Author: bharati

  • बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ती ‘धुरंधर’: अक्षय खन्ना की एंट्री ने बदली फिल्म की किस्मत, कास्टिंग की पूरी कहानी आई सामने

    बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ती ‘धुरंधर’: अक्षय खन्ना की एंट्री ने बदली फिल्म की किस्मत, कास्टिंग की पूरी कहानी आई सामने


    नई दिल्ली।आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर को रिलीज हुए लगभग एक महीना हो चुका है लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। फिल्म लगातार कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है और दर्शकों की पसंद बनी हुई है। जहां एक ओर फिल्म की कहानी और निर्देशन की तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी ओर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है अभिनेता अक्षय खन्ना की, जिनका किरदार रहमान डकैत सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।

    फैंस न सिर्फ अक्षय खन्ना की दमदार एक्टिंग की तारीफ कर रहे हैं बल्कि कई लोग इसे उनके करियर के बेहतरीन रोल्स में से एक बता रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस रोल ने अक्षय को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया, उसके लिए शुरुआत में उन्हें कास्ट करने का कोई प्लान ही नहीं था।फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस पूरी कहानी से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि धुरंधर की कास्टिंग आसान नहीं थी और इस फिल्म के लिए उन्हें असाधारण मेहनत करनी पड़ी। मुकेश के मुताबिक फिल्म में दिखाई देने वाला हर एक किरदार बहुत सोच-समझकर चुना गया है, ताकि कहानी में सच्चाई और गहराई बनी रहे।

    मुकेश छाबरा ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार फिल्म की स्क्रिप्ट सुनी, तो उन्हें अहसास हुआ कि यह प्रोजेक्ट साधारण नहीं है। आमतौर पर वह किसी फिल्म की कास्टिंग तीन महीने में पूरी कर लेते हैं, लेकिन धुरंधर उनके लिए एक लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर साबित हुई। पहले से ही फिल्म में रणवीर सिंह जैसे बड़े स्टार की कास्टिंग हो चुकी थी, ऐसे में बाकी किरदारों के लिए सही कलाकार ढूंढना और भी मुश्किल हो गया।कास्टिंग डायरेक्टर के अनुसार, चाहे वह छोटा रोल हो या बड़ा, हर कलाकार को भाषा, लुक और किरदार की सच्चाई को ध्यान में रखकर चुना गया। अक्षय खन्ना, आर. माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और अन्य कलाकारों की कास्टिंग इसी सोच का नतीजा है।

    अक्षय खन्ना को लेकर मुकेश छाबरा ने बताया कि उन्हें शुरू से लगता था कि रहमान डकैत के रोल के लिए अक्षय बिल्कुल परफेक्ट हैं। हालांकि जब उन्होंने यह आइडिया निर्देशक आदित्य धर के सामने रखा, तो वह हैरान रह गए। आदित्य को यकीन नहीं हो रहा था और उन्होंने मजाक में कहा कि मुकेश शायद पागल हो गए हैं। लेकिन मुकेश अपने फैसले पर अड़े रहे।इसके बाद उन्होंने खुद अक्षय खन्ना से संपर्क किया। शुरुआत में अक्षय ने भी हैरानी जताई, लेकिन मुकेश ने उन्हें पूरी स्क्रिप्ट सुनने के लिए राजी कर लिया। अक्षय बिना किसी टीम के आदित्य धर के ऑफिस पहुंचे और करीब चार घंटे तक पूरी स्क्रिप्ट ध्यान से सुनी। स्क्रिप्ट खत्म होने के बाद अक्षय का रिएक्शन बेहद पॉजिटिव था और उन्होंने फिल्म को लेकर उत्साह दिखाया।

    हालांकि अंतिम फैसला लेने में अक्षय ने थोड़ा वक्त लिया, लेकिन एक बार स्क्रिप्ट को दोबारा पढ़ने के बाद उन्होंने फिल्म करने के लिए हां कह दी। मुकेश छाबरा के मुताबिक, इसके बाद चीजें बहुत तेजी से आगे बढ़ीं।आज नतीजा सबके सामने है। धुरंधर में अक्षय खन्ना का किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि वह फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी बन गए हैं। सोशल मीडिया पर सिर्फ उन्हीं की चर्चा है। अब जब फिल्म जबरदस्त सफलता हासिल कर चुकी है, तो दर्शकों को इसके दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार है, जो 19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाला है।

  • स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    चैन्‍नई। तमिलनाडु में मंदिर में दीप जलाने के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र में विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आए जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन ने एक और अहम फैसला सुनाया है। मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस स्वामीनाथन ने 1755 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े नथम कनवाई युद्ध की याद में स्मारक स्तूप बनाने का रास्ता साफ कर दिया है।
    यह फैसला 18वीं सदी में गुलामी के दौर में भारतीयों के प्रतिरोध की एक प्रेरक इतिहास को उदाहरण बनाता है।

    जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन की तरफ से यह फैसला नथम के तहसीलदार द्वारा इस स्मारक को अनुमति न दिए जाने के बाद आया है। तहसीलदार द्वारा अनुमति न मिलने के बाद एक याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की पीढ़ी को भारत के औपनिवेशिक शासन का इतिहास पता नहीं है, न ही उन्हें इस गुलामी से मुक्त कराने के लिए लड़ी गई लड़ाइयों के बारे में ही जानकारी है।

    जस्टिस ने कहा, “राज्य में अगर स्टैन स्वामी की याद में पत्थर का स्तंभ लगाया जा सकता है, उसके लिए अनुमति कि आवश्यकता नहीं पड़ी, तो निश्चित रूप से नथन कनवाई युद्ध की स्मृति में स्तूप स्थापित करने किए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।”

    गौरतलब है कि अदालत ने जिन स्टेन स्वामी का जिक्र हुआ है वह जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता थे। इनका नाम भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा से भी जोड़ा जाता है, 2021 में इनकी मौत के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याद में एक स्मृति स्तंभ बनाने की अनुमति दी थी।
    क्या हुआ था नथम कनवाई युद्ध में?

    इस स्मारक को बनाने के लिए याचिका लेकर आए वकील ने तथ्य रखा कि वर्ष 1755 में नथम कनवाई इलाके में मेलूर कल्लर समुदाय और ब्रिटिश सेना के बीच में एक भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कल्लर समुदाय विजयी रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह युद्ध कोइलकुड़ी के तिरुमोगुर मंदिर की वजह से हुआ था। इस मंदिर से ब्रिटिश सैनिकों ने कर्नल अलेक्जेंडर हेरॉन के नेतृत्व में पीतल की मूर्तियां और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। इसके बाद जुटे कल्लर समुदाय ने युद्ध के जरिए इन मूर्तियों को वापस पा लिया।

  • इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…

    इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…


    हैदराबाद। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले और देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा जीतने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से अब तक 13 मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े पर स्थानीय लोगों, सरकार और अधिकारियों के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
    इस बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM की चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हादसे के लिए भाजपा को न सिर्फ जिम्मेदार ठहराया है बल्कि उसकी नीतियों की भी आलोचना की है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि ये लोग आम लोगों के घरों पर बुलडोजर तो चलवा सकते हैं लेकिन उन्हें साफ पानी पीने जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।

    हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”

    उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ बुलडोजर की फिक्र है। किसी मुसलमनान पर इल्जाम लगा तो उसको लाकर पीटते हैं और घर तोड़ देते हैं। इनकी सरकार ऐसी ही है कि देश में इंसानों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकते। हम 2026 में आ गए हैं और ये लोग विश्वगुरू बनने का दावा करते हैं लेकिन साफ पानी भी नहीं दे सकते हैं। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं तो इन लोगों (बीजेपी के लोगों) को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।”

    13 लोगों के मरने का दावा
    बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
    अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत

    विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

    उन्होंने कहा कि इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है।विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा,‘‘मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों के मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।’’
    अतिरिक्त मुख्य सचिव का दौरा

    इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।

  • लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे में एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए 15 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला सामने आया है।
    आरोपियों ने सबसे पहले लड़की बनकर लड़के के साथ भावनात्मक संबंधों को मजबूत किया फिर उसे रोमेंटिक संबंध बनाने के लिए एक जगह पर बुलाया, जहां पर उसका अपहरण करने की कोशिश की गई। हालांकि, इस मामले की जानकारी जल्दी ही पुलिस के पास पहुंच गई, जिससे पुलिस ने लड़के को बचा लिया और चार आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित एक निजी स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र है। आरोपियों ने लड़की के नाम से एक फर्जी आईडी बनाकर उससे दोस्ती बढ़ाई, फिर धीरे-धीरे उसके साथ रोमेंटिक बातें करने लगे। कुछ समय के बाद जब आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और उसे रोमांटिक संबंध के लिए ठाणे के कल्याण पूर्व स्थित नंदीवली में मिलने बुला लिया।

    भरोसे में आने पर लड़का कैब के जरिए वहां पहुंच गया।

    लड़के के वहां पहुंचते ही चारों आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे एक रिहायशी इमारत के कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसके परिजनों से संपर्क करके 20 लाख रुपए की मांग की और दवाब बनाने के लिए कई मैसेज भी भेजे।

    इसके बाद लड़के के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत ही कार्रवाई शुरू की और सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पहले कार और फिर उस जगह का पता लगाया, जहां पर लड़के को छोड़ा गया था। इसके बाद पुलिस ने नंदीवली के कमरे में छापा मारा औऱ लड़के को छुड़ा लिया, इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे के अंदर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार जायसवाल (24), विशाल पासी(19), चंदन मौर्य (19) और सत्यम यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत अपहरण और जबरन वसूली के आरोप लगाकर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

  • एक शख्स ने सचमुच खोद दी अपनी ही कब्र, लाखों खर्च कर बनवाया अपना मकबरा

    एक शख्स ने सचमुच खोद दी अपनी ही कब्र, लाखों खर्च कर बनवाया अपना मकबरा

    हैदराबाद। ‘अपनी कब्र खुद खोदने’ वाली कहावत तो आपने अक्सर सुनी होगी। लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि इस कहावत को एक शख्स ने सच कर दिखाया है। इस शख्स ने ना सिर्फ मौत के बाद खुद को दफनाए जाने की तैयारी कर ली है, बल्कि उसने अपनी कब्र भी तैयार कर ली है। जानकारी के मुताबिक उसने इस पर करीब 12 लाख रुपए खर्च भी किए हैं।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना के एक गांव रहने वाले 80 साल के इस बुजुर्ग की इस हरकत से स्थानीय लोग दंग रह गए हैं। जगतियाल जिले के लक्ष्मीपुर के रहने वाले नक्का इंद्रय्या के इस अपने मकबरे को एक नाम भी दिया गया है। लोग इसे ‘ग्रेनाइट महल’ के नाम से पुकारते हैं क्योंकि इसे पूरी तरह ग्रेनाइट से बनाया गया है। इसकी कीमत लगभग 12 लाख रुपये बताई जा रही है।
    ढांचा करीब 5 फीट गहरा और छह फीट से ज्यादा लंबा है। डिजाइन को बनाने के लिए तमिलनाडु से खास तौर पर एक मिस्त्री को बुलाया गया था।
    रोज करते हैं सफाई

    इंद्रय्या ने अपनी दिवंगत पत्नी की कब्र के बगल में अपनी कब्र बनवाई है। वह रोज अपनी कब्र की सफाई करने भी जाते हैं और आस-पास के पौधों को पानी देते हैं, पत्थर को साफ करते हैं और फिर बैठकर सुकून के पल बिताते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें यह जानकर सुकून मिलता है कि सब कुछ ठीक वैसे ही तैयार किया गया है जैसा वह चाहते थे।

    रिपोर्ट में इंद्रय्या के हवाले से बताया गया, “यह मेरा घर है, जिसे मैंने अपने लिए खोदा है। मेरे मरने के बाद, मुझे यहीं दफनाया जाएगा, इसलिए मैंने इसे ठीक वैसे ही बनाया जैसा मैं चाहता था।”

    वह यह भी कहते हैं कि मरने के बाद वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। उन्होंने कहा, “मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था। मौत से डरने की कोई जरूरत नहीं है। हर किसी को मरना है। मुझे भी मरना है। कम से कम मुझे पता है कि मुझे कहां दफनाया जाएगा।”

  • कश्मीरियों को निशाना बनाने वालों पर भड़के फारुख अब्दुल्ला

    कश्मीरियों को निशाना बनाने वालों पर भड़के फारुख अब्दुल्ला

    नई दिल्‍ली। देश में कई जगह पर कश्मीरियों के साथ हुई हिंसा को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने अपनी भड़ास निकाली है। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में कश्मीरियों को निशाना बनाने वाले यह लोग ‘हिटलर के रास्ते पर’ चल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि एक समय के बाद यह ‘अतिवादी’ लोग खत्म हो जाएंगे।

    कश्मीरियों के हाथ देश में हुई हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग हिटलर जैसा शासन बनाना चाहते हैं।

    उन्होंने कहा, “यह हमारी किस्त्म है कि कुछ लोग ऐसे हैं, जिनका मकसद कुछ और ही है। यह हिटलर के रास्ते पर चलकर हिटलर जैसा शासन बनाना चाहते हैं। लेकिन इन्हें याद रखना चाहिए कि हिटलर ने भी खुद को गोली मार ली और खत्म हो गया। वहीं, नाजीवाद का भी अंत हो गया। यहां भी एक समय आएगा जब यह अतिवादी चले जाएंगे।”

    गौरतलब है कि हाल ही में देश के कुछ इलाकों में कश्मीरियों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इनमें दिल्ली, हरियाणा तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में हुई घटनाएं शामिल थीं। इसमें शॉल बेचने के लिए आने वाले कश्मीरी युवाओं के साथ मारपीट करने और परेशान करने की घटनाएं दर्ज हुई थी। इसी मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी राय रखी थी।

    विदेश मंत्री जयशंकर की खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश यात्रा को लेकर अपनी बात रखते हुए फारुख ने कहा कि यह अच्छा है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश हमारा पुराना मित्र है। हमें इस दोस्ती को आगे बढ़ाना होगा और इसे और मजबूत करना होगा।”

    पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर अपनी बात रखते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि यह साल भारत की पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती को बढ़ाए, ताकि हम इन मुश्किलों से निकल सकें। उन्होंने कहा,, “नया साल शुरू हो गया है। ईश्वर बारिश और बर्फ भेजे ताकि हमारी परेशानियां कम हों। मैं प्रार्थना करता हूं कि हमारे देश में शांति बनी रहे और हम पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती करें, ताकि इन मुश्किलों से बाहर निकल सकें।

  • शाहरुख को रामभद्राचार्य ने बताया देशद्रोही, संगीत सोम ने कहा गद्दार

    शाहरुख को रामभद्राचार्य ने बताया देशद्रोही, संगीत सोम ने कहा गद्दार

    लखनऊ। बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. वजह है उनकी IPL टीम कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को खरीदना. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों के बीच इस फैसले को लेकर राजनीतिक नेता, धर्मगुरु और अन्य लोग शाहरुख को निशाने पर ले रहे हैं. कुछ ने उन्हें देशद्रोही तक करार दिया है, जबकि कुछ उनके पक्ष में खड़े हो गए हैं.

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने इस मुद्दे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही ज्यादतियों के समय में बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल करना सही नहीं है. इसके बाद मामला और तूल पकड़ गया. उत्तर प्रदेश के बीजेपी नेता संगीत सोम ने भी तीखी टिप्पणी की.

    उन्होंने कहा कि IPL के लिए बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को खरीदकर शाहरुख खान ने देश के साथ गद्दारी की है. सोम के इस बयान ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया और विवाद को और हवा दे दी.
    शाहरुख का कोई चरित्र नहीं
    नागपुर पहुंचे स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भी शाहरुख खान पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “शाहरुख खान तो ऐसा करेंगे ही, वे कोई हीरो नहीं हैं. उनका कोई चरित्र नहीं है. उनकी हरकतें देशद्रोही जैसी रही हैं.” स्वामी के इस बयान से शाहरुख के आलोचकों को और बल मिला, और हर तरफ से उन्हें खरी-खोटी सुनाई जाने लगी.
    बरेली के मौलाना ने शाहरुख का किया बचाव
    हालांकि, सभी लोग शाहरुख के खिलाफ नहीं हैं. बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने शाहरुख खान का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि शाहरुख का मकसद गलत नहीं है. उन्हें गद्दार या आतंकी कहना शर्मनाक और गलत है. मौलाना ने आगे कहा, “बांग्लादेश भारत का मित्र देश है. देवकीनंदन ठाकुर और संगीत सोम के बयान सरासर गलत और अन्यायपूर्ण हैं.” मौलाना के इस समर्थन से विवाद में एक नया मोड़ आया है, जहां एक तरफ राजनीतिक और धार्मिक आलोचना है, तो दूसरी तरफ उनका बचाव भी हो रहा है.
  • आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान… सिडनी टेस्ट होगा आखिरी मैच

    आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान… सिडनी टेस्ट होगा आखिरी मैच


    नई दिल्ली।
    ऑस्ट्रेलिया के स्टार ओपनर (Australian Star Opener) उस्मान ख्वाजा (Usman Khawaja) ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान (Retirement Announced from International Cricket) कर दिया है। यह ऐलान उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किया, इस दौरान उनका परिवार भी वहां मौजूद था। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी में होने वाला 5वां एशेज मुकाबला उनके करियर का आकिरी मैच होने वाला है। ख्वाजा ने शुक्रवार को ही अपने इस फैसले की जानकारी टीम के साथी खिलाड़ियों को भी दी। ख्वाजा ने रिटायरमेंट का ऐलान करते हुए अपने पूरे करियर में झेले गए नस्लवाद के बारे में भी बात की। बता दें, 5 मैच की इस टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलिया अजेय बढ़त बना चुका है और वह 3-1 से आगे चल रहा है।

    उस्मान ख्वाजा ने कहा, “क्रिकेट के जरिए भगवान ने मुझे मेरी कल्पना से कहीं ज्यादा दिया है। उन्होंने मुझे ऐसी यादें दी हैं जिन्हें मैं हमेशा अपने साथ रखूंगा, ऐसी दोस्ती जो खेल से कहीं आगे है, और ऐसे सबक जिन्होंने मुझे, जो मैं आज हूं, मैदान के बाहर बनाया है। लेकिन कोई भी करियर सिर्फ एक इंसान का नहीं होता। जाहिर है, मुझे बहुत मदद मिली। मेरे माता-पिता, जो वहां बैठे हैं, आपके बलिदानों के लिए धन्यवाद, जो कभी हाइलाइट्स रील में नहीं आए।”

    उस्मान ख्वाजा ने इस दौरान एशेज में अपनी तैयारी और पीठ की दिक्कतों को लेकर अपने साथ हुए नस्लीय स्टीरियोटाइपिंग के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “ऐसी टिप्पणियां, ‘वह टीम के प्रति कमिटेड नहीं है। ‘वह सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था। उसने एक दिन पहले गोल्फ कॉम्पिटिशन खेला। वह स्वार्थी है। वह काफी मेहनत से ट्रेनिंग नहीं करता। उसने मैच से एक दिन पहले ट्रेनिंग नहीं की। वह आलसी है।’ ये वही स्टीरियोटाइप हैं, वही नस्लीय स्टीरियोटाइप जिनके साथ मैं पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं… यही बात मुझे सबसे ज्यादा निराश करती है, क्योंकि मुझे लगा था कि हम इससे आगे निकल चुके हैं। लेकिन अभी भी थोड़ा बहुत ऐसा है, जिससे मुझे हर दिन लड़ना पड़ता है, जो मेरे लिए बहुत निराशाजनक है।”

    उस्मान ख्वाजा ने 2011 में ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू किया था। सिडनी में जो वह इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेलेंगे वह उनके करियर का 88वां मुकाबला होगा। ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया की 2023 WTC चैंपियन टीम का भी हिस्सा थे। उन्होंने मैदान के बाहर एक मजबूत विरासत छोड़ी है, वह ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले पाकिस्तान में जन्मे क्रिकेटर और देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले मुस्लिम क्रिकेटर हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 49 वनडे मैच भी खेले हैं।

  • देश के इन हिस्सों में जनवरी से मार्च तक तेज बारिश की संभावना.. IMD ने चेताया

    देश के इन हिस्सों में जनवरी से मार्च तक तेज बारिश की संभावना.. IMD ने चेताया


    नई दिल्ली।
    इस साल जनवरी से मार्च तक की अवधि में दक्षिण और मध्य भारत (South and Central India) में अच्छी बारिश (Rain) होने की संभावना है, जबकि पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।

    महापात्रा ने हालांकि बताया कि देश के कुछ हिस्सों में औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान का रबी की फसल पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है। साथ ही मॉनसून की अच्छी बारिश के कारण जलाशय भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक से तीन दिन अतिरिक्त ठंड पड़ने की संभावना है, जबकि राजस्थान में कम ठंड पड़ने का अनुमान है।

    महापात्रा ने कहा कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में जनवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है।

    दिसंबर में क्यों रहा सूखे जैसा मौसम
    मौसम विभाग ने दिसंबर महीने में लगभग सूखे मौसम का कारण पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति को बताया, जो आमतौर पर देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाते हैं। महापात्रा ने कहा, ‘पश्चिमी विक्षोभ या तो उत्तर की ओर बढ़ रहे हैं या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।’ उन्होंने कहा कि दिसंबर से मार्च के दौरान कम बर्फबारी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम में अच्छी बारिश के संकेतकों में से एक है।

    महापात्रा ने कहा कि वर्तमान में ला नीना की स्थिति बनी हुई है – यानी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह ठंडी हो रही है – और वैश्विक पूर्वानुमान ने मार्च तक ईएनएसओ तटस्थ स्थितियों का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा, ‘जून-जुलाई तक ईएनएसओ की तटस्थ परिस्थितियां हावी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह अच्छी मॉनसूनी बारिश का सूचक है।’ महापात्रा ने कहा कि 2025, 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष था, जिसमें अखिल भारतीय वार्षिक औसत भूमि सतह वायु तापमान 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

    अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2024 था, जब पूरे भारत में तापमान दीर्घकालिक औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था। आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि शीतकालीन (जनवरी-फरवरी) और मॉनसून-पूर्व (मार्च-मई) ऋतुओं के दौरान अखिल भारतीय मौसमी औसत तापमान दीर्घकालिक औसत से अधिक रहा, जिसमें क्रमशः 1.17 डिग्री सेल्सियस और 0.29 डिग्री सेल्सियस की विसंगति देखी गई।

  • भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि का होगा नवीकरण… औपचारिक वार्ता शुरू

    भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि का होगा नवीकरण… औपचारिक वार्ता शुरू


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) ने 1996 में साइन की गई गंगा जल बंटवारा संधि (Ganges water sharing treaty) के नवीकरण पर औपचारिक वार्ता शुरू कर दी है। यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है, जो इसके हस्ताक्षर के ठीक 30 वर्ष बाद होगी। अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों ने गुरुवार से गंगा और पद्मा नदियों में जल स्तर का संयुक्त मापन शुरू कर दिया है। यह मापन हर 10 दिन में दर्ज किया जाएगा और 31 मई तक जारी रहेगा।

    यह कदम संधि के प्रावधानों के अनुरूप है, जो सूखे मौसम (जनवरी से मई) के दौरान फरक्का बैराज पर जल बंटवारे को नियंत्रित करता है। संधि के अंतिम वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही दोनों देश नवीकरण पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि क्षेत्रीय जल प्रबंधन में निरंतरता बनी रहे। भारतीय केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के उप निदेशक सौरभ कुमार और सहायक निदेशक सनी अरोड़ा बांग्लादेश में हैं, जबकि बांग्लादेश जल विकास बोर्ड की उत्तर-पूर्वी मापन जलविज्ञान प्रभाग के कार्यकारी इंजीनियर अरिफिन जुबेद के नेतृत्व में चार सदस्यीय बांग्लादेशी दल भारत में है।

    मापन कार्य पद्मा नदी पर हार्डिंग ब्रिज से 3,500 फीट ऊपर के बिंदु और भारत में फरक्का बिंदु पर शुरू हुआ है। बता दें कि पद्मा नदी बांग्लादेश की एक प्रमुख नदी है, जो भारत से आने वाली गंगा नदी की मुख्य धारा है और बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद इसी नाम से जानी जाती है। बांग्लादेश के वरिष्ठ जल संसाधन मंत्रालय अधिकारी शिब्बर हुसैन ने कहा कि भारतीय दल की सुरक्षा को विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जल संसाधन मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है।


    क्या है संधि और इसका महत्व?

    1996 की गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौता है, जो फरक्का बैराज पर सूखे मौसम में गंगा के जल को साझा करने का प्रावधान करता है। यह संधि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद को सुलझाने में मील का पत्थर साबित हुई थी। हालांकि, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती सिंचाई आवश्यकताएं और विकास परियोजनाओं के कारण दोनों पक्ष नई संधि में बदलाव चाहते हैं।

    भारत अपनी बढ़ती जल आवश्यकताओं (सिंचाई, बंदरगाह रखरखाव और बिजली उत्पादन) को ध्यान में रखते हुए संधि में संशोधन की मांग कर रहा है, जबकि बांग्लादेश सूखे मौसम में अधिक जल हिस्सेदारी की अपील कर रहा है, क्योंकि दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में कृषि और आजीविका प्रभावित हो रही है। दोनों देश 54 साझा नदियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं, हालांकि अभी केवल गंगा और कुछ अन्य पर ही समझौते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरण वार्ता जलवायु-प्रतिरोधी और अधिक समावेशी समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    संधि में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, दोनों देश एक जनवरी से 31 मई तक गंगा और पद्मा नदियों में विभिन्न निर्दिष्ट बिंदुओं पर जलस्तर का मापन करेंगे और प्रत्येक 10 दिन का आंकड़ा रिकॉर्ड करेंगे।