Author: bharati

  • शुक्र गोचर2026: इन राशियों की किस्मत में होगा परिवर्तन, प्रेम और समृद्धि में आएगी वृद्धि

    शुक्र गोचर2026: इन राशियों की किस्मत में होगा परिवर्तन, प्रेम और समृद्धि में आएगी वृद्धि


    नई दिल्ली । 13 जनवरी 2026 को शुक्र का मकर राशि में गोचर हो रहा है, जो ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। शुक्र, जो प्रेम, सौंदर्य, समृद्धि और सुख का कारक ग्रह है, मकर राशि में गोचर कर रहा है, जिससे सभी राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। इस गोचर से भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि के साथ-साथ प्रेम संबंधों में भी स्थिरता और गंभीरता आ सकती है। आइए जानते हैं कि इस गोचर से कौन सी राशियाँ लाभान्वित होंगी और किसकी किस्मत बदलने वाली है।

    मेष राशि

    प्रभाव: शुक्र का मकर राशि में गोचर आपके दसवें भाव को सक्रिय करेगा, जिससे करियर और पेशेवर जीवन में सफलता मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत को मान्यता मिलेगी और पदोन्नति के योग बन सकते हैं। हालांकि, खर्चों में वृद्धि हो सकती है, खासकर विलासिता और मनोरंजन में। उपाय: फिजूलखर्ची से बचने के लिए बजट बनाएं और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें।

    कन्या राशि

    प्रभाव: शुक्र के गोचर से कन्या राशि के जातकों को शिक्षा, संतान और रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। प्रेम संबंधों में गंभीरता और प्रतिबद्धता आएगी, और ग्यारहवें भाव पर दृष्टि से नए आय के स्रोत खुल सकते हैं। उपाय: रचनात्मक कार्यों में समय बिताएं और शिक्षा के क्षेत्र में दान करें।

    तुला राशि

    प्रभाव: शुक्र का गोचर आपके चौथे भाव को सक्रिय करेगा, जिससे पारिवारिक जीवन में सुख और शांति बढ़ेगी। घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बनेगा। वाहन या संपत्ति खरीदने के योग बन सकते हैं। करियर में तरक्की और अधिकारियों के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। उपाय: शुक्रवार को घर के मंदिर में दीपक जलाएं और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें।

    वृश्चिक राशि

    प्रभाव: शुक्र का गोचर वृश्चिक राशि के तीसरे भाव में होगा, जिससे आपकी संवाद क्षमता और साहस में वृद्धि होगी। छोटी यात्राओं से लाभ हो सकता है। इसके अलावा, लेखन, मार्केटिंग और मीडिया से जुड़े जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है। उपाय: संवाद की कला में सुधार के लिए अपनी अभिव्यक्ति पर ध्यान केंद्रित करें और नई परियोजनाओं में हाथ डालें।

    सिंह राशि

    प्रभाव: शुक्र का मकर राशि में गोचर आपके छठे भाव को प्रभावित करेगा, जिससे कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल बेहतर होगा। छोटी यात्राएं लाभकारी रहेंगी। भाग्य का साथ मिलेगा और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। उपाय: सहकर्मियों के साथ अच्छा रिश्ता बनाए रखें और अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दें।

    मकर राशि

    प्रभाव: शुक्र का मकर राशि में गोचर आपके पहले भाव को प्रभावित करेगा, जिससे व्यक्तित्व में आकर्षण और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। यह समय खुद को बेहतर बनाने का है, और आपको प्रेम संबंधों में भी सकारात्मक परिवर्तन मिल सकते हैं।उपाय: आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए नियमित ध्यान और योग करें।

    कुम्भ राशि

    प्रभाव: शुक्र का गोचर आपके बारहवें भाव को प्रभावित करेगा, जिससे खर्चों में वृद्धि हो सकती है। विलासिता और सुख-सुविधाओं के प्रति आकर्षण बढ़ेगा, लेकिन साथ ही फिजूलखर्ची से बचने की आवश्यकता है। मानसिक शांति के लिए ध्यान और आत्मनिरीक्षण करें।उपाय: खर्चों पर नियंत्रण रखें और मानसिक शांति के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करें।

    मीन राशि

    प्रभाव: शुक्र का गोचर आपके ग्यारहवें भाव को प्रभावित करेगा, जिससे आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। मित्रों और सामाजिक संबंधों में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में स्थिरता आएगी और आप किसी पुराने रिश्ते को नई दिशा दे सकते हैं। उपाय: सामाजिक कार्यों में भाग लें और मित्रों के साथ समय बिताएं। शुक्र का मकर राशि में गोचर 2026 के जनवरी महीने में सभी राशियों के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएगा। जहां कुछ राशियों के लिए यह समय करियर में उन्नति, वित्तीय स्थिरता और प्रेम में गहराई का होगा, वहीं कुछ को फिजूलखर्ची और मानसिक शांति बनाए रखने का ध्यान रखना होगा।

  • बिहार कांग्रेस चीफ राजेश राम का बड़ा बयान, हमारे विधायक पूरी तरह एकजुट, राजनीति में जो होता है वो कहीं नहीं जाता

    बिहार कांग्रेस चीफ राजेश राम का बड़ा बयान, हमारे विधायक पूरी तरह एकजुट, राजनीति में जो होता है वो कहीं नहीं जाता


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची है। हाल ही में बिहार कांग्रेस चीफ राजेश राम ने जेडीयू के दावों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि कांग्रेस के सभी छह विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। जेडीयू ने दावा किया था कि कांग्रेस के कुछ विधायक एनडीए के संपर्क में हैं, लेकिन राजेश राम ने इसे पूरी तरह खारिज किया और राजनीति की बारीकियों पर भी अपनी राय रखी।

    विधायक एकजुट, जेडीयू के दावे पर सख्त प्रतिक्रिया
    राजेश राम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे जो छह विधायक हैं, वे सभी एकजुट हैं। राजनीति में जो की जाती है वह अक्सर छिपी रहती है और जो कही जाती है, उसका पता किसी को नहीं चलता। आप कह सकते हैं कि जेडीयू और बीजेपी के विधायक हमारे संपर्क में हैं, लेकिन यह सिर्फ अफवाहें हैं।

    वास्तविकता यह है कि मेरे विधायक पूरी तरह साथ हैं।”

    उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में बुलाई गई बैठक में सिर्फ तीन विधायक ही उपस्थित हुए थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अन्य विधायक अलग हैं। राजेश राम ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस संगठन मजबूत और एकजुट है और आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और भी स्पष्ट होगी।

    राजनीति की बारीकियां: जो होता है वह कहीं नहीं जाता”
    राजेश राम ने राजनीति की जटिलताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “मैं लगातार दो टर्म में विधायक रहा हूं। लगातार यह चलता रहता है कि विधायक टूटने की बातें होती रहती हैं, लेकिन जो टूटने वाला होता है, उसका पता नहीं चलता। वोटों की चोरी या राजनीतिक चालाकियां इतनी सूक्ष्म होती हैं कि जनता को पता ही नहीं चलता।
    राजेश राम का यह बयान यह दर्शाता है कि कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती और विधायक एकता पर पूरी तरह ध्यान दे रही है और किसी भी अफवाह या राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होगी।

    सीएम नीतीश कुमार की यात्रा पर तीखी टिप्पणी
    राजेश राम ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया यात्रा पर भी टिप्पणी की और कहा, “इसका कोई मतलब नहीं है। बिहार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। ऐसे में यात्रा निकालने से कोई फायदा नहीं होगा। जनता परेशान है और उन्हें वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।”

    इस बयान से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस का फोकस केवल राजनीतिक आरोपों या शोर-शराबे में फंसने पर नहीं है, बल्कि जनता और संगठन को मजबूत करने पर है।

    खरमास के बाद नई सोच के साथ संगठन को मजबूत करेंगे
    राजेश राम ने आगे कहा, “आज 12 बजे रात के बाद खरमास खत्म हो जाएगा। इसके बाद हम नई सोच के साथ पार्टी संगठन को मजबूत करेंगे। कई ऐसी योजनाएं और पहलें होंगी, जो पार्टी और जनता दोनों के बीच सकारात्मक प्रभाव डालेंगी।”

    इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस खरमास के बाद सक्रिय राजनीति में उतरने की तैयारी कर रही है। राजेश राम का जोर संगठन और विधायक एकता पर है, ताकि पार्टी आगामी चुनावों में मजबूत स्थिति में रहे।

    सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
    राजेश राम के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे कांग्रेस की मजबूती और ईमानदारी के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे चुनावी रणनीति के तहत दिया गया बयान मान रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजेश राम का यह बयान बिहार की सियासत में कांग्रेस की स्थिति को स्पष्ट करने वाला है। उन्होंने साफ कर दिया कि पार्टी किसी भी तरह की राजनीतिक अफवाहों या जेडीयू के दावों से प्रभावित नहीं होगी।

    कुल मिलाकर, राजेश राम का बयान यह साबित करता है कि कांग्रेस के विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और पार्टी संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में गंभीर है। खरमास खत्म होने के बाद पार्टी की नई पहल और रणनीति बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैराजनीतिक हलचल और बयानबाजी के बीच, राजेश राम ने साफ संदेश दिया है कि कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती और विधायक एकता पर ही अपनी प्राथमिकता रखती है, और यह आने वाले चुनावों में उसका बड़ा फायदा साबित हो सकता है।

  • खजुराहो में आकार ले रहा ‘विरासत वन’, 17 एकड़ में प्रकृति-संस्कृति का अनूठा संगम; बंगाल के कलाकार गढ़ रहे जीवंत मूर्तियां

    खजुराहो में आकार ले रहा ‘विरासत वन’, 17 एकड़ में प्रकृति-संस्कृति का अनूठा संगम; बंगाल के कलाकार गढ़ रहे जीवंत मूर्तियां


    खजुराहो /पर्यटन नगरी खजुराहो अब केवल अपने विश्वप्रसिद्ध मंदिरों के लिए ही नहीं बल्कि प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल के लिए भी पहचानी जाने वाली है। खजुराहो के खर्रोही क्षेत्र में 17 एकड़ भूमि पर विरासत वन विकसित किया जा रहा है जो हरियाली जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनेगा। यह वन खास तौर पर बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है ताकि वे घूमते-घूमते जंगल पर्यावरण और प्रकृति के महत्व को खुद समझ सकें।

    विरासत वन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पारंपरिक उद्यान की तरह नहीं बल्कि एक लिविंग क्लासरूम के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां लगाए गए पेड़-पौधे वन्यजीवों की आकृतियां और थीम आधारित वन क्षेत्र बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर सीखने का अवसर देंगे। वन विभाग की इस पहल के तहत एक समय के बंजर भू-भाग को हरित स्वरूप में बदल दिया गया है जो अब पर्यावरण संरक्षण का मिसाल बन रहा है।विरासत वन में आधुनिक तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया गया है। यहां पेड़ों और प्रमुख स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। जैसे ही कोई बच्चा या पर्यटक क्यूआर कोड स्कैन करेगा उससे जुड़ी जानकारी सीधे मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगी। इसमें उस पेड़ या पौधे का नाम उसकी प्रजाति औषधीय गुण पर्यावरण में भूमिका और उससे जुड़े रोचक तथ्य डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। इससे बच्चों में तकनीक के माध्यम से सीखने की रुचि भी बढ़ेगी।

    इस वन को और आकर्षक बनाने के लिए जंगल के जानवरों की जीवंत मूर्तियां भी स्थापित की जा रही हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए बंगाल से आए अनुभवी कलाकार काम कर रहे हैं। कलाकारों द्वारा बनाई जा रही ये मूर्तियां इतनी वास्तविक होंगी कि देखने वालों को जंगल में होने का अहसास कराएंगी। अधिकारियों के अनुसार इस मूर्तिकला का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और जल्द ही यह वन पूरी तरह तैयार होकर लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।विरासत वन में 200 से अधिक प्रजातियों के 25 हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। यहां अलग-अलग विषयों पर आधारित वन विकसित किए गए हैं जिनमें नवग्रह वन नक्षत्र वन सप्तऋषि वन लक्ष्मी वन औषधीय वन और जैव विविधता वन शामिल हैं। हर वन का अपना अलग महत्व और उद्देश्य है जिससे भारतीय संस्कृति ज्योतिष आयुर्वेद और प्रकृति के गहरे संबंध को समझा जा सके।

    वन विभाग का मानना है कि विरासत वन न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा बल्कि पर्यटन को भी नया आयाम देगा। खजुराहो आने वाले पर्यटक अब मंदिरों के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े इस विशेष केंद्र का भी अनुभव ले सकेंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • 10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज

    10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज


    नई दिल्ली । बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनाव 2026 की आहट के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शिवसेना यूबीटी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक ताजा बयान ने राज्य में सियासी घमासान छेड़ दिया है। राउत ने दावा किया कि ठाकरे परिवार की ताकत आज भी इतनी है कि वे मात्र 10 मिनट के भीतर पूरी मुंबई को ठप कर सकते हैं। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे गीदड़ भभकी करार दिया है।

    संजय राउत ने रविवार को एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी की सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कहा चुनाव में हार-जीत तो चलती रहती है लेकिन ठाकरे परिवार को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हम आज भी 10 मिनट में मुंबई बंद करा सकते हैं। जब तक ठाकरे परिवार सलामत है तब तक मराठी अस्मिता और मुंबई भी सुरक्षित है। राउत का यह बयान उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी निकाय चुनावों में उनके संभावित गठबंधन की खबरों के बीच आया है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राउत के इस दावे पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ऐसी खोखली धमकियों से डरने वाली नहीं है। 11 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान फडणवीस ने कहा संजय राउत अपने घर के आसपास का इलाका भी बंद नहीं करा सकते। वह दिन भर सिर्फ सुर्खियों में रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि एक दौर था जब स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के एक इशारे पर मुंबई दो घंटे में बंद हो जाती थी, लेकिन अब शिवसेना यूबीटी के पास वैसी ताकत और जनाधार नहीं बचा है।

    फडणवीस ने साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी तब भी यूबीटी नेताओं ने दावा किया था कि शिंदे मुंबई में कदम नहीं रख पाएंगे। उन्होंने कहा इसके बावजूद शिंदे 50 विधायकों के साथ मुंबई आए खुलेआम सड़कों से होते हुए राजभवन गए और सरकार बनाई। राउत के दावे जमीन से कोसों दूर हैं। 2026 के बीएमसी चुनाव को लेकर छिड़ी इस जंग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में मुंबई की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंकने वाले हैं। जहाँ एक ओर राउत कार्ड और ठाकरे परिवार की विरासत का हवाला दे रहे हैं वहीं फडणवीस और महायुति सरकार इसे बदलते वक्त की राजनीति बताकर चुनौती दे रही है।

  • सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का विवादित बयान: भगवान राम को बताया समाजवादी, BJP पर माता सीता को वनवास भेजने की चुगली का आरोप

    सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का विवादित बयान: भगवान राम को बताया समाजवादी, BJP पर माता सीता को वनवास भेजने की चुगली का आरोप


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान पैदा हो गया है। चंदौली से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में भगवान राम और माता सीता को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सांसद का दावा है कि भगवान राम वनवास के दौरान समाजवादी विचारधारा अपनाते थे और उन्होंने आम लोगों और वनवासियों का समर्थन प्राप्त किया। इसके विपरीत, बीजेपी समर्थक राम को राजा के रूप में पूजते हैं।
    वीरेंद्र सिंह ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी समर्थकों ने राम से चुगली कर माता सीता को वनवास भेजवाया। उन्होंने आगे कहा, “भगवान राम भिलनी के बेर खाना पसंद करते थे, झोपड़ी में रहना पसंद करते थे और निषाद समाज से मित्रता करते थे। ऐसे लोगों को सम्मान देना और मित्र बनाना ही समाजवाद की असली पहचान है। हम राम के उस रूप को मानते हैं जो वनवासी और समाजवादी विचारों वाले थे, जबकि भाजपा समर्थक राजा राम के रूप की पूजा करते हैं।”

    सांसद के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद पैदा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें मौर्य ने कहा था कि सपा के कुछ विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि मौर्य जैसे बयानों के कारण उन्हें पिछली बार चुनाव जीतने में कठिनाई हुई थी और इस बार भी उनका चुनाव वहीं से होने वाला है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीरेंद्र सिंह का बयान सपा और बीजेपी के बीच आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया पर भी बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोग इसे आलोचना का विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सपा के समाजवादी दृष्टिकोण के अनुरूप सही ठहराते हुए देख रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल राजनीतिक बहस को तेज करते हैं, बल्कि आगामी चुनावों में मतदाताओं की राय पर भी असर डाल सकते हैं। चूंकि यह बयान धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता और प्रभाव दोनों ही ज्यादा हैं।

    इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सपा और बीजेपी के बीच तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया है। जनता और राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। ऐसे बयान अक्सर चुनावी मोर्चों पर मतदाताओं की सोच को प्रभावित करते हैं और सियासी समीकरण बदल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, वीरेंद्र सिंह का बयान यह दर्शाता है कि धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक विचारधारा का मिश्रण भारतीय राजनीति में कितनी तेजी से विवाद पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और सपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और चुनावी रणनीतियों पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • ट्रंप का चौंकाने वाला दावा: खुद को बताया वेनेजुएला का ‘एक्टिंग राष्ट्रपति’, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मचा हड़कंप

    ट्रंप का चौंकाने वाला दावा: खुद को बताया वेनेजुएला का ‘एक्टिंग राष्ट्रपति’, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली । वैश्विक राजनीति के मंच पर सोमवार को उस वक्त एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा की जिसने न केवल राजनयिक गलियारों में हलचल मचा दी है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता के सिद्धांतों पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने एक विकिपीडिया पेज का स्क्रीनशॉट साझा किया जिसमें उनकी आधिकारिक तस्वीर के साथ उन्हें वर्तमान समय से वेनेजुएला का एक्टिंग प्रेसिडेंट बताया गया है। इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने खुद को अमेरिका के 45वें और 47वें राष्ट्रपति के रूप में भी पेश किया। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि विकिपीडिया के वास्तविक रिकॉर्ड्स या किसी भी आधिकारिक सार्वजनिक दस्तावेज में ट्रंप को इस पद पर सूचीबद्ध नहीं किया गया है। साझा की गई तस्वीर को विशेषज्ञों द्वारा डॉक्टर्ड यानी एडिट की हुई बताया जा रहा है।

    यह नाटकीय घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ हाल ही में एक बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस अभियान के दौरान वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाया गया है जहाँ उन पर नार्को-टेररिज्म मादक पदार्थों के आतंकवाद के गंभीर आरोपों के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका वेनेजुएला की सत्ता पर तब तक नियंत्रण रखेगा जब तक वहां एक सुरक्षित और समझदारी पूर्ण सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता।

    दूसरी ओर वेनेजुएला के भीतर राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से अलग नजर आ रहा है। वहाँ की वर्तमान उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री डेल्सी रोड्रिग्ज को देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई है। 56 वर्षीय वकील और वरिष्ठ नेता रोड्रिगेज ने नेशनल असेंबली के समक्ष पद की शपथ ली जिसकी अध्यक्षता उनके भाई जॉर्ज रोड्रिगेज कर रहे हैं। ट्रंप के दावे ने अब इस अंतरिम सरकार की वैधता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा भले ही किसी आधिकारिक कानूनी ढांचे पर आधारित न हो लेकिन यह वेनेजुएला के संसाधनों और वहां की भविष्य की सत्ता पर अमेरिका के सख्त रुख को दर्शाता है। फिलहाल, व्हाइट हाउस या वेनेजुएला की नई अंतरिम सरकार की ओर से इस सोशल मीडिया पोस्ट पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है लेकिन इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता का माहौल जरूर पैदा कर दिया है।

  • IND vs NZ: कमेंट्री में संजय बांगर की भाषा पर मचा बवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस

    IND vs NZ: कमेंट्री में संजय बांगर की भाषा पर मचा बवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस


    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे मुकाबले के दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय बांगर एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। लाइव कमेंट्री के दौरान उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों और भाषा को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कई दर्शकों ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताया, जबकि कुछ लोग इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना मान रहे हैं।

    मैच के दौरान, जब बांगर ने एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर टिप्पणी की, उसका एक छोटा सा क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया। देखते ही देखते यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया और ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यूजर्स ने अपनी-अपनी राय देना शुरू कर दिया। कई दर्शकों ने कहा कि कमेंट्री करते समय शब्दों का चयन बेहद संवेदनशील होना चाहिए, खासकर जब करोड़ों लोग लाइव प्रसारण देख रहे हों।

    इस पर पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर की जिम्मेदारी को लेकर भी बहस हुई। आलोचकों का मानना है कि संजय बांगर जैसे अनुभवी खिलाड़ी और कोच से जिम्मेदार भाषा की उम्मीद की जाती है। उनका कहना है कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विषय है, और किसी भी तरह की टिप्पणी खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को प्रभावित कर सकती है। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि कमेंट्री का स्तर बनाए रखना ब्रॉडकास्टर्स और एक्सपर्ट्स की जिम्मेदारी है।

    वहीं, संजय बांगर के समर्थन में भी बड़ी संख्या में लोग सामने आए हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है।

    इस विवाद के पीछे एक और बात भी सामने आई है। कमेंटेटर वरुण आरोन ने मैच के दौरान सुझाव दिया था कि विकेटकीपर केएल राहुल को वाशिंगटन सुंदर से तमिल भाषा में बात करनी चाहिए, क्योंकि सुंदर को हिंदी समझने में थोड़ी मुश्किल होती है। जब वरुण आरोन ने इस पर बांगर से राय मांगी, तो उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रीय भाषा में थोड़ा ज्यादा विश्वास करता हूँ।” यही बयान सोशल मीडिया पर बहस का नया केंद्र बन गया।

    इस पूरे विवाद ने एक बार फिर क्रिकेट कमेंट्री में भाषा और शब्दों की मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी कई पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर अपने बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। लाइव टीवी पर बोले गए शब्द अक्सर रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं, जिससे किसी भी टिप्पणी की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।

    फिलहाल, संजय बांगर या ब्रॉडकास्टिंग चैनल की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चैनल आंतरिक रूप से मामले पर नजर बनाए हुए है। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्पष्टता और संतुलित प्रतिक्रिया बेहद जरूरी होती है, ताकि विवाद और ज्यादा न बढ़े।

    इस बीच, भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रहे मुकाबले की चर्चा भी इस विवाद के कारण थोड़ी पीछे छूट गई। जहां एक ओर मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुर्खियां बटोर रहा है, वहीं दूसरी ओर कमेंट्री बॉक्स से उठा यह बयान सोशल मीडिया पर बहस का केंद्र बन गया है।

    कुल मिलाकर, यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक मंच पर बोले गए हर शब्द की जिम्मेदारी होती है। खासकर क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में, जहां खिलाड़ी, कमेंटेटर और दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संजय बांगर या ब्रॉडकास्टर इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इससे कमेंट्री की भाषा को लेकर कोई नई गाइडलाइन सामने आती है या नहीं।

  • खंडवा के 7 गांवों में ज़हरीला पानी बना अभिशाप, फ्लोराइड संकट पर कांग्रेस हमलावर; बीजेपी विधायक मीडिया सवालों से बचते नजर आए

    खंडवा के 7 गांवों में ज़हरीला पानी बना अभिशाप, फ्लोराइड संकट पर कांग्रेस हमलावर; बीजेपी विधायक मीडिया सवालों से बचते नजर आए


    खंडवा । मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पीने के पानी को लेकर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया है। किल्लौद ब्लॉक के सात गांवों में लोग लंबे समय से फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बावजूद न तो प्रशासन ने ठोस कदम उठाए और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है।

    कांग्रेस ने खंडवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किल्लौद ब्लॉक के ग्रामीण कई दिनों से दूषित और फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं जिससे उन्हें गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते हुए हैंडपंप और ट्यूबवेल पर लाल निशान लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों की मेडिकल जांच कराई गई और न ही पीने के सुरक्षित पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है जैसा कि हाल ही में इंदौर में देखने को मिला। नेताओं ने कहा कि हादसे के बाद नेता और अधिकारी पीड़ित परिवारों के यहां पहुंचकर संवेदनाएं जताते हैं लेकिन समय रहते अगर व्यवस्था सुधारी जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीणों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।

    इस पूरे मामले पर जब स्थानीय बीजेपी विधायक नारायण पटेल से मीडिया ने सवाल पूछे तो उनका रवैया और भी विवादों में आ गया। पहले अन्य मुद्दों पर मीडिया से बातचीत करने वाले विधायक जैसे ही किल्लौद ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी का सवाल सामने आया बिना कोई जवाब दिए वहां से चले गए। मीडियाकर्मी लगातार सवाल पूछते रहे लेकिन विधायक ने चुप्पी साधे रखी। उनके इस रवैये ने न केवल विपक्ष बल्कि आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ा दी है।ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड की अधिक मात्रा ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई गांवों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.0 से 5.0 पीपीएम तक पाई गई है जबकि सुरक्षित सीमा इससे कहीं कम मानी जाती है। इसके चलते लोग फ्लोरोसिस दांत गिरने आंखों की रोशनी कमजोर होने बाल सफेद होने और जोड़ों में असहनीय दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई परिवारों में बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। साफ पानी की मांग और स्वास्थ्य जांच की अपील सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रह गई है।यह मामला केवल पानी की गुणवत्ता का नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही कार्रवाई होगी या फिर समय रहते ग्रामीणों को इस धीमे जहर से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल किल्लौद के गांवों में रहने वाले लोग उम्मीद और चिंता के बीच अपनी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

  • ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    नई दिल्ली। अगर आप भी जरूरत के समय पीएफ का पैसा निकालने की लंबी प्रक्रिया से परेशान रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़ी राहत लेकर आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए ऐसा बदलाव करने जा रहा है, जो पीएफ निकासी की परिभाषा ही बदल देगा। बहुत जल्द पीएफ का पैसा निकालने के लिए न तो दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे और न ही कई दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। अब एटीएम ही नहीं, बल्कि UPI के जरिए भी पीएफ की रकम सीधे निकाली जा सकेगी।अगर आप भी यह सोचकर परेशान रहते हैं कि जरूरत के वक्त पीएफ का पैसा निकालना इतना कठिन क्यों है, तो अब यह परेशानी जल्द ही खत्म होने वाली है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक ऐसा डिजिटल बदलाव लाने जा रहा है, जिससे पीएफ से पैसे निकालना आसान हो जाएगा।

    अप्रैल से शुरू हो सकती है नई सुविधा
    सूत्रों के मुताबिक, EPFO अप्रैल 2026 तक एटीएम और UPI आधारित पीएफ निकासी सुविधा शुरू कर सकता है। इसके लिए संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड कर रहा है। बीते साल श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने घोषणा की थी कि ईपीएफओ सदस्यों के लिए पीएफ निकासी को आसान और तेज बनाया जाएगा। इसी कड़ी में अब बिना किसी अन्य अनुमति के तय सीमा तक राशि निकालने की सुविधा देने की तैयारी है।
    EPFO 3.0 का ट्रायल पूरा
    जानकारी के अनुसार, EPFO 3.0 से जुड़े सभी मॉड्यूल्स का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। फिलहाल कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत सामने नहीं आई है, लेकिन इसके बावजूद संगठन किसी भी तरह की खामी से बचना चाहता है। यही वजह है कि हर एंगल से सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही है, ताकि सुविधा लागू होने के बाद खाताधारकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
    नए सिस्टम के तहत कर्मचारियों को पीएफ खाते से जुड़ा एक एटीएम कार्ड दिया जा सकता है, जिसके जरिए वे तय सीमा तक रकम सीधे एटीएम से निकाल सकेंगे। इसके अलावा UPI के माध्यम से भी पीएफ बैलेंस से भुगतान या ट्रांसफर संभव होगा। इससे इमरजेंसी में तुरंत कैश या डिजिटल पेमेंट करना आसान हो जाएगा।

    पहले ही मिल चुकी है 75% निकासी की छूट
    गौरतलब है कि कुछ महीने पहले EPFO ने सदस्यों को पीएफ में जमा राशि का 75 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा दी थी। इस कदम के बाद कर्मचारियों को आर्थिक संकट के समय बड़ी राहत मिली थी। अब ATM और UPI से निकासी की सुविधा शुरू होने के बाद यह प्रक्रिया और ज्यादा सरल और तेज हो जाएगी।

  • बजट फ्रेंडली एडवेंचर: हनुवंतिया टापू पर टेंट सिटी और वॉटर स्पोर्ट्स का अनुभव

    बजट फ्रेंडली एडवेंचर: हनुवंतिया टापू पर टेंट सिटी और वॉटर स्पोर्ट्स का अनुभव




    नई दिल्ली।
    यदि आप गोवा या मालदीव जैसी खूबसूरत छुट्टियों का सपना देख रहे हैं, लेकिन बजट या समय की कमी है, तो मध्यप्रदेश का हनुवंतिया टापू आपके लिए परफेक्ट विकल्प है। इंदिरा सागर बांध के विशाल जलाशय पर बसा यह ‘मिनी गोवा’ कम खर्च में समुद्र जैसी खूबसूरती, एडवेंचर और सुकून दोनों का अनुभव देता है। खासकर ठंड के मौसम में यहां का दृश्य और गतिविधियां पर्यटकों को बीच वेकेशन जैसा अहसास कराती हैं।

    हनुवंतिया टापू: एडवेंचर और प्रकृति का संगम
    हनुवंतिया टापू, जो खंडवा जिले में स्थित है, एडवेंचर प्रेमियों और नेचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। यहां वॉटर स्पोर्ट्स हब तैयार किया गया है, जहां पर्यटक क्रूज राइड, स्पीड बोट, जेट स्की, बनाना राइड और वॉटर सर्फिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।

    शांति पसंद करने वालों के लिए झील में बोटिंग का अनुभव किसी जादू से कम नहीं।

    इसके अलावा पैरासेलिंग और पैरामोटरिंग जैसी गतिविधियां टापू और आसपास फैले जलाशय का हवाई नजारा देती हैं। अगर आप एडवेंचर का और मज़ा लेना चाहते हैं तो ATV राइड (क्वाड बाइकिंग) और क्लब हाउस में मौजूद गेम्स आपकी यात्रा को और रोमांचक बना देंगे।

    प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं तो पास के बोरियानल टापू की सैर कर सकते हैं। यहां जंगल ट्रेकिंग और वाइल्डलाइफ का अनुभव मिलता है, जो नेचर लवर्स के लिए खास है।

    कैसे पहुंचे
    हनुवंतिया टापू तक पहुंचना बेहद आसान है:
    एयरपोर्ट: नज़दीकी एयरपोर्ट इंदौर, 150 किमी दूर। टैक्सी या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
    रेलवे: खंडवा स्टेशन सबसे नज़दीक, वहां से 50 किमी की दूरी तय करनी होती है।

    सड़क मार्ग: इंदौर, खंडवा और मुंदी होते हुए टापू तक यात्रा करना बेहद सुखद और खूबसूरत दृश्य अनुभव देता है।

    अनुमानित बजट
    अकेले यात्रा और बेसिक स्टे (2 दिन): ₹3,000–5,000
    कपल या परिवार सहित एडवेंचर: ₹8,000–12,000
    वॉटर स्पोर्ट्स: ₹300 से शुरू
    पैरासेलिंग और पैरामोटरिंग: ₹2,000 या अधिक

    रुकने की जगहें
    MPT हनुवंतिया रिजॉर्ट: झील के किनारे शानदार नजारे
    बजट विकल्प: मुंदी और खंडवा में गेस्ट हाउस और होटल्स
    टेंट सिटी: जल महोत्सव के दौरान लग्जरी कैंपिंग का अहसास

    खाना-पानी
    स्थानीय व्यंजन: मालवी थाली, दाल-बाफले, चूरमा, लड्डू
    नाश्ता: पोहा-जलेबी
    सर्दियों में: गरमा-गरम रतालू और भुट्टे का कीस

    गाइड और सुरक्षा
    स्थानीय गाइड आसानी से उपलब्ध; MPT रिजॉर्ट और टूरिज्म काउंटर से बुक करें
    जल महोत्सव में लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य
    ऑनलाइन बुकिंग पहले से कर लें और मोबाइल नेटवर्क की स्थिति जान लें

    क्यों है हनुवंतिया टापू पर जाना जरूरी?
    हनुवंतिया टापू आपकी बजट फ्रेंडली छुट्टियों की जरूरतों को पूरा करता है। चाहे आप एडवेंचर पसंद करते हों या सुकून, यहाँ की झील, टेंट सिटी, वॉटर स्पोर्ट्स और नेचर ट्रेकिंग सभी तरह के पर्यटकों को संतुष्ट करते हैं।

    इसे मिनी गोवा कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि यहां का अनुभव गोवा जैसी छुट्टी का अहसास देता है, लेकिन खर्च कम और सुविधाएं आपके बजट में आसान हैं।

    हनुवंतिया टापू की यात्रा न केवल रोमांचक है, बल्कि यह प्रकृति के करीब समय बिताने का भी मौका देती है। अगर आप इस सर्दियों में कम खर्च में शानदार एडवेंचर और नेचर का संगम अनुभव करना चाहते हैं, तो हनुवंतिया टापू आपका बेस्ट चॉइस है।