Author: bharati

  • 16 से 24 जनवरी भोपाल में महाभारत समागम: शांति और संवाद का वैश्विक संदेश

    16 से 24 जनवरी भोपाल में महाभारत समागम: शांति और संवाद का वैश्विक संदेश


    भोपाल । भोपाल का भारत भवन 16 से 24 जनवरी तक एक ऐतिहासिक महाभारत समागम का आयोजन करने जा रहा है जो न केवल भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़ा होगा बल्कि शांति और संवाद का संदेश भी देगा। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा और युद्ध की समस्याओं के बीच एक महत्वपूर्ण पहल है जहां विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित रंग समूह एकत्र होंगे। इस नौ दिवसीय महोत्सव में भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया श्रीलंका और जापान जैसे देशों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

    इस महाभारत समागम के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में नाटक नृत्य-नाट्य कठपुतली कार्यशालाएं लोक और शास्त्रीय प्रस्तुतियां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और इमर्सिव डोम थिएटर जैसे विविध रूपों में महाभारत के संदेशों को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य उद्देश्य होगा युद्ध के विरुद्ध शांति और संवाद का प्रबल संदेश देना। वीर भारत न्यास के आयोजन में देश और विदेश से कलाकार शांति के प्रयासों को सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत करेंगे।

    वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के अनुसार यह आयोजन वैश्विक संघर्षों और सभ्यताओं के टकराव के वर्तमान दौर में एक मंच प्रदान करेगा जहां शांति और संवाद के जरिए एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। भारत भवन को इस आयोजन के लिए एक आदर्श स्थल माना गया है क्योंकि यहां से शांति का संदेश दुनिया तक पहुंचाने की विशेष क्षमता है।

    महाभारत जिसे आम तौर पर एक युद्ध कथा के रूप में जाना जाता है इस आयोजन के जरिए केवल युद्ध की कथा नहीं बल्कि मानवता विवेक और करुणा की महागाथा के रूप में प्रस्तुत की जाएगी। श्री कृष्ण के संवाद आधारित प्रयासों को आज के समय की वैश्विक परिस्थितियों में प्रासंगिक माना गया है। यह आयोजन दर्शकों को यह समझाएगा कि युद्ध कभी समाधान नहीं हो सकता और संवाद और समझौते से ही समस्याओं का समाधान संभव है।

    आयोजन में महाभारत के महत्वपूर्ण पहलुओं को जीवन्त रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। नेपथ्य कला अस्त्र-शस्त्र चक्रव्यूह और पताकाओं की प्रदर्शनी महाभारत के दृश्य संसार को दर्शकों तक पहुंचाएगी। इसके अलावा महाभारत पर आधारित चित्र प्रदर्शनी और भारतीय कठपुतली कला भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी।

    इस समागम में सभ्यताओं की सांस और भूली बिसरी सभ्यताएं जैसी पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा जो सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे। यह आयोजन न केवल भारतीय दर्शकों के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर होगा ताकि वे भारतीय महाकाव्य महाभारत के गहरे संदेशों को समझ सकें और शांति की दिशा में योगदान दे सकें।

  • भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर

    भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर


    भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत के बाद मध्य प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल में भी कई इलाकों से गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें सामने आने लगी हैं। हालात को देखते हुए नगर निगम का अमला पानी के सैंपल लेने और वाल्व सुधारने में जुटा है। वहीं, मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने खुद मैदान में उतरकर शहर की पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया, जहां कई चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आईं।
    कांग्रेस नेताओं ने सबसे पहले गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के बरखेड़ा पठानी इलाके में स्थित पानी की टंकी का निरीक्षण किया। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला टंकी पर चढ़े और पूरे निरीक्षण का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इस दौरान टंकी के अंदर और आसपास गंदगी पाई गई। झूमरवाला ने कहा कि इसी टंकी से रोजाना हजारों लोगों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है और यदि यहां साफ-सफाई नहीं होगी, तो लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

    झूमरवाला ने कहा कि दूषित पानी से संक्रमण और गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

    उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भोपाल में भी इंदौर जैसी दुखद घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि टंकी के आसपास गंदगी फैली हुई है और शराबियों का जमावड़ा भी रहता है, जो हालात को और खराब करता है। झूमरवाला ने कहा कि यह वक्त सिर्फ चेतावनी देने का नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करने का है। पानी जीवन है और इसके साथ किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इसके बाद नगर निगम के कांग्रेसी पार्षद श्यामला हिल्स स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पहुंचे। इस निरीक्षण में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और मो. जहीर सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद रहे।

    निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि श्यामला हिल्स के फिल्टर प्लांट का रॉ वॉटर सीधे बड़े तालाब में मिल रहा है, जबकि इसी बड़े तालाब से शहर के कई इलाकों में पीने का पानी सप्लाई किया जाता है।

    नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि रॉ वॉटर का बड़े तालाब में मिलना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने दावा किया कि निरीक्षण के समय वाटर ट्रीटमेंट प्लांट चालू हालत में नहीं था और सिर्फ कागजी कार्रवाई ही दिखाई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पानी का नियमित सैंपल लिया जाता है या नहीं, इसकी कोई रिपोर्ट मौके पर उपलब्ध नहीं कराई गई।

    जकी ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट में नियुक्त केमिस्ट के पास रसायन शास्त्र में ग्रेजुएशन की अनिवार्य योग्यता होनी चाहिए, लेकिन इस संबंध में भी संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता जांच में भी खामियां सामने आईं और फिल्ट्रेशन के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन होता नहीं दिखा।

    कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की कि भोपाल की सभी पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट की तुरंत जांच कराई जाए, नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए और जहां भी लापरवाही पाई जाए, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि इंदौर की घटना से सबक लेते हुए राजधानी में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • ग्रीनलैंड पर बयानबाज़ी से बढ़ा वैश्विक तनाव, डेनमार्क ने नाटो की एकता पर जताई गहरी चिंता

    ग्रीनलैंड पर बयानबाज़ी से बढ़ा वैश्विक तनाव, डेनमार्क ने नाटो की एकता पर जताई गहरी चिंता


    नई दिल्ली।ग्रीनलैंड को लेकर हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए तनाव को जन्म दे दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए नाटो की एकता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने की आशंका जताई है। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी सहयोगी देश ने ग्रीनलैंड पर दबाव बनाने या बल प्रयोग करने की कोशिश की, तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होगी, बल्कि नाटो जैसे सामूहिक सुरक्षा गठबंधन की नींव भी कमजोर पड़ सकती है।

    प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सार्वजनिक टिप्पणी में ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताते हुए उस पर नियंत्रण की इच्छा जाहिर की थी। हालांकि यह बयान किसी आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है लेकिन इसके बाद यूरोप और नाटो से जुड़े देशों में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई देशों ने इसे सहयोगी देशों के बीच भरोसे के सिद्धांत के खिलाफ बताया है।ग्रीनलैंड भले ही जनसंख्या के लिहाज़ से छोटा इलाका हो, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक राजनीति में बेहद अहम बनाती है। यह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो का हिस्सा भी है। आर्कटिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण ग्रीनलैंड से सैन्य निगरानी, मिसाइल चेतावनी प्रणाली और समुद्री मार्गों पर नजर रखना अपेक्षाकृत आसान होता है। जलवायु परिवर्तन के चलते आर्कटिक में नए समुद्री रास्तों के खुलने की संभावना ने इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ा दी है।

    डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने नाटो के मूल सिद्धांतों की याद दिलाते हुए कहा कि यह संगठन आपसी भरोसे, सामूहिक सुरक्षा और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित है। यदि किसी सदस्य या सहयोगी देश की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती दी जाती है, तो इससे नाटो की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हालात में नाटो केवल एक औपचारिक संगठन बनकर रह जाएगा, जिसकी वैश्विक भूमिका सीमित हो सकती है।इस पूरे विवाद पर ग्रीनलैंड की ओर से भी स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि उनके देश का भविष्य किसी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय बयानबाज़ी से तय नहीं होगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड के लोग अपने राजनीतिक और आर्थिक फैसले खुद लेने में सक्षम हैं और किसी भी तरह की अटकलों से डरने की जरूरत नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियां, दुर्लभ खनिज संसाधनों की उपलब्धता और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुलने वाले नए समुद्री मार्ग इस इलाके को वैश्विक शक्तियों के लिए अहम बनाते हैं। इसके अलावा, ग्रीनलैंड में पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचा भी इसकी रणनीतिक उपयोगिता को बढ़ाता है।फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानों और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित है, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में बढ़ता तनाव साफ नजर आ रहा है। डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में नाटो और उसके सहयोगी देशों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर

    मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षक चयन परीक्षाओं में घोषित किए गए पदों की संख्या पर बढ़ते विरोध के चलते मंगलवार को भोपाल में एक बड़ा आंदोलन हुआ। प्रदेशभर से लगभग 2000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे और लोक शिक्षण संचालनालय DPI तथा जनजातीय कार्य विभाग का घेराव करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हजारों खाली पदों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बहुत कम घोषित की गई है जिससे न सिर्फ योग्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल रहा बल्कि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

    आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो वे अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे कठोर चरणों में बदल देंगे। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में किया जा रहा है।

    प्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षक के लिए लगभग 99197 और प्राथमिक शिक्षक के लिए 131152 पद रिक्त हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया में केवल 10800 और 13089 पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं जो खाली पदों के मुकाबले बेहद कम हैं।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि इन कम पदों के कारण लाखों योग्य उम्मीदवार अपनी योग्यताएं साबित नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए कई विषयों में शून्य पद घोषित करने का भी आरोप लगाया है जिससे इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा और आक्रोश है। उनका कहना है कि यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और इससे आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

    शिक्षक संगठनों ने भी इस समस्या को गंभीरता से उठाया है क्योंकि यह स्थिति छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डाल रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि परीक्षा परिणामों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को सुधारने की बात की गई है लेकिन पर्याप्त नियुक्तियां किए बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।

    अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती के सभी विषयों में कम से कम 3000 पदों की वृद्धि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 25000 करना और द्वितीय काउंसलिंग जल्द शुरू करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक शिक्षक भर्ती 2025 पदों के साथ पूरी नहीं हो जाती तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए।

    यह आंदोलन केवल पदों की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और हजारों युवा उम्मीदवारों को रोजगार देने का एक संघर्ष बन चुका है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या यह आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल हो पाता है

  • भोपाल में बेकाबू कार का कहर: नशे में धुत चालक ने कई वाहनों को मारी टक्कर, पेड़ से टकराकर रुकी कार

    भोपाल में बेकाबू कार का कहर: नशे में धुत चालक ने कई वाहनों को मारी टक्कर, पेड़ से टकराकर रुकी कार




    भोपाल।
     भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर कई वाहनों को टक्कर मारती हुई आखिरकार एक पेड़ से जा टकराई। यह घटना नानके पेट्रोल पंप के पास दोपहर करीब 3:45 बजे की है। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने कार चालक को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार चालक नशे की हालत में था और लापरवाही से वाहन चला रहा था। पेड़ से टकराने से पहले कार ने दो से तीन अन्य वाहनों को टक्कर मारी, जिससे सड़क पर हड़कंप मच गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ।

    घटना की सूचना मिलते ही टीटी नगर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। पुलिस ने भीड़ से चालक को छुड़ाकर हिरासत में ले लिया। आरोपी चालक की पहचान हरीश मालवीय के रूप में हुई है, जो एमपी 04 जेडए 2299 नंबर की कार चला रहा था।

    टीटी नगर थाना पुलिस के एसआई राघवेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि आरोपी चालक अत्यधिक नशे में था। वह नानके पेट्रोल पंप से जवाहर चौक की ओर जा रहा था, इसी दौरान उसने नियंत्रण खो दिया और रास्ते में खड़े व चल रहे दो से तीन वाहनों को टक्कर मार दी।

    इसके बाद उसकी कार सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    पुलिस के अनुसार, इस घटना में करीब 6 से 7 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है और किसी की हालत गंभीर नहीं है। अत्यधिक नशे में होने के कारण आरोपी चालक खुद के बारे में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार की रफ्तार और ज्यादा होती, तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था। घटना के बाद कुछ समय के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित रहा।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया है और उसके खिलाफ नशे में वाहन चलाने, लापरवाही से गाड़ी चलाने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था या नहीं और वाहन की स्थिति क्या थी।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नशे की हालत में वाहन चलाना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि दूसरों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। इस घटना को लेकर इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी दोषियों पर कार्रवाई के संकेत

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी दोषियों पर कार्रवाई के संकेत


    इंदौर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मंगलवार को दूषित पेयजल के कारण होने वाली मौतों और बीमारियों को लेकर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने यह कहा कि इस घटना ने इंदौर की छवि को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है। जो शहर देश का सबसे स्वच्छ माना जाता था आज वही दूषित पानी के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल सिर्फ इंदौर के लिए नहीं बल्कि पूरे राज्य का मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी स्थिति में नकारा नहीं जा सकता।

    कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया कि इस मामले में जवाब दाखिल कर स्थिति की रिपोर्ट पेश करें। इसके साथ ही यह भी कहा कि अगर भविष्य में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय करनी पड़ी तो अदालत इसमें कोई संकोच नहीं करेगी। यदि पीड़ितों को मुआवजा कम दिया गया है तो अदालत उचित निर्देश भी जारी करेगी।

    उधर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता मंगलवार को भागीरथपुरा पहुंचे। पुलिस की तगड़ी सुरक्षा के बीच कांग्रेसी नेता वहां मृतकों के परिजनों से मिले और सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। पटवारी ने इंदौर के प्रभारी मंत्री महापौर और अन्य नेताओं से इस्तीफा भी मांगा।

    अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है और 110 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। बीमार होने वाले 421 लोगों में से 311 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है जबकि 15 मरीज आईसीयू में हैं। अस्पतालों में उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले से की गई शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जिससे यह संकट उत्पन्न हुआ। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में बताया कि 2022 में महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था लेकिन फंड न मिलने के कारण इस काम में देरी हो रही है। इसके अलावा 2017-18 में किए गए पानी के 60 सैंपल टेस्ट में से 59 पीने योग्य नहीं पाए गए थे लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को 15 जनवरी को एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार शामिल है और इसे नज़रअंदाज़ करना गंभीर मामला है।

    अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले से जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों में बांटा गया है जिनमें प्रभावित लोगों के लिए तत्काल निर्देश सुधारात्मक उपाय जिम्मेदारी तय करना अनुशासनात्मक कार्रवाई मुआवजा स्थानीय निकायों को निर्देश और जन-जागरूकता और पारदर्शिता शामिल हैं।

  • लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निवेशकों में सतर्कता

    लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निवेशकों में सतर्कता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी जारी रहा। मंगलवार को बाजार की शुरुआत से ही दबाव का माहौल देखने को मिला और कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक टूट गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 फिसलकर 26,200 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। हैवीवेट शेयरों में मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 376 अंक की गिरावट के साथ 85,063 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 75 अंक टूटकर 26,175 पर आ गया। केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों का मनोबल और प्रभावित हुआ। व्यापक बाजार में गिरावट से साफ संकेत मिला कि फिलहाल निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव हैवीवेट शेयरों में बिकवाली के कारण देखने को मिला। बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में कमजोरी रही। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में आई तेज़ी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ा।

    वैश्विक मोर्चे पर भी कुछ ऐसे संकेत मिले, जिन्होंने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिका की ओर से भारत पर संभावित टैरिफ बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चाओं ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा किया। इसका असर खासतौर पर निर्यात आधारित कंपनियों और सेक्टर्स पर देखने को मिला। निवेशकों को आशंका है कि अगर व्यापारिक तनाव बढ़ता है, तो इसका असर कंपनियों की आय और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया। जनवरी के शुरुआती कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। इससे बाजार में तरलता पर दबाव बढ़ा है और घरेलू निवेशक भी सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का असर भी घरेलू शेयर बाजार पर पड़ा। कुछ देशों में राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकने के लिए मजबूर किया है। इसका नतीजा यह रहा कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।इस बीच इंडिया VIX, जिसे बाजार की अस्थिरता का पैमाना माना जाता है, में भी लगातार तेजी देखी गई। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी को 26,100 से 26,150 के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊपर की ओर 26,400 के आसपास कड़ी रुकावट है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रहें और किसी भी फैसले में लंबी अवधि के नजरिए को प्राथमिकता दें।

  • भोपाल में जल्द शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी बिना चीरफाड़ के पोस्टमॉर्टम की दिशा में बड़ा कदम

    भोपाल में जल्द शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी बिना चीरफाड़ के पोस्टमॉर्टम की दिशा में बड़ा कदम


    भोपाल । भोपाल में जल्द ही एक नई और आधुनिक तकनीक की शुरुआत होने जा रही है जो पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल सकती है। एम्स भोपाल में वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त कर चुका है और अब इसे वित्त मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। अगर यह परियोजना मंजूर हो जाती है तो एम्स भोपाल मध्य प्रदेश का पहला अस्पताल होगा जहां यह तकनीक लागू की जाएगी।

    वर्चुअल ऑटोप्सी जिसे “नॉन-इवेजिव पोस्टमॉर्टम” भी कहा जाता है शव की सर्जिकल कट के बिना जांच करने का एक तरीका है। जापान और अन्य विकसित देशों में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसका मुख्य लाभ यह है कि इसमें शव को बिना किसी शारीरिक नुकसान के पूरी तरह से स्कैन किया जाता है। वर्चुअल ऑटोप्सी से प्राप्त रिपोर्ट डिजिटल साक्ष्य के रूप में बेहद मजबूत होती है और इनका उपयोग कानूनी मामलों में भी प्रमाण के तौर पर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति की मौत नस में ब्लॉकेज के कारण हुई है तो रिपोर्ट में उस नस की 3डी तस्वीर मौजूद होगी जिसमें तीन स्तरों पर ब्लॉकेज की स्थिति दिखाई जाएगी।

    एम्स भोपाल के लिए यह परियोजना इसलिए भी खास है क्योंकि पारंपरिक पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में शव की चीरफाड़ होती है जो कई बार परिजनों के लिए मानसिक आघात का कारण बन सकती है। विशेष रूप से कुछ धार्मिक और सामाजिक कारणों से परिवार इस प्रक्रिया के खिलाफ होते हैं और ऐसे मामलों में विवाद भी उत्पन्न हो सकता है। वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से परिजनों को शव सही अवस्था में सौंपा जा सकेगा और उन्हें किसी तरह की मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया पारंपरिक पोस्टमॉर्टम से काफी तेज होती है। जहां पारंपरिक प्रक्रिया में कई घंटे लग जाते हैं वहीं वर्चुअल ऑटोप्सी केवल आधे घंटे में पूरी हो सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से ट्रॉमा केस सड़क हादसों और संक्रामक बीमारियों से जुड़ी मौतों के मामलों में अत्यधिक प्रभावी मानी जा रही है। कोविड जैसी महामारियों के दौरान यह तकनीक स्वास्थ्यकर्मियों के लिए संक्रमण के खतरे को भी कम करती है।

    वर्तमान में भारत में वर्चुअल ऑटोप्सी का उपयोग कुछ चुनिंदा स्थानों पर किया जा रहा है जैसे कि एम्स दिल्ली और शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस। अब भारत सरकार ने 2026 तक देशभर में 38 वर्चुअल ऑटोप्सी केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस तकनीक को लागू करने से पूरे देश में पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सांसद आलोक शर्मा ने इस परियोजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और आशा जताई है कि जल्दी ही इसके लिए फंड जारी किया जाएगा। एम्स भोपाल के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है जो न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में चिकित्सा विज्ञान में एक नई दिशा की शुरुआत कर सकता है।

  • साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी

    साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी


    नई दिल्ली। जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। यह घटना 5 जनवरी 2020 की हिंसक रात की छठी बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई।

    जेएनयू प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना। सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 30-35 छात्र इस नारेबाजी में शामिल थे, जिसमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान और शुभम शामिल हैं।

    प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने को शिकायत पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग की। पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और नारे जानबूझकर और दोहराए गए, जो सामान्य अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं।

    छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि 5 जनवरी की हिंसक रात और ABVP के कथित हमले को याद करने के लिए एक सभा थी। उन्होंने हिंसा और भड़काऊ विचारधारा की निंदा की और कहा कि नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    वहीं, ABVP ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि नारे लगाने वाले छात्रों की मानसिकता हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्रशासन की ओर से प्राप्त नहीं हुई है।

    जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच के बीच अंतर बहुत बारीक होता है। विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल और परिसर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और विवादास्पद गतिविधियों से दूर रहें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
  • आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड

    आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत के साथ आधार कार्ड से जुड़ा एक अहम बदलाव लागू हो गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणUIDAI ने आधार PVC कार्ड बनवाने की फीस में वृद्धि कर दी है। अब नागरिकों को आधार PVC कार्ड के लिए पहले की तरह ₹50 नहीं, बल्कि ₹75 शुल्क देना होगा। यह नई दरें 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुकी हैं। UIDAI ने साफ किया है कि यह फैसला मैटेरियल कॉस्ट, प्रिंटिंग खर्च और सुरक्षित डिलीवरी लागत में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    UIDAI के अनुसार, आधार PVC कार्ड एक आधुनिक, टिकाऊ और सुविधाजनक विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह कार्ड सामान्य प्लास्टिक कार्ड की तरह मजबूत होता है, जिसे आसानी से वॉलेट में रखा जा सकता है। कागज़ी आधार लेटर की तुलना में यह पानी, नमी और टूट-फूट से अधिक सुरक्षित रहता है। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच PVC आधार कार्ड की मांग लगातार बढ़ी है। बढ़ती मांग के साथ उत्पादन, प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत भी बढ़ी, जिसके चलते शुल्क में संशोधन करना जरूरी हो गया।

    UIDAI ने यह भी बताया कि आधार PVC कार्ड में कई अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इसे ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं। इसमें सिक्योर QR कोड, होलोग्राम, माइक्रोटेक्स्ट और घोस्ट इमेज जैसे फीचर्स दिए जाते हैं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। प्राधिकरण ने नागरिकों को यह चेतावनी भी दी है कि बाजार में निजी एजेंसियों द्वारा छपवाए गए PVC आधार कार्ड मान्य नहीं होते। केवल UIDAI द्वारा जारी किया गया आधार PVC कार्ड ही आधिकारिक और वैध माना जाएगा।

    आधार PVC कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बेहद सरल और सुविधाजनक है। इच्छुक नागरिक UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आधार नंबर और कैप्चा दर्ज करना होता है, जिसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP से लॉगिन किया जाता है। लॉगिन के बाद विकल्प पर क्लिक कर विवरण की पुष्टि करनी होती है। अंतिम चरण में ऑनलाइन भुगतान करना होता है, जिसमें क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। भुगतान सफल होते ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

    UIDAI के मुताबिक, भुगतान के बाद लगभग पांच कार्यदिवस के भीतर आधार PVC कार्ड प्रिंट कर भारतीय डाक को सौंप दिया जाता है। इसके बाद स्पीड पोस्ट के जरिए कार्ड सीधे आवेदक के पते पर भेज दिया जाता है। जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं, उनके लिए ऑफलाइन विकल्प भी मौजूद है। ऐसे नागरिक नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाकर PVC कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    फिलहाल आधार तीन स्वरूपों में उपलब्ध है—आधार लेटर, ई-आधार और आधार PVC कार्ड। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फीस में ₹25 की बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन इसकी मजबूती, लंबी उम्र और सुविधाजनक उपयोग को देखते हुए आधार PVC कार्ड की लोकप्रियता आने वाले समय में और बढ़ सकती है।