नहीं रहेगा।

    जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा अत्यधिक संकेंद्रण से जुड़ी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आपूर्ति शृंखलाओं के जोखिम को कम करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कनाडा, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, इटली, मलेशिया, बहरीन, मंगोलिया, पोलैंड, रोमानिया, इजराइल और उज्बेकिस्तान के मंत्रियों के साथ भी बैठक की।

  • 50 साल बाद पहली बार रूस-अमेरिका के बीच कोई परमाणु सीमा नहीं, न्यू स्टार्ट संधि समाप्त, वैश्विक सुरक्षा पर चिंता

    50 साल बाद पहली बार रूस-अमेरिका के बीच कोई परमाणु सीमा नहीं, न्यू स्टार्ट संधि समाप्त, वैश्विक सुरक्षा पर चिंता


    नई दिल्ली। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर लगी अंतिम बड़ी कानूनी पाबंदी अब समाप्त हो गई है। 5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट संधि की अवधि पूरी हो गई, जिससे लगभग 50 साल बाद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों-जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, सबमरीन-लॉन्च मिसाइलें और बॉम्बर-पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं रही। विशेषज्ञ इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं।

    न्यू स्टार्ट संधि क्या थी?
    न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटीNew START2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता था। यह संधि उन रणनीतिक हथियारों की तैनाती को सीमित करती थी जो देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते थे। इसे 2011 में लागू किया गया और मूलतः 10 साल के लिए थी। 2021 में इसे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 5 साल बढ़ाकर 2026 तक कर दिया।

    संधि का इतिहास
    परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की पहल शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1970 के दशक में SALT समझौते ने संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कटौती नहीं की।

    1991: START I – हजारों हथियारों में कटौती

    1993: START II – और कटौती, पर पूरी तरह लागू नहीं

    2002: SORT – 1,700-2,200 वारहेड्स पर सहमति, जांच-पड़ताल सीमित

    2010: न्यू स्टार्ट – रणनीतिक हथियारों पर बाध्यकारी सीमा

    2021 के बाद स्थिति
    2023 में रूस ने निरीक्षण बंद कर दिया, लेकिन सीमा पालन का दावा जारी रखा। इसका कारण यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका बताया गया। अब संधि पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और दोनों देश स्वतंत्र हैं।

    रूस का बयान
    रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब न्यू स्टार्ट संधि के तहत कोई दायित्व या पारस्परिक घोषणा दोनों देशों पर लागू नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया।

    संभावित असर

    संधि समाप्त होने के बाद रूस और अमेरिका दोनों अपनी मिसाइलों और रणनीतिक वारहेड्स की संख्या बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से यह तुरंत संभव नहीं है, लेकिन लंबी अवधि में हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

    वैश्विक संतुलन

    रूस और अमेरिका के पास दुनिया के 90% से अधिक परमाणु हथियार हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 वारहेड्स थे। अन्य देशों जैसे चीन600), फ्रांस290और ब्रिटेन225के पास अपेक्षाकृत कम हथियार हैं।

    विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
    सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से वैश्विक परमाणु होड़ तेज हो सकती है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार, दोनों देश अपनी तैनात क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं।

    संधि समाप्त होने से पहले पोप लियो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने दोनों देशों से अपील की कि वे परमाणु सीमाओं को बनाए रखें और नई, सत्यापनीय संधि पर तुरंत बातचीत शुरू करें। गुतारेस ने चेतावनी दी कि दशकों में पहली बार दुनिया सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बिना किसी बाध्यकारी सीमा के दौर में प्रवेश कर रही है, जिससे हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम सबसे अधिक बढ़ गया है।