Author: bharati

  • ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    नई दिल्ली| ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सरकार ने बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों से आ रही सूचनाएं बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। देशभर में आर्थिक तंगी, महंगाई और दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग अब सीधे धार्मिक सत्ता और शासन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों पर मौत की धमकी, ‘अल्लाह का शत्रु’ करार

    शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर सख्त बयान देते हुए प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध’ का दोषी बताया। उन्होंने कहा कि जो भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहा है, उसे ईरानी कानून के तहत मौत की सजा दी जाएगी। अटॉर्नी जनरल ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और नरमी के ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के संकेतों के बाद माना जा रहा है कि देशभर में अब बड़ा और व्यापक क्रैकडाउन शुरू होने वाला है।

    मानवाधिकार संगठनों का दावा: 72 की मौत, 2300 से ज्यादा गिरफ्तार

    मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि गचसरन में बासिज बल के तीन सदस्य मारे गए हैं। इसके अलावा हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा बलों के जवानों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।

    अमेरिका का खुला समर्थन, ट्रंप प्रशासन की चेतावनी

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका का खुला समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के “बहादुर लोगों” के साथ खड़ा है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने कड़ा संदेश देते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘खेल’ न करे। विभाग ने कहा कि ट्रंप जो कहते हैं, उसका मतलब होता है और उसके नतीजे भी होते हैं।

    आर्थिक बदहाली से शुरू हुआ विद्रोह

    इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 14 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव ने आम जनता की जिंदगी मुश्किल कर दी है। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर है, जो धीरे-धीरे धार्मिक सत्ता के खिलाफ राजनीतिक विद्रोह का रूप ले चुका है।

  • Census 2027: डिजिटल जनगणना से बदलेगा भारत का राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत भविष्य, हर घर–हर व्यक्ति का बनेगा रिकॉर्ड

    Census 2027: डिजिटल जनगणना से बदलेगा भारत का राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत भविष्य, हर घर–हर व्यक्ति का बनेगा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली।
    भारत एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही Census 2027 न सिर्फ देश की 16वीं जनगणना होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना के रूप में दर्ज होगी। इस बार गिनती केवल आबादी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर घर, हर व्यक्ति और हर इलाके का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जो आने वाले वर्षों में देश की राजनीति, नीतियों और विकास की दिशा तय करेगा।

    इस ऐतिहासिक जनगणना में करीब 30 लाख (3 मिलियन) एंयूरेटर मैदान में उतरेंगे, जो Android और iOS आधारित मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे।

    पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एंयूरेशन की सुविधा भी दी जाएगी, जिसमें लोग 15 दिन के भीतर खुद अपने परिवार और घर से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि डेटा की सटीकता और पारदर्शिता भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ेगी।

    डिजिटल जनगणना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर सही लोगों तक पहुंचेंगी। अब यह साफ तौर पर पता चलेगा कि किस जिले, गांव या शहरी वार्ड में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे संसाधनों का बेहतर बंटवारा होगा और योजनाओं की प्रभावशीलता जमीन पर दिखाई देगी।

    Census 2027 का असर केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भी बेहद गहरा होगा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी GDP अनुमानों के साथ जब जनगणना के आंकड़े जुड़ेंगे, तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि आर्थिक विकास का असली लाभ आम नागरिक तक पहुंच रहा है या नहीं।

    यह डेटा सरकार को यह समझने में मदद करेगा कि किन क्षेत्रों में योजनाएं सफल रहीं और कहां सुधार की जरूरत है।

    राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह जनगणना बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। इसके आधार पर भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) का रास्ता साफ होगा। दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में जन्म दर नियंत्रण की वजह से जनसंख्या स्थिर है, जबकि उत्तर, मध्य और पूर्वी राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है। नए आंकड़ों के बाद संसदीय सीटों का संतुलन बदल सकता है, जिससे राजनीतिक शक्ति का केंद्र भी प्रभावित होगा। इसका सीधा असर चुनावी रणनीतियों, प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण पर पड़ेगा।

    Census 2027 में केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि घर की स्थिति, भाषा, धर्म, शिक्षा स्तर, रोजगार, व्यापार गतिविधियां, प्रवास, जन्म और मृत्यु दर जैसी अहम जानकारियां भी जुटाई जाएंगी।

    यह डेटा गांव से लेकर शहर और वार्ड स्तर तक उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान पहले से कहीं ज्यादा सटीक हो सकेगी। स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं की योजना इसी डेटा के आधार पर बनाई जा सकेगी।

    हालांकि, इतनी बड़ी डिजिटल कवायद के साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की उपलब्धता, तकनीकी प्रशिक्षण, डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता जैसे मुद्दे सरकार के सामने बड़ी परीक्षा होंगे। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण कोई वर्ग या क्षेत्र पीछे न छूट जाए।

    इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि Census 2027 भारत के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यह न केवल देश की सामाजिक विविधता और आर्थिक ताकत को सामने लाएगी, बल्कि नीति निर्माताओं को ठोस और विश्वसनीय डेटा देगी, जिसके आधार पर भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकेंगी।

    कुल मिलाकर, Census 2027 सिर्फ आंकड़ों की गिनती नहीं, बल्कि भारत की असली तस्वीर सामने लाने की कवायद है। हर घर और हर व्यक्ति की जानकारी जब डिजिटल रूप में दर्ज होगी, तब नीतियां ज्यादा सटीक, न्यायसंगत और असरदार बनेंगी। यह जनगणना भारत की राजनीति, विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देगी, जहां हर नागरिक की मौजूदगी नीति निर्माण में स्पष्ट रूप से नजर आएगी।

  • दिल्ली में बुजुर्ग NRI दंपति से डिजिटल ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 14 करोड़ रुपये की ठगी

    दिल्ली में बुजुर्ग NRI दंपति से डिजिटल ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 14 करोड़ रुपये की ठगी

    नई दिल्ली । डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसमें बुजुर्ग NRI दंपति को 18 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर ठगी का शिकार बनाया गया। यह मामला साइबर ठगी की गंभीरता को सामने लाता है। पीड़िता इंद्रा तनेजा और उनके पति ओम तनेजा ने बताया कि उन्हें 24 दिसंबर 2025 को खुद को TRAI अधिकारी बताने वाले ठग का फोन आया। कॉलर ने आरोप लगाया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आपत्तिजनक कॉल्स और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।ठगों ने दंपति को डराने के लिए लगातार दबाव बनाया और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। इसके चलते 77 वर्षीय महिला ने 8 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 14 करोड़ रुपये RTGS के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। कॉलर ने हर बार नए बहाने और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जिससे दंपति मानसिक रूप से दबाव में रहे और उन्होंने ठगों की मांगें मान ली।

    पीड़ित दंपति के अनुसार, वे 2015-16 में अमेरिका से रिटायर होकर भारत लौटे थे और समाज सेवा में जुड़े हुए हैं। उनके खातों में इतनी बड़ी राशि का अचानक ट्रांसफर होना, ठगों की योजनाबद्ध साजिश को उजागर करता है। इंद्रा तनेजा ने बताया कि ठगों ने उन्हें बार-बार फोन कर धमकाया और कानून का हवाला देते हुए डराया।10 जनवरी 2026 (शनिवार) को पीड़ित दंपति ने दक्षिण दिल्ली जिले के सीआर पार्क थाने में शिकायत दर्ज कराई और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर भी मामला दर्ज कराया। दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने इस मामले में FIR दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि की जा रही है कि किस तरह ठगों ने डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर दंपति को निशाना बनाया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की साइबर ठगी के मामले डिजिटल अरेस्ट और सरकारी पदों का डर दिखाकर किए जाते हैं, जिससे पीड़ित मानसिक दबाव में आकर बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। पुलिस और साइबर सुरक्षा अधिकारी लगातार इस प्रकार के मामलों को रोकने और आम लोगों को सतर्क करने के लिए अभियान चला रहे हैं।दिल्ली पुलिस ने दंपति को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खाते और ट्रांजेक्शन के विवरण को सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध कॉल पर विश्वास न करें। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल ठगी सिर्फ तकनीकी मामलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानसिक दबाव और डर के जरिये भी बड़े आर्थिक नुकसान कर सकती है।

  • शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर लाठीचार्ज जैसा हमला, भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन

    शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर लाठीचार्ज जैसा हमला, भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन

    नई दिल्ली| पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर शनिवार रात पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना इलाके में हमला किए जाने से राजनीतिक माहौल गर्मा गया। यह घटना उस वक्त हुई जब शुभेंदु अधिकारी पुरुलिया में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद अपने निर्वाचन क्षेत्र नंदीग्राम लौट रहे थे। अधिकारी के अनुसार, रात करीब 8:20 से 8:30 बजे के बीच गरबेटा थाना क्षेत्र के चंद्रकोना रोड बाजार के पास अचानक उनके काफिले को रोक दिया गया।

    तृणमूल समर्थकों पर हमले का आरोप

    भाजपा का आरोप है कि चौराहे पर पहले से मौजूद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के एक समूह ने काफिले को घेर लिया और शुभेंदु अधिकारी की गाड़ी पर बांस की लाठियों व डंडों से हमला किया। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी हुई और हालात तनावपूर्ण हो गए। बताया जा रहा है कि यह झड़प आम सड़क पर करीब एक घंटे तक चली, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप

    शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे और उन्होंने स्थिति को काबू में करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की। अधिकारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार की “हिंसा और दंडमुक्ति की संस्कृति” से उत्साहित लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में उन पर हमला किया। उन्होंने इसे कानून व्यवस्था की पूरी तरह विफलता बताया।

    पुलिस चौकी में धरने पर बैठे शुभेंदु अधिकारी

    हमले के बाद शुभेंदु अधिकारी सीधे चंद्रकोना रोड पुलिस चौकी पहुंचे और जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हमले के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं होती, वह पुलिस चौकी नहीं छोड़ेंगे। इस दौरान उन्होंने एक वकील की मदद से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हालात को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया, लोकतंत्र पर हमला बताया

    इस घटना पर भाजपा की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पूर्ण पतन हो चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके शासन में पुलिस प्रशासन पक्षपाती और कमजोर हो चुका है। मजूमदार ने कहा कि नंदीग्राम के विधायक और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर हुआ यह हमला सुनियोजित और राजनीतिक हिंसा का उदाहरण है।

    बढ़ता सियासी तनाव

    घटना के बाद पश्चिम मेदिनीपुर से लेकर कोलकाता तक सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया है, वहीं पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।

  • सोमनाथ मंदिर: 1000 साल पहले तोड़ा गया, फिर पुनर्निर्माण से स्थापित हुआ भारतीय गौरव का प्रतीक

    सोमनाथ मंदिर: 1000 साल पहले तोड़ा गया, फिर पुनर्निर्माण से स्थापित हुआ भारतीय गौरव का प्रतीक


    गुजरात । मैं सोमनाथ हूं, वो मंदिर जहां भगवान शिव के दर्शन से पूरा संसार शिवमय हो जाता है। आज का दिन मेरे लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि ठीक 1000 साल पहले आज के दिन ही मुझे पहली बार तोड़ा गया था। यह वह दिन था जब मुस्लिम आक्रांता महमूद गजनवी ने इस पवित्र स्थल पर हमला किया और मुझसे जुड़ी हर उस चीज को लूटा, जो मेरे गौरव का प्रतीक था। रक्त रंजित मुझसे जुड़े हर टुकड़े को लूटने के बाद, मुझे नष्ट कर दिया गया। इसके बाद के शताब्दियों में कई मुस्लिम शासकों ने मुझे बार-बार लूटा और हर बार मेरी संरचना को तोड़ा, लेकिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद, मुझे पुनर्निर्मित किया गया और फिर से जगमगाया।

    सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

    सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। शास्त्रों में इसे सबसे पहले स्थान पर रखा गया है, सौराष्ट्रे सोमनाथं च इस मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने स्वयं सोने से किया था फिर सूर्यदेव ने चांदी से और बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने लकड़ी से इसे सुंदर रूप दिया। सोलंकी राजपूत शासकों ने इस मंदिर को पत्थर से भव्य रूप प्रदान किया जो इसे आज के रूप में देख सकते हैं। सोमनाथ मंदिर की किवदंती चंद्रदेव के साथ जुड़ी हुई है जो भगवान शिव की तपस्या करने के लिए यहां आए थे। यही कारण है कि यह मंदिर चंद्र से जुड़ा एकमात्र शिव तीर्थ माना जाता है।

    महमूद गजनवी द्वारा हमले

    सोमनाथ मंदिर की सबसे दुखद घटना 1025 ईस्वी की है, जब महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर हमला किया और इसे लूटकर नष्ट कर दिया। गजनवी ने मंदिर के चंदन द्वार को लूटकर अफगानिस्तान के गजनी में मस्जिद में स्थापित कर दिया था। कई बार लूटने और तोड़ने के बावजूद मंदिर का आंतरिक गर्भगृह हमेशा शांति से बना रहा। स्वतंत्रता के बाद 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ का दौरा किया और गजनवी द्वारा लूटे गए चंदन द्वार को वापस लाकर मंदिर में स्थापित किया।

    मंदिर की अद्भुत वास्तुकला

    सोमनाथ मंदिर को चालुक्य शैली में बनाया गया है, और इसका शिखर 155 फीट ऊंचा है। मंदिर में सोने का कलश और विशाल मंडपम हैं जो इसे और भी भव्य बनाते हैं। बाणस्तंभ जो एक दिशासूचक स्तंभ है इसे मंदिर परिसर में देखा जा सकता है। इस स्तंभ पर समुद्र की दिशा में बने तीर का निशान भी स्पष्ट रूप से दिखता है। इस पर संस्कृत में लिखा है, आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत, अबाधित ज्योर्तिमार्ग यानी यहां से दक्षिण ध्रुव तक कोई भूमि नहीं है।

    समुद्र और शिव की कृपा

    सोमनाथ मंदिर अरब सागर के किनारे स्थित है, लेकिन एक अद्भुत बात यह है कि समुद्र की लहरें कभी भी मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच पाई हैं। स्थानीय पंडितों के अनुसार यह भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है। माना जाता है कि समुद्र महादेव की मर्यादा को कभी नहीं लांघता जिससे मंदिर सुरक्षित रहता है।

  • ‘बुर्के वाली PM बनी तो जय श्री राम भी नहीं बोल पाएंगे’, ओवैसी के बयान पर नितेश राणे भड़के

    ‘बुर्के वाली PM बनी तो जय श्री राम भी नहीं बोल पाएंगे’, ओवैसी के बयान पर नितेश राणे भड़के


    नई दिल्ली| AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर लगातार राजनीति हो रही है। इस मुद्दे पर अब भाजपा नेता नितेश राणे का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बुर्के वाली कल प्रधानमंत्री बन जाती है, कल ही हिंदू समाज का धर्मांतरण कर दिया जाएगा हम कल से ही जय श्री राम भी नहीं बोल पाएंगे, आई लव महादेव के पोस्टर नहीं लगा पाएंगे। महाराष्ट्र के मंत्री ने कहा कि ओवैसी हिजाबी महिला प्रधानमंत्री बनाने की बात करके इस देश को इस्लामिक देश बनाने की धमकी देने की कोशिश कर रहे हैं।

    मीडिया से बात करते हुए नितेश राणे ने कहा, “भौंकने वाले, कभी काटते नहीं है। देश को इस्लामी राज्य में बदलने का प्रयास बुर्का पहने प्रधानमंत्री की धमकी से शुरू होता है। ओवैसी हमें यह कहकर डराने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर कल कोई बुर्का पहनी महिला प्रधानमंत्री बन जाती है, तो सभी को जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाएगा और यह हिंदू राष्ट्र इस्लामी राज्य में बदल जाएगा। इसका मतलब है कि हम अपने घरों में पूजा भी नहीं कर पाएंगे, हम ‘जय श्री राम’ नहीं कह पाएंगे और हम ‘आई लव महादेव’ के बैनर भी नहीं लगा पाएंगे।” नितेश ने कहा, “यह धमकी देने वाले लोगों को महाराष्ट्र में खड़े रहने देना है या नहीं, यह हमें देखना होगा।”

    आपको बता दें, हैदराबाद के सांसद ने महाराष्ट्र में एक रैली के दौरान कहा था कि वह चाहते हैं कि किसी दिन एक हिजाबी महिला भारत की प्रधानमंत्री बने। पाकिस्तान में उन्होंने अपने संविधान में लिख दिया कि एक मुस्लिम ही प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान में लिखा है कि भारत का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है। उनके इस बयान के बाद काफी राजनैतिक बयानबाजी हुई।

    भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ओवैसी ऐसा ही चाहते हैं, तो सबसे पहले उन्हें अपनी पार्टी से ही इसकी शुरुआत करनी चाहिए। उन्हें अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद पर किसी महिला को बैठाना चाहिए। दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ओवैसी के इस बयान को दिन में तारे देखने जैसा बताया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि संविधान सभी को प्रधानमंत्री पद तक जाने की अनुमति देता है, लेकिन हमारा देश हिंदू प्रधान है, ऐसे में हिंदू को ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए।

  • भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    नई दिल्ली| लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने संगठन के गहरे संबंधों को खुलासा कर रहा है। कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने सैनिकों की अंतिम यात्रा में जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए आमंत्रित करती है। यह वीडियो किस समय का है, तारीख अभी मालूम नहीं चली। इसमें वह स्कूल के बच्चों को भाषण देता नजर आ रहा है। हालांकि, खुफिया स्रोतों ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि कर दी है।
    सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया, ‘पाकिस्तान की सेना मुझे जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए बुलाती है। क्या तुम्हें पता है कि भारत भी मुझसे डरता है?’ यह खुलासा पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंकवाद के भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को मजबूती देता है। यह घटना किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है कि एक आतंकी संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता बच्चों के स्कूल में जाकर युवा दिमागों को प्रभावित करे। पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर काम किया, जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी देखा गया था।

    आतंक का निर्यात करने में जुटा पाकिस्तान
    ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर में नए हमलों की तैयारी की थी, जिसे नई दिल्ली ने गंभीर चेतावनी करार दिया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह बताया गया है। ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था, जो आतंकी ढांचे को नष्ट करने का भारतीय अभियान था। अगर इसी तरह पाकिस्तान की ओर से आतंक का निर्यात जारी रहा तो इसकी नई फेज शुरू हो सकती है। यह भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए चिंता की बात है। ताजा वीडियो से पाकिस्तान की थू-थू हो रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना होगा।

  • मकर संक्रांति पर लाडली बहनों को बड़ी राहत: दिसंबर-जनवरी की दो किस्तें एक साथ मिलने की संभावना

    मकर संक्रांति पर लाडली बहनों को बड़ी राहत: दिसंबर-जनवरी की दो किस्तें एक साथ मिलने की संभावना


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना से जुड़ी महिलाओं के लिए मकर संक्रांति से पहले राहत भरी खबर सामने आ रही है। योजना के तहत दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की मासिक सहायता राशि एक साथ जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह प्रक्रिया पूरी होती है तो पात्र महिलाओं के बैंक खातों में कुल 3000 रुपये जमा हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

    योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, 1500 रुपये प्रतिमाह की यह आर्थिक सहायता केवल उन महिलाओं को मिलेगी जिन्होंने ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर ली है। सरकार ने लाभार्थियों के सत्यापन और अपात्र लोगों को योजना से बाहर करने के उद्देश्य से दिसंबर के अंत तक ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया था। जिन खातों का सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, उनकी किस्त फिलहाल रोकी जाने की संभावना बनी हुई है।बीते कुछ महीनों में इस योजना के तहत किस्तों के भुगतान में देरी देखी गई है। चुनावी गतिविधियों और तकनीकी कारणों के चलते समय पर राशि ट्रांसफर नहीं हो सकी। पहले यह अनुमान लगाया गया था कि तीन महीनों की बकाया राशि एक साथ जारी होगी, लेकिन हाल ही में केवल एक माह की किस्त ही लाभार्थियों के खातों में पहुंच पाई। इसके बाद दिसंबर और जनवरी की किस्तों को लेकर महिलाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    मकर संक्रांति को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों और पोस्टरों ने उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि त्योहार से पहले ही दो महीनों की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी। वहीं, विपक्षी दल इस दावे को राजनीतिक प्रचार से जोड़कर देख रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल यही कहा जा रहा है कि भुगतान की प्रक्रिया बजट और तकनीकी मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी।लाडकी बहिण योजना राज्य की सबसे बड़ी सामाजिक सहायता योजनाओं में शामिल है। इसके तहत 21 से 65 वर्ष की आयु की उन महिलाओं को मासिक सहायता दी जाती है, जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होती है। वर्तमान में लगभग 2.4 करोड़ महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं, जिससे राज्य सरकार पर हर महीने हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ता है।

    सरकारी सूत्रों का कहना है कि योजना को लेकर किसी भी प्रकार की अंतिम जानकारी केवल आधिकारिक माध्यम से साझा की जाएगी। लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अपने बैंक खाते तथा सरकारी पोर्टल पर नियमित अपडेट चेक करते रहें।फिलहाल मकर संक्रांति से पहले दो किस्तें एक साथ मिलने की उम्मीद ने महिलाओं में उत्सुकता बढ़ा दी है। सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा होने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि यह राशि कब और किन शर्तों पर खातों में पहुंचेगी।

  • आज की सरकारी नौकरी: हरियाणा, राजस्थान और प्रसार भारती में 136 पदों पर भर्ती, ऑनलाइन आवेदन जारी

    आज की सरकारी नौकरी: हरियाणा, राजस्थान और प्रसार भारती में 136 पदों पर भर्ती, ऑनलाइन आवेदन जारी


    नई दिल्ली । सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए आज की ताज़ा खबर बेहद महत्वपूर्ण है। हरियाणा लोक सेवा आयोगHPSC राजस्थान कर्मचारी चयन आयोगRSSB और प्रसार भारती ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचनाएं जारी की हैं। कुल मिलाकर इन भर्तियों के तहत 136 पद भरे जाएंगे जिनमें असिस्टेंट इंजीनियर सुपरवाइजर और मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव शामिल हैं। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित तिथियों के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    सबसे पहले बात करें हरियाणा लोक सेवा आयोग की। HPSC ने असिस्टेंट इंजीनियर के 50 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। आवेदन प्रक्रिया 13 जनवरी 2026 से शुरू होकर 12 फरवरी 2026 शाम 5 बजे तक चलेगी। उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट hpsc.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग डिग्री अनिवार्य है। साथ ही उम्मीदवारों को 10वीं तक हिंदी या संस्कृत का ज्ञान होना चाहिए। आयु सीमा 18 से 42 वर्ष निर्धारित की गई है जबकि आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट मिलेगी। चयनित उम्मीदवारों को पे लेवल के अनुसार 53100 से 167800 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा।

    वहीं राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग ने सुपरवाइजरपर्यवेक्षक के 72 पदों पर भर्ती निकाली है। यह भर्ती विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों के लिए है। आवेदन प्रक्रिया पहले से ही शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 4 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक उम्मीदवार rssb.rajasthan.gov.in या राज्य सरकार के SSO पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस पद के लिए ग्रेजुएशन डिग्री के साथ कंप्यूटर कोर्स का सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। आयु सीमा 18 से 40 वर्ष रखी गई है जबकि SC ST और OBC वर्ग को छूट दी जाएगी। चयन के बाद उम्मीदवारों को पे मैट्रिक्स लेवल-7 के तहत वेतन मिलेगा।

    इसके अलावा राष्ट्रीय प्रसारक प्रसार भारती ने मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के 14 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। ये नियुक्तियां विभिन्न दूरदर्शन और आकाशवाणी केंद्रों के लिए होंगी। आवेदन की अंतिम तिथि 21 जनवरी 2026 है। उम्मीदवारों के पास MBA या मार्केटिंग में पीजी डिप्लोमा और कम से कम एक वर्ष का कार्य अनुभव होना चाहिए। आयु सीमा 35 वर्ष से कम रखी गई है। चयनित उम्मीदवारों को शहर के आधार पर 35000 से 50000 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा।इन भर्तियों से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र और राज्य स्तर पर रोजगार के अवसर लगातार सामने आ रहे हैं। नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी नई भर्तियों की संभावना जताई जा रही है इसलिए उम्मीदवार सतर्क और तैयार रहें।

  • EMI की जिम्मेदारी किसकी? जानें व्यक्ति की मौत के बाद बैंक क्या कर सकता है

    EMI की जिम्मेदारी किसकी? जानें व्यक्ति की मौत के बाद बैंक क्या कर सकता है

    नई दिल्ली|  किसी भी तरह के लोन में कई तरह की चीजें शामिल होती हैं, जिसकी वजह से लोन आज के डिजिटल युग में भी काफी पेचीदा प्रोसेस बना हुआ है। जिन लोगों को आसानी से लोन मिल जाता है, उन्हें इस पेचीदा प्रोसेस के बारे में मालूम नहीं चल पाता। लेकिन, जिन लोगों के लोन ऐप्लिकेशन को बैंक बार-बार रिजेक्ट कर देते हैं, वे इस समस्या को बहुत अच्छे से जानते हैं। लोन के लिए अप्लाई करने से लेकर लोन की पूरी पेमेंट होने तक ये एक बहुत लंबा प्रोसेस होता है। अगर लोन चलते-चलते किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो क्या होगा? यहां हम जानेंगे कि अगर लोन लेने के बाद किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में बैंक किस व्यक्ति से लोन की वसूली करेगा?
    उधारकर्ता की मृत्यु हो जाए तो क्या होता है आगे का प्रोसेस
    नियमों के मुताबिक, अगर लोन लेने के बाद किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो बैंक सबसे पहले उस लोन अकाउंट के को-ऐप्लिकैंट से संपर्क करेगा। अगर लोन के लिए कोई को-ऐप्लिकैंट ही नहीं है या फिर को-ऐप्लिकैंट लोन की भरपाई के लिए असमर्थ है तो फिर बैंक लोन के लिए गारंटर बने व्यक्ति से संपर्क करती है। अगर गारंटर भी लोन की भरपाई के लिए मना कर दे तो बैंक फिर मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी से संपर्क करते हैं और उनसे लोन की बकाया राशि के समय-समय पर भुगतान करने की अपील करते हैं। को-ऐप्लिकेंट, गारंटर और कानूनी उत्तराधिकारी में से कोई भी लोन की भरपाई करने में समर्थ नहीं है तो बैंक वसूली के लिए मजबूरी में आखिरी विकल्प पर काम करना शुरू कर देते हैं।

    वसूली के लिए किस हद तक जा सकते हैं बैंक
    लोन की वसूली के लिए बैंकों के पास आखिरी विकल्प के तौर पर मृतक की संपत्ति को अपने कब्जे में लेना है। जब लोन अकाउंट के को-ऐप्लिकेंट, गारंटर और कानूनी उत्तराधिकारी लोन का भुगतान करने में असमर्थता जताते हैं तो ऐसे मामलों में बैंकों के पास ये अधिकार होते हैं कि वो मृतक की संपत्ति को बेचकर कर्ज की वसूली कर सकते हैं। होम लोन और ऑटो लोन के मामले में बैंक सीधे-सीधे मृतक के घर या गाड़ी को अपने कब्जे में लेते हैं और फिर नीलामी आयोजित कर उसे बेचकर लोन की वसूली करते हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पर्सनल लोन या फिर कोई अन्य लोन लिया है तो ऐसे मामलों में बैंक उसकी किसी अन्य संपत्ति को नीलामी में बेचकर अपने पैसों की वसूली करते हैं।