Author: bharati

  • UP में जायके और जाति का अनोखा मेल.. चर्चा में सपा की 'बाटी-चोखा' की दावत

    UP में जायके और जाति का अनोखा मेल.. चर्चा में सपा की 'बाटी-चोखा' की दावत


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में इन दिनों जायके और जाति का एक अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। नए साल के पहले दिन समाजवादी पार्टी (सपा) (Samajwadi Party – SP) के मुख्यालय में आयोजित ‘बाटी-चोखा’ की दावत ने राज्य में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। यह दावत सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के भीतर चल रहे ‘ब्राह्मण बनाम संगठन’ विवाद पर कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए साल के अवसर पर आयोजित इस भोज में शामिल कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बाटी-चोखा हमारे प्रदेश की संस्कृति का हिस्सा है, इसे आपसी झगड़ों और राजनीति में बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। सभी को बिना किसी पाबंदी के एक साथ बैठकर भोजन करना चाहिए।”

    सपा प्रमुख का यह बयान भाजपा के उन ब्राह्मण विधायकों और विधान पार्षदों (MLCs) के समर्थन में माना जा रहा है, जिन्हें हाल ही में एक ऐसी ही दावत में शामिल होने के लिए अपनी ही पार्टी से चेतावनी मिली थी। सपा सूत्रों के अनुसार, इस भोज का मकसद सत्तारूढ़ दल को यह संदेश देना था कि खाने-पीने और सामाजिक मेलजोल पर किसी भी तरह की जातिगत बंदिश गलत है।


    क्या है पूरा विवाद?

    इस सियासी दावत की पटकथा लगभग एक सप्ताह पहले लिखी गई थी। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के कई ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी को चेतावनी जारी की थी। ये नेता पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोकप्रिय व्यंजन ‘बाटी-चोखा’ के बहाने आयोजित एक सामुदायिक बैठक और डिनर में शामिल हुए थे। भाजपा ने इसे जाति आधारित गतिविधि और अनुशासनहीनता के तौर पर देखा था। हालांकि, पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह जैसे नेताओं ने अपनी ही पार्टी के इस रुख का विरोध करते हुए कहा था कि जब दल खुद जाति सम्मेलन करते हैं, तो विधायकों के साथ बैठने पर आपत्ति क्यों है।

    जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव ने ‘बाटी-चोखा’ के जरिए दो निशाने साधे हैं। भाजपा के भीतर जो ब्राह्मण नेता संगठन की सख्ती से नाराज हैं, उनके प्रति सहानुभूति दिखाकर सपा उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, बाटी-चोखा पूर्वी यूपी की पहचान है। इसके जरिए सपा खुद को आम जनता की परंपराओं के करीब और भाजपा को कठोर दिखाने की कोशिश कर रही है।

  • पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा

    पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा


    वैंकूवर।
    कनाडा (Canada) ने एयर इंडिया (Air India) को सूचित किया है कि 23 दिसंबर 2025 को उसकी एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान (International flight) के संचालन से ठीक पहले एयरलाइन का एक पायलट शराब के नशे में पाया गया। यह कनाडाई कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है। कनाडा के परिवहन नियामक ट्रांसपोर्ट कानाडा ने इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने और 26 जनवरी 2026 तक उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।

    यह सूचना पायलट के ब्रीथ एनालाइजर (BA) टेस्ट में फेल पाए जाने के एक दिन बाद भेजी गई। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने एयर इंडिया से अपने सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) के तहत सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।


    आरसीएमपी की पुष्टि और संभावित कार्रवाई

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट कनाडा द्वारा 24 दिसंबर को एयर इंडिया को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने एयरलाइन को बताया कि संबंधित कप्तान 23 दिसंबर को उड़ान संख्या AI 186 की ड्यूटी के लिए शराब के नशे में पहुंचा था और उड़ान संचालन के लिए अयोग्य पाया गया। वैंकूवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर RCMP द्वारा कराए गए दो ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में इसकी पुष्टि हुई, जिसके बाद पायलट को विमान से उतारकर ड्यूटी से हटा दिया गया।

    पत्र के अनुसार, यह घटना कनाडा के एविएशन रेगुलेशंस के साथ-साथ एयर इंडिया के फॉरेन एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (FAOC 1946) की शर्तों का भी उल्लंघन है। FAOC की एक शर्त है कि विदेशी एयर ऑपरेटर सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करेगा। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में RCMP और स्वयं उसका विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकता है।


    DGCA को सूचना, विवरण मांगा

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एयर इंडिया ने कनाडाई अधिकारियों से ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट का पूरा विवरण, जिसमें अल्कोहल का स्तर भी शामिल है, मांगा है। साथ ही, एयरलाइन ने भारत के विमानन नियामक DGCA को भी इस घटना की जानकारी दे दी है। ऑपरेशन सिंदूर के चलते पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने के बाद एयर इंडिया की उत्तरी अमेरिका से भारत आने वाली अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल उड़ानों को बीच में ईंधन भरने के लिए ठहराव करना पड़ रहा है। AI 186 को वैंकूवर से वियना तक दो सेट पायलटों (प्रत्येक सेट में एक कप्तान और एक सह-पायलट) द्वारा संचालित किया जाना था। वियना से दिल्ली के लिए तीसरा सेट उड़ान संचालित करता।

    संबंधित पायलट का वियना में लेओवर था और वह कथित तौर पर वैंकूवर ड्यूटी-फ्री से शराब खरीद रहा था। चूंकि वह कनाडा से बोर्ड कर ऑस्ट्रिया में उतरने वाला था, इसलिए दोनों विदेशी स्टेशनों पर सामान्यतः ब्रीथ एनालाइजर जांच नहीं होती। हालांकि, ड्यूटी-फ्री स्टाफ को उसकी सांस से शराब की गंध आई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस ने उसे एयर इंडिया की उड़ान तक ट्रेस किया।


    ‘12 घंटे पहले शराब निषिद्ध’

    वरिष्ठ पायलटों का कहना है कि उड़ान से कम से कम 12 घंटे पहले शराब पीना सख्त वर्जित है। यदि कोई पायलट इस नियम का पालन नहीं कर पाता, तो उसे चिकित्सा कारणों से उड़ान संचालन से इनकार कर देना चाहिए। ऐसा करने से उसकी नौकरी, लाइसेंस और करियर सुरक्षित रह सकता है।

    एयर इंडिया ने बुधवार को जारी बयान में कहा- 23 दिसंबर 2025 को वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली उड़ान AI 186 में अंतिम क्षणों में देरी हुई, क्योंकि एक कॉकपिट क्रू सदस्य को उड़ान से पहले उतार दिया गया। कनाडाई अधिकारियों ने पायलट की ड्यूटी के लिए फिटनेस पर चिंता जताई, जिसके बाद उन्हें आगे की पूछताछ के लिए ले जाया गया।

  • गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सरकार का बड़ा कदम… 90 दिनों तक काम… पेंशन की भी व्यवस्था

    गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सरकार का बड़ा कदम… 90 दिनों तक काम… पेंशन की भी व्यवस्था


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) के तहत गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (Gig and platform workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों को ध्यान में रखते हुए नए मसौदा नियमों का प्रस्ताव दिया है। ये नियम 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे एग्रीगेटर्स के साथ काम करने वाले लाखों श्रमिकों को स्वास्थ्य, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुरक्षा प्रदान करना है।

    मसौदा नियमों के अनुसार, लाभ प्राप्त करने के लिए श्रमिकों को एक विशिष्ट अवधि के लिए कार्य करना अनिवार्य होगा। यदि कोई श्रमिक केवल एक ही प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ा है, तो उसे एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक काम करना होगा। यदि श्रमिक एक से अधिक प्लेटफॉर्म (जैसे सुबह ओला और शाम को स्विगी) पर काम करता है, तो कुल कार्य अवधि कम से कम 120 दिन होनी चाहिए।

    काम की गिनती उस दिन से शुरू होगी जब श्रमिक पहली बार आय अर्जित करता है, चाहे राशि कितनी भी हो। यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो उसे नियमों के अनुसार तीन दिन का काम माना जाएगा।

    रजिस्ट्रेशन और पहचान
    सरकार ने इन लाभों को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है। 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी गिग श्रमिक पंजीकरण के पात्र हैं। लाभ प्राप्त करने की अधिकतम आयु 60 वर्ष तय की गई है। ई-श्रम पोर्टल के जरिए सभी श्रमिकों का आधार-लिंक्ड रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। सरकार प्रत्येक पात्र श्रमिक को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और एक डिजिटल पहचान पत्र जारी करेगी। आधार-लिंक्ड UAN होने के कारण श्रमिक यदि प्लेटफॉर्म बदलते हैं, तो भी उनके लाभ निरंतर बने रहेंगे।


    पेंशन से बीमा तक की व्यवस्था

    श्रमिकों के स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए ‘आयुष्मान भारत’ योजना के साथ एकीकरण किया जाएगा। जीवन बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की भी सुविधा होगा। भविष्य में एक ऐसी पेंशन योजना का प्रस्ताव है जिसमें प्लेटफॉर्म और श्रमिक दोनों का अंशदान शामिल होगा। मातृत्व लाभ (Maternity Benefits) और बच्चों के लिए क्रेच की भी सुविधा होगी।


    राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड

    नियमों में एक ‘राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ के गठन का भी प्रावधान है। केंद्र और राज्य सरकारों के नामित अधिकारी इसमें शामिल होंगे। असंगठित क्षेत्र के श्रमिक संघों से 5 प्रतिनिधि शामिल होंगे। एग्रीगेटर संघों से भी 5 प्रतिनिधि को जगह दी जाएगी। लोकसभा, राज्यसभा और अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रतिनिधि को भी जगह।


    बोर्ड के मुख्य कार्य

    गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की संख्या का आकलन करना। नए प्रकार के एग्रीगेटर्स की पहचान करना। इसके अलावा, कल्याणकारी नीतियों की निगरानी और सिफारिश करना। यदि कोई श्रमिक पिछले वित्तीय वर्ष में निर्धारित 90/120 दिनों की कार्य अवधि पूरी नहीं कर पाता है, तो वह लाभ के लिए अपात्र हो जाएगा। 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद सामाजिक सुरक्षा लाभ समाप्त हो जाएंगे। इन मसौदा नियमों पर वर्तमान में जनता से राय मांगी गई है, जिसके बाद मार्च 2026 तक अंतिम अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।

  • बांग्लादेशी क्रिकेटर पर करोड़ों लुटाने पर हो रही शाहरुख खान की आलोचना… BJP नेता ने बताया गद्दार

    बांग्लादेशी क्रिकेटर पर करोड़ों लुटाने पर हो रही शाहरुख खान की आलोचना… BJP नेता ने बताया गद्दार


    नई दिल्ली।
    IPL 2026 में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज (Bangladesh fast Bowler) मुस्तफिजुर रहमान (Mustafizur Rahman) खेलेंगे या नहीं, इस पर बीसीसीआई (BCCI) ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। मगर नीलामी में उन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) द्वारा 9.20 करोड़ में खरीदे जानें पर केकेआर के सह-मालिक और बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान (Shahrukh Khan) की जमकर आलोचना हो रही है। इस बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य संगीत सोम ने शाहरुख खान को गद्दार बताया है। उनका कहना है कि शाहरुख खान के पास जो कुछ भी है, वह भारत ने दिया है, भारत के लोगों ने दिया है, लेकिन वे इस पैसे को कहां लगाते हैं? वे इसे ऐसे देश के खिलाड़ियों पर लगाते हैं जो भारत के खिलाफ काम कर रहा है।

    संगीत सोम ने कहा, “जिस तरह बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, महिलाओं और लड़कियों का रेप हो रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, और वहां भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। इन सबके बावजूद, शाहरुख खान जैसे गद्दार, मैं उन्हें गद्दार कह रहा हूं क्योंकि उनके पास जो कुछ भी है, वह भारत ने दिया है, भारत के लोगों ने दिया है, लेकिन वे इस पैसे को कहां लगाते हैं? वे इसे ऐसे देश के खिलाड़ियों पर लगाते हैं जो भारत के खिलाफ काम कर रहा है। मैं शाहरुख खान जैसे लोगों को बताना चाहता हूं कि वे सफल नहीं होंगे। किसी भी कीमत पर, वे मुस्तफिजुर रहमान को यहां खेलने नहीं दे पाएंगे। रहमान एयरपोर्ट से बाहर कदम नहीं रख पाएगा।”


    BCCI को है सरकार के आदेश का इंतजार

    इस विवाद पर भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है। बीसीसीआई का कहना है कि वह सरकार के निर्देशों के बिना किसी भी खिलाड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए इनसाइड स्पोर्ट से कहा, “स्थिति संवेदनशील है। हम लगातार सरकार के संपर्क में हैं। फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है जिससे बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर बैन लगाया जाए। मुस्ताफिजुर आईपीएल खेलेंगे। बांग्लादेश कोई दुश्मन देश नहीं है।” बोर्ड वर्तमान में टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ बांग्लादेशी खिलाड़ियों के वीजा संबंधी बातचीत भी कर रहा है।

    हालांकि, मुस्ताफिजुर की आईपीएल में पूरी उपलब्धता अभी भी कई कारकों पर निर्भर करेगी। अप्रैल में बांग्लादेश को न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज खेलनी है और यदि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एनओसी (NOC) देने से इनकार कर दिया, तो वह कई मैचों से बाहर रह सकते हैं। वीजा को लेकर बीसीसीआई अधिकारी ने कहा है कि, “मुस्ताफिजुर रहमान टी20 वर्ल्ड कप के लिए वीजा अप्लाई करेंगे, जिसे IPL के लिए बढ़ाया जाएगा। वीजा कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। बीसीबी की तरफ से भी एनओसी को लेकर कोई नकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं।” वर्तमान में बीसीसीआई पूरी तरह से भारत सरकार के अगले आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है।

    भड़के मौलाना… बोले- मुस्लिम नाम आते ही शुरू हो जाता है विरोध

    आईपीएल (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders-KKR) की ओर से बांग्लादेशी क्रिकेटर (Bangladeshi cricketer.) को शामिल करने पर हंगामा मचा हुआ है। विरोध के बीच इमाम एसोसिएशन ने केकेआर के सह-मालिक बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान (Actor Shah Rukh Khan) का बचाव किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी (Maulana Sajid Rashidi) ने कहा, ‘इस देश में बिना सोचे-समझे या संविधान को समझे किसी भी चीज का अंधाधुंध विरोध करना आदत बन गई है। जैसे ही कोई मुस्लिम नाम आता है, विरोध करना बहुत आसान हो जाता है। शाहरुख खान मुस्लिम हैं और उन्होंने जो बांग्लादेशी क्रिकेटर खरीदा वह भी मुस्लिम है, इसलिए विरोध तो होना ही लाजमी है क्योंकि यहां मुसलमानों के प्रति नफरत तुरंत सामने आ जाती है। लोगों का इससे क्या लेना-देना? अगर वे संविधान के खिलाफ कुछ करते हैं तो कानून निपटेगा ना? सरकार कार्रवाई करेगी। आप कौन होते हैं विरोध करने वाले और कहने वाले कि शाहरुख खान को यह नहीं करना चाहिए?’

    ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की भी इस मामले पर प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा, ‘देवकीनंदन ठाकुर और संगीत सोम को समझ जाना चाहिए कि भारतीय मुसलमान भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंतित हैं और उनकी सुरक्षा व हिफाजत के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगर शाहरुख खान वहां के किसी क्रिकेटर के साथ कोई समझौता करते हैं तो यह विश्वासघात का काम नहीं है। इसे किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।’


    शाहरुख खान को किसने बताया गद्दार

    आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा का हवाला देते हुए शाहरुख खान की आलोचना की है। उन्होंने केकेआर से रहमान को टीम से हटाने और उसे दी गई 9.2 करोड़ रुपये की करार राशि का इस्तेमाल हिंसा से प्रभावित हिंदू परिवारों की मदद के लिए करने का आग्रह किया। वहीं, धर्मगुरु रामभद्राचार्य ने शाहरुख खान की आलोचना करते हुए कहा कि पड़ोसी देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बीच IPL की उनकी टीम ने एक बांग्लादेशी क्रिकेटर को शामिल किया है। आईपीएल 2026 के लिए केकेआर की ओर से बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदे जाने के बारे में पूछने पर रामभद्राचार्य ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि उनका रवैया हमेशा से गद्दार जैसा रहा है।’

  • देश में UPI से लेन-देन में 29% की वृद्धि, दिसंबर में हुए रिकॉर्ड ₹27.97 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन

    देश में UPI से लेन-देन में 29% की वृद्धि, दिसंबर में हुए रिकॉर्ड ₹27.97 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन


    नई दिल्ली।
    बीते दिसंबर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) से होने वाले लेन-देन में तेज बढ़ोतरी (Rapid Increase UPI Transactions) देखने को मिली। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India-NPCI) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में यूपीआई के जरिए 21.63 अरब सौदे हुए, जो पिछले साल की तुलना में 29 प्रतिशत ज्यादा हैं। वहीं, इन सौदों की कुल राशि भी 20 प्रतिशत बढ़कर 27.97 लाख करोड़ रुपए हो गई।

    महीने के हिसाब से भी यूपीआई लेन-देन की संख्या और रकम में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिसंबर में रोजाना औसतन 90,217 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 87,721 करोड़ रुपए था।

    दिसंबर में रोजाना औसतन 698 मिलियन (करीब 69.8 करोड़) यूपीआई लेन-देन हुए, जो नवंबर के 682 मिलियन से ज्यादा हैं। नवंबर महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 20.47 अरब रही थी, जो सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की बढ़त थी। उस महीने लेन-देन की कुल राशि 26.32 लाख करोड़ रुपए रही थी, जिसमें 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

    इसी दौरान, इंस्टेंट मनी ट्रांसफर सिस्टम (आईएमपीएस) के जरिए दिसंबर में कुल 6.62 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। यह पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है और नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है।


    अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड

    एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड हैं। जुलाई 2024 के बाद इनकी संख्या में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, बस-अड्डों, रेलवे स्टेशनों और गांवों तक क्यूआर कोड की सुविधा पहुंच जाने से अब स्कैन करके भुगतान करना पूरे देश में आम हो गया है।रिपोर्ट में बताया गया कि व्यक्ति से दुकानदार (पी2एम) वाले लेन-देन, व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) लेन-देन से ज्यादा रहे। इसका मतलब है कि लोग रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

    पी2एम ट्रांजैक्शन 35 प्रतिशत बढ़कर अब 37.46 अरब हो गए, जबकि पी2पी ट्रांजैक्शन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.65 अरब हो गए। औसतन हर लेन-देन की राशि 1,262 रुपए हो गई, जो पहले 1,363 थी। इससे पता चलता है कि लोग अब छोटे-छोटे भुगतानों जैसे यात्रा, खाना, दवा और स्थानीय खरीदारी के लिए यूपीआई का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

  • गोल्ड लोन का क्रेज… नवंबर 2025 तक 125% की वृद्धि, बैंक ऋण से 10 गुना ज्यादा

    गोल्ड लोन का क्रेज… नवंबर 2025 तक 125% की वृद्धि, बैंक ऋण से 10 गुना ज्यादा


    नई दिल्ली।
    नवंबर 2025 के अंत तक, गोल्ड लोन (Gold Loan) में साल-दर-साल 125% की भारी वृद्धि (Massive Increase of 125%) दर्ज की गई है, जो कुल बैंक ऋण (Bank loan) की 11.5% वृद्धि दर से लगभग दस गुना अधिक है। गोल्ड लोन में यह उछाल पिछले साल 77% की वृद्धि के बाद आया है और यह सोने की बढ़ती कीमतों के दौर में हुआ है। हालांकि, गोल्ड लोन की कुल बकाया राशि 3.6 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल बैंक ऋण का 2% से भी कम है, लेकिन नवंबर 2025 तक दिए गए नए कुल ऋण में इसका योगदान 12% रहा।


    तेजी के तीन कारण

    एक खबर के मुताबिक पिछले 12 महीनों में इस पोर्टफोलियो में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। बैंकरों ने इस तेजी के तीन कारण बताए हैं। ऋणदाताओं का सिक्योर्ड लोन देने की तरफ झुकाव, सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से घरों में उधार लेने की क्षमता बढ़ना और आरबीआई के निर्देश के बाद कुछ रिटेल लोन का पुनर्वर्गीकरण, जिसमें कहा गया था कि सोने के गहनों से सुरक्षित कृषि ऋणों को गोल्ड लोन के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। गोल्ड लोन और एमएसएमई ऋण वृद्धि के प्रमुख चालक बनकर उभरे हैं।

    एमएसएमई को दिया गया लोन, जो लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये के साथ कुल बकाया ऋण का लगभग 5% है, नए ऋण में भी लगभग 12% की समान हिस्सेदारी रखता है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 में 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।


    बड़े उद्योगों के लिए कर्ज में कमी

    जैसे-जैसे बड़ी कंपनियां बैंक उधार लेने से कम रुचि ले रही हैं और ऋणदाता बिना जमानत वाले (अनसिक्योर्ड) ऋणों को लेकर सतर्क हो रहे हैं, बैंकिंग क्षेत्र का ऋण मिश्रण अपने पारंपरिक आधारों से दूर जा रहा है। लेटेस्ट आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बड़े उद्योग क्षेत्र की गति धीमी पड़ रही है। 28.7 लाख करोड़ रुपये के बकाया ऋण के साथ यह क्षेत्र कुल बकाया ऋण का 15% हिस्सा रखता है, लेकिन नए ऋणों में इसकी हिस्सेदारी महज 3.6% रही है, जिसमें 46,090 करोड़ रुपये का ही इजाफा हुआ।


    बड़ी कंपनियां लगातार अपना कर्ज घटा रहीं

    आंकड़े बताते हैं कि बड़ी कंपनियां लगातार अपना कर्ज घटा रही हैं और वे बैंक वित्त के बजाय बॉन्ड बाजार या आंतरिक संचय को प्राथमिकता दे रही हैं। कमजोर वर्गों को दिया जाने वाला ऋण भी पीछे रहा, जिसमें बकाया ऋण में लगभग 10% की हिस्सेदारी के बावजूद नए ऋण का केवल 6% हिस्सा ही गया। पर्सनल लोनों के भीतर, होम लोन में भी रफ्तार धीमी रही। बकाया ऋण में मॉर्गेज की हिस्सेदारी 16% है, लेकिन नए ऋणों में इसकी हिस्सेदारी केवल 14% रही।

    ऋण वृद्धि में पर्सनल लोन बने रहे प्रमुख चालक
    कुल मिलाकर, पर्सनल लोन वृद्धि के सबसे बड़े इंजन बने रहे, जिनका नए ऋणों में लगभग 40% योगदान रहा, जबकि सेवा क्षेत्र ने लगभग 20% का योगदान दिया, जिसकी मुख्य वजह एनबीएफसी और व्यापार को दिया गया ऋण रहा। कुल बकाया बैंक ऋण 195.2 लाख करोड़ रुपये है। नवंबर 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि एक संरचनात्मक बदलाव हो रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों से ध्यान हटकर उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव आने वाले वर्षों में बैंकों के रिटर्न और जोखिमों को आकार देगा।

  • मध्यप्रदेश में छोटे दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में अनावश्यक निरीक्षणों पर रोक

    मध्यप्रदेश में छोटे दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में अनावश्यक निरीक्षणों पर रोक


    भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा निर्देशों के अनुसार मध्यप्रदेश शासन श्रम विभाग द्वारा मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। यह संशोधन राज्य में इज ऑफ डुईंग बिजनेस को बढ़ावा देने तथा दुकानदारों एवं प्रतिष्ठान संचालकों पर अनुपालन का अनावश्यक भार कम करने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधन के अंतर्गत अब ऐसी दुकानें एवं संस्थान, जिनमें 20 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं, उनके यहाँ श्रम निरीक्षकों द्वारा निरीक्षण केवल राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जा सकेगा। इससे अनावश्यक निरीक्षणों पर रोक लगेगी।

    श्रम विभाग के अपर सचिव श्री बसंत कुर्रे ने बताया है कि इस निर्णय से छोटे दुकानदारों एवं उद्यमियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। साथ ही दुकानदारों में स्व-अनुपालन की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा। व्यापार एवं रोजगार सृजन के लिए अनुकूल वातावरण विकसित होगा। इससे समय, संसाधन एवं लागत की बचत होगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा छोटे दुकानदारों के प्रति संवेदनशीलता बरती जा रही है।

    श्रम विभाग ने सभी दुकानदारों, व्यापार संघों एवं उद्यमियों से अपेक्षा की है कि वे श्रम कानूनों का स्वेच्छा से पालन करें और इस सकारात्मक सुधार का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय का विस्तार करें।

  • मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव खाचरौद में 74.35 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की देंगे सौगात

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव खाचरौद में 74.35 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की देंगे सौगात

    भोपाल ! मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को उज्जैन जिले के खाचरौद में 74.35 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के विभिन्‍न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसमें 48.51 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और 25.84 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खाचरौद में 35.40 करोड़ की लागत से निर्मित सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण करेंगे। साथ ही खाचरौद में 9 करोड़ 10 लाख रूपये की लागत से बनने वाले संयुक्त तहसील कार्यालय भवन का भूमि-पूजन करेंगे।
  • साल 2026 की शुरुआत सही दिशा में: पहले दिन करें ये 6 काम, मन और जीवन होंगे संतुलित

    साल 2026 की शुरुआत सही दिशा में: पहले दिन करें ये 6 काम, मन और जीवन होंगे संतुलित


    नई दिल्ली।नववर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही देशभर में लोग नए संकल्पों, उम्मीदों और योजनाओं के साथ अपने दिन की शुरुआत कर रहे हैं। परंपरा और सामाजिक मान्यताओं के अनुसार, साल के पहले दिन की गतिविधियां और मानसिक स्थिति पूरे वर्ष की ऊर्जा और जीवनशैली पर असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए साल के पहले दिन छोटे-छोटे, लेकिन समझदारी भरे कदम अपनाना पूरे साल सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करता है।

    1. घर और वातावरण को शांत रखें
    साल के पहले दिन घर का वातावरण शांत और तनावमुक्त होना आवश्यक माना जाता है। अनावश्यक बहस, तेज आवाज़ और विवादजनक बातचीत से बचना चाहिए। विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले दिन की मानसिक स्थिति पूरे वर्ष की ऊर्जा को प्रभावित करती है। हल्का संगीत, भजन या ध्यान जैसी आदतें घर में संतुलन और मानसिक शांति बनाए रखने में मदद करती हैं।

    2. सकारात्मक भाषा और व्यवहार अपनाएं

    नए साल के पहले दिन गुस्सा, शिकायत या कटु शब्दों का प्रयोग टालना चाहिए। भाषा का संयम रिश्तों को मजबूत रखने के साथ-साथ मानसिक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। सकारात्मक और सौम्य भाषा से दिन की शुरुआत करना प्रतीकात्मक रूप से पूरे वर्ष के लिए सकारात्मकता का संदेश देता है।

    3. सुबह का समय शांतिपूर्ण बिताएं

    साल के पहले दिन सुबह उठकर कुछ समय अकेले या शांति में बिताना लाभकारी माना जाता है। सूर्य को जल अर्पित करना, खुले वातावरण में कुछ मिनट खड़े रहना या हल्का व्यायाम करना दिन की दिशा और ऊर्जा तय करने में मदद करता है। यह अनुशासन और जागरूकता से जुड़ी आदत मानी जाती है।

    4. पूजा और प्रार्थना के माध्यम से मानसिक संतुलन

    धार्मिक या पारिवारिक परंपराओं के अनुसार, पहले दिन की पूजा केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें परिवार और पूर्वजों के प्रति भावनात्मक संबंधों को भी स्मरण करना चाहिए। इससे मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    5. घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई
    घर और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना नए साल की शुरुआत में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का प्रतीक माना जाता है। स्वच्छता, साफ पानी और व्यवस्थित वातावरण मन को एकाग्र करने और दिनचर्या को सही दिशा देने में मदद करते हैं। पाठ या मंत्र का उच्चारण करना संभव न हो तो शांत भाव से सुनना भी पर्याप्त माना जाता है।

    6. पौधों और हरे-भरे स्थान की देखभाल

    घर में सूखे पौधे या खाली गमले रखना ठहराव और रुकी हुई स्थिति का प्रतीक माना जाता है। नए साल की शुरुआत में इन्हें हरे-भरे पौधों से बदलना ताजगी, विकास और सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।कुल मिलाकर, नववर्ष 2026 का पहला दिन बड़े नियमों या जटिल उपायों के बजाय छोटे, जागरूक और सकारात्मक कदमों से खास बनाया जा सकता है। यह दिन न केवल उत्सव का अवसर है, बल्कि पूरे वर्ष के लिए मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संतुलन स्थापित करने का मौका भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि साल के पहले दिन अपनाई गई आदतें लंबे समय तक सकारात्मक असर छोड़ सकती हैं।

  • उत्तराखंड का खिरसू हिल स्टेशन: लॉन्ग वीकेंड 2026 पर हरियाली और शांति का अनुभव

    उत्तराखंड का खिरसू हिल स्टेशन: लॉन्ग वीकेंड 2026 पर हरियाली और शांति का अनुभव


    नई दिल्ली। साल 2026 का पहला लॉन्ग वीकेंड यानी 24, 25 और 26 जनवरी का अवसर घूमने-फिरने के शौकीनों के लिए खास होने वाला है। अगर आप भी इस लंबे वीकेंड में कहीं यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का खिरसू हिल स्टेशन आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह जगह हरियाली, शांति और प्राकृतिक सुंदरता से घिरी हुई है और यहां का वातावरण तनावमुक्त और सुकून भरा अनुभव देता है।

    खिरसू हिल स्टेशन की खूबसूरती

    खिरसू हिल स्टेशन, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित है। यह हिल स्टेशन अपने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां आपको देवदार और ओक के घने जंगल, सेब के बाग और हिमालय की मनोरम वादियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। नेचर लवर्स के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। साथ ही, यहां का हवादार और शांत माहौल मानसिक तनाव को कम कर आपके माइंड को रिलैक्स कर देता है।

    कम भीड़, ज्यादा सुकून

    नए साल के पहले लॉन्ग वीकेंड पर यदि आप नैनीताल, मसूरी, औली, धनौल्टी या रानीखेत जैसे प्रसिद्ध हिल स्टेशनों पर जाते हैं, तो आपको भारी भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। इस कारण आप नजारों का पूरा आनंद नहीं ले पाएंगे। खिरसू की खासियत यह है कि यहां भीड़ कम है, जिससे आप शांति के साथ प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।

    एडवेंचर और ट्रेकिंग का अवसर

    यदि आप एडवेंचर और ट्रेकिंग का शौक रखते हैं, तो खिरसू हिल स्टेशन आपके लिए आदर्श है। यहां कई छोटे-छोटे ट्रेकिंग ट्रेल्स हैं जो आपको हरे-भरे जंगलों और पहाड़ी रास्तों के बीच घुमाते हैं। इसके अलावा, सूर्योदय और सूर्यास्त के नजारे यहां का मुख्य आकर्षण हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह आदर्श साबित होती है।

    प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम दृश्य

    खिरसू हिल स्टेशन का प्रमुख आकर्षण हिमालय की पर्वत श्रृंखला का मनोरम दृश्य है। देवदार, ओक और सेब के बागों के बीच घूमते हुए आप प्रकृति के करीब महसूस करेंगे। यहां का वातावरण पूरी तरह से प्राकृतिक और प्रदूषण-मुक्त है, जो शहर की भागदौड़ और शोर से राहत देता है।

    यात्रा का बेहतर अनुभव

    लॉन्ग वीकेंड पर खिरसू जाने के लिए उचित योजना बनाना आवश्यक है। आप पहले से अपने ठहरने की व्यवस्था कर सकते हैं और आसपास के छोटे गांवों और प्राकृतिक स्थलों की भी यात्रा कर सकते हैं। यहां का सुकून और प्राकृतिक दृश्य आपके छुट्टियों को यादगार बना देंगे।