Author: bharati

  • Year Ender 2025: ‘पंचायत 4’ से ‘द बै*ड्स ऑफ बॉलीवुड’ तक, इस साल चर्चा में रहीं ये वेब सीरीज

    Year Ender 2025: ‘पंचायत 4’ से ‘द बै*ड्स ऑफ बॉलीवुड’ तक, इस साल चर्चा में रहीं ये वेब सीरीज


    नई दिल्ली । भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर वेब सीरीज़ के लिए एक यादगार साल साबित हुआ। TVF कीपंचायत सीजन 4 से लेकरद बैड्स ऑफ बॉलीवुड औरखौफ जैसे बोल्ड और चर्चित टाइटल्स समेत इस साल कई वेब सीरीज का दबदबा रहा।पंचायत औरद फैमिली मैन जैसी फैन-फेवरेट फ्रेंचाइज़ी नए सीजन के साथ लौटीं और अपनी जबरदस्त लोकप्रियता पर खरी उतरीं।वहींब्लैक वारंट औरद बैड्स ऑफ बॉलीवुड जैसे नए और रिस्क लेने वाले शोज ने नई आवाजों और कहानियों को सामने रखा। क्राइम थ्रिलर और पॉलिटिकल ड्रामा से लेकर सादगी भरी कॉमेडी और रहस्यमयी कहानियों तक, 2025 ने भारतीय ओटीटी स्टोरीटेलिंग का स्तर और ऊंचा कर दिया।आइए नजर डालते हैं उन भारतीय ओटीटी सीरीज पर, जिन्होंने 2025 में इंटरनेट पर धूम मचाई और दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखा:

    1) TVF की पंचायत सीजन 4
    एक बार फिर भारतीय ओटीटी का दिल फुलेरा में धड़का।पंचायत सीजन 4 ने अपने सादे ह्यूमर, इमोशनल गहराई और जुड़ाव भरी कहानी के साथ दर्शकों का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया, मीम्स और फैन चर्चाओं पर इस शो का साफ़ दबदबा रहा, जिसने हर उम्र और हर इलाके के दर्शकों से TVF के खास रिश्ते को फिर साबित किया।

    2) पाताल लोक सीजन 2
    गहरी, पकड़ बनाने वाली और समाज से जुड़ीपाताल लोक सीजन 2 और भी बड़े दांव और गहरे किरदारों के साथ लौटी। इसके विषयों, अभिनय और राजनीतिक संकेतों को लेकर ऑनलाइन ज़ोरदार चर्चाएं हुईं।
    3) द फैमिली मैन सीजन 3
    साल की सबसे ज्यादा इंतजार की गई वापसी में से एक,द फैमिली मैन सीजन 3 ने एक्शन, ह्यूमर और इमोशन को बेहतरीन तरीके से मिलाया। इसकी रिलीज एक बड़े इंटरनेट इवेंट में बदल गई, जहां फैंस हर मोड़ और हर सीन पर चर्चा करते दिखे।

    4) द रॉयल्स
    चमक-दमक और हाई ड्रामा से भरी इस सीरीज ने बहुत जल्दी अपना दर्शक वर्ग बना लिया। बड़े पैमाने, दमदार परफॉर्मेंस और बिंज-वॉच करने लायक कहानी के चलते द रॉयल्स उन लोगों की पसंद बनी, जो एंटरटेनमेंट के साथ हल्का-फुल्का कंटेंट चाहते थे।

    5) ब्लैक वारंट
    एक सख्त और दमदार क्राइम ड्रामा, ब्लैक वारंट ने अपनी रॉ और सच्ची कहानी और मजबूत अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। धीरे-धीरे इसकी चर्चा बढ़ी और यह साल के सबसे ज्यादा बात किए जाने वाले नए शोज में शामिल हो गया।

    6) खौफ
    डरावना और बेचैन करने वाला खौफ हॉरर-थ्रिलर की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहा। इसकी रहस्यमयी कहानी और मजबूत पेशकश ने इसे सोशल मीडिया और जॉनर से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा बना दिया।
    7) स्पेशल ऑप्स सीजन 2
    जासूसी की हाई-स्टेक्स कहानी को आगे बढ़ाते हुए स्पेशल ऑप्स सीज़न 2 ने बड़े पैमाने, सस्पेंस और जबरदस्त परफॉर्मेंस के साथ फ्रेंचाइजी के फैंस को पूरी तरह जोड़े रखा।
    8) द बै*ड्स ऑफ बॉलीवुड
    बिना किसी झिझक के ग्लैमरस और मीम्स से भरी द बै*ड्स ऑफ बॉलीवुड साल की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली सीरीज़ में से एक बनी। ग्लैमर की दुनिया के पीछे की झलक और पॉप-कल्चर मोमेंट्स के चलते यह शो इंटरनेट पर छाया रहा और लोगों की गिल्टी-प्लेजर वॉचलिस्ट में शामिल हो गया।
  • शहबाज शरीफ के करीबी ने भारत को दी धमकी- 'हमारी मिसाइलें दूर नहीं, अल्हम्दुलिल्लाह बांग्लादेश…'

    शहबाज शरीफ के करीबी ने भारत को दी धमकी- 'हमारी मिसाइलें दूर नहीं, अल्हम्दुलिल्लाह बांग्लादेश…'


    नई दिल्ली । मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ना सिर्फ पिछड़ता जा रहा है बल्कि पूरी तरह से पाकिस्तान के चंगुल में फंसता नजर आ रहा है. इसका असर भी दिखने लगा है, क्योंकि पाकिस्तान अब बांग्लादेश की सुरक्षा की बातें करने लगा है, जबकि भारत ने ही बांग्लादेश को पाकिस्तान के अत्याचारों से छुटकारा दिलाया था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नेता कामरान सईद उस्मानी ने अब भारत को धमकी दी है. उस्मानी ने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश पर हमला किया तो पाकिस्तान पूरी ताकत से ढाका के साथ खड़ा होगा. इसके अलावा कामरान ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को लेकर भी बयान दिया. कामरान सईद उस्मानी ने पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश का झंडा लगाकर एक वीडियो जारी किया है.
    शहबाज की पार्टी के नेता ने भारत को दी गीदड़भभकी
    वीडियो में कामरान सईद उस्मानी को भारत को गीदड़भभकी देते हुए सुना जा सकता है. उन्होंने कहा कि आज मैं राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि उस शख्स के रूप में बात कर रहा हूं, जो बांग्लादेश की मिट्टी, तारीख, कुर्बानी और जुर्रत को सलाम पेश करता है. मैंने जब 2021 में ये कैंपेन शुरू की थी तो मेरे साथ कोई नहीं था. आज अल्हम्दुलिल्लाह बांग्लादेश और पाकिस्तान एक साथ खड़े हैं. आज मैं कोई सियासी बयान नहीं दूंगा, बात करूंगा उस्माना की. जो एक सोच था जो एक जुर्रतमंद आवाज थी. वो कहता था बांग्लादेश को किसी देश की कॉलोनी नहीं बनने दूंगा. मैं बांग्लादेश के अंदर किसी की दादागिरी कबूल नहीं करूंगा.

    उस्मान हादी का जिक्र कर क्या कहा

    उस्मानी ने कहा, ‘सबसे बड़ा मसला इस क्षेत्र के अंदर यह है कि जब कोई मुसलमान नौजवान उठता है और एक प्रभावी अवाज बनता है तो उसको दबा दिया जाता है. ये जो भारतीय राजनेता बैठे हैं वो अवाम को खून चूसने के लिए उन्हें कभी भी गुलामी से आजाद नहीं करना चाहते. चाहें वह बांग्लादेश का पानी बंद करने की सूरत में हो, चाहें वो फितना-ए-ख्वारिज के नाम से मुसलमान को मुसलमान से लड़ाने की सूरत में हो. मुसलमान अब उनकी इस साजिश को बड़े अच्छे तरीके से जान गया है. अब पाकिस्तान और बांग्लादेश का बच्चा-बच्चा उस्मान हादी है. उस्मान हादी को तो शहीद कर दिया, लेकिन उसकी सोच को शहीद नहीं कर सके.
    कामरान सईद ने आगे कहा कि आज मुक्कमल तौर पर भारत को बांग्लादेशी अवाम रिजेक्ट कर चुकी है. मैं अपने बांग्लादेशी भाई-बहनों को कहना चाहता हूं कि हम आपके साथ खड़े हैं. अगर कोई देश बांग्लादेश पर दबाव डालने की कोशिश करेगा या फिर बांग्लादेश पर हमले की कोशिश करेगा तो पाकिस्तान की अवाम आपके साथ खड़ी होगी. पाकिस्तानी फौज और हमारे मिसाइल आपसे दूर नहीं हैं. कामरान ने शेखी बघराते हुए कहा कि ऑपरेशन बुनयान अल मरसूस के जरिए आपको जिस कदर नाकों चने चबवाए थे, वो दोबारा कर देंगे.

  • तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा पर जेडीयू ने उठाए सवालकरीबी का जिक्र कर डीजीपी को भेजा पत्रकी ये मांग

    तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा पर जेडीयू ने उठाए सवालकरीबी का जिक्र कर डीजीपी को भेजा पत्रकी ये मांग

    नई दिल्‍ली । जनता दल यूनाइटेड के एमएलसी और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने बुधवार को बिहार के पुलिस महानिदेशक को एक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया है। नीरज कुमार ने पत्र में कहा कि बिहार विधानमंडल का सत्र चलने के दौरान यह जानकारी सामने आई कि तेजस्वी यादव विदेश गए हुए हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस यात्रा में यूपी के बलरामपुर निवासी हिस्ट्रीशीटर रमीज नेमत खान उनके साथ मौजूद है। इसके अलावादेवा गुप्ता के भी इस विदेश यात्रा में शामिल होने की संभावना जताई गई है। जेडीयू नेता ने डीजीपी से आग्रह किया है कि तेजस्वी यादव के साथ यात्रा कर रहे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाए और मामले को गंभीरता से लिया जाए।

    तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा पर जेडीयू का शक

    डीजीपी को पत्र लिखने वाले जेडीयू एमएलसी और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने मीडिया से बातचीत में अपनी आशंकाएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि उन्हें संदेह है कि तेजस्वी यादव अपनी हालिया विदेश यात्रा के दौरान रमीज नेमत खान को साथ ले गए हैं। नीरज कुमार का दावा है कि चुनाव परिणाम आने के बाद से तेजस्वी यादव सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य पहले रमीज नेमत खान पर गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। उनके अनुसाररमीज उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट का आरोपी है और उस पर आपराधिक गतिविधियों के आरोप हैं। इसके बावजूद उसके तेजस्वी यादव के साथ होने की चर्चा सामने आ रही है।

    नीरज कुमार ने कहा कि इस मामले में न तो तेजस्वी यादव और न ही आरजेडी की ओर से कोई स्पष्ट सफाई दी गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जानकारी मिली है कि 28 आपराधिक मामलों के आरोपी देवा गुप्ता जो मोतिहारी से आरजेडी का उम्मीदवार रह चुका हैउसके भी विदेश यात्रा में शामिल होने की संभावना है। जेडीयू नेता ने कहा कि जब रमीज नेमत खान के विदेश जाने की आशंका जताई जा रही हैतो देवा गुप्ता के जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से डीजीपी से अनुरोध किया गया है कि देवा गुप्ता की गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाए।

    नीरज कुमार का सवालआरजेडी ने अब तक कदम क्यों नहीं उठाया?
    नीरज कुमार ने आरजेडी की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि देवा गुप्ता फरार है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित हैतो पार्टी ने उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैंउन पर आरजेडी की ओर से कोई सख्ती नहीं दिखाई दे रही है। इसी वजह से यह आशंका गहराती है कि दोनों व्यक्ति तेजस्वी यादव के संपर्क में हो सकते हैं। नीरज कुमार ने आगे कहा कि यदि यह साबित होता है कि ये दोनों लोग तेजस्वी यादव के साथ हैंतो फिर कानून अपना काम करेगा और उस स्थिति में तेजस्वी यादव पर भी कार्रवाई की जाएगी।

    जेडीयू के आरोपों पर आरजेडी का जवाब

    जेडीयू द्वारा लगाए गए आरोपों और डीजीपी को लिखे गए पत्र पर आरजेडी ने कड़ा जवाब दिया है। पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि जेडीयू को दूसरों पर सवाल उठाने के बजाय अपनी पार्टी और सरकार की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जेडीयू इस डर में जी रही है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर उस पर दबाव बढ़ रहा है। मृत्युंजय तिवारी ने आरोप लगाया कि यह सब तेजस्वी यादव को लेकर फैली घबराहट का नतीजा है।
    उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य में अपराध पर नियंत्रण करने में सरकार नाकाम साबित हो रही हैतो उसे इस बात की चिंता क्यों है कि तेजस्वी यादव कहां हैं और किसके साथ हैं। देवा गुप्ता के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने चुनाव के दौरान अपना हलफनामा दाखिल किया थातो उस समय बिहार पुलिस सोई थी क्या? उन्होंने पूछा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान पुलिस और प्रशासन ने उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।

  • ये कैसा न्याय है कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने पर भड़के राहुल गांधी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता से आज कर सकते हैं मुलाकात

    ये कैसा न्याय है कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने पर भड़के राहुल गांधी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता से आज कर सकते हैं मुलाकात


    नई दिल्‍ली । उन्नाव रेप केस मामले में ट्रायल कोर्ट से पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 2019 में सुनाई गई उम्र कैद की सजा के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की एक बेंच ने सजा को निलंबित कर दिया है. इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी भड़क गए हैं. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी जताई है. खबर है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उन्नाव की पीड़िता से आज शाम 7 बजे मिल सकते हैं. मंगलवार को कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता उनकी मां और महिला अधिकार एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने पीड़िता उनकी मां और योगिता भायना को प्रदर्शन करने से रोकते हुए हटा दिया.

    राहुल ने बोले- लोकतंत्र में आवाज उठाना अधिकार है

    राहुल गांधी ने गैंगरेप पीड़िता को समर्थन देते हुए पूछा क्या एक गैंगरेप पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार उचित है? क्या उसकी गलती ये है कि वो न्याय के लिए अपनी आवाज उठाने की हिम्मत कर रही है? उसके अपराधी पूर्व BJP MLA को जमानत मिलना बेहद निराशाजनक और शर्मनाक है. खासकर तब जब पीड़िता को बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा हो और वो डर के साए में जी रही हो. बलात्कारियों को जमानत और पीड़िताओं के साथ अपराधियों सा व्यवहार ये कैसा न्याय है? हम सिर्फ एक मृत अर्थव्यवस्था नहीं ऐसी अमानवीय घटनाओं के साथ हम एक मृत समाज भी बनते जा रहे हैं. लोकतंत्र में असहमति की आवाज उठाना अधिकार है और उसे दबाना अपराध. पीड़िता को सम्मान सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए न कि बेबसी भय और अन्याय.

    पीड़िता का आरोप- 2027 चुनाव से पहले दी जमानत

    इंडिया गेट पर 2017 के उन्नाव गैंगरेप केस पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए सेंगर को जमानत दी गई है. 2017 के इस मामले ने तब विवाद पकड़ा था जब बिना नंबर प्लेट वाले एक ट्रक उस कार से टकरा गया था जिसमें पीड़िता जा रही थी.
    इस घटना में पीड़िता और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे. जबकि उसकी दो मौसियों की मौत हो गई थी. इस मामले में सेंगर पर अलग से एक मामला दर्ज है. इस मामले में भी 2021 को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त करते हुए दुर्घटना को सबूतों के आभाव में साजिश मानने से इनकार कर दिया था.

  • ऐपल का 2026 मेगा प्लान: 50वें जन्मदिन पर 20 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स, फोल्डेबल आईफोन से Apple Glasses तक रिपोर्ट

    ऐपल का 2026 मेगा प्लान: 50वें जन्मदिन पर 20 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स, फोल्डेबल आईफोन से Apple Glasses तक रिपोर्ट

    नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले हिंदुस्तानी भाऊ उर्फ विकास पाठक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अभिनेत्री जया बच्चन के पपराजी को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हिंदुस्तानी भाऊ ने जया बच्चन की टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए पपराजी से अपील की है कि वे उन जगहों पर कवरेज न करें, जहां उन्हें सम्मान नहीं दिया जाता।दरअसल, हाल ही में जया बच्चन ने वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के चर्चित शो वी द वुमन में पपराजी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि मीडिया से उनके संबंध अच्छे हैं, लेकिन पपराजी से नहीं। जया बच्चन ने पपराजी के व्यवहार और पहनावे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सिर्फ मोबाइल फोन होने का मतलब यह नहीं कि कोई भी किसी की तस्वीर खींच सकता है या मनचाहे कमेंट कर सकता है।जया बच्चन के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान को निजता से जोड़कर सही ठहराया, तो वहीं कई यूजर्स ने इसे पपराजी का अपमान बताया। इसी बीच हिंदुस्तानी भाऊ ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्तानी भाऊ ने जया बच्चन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पपराजी की वजह से ही कई कलाकार और सार्वजनिक हस्तियां चर्चा में बनी रहती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पपराजी ही पहचान दिलाते हैं, तो फिर उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है।हिंदुस्तानी भाऊ ने कहा,उन्होंने कपड़ों पर कमेंट किया। अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन खुद सस्ती साड़ी पहनती हैं और दूसरों को गरीब बोलती हैं। ऐसे लोगों के पीछे क्यों जाते हो, जहां आपकी इज्जत नहीं होती।

    उन्होंने पपराजी से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि आत्मसम्मान सबसे जरूरी है और जहां सम्मान न मिले, वहां जाना ही नहीं चाहिए। भाऊ ने कहा कि पपराजी की मेहनत से ही कई सेलिब्रिटीज जनता के बीच बने रहते हैं।उन्होंने आगे कहा,आप लोगों की वजह से ही ये लोग दिखते हैं। अगर आप इन्हें दिखाना बंद कर दो, तो कोई इन्हें जानता भी नहीं। जहां इज्जत न मिले, वहां मत जाओ। आप लोग ही इन्हें बनाते हो।हिंदुस्तानी भाऊ ने यह भी कहा कि अगर पपराजी एकजुट होकर ऐसे लोगों को कवरेज देना बंद कर दें, तो उन्हें अपनी गलती का एहसास जरूर होगा। उन्होंने इसे सिर्फ पेशे का नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का सवाल बताया।

    दूसरी ओर, जया बच्चन के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर पहले से ही तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि सेलिब्रिटीज को भी निजता का अधिकार है, जबकि कई लोगों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वालों को आलोचना और कैमरों का सामना करना पड़ता है।जया बच्चन ने शो में कहा था,पपराजी को लगता है कि मोबाइल कैमरा होने से वे किसी के घर में चूहे की तरह घुस सकते हैं। वे जैसे कपड़े पहनते हैं और जैसे कमेंट करते हैं, वह मुझे बिल्कुल पसंद नहीं।इस पूरे विवाद के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि सेलिब्रिटीज और पपराजी के बीच रिश्तों की सीमाएं क्या होनी चाहिए और सम्मान दोनों पक्षों से कितना जरूरी है। फिलहाल, हिंदुस्तानी भाऊ का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस मुद्दे पर खुलकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

  • दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेशसंजय कपूर एस्टेट मामले का निपटारायाचिका पर निर्णय सुरक्षित

    दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेशसंजय कपूर एस्टेट मामले का निपटारायाचिका पर निर्णय सुरक्षित


    नई दिल्‍ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने उद्योगपति संजय कपूर की निजी संपत्ति को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद में अहम मोड़ पर सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने करिश्मा कपूर से हुए विवाह से जन्मे बच्चों की ओर से दायर अंतरिम रोक इंटरिम इंजंक्शन की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है और साफ कर दिया है कि अब इस मामले में कोई नई फाइलिंग स्वीकार नहीं की जाएगी। जस्टिस ज्योति सिंह ने स्पष्ट कहा कि मौखिक बहस पूरी हो चुकी है और दोनों पक्षों की लिखित दलीलों को रिकॉर्ड पर ले लिया गया है। ऐसे में आदेश सुनाए जाने से पहले किसी भी तरह की अतिरिक्त अर्जी या दस्तावेज पर विचार नहीं होगा। यह मामला बीते कई महीनों से अदालत में चल रहा था और संजय कपूर की करोड़ों की संपत्ति को लेकर उनके परिवार के बीच गहरे मतभेद सामने आए हैं।

    वसीयत को लेकर आरोप-प्रत्यारोपबच्चों ने मांगी संपत्ति पर रोक

    संजय कपूर की मौजूदा पत्नी और उनकी विधवा प्रिया सचदेव कपूर इस विवाद के केंद्र में हैं। करिश्मा कपूर से संजय के दो बच्चे समायरा कपूर और कियान राज कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि प्रिया सचदेव ने संजय कपूर की वसीयत में कथित तौर पर जालसाजी की है। बच्चों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत से मांग की कि जब तक वसीयत की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं हो जातातब तक प्रिया को संजय कपूर की निजी संपत्ति से किसी भी तरह का लेन-देन करने से रोका जाए। दूसरी ओरप्रिया सचदेव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि न तो किसी तरह की संपत्ति विदेश भेजी गई और न ही कोई जानकारी छिपाई गई। उन्होंने यह भी चुनौती दी कि संजय कपूर की सालाना आय 60 करोड़ रुपये होने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।

    संजय कपूर की मां ने उठाए सवाल

    इस मामले में एक और अहम पक्ष संजय कपूर की मां रानी कपूर का है। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वैभव गग्गर ने अदालत में तर्क दिया कि प्रिया सचदेव द्वारा बताई गई बैंक बैलेंस की राशि महज 1.7 करोड़ रुपये होना संदेह पैदा करता हैजबकि संजय कपूर की बताई गई आमदनी कहीं अधिक थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह मानना मुश्किल है कि संजय कपूर अपनी पूरी निजी संपत्ति सिर्फ प्रिया सचदेव के नाम कर दें और अपने बच्चों या परिवार के अन्य सदस्यों को कुछ भी न दें। इन दलीलों के साथ रानी कपूर ने भी वसीयत की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए।

    संपत्ति विवाद पर टिकी निगाहें

    दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम रोक की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब सबकी निगाहें अदालत के आदेश पर टिकी हैं। यह फैसला तय करेगा कि संजय कपूर की संपत्ति को लेकर आगे की कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाएगी। गौरतलब है कि संजय कपूर देश की प्रमुख ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनी सोना कॉमस्टार के चेयरमैन थे। जून महीने में लंदन में पोलो खेलते वक्त उनका निधन हो गया था। संजय कपूर की शादी करिश्मा कपूर से वर्ष 2003 में हुई थीजो 2016 में तलाक के साथ खत्म हुई। इसके बाद उन्होंने 2017 में प्रिया सचदेव से विवाह किया। अब उनकी मौत के बाद संपत्ति को लेकर परिवार के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अदालत के फैसले का इंतजार कर रहा है।

  • दिसंबर के अंत तक खत्म होंगी बड़ी फाइनैंशल डेडलाइन, NPS, ITR और PAN-आधार से जुड़े जरूरी काम निपटाने की आखिरी चेतावनी

    दिसंबर के अंत तक खत्म होंगी बड़ी फाइनैंशल डेडलाइन, NPS, ITR और PAN-आधार से जुड़े जरूरी काम निपटाने की आखिरी चेतावनी


    नई दिल्ली: साल 2025 का दिसंबर महीना अब अपने अंतिम चरण में है और इसके साथ ही कई अहम फाइनैंशल डेडलाइन भी खत्म होने वाली हैं। अगर आपने अब तक नेशनल पेंशन सिस्टमNPS, इनकम टैक्स रिटर्नITR या पैन-आधार लिंकिंग से जुड़े जरूरी काम पूरे नहीं किए हैं, तो अब सतर्क हो जाना जरूरी है। टाइम्स ऑफ इंडियाTOI की रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसंबर तक टैक्स रिटर्न भरने और पैन-आधार लिंक करने की अंतिम तारीख है, जबकि NPS निवेशकों के लिए 25 दिसंबर बेहद अहम दिन माना जा रहा है।

    NPS निवेशकों के लिए अलर्ट: 25 दिसंबर अहम

    पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीP FRDA ने हाल ही में NPS से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। PFRDA ने NPS की ‘स्कीम A’ को बंद कर इसे अन्य स्कीमों में मर्ज करने का निर्णय लिया है। दरअसल, स्कीम A का कॉर्पस काफी छोटा था और इसमें निवेश के विकल्प भी सीमित थे। इस स्कीम में REITs, InvITs, AIFs और स्ट्रक्चर्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे वैकल्पिक निवेश शामिल थे।अब इस स्कीम को स्कीम Cकॉरपोरेट डेट और स्कीम Eइक्विटी में मर्ज किया जा रहा है। PFRDA का कहना है कि इससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न और कम जोखिम का फायदा मिलेगा। हालांकि, निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे 25 दिसंबर तक अपनी पसंद के अनुसार पोर्टफोलियो में बदलाव कर लें। अगर कोई निवेशक इस तारीख तक कोई कदम नहीं उठाता है, तो उसका पैसा अपने आप दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

    ITR अलर्ट: 31 दिसंबर आखिरी मौका

    असेसमेंट ईयर 2025-26वित्त वर्ष 2024-25 के लिए देर से भरा जाने वाला या रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर है। यह तारीख सिर्फ एक डेडलाइन नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स के लिए आखिरी चेतावनी मानी जा रही है। अगर आपने अब तक ITR नहीं भरा है या उसमें कोई गलती रह गई है, तो इसे सुधारने का यह अंतिम अवसर है।अगर 31 दिसंबर तक रिटर्न दाखिल नहीं किया गया, तो टैक्सपेयर्स को लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है। इसके अलावा, बिजनेस या शेयर बाजार में हुए नुकसान को अगले साल के मुनाफे से समायोजित करने Carry Forward की सुविधा भी खत्म हो जाएगी। इसके बाद केवल ITR-U यानी अपडेटेड रिटर्न भरने का विकल्प बचेगा, जिसमें पेनल्टी टैक्स देना होगा और पुराने घाटे का दावा नहीं किया जा सकेगा।

    PAN-आधार लिंकिंग की भी डेडलाइन

    31 दिसंबर को पैन-आधार लिंकिंग की एक और महत्वपूर्ण डेडलाइन खत्म हो रही है। यह डेडलाइन उन पैन कार्ड धारकों के लिए है, जिन्होंने पैन बनवाते समय आधार नंबर की जगह ‘आधार एनरोलमेंट आईडी’ का इस्तेमाल किया था। अगर तय समय तक लिंकिंग नहीं की गई, तो पैन कार्ड अमान्य हो सकता है।ऐसी स्थिति में न तो टैक्स रिटर्न दाखिल किया जा सकेगा और न ही निवेश या KYC से जुड़े काम पूरे होंगे। साथ ही, इनकम पर ज्यादा TDS कट सकता है और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे वित्तीय उत्पादों के आवेदन भी खारिज हो सकते हैं।दिसंबर के अंतिम दिनों में फाइनैंशल मामलों को टालना भारी पड़ सकता है। NPS निवेश, टैक्स रिटर्न और पैन-आधार लिंकिंग से जुड़े जरूरी काम समय रहते पूरे करना ही समझदारी होगी, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

  • क्रिसमस 2025 क्रिसमस पर मोजे में ही क्यों मिलते हैं गिफ्ट जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

    क्रिसमस 2025 क्रिसमस पर मोजे में ही क्यों मिलते हैं गिफ्ट जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी


    नई दिल्‍ली । क्रिसमस की परंपराएं 25 दिसंबर यानी क्रिसमस का त्योहार अब बस आने ही वाला है. इस दिन को लेकर बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है. क्रिसमस की सुबह जब बच्चे सोकर उठते हैं तो उनकी नजरें सबसे पहले अपने बिस्तर के पास या क्रिसमस ट्री पर टंगे मोजों पर जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सांता क्लॉज उपहार देने के लिए मोजों का ही चुनाव क्यों करते हैं इसके पीछे एक बेहद भावुक और दिलचस्प पौराणिक कथा छिपी है. आइए जानते हैं आखिर मोजे में गिफ्ट देने की यह परंपरा कैसे शुरू हुई.
    कौन थे सेंट निकोलस
    क्रिसमस पर मोज़े में गिफ्ट मिलने की कहानी सेंट निकोलस से जुड़ी मानी जाती है. चौथी शताब्दी में तुर्की के रहने वाले सेंट निकोलस एक बेहद दयालु व्यक्ति थे. वे अपनी संपत्ति का उपयोग जरूरतमंदों और गरीब बच्चों की मदद के लिए करते थे. उन्हें ही आज हम सांता क्लॉज के नाम से जानते हैं. मान्यता है कि वे रात के अंधेरे में चुपके से आकर लोगों की मदद करते थे ताकि किसी को पता न चले.
    मोजे और सोने के सिक्कों की वो जादुई रात
    पौराणिक कथा के अनुसार एक गांव में एक बहुत ही गरीब व्यक्ति रहता था जिसकी तीन बेटियां थीं. गरीबी के कारण उस पिता के पास बेटियों की शादी के लिए दहेज देने के पैसे नहीं थे. वह बहुत चिंतित था कि उसकी बेटियों का भविष्य क्या होगा. जब सेंट निकोलस को इस परिवार की लाचारी के बारे में पता चला तो उन्होंने मदद करने का फैसला किया. हालांकि वे अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते थे.

    एक रात निकोलस उस व्यक्ति के घर पहुंचे और चिमनी के जरिए सोने के सिक्कों की तीन थैलियां नीचे फेंकी. उस समय परिवार के सदस्यों ने अपने मोजे धोकर सूखने के लिए चिमनी के पास ही टांग रखे थे. ऊपर से गिराए गए सोने के सिक्के सीधे उन मोजों के अंदर जा गिरे. अगली सुबह जब बेटियों ने अपने मोजे देखे तो वे सोने के सिक्कों से भरे थे. उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन पैसों से तीनों की शादी धूमधाम से हो गई.


    कैसे बनी यह एक वैश्विक परंपरा
    इस घटना के बाद से ही दुनिया भर में यह मान्यता बन गई कि सांता क्लॉज रात में आएंगे और चिमनी के रास्ते बच्चों के मोजों में उपहार छोड़ जाएंगे. आज भी बच्चे क्रिसमस की पूर्व संध्या पर इस उम्मीद में रंग-बिरंगे मोजे टांगते हैं कि सुबह उनमें कैंडी चॉकलेट या उनके मनपसंद खिलौने मिलेंगे.
    आज के दौर में क्रिसमस स्टॉकिंग्स
    समय के साथ यह परंपरा एक फैशन और सजावट का हिस्सा बन गई है. अब बाजारों में खास तौर पर क्रिसमस स्टॉकिंग्स मिलते हैं जिन्हें लोग अपने घरों में सजाते हैं. भले ही अब लोग चिमनी का इस्तेमाल कम करते हों लेकिन बिस्तर के पास या क्रिसमस ट्री पर मोजे टांगने का क्रेज आज भी बरकरार है.

  • शराब के लिए युवक ने कुत्ते को मारकर खिलाया, 'खरगोश' बताकर ग्रामीणों को बेचा मांस..

    शराब के लिए युवक ने कुत्ते को मारकर खिलाया, 'खरगोश' बताकर ग्रामीणों को बेचा मांस..


    नई दिल्ली। बिहार के मोतिहारी जिले के मधुबन प्रखंड से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ शराब की लत पूरी करने के लिए एक युवक ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए एक कुत्ते की हत्या कर दी और उसका मांस ग्रामीणों को ‘खरगोश का मांस’ बताकर बेच दिया। इस जहरीले और अखाद्य मांस के सेवन से गांव के करीब 15 लोगों की तबीयत बिगड़ गई है।

    शराब के लिए रची खौफनाक साजिश मामला गरहिया बाजार थाना क्षेत्र के गरहिया गांव का है। आरोपी की पहचान मंगरु सहनी के रूप में हुई है, जो शराब का आदी बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शराब खरीदने के लिए पैसे न होने पर मंगरु ने एक कुत्ते को मारा और उसके मांस को टुकड़ों में काटकर गांव में बेचने निकला। कड़ाके की ठंड के बीच उसने ग्रामीणों को झांसा दिया कि यह खरगोश का मांस है और इसे 1000 रुपये प्रति किलो की दर से बेच दिया।

    अगली सुबह खुद ही किया खुलासा घटना का खुलासा तब हुआ जब मांस खाने के कुछ घंटों बाद ग्रामीणों को उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत होने लगी। इनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। हद तो तब हो गई जब अगली सुबह आरोपी मंगरु ने नशे की हालत में खुद ही गांव में घूम-घूमकर यह ऐलान करना शुरू कर दिया कि उसने सबको खरगोश नहीं बल्कि कुत्ते का मांस खिलाया है।

    पुलिस की कार्रवाई और फरार आरोपी आरोपी की बात सुनकर गांव में हड़कंप मच गया। जब ग्रामीणों ने पास के एक बाग की तलाशी ली, तो वहां कुत्ते का कटा हुआ सिर और पैर बरामद हुए, जिससे सच्चाई की पुष्टि हो गई। ग्रामीणों के विरोध करने पर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गया।

    पीड़ित परिवारों ने स्थानीय थाने में लिखित आवेदन देकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। गरहिया थानाध्यक्ष आदित्य कुमार ने बताया कि मामला अत्यंत गंभीर और संदिग्ध है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी सूचना दी गई है ताकि बीमार ग्रामीणों का उचित उपचार हो सके।

  • शिवपाल यादव ने बीजेपी के नाराज ब्राह्मण विधायकों को सपा में आने का दिया न्योता, बोले- यहां पूरा सम्मान मिलेगा

    शिवपाल यादव ने बीजेपी के नाराज ब्राह्मण विधायकों को सपा में आने का दिया न्योता, बोले- यहां पूरा सम्मान मिलेगा


    नई दिल्‍ली। राजधानी लखनऊ में मंगलवार रात बीजेपी के 40 से अधिक ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने सियासी माहौल गर्म कर दिया। यह बैठक औपचारिक सहभोज के बहाने आयोजित की गई थी, लेकिन इसे पार्टी में असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि विधायकों को अगर उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा है, तो उन्हें सपा में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह बैठक उनके अनुसार बीजेपी के भीतर असंतोष को दर्शाती है और यही वजह है कि नाराज विधायकों के लिए सपा एक विकल्प हो सकती है।
    नाराज ब्राह्मण विधायक सपा में आएं, उन्हें मिलेगा पूरा सम्मान 
    शिवपाल यादव ने कहा कि बीजेपी में जातिगत भेदभाव मौजूद है। उन्होंने नाराज ब्राह्मण विधायकों को सपा में आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि हमारी पार्टी में उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। शिवपाल ने आगे कहा कि बीजेपी में असंतोष और नाराजगी के कारण अलग-अलग समूह बैठक कर रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी सभी को समान रूप से मान-सम्मान देती है। सपा के विधायक अतुल प्रधान ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए बताया कि यह केवल ब्राह्मण समुदाय तक सीमित नहीं है। विभिन्न समुदायों के लोग भी सरकार से असंतुष्ट हैं और नाराजगी व्यक्त करने के लिए एकजुट हो रहे हैं। उनका मानना है कि ब्राह्मण विधायकों की बैठक बीजेपी को चुनौती देने और उन्हें हराने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल

    मंगलवार रात लखनऊ में कुशीनगर के बीजेपी विधायक पीएन पाठक के आवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक हुई जिसे सहभोज के बहाने आयोजित किया गया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में अधिकारियों की मनमानी और ब्राह्मण समाज की अनदेखी को लेकर असंतोष जताया गया। वहीं, इस बैठक को मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और सत्ता संतुलन को लेकर सियासी चर्चा को और तेज कर सकती है।