दिल्ली हाट
जर्मन क्रिसमस मार्केट
इको-फ्रेंडली क्रिसमस मार्केट
साकेत मॉल
कनॉट प्लेस

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‘जनकल्याणकारी दिवस’ के कार्यक्रम का आयोजन
चुनावों के लिए तैयारी पर जोर
वोटर लिस्ट और मतगणना पर ध्यान
पदाधिकारियों का आभार

ANPR व्यवस्था और मैन्युअल जांच में अंतर
एसोसिएशन की मांग
PUC प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

दरअसल, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता सचिन अहीर ने गुरुवार 18 दिसंबर को कहा कि एनसीपी शरदचंद्र पवार को साफ कह दिया गया है कि अगर वे अजित पवार की एनसीपी के साथ नगर निकाय चुनाव में गठबंधन करती है तो हम उससे गठबंधन तोड़ देंगे.
सचिन अहीर ने कहा कि शिवसेना यूबीटी पुणे नगर निगम चुनावों के लिए गठबंधन के वास्ते एनसीपी एसपी से बातचीत कर रही है. अहीर ने बताया हमने एनसीपी के साथ गठबंधन करने को लेकर अपना स्टैंड शरद पवार की पार्टी के सामने रख दिया है

बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस रेवती पी. मोहिते डेरे को मेघालय हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश मेघालय हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित ट्रांसफर के मद्देनजर की गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के ही एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। झारखंड हाईकोर्ट में यह पद 8 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।
इसके अलावा केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक को सिक्किम हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है जबकि उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन को केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। यह ट्रांसफर केरल हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद प्रभावी होगा।

लेकिन भारत ने इस चुनौती का सामना बड़े ही समझदारी से किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को मजबूत करते हुए मुक्त व्यापार समझौतों का सहारा लिया जिससे न केवल निर्यात में वृद्धि हुई बल्कि कई देशों के साथ संबंध भी मजबूत हुए। नतीजतन नवंबर 2025 में भारत के कुल निर्यात में 19.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अमेरिका को निर्यात में 22% से ज्यादा उछाल आया जो एक बड़ा आश्चर्य था।
भारत ने एफटीए पर काम तेज किया
एफटीए भारत की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा
अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियां
भारत की एफटीए नीति से बढ़ा भरोसा
सरकार का रुख और भविष्य की दिशा
भारत और अमेरिका के रिश्ते
कई देशों से हाथ मिलाने का कारण


ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज लगभग 100 सालों से खेली जा रही है और पिछले कुछ दशकों से इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। पनेसर के अनुसार इंग्लैंड की मौजूदा टीम भी उस चुनौती से जूझ रही है। वर्तमान में एशेज सीरीज के तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड की टीम 86 रनों से पीछे है और सीरीज के हारने का खतरा तीसरे टेस्ट में ही मंडरा रहा है।
पनेसर ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा ऑस्ट्रेलिया में जीतना बहुत कठिन है। इंग्लैंड के लिए यह शायद हर 20 साल में एक बार होता है। उन्होंने इंग्लैंड के पिछले एशेज विजेता अभियान की भी चर्चा की जिसमें 2010-11 की एशेज सीरीज इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में जीत हासिल की थी। पनेसर ने उस सीरीज में अपनी भागीदारी का अनुभव भी साझा किया और बताया कि उस समय इंग्लैंड की टीम को वार्म-अप मैच खेलने का अवसर मिला था जिससे उन्हें परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में मदद मिली थी।
पनेसर ने आगे कहा ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच खेलना एक अलग स्तर की चुनौती है। इंग्लैंड की टीम को अब समझना होगा कि यहाँ की तेज और बाउंसी पिचों पर खेलने के लिए विशेष रणनीति की जरूरत होती है। इंग्लैंड की टीम के आक्रामक खेल को लेकर भी पनेसर ने अपनी राय व्यक्त की और कहा कि इस तरह की पिचों पर आक्रामक खेल अधिक मुश्किल हो जाता है। इंग्लैंड के बल्लेबाज जब शुरुआत में ही आक्रामक हो जाते हैं तो वह खुद को परेशानी में डाल लेते हैं पनेसर ने कहा।
उनके मुताबिक इंग्लैंड की टीम को अपनी गलतियों से सीखने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया जैसी कठिन परिस्थितियों में वे सफल हो सकें। पनेसर ने यह भी बताया कि हालात में ढलने के लिए इंग्लैंड को अपनी तैयारी को और बेहतर बनाना होगा।
पनेसर ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने की कठिनाई को ओलंपिक गोल्ड जीतने से भी अधिक चुनौतीपूर्ण करार देते हुए कहा यह लगभग तीन या चार ओलंपिक खेलों में मुकाबला करने और फिर अंत में गोल्ड जीतने जैसा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंग्लैंड ने शायद इसे थोड़ा कम आंका है लेकिन उम्मीद है कि उन्होंने अपनी गलतियों से सीख लिया होगा और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब साउथ अफ्रीका से भारत की टेस्ट सीरीज में 0-2 से हार के बाद गौतम गंभीर की कोचिंग रणनीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर उनकी रणनीति जिसमें उन्होंने लगातार खिलाड़ियों को रोटेट किया और कामचलाऊ खिलाड़ियों पर निर्भर रहने की कोशिश की को लेकर आलोचनाएं हो रही हैं। कपिल देव ने इस मुद्दे पर और भी खुलकर बात करते हुए कहा आज के दौर में कोच वह नहीं होता जिसे आप स्कूल और कॉलेज में सीखते थे बल्कि यह एक प्रकार का प्रबंधन कार्य है। आपको खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनके मनोबल को बढ़ाने की भूमिका निभानी होती है।
कपिल ने यह भी कहा कि यदि सुनील गावस्कर आज के दौर में खेल रहे होते तो वह टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज होते। उनका मानना था कि जिन खिलाड़ियों का डिफेंस मजबूत होता है वे आसानी से आक्रामक खेल सकते हैं क्योंकि उनके पास अधिक समय होता है। इस टिप्पणी में कपिल ने क्रिकेट के आधुनिक रूपों जैसे टी20 और टी10 के बारे में भी अपनी राय दी और यह बताया कि वे इन सभी प्रारूपों में रुचि रखते हैं।
कपिल देव की यह टिप्पणी भारतीय क्रिकेट में नई बहस का कारण बन सकती है क्योंकि गंभीर की कोचिंग शैली और उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने विरोध जताया है। वहीं मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान ने भी क्रिकेट के इस नए युग को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने हाल ही में भारत के स्वदेश में हुए महिला विश्व कप जीतने के बारे में याद किया और बताया कि कैसे इंडिया नाम के साथ ट्रॉफी हासिल करना उनके लिए एक खास अनुभव था।
गौतम गंभीर की कोचिंग को लेकर चल रही बहस को लेकर कपिल देव के बयान ने अब इसे और भी गंभीर बना दिया है। कई क्रिकेट विशेषज्ञ अब इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं कि क्या गंभीर को आगे चलकर टीम का मुख्य कोच बनने की भूमिका निभानी चाहिए या फिर उनके लिए यह और भी बेहतर होगा कि वे किसी अन्य भूमिका में खेल जगत की सेवा करें।

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