Author: bharati

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में विपक्षी दलों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने नाटक के माध्यम से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में दिखाई दिए, जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में एक प्रतीकात्मक दान पेटी रखी गई थी। विपक्षी नेताओं ने नाटक के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश की। इस दौरान राहुल गांधी सहित अन्य सांसद दान पेटी में चढ़ावा डालते हुए नजर आए। वहीं, प्रदर्शन के एक हिस्से में पप्पू यादव साधु के रूप में दान पेटी लेकर जाते हुए दिखाई दिए, जिसके बाद अन्य सांसदों ने उन्हें रोकने और विरोध जताने का अभिनय किया।

    विपक्षी सांसदों ने इस प्रदर्शन के जरिए सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की। नेताओं का कहना था कि वे विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और संसद के भीतर तथा बाहर जनता से जुड़े मामलों को उठाते रहेंगे। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी भी की।

    प्रदर्शन में राम मंदिर चढ़ावा विवाद के साथ-साथ अन्य मुद्दों को भी जोड़ा गया। विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक जैसे मामलों का भी जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों में चढ़ावा चोरी और पेपर चोरी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि संसद और उसके परिसर की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों को सलाह दी कि संसद परिसर में ऐसे तरीके अपनाने से बचना चाहिए, जिससे सदन की मर्यादा प्रभावित हो।

    लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों से संसदीय परंपराओं और नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस और चर्चा का स्थान है, इसलिए विरोध दर्ज कराने के दौरान भी गरिमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

    घटना के बाद संसद की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी हुई। हालांकि विपक्षी नेताओं ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार, संसद सत्र के दौरान विपक्ष अक्सर अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता है। इस बार राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर किए गए प्रतीकात्मक प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

    वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय गरिमा और विरोध के तरीकों को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की बहस और राजनीतिक बयानबाजी में चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • आय सीमा नहीं तय करती ITR की जरूरत, इन वित्तीय गतिविधियों में टैक्स रिटर्न भरना बन जाता है अनिवार्य

    आय सीमा नहीं तय करती ITR की जरूरत, इन वित्तीय गतिविधियों में टैक्स रिटर्न भरना बन जाता है अनिवार्य

    नई दिल्ली । इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि अगर उनकी सालाना आय टैक्स छूट की सीमा से कम है तो उन्हें रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि आयकर नियमों के अनुसार कुछ ऐसी परिस्थितियां भी हैं, जहां व्यक्ति की आय पर टैक्स देनदारी न होने के बावजूद ITR भरना कानूनी रूप से जरूरी हो जाता है।

    आयकर विभाग ने ऐसी कई स्थितियां तय की हैं, जिनमें केवल आय की सीमा ही नहीं बल्कि व्यक्ति के वित्तीय लेन-देन और आर्थिक गतिविधियों के आधार पर भी ITR दाखिल करने की बाध्यता बन सकती है। ऐसे में टैक्स फ्री इनकम वाले लोगों को भी अपने वित्तीय रिकॉर्ड और लेन-देन की स्थिति के आधार पर रिटर्न भरने की जरूरत पड़ सकती है।

    अगर किसी व्यक्ति ने एक वित्तीय वर्ष में बिजली बिल के रूप में 1 लाख रुपये या उससे अधिक का भुगतान किया है, तो उसके लिए ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है। यह नियम उन लोगों पर लागू होता है जिनके बड़े खर्च उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं।

    इसी तरह अगर किसी व्यक्ति ने खुद या अपने परिवार के किसी सदस्य के विदेश दौरे पर 2 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च किए हैं, तो उसे भी आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक हो सकता है। विदेश यात्रा पर होने वाले बड़े खर्च को आयकर नियमों के तहत रिपोर्टिंग की श्रेणी में रखा गया है।

    यदि किसी व्यक्ति के एक या एक से अधिक सेविंग बैंक खातों में एक वित्तीय वर्ष के दौरान कुल जमा राशि 50 लाख रुपये या उससे अधिक पहुंच जाती है, तो भी ITR दाखिल करना अनिवार्य हो सकता है। इसी तरह करंट अकाउंट में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करने वाले व्यक्तियों को भी रिटर्न दाखिल करना पड़ता है।

    टैक्स कटौती से जुड़ा नियम भी महत्वपूर्ण है। अगर किसी व्यक्ति की आय से निर्धारित सीमा से अधिक TDS या TCS काटा गया है, तो उसे ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है। हालांकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा अलग निर्धारित की गई है।

    इसके अलावा जिन लोगों की कुल आय लागू बेसिक छूट सीमा से अधिक है, उनके लिए भी ITR दाखिल करना अनिवार्य है। अलग-अलग टैक्स व्यवस्था के अनुसार छूट सीमा अलग हो सकती है, इसलिए करदाताओं को अपनी आय और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

    अगर किसी व्यक्ति को शेयर बाजार, क्रिप्टो निवेश या संपत्ति बिक्री से नुकसान हुआ है और वह उस नुकसान को भविष्य के वर्षों में होने वाले लाभ के साथ समायोजित करना चाहता है, तो उसे नुकसान को आगे ले जाने के लिए ITR दाखिल करना जरूरी होता है।

    विदेश में संपत्ति रखने वाले भारतीय निवासियों के लिए भी टैक्स रिटर्न दाखिल करना आवश्यक हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति के नाम विदेश में बैंक खाता, शेयर या कोई संपत्ति है, तो उसे इसकी जानकारी आयकर रिटर्न में देनी होती है।

    फ्रीलांसर, डॉक्टर, वकील, आईटी प्रोफेशनल या अन्य सलाहकारों जैसे पेशेवरों के लिए भी कुछ परिस्थितियों में ITR जरूरी हो जाता है। अगर उनकी पेशेवर आय निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें रिटर्न दाखिल करना पड़ता है।

    इसी तरह कारोबार करने वाले लोगों के लिए भी टर्नओवर के आधार पर ITR दाखिल करने की आवश्यकता हो सकती है। यदि किसी व्यवसाय का सालाना कारोबार तय सीमा से अधिक है, तो मुनाफा कम होने या न होने की स्थिति में भी रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ITR केवल टैक्स भुगतान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की वित्तीय पहचान और रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी होता है। लोन लेने, वीजा प्रक्रिया, निवेश और कई अन्य वित्तीय कार्यों में भी ITR की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए करदाताओं को केवल आय सीमा देखकर निर्णय लेने के बजाय अपनी पूरी वित्तीय स्थिति और नियमों को ध्यान में रखकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए।

  • पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की तैयारी, 10 साल जेल और 50 लाख जुर्माने के प्रावधान पर सियासत तेज

    पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की तैयारी, 10 साल जेल और 50 लाख जुर्माने के प्रावधान पर सियासत तेज

    नई दिल्ली । देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा में लंबी चर्चा के बाद विधेयक पारित किया गया। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

    नए कानून में परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और अन्य गंभीर अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले लोगों को 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

    विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने पेपर लीक जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया।

    हालांकि, प्रधानमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था और कानून की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाए।

    राज्यसभा में इस विधेयक पर करीब सात घंटे तक चर्चा हुई। चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल उठाए। कुछ दलों ने संशोधन प्रस्ताव भी पेश किए, जिन्हें सदन में मंजूरी नहीं मिली।

    केंद्रीय कार्मिक मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि यह कानून परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

    राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को लेकर उठाए गए सवालों पर सरकार ने कहा कि देश में पेपर लीक के ज्यादातर मामले राज्य स्तरीय भर्ती और परीक्षा एजेंसियों से जुड़े रहे हैं। सरकार के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

    इस संशोधन विधेयक के जरिए वर्ष 2024 में बनाए गए कानून को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इसमें पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और संगठित तरीके से गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। साथ ही मामलों की तेजी से जांच और सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है।

    पेपर लीक की घटनाएं लंबे समय से छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच चिंता का कारण रही हैं। कई बार परीक्षाओं के रद्द होने और परिणामों में देरी से लाखों छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सरकार का दावा है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ाने और भविष्य में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में मदद करेगा।

    अब सभी की नजर राष्ट्रपति की मंजूरी पर है। इसके बाद यह कानून लागू होने के साथ ही परीक्षा संबंधी अपराधों पर कार्रवाई के लिए नया कानूनी ढांचा प्रभावी हो जाएगा।

  • 2 अगस्त की प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से पहले MPPSC की तेज कार्रवाई, एक दिन में जारी की फाइनल चयन सूची

    2 अगस्त की प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से पहले MPPSC की तेज कार्रवाई, एक दिन में जारी की फाइनल चयन सूची


    इंदौरमध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2024 के इकोनॉमिक्स विषय की अंतिम चयन सूची रिकॉर्ड समय में जारी कर दी। आयोग ने 112 पदों के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के महज 24 घंटे के भीतर चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, जबकि सामान्य परिस्थितियों में अंतिम परिणाम घोषित होने में लगभग एक महीने का समय लग जाता है।

    आयोग के इस फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य 2 अगस्त को आयोजित होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 को अधिक निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाना है। चयन सूची समय रहते जारी होने से वर्ष 2024 की भर्ती में चयनित अधिकांश अभ्यर्थी नई भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं होंगे। इससे उन उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेगा, जो अभी तक किसी भी भर्ती में चयनित नहीं हो सके हैं।

    एमपीपीएससी के अनुसार इकोनॉमिक्स विषय के कुल 112 पदों पर अंतिम चयन किया गया है। इनमें चयनित 111 अभ्यर्थी अब 2 अगस्त को होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 में शामिल नहीं होंगे। इससे परीक्षा में अनावश्यक प्रतिस्पर्धा कम होगी और रिक्त पदों पर नए उम्मीदवारों के चयन की संभावना बढ़ेगी।

    आयोग की यह पहल भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम माना जा रहा है। इससे उन उम्मीदवारों को भी समय रहते अपनी स्थिति स्पष्ट हो गई है, जिनका चयन हो चुका है। उन्हें अब दोबारा परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी।

    एमपीपीएससी की यह कार्यशैली भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि भविष्य की भर्तियों में भी इसी तरह परिणाम शीघ्र जारी किए जाते हैं, तो न केवल आयोग की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि अभ्यर्थियों का समय और संसाधन भी बचेंगे।

    2 अगस्त को होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के लिए आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। चयन सूची पहले जारी होने से परीक्षा संचालन भी अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।

  • नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है और इसके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है, बल्कि यह मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है।

    राज्यसभा में भारतीय पासपोर्ट की स्थिति और नागरिकता से जुड़े सवाल उठाए गए थे। इस दौरान सरकार से पूछा गया था कि क्या भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सकता है और विदेश की नागरिकता लेने के बाद भारतीय नागरिकता की स्थिति क्या होती है। इसके अलावा नागरिकता कानून से जुड़े कई अन्य विषयों पर भी जानकारी मांगी गई थी।

    सरकार ने जवाब में बताया कि भारतीय पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक की पात्रता, दस्तावेजों और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन किया जाता है। सरकार के अनुसार, यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है ताकि केवल योग्य भारतीय नागरिकों को ही पासपोर्ट जारी किया जा सके।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट भारत के नागरिकों को विदेश यात्रा की सुविधा देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को नियंत्रित और व्यवस्थित करना है। हालांकि पासपोर्ट नागरिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज जरूर है, लेकिन इसे नागरिकता का एकमात्र और अंतिम प्रमाण नहीं बताया गया है।

    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था नहीं है। यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो भारतीय कानूनों के अनुसार उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में उसका भारतीय पासपोर्ट भी वैध नहीं रहता और उसे संबंधित प्रक्रिया के तहत इसे वापस करना पड़ता है।

    नागरिकता कानून के प्रावधानों के अनुसार विदेशी नागरिकता लेने के बाद किसी व्यक्ति का भारतीय नागरिक दर्जा समाप्त हो सकता है। इसी वजह से पासपोर्ट जारी करने और उसकी वैधता बनाए रखने के लिए नागरिकता की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने की पूरी प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है।

    पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने के मामलों का भी कानून में प्रावधान है। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि आवेदक भारतीय नागरिक नहीं है या वह निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसका आवेदन रोका जा सकता है। इसके अलावा सुरक्षा और कानूनी कारणों के आधार पर भी पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है।

    सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में नागरिकता, पहचान और दस्तावेजों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। केंद्र ने अपने जवाब के माध्यम से यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि भारतीय पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया नियमों और सत्यापन व्यवस्था के आधार पर होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है। ऐसे में पासपोर्ट और नागरिकता को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हुई है।

  • इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

    इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत


    इंदौर इंदौर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल रोबोट चौराहे की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और घंटों लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए यहां दोनों ओर चार-चार लेन का आधुनिक फ्लायओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए चौराहे के दोनों तरफ मौजूद लगभग 150-150 मीटर लंबे ग्रीन बेल्ट का उपयोग किया जाएगा। हालांकि इस फैसले से इलाके की घनी हरियाली प्रभावित होगी, लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण का कहना है कि एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा और 800 से अधिक पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

    रोबोट चौराहे का यह ग्रीन बेल्ट वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ है। बारिश के मौसम में यह क्षेत्र मिनी फॉरेस्ट जैसा दिखाई देता है और गर्मियों में राहगीरों को छांव उपलब्ध कराता है। स्थानीय रहवासियों ने स्वयं पौधे लगाकर इस हरित क्षेत्र को विकसित किया था, जो अब बड़े और घने पेड़ों में बदल चुके हैं। फ्लायओवर निर्माण के कारण यह हरियाली अस्थायी रूप से समाप्त होती नजर आएगी, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि पेड़ों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर संरक्षित किया जाएगा।

    दरअसल, खजराना चौराहे पर फ्लायओवर बनने के बाद वहां से गुजरने वाले वाहन बिना रुके सीधे रोबोट चौराहे तक पहुंच रहे हैं। इससे इस चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव कई गुना बढ़ गया है। पीक आवर्स में लंबी कतारें लग जाती हैं और वाहन चालकों को दो से तीन बार सिग्नल बदलने का इंतजार करना पड़ता है। पहले खजराना चौराहे पर ट्रैफिक रुक जाने से दबाव बंट जाता था, लेकिन अब रोबोट चौराहा शहर का नया ट्रैफिक बॉटलनेक बन गया है।

    इंदौर विकास प्राधिकरण ने फ्लायओवर परियोजना का फिजिबिलिटी सर्वे पूरा कर लिया है और प्रारंभिक डिजाइन भी तैयार कर ली है। प्रस्ताव के अनुसार खजराना फ्लायओवर की तर्ज पर यहां भी दोनों दिशाओं में चार-चार लेन का अलग-अलग स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 150 मीटर लंबी और 30 मीटर से अधिक चौड़ी ग्रीन बेल्ट की जमीन का उपयोग किया जाएगा।

    आईडीए के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना शुरू होने से पहले सुपर कॉरिडोर स्थित प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में पेड़ों के लिए स्थान और गड्ढे तैयार किए जाएंगे। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से सभी पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

    हालांकि शहर में इससे पहले भी कई बड़े फ्लायओवर निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित हुए हैं। फूटी कोठी, आईटी पार्क, मूसाखेड़ी, पीपल्याहाना, बंगाली और खजराना फ्लायओवर परियोजनाओं के दौरान 10 हजार से अधिक पेड़ हटाए जा चुके हैं। जिन पेड़ों को दूसरी जगह लगाया गया था, उन्हें नए वातावरण में दोबारा विकसित होने में एक से दो वर्ष का समय लगा था।

    अब रोबोट चौराहे का यह फ्लायओवर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में अहम परियोजना माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इसके पूरा होने के बाद रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और रोजाना हजारों वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी।

  • यूएनएससी के शुरुआती पोल में रेबेका ग्रिनस्पैन आगे, महिला महासचिव की मांग के बीच तेज हुई चुनावी प्रक्रिया

    यूएनएससी के शुरुआती पोल में रेबेका ग्रिनस्पैन आगे, महिला महासचिव की मांग के बीच तेज हुई चुनावी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के चुनाव की शुरुआती प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन ने बढ़त हासिल कर ली है। सुरक्षा परिषद के पहले अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल में ग्रिनस्पैन सबसे आगे रहीं, जबकि गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट दूसरे स्थान पर रहीं। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार किसी महिला को महासचिव बनाने की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी पकड़ रही है।

    राजनयिक सूत्रों के अनुसार, 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुए अनौपचारिक मतदान में रेबेका ग्रिनस्पैन को 10 सकारात्मक वोट, एक नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। ग्रिनस्पैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रह चुकी हैं और वर्तमान में यूएनसीटीएडी की महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों के आधार पर शुरुआती चरण में मजबूत स्थिति बनाई है।

    गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट सात उम्मीदवारों में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्हें नौ सकारात्मक वोट, दो नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। हालांकि सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जेनॉन मुकोंगो ने आधिकारिक तौर पर मतदान के परिणाम सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन राजनयिक सूत्रों के जरिए वोटों की जानकारी सामने आई।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया में सुरक्षा परिषद पहले एक उम्मीदवार का चयन करती है, जिसे बाद में महासभा के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। परंपरा के अनुसार महासभा आमतौर पर सुरक्षा परिषद की सिफारिश को स्वीकार कर लेती है। उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और स्थायी सदस्यों की सहमति जांचने के लिए सुरक्षा परिषद में कई दौर के अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल आयोजित किए जाते हैं।

    इस प्रक्रिया में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे पांच स्थायी सदस्यों की भूमिका बेहद अहम होती है। किसी उम्मीदवार को अंतिम समर्थन हासिल करने के लिए यह जरूरी होता है कि स्थायी सदस्य उसके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करने की स्थिति में न हों। अंतिम दौर के मतदान में स्थायी सदस्यों के रुख को अलग-अलग रंगों वाले बैलेट के जरिए समझा जाता है।

    इस दौड़ में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी तीसरे स्थान पर रहे। अर्जेंटीना से आने वाले ग्रॉसी को दो नकारात्मक वोट मिले। उन्होंने यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र को लेकर रूस की आलोचना की थी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से अलग रुख भी अपनाया था। इसके अलावा चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट भी प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। उन्हें पांच नकारात्मक वोट मिले।

    सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सैल और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा भी इस दौड़ में शामिल हैं। एस्पिनोसा को केवल दो नकारात्मक वोट मिले, जबकि कई देशों ने उनके पक्ष में कोई स्पष्ट राय नहीं दी, जिससे उनके पास आगे समर्थन जुटाने का अवसर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेबेका ग्रिनस्पैन, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट और एस्पिनोसा को महिला महासचिव की मांग और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के मुद्दे से फायदा मिल सकता है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के करीब 80 वर्षों के इतिहास में अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है। इसके अलावा 1991 में जेवियर पेरेज दे कुएलार के कार्यकाल के बाद से लैटिन अमेरिका को इस शीर्ष पद का प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

    यूएन के पूर्व अवर महासचिव और युगांडा के पूर्व विदेश मंत्री ओलारा ओतुनु भी उम्मीदवारों में शामिल हैं, लेकिन शुरुआती पोल में उन्हें सबसे कम समर्थन मिला। आने वाले दौर के मतदान यह तय करेंगे कि कौन सा उम्मीदवार स्थायी सदस्यों की सहमति हासिल कर अंतिम दौड़ में आगे बढ़ता है।

  • भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग

    भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठनों का दावा है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के कई इलाकों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने अपनी ओर से कराई गई पानी की जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कहा कि जांचे गए करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए हैं।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान के अनुसार इस महीने 30 बस्तियों से 63 पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनका दावा है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों तक दूषित पेयजल पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ा तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के लगभग 90 प्रतिशत नमूने तथा कोलार डैम से आने वाले पानी के करीब 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में प्रभावित पाए गए।

    संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के निवासी लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में भी टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड परिसर का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

    वहीं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में भी पेयजल में मल मिलने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने निर्धारित समय में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका दावा है कि वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    हालांकि इस मामले में नगर निगम या संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में संगठनों के दावों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • जैकी भगनानी ने भांजी दिवियाना के जन्मदिन पर लिखा भावुक संदेश, बोले- जिंदगी के हर कदम पर हमेशा साथ खड़ा रहूंगा

    जैकी भगनानी ने भांजी दिवियाना के जन्मदिन पर लिखा भावुक संदेश, बोले- जिंदगी के हर कदम पर हमेशा साथ खड़ा रहूंगा


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता से निर्माता बने जैकी भगनानी ने अपनी भांजी दिवियाना के जन्मदिन के मौके पर एक भावुक और खास संदेश साझा किया है। जैकी ने सोशल मीडिया पर दिवियाना के साथ बिताए खूबसूरत पलों का वीडियो कोलाज पोस्ट करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि जीवन में दिवियाना जो भी कदम उठाएगी, वह हर समय उसके साथ खड़े रहेंगे और उसका हाथ थामे रहेंगे।

    जैकी भगनानी द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिवियाना के बचपन से लेकर अब तक के कई यादगार पल शामिल थे। तस्वीरों और छोटी-छोटी वीडियो क्लिप्स में दिवियाना को परिवार के साथ हंसते, खेलते और खुशहाल पलों को जीते हुए देखा गया। इस खास वीडियो के जरिए जैकी ने अपने और दिवियाना के बीच के मजबूत पारिवारिक रिश्ते को जाहिर किया।

    दिवियाना जैकी भगनानी की बहन दीपशिखा देशमुख की बेटी हैं। दीपशिखा देशमुख की शादी अभिनेता रितेश देशमुख के भाई धीरज देशमुख से हुई है। फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने वाली दिवियाना अक्सर पारिवारिक आयोजनों और खास मौकों पर नजर आती हैं। जैकी ने अपने संदेश के जरिए परिवार के बीच मौजूद प्यार और अपनापन दिखाया।

    अपने पोस्ट में जैकी ने दिवियाना को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि वह जीवन में जो भी रास्ता चुनेगी, वह हर परिस्थिति में उसका साथ देंगे। उन्होंने कहा कि उसकी खुशियों को मनाना और उसे एक बेहतर इंसान बनते देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है।

    जैकी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि दिवियाना को कभी अकेले आगे नहीं बढ़ना पड़ेगा, क्योंकि उसके मामा हमेशा उसके साथ मौजूद रहेंगे। उन्होंने अपने प्यार और आशीर्वाद के साथ दिवियाना के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जैकी का यह संदेश सोशल मीडिया पर परिवार और प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना।

    जैकी भगनानी फिल्म जगत में अभिनेता और निर्माता दोनों भूमिकाओं के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने साल 2009 में फिल्म ‘कल किसने देखा’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘फालतू’, ‘अजब गजब लव’, ‘रंगरेज’, ‘यंगिस्तान’ और ‘वेलकम टू कराची’ जैसी फिल्मों में नजर आए।

    अभिनय के अलावा जैकी ने निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपनी बहन दीपशिखा देशमुख के साथ मिलकर कई फिल्मों का निर्माण किया। साल 2016 में आई फिल्म ‘सरबजीत’ उनके प्रोडक्शन सफर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।

    अभिनेता के तौर पर जैकी भगनानी आखिरी बार साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘मित्रों’ में दिखाई दिए थे। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़े अन्य कामों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में भी वह फिल्म इंडस्ट्री में निर्माता के रूप में सक्रिय हैं और नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

    दिवियाना के जन्मदिन पर जैकी का यह संदेश परिवार के प्रति उनके लगाव और जिम्मेदारी को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस पोस्ट के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि जीवन में सफलता के साथ-साथ रिश्तों को मजबूत बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।

  • अमेरिका की नई रणनीति में भारत अहम केंद्र, चीन के सूचना अभियान का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया डिप्लोमेसी पर बढ़ेगा जोर

    अमेरिका की नई रणनीति में भारत अहम केंद्र, चीन के सूचना अभियान का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया डिप्लोमेसी पर बढ़ेगा जोर

    नई दिल्ली । अमेरिका ने चीन के बढ़ते सूचना प्रभाव और डिजिटल अभियानों का मुकाबला करने के लिए अपनी पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई रणनीति में भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन अब पारंपरिक मीडिया माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नागरिकों तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    अमेरिकी एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (यूएसएजीएम) का नेतृत्व करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नामित सारा रोजर्स ने सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी के सामने अपनी रणनीति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एशिया अमेरिका की प्राथमिकताओं में प्रमुख क्षेत्र होगा, क्योंकि चीन समेत कई देशों द्वारा चलाए जा रहे सूचना अभियानों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

    रोजर्स ने कहा कि अमेरिका को बदलते मीडिया इस्तेमाल के तरीकों के अनुसार अपनी अंतरराष्ट्रीय संचार नीति को आधुनिक बनाना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अब केवल रेडियो और टेलीविजन प्रसारण पर निर्भर रहने के बजाय सोशल मीडिया, छोटे वीडियो, पॉडकास्ट और डिजिटल कम्युनिटी के माध्यम से लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की जरूरत है।

    उन्होंने भारत और जापान जैसे देशों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों के बीच संवाद का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। इसी वजह से अमेरिका अपनी डिजिटल रणनीति के तहत इन क्षेत्रों में अधिक सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है।

    अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सूचना का क्षेत्र अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। चीन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि मजबूत करने और अपने विचारों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे में अमेरिका भी अपनी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेना चाहता है।

    रोजर्स ने कहा कि यूएसएजीएम की प्राथमिकताओं में एजेंसी को अधिक प्रभावी बनाना, नेतृत्व को मजबूत करना और उसकी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना शामिल होगा। इसके अलावा उन्होंने रिसर्च क्षमता को बेहतर करने पर भी जोर दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिकी संदेश कितने लोगों तक पहुंच रहे हैं और उनका प्रभाव कितना है।

    नई रणनीति के तहत अमेरिका उन देशों और क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहता है जहां स्वतंत्र जानकारी तक लोगों की पहुंच सीमित है। एशिया के अलावा मध्य पूर्व, ईरान, अफगानिस्तान और क्यूबा जैसे क्षेत्रों को भी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय प्रसारण रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत का महत्व अमेरिका के लिए केवल आर्थिक और रक्षा संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सूचना और डिजिटल प्रभाव के क्षेत्र में भी बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने के साथ ही डिजिटल संवाद और सार्वजनिक कूटनीति के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

    यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक सूचना व्यवस्था के क्षेत्र में भी बढ़ रही है। अमेरिका की नई रणनीति का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी पहुंच को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रभाव को बनाए रखना है।